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पंचसूतक क्या है?...
Published / 2023-03-27 07:46:33
पंचसूतक क्या है?...

पंडित निरंजन शास्त्रीएबीएन सोशल डेस्क। धर्मशास्‍त्रों में जनन, मरण, रज, उच्छिष्‍ठ तथा जाति से पांच प्रकार के सूतक माने गये हैं, अर्थात् घर में किसी का जन्म या मृत्यु होने पर, घर की किसी स्‍त्री के रजस्वला होने पर सूतक की प्राप्‍ति होती है। अतः इस सूतक के समय उस घर में पूजा आदि वैदिक कर्मों का निषेध किया गया है। उसी प्रकार उच्छिष्‍ठ का ग्रहण तथा कुछ विशिष्‍ट जाति के लोगों के साथ संपर्क न करने का भी विधान है। किंतु वीरशैव आचार्य एवं संतों ने विशेष परिस्थितियों में उपर्युक्‍त सूतकों को स्वीकार नहीं किया है, जैसे कि इष्‍टलिंग का धारण तथा उसकी पूजा के लिए जनन, मरण और रज इन तीन प्रकार के सूतकों की प्रवृत्‍ति नहीं होती। इसी प्रकार पादोदक और प्रसाद के सेवन के प्रसंग में उच्छिष्‍ठ-सूतक को भी नहीं माना जाता। इसका तात्पर्य यह है कि वीरशैव-धर्म में दीक्षा के समय गुरु अपने शिष्य को इष्‍टलिंग देता है और उसे आमरण शरीर पर धारण करने का आदेश करता है। यह दीक्षा स्‍त्री तथा पुरुषों के लिए समान रूप से होती है। दीक्षा-संपन्‍न स्‍त्री यदि रजस्वला अथवा प्रसूता होती है, तो उस समय उस स्‍त्री को इष्‍टलिंग की पूजा करने का अधिकार है या नहीं? यह शंका होने पर वीरशैव आचार्य ने इष्‍टलिंग धारण करने वाली स्‍त्री को इष्‍टलिंग की पूजा का अधिकार प्रदान किया है। जैसे पौण्डरीक आदि दीर्घकालीन सत्रों का संकल्प करके त्याग करते समय यजमान की पत्‍नी यदि रजस्वला हो जाती है, तो भी वह स्‍नान करके गीला वस्‍त्र पहनकर पुन: याग में सम्मिलित होती है। उसी प्रकार वीरशैव धर्म में दीक्षित स्‍त्री रजस्वला या प्रसूता होने पर भी उसी दिन स्‍नान एवं गुरु के चरणोदक का प्रोक्षण करके शुद्‍ध होकर अपने नित्यकर्म इष्‍टलिंग की पूजा करने की अधिकारी होती है। इष्‍टलिंग की पूजा के अतिरिक्‍त पाक आदि अन्य कार्यों के लिए वीरशैव धर्म में भी सूतक माना जाता है। जैसे हस्तस्पर्श के अयोग्य होने पर भी जिह्वा मंत्रोच्‍चारण के लिए योग्य है, उसी प्रकार रजस्वला या प्रसूता स्‍त्री पाक आदि अन्य लौकिक कर्म करने के लिए अयोग्य और अपवित्र होने पर भी इष्‍टलिंग के धारण एवं उसकी पूजा के लिए वह अग्‍नि, रवि तथा वायु के समान सदा पवित्र रहती है। घर में किसी की मृत्यु होती है, तो उस घर के लोग भी शव संस्कार के बाद स्‍नान एवं गुरु के चरणोदक के प्रोक्षण से घर को शुद्‍ध करके अपने अपने इष्‍टलिंग पूजा रूप नित्यकर्म को बिना किसी बाधा के यथावत् अवश्‍य पूरा करते हैं। अतः वीरशैवों को इष्‍टलिंग की पूजा में मरणसूतक भी नहीं लगता। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात ज्योतिर्विद हैं। उनका सम्पर्क नम्बर 8434745454 है।)

20 अप्रैल को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण
Published / 2023-03-26 16:07:36
20 अप्रैल को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण

एबीएन सोशल डेस्क। साल 2023 का पहला सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को लगने जा रहा है। ये सूर्य ग्रहण 10 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण एक ऐसी घटना है, जिसका विज्ञान से लेकर धर्म और ज्येातिष तक में बहुत ज्यादा महत्व है। यूं तो सूर्य ग्रहण एक खगौलीय घटना है, लेकिन हिंदू धर्म में इसका काफी महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहणकाल के दौरान हमारे आसपास की हर चीज प्रभावित होती है। ग्रहण का प्रभाव सभी राशि के जातकों पर भी देखने को मिलता है। इस बार का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिष के अनुसार इसका प्रभाव सभी राशियों पर होगा। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस सूर्य ग्रहण का शुभ प्रभाव किन राशियों पर पड़ेगा।

ट्रैफिकिंग से आजाद कराये बच्चों ने की अपील
Published / 2023-03-25 19:39:50
ट्रैफिकिंग से आजाद कराये बच्चों ने की अपील

ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने के लिए सरकार व न्यायपालिका लाये व्यापक कानून एबीएन सेंट्रल डेस्क। चाइल्ड ट्रैफिकिंग से आजाद करवाये गये वे बच्चे या सर्वाइवर, जो बाल यौन शोषण, वेश्यावृत्ति और बाल दासता के शिकार हुए हैं, ने देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुए नेशनल कंसल्टेशन टू कॉम्बैट ह्यूमन ट्रैफिकिंग में पुरजोर तरीके से अपनी आवाज उठायी। अशोक होटल में हुए इस कंसल्टेनशन में इन सर्वाइवर ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने के लिए एक व्यापक कानून लाने की अपील की। सामाजिक संगठन शक्तिवाहिनी ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के तकनीकी समर्थन और कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ), बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए), इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) और प्रज्ज्वला के साथ साझेदारी में इस कंसल्टेशन का आयोजन किया था। सर्वाइवर ने अपनी लिखित अपील में सरकारी संगठनों, न्यायपालिका, नागरिक समाज संगठनों, वित्त पोषण एजेंसियों, सामुदायिक समूहों और नागरिकों से एक साथ आने और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खतरे से लड़ने के लिए सामूहिक कार्रवाई करने के लिए सक्रिय हस्तक्षेप की मांग की। इन्होंने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ाव के अपने अधिकारों की भी मांग की है। अपील में ट्रैफिकिंग से बचे लोगों को इस खतरे के खिलाफ लड़ाई में अपने अनुभव का उपयोग करने, ह्यूमन ट्रैफिकिंग से लड़ने के लिए पर्याप्त धन, बाल अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले लोगों के लिए चुनावों में सीटों का आरक्षण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ाई में शामिल करना भी शामिल है। इसके अलावा, अपील में बड़े पैमाने पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाने, सभी लड़कों और पुरुषों को ह्यूमन ट्रैफिकिंग के दुष्प्रभावों पर शिक्षित करना और ट्रैफिकिंग के विभिन्न रूपों एवं पीड़ितों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को पहचानना और पीड़ितों के लिए पर्याप्त मुआवजा सुनिश्चित किए जाने की बात कही गई है।