कलश यात्र में 501 पीताम्बरधारी महिलाएं कलश धारण कर चलीएबीएन सोशल डेस्क। देव भूमि भारत में शाश्वत, मृत्युजयी व सार्वभौम संस्कृति का अखण्ड प्रवाह विद्यमान है। इस का स्वलप आचरण ही मानव प्रबुद्ध को विवेकवान बना सकता है। मानवीय स्वभाव में पुनः धर्म का आरोहण करने हेतू दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान सदैव कार्यरत रहा है। इसी श्रृंखला के अंतर्गत संस्थान द्वारा माता वैष्णो देवी नगर पुनदाग नजदीक पुनदाग थाना रांची में दिनांक 19 दिसंबर से 23 दिसंबर दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक श्री हरि कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा हैै।इस आयोजन में दिव्य गुरू श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्य एवं शिष्याएं कथा का वाचन करेंगी। जिसमें जनमानस को भारतीय संस्कृति की गरिमा एवं प्रतिष्ठा से जागरूक करवानें हेतू आज दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के पुनदाग टीओ पी के पास माता वैष्णो देवी नगर आश्रम से विशाल मंगल कलश यात्र निकाली गयी। कलश यात्रा का शुभारंभ श्री रामाशीष यादव सदस्य मानव कल्याण आयोग भारत सरकार ने ध्वज दिखा कर किया। जिसमें 501 पीताम्बर धारी महिलाएं कलश धारण करके चली और सैंकड़ो की संख्या में बढ़ चढ़ भक्तों नें शिरकत की। उनके कंठ से मुखरित हो रहे जय श्री राम के जयघोष पूरे शहर को अहलादित कर रहे थे। कलश यात्रा गंगा की मानिंद प्रवाहित होती हुई वातावरण के कलुषित हृदय को पवित्र व निर्मल बनाती जा रही थी। कथा का संदेश सर्वत्र वितरित करते हुए व विश्व शांति की कामना का प्रचार, प्रसार करते हुए कथा स्थल पहुंचीं। तत्पश्चात् श्री हरी नारायणजी का पूजन अशोक सिंह (डीएसपी), प्रमोद साहू, प्रोफेसर विजय प्रकाश, राजीव रंजन मिश्रा एवं सतीश गुप्ता अपने अर्धांगिनी संग बैठ पूजन किये। हमारे शास्त्रों में आता है कि कलश के अग्रभाग में देवताओं का निवास होता है एवं यह कलश हमारे मस्तिष्क में स्थित अमृृृत का प्रतीक है और यह यात्र हमें इंगित करती है उस दिव्य अमृत को प्राप्त करने की ओर। शहर में विभिन्न स्थानों पर कलश यात्रा का भव्य स्वागत् किया गया। यह जानकारी संस्थान के प्रचारक स्वामी यादवेंद्रानंद जी ने दिया।
टीम एबीएन, रांची। रविवार को रांची से करीब 55 किलोमीटर दूर लापुंग प्रखंड के लालगंज गांव में श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची ने एक निशुल्क चिकित्सा सह निशुल्क दवा वितरण शिविर का आयोजन किया, जिसमें सुदूर ग्रामों जैसे सुकुरहुटू, लोहागडा, सापुकेरा, लेटे, बोकरंदा, गाड़ी, परसा आदि गांवों से आये हुए कुल 290 रोगियों का इलाज एवं दवा वितरण किया गया। रांची से आये अनुभवी एलोपैथी एवं होम्योपैथी के चिकित्सक गन डॉ एसएन सिन्हा, डॉ रोहित सिंह, डाॅ शंकर रंजन, डॉ निरुपमा नीलम लकड़ा (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ पीके राज, डॉ उत्पल (होम्योपैथी) एवं डाॅ त्रिविधा रघुवंशी (होम्योपैथी) ने अपना बहुमूल्य सहयोग दिया। शिविर में ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मलेरिया आदि की निशुल्क जांच की व्यवस्था भी की गई थी जिसमें मोहम्मद अख्तर लाल प्रवीण सिंह एवं राजेश कुमार मांझी का सहयोग रहा। श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची के मंत्री श्री राधेश्याम सिंह जी द्वारा बताया गया कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्वविख्यात सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्था है तथा इस संस्था का प्रधान कार्यालय, पड़ाव वाराणसी (उप्र) में स्थित है। यह संस्था अपने 19 सूत्री कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष कई निशुल्क चिकित्सा सह दवा वितरण शिविर का आयोजन करती रही है ताकि अशक्त असहाय एवं गरीब रोगियों को निशुल्क चिकित्सा लाभ एवं निशुल्क दवा पहुंचाई जा सके। इस संस्था का नाम, अपने लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है। ग्राम लालगंज के श्री भानु प्रताप नाथ शाहदेव तथा स्थानीय निवासियों बैजनाथ बड़ाईक, रविंद्र साहु, चरकू साहु, प्रेम साहु, शशि साहू रामप्रीत साहू तथा महेंद्र साहू का महती सहयोग प्राप्त हुआ। श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची के उत्साही स्वयंसेवक गण श्री प्रतापादित्य नाथ शाहदेव, प्रशांत सिन्हा, अंजनी सिंह, नागदमनी नाथ शाहदेव, लाल गिरेंद्र नाथ शाहदेव, समरेंद्र सिंह आदि का सहयोग प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में संस्था की रांची शाखा की कार्यकारिणी के श्री विभूति शंकर सहाय, लाल हेमंत नाथ शाहदेव, श्री शशि भूषण मिश्र, श्री आनंद सिंह आदि उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। लॉर्ड गौतम बुद्धा ट्रस्ट के तत्वावधान में आर्थिक पिछड़े, अनाथ एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के बीच कपड़े, पढ़ाई-लिखाई का समान एवं नाश्ता का पैकेट मानव आर्य जी के सहयोग से रांची के शहेदा स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम में वितरित किया गया।संस्था ने दिव्यांग बच्चों के बीच कल्चरल कार्यक्रम का भी आयोजन किया। कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने सामूहिक राष्ट्रीय गान प्रस्तुत किया। संस्था के संस्थापक भारत भूषण ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के मन में राष्ट्र भावना को जागृत करना है। कार्यक्रम के दौरान मानव आर्य जी को समाज में अच्छे कार्य के लिए अंग वस्त्र एवं पुस्तक देखकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से अनंतराज, रोबिन कुमार, सावित्री कुमारी एवं किशोरी शाह का सहयोग रहा।
टीम एबीएन, टाटीझरिया (संदीप पांडेय)। प्रखंड के झरपो निवासी संदीप शास्त्री ने पंचांग मतानुसार कहा कि धनु संक्रांति आते ही अगले 30 दिन के लिए मुंडन, सगाई और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। इस अवधि को खरमास या मलमास भी कहा जाता है। इस साल सूर्य 16 दिसंबर 2022 को धनु राशि में प्रवेश करेंगे और इसी दिन से खरमास प्रारंभ हो जायेगा।खरमास के समय में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में सूर्य देव का प्रभाव कम होता है, इसलिए शुभ कार्य नहीं करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे एक वर्ष में दो बार ऐसा मौका आता है, जब खरमास लगता है। एक खरमास मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच और दूसरा खरमास मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी तक होता है।खरमास का प्रारंभ समयपंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन से लेकर मकर राशि में प्रारंभ करने तक का समय खरमास होता है। इस साल खरमास का प्रारंभ 16 दिसंबर दिन शुक्रवार से हो रहा है। इस दिन सूर्य की धनु संक्रांति का क्षण सुबह 10 बजकर 11 मिनट पर है। ऐसे में आपको कोई भी मांगलिक कार्य करना है तो उसे 15 दिसंबर तक मुहूर्त देखकर कर लें।खरमास का समापन समय16 दिसंबर से प्रारंभ हो रहे खरमास का समापन नये साल 2023 के पहले माह जनवरी में होगा। पंचांग के आधार पर जब सूर्य का धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश होगा तो वह सूर्य की मकर संक्रांति होगी। मकर के प्रारंभ होते ही खरमास का समापन हो जाता है।