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5,000 वर्षों से अधिक पुराना है योग का इतिहास
Published / 2023-02-15 13:23:56
5,000 वर्षों से अधिक पुराना है योग का इतिहास

एबीएन सोशल डेस्क। योग एक प्राचीन भारतीय कला एवं विज्ञान है जो मनुष्य के भौतिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर स्वास्थ्य एवं जीवन कल्याण प्रदान करता है। योग का इतिहास 5000 वर्षों से अधिक है। योग शब्द संस्कृत के "युज" धातु से आया है, जिसका अर्थ है विलीन होना। भारत में योग की विभिन्न शैलीयों एवं अभ्यास क्रमों का पालन किया जाता है। योग के आध्यात्मिक अर्थ का उल्लेख वेद, उपनिषद तथा भगवद् गीता जैसे प्राचीन ग्रंथों में किया गया है। कई प्रसिद्ध योग गुरुओं ने योग का व्यवस्थित अभ्यास विधियों एवं स्वास्थ्य लाभें का संकलन किया है। उनमें से पतंजलि योग सूत्र एवं हठ योग प्रसिद्ध हैं। पतंजलि योग सूत्र मुख्य रूप से आठ अंगों की व्याख्या करता है। जैसे : आचार (यम), नियम का पालन (नियम), शारीरिक अनुशासन (आसन), नियमित श्वास प्रश्वास साधना (प्राणायाम), इन्द्रिय निग्रह (प्रत्याहार), एकाग्रता (धारणा), ध्यान तथा चेतना की उच्च अवस्थाओं को उजागर करना (समाधि)।प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) भारतीय एवं पश्चिमी दर्शन पर आधारित दवारहित चिकित्सा प्रणाली है। नेचुरोपैथी शब्द 1895 में जॉन शील ने दिया और इसे अमेरिका में बेनेडिक्ट लस्ट ने लोकप्रिय बनाया। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन शैली प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार जीयें, प्राकृतिक चिकित्सा, शरीर की प्राण शक्ति एवं आंतरिक शारीरिक प्रक्रियाओं में सुधार लाकर खुद को स्वस्थ बनाने की स्वयं की क्षमता पर आधारित है। पंचमहाभूत सिद्धांत, रोगकारक पदार्थ सिद्धांत, प्राण शक्ति सिद्धांत जैसे प्राकृतिक चिकित्सा के अवधारणाएं, मनुष्य के सभी स्तर पर स्वास्थ्य एवं बीमारी की व्याख्या करती हैं। जल चिकित्सा, मालिश चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, आहार चिकित्सा इत्यादी प्राकृतिक चिकित्सा के कुछ बुनियादी उपचार पद्धती हैं।निवारक, सहायक एवं पुनर्वास चिकित्सा के रूप में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न क्रमों की प्रभावकारिता को अनुसंधान ने प्रमाणित किया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धती के साथ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का संयोग, रोगों के बोझ को कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा एवं जीवन कल्याण हेतु उपयोगी है।आज हर व्यक्ति कोलेस्ट्राल का बढ़ना, डायबिटीज, आंखों में सूखापन-पानी गिरना, मांसपेशियां-जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, मोटापा, कब्ज, नींद नहीं आना, श्वांस रोग, ब्लड प्रेशर, लंबाई बढ़ाना, प्रसव के दौरान दर्द होने वाले दर्द को कम करना, डिप्रेशन जैसी अनेक बीमारियों का इलाज योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के जरिये बिना दवा के इलाज हो सकेगा।अलग-अलग थैरेपियों से किया जायेगा मरीजों का इलाजप्राकृतिक चिकित्सा के जरिए होने वाले इलाज में मड, हाइड्रो, मासो थैरेपी, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, क्रोमोथैरेपी, उपवास चिकित्सा, आहार-विहार चिकित्सा, वायु चिकित्सा, चुंबकीय चिकित्सा, मड पैक, मड और पूल बाथ, स्टीम बाथ, सन बाथ, क्रोमो बाथ, गीला चादर पैक, छाती पैक, पेट पैक, ट्रंक पैक, घुटना पैक, गीले करधनी पैक, गर्दन पैक, हरी पत्तियों वाली सन बाथ, कोलन सिंचाई, डीलक्स हाइड्रो मसाज, रंग चिकित्सा, रिफ्लेक्सोलोजी, फिजियोथैरेपी, इलेक्ट्रोथैरेपी, एनीमा-गर्म पानी, छाछ व नारियल पानी आदि।योग में इस्तेमाल होने वाला प्राणायाम, जलनेति, षटकर्म, आभ्यांतर त्राटक, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, शीतली, ध्यान, नांद ध्वनि, ज्ञान और सूर्य मुद्रा।नटराज योग एवं वैलनेस सेंटर एवं इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष आर्य प्रहलाद भगत का कहना है कि शरीर पांच तत्वों-हवा, पानी, आकाश, आग व मिट्टी से मिलकर बना है। प्राकृतिक संतुलन के आधार पर जीवन जिया जाये तो बीमारी पास आयेगी ही नहीं। पांच तत्वों से बना शरीर अगर बीमार पड़ भी जाये, तो उसे इन्हीं तत्वों के से ठीक किया जाना ही प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) है।आर्य प्रहलाद भगत की उपलब्धि :- झारखंड के राज्यपाल द्वारा योग रत्न सम्मानयोग में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डइंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन प्रदेश उपाध्यक्ष (झारखंड)स्नातकोत्तर योग विज्ञान 2 बार नेट क्वालिफाइडराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा)

