एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने अपने दो दिन के झारखंड प्रवास के दौरान रनिया और बालूमाथ में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। रांची पहुंचने पर उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के प्रांत कार्यालय किशोरगंज रांची में स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।जिसमें महानगर में निवास करने वाले क्षेत्र, प्रांत, विभाग एवं महानगर के दायित्वान कार्यकर्ता उपस्थित हुए। उन्होंने बैठक में उपस्थित आयाम प्रमुखों से उनके माध्यम से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। प्रांत के विभिन्न जिलों में सेवा कार्य बढ़े इस पर उन्होंने विशेष जोर दिया।साथ ही महानगरों में सुचारू रूप से संस्कारशालाएं संचालित करने की ओर कार्यकर्ताओं को ध्यान देने का निर्देश दिया। झारखंड के विभिन्न जिलों में हो रहे धर्मांतरण पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि कार्यकर्ता पूरी शक्ति से इसे रोकने तथा घर वापसी के कार्य में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।बैठक में क्षेत्र मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, क्षेत्र धर्माचार्य संपर्क प्रमुख वीरेंद्र विमल, प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, धर्माचार्य संपर्क प्रांत प्रमुख युगल किशोर प्रसाद, प्रांत कोषाध्यक्ष मदनलाल बगड़िया, सहकोषाध्यक्ष शिव शंकर साबू, प्रांत मातृशक्ति संयोजिका दीपा रानी कुंज, सहसंयोजिका अनिमा पांडे, दुर्गावाहिनी प्रांत संयोजिका कीर्ति गौरव, प्रांत विमर्श सहप्रमुख कौशल सिन्हा, प्रांत कार्य समिति सदस्य अमरेंद्र विष्णुपुरी, प्रचार प्रसार प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन, सामाजिक समरसता प्रांत सहप्रमुख दीपक कुमार महतो, कमल अग्रवाल, विद्यार्थी प्रांतप्रमुख अमर प्रसाद, रांची विभाग मंत्री रवि शंकर राय, महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, मंत्री विश्वरंजन कुमार, सहमंत्री राजेशअग्रवाल, नवीन पांडे, योगेश खेडवाल, अनिल तिवारी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। कवि सम्मेलन आयोजन समिति की बैठक आज दिनांक 20 फरवरी 2026 स्थानीय अग्रसेन भवन के कार्यालय में आहुत हुई। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष पवन पोद्दार ने करते हुए आए हुए सभी पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ सदस्य एवं सदस्यगणों का स्वागत एवं अभिनंदन किया, तत्पश्चात बैठक की कार्रवाई प्रारंभ हुई। समिति के सचिव अंजय सरावगी ने गत बैठक की कार्यवाही पढ़कर सुनाई, जिसे सर्वसमिति से संपुष्टि की गयी। कवि सम्मेलन आयोजन समिति के संयोजक पवन शर्मा ने बताया कि इस वर्ष 1 मार्च 2026 को कवि सम्मेलन का आयोजन स्थानीय मारवाड़ी भवन परिसर में किया जायेगा, जिसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के नामी गिरामी कवि कवियत्री भाग लेंगे। समिति के प्रवक्ता सह व कोषाध्यक्ष मनोज बजाज ने बताया कि वीर रस, हास्य रस और श्रृंगार रस के क्रमश: सुविख्यात सुनील जोगी (दिल्ली), ख्याली शरण (राजस्थान), डॉ आदित्य जैन (कोटा), डॉ विष्णु सक्सेना (यू पी), श्रद्धा शौर्य (नागपुर) पार्थ नवीन (प्रतापगढ़) के कवि कवियों के नामों का चयन एवं कवि सम्मेलन आयोजन के लिए आरक्षित किया गया है। विदित हो कि रांची में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन आयोजन संपूर्ण झारखंड में अपनी एक पहचान बनायी हुई है, जिसमें विशेष रूप से युवा वर्ग, महिला वर्ग और वरिष्ठ नागरिक जन शामिल होते हैं, यह आयोजन पूर्णतया निशुल्क रहता है। सुरक्षा के मद्देनजर विशेष व्यवस्था रहती है। आयोजन समिति के संयोजक पवन शर्मा ने विस्तार से बताया की आयोजन हेतु विभिन्न उप समिति का गठन किया है, जो आयोजन को भव्यता प्रदान कर रहे हैं। जिसमें स्वागत सत्कार समिति, मंच एवं सभागार समिति, अर्थ संग्रह, प्रशासनिक कार्य, प्रेस मीडिया प्रवक्ता, सुरक्षा व्यवस्था, जलपान भोजन व्यवस्था बनायी गयी है। मौके पर पूर्व अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, ललित पोद्दार, अशोक नारसरिया, विनोद जैन, पवन पोद्दार, अंजय सरावगी, मनोज बजाज, पवन शर्मा, अनिल अग्रवाल, किशोर मंत्री, कमल जैन, हरिशंकर कनोडिया, प्रकाश धेलिया, निर्भय शंकर हरीत, अनूप अग्रवाल, रतन मोर, राजेश भारतीय, पुनीत पोद्दार, पुनीत अग्रवाल मुख्य रूप से सदस्य एवं सक्रिय है। उक्त जानकारी कोषाध्यक्ष सह मीडिया प्रवक्ता मनोज बजाज (9031101240) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। 