मां मथुरासिनी महोत्सव को ले माहुरी भवन में भजनों के आयोजन में झूमें श्रद्धालु, नृत्य नाटिका और महाआरती बनी आकर्षणटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। माहुरी वैश्य मंडल के तत्वावधान में आयोजित मां मथुरासिनी महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को संगीतमय भजनों का कार्यक्रम आयोजित किया गया। माहुरी भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न देवी देवताओं का दरबार सजाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में पूजा अर्चना पंडित अखिलेश्वर पांडेय ने करायी। यजमान के रूप में नीरज अठघरा व रीता अठघरा शामिल हुए। सवा 7 घंटे तक चले इस भजनों के कार्यक्रम में स्थानीय एवं बहार के कलाकारों ने संगीतमय भजनों की प्रस्तुति किया। समाज के अध्यक्ष मुन्ना भदानी ने गणेश वंदना के साथ भजनों न कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद विनोद चौरसिया ने ओ पालन हारे निर्गुण ओ न्यारे... सतेंद्र सिन्हा ने संकट हरनी मंगल करनी जय मां मथुरासिनी.... संतोष कपसीमे ने सजा दो घर को गुलसन सा मेरे सरकार आए हैं..., पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने अछूतम केशवम कृष्ण दामोदरम... भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालु भक्तों को भक्ति के सागर में गोता लगाने का मौका दिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता, विशिष्ट अतिथि समाज चिंतक उपाधि प्राप्त बनवाली राम भदानी शामिल हुए। मौके पर पूर्व जिप अध्यक्ष ने कहा कि एक सप्ताह के बाद शक्ति की देवी मां भगवती का दिन बसंती दुर्गा पूजा शुरू होने वाली है और मां के नौ स्वरूपों में सिद्धिदात्री मां मथुरासिनी की पूजा अर्चना नौवें दिन होती है। सिद्धिदात्री की पूजा से यश बल और धन की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि सिद्धिदात्री की उपासना स्वयं देवों के देव महादेव शिव भी करते रहे हैं। उन्होंने कहा की इस तरह के आयोजन से जहां समाज के लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। वहीं छुपी प्रतिभाएं भी सामने आती है। मां के महोत्सव पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओ को शुभकामनायें दी। मौके पर महिला समिति अध्यक्ष ललिता भदानी, सचिव सरोज पवनचौदह ने उन्हें अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इसके बाद कलकत्ता से आये नृत्य नाटिका की प्रस्तुति के अलावा संध्या में डांडिया नृत्य एवं महाआरती आकर्षण का केंद्र रहा। मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष प्रदीप पांड्या, सचिव ललित सेट्ठी, नरेंद्र झांझरी, सरोज जैन, गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा के सचिव यशपाल सिंह गोल्डन, कोषाध्यक्ष हरभजन सिंह, श्री राम संकीर्तन मंडल के सचिव अरविंद चौधरी, संरक्षक राजेश कपसीमे, माहुरी वैश्य मंडल के उपाध्यक्ष विनोद भदानी, दयानंद पवनचौदह, सचिव संजय तर्वे, संगठन सचिव विशाल भदानी, अरविंद एकघरा, सहसचिव सोनल पहाड़ी, कोषाध्यक्ष विजय वैश्यकियार, बालिका समिति अध्यक्ष अंकिता एकघरा, सचिव अंजलि अठघरा, स्मृति ब्रहपुरिया,नवयुवक समिति अध्यक्ष प्रतीक कुमार, सचिव साहिल भदानी, उपाध्यक्ष अंकित एकघरा, नितेश कुमार निक्की, दिलीप अठघरा, दिलीप ब्रहपुरिया, पप्पू