ट्रैफिकिंग के सवाईवर ने मासूम बच्चों और महिलाओं को बाल श्रम, वेश्यावृत्ति और बाल दासता की ओर आकर्षित करने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों को विनियमित करने के लिए विशिष्ट कानून बनाने की भी अपील की। इस महत्वपूर्ण मंच पर ट्रैफिकिंग की सवाईवर रहीं त्रिशा रॉय ने कहा कि हमें उचित मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत होती है, जो हमें बचाये जाने पर नहीं मिलतीं। हम दोषी नहीं होते हैं लेकिन लोग हमसे ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे हम अपराधी हैं। हर दिन हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। त्वरित अदालती कार्रवाई के जरिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ट्रैफिकिंग करने वालों को उनके अपराधों के लिए सजा दी गयी है। ट्रैफिकिंग की एक और सर्वाइवर नाजिया बेगम ने कहा कि जब हमें बचाया जाता है, तो हम चाहते हैं कि अधिकारी उस दर्द को समझें, जिससे हम पीड़ित हैं और हमारे साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। बचाये जाने के बाद, हम पहले से ही इस बात से डरे होते हैं कि समाज और परिवार हमारे साथ कैसा व्यवहार करेगा हमें जरूरत है कि अधिकारियों को ट्रैफिकिंग से बचे लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने के लिए संवेदनशील होना चाहिए। बिहार के ट्रैफिकिंग सर्वाइवर मोहम्मद छोटू ने ट्रैफिकिंग के बाद की मुश्किलों के बारे में बताते हुए कहा कि उचित पुनर्वास योजनाओं तक पहुंच हमारे लिए बहुत जरूरी है। जब ट्रैफिक किया जाता है, तब ट्रैफिकर्स द्वारा हमारा लगातार शोषण किया जाता है। वे हमें डराते रहते हैं कि अगर मदद के लिए पुलिस से संपर्क करेंगे तो वो हमारे साथ कू्रर व्यवहार करेगी। इन चीजों के कारण, हम हमेशा उस दर्द को साझा करने में हिचकते हैं, जो हमें बचाए जाने के ठीक बाद हुआ था। हमारे लिए आजादी तक पहुंच होना बहुत महत्वपूर्ण है। कंसल्टेशन का उद्घाटन मुख्य अतिथि व नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इसमें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष, प्रियंक कानूनगो, एनसीपीसीआर की सदस्य सचिव, रूपाली बनर्जी सिंह, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष, रेखा शर्मा, रेलवे सुरक्षा बल के पुलिस महानिदेशक, संजय चंदर सहित अन्य प्रमुख गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।  एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने ट्रैफिकिंग की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारे देश में प्लेसमेंट एजेंसियां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इन एजेंसियों के नियमन के लिए कानून बनाने और लागू करने के लिए राज्य सरकारों तक पहुंचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि बाल अधिकारों का विषय देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो। प्रत्येक सरकारी अधिकारी को बाल अधिकारों के विषय में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज बनाने का आह्वान किया है। हम ऐसे गांव बनायेंगे जहां बाल अधिकारों की रक्षा हो और उनका दुरुपयोग न हो। कंसल्टेशन में सरकारी एजेंसियों, ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों के 200 से अधिक वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों ने भागीदारी की और ह्यूमन ट्रैफिकिंग से लड़ने के लिए गहन विचारों व समाधानों पर चर्चा की।साथ ही साइबर ट्रैफिकिंग समेत ट्रैफिकिंग के नए-नए तरीकों के कारण उभरती चुनौतियों से निपटने व पीड़ितों की न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।  कंसल्टेशन से निकलकर सामने आया कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग के बढ़ते मामलों के खिलाफ लड़ने के लिए पीड़ितों व नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा की गयी मांग के अनुसार एक सख्त कानून समय की आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए जीतेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।

आठ साल का मंगोलियाई बच्चा बना सबसे बड़ा धर्मगुरु
Published / 2023-03-25 15:08:50
आठ साल का मंगोलियाई बच्चा बना सबसे बड़ा धर्मगुरु