21 फरवरी 2026 को श्री योग वेदांत सेवा समिति के तत्वावधान में झारखंड की राजधानी रांची में पूज्य संत आसाराम बापू के साधक शिष्यों की साधना किस तरह बढ़े उसके निमित्त शिव मंदिर, महावीर मंदिर धर्मशाला डोरंडा (राजेंद्र चौक के समीप) रांची में दिनांक 22 फरवरी 2026 को प्रात: 11 बजे से भव्य माला पूजन एवं ऋषि प्रसाद सेवा साधना सम्मेलन का भव्य आयोजन होने जा रहा। है। जिसमें सेवा साधना चर्चा, श्री आशारामायण का पाठ, उसके पश्चात संत और समाज के बीच लोक कल्याण की भावना से सेतु बनने वाली धार्मिक पत्रिका ऋषि प्रसाद पर विस्तृत चर्चा एवं इसकी सेवा देने वाले सभी सेवादारों को सम्मान दिया जायेगा। जिस घर में ऋषि प्रसाद पहुंचता है और जो हर महीने ऋषि प्रसाद पहुंचाने की सेवा करते हैं वे बड़े ही परम सौभाग्यशाली हैं। उन पर गुरु की कृपा घर बैठे मिलती है। कार्यक्रम की तैयारी में प्रवीण भाई, विशाल भाई और अजय भाई लगे हुए हैं। अहमदाबाद आश्रम से ऋषि प्रसाद के झारखंड बिहार प्रभारी संदीप भाई आ रहे हैं, जिनके निर्देशन में कार्यक्रम संपन्न होंगे। रांची के अलावा निकटवर्ती क्षेत्र के साधक परिवार एवं सेवादारों का एकदिवसीय सेवा साधना सम्मेलन ,पादुका पूजन,माला पूजन के पश्चात सभी साधकों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई है। श्री योग वेदांत सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी ने कहा रांची एवं रांची के आस पास के क्षेत्रों के सभी साधक इस कार्यक्रम में अवश्य पधारे एवं अपने साथ आसान, माला, गोमुखी लेकर आए । पूजन सामग्री कार्यक्रम स्थल से ही प्राप्त होगी। उक्त जानकारी श्री योग वेदांत सेवा समिति रांची के अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी (9431115714) ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पद्मा/ हजारीबाग। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में पद्मा प्रखंड के रोमी मैदान में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र के सनातनी हिंदुओं का जन सैलाब देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले शिव परिवार ने शिव चर्चा की। उसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। इस कार्यक्रम में महिलाओं की सहभागिता अधिक देखी गयी। कार्यक्रम में संयोजिका दुर्गा वाहिनी कृति गौरव ने कहा कि सनातन की रक्षा में महिलाओं की अहम भागीदारी है। हमें अपनी बहन और बेटियों को लव जिहाद से बचाने की जरूरत है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर बल दिया। वहीं विभाग मिलन प्रमुख प्रशांत सिंह ने समाज में बढ़ रहे नशे को बंद करने के लिए लोगों से आगे आकर इसमें सहयोग की बात कही ताकि धर्म स्थापना के राह में नशा रोड़ा ना बने और साथ ही जात-पात को छोड़कर हिंदुओं को एक होने की अपील की। जेएमएम पब्लिक स्कूल के बच्चों ने हनुमान चालीसा झांकी की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू जी ने बताया कि भारत में जन्म लेने मात्र से ही हम हिन्दू हैं ही, पर आज की परिस्थिति में सतर्क, सशक्त व जागरूक हिन्दू बनने की आवश्यकता है। हिन्दू जागेगा तो देश जागेगा और हिन्दू प्रान्त, भाषा, जाति, गोत्र के नाम पर बंटेगा तो देश भी बंटेगा। मौके पर विभाग प्रचारक संघ प्रमुख आशुतोष जी, विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के प्रखंड अध्यक्ष राजेश मेहता सह खंड कार्यवाह सुधीर मेहता, धीरज कुमार, मंत्री ऋषिकेश मेहता, पूर्व प्रखंड अध्यक्ष सुबोध सिंह, सुधीर जी, पंकज मेहता, सरिता देवी एकल प्रमुख पदमा, विधायक प्रतिनिधि नारायण यादव, जिप सदस्य बसंत नारायण मेहता, सुबोध यादव, राजन मेहता, रोमी मुखिया गुड़िया देवी, मुखिया प्रतिनिधि सुनील मेहता, सूरजपुर मुखिया सीताराम मेहता, उज्ज्वल पांडेय, विशाल सोनी, पवन शर्मा तथा कई सैकड़ों की संख्या में सनातनी हिंदू मौजूद थे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि जिस आदिवासी ने अपनी परंपरा और पूजा पद्धति छोड़ दी, इसाई ही जनजातियों के आरक्षण का 80 