भदानी, ज्योति पहाड़ी, भानु प्रसाद, अमन कपसीमे, विनीत पहाड़ी, राहुल कपसीमे, राजन भदानी, कुमकुम भदानी, प्रो राखी भदानी, पूर्णिमा सेठ, निशा कपसीमे, मिनी कपसीमे, सुनीता सेठ, कविता आर्या, शालिनी तर्वे आदि मौजूद थे। आज होगा छात्र सम्मान व सांस्कृतिक कार्यक्रम मां मथुरासिनी महोत्सव को लेकर गुरुवार को स्थानीय श्री माहुरी भवन में छात्र सम्मान का आयोजन व समाजिक सभा का आयोजन होगा। इसमें बतौर मुख्य अतिथि नवादा जेल अधीक्षक अजित कुमार वैश्यकियार एवं कोडरमा स्टेशन प्रबंधक संतोष कुमार सेठ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा।
झारखंड से लाखों श्रद्धालु आकर मांगते हैं मनोकामनाएबीएन सोशल डेस्क। नेपाल से सटे बलरामपुर जिले के पाटन गांव में स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर लगने वाला राजकीय मेला शुरू होने वाला है। यह विशाल मेला एक मास तक चलेगा। वहीं, इस मेले में झारखंड से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर मां पाटेश्वरी समेत नवदुर्गाओं की पारम्परिक पूजा- अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते है।मेले की तैयारियां तेज : मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ योगी ने बताया कि मेला परिसर में अभी से श्रृंगार, दैनिक उपयोग की वस्तुओं समेत अन्य सामग्रियों की दुकानें सजने लगी हैं। झूला, सकर्स व थिएटर लगना भी शुरू हो गया है। मेले में आसपास के लोगों के अलावा झारखंड सहित कई राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर मां पाटेश्वरी समेत नवदुर्गाओं की पारम्परिक पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते हैं।उन्होंने बताया कि मंदिर में लाखों की संख्या में भक्तों की आमद के दृष्टिगत यातायात व्यवस्था, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, खानपान, खोया-पाया केंद्र व अन्य आवश्यक कैंप के मेला प्रशासन की ओर से व्यापक प्रबंध किये गये हैं। उन्होंने बताया कि देवीपाटन मंडल, गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या समेत कई मंडलों से मेला स्पेशल बसों का संचालन किया जायेगा। इसके अतिरिक्त गोरखपुर -बलरामपुर- गोण्डा रेल प्रखंड पर मेला स्पेशल रेलगाडियां संचालित होंगी। उन्होंने बताया कि मेले और नवरात्रि की पंचमी को नेपाल के दांग जिले से आने वाली बाबा पीर रतन नाथ की शोभायात्रा में नेपाल से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं के मद्देनजर नेपाली अधिकारियों और भारतीय अफसरों की समन्वय बैठक भी की गयी है।पुलिस प्रशासन सतर्क : उन्होंने बताया कि मंदिर के संरक्षक गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन तैयारियों की निगरानी व समीक्षा में जुटा है। अपर पुलिस अधीक्षक नम्रता श्रीवास्तव के अनुसार, मेले में भक्तों के उमड़ने वाले जनसैलाब की सुरक्षा के लिये हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सुरक्षाव्यूह तैयार किया गया है। श्रीवास्तव ने बताया कि सीमा पार से राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका के चलते नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ाने के साथ सीमा परिधि से 15 किलोमीटर भीतरी इलाकों में सशस्त्र सीमा बल, खुफिया तंत्र संग नागरिक पुलिस भी सीमापार से हर आने जाने वाले शख्स की गहन पड़ताल में जुटी है। इसके अलावा अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण श्रेणी में आने वाले देवीपाटन मंदिर में मेलार्थियों की सुरक्षा के लिए पीएसी, पुलिस, होमगार्ड, पीआरडी, खुफिया तंत्र, महिला विंग्स, स्वान दल, फोरेंसिक टीम, क्यूआरटी, यातायात पुलिस, अग्निशमन दल, बम निरोधक दस्ता समेत सभी सुरक्षा इकाइयों की तैनाती की जा रही है।
