Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
होम देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

समाज

View All
सच्ची साधना से मिलते हैं भगवान : पंडित मधुसूदन शास्त्री
Published / 2023-02-10 22:31:29
सच्ची साधना से मिलते हैं भगवान : पंडित मधुसूदन शास्त्री

एबीएन सोशल डेस्क। अयोध्या के मशहूर कथावाचक पंडित मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि कलयुग में मनुष्य यदि सच्ची साधना के साथ भगवान की आराधना करें, तो सेवक के रूप में भी भगवान मिलते हैं। श्री शास्त्री शुक्रवार को पलामू जिले के तरहसी प्रखंड स्थित टंडवा नौगढ़ ग्राम में श्रीराम महायज्ञ के अवसर पर श्रद्धालुओं को कथा वाचन के क्रम में उपरोक्त प्रसंग का उद्धरण किया। उन्होंने भगवान श्री राम के वात्सल्य रूप का अनुपम ढंग से वर्णन किया। टंडवा ग्राम में पिछले 8 फरवरी से 9 दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का संचालन किया जा रहा है। प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु परिक्रमा के उपरांत कथा का श्रवण करने क लिए पहुंच रहे हैं। उदयपुरा नौगढ़ सॉनपुरा सहित कई पंचायत के हजारों श्रद्धालु दिन-रात यज्ञ में आकर अयोध्या से आये हुए प्रवक्ता किरण शास्त्री और संत शिरोमणि श्रीश्री 1008 बलराम शरण बापू का भी प्रवचन सुन रहे हैं। रात्रि 9 बजे के बाद अयोध्या से आये हुए मशहूर कलाकार रामलीला की बेहतर प्रस्तुति देरहे हैं। रात्रि में रावण का अत्याचार प्रसंग का बहुत ही मनोरम ढंग से कलाकारों ने मंचन किया। यज्ञ में धार्मिक सांस्कृतिक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी पहुंचकर अपनी आहुति दे रहे हैं और संत शिरोमणि से आशीर्वाद ले रहे हैं। इस क्रम में डॉ भीम प्रभाकर ने संत शिरोमणि बलराम शरण बापू से आशीर्वाद लिया। यज्ञ में स्थानीय लोग भरपूर सहयोग कर रगे हैं। 24 घंटे का अखंड कीर्तन के साथ-साथ भंडारा का भी आयोजन किया गया है। प्रत्येक दिन सैकड़ों की संख्या में यज्ञ में आये श्रद्धालु भंडारा में भोजन कर रहे हैं।

पाप के विरुद्ध संग्राम के संकल्प के साथ मनेगा नीलकंठ दिवस : आनंद मार्ग
Published / 2023-02-10 18:22:13
पाप के विरुद्ध संग्राम के संकल्प के साथ मनेगा नीलकंठ दिवस : आनंद मार्ग

टीम एबीएन, पलामू/ रांची। आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी को बिहार के पटना बांकीपुर केंद्रीय कारागार में 12 फरवरी 1973 को दवा के नाम पर विष का  दिया गया था। अपने ही अनुयायियों की हत्या करवाने के झूठे आरोप में इंदिरा सरकार की तानाशाही व्यवस्था ने आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी को गिरफ्तार कर बांकीपुर जेल भेज दिया गया। एक सेल में बंद अस्वस्थ वातावरण में बहुत दिनों तक रहने से बीमार पड़ना स्वाभाविक था। जेल के अंदर बाबा बीमार पर गए उस समय जेल के चिकित्सक डॉ एचके घोष थे। जान बूझकर सरकार ने डॉ घोष  को बदलकर एक दूसरे चिकित्सक डॉ रहमतुल्ला खान को ले आया। श्री श्री आनंदमूर्ति जी "बाबा "उस समय काफी बीमार चल रहे थे। 12  फरवरी को काफी बीमार पड़ गए 11 बजे रात को डॉ रहमतुल्ला खान ने बाबा को दवा के नाम पर विष का कैप्सूल दिया। फिर क्या था बाबा बेहोश हो गए, उनके शरीर सिकुड़ने लगे, आंखों की रौशनी चली गयी, शरीर दुर्बल हो गया, मस्तिष्क में असहनीय पीड़ा एवं निष्क्रियता का बोध होने लगा। बाबा की किसी तरह जान बच गई। बाबा ने दवा के नाम पर विष प्रयोग की जांच की मांग राष्ट्पति, प्रधानमंत्री एवं बिहार के राज्यपाल से की परंतु पत्रों के अवहेलना कर सरकार ने विष प्रयोग की न्यायिक जांच करने की अपील को ठुकरा दिया। तब बाबा ने सरकार को सूचना दे कर अप्रैल 1973 को अन्न यानि ठोस भोजन को त्याग कर उपवास आरम्भ आकर दिया न ही सरकार ने विष प्रयोग की जांच करवायी और न ही बाबा ने अपना उपवास तोड़ा। 5 वर्ष 4 महीने 2 दिन  तक उपवास जारी रहा।पटना हाई कोर्ट द्वारा हत्या मामले से बरी हो 2 अगस्त 1978 बाबा जेल से रिहा हो गए। तब से ही आनंद मार्ग के अनुयायियों द्वारा पाप शक्ति के विरुद्ध अनवरत संग्राम का संकल्प एवं जरूरतमंदों की सेवा प्रत्येक वर्ष 12 फरवरी को पूरे विश्व भर में की जाती है।