प्रतिशत हिस्सा हड़प रहे हैं और सही आदिवासियों का हक मार रहे हैं। परांडे शुक्रवार को सर्व सनातन समाज द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिन्दू ही हिंदू की आबादी घटा रहा है, जबकि मुसलमानों और ईसाइयों की आबादी लगातार बढ़ रही है। परांडे ने कहा कि विश्व में 50 से अधिक इस्लामिक और 120 ईसाई देश हैं, जबकि भारत और नेपाल ही ऐसे देश हैं जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं। ऐसे में हिंदू समाज को अपने अस्तित्व, परंपराओं और पहचान को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा। मिलिंद परांडे ने कहा कि हिंदू समाज विश्व का सबसे प्राचीन समाज है, जो हजारों-लाखों वर्षों से अस्तित्व में रहा है। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास, राम मंदिर आंदोलन और झारखंड के लगभग दो हजार गांवों से सरनास्थलों की मिट्टी के राम मंदिर निर्माण में उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन परंपराओं की जीवंत मिसाल है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक हिंदू को अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में जनजातीय शब्द और एसटी आरक्षण का प्रावधान जनजातीय समाज की परंपरा, पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था। आरोप लगाया गया कि 1947 के बाद आरक्षण का बड़ा हिस्सा ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों ने लिया, जबकि परंपरागत आदिवासी इससे वंचित रह गये। इस संदर्भ में कार्तिक उरांव द्वारा इसाई धर्म अपनाने वालों को आरक्षण से वंचित करने हेतु लाये गये विधेयक की चर्चा की गई, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया। विहिप के केंदीय संगठन महामंत्री ने कहा कि आज बड़ा संकट यह है कि हिंदू समाज द्वारा दिये गये अधिकारों का दुरुपयोग कर हिंदू परंपराओं का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को अपनी परंपरा की रक्षा का अधिकार है और इस विषय पर गंभीर विमर्श आवश्यक है। सम्मेलन में बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा गया कि किस प्रकार जबरन धर्मांतरण और दमन के खिलाफ आंदोलन करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनकी मृत्यु जेल में हुई। वक्ताओं ने चेताया कि आज भी गांवों में धर्मांतरण के प्रयास हो रहे हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।अंत में वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज को आपस में लड़ाने की साजिशों से सतर्क रहना होगा और एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा करनी होगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि हिन्दू समाज केवल एक-दो वर्षों के नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के आक्रमणों का शिकार रहा है। आस्था के केंद्र रहे मंदिरों को तोड़ा गया, जिससे समाज का आत्मबल कमजोर हुआ। इस दीर्घ आक्रमण काल में हिन्दू समाज का विघटन हुआ, जिसके लिए कहीं न कहीं समाज स्वयं भी जिम्मेदार रहा, क्योंकि हम अपनी व्यक्तिगत चिंताओं में उलझते चले गए। समाज को संगठित करने के उद्देश्य से विजया दशमी के दिन वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। संघ का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना और देश व समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करना रहा है। वर्ष 2025-26 में संघ ने अपने 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं, जो हिन्दू संगठन और समाज के लिए गर्व का विषय है। प्रांत प्रचारक ने कहा कि हिन्दू इस देश के मूल आदिवासी हैं। उन्होंने कहा कि जो हमारे संविधान, मातृभूमि, परम्परा के विरुद्ध बात करेगा उन्हें पहचानना चाहिए। गोपाल शर्मा ने कहा कि अपनी बहू बेटियों, परम्परा की रक्षा का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि बाहरी आक्रमणकारियों ने जातियों में विभाजन पैदा किया, जिससे देश गुलाम हुआ। यदि सभी जातियों के लोग मिलकर कार्य करें, तो देश को फिर से सशक्त बनाया जा सकता है। आज भी हिन्दू समाज को तोड़ने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन संगठन और एकता से हर चुनौती का सामना करना संभव है। कार्यक्रम को वनवासी कल्याण केंद्र के मुसाफिर विश्वकर्मा, विहिप के जिलाध्यक्ष विनोद जायसवाल, विकास मिश्रा, सुभाष मिश्रा, संतोष जायसवाल, निखिल कंडुलना, दीपक तिग्गा, नीरज पाढ़ी, मनोज चौधरी, राजन चौधरी, नीरज जायसवाल, पूनम भेंगरा, केशव कुमार सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।