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बौद्ध धर्म के वरिष्ठ नेता दलाई लामा ने अमेरिकी मंगोलियाई बच्चे को तिब्बती बौद्ध धर्म में तीसरे सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक नेता के रूप में नामित किया गया है। द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान लगभग 600 मंगोलियाई अपने नये आध्यात्मिक नेता का जश्न मनाने के लिए जुटे थे। सोशल मीडिया पर साझा की गयी तस्वीरों में देखा गया कि 87 वर्षीय दलाई लामा से एक बच्चा लाल वस्त्र और मास्क पहने मिल रहा है।बच्चे की उम्र 8 साल बतायी जा रही है। मंगोलियाई मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि बच्चा जुड़वां लड़कों में से एक है। दलाई लामा ने इस बच्चे को 10 वें खलखा जेटसन धम्पा रिनपोछे का पुनर्जन्म बताया है।बता दें कि बौद्ध धर्म में धर्मगुरुओं के पुनर्जन्म को खास महत्व दिया जाता है। धर्मगुरु के पुनर्जन्म का समारोह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित किया गया, जहां 600 मंगोलियाई अपने नये आध्यात्मिक नेता का जश्न मनाने के लिए जुटे थे। यहीं दलाई लामा भी रहते हैं। इस समारोह से मंगोलिया के पड़ोसी चीन का गुस्सा और भड़कने की संभावना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दलाई लामा ने 2016 में मंगोलिया का दौरा किया था, जिसकी चीन ने कड़ी आलोचना की थी। चीनी सरकार ने कथित तौर पर कहा कि इस यात्रा ने चीन-मंगोलिया संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाला। उलानबटोर छोड़ने से पहले, दलाई लामा ने कहा कि तिब्बती बौद्ध धर्म के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण लामा, जेट्सन धम्पा का मंगोलिया में पुनर्जन्म हुआ था। उन्हें कई दिनों से खोजने का प्रयास जारी था। इसके अलावा, रिपोर्टों से पता चलता है कि मंगोलियाई लड़का अगुइदई और अचिल्टाई अल्टानार नाम के जुड़वां बच्चों में से एक है। हालांकि, दोनों में से कौन अभी स्पष्ट नहीं है।

गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा झांकी निकालेगी नारी सेना
Published / 2023-03-24 19:13:21
गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा झांकी निकालेगी नारी सेना

पुरानी कमेटी भंग, नयी कमेटी में पूनम अध्यक्ष और सागर वर्मा बने संयोजक टीम एबीएन, रांची। नारी सेना श्री महावीर मंडल की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को नारी सेना के केंद्रीय कार्यालय में कमला शर्मा की अध्यक्षता में हुई। मौके पर काफी संख्या में महिलाएं, सेना की प्रदेश अध्यक्ष पूनम सिंह, सागर वर्मा, शिव किशोर शर्मा, सुरज सिंह भवानी, महेश चंद्र, राज वर्मा, हरिनाथ साहू, राजू साहू, नमन भारतीय आदि उपस्थित थे। बैठक में महापर्व रामनवमी पूजा के अवसर पर धूमधाम से शोभायात्रा झांकी निकालने का निर्णय लिया गया। साथ ही नारी सेना श्री महावीर मंडल की पुरानी कमेटी को भंगकर सर्वसम्मति से नयी कमेटी का गठन किया।नयी कमेटी में शंकर सिन्हा, मुन्ना शर्मा, संजय सिंह लल्लू एवं युवराज पासवान को संरक्षक, सागर वर्मा को संस्थापक संयोजक, पुनम सिंह को अध्यक्ष, किरण देवी को कार्यकारी अध्यक्ष, शिव किशोर शर्मा को प्रवक्ता, गीता देवी, रानी राणा, शांति देवी को संगठन मंत्री, कमला शर्मा को मंत्री, सुचित्रा देवी, कुमारी अनिता को सह मंत्री, रूपा देवी, रेणु सिंह, पुष्पा सिंह, रूपा देवी को उपाध्यक्ष, कामिनी सिंह को मीडिया प्रभारी तथा सोनी कुमारी, ममता कुमारी, आदिति सिंह, अनुपमा सिंह, शोभा देवी, सरिता देवी, पूजा देवी, संध्या देवी, कुमकुम, सुमन देवी, उमा देवी, मोनी देवी, पुतुल देवी, रीना देवी, लक्ष्मी देवी, सोना कुमारी, ललिता देवी, रागिनी देवी, मुन्नी देवी, मिंटू देवी, संगीता देवी, मीरा देवी, तारा देवी, दुर्गा देवी, तारा देवी, रितिका कुमारी, वेदिका कुमारी, प्रीति कुमारी, बबीता कुमारी, राखी राय, ममता यादव, नीला खालको, कल्याणी देवी, अनिता देवी को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है।