योग ने मुझे मानसिक और शारीरिक पीड़ा से बाहर निकाला : द्रौपदी मुर्मू
Published / 2023-02-10 18:20:49
योग ने मुझे मानसिक और शारीरिक पीड़ा से बाहर निकाला : द्रौपदी मुर्मू

ओडिशा : लिंगराज मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राम देवी महिला विवि के दूसरे दीक्षांत समारोह को राष्ट्रपति ने किया संबोधित एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने दो दिवसीय ओडिशा दौरे पर शुक्रवार को भुवनेश्वर पहुंचीं, इस दौरान वह लिंगराज मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद राम देवी महिला विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इसके बाद वह धर्मार्थ संगठन, ज्ञानप्रभा मिशन के स्थापना दिवस समारोह में भी शामिल हुईं जहां उन्होंने अपना संबोधन दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने योग को महत्व को बताया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जब वह मानसिक और शारीरिक पीड़ा में थीं तब योग ने उनकी मदद की थी, जबकि इसके नियमित अभ्यास से लोगों को जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।  मैं आज यहां आपके सामने खड़ी हूं और आपसे सिर्फ योग के कारण बात कर रहा हूं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने का मंत्र है। राष्ट्रपति मुर्मू ने योग के अभ्यास की आवश्यकता पर जोर दिया, जो नागरिकों को आध्यात्मिक रूप से विकसित करने में मदद कर सकता है, जिससे व्यक्तियों और पूरे देश का समग्र विकास हो सके। योग आत्मा और देवत्व के बीच एक संबंध के रूप में कार्य करता है : राष्ट्रपति बता दें राष्ट्रपति मुर्मू ने 2015 में झारखंड की राज्यपाल बनने से पहले बहुत कम समय में अपने दो बेटों, पति और भाई को खो दिया। मुर्मू ने सभी से अपने शरीर और मन को ठीक रखते हुए बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने की अपील करते हुए कहा कि योग आत्मा और देवत्व के बीच एक संबंध के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक जागृति के लिए प्रयास करने की जरूरत है।  यद्यपि मनुष्य के जीवित रहने के लिए धन और अन्य सामान की आवश्यकता होती है, राष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति को भौतिकवादी चीजों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए और आध्यात्मिक जागृति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो उसे एक नई ऊंचाई तक ले जाने में मदद करेगा।

भीतर की ऊर्जा को पहचानने  और जागृत  करनेवाला ही सफल छात्र : प्रशांत करण
Published / 2023-02-09 10:57:34
भीतर की ऊर्जा को पहचानने और जागृत करनेवाला ही सफल छात्र : प्रशांत करण