शीतलाष्टमी/15 मार्च विशेषपंडित निरंजन शास्त्रीएबीएन सोशल डेस्क। शीतला माता स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। इसी संदर्भ में शीतला माता की पूजा से हमें स्वच्छता की प्रेरणा मिलती है। इनका सैदव से ही बहुत अधिक माहात्म्य रहा है। शीतला-मंदिरों में प्रायः माता शीतला को गर्दभ पर ही आसीन दिखाया गया है। शीतला माता के संग ज्वरासुर- ज्वर का दैत्य, ओलै चंडी बीबी - हैजे की देवी, चैंसठ रोग, घेंटुकर्ण- त्वचा-रोग के देवता एवं रक्तवती - रक्त संक्रमण की देवी होते हैं। इनके कलश में दाल के दानों के रूप में विषाणु या शीतल स्वास्थ्यवर्धक एवं रोगाणु नाशक जल होता है।हिन्दू धर्म के विविध पर्व-त्योहारों को मनाने के पीछे वैज्ञानिक सोच व तत्व-दर्शन निहित है। होली के एक सप्ताह बाद मनाए जाने वाले शीतलाष्टमी त्योहार पर शीतला माता का पूजन कर व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि माता के पूजन से चेचक, खसरा जैसे संक्रामक रोगों का मुक्ति मिलती है। चूंकि ऋतु-परिवर्तन के दौरान इस समय संक्रामक रोगों के प्रकोप की काफी आशंका रहती है। इसलिए इन रोगों से बचाव के लिए श्रद्धालु शीतलाष्टमी के दिन माता का विधिपूर्वक पूजन करते हैं जिससे शरीर स्वस्थ बना रहे।सामान्य तौर पर शीतला माता का पूजन चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। भगवती शीतला की पूजा का विधान भी विशिष्ट है। शीतलाष्टमी के एक दिन पूर्व उन्हें भोग लगाने के लिए बासी खाना यानी बसौड़ा तैयार किया जाता है। अष्टमी के दिन बासी पदार्थ ही देवी को नैवेद्य के रूप में अर्पित करते हैं और भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में इसे वितरित करते हैं। उत्तर भारत में शीतलाष्टमी का त्योहार बसौड़ा नाम से भी प्रचलित है। मान्यता है कि इस दिन के बाद से बासी खाना नहीं खाना चाहिए। यह ऋतु का अंतिम दिन होता है जब बासी खाना खा सकते हैं।इस व्रत में रसोई की दीवार पर हाथ की पांच अंगुली घी से लगाई जाती है। इस पर रोली और चावल लगाकर देवी माता के गीत गाये जाते हैं। इसके साथ, शीतला स्तोत्र तथा कहानी सुनी जाती है। रात में जोत जलाई जाती है। एक थाली में बासी भोजन रखकर परिवार के सारे सदस्यों का हाथ लगवाकर शीतला माता के मंदिर में चढ़ाते हैं। इनकी उपासना से स्वच्छता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रेरणा मिलती है।शीतला माता की महत्ता के विषय में स्कंद पुराण में विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें उल्लेख है कि शीतला देवी का वाहन गर्दभ है। ये हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाड़ू) और नीम के पत्ते धारण किए हैं। इनका प्रतीकात्मक महत्व है। आशय यह है कि चेचक का रोगी व्यग्रता में वस्त्र उतार देता है। सूप से रोगी को हवा की जाती है। झाड़ू से चेचक के फोड़े फट जाते हैं। नीम की पत्तियां फोड़ों को सड़ने नहीं देतीं। रोगी को ठंडा जल अच्छा लगता है, अतः कलश का महत्व है। गर्दभ की लीद के लेपन से चेचक के दाग मिट जाते हैं।