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गांव-गांव जाकर करें सेवा और समाज के वंचित वर्ग को गले लगायें : मोहन भागवत
Published / 2023-02-18 18:27:17
गांव-गांव जाकर करें सेवा और समाज के वंचित वर्ग को गले लगायें : मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के सरसंघचालक ने स्वयंसेवकों को दिया खास मंत्र एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के सरसंघचालक मोहन भागवत बीते शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बरेली पहुंचे थे। जहां पर वो डोडरा रोड स्थित जीआरएम स्कूल में वह ठहरे हुए हैं और इसी स्कूल में उन्होंने प्रांत प्रचारकों के साथ दो सत्रों में बैठकें कीं। इन बैठकों में उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि वे हर गांव तक जाकर सेवा करें और समाज के वंचित वर्ग को गले लगायें। उन्होंने कहा कि संघ का मकसद है लोगों की सेवा करना, इस लिए स्वयंसेवक समाज के वंचित लोगों की सेवा करें। बता दें कि वर्ष 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी के चलते मोहन भागवत ने कहा कि, 2025 में संघ शताब्दी वर्ष मना रहा है। ऐसे में संघ को अधिक व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। संघ की शाखाएं और अधिक बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संघ का मकसद देश और समाज की सेवा है। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि वे हर गांव तक जाकर सेवा करें। समाज के वंचित वर्ग को गले लगायें। उनको समाज में आगे लाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के क्षेत्र में अधिक से अधिक सहयोग करें। साथ ही हर जिले में शहर से देहात तक शाखा का विस्तार करें। संघ अपने शताब्दी वर्ष 2025 तक देश के सभी मंडलों में शाखा प्रारंभ करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। इसके लिए पदाधिकारियों का प्रवास लगातार जारी है। देश के सभी प्रांतों में सरसंघचालक मोहन भागवत का प्रवास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपसी भेदभाव दूर कर सभी विकारों से मुक्त समरसता भाव वाला सामाजिक परिवेश तैयार करना संघ प्रचारक का दायित्व है। जाति, विषमता और अस्पृश्यता जैसे सामाजिक विकारों को जल्द दूर करना है। सामाजिक अहंकार और हीनभाव दोनों ही समाप्त होने चाहिए। ये सामाजिक विकृतियां समाज और देश को तोड़ती हैं, लेकिन हमें समाज को जोड़ने का काम करना है। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि पर ध्यान देकर उसके विस्तार के लिए काम करने को कहा है। इसके साथ ही उन्होंने स्वयंसेवकों ने कोरोनाकाल में किये कामों के बारे में बताया।

क्यों मनायी जाती है महाशिवरात्रि, जानें इसकी कथा...
Published / 2023-02-18 09:51:47
क्यों मनायी जाती है महाशिवरात्रि, जानें इसकी कथा...

राजकुमारी पांडेयएबीएन सोशल डेस्क। एक बार मां पार्वती ने शिव शंकर से पूछा कि ऐसा कौन सा श्रेष्ठ और सरल व्रत -पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं? उत्तर में शिवजी ने पार्वती मां से कहा कि शिवरात्रि के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनायें :-एक गांव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुंब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर ना चुका सका। क्रोधश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि था। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि की कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिनसारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिये निकला, लेकिन दिन भर बंदीगृह में रहने के कारण भूख प्यास से व्याकुल था।शिकार करने के लिए वह एक तलाब के किनारे बेल वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बेलपत्रों से ढंका हुआ था। शिकारी को उसका पता नहीं चला। पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ी, संयोग से शिवलिंग पर गिरी। इस प्रकार दिन भर भूखे प्यासे शिकारी का व्रत भी पूरा हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गये। एक रात्रि बीत जाने पर एक गर्भणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुंची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची मृगी बोली मैं गर्भणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवो की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब तुम मुझे मार लेना। शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी झाड़ियों में लुप्त हो गयी। कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना ना रहा।समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया हे पारधी... मैं थोड़ी देर पहले ही ऋतू से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहणी हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य  मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर न लगाई, वह तीर छोड़ने वाला ही था कि मृगी बोली है पारधी... मैं इन बच्चों को पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मार।शिकारी हंसा और बोला, सामने आएं शिकार को छोड़ दूं मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं।मेरे बच्चे भूख प्यास से तड़प रहे होंगे। उत्तर में मृगी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी, इसलिए बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान मांग रही हूं। हे पारधी... मेरा विश्वास कर मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हैं। मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गयी। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में बेलवृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़ तोड़ कर नीचे फेकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो तो एक हृष्ट पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला हे पारधी... भाई यदि मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियो और छोटे-छोटे बच्चों को को मार डाला है तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि उनके वियोग में मुझे एक क्षण भी दुख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूं। यदि उन्हें तुमने जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण जीवनदान देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाऊंगा। मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना चक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तो मृग ने कहा, मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबंध होकर गई है। मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पायेंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सब के साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं। उपवास, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गये। भगवान शिव के अनुकंपा से उसका हिंसक हृदय कारूणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा। थोड़ी ही देर बाद मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता और सामूहिक प्रेम भावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आंसुओं की झड़ी लग गयी। उसमें एक परिवार को न मार कर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल और दयालु बना लिया। देव लोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहा था। घटना की परिणति होते ही देवी देवताओं ने पुष्प वर्षा की। तब शिकारी और मृग मोक्ष को प्राप्त हुए।

