राज कुमारीएबीएन एडिटोरियल डेस्क। महावीर हनुमान को भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार कहा जाता है और वे प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हैं। हनुमान जी ने वानर जाति में जन्म लिये। उनकी माता का नाम अंजना (अंजनी) और उनके पिता वानरराज केशरी हैं। इसी कारण इन्हें आंजनाय और केसरीनंदन आदि नामों से पुकारा जाता है। वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार हनुमान जी के जन्म के पीछे पवन देव का भी योगदान था। एक बार अयोध्या के राजा दशरथ अपनी पत्नियों के साथ पुत्रेष्टि हवन कर रहे थे। यह हवन पुत्र प्राप्ति के लिए किया जा रहा था। हवन समाप्ति के बाद गुरुदेव ने प्रसाद की खीर तीनों रानियों में थोड़ी थोड़ी बांट दी।खीर का एक भाग एक कौआ अपने साथ एक जगह ले गया जहा अंजनी मां तपस्या कर रही थी। यह सब भगवान शिव और वायु देव के इच्छा अनुसार हो रहा था। तपस्या करती अंजना के हाथ में जब खीर आयी तो उन्होंने उसे शिवजी का प्रसाद समझ कर ग्रहण कर लिया। इसी प्रसाद की वजह से हनुमान का जन्म हुआ।हनुमान जन्म की कहानी सूर्य के वर से सुवर्ण के बने हुये सुमेरु में केसरी का राज्य था। उसकी अति सुंदरी अंजना नामक स्त्री थी। एक बार अंजना ने शुचिस्नान करके सुंदर वस्त्राभूषण धारण किये। उस समय पवन देव ने उसके कर्णरन्ध्र में प्रवेश कर आते समय आश्वासन दिया कि तेरे यहां सूर्य, अग्नि एवं सुवर्ण के समान तेजस्वी, वेद-वेदांगों का मर्मज्ञ, विश्वन्द्य महाबली पुत्र होगा और ऐसा ही हुआ भी। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा में अंजना के उदर से हनुमानजी उत्पन्न हुये। दोपहर बाद सूर्योदय होते ही उन्हें भूख लग जाती थी। माता फल लाने गयी। इधर लाल वर्ण के सूर्य को फल मान कर हनुमान जी उसको लेने के लिये आकाश में उछल गये।उस दिन अमावस्या होने से सूर्य को ग्रसने के लिये राहु आया था, किंतु हनुमानजी को दूसरा राहु मान कर वह भाग गया। तब इंद्र ने हनुमानजी पर वज्र-प्रहार किया। उससे इनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गयी। जिससे ये हनुमान कहलाये। इंद्र की इस दृष्टता का दंड देने के लिये पवन देव ने प्राणि मात्र का वायु संचार रोक दिया। तब ब्रह्मादि सभी देवों ने हनुमान को वर दिये। ब्रह्माजी ने अमितायु का, इंद्र ने वज्र से हत न होने का, सूर्य ने अपने शतांश तेज से युक्त और संपूर्ण शास्त्रों के विशेषज्ञ होने का, वरुण ने पाश और जल से अभय रहने का, यम ने यमदंड से अवध्य और पाश से नाश न होने का, कुबेर ने शत्रुमर्दिनी गदा से निःशंख रहने का, शंकर ने प्रमत्त और अजेय योद्धाओं से जय प्राप्त करने का और विश्वकर्मा ने मय के बनाये हुये सभी प्रकार के दुर्बोध्य और असह्य, अस्त्र, शस्त्र तथा यंत्रादि से कुछ भी क्षति न होने का वर दिया।इस प्रकार के वरों के प्रभाव से आगे जाकर हनुमानजी ने अमित पराक्रम के जो काम किये वे सब हनुमानजी के भक्तों में प्रसिद्ध हैं और जो अश्रुत या अज्ञात हैं।