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हे मनुष्य तू मिट्टी है मिट्टी में मिल जायेगा...
Published / 2023-02-22 21:39:22
हे मनुष्य तू मिट्टी है मिट्टी में मिल जायेगा...

टीम एबीएन, कर्रा। लोधमा बिनगांव आरसी चर्च में चालीसा की शुरुआत पर फादर पास्कल जेम्स टेटे हर एक खिरस्तीय विश्वासी के माथे पर पवित्र खजूर का राख लेकर कुरस का चिह्न बनाते हैं और अपने उद्देश्य में कहते हैं राख बुध के साथ हम चालीसा काल शुरू कर रहे हैं। यह 40 दिन-40 रात का रहता है और यह पुण्य काल होता है। पवित्र कलीसिया हम सबको आज ही चालीसा काल के पहले दिन में ही यह चेतावनी देते हैं कि हे मनुष्य तू मिट्टी का बना है मिट्टी में मिल जायेगा और आह्वान भी करती है पश्चाताप करो और सुसमाचार में विश्वास करो।

स्वामी श्रद्धानंद जी से जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा लें : प्राचार्य एसके मिश्रा
Published / 2023-02-22 18:21:45
स्वामी श्रद्धानंद जी से जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा लें : प्राचार्य एसके मिश्रा

एबीएन सोशल डेस्क। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में स्वामी श्रद्धानंद जी की जयंती मनायी गयी। मौके पर स्वामीजी को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की गयी। विद्यालय परिसर में सामूहिक वैदिक महाहवन का आयोजन किया गया, जिसमें पूरे विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात यज्ञ प्रार्थना और भजन किया गया। प्राचार्य संजय कुमार मिश्रा ने स्वामीजी के प्रति भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिस प्रकार पारस के स्पर्श से लोहा भी सोना बन जाता है, वैसे ही महर्षि दयानंद सरस्वती जी के संपर्क में आनेवालों में से अनेक साधारण मानव महात्मा बन गये। उनके अनुयायियों में से मुंशी राम भी एक थे, जो आगे चलकर स्वामी श्रद्धानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए। महर्षि जी के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन को यज्ञ की आहुति के समान पवित्र बना लिया। उन्होंने अछूतोद्धार, विधवा विवाह, शुद्धि आंदोलन आदि में अपना पूरा जीवन होम कर दिया। समाज सुधार ही उनके जीवन में सर्वोपरि रहा।उन्होंने वैदिक मूल्यों के प्रतिस्थापन के लिए विद्यालय भी खोले। हम सबको उनके आदर्शों को अपनाने की कोशिश करनी चाहिए।यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शांति पाठ तथा वैदिक जयघोष के साथ सभा समाप्त हुई।

दादा-दादी का साथ बच्चों को बनाता है समझदार
Published / 2023-02-22 18:15:52
दादा-दादी का साथ बच्चों को बनाता है समझदार

उनका सान्निध्य बच्चों में भरता है अच्छे संस्कार मनोज कुमार पांडेय टीम एबीएन, कोडरमा। कभी बुजुर्गों के साथ भी कुछ पल बिताया करो, सारी चीजें गूगल में नहीं मिला करतीं। यह बात बिल्कुल सच साबित हो रहा है। घर में बड़े बुजुर्गों के साथ रहने वाले बच्चों को बहुत लाभ मिलते हैं। बुजुर्गों के पास जीवन भर का लंबा अनुभव होता है। अनुभव ऐसा कि चुटकी बजाते ही समस्याओं का हल निकल आता है। अगर घर में कुछ बीमारी है तो उनका देसी नुस्खा तुरंत राहत दिला देती हैं। बच्चों को संभालने की क्षमता माता-पिता की अपेक्षा दादा-दादी में अधिक होती है। दादा-दादी बच्चों को माता-पिता की अपेक्षा अधिक समय देते हैं। इंस्टीट्यूट फॉर पिस्कल स्टडीज एंड नूफील्ड फाउंडेशन के एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। शोध में कहा गया है कि दादा-दादी के साथ रहने वाले बच्चों का दिमाग अधिक विकसित होता है। उनके साथ बच्चे अधिक स्वस्थ रहते हैं, और बड़े होने पर मानसिक रूप से मजबूत भी बनते हैं। बच्चे दादा-दादी से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। उनके साथ रहने वाले बच्चे खुश तो रहते ही हैं, बल्कि कई जानकारियों के अलावा अच्छे संस्कार भी उनमें विकसित होते हैं।