महाशिवरात्रि : भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष दिन
Published / 2023-02-18 09:42:33
महाशिवरात्रि : भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष दिन

राजकुमारी पांडेयएबीएन सोशल डेस्क। महाशिवरात्रि भारतीयों का एक  प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। माघ फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ है। पहली बार शिव जी प्रकट हुए थे।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरंभ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय रूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन महादेव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।एक और कथा यह भी है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव विभिन्न 64 जगहों पर प्रकट हुए थे। उनमें से केवल हमें 12 जगहों का नाम पता है। इन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। महाशिवरात्रि के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लोग दिपस्तम्भ लगाते हैं। दीपस्तम्भ इसलिए लगाते हैं कि ताकि लोग शिवजी के अग्नि वाले आनंत लिंग का अनुभव कर सके। यह जो मूर्ति है उसका नाम लिंगोभव, यानि कि जो लिंग से प्रकट हुए हैं। ऐसा लिंग जिसका न आदि और न ही अंत था। महाशिवरात्रि के कई कहानियां हैं इनमें से यह भी है कि माता सती को अग्नि पर समर्पित से महादेव ने तांडव भी इसी दिन किये थे।

2024 की मकर सक्रांति के बाद शुभ मुहूर्त में नये मंदिर पर विराजेंगे श्रीरामलला : कामेश्वर चौपाल
Published / 2023-02-17 20:04:20
2024 की मकर सक्रांति के बाद शुभ मुहूर्त में नये मंदिर पर विराजेंगे श्रीरामलला : कामेश्वर चौपाल

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड प्रांत के धर्मरक्षा निधि समर्पण अभियान कार्यक्रम को तेज गति प्रदान करने के निमित्त आज झारखंड के राजधानी रांची प्रवास के क्रम में हरमू रोड,रांची स्थित विश्व हिंदू परिषद प्रांत कार्यालय में  श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी माननीय कामेश्वर चौपाल ने कहा देश के समस्त साधु-संतों के कार्य एवं देश के सांस्कृतिक अवधारणाओं को मजबूती प्रदान करने हेतु संपूर्ण राष्ट्र में धर्मरक्षा निधि समर्पण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि इस अभियान में सम्मिलित होकर विश्व हिंदू परिषद को धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सहयोग राशि अवश्य समर्पण करें। प्रांत के सभी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि समाज के हर स्तर के हिंदू समुदाय से संपर्क कर अभियान को पूर्ण करें। श्री चौपाल ने कहा श्री रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का कार्य तेज गति से चल रही है। भूतल का लिल्टन का कार्य प्रारंभ है। 2023 के अंत तक गर्भ गृह में प्रभु श्री रामलला प्रतिष्ठापित करने की पूरी तैयारी चल रही है। 2024 के मकर सक्रांति के पश्चात शुभ मुहूर्त देखकर प्रतिष्ठा का अनुष्ठान किया जाएगा। उन्होंने कहा अभी तक सिर्फ मंदिर निर्माण ही चल रहा था परंतु अब मंदिर से जुड़े अनेक कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं। सभी कार्य अपने निर्धारित समय में अवश्य पूर्ण होगा। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा झारखंड प्रांत में धर्म रक्षा निधि समर्पण अभियान का कार्यक्रम 12 फरवरी से प्रारंभ है, जो अभियान प्रांत के सभी जिलों एवं प्रखंड केंद्रों को लक्षित करते हुए जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के लिए लगभग 500 टोली बनाए गए हैं। प्रांत कार्यालय बैठक में प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, क्षेत्र प्रशिक्षण प्रमुख सुशील कुमार, सेवा टोली सदस्य राम प्रताप सिंह उपस्थित थे।

गांव-गांव फैली आम के मंजर की खुशबू
Published / 2023-02-17 19:04:13
गांव-गांव फैली आम के मंजर की खुशबू

ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बनेगा बिरसा हरित ग्राम योजना तीन वर्ष में फलदार पौधा लगाने, लाभुकों की संख्या और रकबा में 10 गुना वृद्धि दर्ज फलदार पौधा लगाने में गुमला सबसे आगे, अंत: कृषि को भी मिल रहा बढ़ावा टीम एबीएन, रांची। श्वेता कुमारी अब आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। उसे अपने ही खेत से फलों के साथ-साथ अंत: कृषि के जरिए मौसमी सब्जियां भी प्राप्त हो रही है, जिससे श्वेता को अपने जीवन के निर्वहन में पूर्व की तरह परेशानी नहीं हो रही। लातेहार के बारियातु पंचायत के गाडी गांव निवासी श्वेता की ही तरह राज्य के हजारों ग्रामीण बिरसा हरित ग्राम योजना के साथ-साथ अंत: कृषि का लाभ ले ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण में अपना योगदान दे रहें और झारखण्ड के ग्रामीण इलाकों में आम के मंजर की खुशबू फैला रहें हैं। तीन वर्ष पूर्व बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत लगाए गए आम के पौधे अब फल देने को तैयार हो गए हैं, जो आने वाले समय में ग्रामीणों की आय का अतिरिक्त जरिया साबित होगा। ये सब ऐसे ही नहीं हुआ। कोरोना संक्रमण काल में इसकी नींव मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रखी थी। आज वही नींव ग्रामीणों के लिए आय का मजबूत आधार बन रहा है। विगत तीन वर्ष में किए गए मेहनत का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से अबतक फलदार पौधा लगाने, लाभुकों की संख्या एवं भूमि में लगाए गए पौधों के रकबा में दस गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।  तीन वर्ष में दस गुना वृद्धि ग्रामीणों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फलदार पौधा उपलब्ध कराने की योजना ने सही मायने में विगत तीन वर्ष में गति मिली है। आंकड़ों को देखने से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण को गति देने प्रयास 2020 से शुरू हुआ। वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2019-20 के बीच 7,741 लाभुकों को योजना का लाभ मिला, जबकि 2020-21 से 2022-23 तक कुल 79,047 ग्रामीण योजना से लाभान्वित हुए। 2016-17 से 2019-20 तक कुल 5972.35 एकड़ में फलदार पौधारोपण किया गया।वहीं वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक 67,276.62 एकड़ भूमि में फलदार पौधे लगाए गए। फलदार पौधों की संख्या की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक 6,31984 फलदार पौधे लगे। इस आंकड़े को पार करते हुए वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक यह संख्या बढ़कर 74,47,426 हो गई। उपरोक्त सभी में दस गुना से अधिक वृद्धि तीन वर्ष में दर्ज की गई।  फलदार पौधारोपण में गुमला आगे योजना के तहत पूरे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार पौधा ग्रामीणों की मांग के अनुरूप उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन गुमला के लोगों ने आगे बढ़कर सबसे अधिक योजना का लाभ लिया। यहां के 12,599 लाभुकों ने अपनी भूमि पर फलदार पौधा लगाया है। दूसरे स्थान पर खूंटी के 8062 लाभुक, तीसरे स्थान पर पश्चिमी सिंहभूम के 6460 लाभुकों, चौथे स्थान पर रांची के 5875 लाभुकों एवं पांचवें स्थान पर गिरिडीह के 4544 लाभुकों ने योजना का लाभ लेते हुए अपने लिए अतिरिक्त आय के साधन का मार्ग प्रशस्त किया है।  फलों के साथ सब्जी की भी खेती जहां एक ओर ग्रामीण अपने खेतों और तांड में फलदार पौधे लगा रहें हैं वहीं दूसरी ओर, फलों के पौधों के आस पास अंत: कृषि की प्रणाली भी अपना रहें हैं। इन पौधों के आस पास मौसमी सब्जी की खेती भी हो रही है, जिससे इनके आय में वृद्धि भी हुई है। इस विधि से फलदार पौधों को सब्जियों के साथ समय पर पानी और खाद मिल जाता है। इससे पौधों के मरने के दर में भी कमी दर्ज की गई है।  बिरसा हरित ग्राम योजना का उद्देश्य ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। सरकार इस दिशा में लगातार ग्रामीणों से संपर्क कर उन्हें योजना का लाभ दे रही है। इसके साथ-साथ ग्रामीण अंत: कृषि के तहत सब्जियों की भी खेती कर रहें हैं, जो सुखद है। - राजेश्वरी बी, मनरेगा आयुक्त।