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के संगीतमय, नाट्य कार्यक्रम में स्लम एरिया के बच्चों ने दिखायी प्रतिभा
Published / 2023-03-24 18:05:39
कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के संगीतमय, नाट्य कार्यक्रम में स्लम एरिया के बच्चों ने दिखायी प्रतिभा

समाज में बदलाव के बीज बन रहे स्लम एरिया के बच्चे एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली की हर शाम यूं तो किसी न किसी कला प्रस्तुति की गवाह बनती ही है, लेकिन ये शाम कुछ अलग थी। इसमें नामी फिल्मी सितारे या थियेटर के मंझे हुए कलाकार नहीं थे। इसमें दिल्ली के स्लम एरिया से आने वाले वे बच्चे थे, जिन्होंने यहां मौजूद हर शख्स को अपनी संगीतमय व नाट्य प्रस्तुति से भावविभोर कर दिया। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) की ओर से शुरू किए गए टैलेंट हंट प्रोग्राम मेरी आवाज सुनो... के तहत प्यारे लाल भवन में आयोजित कार्यक्रम बदलाव के बीज में हर आंख, स्लम एरिया के बच्चों की प्रस्तुति देखकर आश्चर्यचकित थी। एक साल तक चले टैलेंट हंट के तहत इन बच्चों को चुना गया था। केएससीएफ के इस टैलेंट हंट प्रोग्राम की सहयोगी रही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बनाने वाली कंपनी बोट। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी, उनकी पत्नी श्रीमति सुमेधा कैलाश, बोट कंपनी के सीईओ विवेक गंभीर, केएससीएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर व रियल एडमिरल राहुल कुमार श्रावत (एवीएसएम) और स्लम एरिया के बच्चों ने द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नामी कवि, लेखक व लोकगायक नीलोत्पल मृणाल और मशहूर अभिनेता, स्क्रीन राइटर, निर्देशक व फिल्ममेकर आदित्य ओम की भी मौजूदगी रही। डांस, थियेटर व म्यूजिक के क्षेत्र से चुने गए स्लम एरिया के 10 बच्चों को स्कॉलरशिप भी प्रदान की गई, ताकि वे अपने सपनों की उड़ान को पूरा कर सकें।  बच्चों ने बदलाव के बीज नामक इस प्रस्तुति में कैलाश सत्यार्थी की जीवन यात्रा का सजीव चित्रण किया, जो मानवीय करुणा, सहानुभूति और बच्चों के लिए प्यार व उनके अनमोल बचपन की बात करता है।इस भावुक प्रस्तुति के जरिये बाल श्रम, बाल विवाह, बाल यौन शोषण और बाल दुर्व्यापार जैसे बच्चों के खिलाफ किए जा रहे अपराधों पर प्रकाश डाला गया। इसमें दिखाया गया कि कैसे कैलाश सत्यार्थी ने जघन्य अपराधों के शिकार हजारों मासूम बच्चों के जीवन को बचाने की राह पर चलने का साहस किया।  मौके पर कानून और न्याय राज्य मंत्री, एसपी सिंह बघेल ने देश भर के सभी बच्चों के लिए समान शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। हमारे देश ने आजादी के बाद देश में सभी बच्चों के लिए एक समान शिक्षा प्रणाली अपनाने का अवसर गंवा दिया। इससे सभी बच्चों को अपनी क्षमताओं को विकसित करने और समान रूप से विकसित होने का समान अवसर मिलता। आज की प्रस्तुति प्रशिक्षित पेशेवरों द्वारा आयोजित अन्य कार्यक्रमों से बहुत अलग थी, यह वास्तविक जीवन और स्वाभाविक थी, बच्चे पेशेवर अभिनेताओं की तरह मंच पर अपना वास्तविक जीवन जी रहे थे। मुझे यकीन है कि इन युवा प्रतिभाओं में से कुछ बच्चे भविष्य में महान अभिनेता बनेंगे। ये सभी बच्चे बाल मित्र मंडल (बीएमएम) या बच्चों के बाल मित्र समुदाय से आते हैं, जहां बोट कंपनी के सहयोग से केएससीएफ ने एक साल पहले डांस, थियेटर, म्यूजिक और क्रिकेट जैसी गतिविधियों में बच्चों की प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें तराशने के लिए टैलेंट हंट कार्यक्रम शुरू किया था। चुने गए बच्चों को पेशेवरों द्वारा प्रशिक्षित किया गया और आज उन्होंने अपनी प्रतिभा से सभी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।  बाल मित्र मंडल (बीएमएम) कैलाश सत्यार्थी का एक अभिनव प्रयोग है और इसे साल 2018 में लॉन्च किया गया था। बीएमएम शहरी स्लम एरिया में बाल संरक्षण और चहुंमुखी बाल विकास के लिए कार्य करता है ताकि हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और आजाद बचपन जी सके।  बोट कंपनी के सीईओ विवेक गंभीर ने कहा कि केएससीएफ और मेरी आवाज सुनो पहल के साथ साझेदारी करना सौभाग्य की बात है। कैलाश जी तीन डी के बारे में बताते हैं- बड़े सपने देखें, अपनी पूरी क्षमता का पता लगायें और अपने सपनों पर अमल करें। तीसरा डी बोट मिशन के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हम बच्चों को उनकी पूरी क्षमता का पता लगाने और हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। केएससीएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर व रियल एडमिरल राहुल कुमार श्रावत (एवीएसएम) ने कहा कि ये बच्चे, जो आपके सामने हैं, ये अलग-अलग किरदार में हैं, लेकिन इनका मकसद एक है कि हमारे समाज, मोहल्ला, बस्ती में बाल मजदूरी, बाल विवाह, बाल शोषण, बाल यौन शोषण और बाल दुर्व्यापार का खात्मा हो। उसके लिए ये बच्चे गुडविल एंबेसडर का काम कर रहे हैं।