17 से होगा छह दिवसीय इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल
Published / 2023-02-15 11:42:39
17 से होगा छह दिवसीय इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल

एबीएन सोशल डेस्क। इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल ऑफ इंडिया भारत रंग महोत्सव का आयोजन रांची में शुक्रवार से होने जा रहा है। इसका आयोजन 17 फरवरी से लेकर 22 फरवरी तक मोरहाबादी के आर्यभट्ट सभागार में किया जायेगा।कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन, कला-संस्कृति और युवा और खेल विभाग के साथ ही रांची यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस छह दिवसीय कार्यक्रम में छह थिएटर परफॉर्मेंस होंगे। इसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और बिहार के ग्रुप अपनी प्रस्तुति देंगे। ये प्रस्तुतियां हिंदी, उर्दू, उड़िया, असमी और बंगाली भाषाओं में प्रदर्शित की जायेंगी। इस थिएटर फेस्टिवल का आयोजन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा द्वारा 22वें भारत रंग महोत्सव के रूप में किया जा रहा है। देश के 10 शहरों में इस कार्यक्रम का आयोजन 26 फरवरी तक हो रहा है।

लोहरदगा : ललित नारायण स्टेडियम में मना मातृ-पितृ पूजन दिवस
Published / 2023-02-14 22:18:13
लोहरदगा : ललित नारायण स्टेडियम में मना मातृ-पितृ पूजन दिवस

भारतीय संस्कृति में माता-पिता देवतुल्य : रवि कुमार  टीम एबीएन, लोहदरगा। विश्व हिन्दू एकता मंच, स्वराज मेरा अधिकार योग वेदांत सेवा समिति के तत्वावधान में 14 फरवरी को स्थानीय ललत नारायण स्टेडियम लोहरदगा में मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया गया।  जिसमे सैकड़ो बच्चों ने अपने अपने माता पिता की पूजा कर भाव प्रकट किया।   इस आयोजन में माता पिता और बच्चे भाव-विभोर हो गए।  बच्चों ने इस मौके पर अपने माता पिता के चरण पखारे, उनका तिलक वंदन किया और आरती उतारी।  कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश और सरस्वती वंदना से हुआ।  मौके पर विश्व एकता मंच के राष्ट्रीय सचिव रवि कुमार ने कहा कि आज हम सभी संकल्प ले कि प्रत्येक वर्ष 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाते हुए समाज रूपी बगिया को गुलशन बनाते हुए वैलेंटाइन डे को विदा करेंगे।   उन्होंने कहा कि पाश्चात्य कुसंस्कृति ने आज युवाओं को दिग्भ्रमित और संस्कारहीन बना रहा है। अत: भारतीय सभ्यता व संस्कृति की उज्ज्वलता को और सशक्त बनाने के लिए हम सभी को माता-पिता व गुरुजनों के आशीर्वाद और अनुशासन द्वारा आगे आना होगा। कहा कि भारत जो विश्व में अपनी संस्कृति और संतों के लिए प्रसिद्ध है, उस देश में पाश्चात्य सभ्यता की गन्दगी न आने पाए इसके लिए हर हिंदुस्तानी का कर्त्तव्य बनता है कि माता-पिता की आराधना करे, पूजा करे।  मौके पर दिनेश महतो, विनोद प्रसाद, शिवशंकर सिंह, सुधीर अग्रवाल, सचिन चंदल गोयल, अजय प्रसाद, कोशल कुमार, नेहा प्रजापति, दुर्गा प्रजापति, प्रेम प्रजापति, नंदलाल पंडित, अशोक कास्यकार, विवेक कुमार, किरन कुमारी, दीपक साहू समेत बड़ी संख्या में माता-पिता बच्चे व नगर के गणमान्य उपस्थित थे। मौके पर अजय प्रसाद, सुधीर, किनेश्वर, शिवशंकर, दिनेश ने आदि ने वैलेंटाइन डे का बहिष्कार करते हुए अभिभावकों से अपील की है कि समाज मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाकर अपनी संस्कृति एवं सभ्यता को मजबूती प्रदान करे।