एबीएन सोशल डेस्क। डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल गांधीनगर में पूर्व आईपीएस अधिकारी श्री प्रशांत करण ने बच्चों  के सफल भविष्य के निर्माण से संबंधित विभिन्न विषयों  पर छात्र सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंदर के अग्नि तत्व को पहचानना चाहिए। अग्नि तत्व  ही ईश्वर है,  सफलता की ऊर्जा है। जो व्यक्ति अपने भीतर के अग्नि तत्व को पहचान कर उसे जागृत करता है, वही जीवन में सफलता अर्जित करता है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा बड़े बड़े सपनों को साकार रूप देने के लिए व्यक्ति को बड़े बड़े संकट भी झेलने पड़ते हैं।  दुर्भावनाओं से  ग्रस्त व्यक्ति जीवन में हमेशा तनाव में रहता है। कोई भी छात्र मानसिक एकाग्रता के बिना विद्या अर्जित नहीं  कर सकता। पुरुषार्थ के साथ अपने ध्यान को केंद्रित करना सफलता का लक्षण है।  व्यक्ति  को हमेशा अपना मूल्यांकन करना चाहिए। आत्म मूल्यांकन या आत्म निरीक्षण से  जहाँ भीतर की  दुर्बलता का ज्ञान होता है वहीं उसे सही  मार्गदर्शन भी मिलता है। उन्होंने अपने लम्बे वक्तव्य उन्होंने दूसरे की आलोचनाओं की चिंता न नहीं करना, आत्मा की  आवाज सुनना, छोटी समस्याओं से भयभीत होकर लक्ष्य से अपने कदमों को कभी पीछे नहीं हटाना आदि पर विस्तृत व्याख्यान दिये। उन्होंने छात्रों की विभिन्न शंकाओं, जिज्ञासाओं  के उत्तर भी दिये। इस अवसर पर प्राचार्य श्री एसके सिन्हा ने भी  छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जो दूसरे के अनुभवों को  सुनता है, मनन करता है वह भविष्य में सहायक होता है। मौके पर विद्यालय के शिक्षक पुष्प कुमार झा वैद्यनाथ मिश्र, कविता मुखर्जी, कांति दुबे आदि शिक्षक उपस्थित थे।

जीवन का सर्वोत्तम सुख है सृजनकर्म : डॉ मयंक मुरारी
Published / 2023-02-08 18:21:45
जीवन का सर्वोत्तम सुख है सृजनकर्म : डॉ मयंक मुरारी

एबीएन सोशल डेस्क। हम अपने जीवन में अक्षय सुख खोजते हैं, यह सुख केवल सृजनकर्म में ही मिलता है। उक्त बातें डॉ मयंक मुरारी ने कहीं। वह आज जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान के बाद विचार व्यक्त कर रहे थे। डॉ मयंक ने कहा कि  जीवन में जो भी जोड़ता है, वह आनंद को उपलब्ध होता है। जो भी क्रिएट करता है, जो भी सृजन करता है, जो भी बनाता है, वह आनंद को उपलब्ध होता है। रचना करना, सृजनकर्म से समाज में मूल्य, अध्यात्म और सनातन तत्वों को समावेशित करना लक्ष्य है। सदैव यह सवाल उठता है कि आपने जीवन में कुछ बनाया, कुछ सृजन किया, क्रिएट किया? आपके जीवन से कुछ निर्मित हुआ? कुछ सृजित हुआ, कुछ बना, कुछ पैदा हुआ? जो आप मिट जाएं और रहे, जो आप न हो और फिर भी हो। इसलिए लगातार समाज को केन्द्र में रखकर कर्म करता हूं। वैसे भी जिसके जीवन में जितनी सृजनात्मकता होती है, उसके जीवन में उतनी ही शांति और उतना ही आनंद होता है। जो लोग केवल मिटाते और तोड़ते हैं, वे आनंदित नहीं हो सकते हैं। मेरा मानना है कि हम कुछ सृजन करते हैं, तब ईश्वर का अंश हममें काम करने लगता है और जो  सारे जीवन को सृजनात्मक बना देता है। विगत 30 सालों से लगातार पढ़ने और लिखने का काम चल रहा है। पत्रकारिता के दौरान सैकड़ों आलेख लिखा। उसके अलावा भी 500 से अधिक आलेख और एक दर्जन किताब छप चुकी है। लेकिन अब भी कोशिश होती है कि कुछ निर्मित करें, कुछ बनाएं, जो हमसे बड़ा हो। आपका जीवन केवल समय का गूजरना न हो, बल्कि एक सृजन हो। वह सृजन चाहे छोटा-सा क्यों न हो, वह आपके प्रेम का कृत्य हो। जो लोग जीवन में सृजनात्मक हो पाते हैं, जो लाग भी जीवन में छोटे-से प्रेम के कृत्य को निर्माण दे पाते हैं।

पथिक ग्राम दुकान से पलामू के उत्पाद को राष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने की कोशिश
Published / 2023-02-08 16:18:46
पथिक ग्राम दुकान से पलामू के उत्पाद को राष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने की कोशिश