स्कंद पुराण में शीतला माता की अर्चना का स्तोत्र है शीतलाष्टक। माना जाता है कि इस स्तोत्र की रचना भगवान शंकर ने की थी। यह स्तोत्र शीतला देवी की महिमा का गान कर उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित करता है।वन्देहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम।मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालड्कृतमस्तकाम।। अर्थात गर्दभ पर विराजमान दिगम्बरा, हाथ में झाड़ू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तकवाली भगवती शीतला की मैं वंदना करता हूं। शीतला माता के इस वंदना मंत्र से स्पष्ट है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में मार्जनी (झाड़ू) होने का अर्थ है कि हम लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश से तात्पर्य है कि स्वच्छता रहने पर ही स्वास्थ्य रूपी समृद्धि आती है। मान्यता के अनुसार, इस व्रत को रखने से शीतला देवी प्रसन्न होती हैं और व्रती के कुल में चेचक, खसरा, दाह, ज्वर, पीतज्वर, दुर्गधयुक्त फोड़े और नेत्रों के रोग आदि दूर हो जाते हैं। माता के रोगी के लिए यह व्रत बहुत मददगार है।आमतौर पर, शीतला रोग के आक्रमण के समय रोगी दाह (जलन) से निरंतर पीड़ित रहता है। उसे शीतलता की बहुत जरूरत होती है। गर्दभ पिंडी (गधे की लीद) की गंध से फोड़ों का दर्द कम हो जाता है। नीम के पत्तों से फोड़े सड़ते नहीं है और जलघट भी उसके पास रखना अनिवार्य है। इससे शीतलता मिलती है।लोक किंवदंतियों के अनुसार बसौड़ा की पूजा माता शीतला को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। कहते हैं कि एक बार किसी गांव में गांववासी शीतला माता की पूजा-अर्चना कर रहे थे तो मां को गांववासियों ने गरिष्ठ भोजन प्रसादस्वरूप चढ़ा दिया। शीतलता की प्रतिमूर्ति मां भवानी का गर्म भोजन से मुंह जल गया तो वे नाराज हो गईं और उन्होंने कोपदृष्टि से संपूर्ण गांव में आग लगा दी। बस केवल एक बुढ़िया का घर सुरक्षित बचा हुआ था। गांव वालों ने जाकर उस बुढ़िया से घर न जलने के बारे में पूछा तो बुढ़िया ने मां शीतला को गरिष्ठ भोजन खिलाने वाली बात कही और कहा कि उन्होंने रात को ही भोजन बनाकर मां को भोग में ठंडा-बासी भोजन खिलाया। जिससे मां ने प्रसन्न होकर बुढिया का घर जलने से बचा लिया। बुढिया की बात सुनकर गांव वालों ने शीतलामाता से क्षमा मांगी और रंगपंचमी के बाद आने वाली सप्तमी के दिन उन्हें बासी भोजन खिलाकर मां का बसौड़ा पूजन किया।संसार में दो प्रकार के प्राणी होते है। पहला सौर शक्ति प्रधान और दूसरा चान्द्र शक्ति प्रधान। सौर शक्ति के बारे में कहा जाता है कि सौर शक्ति जीव बहुत चंचल, चुलबुले, तत्काल बिगड़ उठने वाले और असहनशील होते हैं जबकि चान्द्र शक्ति प्रधान व्यक्ति इसके विपरीत होते है। चान्द्र शक्ति प्रधान जीवों में प्रमुख गधा ही माता शीतला का वाहन हो सकता है। यहां गधा संकेत देता है कि चामुण्डा के आक्रमण के समय रोग का अधिक प्रहार सहन करते हुए रोगी को कभी अधीर नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त शीतला रोग में गर्दभी का दूध, गधा लोटने के स्थान की मिट्टी और गधों के संपर्क का वातावरण उपयुक्त समझा जाता है। कहते हैं कि कुम्हार को चामुण्डा का भय नहीं होता है। वहीं ऊंट वाले को कभी पेट का रोग नहीं होता। चामुण्डा शववाहना के अनुसार चामुण्डा का वाहन शव होता है। इसका तात्पर्य यह है कि चामुण्डा से आक्रान्त रोगी को शव की भांति निश्चेष्ट होकर उचित समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए। (लेखक, झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात ज्योतिर्विद हैं।)
कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर कमेटी गठितटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। रामनवमी पर्व को लेकर 19 मार्च को महात्मा गांधी चौक के निकट चैता कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। इसमें बिहार के कलाकर शिरकत करेंगे। कार्यक्रम को लेकर एक बैठक वार्ड पार्षद बालगोविंद मोदी के आवासीय कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता कामेश्वर पांडेय और संचालन बालगोविंद मोदी ने किया। मौके पर कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में अध्यक्ष रामानुज पांडेय, उपाध्यक्ष कामेश्वर पांडेय, उपेंद्र पांडेय, महासचिव बालगोविंद मोदी, सचिव मुरली पांडेय, कोषाध्यक्ष श्यामसुंदर मोदी, सह कोषाध्यक्ष राजेंद्र मोदी, मंच प्रभारी धीरज पांडेय तथा कार्यक्रम प्रभारी दशरथ मोदी और राजेंद्र सिंह चुने गये। नव निर्वाचित अध्यक्ष रामानुज पांडेय और महासचिव बालगोविंद मोदी ने कहा कि कला संस्कृति को बढावा देने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कमेटी में कार्यकारिणी सदस्यों के रूप में संतोष वर्णवाल, गौरव कुमार, सुबोध पांडेय, हर्ष वर्घन, भरतलाल पांडेय, दिलीप राम, अमित पांडेय, अशोक राय, बबलू सिन्हा, मुन्ना मोदी, वीरेंद्र महतो, विनोद कुमार तथा राजू यादव को रखा गया है। बैठक में कई स्थानीय लोग मौजूद थे।
टीम एबीएन, कोडरमा। मारवाड़ी युवा मंच ईकाई प्रेरणा शाखा के तत्वावधान में रविवार को यदुटांड स्थित श्री कोडरमा गौशाला परिसर में गौ आहार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौके पर मंच के पदाधिकारी व सदस्यगणों ने गौमाता को चोकर 108 किलो गोभी के अलावा रोटी सहित अन्य सामग्री खिलाया। प्रेरणा शाखा के अध्यक्ष श्रेया केडिया ने कहा कि गौसेवा सच्ची सेवा है और गौमाता के प्रेरणा शाखा समय-समय पर कई कार्यक्रम आयोजित करता है। सचिव नेहा हिसारिया कार्यक्रम की परियोजना निर्देशक शालु चौधरी ने कहा कि गौ की सेवा कर हम राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने नगरवासियों से अपील की गौशाला में गौ माताओं के लिए 11 सौ रुपये में 550 रोटी आप अपने हाथों से खिला सकते है। इसके लिए अपने जन्म दिन शादी के सालगिराह व अन्य शुभकार्य पर इस मुहिम से जुड़ें। इसके लिए प्रेरणा शाखा को एक दिन पहले बुकिंग कराये। उन्होंने बताया कि प्रेरणा शाखा का मुख्य उद्धेश्य मानव सेवा के साथ-साथ पशु पक्षियों की सेवा करना भी है। गर्मी माह में छतों पर सीकारो में पानी रखने एवं सड़कों पर पशुओं के लिए भी पानी उपलब्ध कराने का कार्यक्रम चलाया जायेगा। वहीं बेटी बचाओ बेटी पढाओं के तहत छात्राओं के बीच पाठ सामाग्री का भी वितरण किया जायेगा। प्रेरणा शाखा के द्वारा 15 मार्च को नयी कमेटी के गठन किया जायेगा और इस दिन शाखा के पदाधिकारी सदस्येां का जन्मदिन शादी का शालगिराह पर केक काटा जायेगा तथा 18 और 19 मार्च को धनबाद में आयोजित होने वाल प्रांतीय अधीवेशन युवा समागम आह्वान में शाखा के पदाधिकारी व सदस्यगण हिस्सा लेने धनबाद रवाना होंगे। इधर कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष ममता बंसल मिनी हिसारिया, सरिका लढठा, मीना हिसारिया मौजूद थी।