सत्यानंद योग मिशन रांची केंद्र में मना स्वामी निरंजनानंद सरस्वती का जन्मदिन
Published / 2023-02-14 19:37:19
सत्यानंद योग मिशन रांची केंद्र में मना स्वामी निरंजनानंद सरस्वती का जन्मदिन

टीम एबीएन, रांची। सत्यानंद योग मिशन रांची केंद्र में आज विश्व गुरु परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती (परमाचार्य बिहार योग विद्यालय मुंगेर) का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। संन्यासी मुक्तरथ के सान्निध्य में योगाभ्यासी, भक्त-जन ने ध्यान और भजन, कीर्तन किये। रांची स्थित कांके रोड, सरोवर एनक्लेव में गुरु पूजन हुआ और मुक्तरथ जी ने कई भजनों को प्रस्तुत किये। निरंजन रूप जय गुरुदेव..., गुरुदेव तुम्हारी जय जय हो... आदि भजनों से मुक्तरथ जी सभी को सराबोर कर दिये। स्वामी निरंजनानंद सरस्वती का जन्म आज ही के दिन 14 फरवरी 1960 को मध्यप्रदेश के राजनंदगांव में हुआ था। 1964 में इनका आगमन मुंगेर स्थित बिहार योग विद्यालय में हुआ। सात वर्ष की उम्र में इन्होंने परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती से संन्यास दीक्षा प्राप्त कर मानवता के लिए अपने को समर्पित कर दिए और विश्व के जनमानस को इन्होंने योग अमृत प्रदान किये।

एसआर डीएवी पुंदाग में मना मातृ-पितृ पूजन समारोह
Published / 2023-02-14 18:00:19
एसआर डीएवी पुंदाग में मना मातृ-पितृ पूजन समारोह

संस्कारयुक्त शिक्षा ही संपूर्ण शिक्षा : प्राचार्य एसके मिश्राटीम एबीएन, रांची। आज एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में मातृ-पितृ पूजन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें एलकेजी से द्वितीय संवर्ग के विद्यार्थियों के तकरीबन 500 अभिभावकों ने शिरकत किया। मौके पर पर बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकदीर्घा का मन मोह लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान दीप के प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मौके पर ईईडीपी शिक्षिकाओं ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। तत्पश्चात बच्चों ने संगीत, नृत्य, लघुनाटिका आदि की शानदार प्रस्तुति दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान अभिभावक अपने छोटे बच्चों की मोहक प्रस्तुति देख भावुक नजर आये। प्राचार्य श्री संजय कुमार मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का विशेष दिन माता-पिता के नाम समर्पित है। बच्चों में अपने माता-पिता एवं गुरुजनों के प्रति अगाध प्रेम विकसित करने की जरूरत है। आज की स्थिति में माता-पिता दोनों कामकाजी हैं, वे अपने बच्चों के साथ अधिक समय नहीं बिता पाते। आज के परिप्रेक्ष्य में माता-पिता और बच्चों  के संबंध में प्रगाढ़ता होनी चाहिए। हमें बच्चों को उनकी जिम्मेदारी हमेशा बतानी चाहिए तथा उनके प्रति प्यार व्यक्त करने में भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए। उन्हें हर हाल में अनुशासन तथा संस्कार से जोड़कर रखना चाहिए। अति सर्वत्र वर्जयेत् के सिद्धांत का पालन करते हुए बच्चों से संतुलित व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने डीएवी प्रबंधन के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि डीएवी पुंदाग संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु कृतसंकल्प है। कार्यक्रम को सफल बनाने में ईईडीपी के सभी शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा। शिक्षिका रंजू पांडे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कांके रोड शिव मंदिर प्रांगण से इस बार निकलेगी शिव बारात
Published / 2023-02-13 19:02:33
कांके रोड शिव मंदिर प्रांगण से इस बार निकलेगी शिव बारात