1981 से राजस्थानी परंपरा की पुरानी विरासत को संजोता आ रहा है मारवाड़ी समाज
Published / 2023-03-24 18:02:27
1981 से राजस्थानी परंपरा की पुरानी विरासत को संजोता आ रहा है मारवाड़ी समाज

टीम एबीएन, रांची। माहेश्वरी समाज द्वारा 1981 से मारवाड़ी समाज के खास पर्व गणगौर की राजस्थानी परंपरा की पुरानी विरासत को संजोये हुए है। गणगौर पूजा की सार्वजनिक व्यवस्था गणेश नारायण साबू चौक, सेवा सदन पथ,अपर बाजार स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में शुरू की।गणगौर पूजा मारवाड़ी समाज का प्रमुख लोक पर्व है। जो होलिका दहन के दूसरे दिन से 16 दिनों तक चलने वाला यह पर्व मूलत: कुंवारी लड़कियों व सुहागन महिलाओं का त्योहार है। आज 24 मार्च 2023 दिन शुक्रवार को श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में सुबह 6 बजे से शुरू हुई गणगौर पूजा अपराह्न 2 बजे तक अनवरत चलती रही। गणगौर मिलान एवं विसर्जन के लिए अपराह्न 3 बजे से मारवाड़ी समाज की महिलाओं के आने का सिलसिला जो शुरू हुआ वो संध्या 6 बजे तक जारी रहा। मंदिर परिसर में गणगौर मिलान एवं बड़ा तालाब में गणगौर विसर्जन घाट की व्यवस्था माहेश्वरी समाज के तीनों संगठन (श्री माहेश्वरी सभा, माहेश्वरी महिला समिति, माहेश्वरी युवा संगठन) के सहयोग से सुचारू रूप से चला। माहेश्वरी भवन में लगाये गये गणगौर मेला में गणगौर विसर्जन करने आयी महिलाओं ने रात्रि 8 बजे तक मेला में बने लजीज व्यंजन का आनंद लिया।  इस कार्यक्रम के निवर्तमान अध्यक्ष मुख्य संयोजक शिव शंकर साबू ने यह जानकारी दी। इस महोत्सव को सफल बनाने में प्रकाश काबरा, ओमप्रकाश बोड़ा, राजेंद्र बिड़ला, शारदा लड्डा, कुमुद लाखोटिया, विकास काबरा, अंकित बियानी, लक्ष्मी चितलांगिया, नयन बोड़ा, राधव सारडा, सभाध्यक्ष किशन साबू, गोवर्धन प्रसाद भाला, दीपक मारु, प्रभात साबू एवं समाज के तीनों संगठन के सदस्यों का सहयोग रहा। प्रदेश माहेश्वरी सभा अध्यक्ष सभी कार्यक्रमों में उपस्थित रहे। उक्त जानकारी समाज की मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है सरहुल : सीके पाण्डेय
Published / 2023-03-24 12:19:44
प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है सरहुल : सीके पाण्डेय