बीहड़ जंगलों में बच्चों को भारतीय संस्कृति और योग की वैज्ञानिकता की जानकारी दे रहे आचार्य मुक्तरथ
Published / 2023-02-21 23:52:26
बीहड़ जंगलों में बच्चों को भारतीय संस्कृति और योग की वैज्ञानिकता की जानकारी दे रहे आचार्य मुक्तरथ

एबीएन सोशल डेस्क। आज से अनगड़ा प्रखण्ड के बीहड़ जंगलों के मध्य स्थित बनियाजारा उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में पांच दिवसीय योग व नैतिक शिक्षा शिविर की शुरुआत सत्यानन्द योग मिशन ने उषा-मार्टिन कम्पनी एवं शालिनी हॉस्पिटल के सौजन्य से शुरू किया। विद्यालय के शिक्षक और अध्ययनशील विद्यार्थियों ने अपने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रगति के लिए तरह तरह के योग साधनाओं को सीखा। प्रख्यात योग गुरु स्वामी मुक्तरथ एवं इनके सहयोगी नीतीश कुमार ने सूर्यमस्कार, शशांकासन, विपरीतकरनी मुद्रा, शाम्भवी मुद्रा, प्राणायाम और कीर्तन के अभ्यासों को कराया।स्वामी मुक्तरथ ने कहा हम अपने बिहार योग परंपरा की शिक्षा देने हेतू कृतसंकल्पित हैं। यह शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकाश में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। बिहार योग परम्परा दुनिया की सर्वोत्तम योग शिक्षा है जिसमें समग्र योग की साधनायें हैं। यह शिक्षा परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती की दी हुई वैज्ञानिक योग शिक्षा है जिससे मनुष्य को शारीरिक और मानसिक बल के साथ सामाजिक  उत्थान करने की शिक्षा मिलती है।

दशकों की कानूनी लड़ाई से विहिप ने बचायी 123 सरकारी संपत्तियां
Published / 2023-02-21 08:04:18
दशकों की कानूनी लड़ाई से विहिप ने बचायी 123 सरकारी संपत्तियां