टीम एबीएन, रांची। कांके रोड शिव मंदिर प्रांगण में इस बार शिव बारात का आयोजन किया जा रहा है। आज महाकालेश्वर शिव मंदिर समिति और दुर्गा पूजा समिति की संयुक्त बैठक में इस आयोजन का निर्णय लिया गया। समिति के वरिष्ठ सदस्य सकलदेव सिंह की अध्यक्षता में बैठक बुलायी गयी, जिसमें दुर्गा पूजा समिति के सचिव नकुल तिर्की ने बतलाया कि कांके रोड से इस बार शिव बारात का आयोजन श्री कालेश्वर मंदिर मिसिर गोंदा से निकलकर गांधी नगर कांके रोड होते हुए जवाहर से झांकी के साथ शिव मंदिर गोंदा टाउन के प्रांगण में पहुंच कर शिव विवाह का आयोजन होगा। कोषाध्यक्ष राजेश रजक ने कहा कि पहली बार इस तरह का आयोजन हो रहा है। इसलिए सभी इसमें तन-मन से लग कर सफल बनाने में सहयोग करें। शृंगार दल का नेतृत्व श्रवण कुमार, संरक्षक कालेश्वर मंदिर समिति और श्री गोंदरा उरांव, रमेंद्र कुमार करेंगे। इस बार शिव-पार्वती, गणेश जी के साथ भूत पिशाच से लेकर सभी शिव भक्त बारात में शामिल रहेंगे। आज की बैठक में श्री राजा भट्टाचार्य, छोटन लोहार, विनय कुमार, विश्वनाथ सरकार, प्रदीप लकड़ा, विवेक गर्ग, मोनू सिंह, श्री सुधीर सिंह,बप्पा दास, सहित काफी। संख्या में शिव भक्त उपस्थित हुए।

18 को देवघर में उतरेगा शिवलोक, निकलेंगी जी-20 समिट की झांकियां
Published / 2023-02-13 12:01:25
18 को देवघर में उतरेगा शिवलोक, निकलेंगी जी-20 समिट की झांकियां

टीम एबीएन, देवघर/ रांची। देवघर में कोरोना के बाद शिव बारात निकालने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। इस बार भी बाबाधाम में शिवलोक को उतारने की तैयारी चल रही है। बारात का मुख्य आकर्षण मानव-दैत्य और पंचनी चुड़ैल होगा। साथ ही जी-20 समिट से संबंधित झांकी होगी।शिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष अभिषेक आनंद झा ने बताया कि पूरे शहर को और बारात रूट को चंदन नगर के आकर्षक विद्युत सज्जा करके दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।बाबा भोले की बारात में आने वाले एक-एक भक्त ही कार्यक्रम के सुरक्षा कवच हैं। शहरवासियों, पुलिस व प्रशासन की सहायता से शिव बारात का सफल आयोजन होगा। समिति की ओर से करीब एक हजार से अधिक वॉलेंटियर की तैनाती होगी। तीन साल के बाद शिव बारात निकाली जा रही है। इसलिए बाबाधाम में भारी भीड़ होने की संभावना है। जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि 18 फरवरी को ड्राई डे घोषित किया जाये, ताकि शराब की दुकानें बंद रहे।