टीम एबीएन, बरकट्ठा (हजारीबाग)। धार्मिक स्थल सूर्यकुण्ड में के सरना धर्म के अनुयायियों ने सरहुल के अवसर पर ध्वजारोहण एवं परंपरागत तरीके से धर्म के पाहन ने सरना माता की पूजा की साथ ही सखुआ के फूलों को एक दूसरे को देकर बधाई दी। पूजा के बाद सांस्कृतिक एवं परंपरागत झूमर नृत्य भी आयोजित किया गया। लोगों ने नगाड़े एवं मांदर की थाप पर देर शाम तक नृत्य करते रहे। अतिथियों ने प्रकृति के प्रति अपने प्रेम जाहिर किया। जिप प्रतिनिधि व समाजसेवी सी के पाण्डेय ने कहा कि सरहुल प्रकृति के प्रति प्रेम दिखाता है। वर्तमान समय में वनों को जिस तरह से उजाड़ा जा रहा है इससे हम सभी का जीवन संकट में होता जा रहा है। झारखंड की महान संस्कृति एवं पर्यावरण को बचाने के लिए हम सभी को मिलकर संकल्प लेना होगा। इस अवसर पर जिला परिषद प्रतिनिधि व झारखण्ड नव निर्माण युवा सेना के संस्थापक सी के पाण्डेय (समाजसेवी शिक्षक), थाना प्रभारी गोरहर कृष्णा साहा, बेलकप्पी मुखिया, रामधनी मांझी, समाजसेवी सुरेश पाण्डेय, गोरहर मुखिया प्रतिनिधि छोटन कोल, बेलकप्पी मुखिया प्रतिनिधि, किशुन हांसदा, दुर्गा बास्के, समाजसेवी पत्रकार रिंकू माली, संतोष पाण्डेय, शंकर गोस्वामी, सुनील कुमार, पंकज पाण्डेय, आदित्य पाण्डेय, ज्ञानदीप पाण्डेय रामजी हांसदा, महादेव मुर्मू, रामकुमार जी, विनोद बास्के, मनीलाल जी, रामु मरांडी, सहदेव मरांडी, बिनोद बेसरा, बिनोद बास्के, महादेव जी, छोटेलाल मुर्मू, परमेश्वर हांसदा, सोमरा बास्के, तालो बास्के, सुरेश टुडू, रामसहाय मांझी, मुकेश टुडु, सामेल टुडु, प्रकाश टुडु, अनिल टुडु, सुनील सोरेन, सुंदर मांझी, सुरेश मुर्मू, महेश मांझी, केशोलाल मुर्मू व गणमान्य व्यक्ति, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी व हजारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

समग्र जनमानस के लिए जीने का आदर्श स्थापित किये भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम : मिलिंद परांडे
Published / 2023-03-23 20:39:37
समग्र जनमानस के लिए जीने का आदर्श स्थापित किये भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम : मिलिंद परांडे