हुनर को मिली पहचान, रोजगार के अवसर हो रहे सृजितपर्यटकों को आकर्षित कर रहा पलामू का हस्तशिल्पसरकार के प्रयास से रोजगार से जुड़ रहे स्थानीय, घर से ही हो रहा हुनरमंदों के उत्पाद का व्यापारटीम एबीएन, पलामू/ रांची। पलामू में पर्यटन संवर्द्धन के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने की कोशिश हो रही है। पर्यटन स्थलों पर एक ओर जहां पर्यटकीय सुविधा बढ़ाई जा रही है। वहीं स्थानीय व्यक्तियों को हुनरमंद बनाने की दिशा में भी निरंतर कार्य हो रहे हैं। हुनर की पहचान मिले और लोग रोजगार से जुड़कर आमदनी बढ़ा सके, इसके लिए सरकार के साथ स्थानीय प्रशासन जुटी है। महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के पुरूष वर्ग को स्वयंसेवी संस्थाओं से जोड़कर रोजगार मुहैया कराई जा रही है। महिला-पुरूषों को हुनरमंद बनाने से लेकर उनके द्वारा निर्मित हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने का कार्य भी जोरो से चल रहा है। निर्मित वस्तुओं का उचित मूल्य मिले, इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। इसी कड़ी में शामिल है पथिक ग्राम दुकान।पलामू प्रमंडल के दुबियाखांड़-नेतरहाट मुख्य मार्ग पर सेसा प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में अवस्थित पथिक ग्राम दुकान में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा निर्मित हस्तशिल्पों को न केवल प्रदर्शित किया गया है, बल्कि बिक्री भी की जा रही है। यह दुकान दुबियाखांड से बेतला सड़क की ओर करीब 1.5 किलोमीट पर स्थित है। बेतला राष्ट्रीय उद्यान, केचकी संगम, पहाड़ों की रानी नेतरहाट जैसे नामचीन पर्यटन स्थलों सहित अन्य नैसर्गिक सुंदरताओं का दीदार करने पलामू पहुंच रहे पर्यटकों को सड़क के दोनों ओर घने वनों की सुंदरता के बीच अवस्थित पथिक ग्राम दुकान एक बार यहां रूकने का इशारा करता है।यहां भगवान बिरसा मुंडा, शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर, मेदिनीराय आदि की मूर्तियां उपलब्ध है। साथ ही जूट से बने पायदान, बैग, झारखंडी संस्कृति को जोड़ती कलात्मक वस्त्र, मिट्टी से बने डिजाइनर दीया, जूट, बांस एवं मिट्टी के आकर्षक गहने, स्टैंडिंग मॉडल, पेन-पेंशिल बॉक्स, जूट के थैले, माला, आर्टिफिशियल ज्वेलरी आदि सामग्री हल्के एवं उचित मूल्य पर उपलब्ध है।प्रशिक्षण देकर आजिविका को किया जा रहा सशक्त : नाबार्ड, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के हस्तशिल्प विभाग, वन विभाग की पलामू दक्षिणी वन प्रमंडल के सहयोग से जूट, बांस, मिट्टी के उपकरण बनाने का प्रशिक्षण समय-समय पर दिया जाता है। प्रशिक्षणार्थियों को आर्टिजन कार्ड भी उपलब्ध कराये गये हैं। प्रशिक्षक झारखंड एवं दूसरे राज्यों के भी आते हैं। महिलाओं को सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि उन्हें कच्चा सामग्री की खरीद के लिए इधर-उधर नहीं जाना पड़े। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर वस्तु तैयार की गयी है। प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण के निमित छात्रवृति भी दी जाती है। प्रशिक्षक गांव-गांव जाकर 15 दिनों एवं 1 माह का प्रशिक्षण देते हैं, ताकि ग्रामीण महिलाओं के हुनर का विकास हो सके और वे रोजगार से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकें। समय-समय पर पुरूष वर्ग को भी प्रशिक्षण दिया जाता है। जूट के अधिकांश उत्पाद पुरूष वर्ग ही तैयार करती है।नाबार्ड डीडीएम शालीन लकड़ा ने बताया कि नाबार्ड द्वारा संपोषित पथिक ग्राम दुकान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं द्वारा स्वयं सहायता समूह के अंतर्गत उत्पादित व निर्मित हस्तशिल्प सामग्री के विपणन हेतु एक बाजार उपलब्ध करवाना है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से स्वावलंबी व सशक्त किया जा सकता है। पर्यटकों को उनकी मांग के अनुरूप सामग्री मिल रहा है। साथ ही राज्य एवं राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक पर स्थानीय चीजों की पहुंच बढ़ रही है। नाबार्ड दुकान संचालन के लिए सेसा संस्था को फैसिलिटेट कर रही है।पथिक ग्राम दुकान का संचालन कर रही संस्था सेसा के सचिव कौशिक मल्लिक ने बताया कि- इसमें ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित डोकरा आर्ट एवं हस्तशिल्प के विभिन्न उपयोगी एवं सजावटी सामग्री उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे पर्यटक एवं स्थानीय लोग पसंद कर रहे हैं। एक्सक्लूसिव हैंडीक्राफ्ट आउटलेट में बिक्री उपरांत प्राप्त सहयोग राशि का उपयोग विभिन्न समाजोन्मुखी कार्यक्रम जैसे महिला शिक्षा, वस्त्र वितरण, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना एवं स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के कार्य में उपयोग किया जायेगा। कुछ सामग्री पुरूष वर्ग द्वारा भी तैयार किया गया है।अजय कुमार जूट से सामग्री निर्माण कार्य का प्रशिक्षण देते हैं। वे खूद भी वस्तू निर्माण करते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं एवं युवतियों को प्रशिक्षण देकर जूट से पायदान, वाटर बोतल रखने का थैला एवं अन्य हैण्डिक्राफ्ट निर्माण का प्रशिक्षण देकर उन्हें उनके घर पर ही रोजगार से जोड़ा जाता है।