वे अनेक प्रकार की रामायणों, पद्म, स्कन्द और वायु आदि पुराणों एवं उपासना-विषय के अगणित ग्रंथों से ज्ञात हो सकते हैं।इस बार हनुमान जयंती गुरुवार, 6 अप्रैल 2023 को पवनपुत्र, संकटमोचन और भगवान शिव के रुद्रावतार भगवान बजरंगबली का जन्मोत्सव है। रामभक्त हनुमान को कलयुग के देवता और जल्द प्रसन्न होने वाले देवता माना गया है।हनुमान जयंती की पूजा के लिये शुभ मुहूर्त6 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक है। उसके बाद आप दोपहर में 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा शाम को 5 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 7 मिनट तक भी पूजा का शुभ मुहूर्त है।हनुमान जयंती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा अर्चना करने वाले को बजरंग बली हर रोग और दोष से दूर रखते हैं और हर प्रकार के संकट से रक्षा करते हैं। जीवन में कष्ट दूर होते है और सुख शांति की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जिन लोगों पर शनि की अशुभ दशा चल रही है वे यदि हनुमान जयंती पर व्रत रखें तो उनके शनि के दोष दूर होते हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।हनुमानजी की पूजा करने की विधिहनुमानजी की पूजा करने के लिये बजरंगबली को लाल पुष्प, सिंदूर, अक्षत्, पान का बीड़ा, मोतीचूर के लड्डू, लाल लंगोट और तुलसी दल अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमानजी की फिर आरती करें। हनुमानजी को भोग के रूप में लड्डू, हलवा और केला चढ़ाएं। इस दिन सुंदर कांड और बजरंग बाण का पाठ करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और हमारे आस-पास से हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
हनुमान जयंती पर विशेषआत्माराम यादवएबीएन सोशल डेस्क। महर्षि वाल्मिकी रचित रामायण हो या गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस, दोनों में बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, उत्तरकांड नामकरण कर रामकथा के प्रसंगों को इन काण्डों में समाहित किया है, जिसमें सुंदरकांड नामकरण की विशेषताओं का रहस्य विरले ही समझ पाते हैं। विशेषकर वे लोग जो नित्य प्रतिदिन सुंदरकाण्ड का पाठ करते हैं।रामायण जनमनोहरमादिकाव्यम रामायण जन-जन को प्रिय है, यह आदिकाव्य है जिसके सभी पात्र ओर उनकी कथाएं सुंदर हैं इसलिए कांड का नाम सुंदरकांड रखा गया। रामायण सबके मन में बसी होने से मनोहर है और सुंदरकाण्ड अत्यंत मनोहर ओर सर्वश्रेष्ठ है। इसे सर्वश्रेष्ठ बतलाते हुए कहा है-सुंदरे सुंदरों रामरू सुंदरे सुंदरी कथा। सुंदरे सुंदरी सीता सुंदरे किन्न सुंदरम। सुंदरकाण्ड में राम सुंदर है, सुंदर की कथाएं सुंदर है, सुंदर में सीता सुंदरी है, सुंदर में क्या सुंदर नहीं है? सुंदर में राम की कथा नहीं है, भक्त हनुमान की कथा ओर सीता की व्यथा हृदय को द्रवित कर देती है, यही सुंदरतम है, प्रश्न उठता है फिर सुंदरे सुंदरों राम: क्यो कहा गया है? सुंदर कांड के दो प्रमुख ओर प्रधान चरित्र है सीता ओर हनुमान।