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर के तत्वाधान में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उत्सव के निमित्त श्रीराम महोत्सव कार्यक्रम आज दिनांक 23 मार्च, 2023 को पूर्वाह्न 11:45 बजे रांची के हटिया चौक स्थित शिव मंदिर परिसर में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार, प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सेवा प्रमुख किशोरीलाल लाट, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम के चित्र पर पुष्प अर्पण करके किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माननीय मिलिंद परांडे जी ने कहा हिंदू जीवन में अनंत काल से भगवान श्री राम का आदर्श विद्यमान है। भगवान श्रीराम का जीवन समग्र जनमानस को जीने का आदर्श स्थापित किया। उन्होंने कहा माता-पिता के वचन निभाने के लिए सोने का राज सिंहासन को भी ठुकरा कर वनवासी जीवन जीने को सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने वचन निभाने के दृष्टिकोण को रखते हुए हैं सुग्रीव अथवा रावण के राजमहल तक जाने से दूर रखा। उन्होंने कहा राम का जीवन चरित्र में परिवार को परिवार के साथ आदर्श जीवन जीने की सीख दी है। हमें भी जाति, भाषा, क्षेत्र के अहंकार को छोड़कर भगवान श्रीराम के जीवन के समान सर्वमान्य जीवन जीना चाहिए। हम सभी सनातनी हैं, हिंदू हैं, सभी हिंदू एक हैं, ऐसा भाव समाज में जागरण हो। उन्होंने कहा श्रीराम जी का सच्ची पूजा उनके जीवन चरित्र को अपने जीवन में उतारना है। उन्होंने कहा कुछ विदेशी शक्तियां सदैव हिंदू को बांटने का कार्य करते रहे हैं। हिंदू जनमानस को प्रलोभन देकर मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण की गतिविधि को निरंतर चलाया जा रहा है। जिस प्रकार पूतना ने राक्षसी प्रवृत्ति को छुपाते हुए सुंदर नारी बनकर भगवान श्री कृष्ण को अपने स्तन में जहर भरकर स्तनपान कराने आयी थी ठीक उसी प्रकार इसाई मिशनरियों के द्वारा प्रलोभन रूपी जहर भर कर भोले भाले जनसमूह का धर्म भ्रष्ट करते हुए धर्मांतरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा अपने धर्म एवं संस्कृति के रक्षा के लिए ही भगवान बिरसा मुंडा, तिलका,मांझी, सिद्धू-कानू, नीलांबर-पीतांबर जैसे अनेकों  वीर पूर्वजों ने अंग्रेज ईसाईयों से  संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। आज इन धर्म योद्धा पूर्वजों के पौरूष को समझते हुए उनके बलिदान को भी समझना पड़ेगा तथा जन-जन को बताना पड़ेगा।  उन्होंने कहा घुसपैठ, धर्मांतरण एवं जिहाद के कारण झारखंड सहित संपूर्ण राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पढ़ते जा रही है, हमें ऐसी गतिविधियों पर सचेत रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा आज दुष्टों की दुष्टता का भय नहीं अपितु सज्जनों की निष्क्रियता सबसे बड़ा भय का कारण है। उन्होंने कहा सनातन धर्मावलंबी सदैव प्रकृति पूजक रहे हैं। झारखंड में चल रहे प्रकृति पूजा सरहुल भी उसी कड़ी का एक अंश है।  प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने कहा भगवान पुरुषोत्तम श्री रामजी का जीवन दर्शन एवं आयोध्या जी में बन रहे भव्य मंदिर के संदर्भ को लेकर 22 मार्च से 5 अप्रैल तक प्रत्येक गांव में श्रीराम महोत्सव विजय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। 6 अप्रैल को हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा व महाआरती के साथ कार्यक्रम सम्पन्न होंगे। कार्यक्रम में विशेष रूप से रांची विभाग मंत्री किशुन झा, विभाग सहमंत्री विकास कुमार सिंह रांची महानगर मंत्री चंद्रदीप दुबे, अखिलेश्वर नाथ मिश्र, मुकेश गिरी , चंद्रशेखर सिंह, श्री राम मनोज साहू, सहायक तिर्की, राम निरंजन सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, उमेश महतो, राजू प्रसाद साहू, चंद्रमा प्रसाद, अर्चना सिंह, रीना सिंह सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी रांची महानगर के मंत्री चंद्रदीप दुबे ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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