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद की दिल्ली राज्य इकाई इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में स्थित 123 प्रमुख भू-संपत्तियों को बचा लिया है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने कहा कि यह बताते हुए हमें खुशी हो रही है कि लगभग 40 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हमने लगभग 20 हजार करोड़ मूल्य की 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड के अवैध कब्जे में जाने से बचाया है।उन्होंने कहा कि 1910 के आसपास भारत सरकार ने देश की नई राजधानी के लिए दिल्ली में विशाल संपत्तियों का अधिग्रहण किया। अधिग्रहण पूरा हो गया और संपत्तियां सरकार में निहित हो गयी थीं। 70 के दशक के अंत में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अधिग्रहीत संपत्तियों में से 123 को वक्फ संपत्तियों के रूप में अधिसूचित किया, जिनमें से कई रणनैतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित थीं। सरकार ने सभी 123 मामलों में दावा ठोका।श्री आलोक कुमार ने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से तत्कालीन केंद्रीय वक्फ और आवास मंत्री श्री फखरुद्दीन अली अहमद के कहने पर सरकार ने इन 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को स्थाई पट्टे पर एक रुपये प्रति वर्ष के किराये पर देने का फैसला किया। यह आदेश दिनांक 27 मार्च 1984 को पारित किया गया था।उन्होंने बताया कि उन सभी संपत्तियों को बचाने के लिए त्वरित कार्रवाई करते हुए इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद ने 1984 के डब्ल्यूपी (सिविल) 1512 द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में उस अधिसूचना को चुनौती दी। माननीय उच्च न्यायालय ने पहली ही सुनवाई में प्रस्तावित आदेश पर एकतरफा रोक लगा दी।श्री कुमार के अनुसार 12 जनवरी, 2011 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिट याचिका का निपटारा किया था, जिसमें भारत संघ को मामले पर नये सिरे से विचार करने और छह महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने आगे निर्देश दिया कि तब तक उच्च न्यायालय का 1 जून, 1984 को पारित अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। किंतु सरकार ने इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया।यह जानकर हैरानी हुई कि मनमोहन सिंह सरकार ने इस मामले की नये सिरे से जांच करने की बजाय 100 साल से अधिक समय पहले पूरी की गयी अधिग्रहण की प्रक्रिया को वापस ले लिया। इस संबंध में अधिसूचना 05 मार्च, 2014 को जारी की गई। ध्यान देने वाली बात है कि लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग की अधिसूचना से कुछ घंटे पहले ही सरकार ने यह अधिसूचना जारी की थी।उन्होंने बताया कि विहिप ने मुख्य चुनाव आयुक्त के समक्ष इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बता कर शिकायत की और इंद्रप्रस्थ वीएचपी ने इस अधिसूचना को डब्ल्यूपी (सी) संख्या 2901/2014 के अंतर्गत दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी। सरकार अपनी कार्रवाई का बचाव नहीं कर सकी और बयान दिया कि इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद की रिट याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में माना जाएगा और जल्द से जल्द उचित निर्णय लिया जायेगा।विहिप कार्याध्यक्ष के अनुसार सरकार ने मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति श्री एस के गर्ग (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति नियुक्त की। कमेटी ने दिल्ली वक्फ बोर्ड को कई नोटिस भेजे। वक्फ बोर्ड कमेटी के समक्ष नहीं आया। उसने कोई दावा दायर नहीं किया। इस प्रकार समिति को यह निष्कर्ष निकालना पड़ा कि बोर्ड के दावे की पुष्टि नहीं हुई है।श्री आलोक कुमार के अनुसार भारत सरकार ने दो सदस्यीय समिति के निर्णय को स्वीकार कर लिया है और इस प्रकार उक्त 123 संपत्तियां सरकार के पास बनी रहेंगी और वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित नहीं की जायेंगी। इस निर्णय के लिए उन्होंने दिल्ली के लोगों को बधाई दी। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद् के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

टीवी सेट से जी, स्टार, सोनी जैसे बड़े चैनल्स का प्रसारण बंद, लोग परेशान
Published / 2023-02-20 10:25:44
टीवी सेट से जी, स्टार, सोनी जैसे बड़े चैनल्स का प्रसारण बंद, लोग परेशान

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची और बोकारो समेत राज्य के कई जिलों के प्रमुख केबल टीवी नेटवर्क जैसे जी, सोनी और स्टार नेटवर्क के बड़े चैनल का प्रसारण बीते शाम शनिवार से पूरी तरह से बंद हो चुका है। इससे लोगों में काफी उलझन है कि केबल रिचार्ज होने के बावजूद टीवी पर चैनल्स नहीं देख पा रहे हैं। यह प्रसारण इन चैनल के ब्रॉडकास्ट द्वारा केबल टीवी पर बंद की गयी है। जिसमें ट्राई के नये आदेश (एंटीओ 3.0) न्यू टेरिफ ऑर्डर तहत कीमतों में वृद्धि को लेकर यह कदम उठाया गया था। वहीं, रिलायंस वीआई कॉम 18 मीडिया ने इससे अपने आपको अलग रखा है। इसके सारे चैनल प्रदर्शित किये जा रहे हैं। 1 फरवरी 2023 से इसका लागू किया गया है, पर एआईडीसीएफ (ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन द्वारा) द्वारा इसका विरोध किया गया। केबल ऑपरेटर्स का मानना है कि केबल व्यवसाय पहले से ही मंदी में चल रही है और इस तरह चैनल कीमतों में वृद्धि से व्यापार पर असर पड़ेगा। साथ ही छोटे शहरों में जहां पहले से ही प्रस्थितिया खराब है, वहां व्यापार पूरी तरह ठप हो जायेगा।नये नियम का विरोध : एआईडीसीएफ (ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन द्वारा फिलहाल एनटीओ 3.0 के खिलाफ केरल के उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुके हैं जिसकी सुनवाई 20 फरवरी को की जायेगी। नये नियम संशोधन एनटीओ 3.0 के तहत नियमानुसार ब्रॉडकास्टर चैनल्स को वृद्धि करने की अनुमति दी गयी थी। जिनका प्रसारकों द्वारा न्यूनतम बुके चैनल पैक की कीमत ₹19 निर्धारित की गयी, जो पहले ₹12 थी और ब्रॉडकास्टर्स का मानना है कि यह एक न्यूनतम दर की वृद्धि है क्योंकि पिछले 4 वर्षों में चैनल्स के कीमतों में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं हुई है।जेब पर पड़ेगा असर : अंत में यह उपभोक्ता और केबल ऑपरेटर के बीच एक नया चैलेंज होगा जिन्हें ब्रॉडकास्टर्स और केबल टीवी ऑपरेटर्स जहां पैक वृद्धि से चैनल्स के दाम भी बढ़ेंगे और इसे महीने का रिचार्ज भी बढ़ेगा, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