हनुमान तो भक्त है ओर सीता शक्ति है ओर राम शक्तिमान। श्रीराम सीता अभिन्न है उन्हे प्रथक करके नही देखा गया है, क्योंकि सीता के हृदय में राम बसे है ओर ऐसा कोई पल नहीं आया जब सीता ने राम को विस्मृत किया हो तथा हनुमान ने भी जो भी पराक्रम दिखाये, कही आभास नही होने दिया कि वे उनके द्वारा किए गए है, अहंकाररहित हनुमान ने जो भी दुर्गम, दुर्जेय वीरोचित कार्य किए उस सभी कार्य का श्रेय उन्होने अपने प्रभु श्रीराम को दिया है, यही सुंदर कथा है, जो सुंदरकाण्ड की शोभा बढ़ाती है।रामायण के प्रत्येक कांडों का नामकरण करते समय व्यक्तित्व, चरित्र, जीवन ओर स्थान विशेष प्रासंगिक रखे गए हैं। जहां हरेक व्यक्तित्व के चरित्र व गुणों के प्रगट होते ही उनके गुणों की सर्वोत्तमता शिखर पर देखने को मिलती है। बालकाण्ड में राम के बचपन के बाल स्वरूप से ताड़का-सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, धनुष भंग कर सीता स्वयंवर का चित्रण है तो उत्तरकाण्ड में रावण वध का चरित्र के पश्चात को विस्तार रूप दिया गया है। अयोध्या कांड, अरण्यकांड ओर किष्किंधा कांड में अयोध्या का उल्लेख, वन प्रदेशों का उल्लेख के आलवा किष्किंधा का उल्लेख है।राम और रावण के युद्ध को लंका काण्ड नाम दिया गया जबकि सुंदरकांड इन सारे पहलुओं से पृथक है ओर यह नाम सर्वथा उच्चासन पर होने से अन्य किसी कथा या प्रसंग सुंदरकांड के आसन पर आसीन नहीं हो सका है।सुंदरकांड में सभी के चरित्र है विशेषकर इसमें सीता ओर हनुमान की कथा सुंदर है। सीता शक्ति है ओर राम शक्तिमान है।शक्ति ओर शक्तिमान के अनन्य भक्त हनुमान है। शक्तिस्वरूप सीता का हृदय श्रीराम को नहीं छोड़ सकता है। राम के सौंदर्य को लेकर सीता त्रेलोक्य सुंदरी है अतएव राम ही सीता बनकर सुंदर हो रहे है। रामतापनीय उपनिषद में कहा गया है:- यो वै श्रीरामचन्द्ररूस भगवान, या जानकी भुभूर्व:। स्वस्तस्ये वै नमो नम:। श्रीराम साक्षात भगवान है ओर देवी जानकी रमा है। राम ही जानकी है, इसीलिए राम के सौंदर्य में ही राम मानस-सरो-भरालिका सौंदर्य है। सुदरकाण्ड में जिस कुंतलाकुल कपोलसुंदरी सीता के रूप गुण का विकास है, वह क्या जाग्रत क्या स्वप्न, सर्वदा श्रीराम के चरण कमलों में सब कुछ समर्पित है इसलिए कहा गया है:-सुंदरे सुंदरों राम:। वाल्मिकी जी द्वारा रचित सुंदरकाण्ड में हनुमान के चरित्र को प्रधानता देते हुए उच्च शिखर पर रखा गया और हनुमान के समक्ष रावण की तुलना करते हुए रावण को अति तुच्छ मानकर कहा है-न मे समा रावणकोटयोधमा: रामस्य दासोंहमपारविक्रम:।रावण जैसे करोड़ों अधम मेरी समता नहीं कर सकते। मैं श्रीराम का दास हूं। अत: मेरे पराक्रम का कोई थाह नहीं पा सकता है। राम का दास होने के कारण मुझमें अपार विक्रम है। दास होने से जहां इतना शौर्य प्रस्फुटित हो उठता है, वहां भक्त का सौंदर्य भगवान का ही है। इसी से सुंदरे सुंदरों राम: कहा गया है। सुंदरे सुंदरों राम: का अर्थ तो यहा प्रगट हो गया किंतु सुंदर में सभी सुंदर है इसका अभिप्राय समझने के लिए कथा के मूल में हनुमान ओर सीता के समस्त गुण विकास को समझना होगा तभी सुंदरकांड के सुंदर होने का रस्वास्वादन प्राप्त हो सकेगा।