नमूना जांच में फेल हो गये अमूल और मदर डेयरी के दूध, लाखों का जुर्माना
Published / 2023-02-08 09:43:26
नमूना जांच में फेल हो गये अमूल और मदर डेयरी के दूध, लाखों का जुर्माना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमूल और मदर डेयरी जैसी नामचीन कंपनियों के दूध में भी फैट मानकों के अनुसार नहीं पाया गया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने इन कंपनियों के दूध, क्रीम समेत सिंभावली शुगर मिल की चीनी व अन्य कंपनियों के उत्पाद की जांच कराई तो अधोमानक पाये गये। एडीएम सिटी की कोर्ट में सुनवाई के बाद अमूल, मदर डेयरी, सिंभावली शुगर मिल, पिज्जा हट समेत 31 प्रतिष्ठानों पर 33.95 लाख का जुर्माना लगाया गया है। कंपनियों को जुर्माने की यह रकम एक माह में जमा करानी होगी।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त विनीत कुमार ने बताया कि अमूल रियल मिल्क, अमूल फ्रेश क्रीम, टोंड मिल्क, अमूल गोल्ड फुल क्रीम मिल्क, मदर डेयरी से खुले दूध, फुल क्रीम व टोंड दूध, वसुंधरा से सिंभावली शुगर मिल की चीनी, साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र से मंगला ब्रांड का तिल का तेल, क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित पिज्जा हट से स्मोक्ड टाइप लहसुन व काली मिर्च, बालाजी फ्लोर मिल से गेहूं का आटा, कलछीना भोजपुर से मावा, वैशाली के कैप्टन रेस्टोबार से काजू का टुकड़ों का सैंपल लिया गया था।इसके अलावा बेहटा हाजीपुर में बिना लाइसेंस के मांस बेच रहे कमाल मीट शॉप संचालक पर भी कार्रवाई की गयी थी। जांच में सैंपल अधोमानक पाये जाने पर प्रकरण एडीएम सिटी बिपिन कुमार की कोर्ट में भेज दिए गए थे। कोर्ट में सुनवाई के बाद इन पर जुर्माना लगाया गया है।

जीवन का सर्वोत्तम सुख है सृजनकर्म : डॉ मयंक मुरारी
Published / 2023-02-07 23:00:20
जीवन का सर्वोत्तम सुख है सृजनकर्म : डॉ मयंक मुरारी