महामृत्युंजय नाथ मातंगी मंदिर में स्थापित हुए डेढ़ टन के नन्दी बाबा
Published / 2023-02-19 19:33:06
महामृत्युंजय नाथ मातंगी मंदिर में स्थापित हुए डेढ़ टन के नन्दी बाबा

टीम एबीएन, रांची। श्री नर्मदेश्वर महामृत्युंजय नाथ मातंगी मंदिर डाइमण्ड सिटी ओइना में शिव रात्रि के अवसर पर भण्डारा का आयोजन किया गया, जिसमें भण्डारा के साथ आंख की निःशुल्क जांच भगवान महावीर आई केयर की ओर से किया गया। भण्डारा मे हजारों लोग प्रसाद ग्रहण किये। वहीं सैकड़ों लोग आंख की जांच करवाये। मन्दिर की ओर से साल में सावन और शिवरात्रि में दो भण्डारा का आयोजन किया जाता है। शिव रात्रि के अवसर पर मयूरभंज ओडिशा से ग्रेनाइट पत्थर का डेढ़ टन वजन का चार फीट का नन्दी बाबा की भी स्थापना की गयी। यह जानकारी पंडित रामदेव पाण्डेय ने दी। इस अवसर पर डायमंड सिटी ओइना के सीइओ संजीव कुमार भी सपरिवार उपस्थित थे।

25 अप्रैल की इस तारिख से खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
Published / 2023-02-18 23:28:33
25 अप्रैल की इस तारिख से खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव के पांचवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम के कपाट इस यात्रा वर्ष मंगलवार 25 अप्रैल को प्रात:6 बजकर 20 मिनट पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलेंगे। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शनिवार को बाबा केदार के पंचकालीन गद्दी स्थल पर श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में आयोजित धार्मिक समारोह में पंचाग गणना पश्चात विधि-विधान से यह तिथि घोषित की गईं।बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, पंचगाई हक-हकूकधारियों सहित केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज तथा श्रद्धालुगणों, स्थानीय प्रशासन की उपस्थिति में आचार्य वेदपाठियों द्वारा श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि सुनिश्चित की गयी। केदारनाथ, बद्रीनाथ मंदिर समिति के प्रवक्ता डा हरीश गौड़ ने बताया कि 20 अप्रैल को भैरवनाथ जी की पूजा होगी तथा 21 अप्रैल शुक्रवार को भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली केदारनाथ प्रस्थान करेगी। इस दिन पंचमुखी डोली विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी विश्राम करेगी। इसके बाद 22 अप्रैल को रात्रि विश्राम हेतु डोली फाटा पहुंचेगी। आगामी 23 अप्रैल को पंचमुखी डोली फाटा से रात्रि विश्राम हेतु गौरीकुंड पहुंचेगी। 24 अप्रैल को पंचमुखी डोली गौरीकुंड से केदारनाथ धाम पहुंचेगी तथा 25 अप्रैल मंगलवार प्रात: 6 बजकर 20 मिनट पर केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ खुलेंगे। उल्लेखनीय है कि बदरीनाथ धाम के कपाट इस यात्रा वर्ष 27 अप्रैल गुरुवार को खुल रहे हैं। परंपरागत रूप से अक्षय तृतीया को श्री गंगोत्री- यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया 22 अप्रैल को है। अब चैत माह में गंगोत्री-यमुनोत्री मंदिर समितियों द्वारा कपाट खुलने की तिथियों की विधिवत घोषणा की जायेगी।

झारखंड में उर्दू एकेडमी के गठन की उठी मांग
Published / 2023-02-18 19:04:20
झारखंड में उर्दू एकेडमी के गठन की उठी मांग