गोस्वामी तुलसीदास ने सुंदर काण्ड की पहली ही चैपाई की शुरूआत सुंदर वचनों से की है कि- जामवंत के वचन सुहाए, सुनि हुनुमंत हृदय अति भाए। वे हनुमान को अपने विस्मृत हो चुके पराक्रम की याद कराने के बाद उन्हे अपने बल का बखान करते है जो एक ऋषि के श्राप से वे भूल चुके थे। हनुमान जी को स्मरण आता है तो उसकी परीक्षा के लिए वहां एक पर्वत का प्रसंग गोस्वामी जी रखते है कि- सिंधु तीर एक भूधर सुंदर में सुंदर शब्द का पहली बार उल्लेख किया ओर हनुमान जी जैसे ही उस पर्वत पर पांव रखकर कूदते है तो वह पर्वत पाताल में धस जाता है।सुंदरकांड में सुदर क्या है हनुमान का स्वरूप जो भीमाकर कर लिया है जो अगाध गगनाकार सागर को लांघने के लिए है। शत योजन सागर को पार करते समय देवताओं ने उनकी परीक्षा लेने सुरसा को विघ्न बनाकर प्रस्तुत किया जो उन्होंने अपने बुद्धिबल से सुरसा की परीक्षा पास करने के लिए सुरसा के शरीर के आकार से दुगुना चौगुना रूप धरने के बाद उनके मुख से वापस आकर विदा मांगी।मैनाक पर्वत समुद्र से आ जाना ओर हनुमान से कहना कि थक गए होंगे विश्राम कर ले ओर कुछ भोजन ग्रहण कर ले तब हनुमान द्वारा कहना कि राम काज किन्हे बिना मोहि कहां विश्राम। मैं राम के काम से जा रहा हूं इस समय मुझे भोजन ओर विश्राम के लिए समय नहीं है। मुझे शीघ्र जाना है, हनुमान की बात सुनकर मैनाक पर्वत सागर में लौट जाता है। हनुमान सागर लांघते आगे बढ़ते हैं तभी एक निशाचर जो आकाश में उड़ने वाले पक्षियों जीव-जंतुओं की परछाई सागर के जल में पड़ते ही उनकी परछाई पकड़ उन्हें खा जाती है वह राक्षसी हनुमान की परछाई पकड़ लेती है। हनुमान जी तुरंत उसे मारकर समुद्र पार कर लंका पहुचते हैं। जिसपर तुलसीदास जी सुंदर शब्द का दूसरी बार प्रयोग कर लिखते है कि- कनककोट विचित्रा मनि कृत सुन्दरायतना घना अर्थात लंका का वह सोने का परकोटा रंग विरंगी मणियों से जड़ा है जिसके अतिसुंदर घर है। लंका पहुचकर हनुमान जी द्वारा दक्षिण किनारे से त्रिकुट शिखर पर चढ़कर लंकापूरी को देखना, संध्याकाल मसक/मच्छर के समान सूक्ष्म शरीर धारण कर लंका में प्रवेश करते समय राक्षसीवेश धारण करने वाली लंकिनी को घूंसा मारकर रक्तरंजित करना तथा लंकिनी द्वारा हनुमान को लंका के विनाश के प्रसंग सुनकर शुभ संकेत देना सुंदर ही तो है जिसका विस्तार से पढ़ने के बाद सुंदरकांड के अन्य प्रसंगो का सुंदरतम वर्णन से सभी आभिभूत होते हैं ओर हनुमान के द्वारा उनके मार्ग में बाधक बनी तीन स्त्रियों के साथ अपनाये गये व्यवहार उनकी बुद्धि का प्रमाण है, जहां वे पहली स्त्री सुरसा के सामने विनय करते हैं, दूसरी स्त्री सिहिंका को यमलोक पहुंचाते हैं और लंका को एक मुसठिका मारकर ठीक करते हैं।