14 जनवरी दिन रविवार को रात 08 बजकर 57 मिनट पर मकर संक्रांति का क्षण है। इस समय पर खरमास का समापन हो जाएगा । मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने के बाद सूर्य पूजा करते हैं। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं।कैसे लगता है खरमासहिन्दू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। सूर्य जब धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तो इन्हें क्रमश: धनु संक्रांति और मीन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य जब धनु व मीन राशि में रहते हैं, तो इस अवधि को मलमास या खरमास कहा जाता है। इसमें शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।क्यों बंद होते हैं शुभ कार्यज्योतिषियों की मानें तो गुरु देव बृहस्पति धनु राशि के स्वामी हैं। बृहस्पति का अपनी ही राशि में प्रवेश इंसान के लिए अच्छा नहीं होता है। ऐसा होने पर लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर पड़ जाता है। इस राशि में सूर्य के कमजोर होने कारण इसे मलमास कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि खरमास में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है। सूर्य के कमजोर स्थिति में होने की वजह से इस महीने शुभ कार्यों पर पाबंदी लग जाती है। खरमास में नहीं करने चाहिए ये शुभ कार्य1. खरमास में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस समय अगर विवाह किया जाए तो भावनात्मक और शारीरिक सुख दोनों नहीं मिलते हैं।2. इस समय मकान का निर्माण या संपत्ति की खरीदारी वर्जित होती है। इस दौरान बनाए गए मकान आमतौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं मिल पाता है।3. खरमास में नया कार्य या व्यापार शुरू न करें। इससे व्यापार में शुभ फलों के प्राप्त होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।4. इस दौरान द्विरागमन, कर्णवेध और मुंडन जैसे कार्य भी वर्जित होते हैं, क्योंकि इस अवधि के किए गए कार्यों से रिश्तों के खराब होने की सम्भावना होती है।5. इस महीने धार्मिक अनुष्ठान न करें। हर रोज किए जाने वाले अनुष्ठान कर सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। जल्द ही दुनिया भर में 25 दिसंबर को क्रिसमस का और 1 जनवरी 2023 को नया साल मनाया जायेगा, जिसको लेकर ज्यादातर देशों में और शहरों में तैयारियां शुरू हो गयी है। वहीं, क्रिसमस को लेकर झारखंड की राजधानी रांची में भी तैयारियां जोरों शोरों पर हैं। कोरोना महामारी के कारण बीते 2 सालों से क्रिसमस और नये साल का जश्न फीका पड़ा हुआ था। लेकिन इस साल नए साल के आगमन और पुराने साल की विदाई को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है।बीते दो सालों से कोरोना की वजह से नये साल के जश्न पार्क, डैम और फॉल काफी फीका दिख रहा था। मगर इस बार फिर से लोग अपने परिजनों के साथ नये साल और क्रिसमस की तैयारी में जुटे हुए नजर आ रहे हैं। जहां लोग अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचकर खाना-पीना खेलकूद कर मस्ती कर रहे। नये साल के आगमन के जश्न में क्या बच्चे क्या बड़े सभी लोग इस का लुत्फ उठा रहे हैं। रांची के धुर्वा डैम की बात करें तो यहां पिकनिक मनाने सिर्फ रांची ही नहीं अन्य राज्यों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। पर्यटकों के बीच धुर्वा डैम आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। साथ ही साथ इस मौसम में तमाम पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा की तैयारी भी की गई है। सादे लिबास में भी पुलिसकर्मी जवान तैनात रहते हैं। साथ ही पूरे क्षेत्र में पेट्रोलिंग की जा रही