टीम एबीएन, रांची। रांची में रामनवमी और चैती दुर्गापूजा की तैयारी शुरू हो गयी है। रामनवमी का पहला मंगलवारी जुलूस 14 मार्च को निकलेगा। इसके बाद 21 मार्च को दूसरा, 28 को तीसरा और अंतिम मंगलवारी जुलूस निकलेगा। 29 मार्च को महाअष्टमी है। इस दिन मंगल आरती होगी और झांकी निकाली जायेगी। 30 मार्च को रामनवमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जायेगा।इस दिन रात 11:53 बजे तक नवमी तिथि मिल रही है, जिस दिन मध्याह्न काल में नवमी तिथि मिलती है, उसी दिन रामनवमी मनायी जाती है। 30 मार्च को रात 11.31 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र और रात 1:42 बजे तक अतिगण्ड योग रहेगा। इसके अलावा सिद्धि योग मिल रहा है। इस कारण से यह तिथि काफी शुभ मानी जा रही है। 30 मार्च को ही रामनवमी की भव्य शोभायात्रा निकाली जायेगी।22 मार्च से विक्रम संवत और वासंतिक नवरात्र : विक्रम संवत-2080 भी 22 मार्च से शुरू हो जायेगा। साथ ही वर्ष प्रतिपदा की शुरुआत होगी। पंडित रामदेव पाण्डेय ने बताया कि 22 मार्च को नया साल शुरू हो रहा है। इस दिन गंगा सहित अन्य सहायक नदियों में स्नान, नया वस्त्र पहनने, घरों में नया झंडा लगाने, पंचांग पूजन और श्रवण, दान का महत्व है। कृषि कार्य शुरू करने का भी विधान है। साथ ही गुड़ी पड़वा, सिंधी नववर्ष, तमिल नववर्ष भी शुरू होगा।वासंतिक नवरात्र भी 22 मार्च से शुरू हो जायेगा। रात 9:24 बजे तक प्रतिपदा होने के कारण भक्तों को कलश स्थापना का काफी समय मिलेगा। प्रात:काल में देवी पूजन का काफी महत्व है। 23 मार्च को द्वितीया, 24 को तुतीया, 25 को चतुर्थी, 26 को पंचमी, 27 को बेलवरण, 28 को महासप्तमी, 29 को महाअष्टमी, 30 को महानवमी और 31 मार्च को दशमी है। बांग्ला पंचांग के अनुसार माता का आगमन घोड़ा और गमन डोली पर हो रहा है, जिसका फल शुभ नहीं है। हालांकि कोई भी तिथि क्षय नहीं है, जिस कारण इसे शुभ माना जा रहा है।
टीम एबीएन, लोहरदगा। अस्सी के दशक में लोहरदगा जिला में एक निरंकारी बाबा गोविंद दास जी का आगमन हुआ था जो यहीं रच-बस गये और लोहरदगा वासियों के मन में भक्ति की गंगा बहा दी। बाबा मठ के नाम से प्रसिद्ध उनका दरबार आज संपूर्ण झारखंड के अलावा अन्य राज्यों में पहचान का मोहताज नहीं है, जहां अनेक राज्यों से आज भी उनके भक्त उनसे मिलने और दर्शन करने आते हैं। संत शिरोमणि बाबा गोविंद दास जी ने अपने जीवन पर्यन्त सभी वर्ग के लोगों से विशेष अनुराग रखते थे। सभी भक्त बहुत ही भक्ति और उपासना से ओत-प्रोत हो बाबा के दरबार में नित्य हाजरी लगाते थे, जो सिलसिला आज तक निर्बाध गति से चल रही है। 