एबीएन सोशल डेस्क। हम अपने जीवन में अक्षय सुख खोजते हैं, यह सुख केवल सृजनकर्म में ही मिलता है। उक्त बातें डॉ मयंक मुरारी ने कही। वह आज जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान के बाद विचार व्यक्त कर रहे थे। डॉ मयंक ने कहा कि  जीवन में जाे भी जाेड़ता है, वह आनंद काे उपलब्ध हाेता है, जाे भी क्रिएट करता है, जाे भी सृजन करता है, जाे भी बनाता है, वह आनंद काे उपलब्ध हाेता है। रचना करना, सृजनकर्म से समाज में मूल्य, अध्यात्म और सनातन तत्वों को समावेशित करना लक्ष्य है।सदैव यह सवाल उठता है कि आपने जीवन में कुछ बनाया, कुछ सृजन किया, क्रिएट किया? आपके जीवन से कुछ निर्मित हुआ? कुछ सृजित हुआ, कुछ बना, कुछ पैदा हुआ? जाे आप मिट जाएं और रहे, जाे आप न हाे और फिर भी हाे। इसलिए लगातार समाज को केन्द्र में रखकर कर्म करता हूं।वैसे भी जिसके जीवन में जितनी सृजनात्मकता हाेती है, उसके जीवन में उतनी ही शांति और उतना ही आनंद हाेता है, जाे लाेग केवल मिटाते और ताेड़ते हैं, वे आनंदित नहीं हाे सकते हैं। मेरा मानना है कि हम कुछ सृजन करते हैं, तब ईश्वर का अंश हममें काम करने लगता है और जाे  सारे जीवन काे सृजनात्मक बना देता है।विगत 30 सालों से लगातार पढ़ने और लिखने का काम चल रहा है। पत्रकारिता के दौरान सैकड़ों आलेख लिखा। उसके अलावा भी 500 से अधिक आलेख और एक दर्जन किताब छप चुकी है। लेकिन अब भी कोशिश होती है कि कुछ निर्मित करें, कुछ बनाएं, जाे हमसे बड़ा हाे। आपका जीवन केवल समय का गुजरना न हाे, बल्कि एक सृजन हाे। वह सृजन चाहे छाेटा-सा क्यों न हाे, वह आपके प्रेम का कृत्य हाे। जाे लाेग जीवन में सृजनात्मक हाे पाते हैं, जाे लाग भी जीवन में छाेटे-से प्रेम के कृत्य काे निर्माण दे पाते हैं।

रांची में 11 से होगा स्वामी मुकुंदानंद जी का प्रवचन
Published / 2023-02-06 10:22:02
रांची में 11 से होगा स्वामी मुकुंदानंद जी का प्रवचन

टीम एबीएन, रांची। रांची में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज (प्रेम मंदिर, श्री वृंदावन धाम) के वरिष्ठ प्रचारक स्वामी मुकुंदानंद का दिव्य, आध्यात्मिक प्रवचन एवं मधुर संकीर्तनआयोजित होगा। 11 से 15 फरवरी तक रोजाना शाम छह बजे से आठ बजे तक डीएवी कपिलदेव पब्लिक स्कूल के पास स्थित चिल्ड्रन पार्क में यह कार्यक्रम आयोजित होगा। राधा गोविंद धाम रांची की ओर से यह कार्यक्रम आयोजित की जा रही है। स्वामी मुकुंदानंद जी अध्यात्म, योग एवं ध्यान के शिक्षक हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता से शिक्षा प्राप्त की है एवं भारतीय इतिहास के पंचमूल जगदगुरू श्री कृपालुजी महाराज के वरिष्ठ प्रचारक हैं। स्वामी जीवन प्रबंधन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ हैं। वे जेके योग नामक विशिष्ट प्रणाली के संस्थापक हैं। अपने ज्ञानवर्धक प्रवचनों में वेदों, उपनिषदों, गीता, भागवत तथा अन्य भारतीय एवं पाश्चात्य प्रणालियों को व्यापक रूप से उद्धृत करते रहते हैं। पिछले चार दशक से स्वामी मुकुंदानंद अपने ज्ञान के माध्यम से विश्व के अनेक देश जैसे अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग, मलेशिया, नेपाल के साथ भारत के असंख्य लोगों का जीवन परिवर्तित कर चुके हैं। उन्होंने कई ग्रंथ लिखे हैं, जिसमें प्रमुख रुप से सेवन माइंड ऑफ सक्सेस, हैप्पीनेस एंड फुलफिलमेंट, द साइंस ऑफ माइंड मैनेजमेंट, सात डिवाइन लॉज अवेकन बेस्ट सेल्फ, द पावर ऑफ थॉट्स, गोल्डन रूल ऑफ लिविंग योर बेस्ट लाइफ और श्रीमद्भागवत गीता-द सन ऑफ द सॉन्ग ऑफ गॉड प्रमुख हैं।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.