डॉ कहकशां परवीन के सम्मान में सेमिनार, पुस्तक का विमोचन टीम एबीएन, रांची। अंजुमन फोरोग ए उर्दू के तत्वावधान में शनिवार को मेन रोड स्थित होटल सरताज में रांची विवि उर्दू विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ कहकशां परवीन के सम्मान में डॉ कहकशां परवीन का तखलीकी शऊर के विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। दो सत्रों में आयोजित सेमिनार के पहले सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर अहमद सज्जाद ने की। जबकि संचालन डॉ मुर्शीद ने किया।सेमिनार के पहले सत्र में डॉ मोकम्मल हुसैन द्वारा लिखी गई किताब डॉ कहकशां परवीन फिक्री व फन्नी जहात का विमोचन किया गया। पुस्तक के लेखक डॉ मोकम्मल हुसैन ने अपने संबोधन में डॉ कहकशां परवीन की जीवनी पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।  सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ सरवर साजिद व्याख्याता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने अपने संबोधन में कहा कि आज उर्दू के बड़े-बड़े विद्वानों को लोग भूलते जाते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उर्दू के सभी विद्वानों को आज सम्मान देने की आवश्यकता है। ताकि नई नस्ल उनकी खिदमात का जान सके।  सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे डॉ अहमद सज्जाद ने अपने संबोधन में डॉ कहकशां परवीन की खिदमात को सराहते हुए डॉ मोकम्मल हुसैन की किताब की तारीफ की। उन्होंने कहा कि किताब से लोगों को डॉ कहकशां परवीन को जानने एवं समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि उर्दू के विकास के लिए आगे आने की जरूरत है। सभी लोग अपने अपने घरों में उर्दू अखबार एवं उर्दू रिसाले अवश्य खरीदें।  डॉ कहकशां परवीन ने सम्मान के लिए अंजुमन फरोग ए उर्दू का शुक्रिया अदा किया और कहा कि उर्दू के विकास के लिए इस तरह के सेमिनार जरूरी है। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में उर्दू के विद्वानों की कमी नहीं है। लेकिन आज वह विलुप्त होते जा रहे हैं। आशा है कि अंजुमन फरोग ए उर्दू  ऐसे विद्वानों को सम्मानित एवं उर्दू के विकास में बढ़ेगा।  सेमिनार को गुलाम सरफराज पीआरओ झारखण्ड विधानसभा, डॉ मो अय्यूब एचओडी उर्दू विभाग डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि, खुर्शीद परवेज सिद्दीकी, अबरार अहमद, डॉ जेबा एवं महफूज आलम ने भी संबोधित किया। अतिथियों ने अलग राज्य गठन के 22 साल गुजर जाने के बावजूद अबतक झारखंड में उर्दू एकेडमी के गठन नहीं होने पर चिंता जताई। कहा कि झारखंड में उर्दू एकेडमी नहीं होने के कारण उर्दू के विद्वानों को उचित मंच नहीं मिला रहा है और न ही उर्दू का विकास हो पा रहा है। सभी अतिथियों ने एक स्वर में राज्य सरकार से झारखण्ड में जल्द से जल्द उर्दू अकैडमी के गठन की मांग की।  सेमिनार के दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ सरवर साजिद ने की जबकि संचालन सुहैल सईद ने किया। दूसरे सत्र में शाकिर तस्सनिम एवं अख्तर आजाद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। दूसरे सत्र में विभिन्न कॉलेजों एवं विभागों के छात्र एवं छात्राओं द्वारा मकाल पढ़े गये।  सेमिनार को कामयाब बनाने में अंजुमन फरोग उर्दू के अध्यक्ष मो इकबाल, डॉ गालिब नश्तर, डॉ शाहनवाज खान नमकीन,दानिश अयाज, वसीम अकरम, राशीद जमाल, अब्दुल अहद सहित अंजुमन के अन्य सदस्यों ने अहम भूमिका निभायी। उक्त जानकारी अंजुमन फरोग ए उर्दू के अध्यक्ष मो इकबाल (99735 11643) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। बताते चलें कि डॉक्टर मुकम्मल झारखंड विधानसभा में उर्दू शाखा के सहायक हैं।

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