है। साथ ही नशीले पदार्थ का पिकनिक स्पॉट पर सेवन करने से पुलिस मना करते हैं। जिससे यहां पिकनिक मनाने आये सैलानियों को किसी तरह कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिन्दू सिख एकता, महान सिख गुरुओं के प्रति सम्पूर्ण समाज की श्रद्धा, गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान तथा गुरु गोविंद सिंह जी महाराज द्वारा देश-धर्म की स्वाधीनता हेतु किये गये संघर्ष के आधार पर बनी है। इस साझा विरासत को हम किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देंगे। भारत की साझा विरासत व उनकी चुनौतियां विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोलते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय कार्याध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है न कि तोड़ना। भारत में जन्मे प्रत्येक मत-पंथ-संप्रदायों की उपासना पद्धति चाहे भिन्न हो किंतु, उनका मूल तत्व एक ही है जो हम सबको एक अटूट बंधन से बांधे रखता है।गोविंद सदन इंस्टिट्यूट फॉर एडवांसड स्टडीज इन कंप्रेटिव रिलीजन द्वारा आज दिल्ली के कंस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पंचायती निर्मल अखाड़ा, हरिद्वार के पूज्य महंत संत ज्ञानदेव सिंह जी ने कहा कि अपनी तीन पीड़ियों को राष्ट्र धर्म संस्कृति व समाज की रक्षा हेतु बलिदान करने वाले महान गुरुओं की शिक्षाओं को जन-जन तक लेकर जाना हम सभी की जिम्मेदारी है।केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि बात चाहे सेवा की हो या संस्कारों की, धार्मिक निष्ठा की हो या उस के प्रति बलिदानी भाव की, सम्पूर्ण विश्व को पता है कि भारतीय समाज व उसकी धार्मिक निष्ठा सिर्फ स्वयं के लिए नहीं अपितु, सम्पूर्ण विश्व कल्याण के लिए है। हमें गर्व है कि वसुधैव कुटुंबकम का संदेश मां भारती की पुण्य धरा से ही जाता है। भारत सरकार के वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री श्री सोमप्रकाश ने कहा कि जब तक शमशान व गुरुद्वारे जाति-विरादरी के आधार पर बंटे रहेंगे, महा गुरुओं के समता मूलक समाज के निर्माण का उद्देश्य सफल नहीं होगा।इस अवसर पर उपस्थित अन्य वक्ताओं में तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, सरहाली वाले बाबा हकम सिंह, राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग के पूर्व सदस्य सरदार मंजीत सिंह राय, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च के सदस्य डॉ सुरजीत कौर जौली सहित अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी, विभिन्न मत पंथ संप्रदायों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
डॉ वेदप्रताप वैदिकएबीएन सोशल डेस्क। महाराष्ट्र सरकार ने एक 13 सदस्यीय आयोग बना दिया है, जिसका काम यह देखना है कि देश में जितनी भी अंतरजातीय और अन्तर्धामिक शादियां होती हैं, उन पर कड़ी निगरानी रखी जाए। यदि उनके रिश्तेदारों या पति-पत्नी के बीच हिंसा या अनबन की शिकायतें आयें तो उन पर ध्यान दिया जाये। इस आयोग की अध्यक्षता भाजपा के महिला और बालविकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा करेंगे। इस आयोग का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि इस तरह की शादियों पर कड़ी निगरानी रखकर यह आयोग उनके विवादों को सुलझाने की कोशिश करेगा और औरतों के अधिकारों की रक्षा करेगा। यह आयोग उक्त प्रकार की शादियों की सारी जानकारियां और आंकड़े भी इकट्ठे करेगा। इस अपने ढंग के आयोग की स्थापना देश में पहली बार महाराष्ट्र सरकार ने की है, जो भाजपा और शिवसेना (नई) के गठबंधन से बनी है।