मजहबी कट्टरता और जनसंख्या असंतुलन पर लगे लगाम : सुरेंद्र जैन
Published / 2023-02-12 18:19:53
मजहबी कट्टरता और जनसंख्या असंतुलन पर लगे लगाम : सुरेंद्र जैन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आज मेरठ महानगर के सर्किट हाउस में पत्रकार बंधुओं को सम्बोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा कि आज देश के सामने बढ़ती जनसंख्या असंतुलन बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है।अभी उत्तर प्रदेश सरकार ने इस विषय पर बहुत बड़ी पहल की है उत्तर प्रदेश सरकार इस पर एक क़ानून बनाने के लिए विचार कर रही है विश्व हिंदू परिषद योगी आदित्यनाथ जी से अपील करता है जनसंख्या नियंत्रण पर जल्द क़ानून बने। जनसंख्या असंतुलन देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधक है। इसी के कारण भूतकाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। जमीयत उलेमा हिन्द एवं देवबंद के दोगले चहरे को आज पूरा भारत देख रहा है। ये लोग कभी भी किसी आतंकवादी के खिलाफ फतवा जारी नहीं करते लेकिन अगर कोई भारत एवं हिंदू समाज की बात करता है तो उसके लिए अनेक फतवे जारी हो जाते हैं। पिछले दिनों एक शिव भजन गाने पर एक यूट्यूबर पर तो फतवा जारी किया, लेकिन शिव विहार में हुए नरसहार पर किसी के मुंह से एक शब्द नहीं निकला क्या ये दोहरा मापदंड नहीं है। जबकि मीडिया रिपोर्ट और अनेकों एजेंसियों ने साफ कहा था ये कार्य देवबंद के कट्टरपंथी विद्यार्थियों ने किया है।ये लोग सर तन से जुदा करने वाले लोगों को पीड़ित बताते हैं लेकिन देश की एकता अखंडता की बात करने वाले लोग इनकी नज़रों में देश के दुश्मन है। क्योंकि इनकी विचारधारा बाबर, औरंगज़ेब, हफीज और लादेन से मिलती है।जैन ने आगे कहा सीएए का विरोध करने वालो में देवबंद और इस्लामिक जमात सबसे आगे रही है इनके लोग ही सड़कों पर उतर कर उग्र प्रदर्शन कर रहे थे। मेरा सवाल है देवबंद और जमीयत उलेमा हिन्द से क्या वो इन हत्यारों के साथ खड़े हैं? इन आतंकवादियों से जमीयत का क्या संबंध है?आज भारत में रहने वाले सभी मुस्लिमों एवं सम्पूर्ण इस्लामिक जमात से मेरा प्रश्न है आप लोगों के पूर्वज कौन थे, जिन हिंदुओं को तुम काफिर कहते हो उनके पूर्वज और तुम्हारे पूर्वज एक ही है। जमीयत उलेमा हिन्द को दारुल इस्लाम पर अपना मत स्पष्ट करना होगा। अपना दोहरा चरित्र बदल कर हिंदू समाज के साथ नये भारत के निर्माण में अपना सहयोग देना ही होगा। आज पूरा विश्व भारत को महाशक्ति बनते देख रहा है। आने वाली शताब्दी भारत की होगी ये बात कट्टरपंथी जमात और इसको मानने वाले लोगों को समझ जानी चाहिए।कुछ राक्षस प्रवृति के लोग आज श्रीराम चरित मानस पर उंगली उठा रहे है जिन लोगों को भाषा एवं धर्म का ज्ञान भी नहीं उनको समझना चाहिए। इस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी करने से पहले विचार करे हिंदू समाज सदा से सहिष्णु रहा है। यही टिप्पणी अगर किसी अन्य धर्म पर की होती तो अब तक अनेक फतवे जारी हो गये होते, लेकिन हिंदू समाज इतने बड़े अपमान पर भी शांत रह गया यही हिंदू धर्म की विशेषता है।उन्होंने आगे कहा पंडित का अर्थ विद्वान होता है, लेकिन लोगों ने पंडित का अर्थ ब्राह्मण समझ लिया इसी वजह से अर्थ का अनर्थ हो गया भारत में आदि काल से वरण कर्म के अनुसार रहा है न कि जन्म के अनुसार।भारत में रहने वाले लोगों को भारत के संविधान से चलना होगा, भारत को माता एवं भारत के राष्ट्रपुरुषों को मनन करना ही होगा तभी इस देश की उन्नति एवं प्रगति संभव है। प्रेसवार्ता में प्रांत सहमंत्री राजकुमार डूंगर जी साथ रहे। उक्त जानकारी मेरठ विश्व हिंदू परिषद के महानगर प्रचार प्रमुख मधुवन आर्य ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

मीरा सिंह की पुस्तक अनकही यादें का शानदार लोकार्पण
Published / 2023-02-11 23:47:26
मीरा सिंह की पुस्तक अनकही यादें का शानदार लोकार्पण

एबीएन सोशल डेस्क। मीरा सिंह की पुस्तक अनकही यादें का लोकार्पण बहुत ही भव्य तरीके से होटल जेड स्क्वायर में किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के जाने माने कवि और कवियत्रियां शामिल रहे। पुस्तक की समीक्षा  अशोक प्रियदर्शी जी, माया प्रसाद जी, सुरिंदर कौर, नीलम जी, सारिका भूषण जी, शालिनी शह्बा जी और मीना बंधन ने किया।मीरा जी की यह पुस्तक पद्म संग्रह है और इसमें उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियां, लोगों की स्वार्थी सोच, स्त्रियों पर होते घरेलू हिंसा देखकर भी लोगों कि मौन रहना इन सब को उकेरने की सार्थक कोशिश की है। मीरा सिंह ने अपनी यादों को समेटने की पूरी कोशिश इस पुस्तक में की है और इसमें वो पुरी तरह सफल भी रही हैं। मीरा जी का पुरा परिवार और उनके मित्रगण उनके इस पुस्तक लोकार्पण में उनका मनोबल बढ़ाने के लिए सम्मिलित रहे।

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