रांची की साहित्यकार निर्मला करण विद्या वाचस्पति एवं ऋषि पिंगल पुरस्कार से सम्मानितटीम एबीएन, रांची। रांची की लेखिका सह साहित्यकार निर्मला कर्ण को विक्रमशिला विश्वविद्यालय से विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान की गयी। कार्यक्रम बिहार के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गया में आयोजित किया गया। जहाँ राज्य के बाहर के अनेक विद्वान व साहित्यकार मौजूद थे।विद्या वाचस्पति (पी.एच.डी) मानंद उपाधि/ सम्मान, अनेक काव्य मनीषियों एवं साधकों की उपस्थिति में विक्रमशिला विद्यापीठ के प्रस्तावक आचार्य डॉ विजय गुंजन एवं डॉ ओम प्रकाश वर्मा (उपनिदेशक राजभाषा), अंशुमान झा, (सहायक निदेशक, प्रसार भारती), प्रो डॉ सुधा सिन्हा, अध्यक्ष दर्शन शास्त्र, डॉ राशदादा राश के द्वारा सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में निर्मला कर्ण को प्रमाण-पत्र के साथ अंग वस्त्र और मोमेंटो प्रदान किया गया। छंद:शाला विद्यापीठ के द्वारा निर्मला करण को पुनः छंद लेखन के क्षेत्र में कार्य करने के लिए ऋषि पिंगल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार के रूप में अंगवस्त्र प्रमाण पत्र और मोमेंटो के साथ ग्यारह सौ रूपये नगद राशि दी गयी।यह पुरस्कार ओम प्रकाश वर्मा, उपनिदेशक राजभाषा, अंशुमान झा, सहायक निदेशक, प्रसार भारती, आचार्य डॉ विजय गुंजन, प्रो डॉ सुधा सिन्हा, अध्यक्ष दर्शन शास्त्र, डॉ राम सिंहासन सिंह, डॉ राशदादा राश, डॉ धनंजय शरण सिंह, अनिल कुमार झा, डॉ संजय पंकज, श्याम बिहारी प्रभाकर, डॉ राजीव रंजन द्वारा प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य एवं देश के अनेक गणमान्य विद्वान छंद रचनाकार की असंख्य उपस्थिति रही।
छत्रपति शिवाजी जयंती वीरता, स्वाभिमान और सुशासन का प्रेरक पर्व : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान योद्धा एवं आदर्श शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती प्रत्येक वर्ष 19 फरवरी को मनाई जाती है। इसी दिन सन् 1630 में उनका जन्म महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।कुछ स्थानों पर तिथि के अनुसार भी जयंती मनाई जाती है, किंतु प्रचलित रूप से 19 फरवरी को ही यह दिवस पूरे देश, विशेषकर महाराष्ट्र में, बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी, न्यायप्रिय तथा धर्मनिरपेक्ष शासक थे। उन्होंने उस समय विदेशी औरअत्याचारी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का संकल्प लिया।सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी अद्वितीय सैन्य रणनीति, विशेषकर गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध पद्धति) के माध्यम से उन्होंने शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त किया। उनका राज्याभिषेक सन् 1674 में रायगढ़ किले में हुआ, जिसके बाद वे औपचारिक रूप से छत्रपति की उपाधि से अलंकृत हुए।शिवाजी जयंती केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, साहस, संगठन और सुशासन की प्रेरणा का पर्व है। उन्होंने प्रशासन में अनुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोपरि रखा। महिलाओं के सम्मान और धार्मिक स्थलों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय थी। वे सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना रखते थे और उनकी सेना में विभिन्न जाति एवं समुदायों के लोग सम्मिलित थे। इससे उनके उदार और समावेशी दृष्टिकोण का परिचय मिलता है।इस दिन विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्याख्यान, पुष्पांजलि एवं देशभक्ति गीतों का आयोजन किया जाता है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में उनके जीवन और आदर्शों पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया जाता है। छत्रपति शिवाजी जयंती का उद्देश्य नई पीढ़ी में आत्मसम्मान, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत करना है।आज के समय में जब नैतिक मूल्यों और आदर्श नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है, तब शिवाजी महाराज का जीवन हमें साहस, रणनीति, न्याय और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख देता है।निस्संदेह, छत्रपति शिवाजी जयंती भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय का स्मरण है, जो हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करने और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करता है।
सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलना चाहिए : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य मे श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के द्वारा संचालित विगत 2 वर्षों से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज पायल जैन एवं उनके परिवार के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 45 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 1 फरवरी से 18 फरवरी तक 18 दिनों मे 3880 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में- रेणु गोयल, शिल्पी देवी, सुभाष सिंघानिया, मदनलाल मुरारका, अनिष्क नारायण, विशाल मित्तल, मनोज कुमार यादव, आनंद मोदी, पुरुषोत्तम मोदी, अर्जुन प्रसाद वर्मा, अभिषेक नारायण, दीपिका कुमारी, आलोक सहाय, अमन कुमार, पूजा सिंह, रूपेश देवघरिया के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गई। सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितो, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है।अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल,सुरेश अग्रवाल,नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश भगत सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती हमें आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवता के मार्ग पर चलने की देती है प्रेरणा : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती हिन्दू पंचांग के अनुसार यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आती है। इस दिन महान संत, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक रामकृष्ण परमहंस के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी जयंती मनाई जाती है। देशभर के आश्रमों, विशेषकर रामकृष्ण मठ एवं मिशन द्वारा संचालित संस्थानों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, प्रवचन और सेवा कार्यों का आयोजन किया जाता है।रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को पश्चिम बंगाल के कामारपुकुर ग्राम में हुआ था। उनका बाल्यकाल का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। बचपन से ही वे अत्यंत सरल, करुणामय और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। बाद में वे दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी बने, जहाँ उन्होंने माँ काली की उपासना में गहन साधना की और अद्वैत, भक्ति तथा विभिन्न धर्मों के मार्गों का अनुभव किया। उनका मानना था कि सभी धर्म एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा था-जितने मत, उतने पथ, परंतु लक्ष्य एक ही है।स्वामी रामकृष्ण का जीवन सादगी, प्रेम और ईश्वर-भक्ति का अनुपम उदाहरण है।उन्होंने समाज को जाति-पांति, संकीर्णता और अंधविश्वास से ऊपर उठकर मानव सेवा का संदेश दिया। उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने उनके विचारों को विश्वभर में प्रचारित किया और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया, रामकृष्ण परमहंस के विचार आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। वे कहते थे-ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग निष्कपट प्रेम और सेवा है।उनका संदेश था कि मानव की सेवा ही सच्ची ईश्वर-सेवा है। उन्होंने आत्मशुद्धि, सहिष्णुता और आध्यात्मिक एकता पर विशेष बल दिया।उनकी जयंती हमें आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वर्तमान समय में जब समाज विभाजन और भौतिकवाद की ओर बढ़ रहा है, तब रामकृष्ण परमहंस के विचार प्रेम, सद्भाव और समरसता का प्रकाश स्तंभ बनकर मार्गदर्शन करते हैं। उनकी शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव सत्य, प्रेम और सेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देती रहेंगी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.