श्री श्याम सहारा परिवार रविवार को करेगा श्याम महोत्सव सह श्री श्याम संकीर्तन
Published / 2023-02-17 10:32:43
श्री श्याम सहारा परिवार रविवार को करेगा श्याम महोत्सव सह श्री श्याम संकीर्तन

टीम एबीएन, रांची। दिनांक 19 फरवरी 2023 दिन रविवार को शाम 5:30 बजे से श्री श्याम सहारा परिवार धुर्वा रांची श्याम महोत्सव सह श्री श्याम संकीर्तन का आयोजन मां दुर्गा पूजा पंडाल सेक्टर 3 एचईसी कॉलोनी धुर्वा में करेगा। जिसमें खाटू राजस्थान से बाबा का ज्योत जलाने हेतु कलयुग की मीरा श्याम प्रेमी आरती देवी, श्याम शृंगार सेवा खाटू के पंडित प्रियांशु शर्मा एवं भजन प्रवाहक फरीदाबाद से आये श्री अंकित शर्मा बस के द्वारा भजन की प्रस्तुति देंगे। श्री श्याम परिवार ने सभी श्याम भक्तों से इस महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।कार्यक्रम निम्न प्रकार है :  अलौकिक दरबार, हवन पूजन, भजन संध्या, इत्र वर्षा, पुष्प वर्षा, छप्पन भोग, अखंड ज्योतआयोजनकर्ता श्री श्याम सहारा परिवार धुर्वा ने अधिक जानकारी के लिए 95468 37007 और 78084 78765 पर संपर्क करने की अपील की है।

आज से तीन दिन तक ताजमहल में फ्री एंट्री, जानें क्यों?
Published / 2023-02-17 09:50:30
आज से तीन दिन तक ताजमहल में फ्री एंट्री, जानें क्यों?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुगल शासक शाहजहां के 368वें उर्स के अवसर पर आगरा के ताजमहल में 17 फरवरी से तीन दिन तक प्रवेश नि:शुल्क रहेगा। इस मौके पर चादरपोशी, चंदन, गुसुल और कुल जैसी कई रस्में निभायी जायेंगी।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के आगरा मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल ने कहा कि शाहजहां के सालाना उर्स के मौके पर 17, 18 और 19 फरवरी से ताजमहल में पर्यटकों के लिए प्रवेश नि:शुल्क रहेगा। 17 व 18 फरवरी को दोपहर 2 बजे के बाद सूर्यास्त तक और 19 फरवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पर्यटकों को नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा।

धनबाद की इंदिरा कुमारी दिल्ली में वीमेन ग्लोबल प्राइड अवार्ड 2023 से सम्मानित
Published / 2023-02-15 17:54:28
धनबाद की इंदिरा कुमारी दिल्ली में वीमेन ग्लोबल प्राइड अवार्ड 2023 से सम्मानित

टीम एबीएन, रांची। दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब आॅफ इण्डिया में ग्लोबल बिजनेस कॉन्क्लेव एंड ग्लोबल प्राइड अवार्ड 2023 में झारखण्ड धनबाद की इंदिरा कुमारी को महिला सशक्तिकरण की दिशा में जागरूकता अभियान चलाने हेतु वीमेन ग्लोबल प्राइड अवार्ड 2023 से सम्मानित किया गया।मौके पर भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी विशेष आमंत्रित सदस्य एवं टीम लक्की हिंदुस्तानी संस्थापक अरुण शर्मा लक्की हिंदुस्तानी, लायंस क्लब दिल्ली वेज के अध्यक्ष डॉ गौरव गुप्ता, पूर्व मिस इंडिया सिमरन आहूजा, डॉ राकेश गोयल सहित अनेकों जानी मानी हस्तियों को भी सम्मानित किया गया।

5,000 वर्षों से अधिक पुराना है योग का इतिहास
Published / 2023-02-15 13:23:56
5,000 वर्षों से अधिक पुराना है योग का इतिहास