इन दोनों पार्टियों ने लव जिहाद के खिलाफ जिहाद छेड़ रखा है। वास्तव में छल-कपट से कोई भी शादी करे और धर्म-परिवर्तन की कोशिश करे तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। लेकिन जो शादियां शुद्ध प्रेम और पारस्परिक आकर्षण के आधार पर होती हैं, क्या उनके लिए भी यह आयोग अभिशाप नहीं बन जायेगा? पता नहीं महाराष्ट्र की श्रद्धा वालकर और आफताब की शादी के पीछे असली प्रेरणा क्या थी? यह आयोग बनाया ही गया है, श्रद्धा वालकर और आफताब कांड के संदर्भ में। इस आयोग के घोषित उद्देश्य में तो कोई बुराई नहीं दिखती लेकिन ऐसा लगता है कि इससे जितने लाभ हो सकते हैं, उनसे ज्यादा हानियां होंगी। यह आयोग गलत धारणाओं पर ही आधारित है। सबसे पहला प्रश्न यह है कि क्या औरतों पर जुल्म तभी होता है, जबकि उनकी शादी गैर-जाति या गैर-धर्म के आदमी से होती है? क्या समजातीय और समधार्मिक विवाहों में किसी स्त्री पर कोई जुल्म नहीं होता?यदि भाजपा और शिवसेना के नेता स्त्री के अधिकारों के प्रति सजग हैं तो सिर्फ विषम विवाहों पर ही उनकी कोप-दृष्टि क्यों है? यदि वे विषम विवाहों के आंकड़े इकट्ठे करेंगे तो उनके कारण परिवारों में विषमता की दुर्भावना बढ़ेगी और उनकी संतानों के भावी जीवन को भी वह प्रभावित करेगी। वास्तव में हमें ऐसे शक्तिशाली और एकात्म भारत का निर्माण करना है, जिसमें जाति और धर्म से भी ज्यादा महत्व मनुष्य का हो। कोई भी मनुष्य अपनी मर्जी से जाति या धर्म में पैदा नहीं होता है। ये तो उस पर तब से थोप दिए जाते हैं, जब उसे खुद अपने नाम का भी पता नहीं होता। यह आयोग मनुष्य को जातीय और धर्म के सींखचों में बांधे रखने का एक नया पैंतरा सिद्ध होगा। जाति और धर्म से ऊपर उठकर शुद्ध प्रेम या आकर्षण से प्रेरित होकर शादी करनेवाले लोग डर के मारे दुबक जाएंगे। बेहतर तो यही हो कि हमारी सरकारें अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहों को पुरस्कृत, प्रोत्साहित और समाद्दत करें ताकि भारत एक सशक्त, संपन्न और भेदभावरहित देश बन सके।
एबीएन सोशल डेस्क। पत्रकारों के लिए काम करने वाली कई संस्थाओं का मानना है कि देश में पत्रकारों के लिए काम करना लगातार कठिन होता जा रहा है। इसी प्रकार की एक संस्था सीपीजे ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में पत्रकारों के लिए आवाज उठाना लगातार मुश्किल से भरा होता जा रहा है। कई पत्रकारों को वर्षों से जेल में बंद रखा गया है और उन्हें जमानत भी नहीं मिल पा रही है।कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि दुनिया के अनेक देशों में पत्रकारों के लिए काम करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। सरकारें पत्रकारों की आवाज को दबाने के लिए कठोर तरीके अपना रही हैं और उन्हें गंभीर आपराधिक मामलों में जेलों में ठूंसा जा रहा है। इससे जेलों में बंद पत्रकारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2022 इस मामले में अपवाद नहीं है, बल्कि इस वर्ष जेल में बंद होने वाले पत्रकारों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।संगठन ने माना है कि भारत में सिद्दीक कप्पन और गौतम नवलखा सहित अनेक पत्रकारों को बिना किसी ठोस आधार के जेलों में बंद रखा गया है। इनमें से कई पत्रकारों को अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रवेंशन एक्ट (यूएपीए) जैसे गंभीर मामलों में बंद किया गया है। इससे देश में पत्रकारों के लिए काम करना कठिन हुआ है।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद के युवा शाखा बजरंग दल जमशेदपुर महानगर के तत्वाधान में आज दिनांक 14 दिसंबर 2022 को संध्या 3:30 बजे जमशेदपुर के गोविंदपुर में गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड में तीन दिवसीय प्रवास के क्रम में आये विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे जी विशेष रूप से उपस्थित थे।कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मिलिंद परांडे जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में कर्तव्य का बोध कराते हुए गीता जी का उपदेश दिया था। श्री कृष्ण ने कहे है कर्तव्य कितना भी कठिन हो, पर उसे पूर्ण करना ही चाहिए। उन्होंने कहा सदियों धर्म के रास्तों पर चलने वाले को विजय प्राप्त होता है। हमारा हिंदू समाज सदैव से पराक्रमी रहा है। परंतु अंग्रेज इतिहासकारों ने भारतीय योद्धाओं को कमजोर बताकर हमें हीनता का भाव प्रकट कराया है।उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि आंदोलन से समाज में जाति, पंथ, संप्रदाय जैसे समाज विध्वंसक विचारधारा में परिवर्तन आया है जिससे समरस समाज बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा आज भी समाज विध्वंसक विचारधारा वाले समाज के द्वारा हिंदू को हिंदू से लड़ा कर समाज में दरार डालने का कार्य कर रही है, ऐसे तत्वों से सचेत रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा वर्तमान परिपेक्ष्य में हिंदुत्व एवं हिंदुत्व चिंतन अब समाज के बीच केंद्र बिंदु बन गया है, यह दृश्य आज के राजनीतिक पटल पर भी स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कहा झारखंड में ईसाइयों का मतान्तरण, इस्लाम की जिहादी गतिविधि एवं कम्युनिस्ट विचारधारा के नक्सलवाद के कारण हिंदू एवं हिंदुत्व को काफी क्षति पहुंच रही है। मयांमार के रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी मुस्लिमों का घुसपैठ के कारण झारखंड सहित देश के अनेक राज्य के जिलों में आंतरिक सुरक्षा में खतरा बढ़ा है तथा जनसंख्या असंतुलन की स्थिति बनता जा रहा है। उन्होंने कहा देश, राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के रक्षार्थ समस्त हिंदू जनमानस को हिंदू संस्कार में दृढ़ीकरण तथा सामाजिक जीवन में प्रमाणिकता के साथ व्यवहार में लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा लगभग 500 साल तक का संघर्ष का परिणाम है भगवान पुरुषोत्तम श्री रामजी का भव्य मंदिर। उन्होंने कहा गौ माता, गंगा माता, भारत माता हमारी सनातन परंपरा की आत्मा है परंतु आज झारखंड में बैठे शीर्ष नेता के द्वारा गौतस्करी को नहीं रोकने का वक्तव्य देकर सनातन संस्कृति अवधारणा को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने कहा आज के जागृत हिंदू को अब हिंसा के बल पर दबाया अथवा सताया नहीं जा सकता।कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चरण करके किया गया। साथ ही बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के द्वारा शौर्य यात्रा करते हुए गोविंदपुर नगर का भ्रमण गगनभेदी नारों के बीच किये। कार्यक्रम में क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, पूज्य महंत प्रचार-प्रसार प्रांत प्रमुख संजय कुमार, विभाग मंत्री संजय चौरसिया, जिला अध्यक्ष अजय गुप्ता, मंत्री दीपक वर्मा, विभाग संयोजक जनार्दन पांडेय, सा मंत्री चंद्रिका भगत बजरंग दल संयोजक डॉ भोला लोहरा, महानगर कार्यवाह रविंद्र कुमार, अरुण सिंह, संजय सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ता थे। उक्त जानकारी झरखण्ड विहिप के प्रान्त मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू और झारखण्ड प्रान्त के प्रचार-प्रसार प्रमुख संजय कुमार (98351 38678) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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