12 मार्च 1983 को बाबा गोविंद दास जी महाराज ने समाधि ली थी तब से आज तक उनका निर्वाण दिवस में बाबा के प्रति उनके भक्तों का अटूट प्रेम, श्रद्धा और भक्ति देखते ही बनती है। ऐसी मान्यता है कि जो कोई भक्त बाबा के दरबार में आकर सच्चे मन से मन्नत मांगता है तो बाबा अवश्य उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। बाबा गोविंद दास जी का अनुराग भजन - कीर्तन में अधिक था फलत: आज भी उनका दरबार भक्तों के भजन कीर्तन से गुंज्य मान रहता है। प्रत्येक शनिवार को इनके दरबार में कड़ाह पूजन और भंडारे का आयोजन इनके भक्त करते हैं। कहा जाता है कि इनके कड़ाह में से कभी भी प्रसाद घटता नहीं है अपितु बढ़ता जाता है चाहे कितने ही भक्त प्रसाद ग्रहण करें। जिस किसी भी भक्त की मन्नत पूरी होती है या श्रद्धा से कोई भी भक्त कड़ाह पूजन करता है। बाबा के समाधि में भक्त चादर भी चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि जब बाबा थें तो वे अपने दरबार से कभी किसी को बिना भोग का जाने नहीं देते थे। भोग के समय वे भक्तों को खुद अपने हाथों से भोग का प्रसाद देते थे। अमीर या गरीब का बिना भेदभाव किये बाबा सभी से समान प्रेम भाव रखते थे।बाबा के दरबार में अनेक भक्त अपनी रोग-बीमारी और समस्याएं लेकर आते थे बाबा सभी के समस्याओं को ध्यान से सुनते थे और चमत्कारिक रूप से उनका निवारण करते थें फलत: बाबा के प्रति भक्तों की श्रद्धा और भक्ति अटूट होती चली गयी जो आज भी अटूट है। बाबा की भक्ति की ही शक्ति है कि उनके दर्शन के लिए आज भी दूर-दूर से भक्तों का आना जारी है, जो कोई भी बाबा को सच्चे मन से पुकारता है तो बाबा सूक्ष्म रूप में आज भी उनके मदद करने के लिए दौड़े चले आते हैं।यह भक्तों का विश्वास और भक्ति ही है कि भले ही आज बाबा शारीरिक रूप में भक्तों के बीच नहीं हैं पर आत्मिक रूप में आज भी वे अपने भक्तों के साथ हैं और उनका मार्गदर्शन अपने संतानों की तरह करते रहेंगे अपना आशीर्वाद देते रहेंगे। उक्त जानकारी हिमांशु कुमार ने दी।
टीम एबीएन, रांची। शहर के लोकप्रिय समाजसेवी व विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता तुषार कांति शीट को बेस्ट सोशल वर्कर आफ द इयर के सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार के सूक्ष्म, मध्यम व लघु उद्योग मंत्रालय के अधीनस्थ नीति आयोग से मान्यता प्राप्त संस्थान सोशली प्वाइंट फाउंडेशन (निबंधित) ने दिया। श्री शीट को प्राइड आफ इंडिया अवार्ड मिलने पर उनके शुभचिंतकों ने बधाई दी है। गौरतलब है कि श्री शीट झारखंड के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक -आध्यात्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें देश की विभिन्न नामचीन संस्थाओं ने भी सम्मानित किया है।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 11-03-2023 श्री चैती दुर्गा मंदिर भुताहा तलाब के मंदिर परिसर मे प्रत्येक शनिवार की भांति इस शनिवार को भी श्री चैती दुर्गा मंदिर में खिचड़ी प्रसाद वितरण किया गया। इसमें खिचड़ी, हलवा, अचार, चीफ एवं आलू चोखा वितरण किया गया। अत: श्री चैती दुर्गा पूजा महासमिति का पूजा पंडाल का भूमि पूजन कल दिन रविवार कों रखा गया है, जिसमें आप सादर आंमत्रित हैं। इसमें संजय सिंह (लल्लू सिंह), राहुल सिंह, नमन भारतीय, करण सिंह, मोहित रजक, शिव किशोर शर्मा, आकाश रजक, अर्जुन सिंह, रोहन सिंह, आशीष रजक, प्रियांशु वर्मा, सौरव रजक, शेखर रजक, आयुष वर्मा आदि उपस्थित थे। यह जानकारी समिति के प्रवक्ता नमन भारतीय ने दी।
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