एबीएन सोशल डेस्क। योग एक प्राचीन भारतीय कला एवं विज्ञान है जो मनुष्य के भौतिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर स्वास्थ्य एवं जीवन कल्याण प्रदान करता है। योग का इतिहास 5000 वर्षों से अधिक है। योग शब्द संस्कृत के "युज" धातु से आया है, जिसका अर्थ है विलीन होना। भारत में योग की विभिन्न शैलीयों एवं अभ्यास क्रमों का पालन किया जाता है। योग के आध्यात्मिक अर्थ का उल्लेख वेद, उपनिषद तथा भगवद् गीता जैसे प्राचीन ग्रंथों में किया गया है। कई प्रसिद्ध योग गुरुओं ने योग का व्यवस्थित अभ्यास विधियों एवं स्वास्थ्य लाभें का संकलन किया है। उनमें से पतंजलि योग सूत्र एवं हठ योग प्रसिद्ध हैं। पतंजलि योग सूत्र मुख्य रूप से आठ अंगों की व्याख्या करता है। जैसे : आचार (यम), नियम का पालन (नियम), शारीरिक अनुशासन (आसन), नियमित श्वास प्रश्वास साधना (प्राणायाम), इन्द्रिय निग्रह (प्रत्याहार), एकाग्रता (धारणा), ध्यान तथा चेतना की उच्च अवस्थाओं को उजागर करना (समाधि)।प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) भारतीय एवं पश्चिमी दर्शन पर आधारित दवारहित चिकित्सा प्रणाली है। नेचुरोपैथी शब्द 1895 में जॉन शील ने दिया और इसे अमेरिका में बेनेडिक्ट लस्ट ने लोकप्रिय बनाया। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन शैली प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार जीयें, प्राकृतिक चिकित्सा, शरीर की प्राण शक्ति एवं आंतरिक शारीरिक प्रक्रियाओं में सुधार लाकर खुद को स्वस्थ बनाने की स्वयं की क्षमता पर आधारित है। पंचमहाभूत सिद्धांत, रोगकारक पदार्थ सिद्धांत, प्राण शक्ति सिद्धांत जैसे प्राकृतिक चिकित्सा के अवधारणाएं, मनुष्य के सभी स्तर पर स्वास्थ्य एवं बीमारी की व्याख्या करती हैं। जल चिकित्सा, मालिश चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, आहार चिकित्सा इत्यादी प्राकृतिक चिकित्सा के कुछ बुनियादी उपचार पद्धती हैं।निवारक, सहायक एवं पुनर्वास चिकित्सा के रूप में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न क्रमों की प्रभावकारिता को अनुसंधान ने प्रमाणित किया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धती के साथ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का संयोग, रोगों के बोझ को कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा एवं जीवन कल्याण हेतु उपयोगी है।आज हर व्यक्ति कोलेस्ट्राल का बढ़ना, डायबिटीज, आंखों में सूखापन-पानी गिरना, मांसपेशियां-जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, मोटापा, कब्ज, नींद नहीं आना, श्वांस रोग, ब्लड प्रेशर, लंबाई बढ़ाना, प्रसव के दौरान दर्द होने वाले दर्द को कम करना, डिप्रेशन जैसी अनेक बीमारियों का इलाज योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के जरिये बिना दवा के इलाज हो सकेगा।अलग-अलग थैरेपियों से किया जायेगा मरीजों का इलाजप्राकृतिक चिकित्सा के जरिए होने वाले इलाज में मड, हाइड्रो, मासो थैरेपी, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, क्रोमोथैरेपी, उपवास चिकित्सा, आहार-विहार चिकित्सा, वायु चिकित्सा, चुंबकीय चिकित्सा, मड पैक, मड और पूल बाथ, स्टीम बाथ, सन बाथ, क्रोमो बाथ, गीला चादर पैक, छाती पैक, पेट पैक, ट्रंक पैक, घुटना पैक, गीले करधनी पैक, गर्दन पैक, हरी पत्तियों वाली सन बाथ, कोलन सिंचाई, डीलक्स हाइड्रो मसाज, रंग चिकित्सा, रिफ्लेक्सोलोजी, फिजियोथैरेपी, इलेक्ट्रोथैरेपी, एनीमा-गर्म पानी, छाछ व नारियल पानी आदि।योग में इस्तेमाल होने वाला प्राणायाम, जलनेति, षटकर्म, आभ्यांतर त्राटक, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, शीतली, ध्यान, नांद ध्वनि, ज्ञान और सूर्य मुद्रा।नटराज योग एवं वैलनेस सेंटर एवं इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष आर्य प्रहलाद भगत का कहना है कि शरीर पांच तत्वों-हवा, पानी, आकाश, आग व मिट्टी से मिलकर बना है। प्राकृतिक संतुलन के आधार पर जीवन जिया जाये तो बीमारी पास आयेगी ही नहीं। पांच तत्वों से बना शरीर अगर बीमार पड़ भी जाये, तो उसे इन्हीं तत्वों के से ठीक किया जाना ही प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) है।आर्य प्रहलाद भगत की उपलब्धि :- झारखंड के राज्यपाल द्वारा योग रत्न सम्मानयोग में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डइंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन प्रदेश उपाध्यक्ष (झारखंड)स्नातकोत्तर योग विज्ञान 2 बार नेट क्वालिफाइडराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा)

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