सुंदरकाण्ड के कथा वर्णनों में माता सीता की खोज में हनुमान लंका के हर महल ओर घरों का अन्वेषण करते हैं। गोस्वामी जी लिखते हैं- मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा, देखे जहं तहं अगनित जोधा। गयउ दसानन मंदिर माहीं, अति विचित्र कहि जात सो नाही। हनुमान ने हर घर जिन्हे मंदिर कहा गया है में सीता की तलाश की परंतु उन्हे असंख्य योद्धा दिखे। रावण के महल में भी देखा जो विचित्र बना हुआ था जहा भी सीता नहीं दिखी। तब हनुमान को एक सुंदर घर दिखा जिसमे रामनाम अंकित था तुलसी की पुजा होती थी तब उन्होने सोचा यहा निश्चरों के बीच कौन सज्जन पुरुष है... लंका निसिचर निकर निवासा, इहां कहां सज्जन कर बासा। मन महु तरक करें कपि लागा, तेही समय विभिसनु जागा। हनुमानजी ने ब्रह्मण का वेश धर कर विभीषण से मिले जहां से उन्हें सीता माता के अशोक वाटिका में होने कि जानकारी मिली ओर वे सीतामाता से मिलने के लिए अशोक वाटिका कि ओर चल दिये।एकवेन्णी कृशां दीनां मलिनाम्बरधारिणिम ।भूमौ शयानां शौचंती रामरामेति भाषिनिम॥ हनुमान जी ने अशोकवाटिका में अशोक वृक्ष के नीचे पृथ्वी पर माता जानकी को देखा,मानो कोई देवांगना एक वेणी धारण किए हुये है ओर उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो, आकृति दीन थी, वस्त्र मलिन थे ओर चिंतन कि मुद्रा में राम राम कि रट लगाये हुए थी। हनुमान जी ने जनकनंदिनी के दर्शन रात में किए तब बीस भुजा वाले नीलांजन राशि के समान रावण का सीता के पास आना ओर सीता के दर्शन कर अपनी कठोर ओर कटु वाणी बोलना ओर सीता का उत्तर प्रतिउत्तर सुनकर जानकी के वध के लिए रावण का खड़ग उठाना ओर मन्दोदरी द्वारा उसे रोका जाना, रावण का सीता को दो माह का समय देना तथा राक्षसीगण को सीता को भयभीत करने के आदेश के उपक्रम में सीता को उत्पीड़न करना ओर धमकी देना कि मास दिवस महूं कहा न माना तो मैं मारिब काढ़ि कृपाना। त्रिजटा का स्वप्नवृतांत सुनाकर राक्षसीवृंद को भयभीत ओर निंदित करना, सीता का रुदन करना ओर प्राणत्याग कि चेष्टा का भाव लाने पर हनुमान द्वारा अवसर जानकार सीता को रामवृतांत सुनाना ओर फिर राम द्वारा दी गई मुद्रिका/अंगूठी सीता को प्रदान कर उनका विश्वास अर्जित करने के लिए अंगूठी सीता जी से सामने डाल दी। तब देखि मुद्रिका मनोहर, राम नाम अंकित अति सुंदर। सीताजी अंगूठी पहचान कर हर्ष ओर दुख के साथ व्याकुल हो गई तब हनुमान से वानरराज सुग्रीव से मित्रता कि बात बताकर वानरों के बल बुद्धि का बखान कर कर उनकी ताकत का भरोसा दिलाया जिसपर पर संतुष्ट होकर सीता ने उन्हे आशीर्वाद दिया- आशीष दीन्ही रामप्रिय जाना होहु तात बल सील निधाना। अजर अमर गुन निधि सुत होहु। करहुं बहुत रघुनायक छोहु।सीता जी से अजय अमर होने का आशीर्वाद प्राप्त कर हनुमान जी ने उनसे कहा मां मुझे भूख लगी है अगर आप कहें तो मैं अशोक वाटिका से कुछ फल खा लूं- लागि देखि सुंदर फल रूखा। इसके बाद आज्ञा पाकर अशोक वाटिका में सुंदर फलों का आहार कर वाटिका उजाड़ना, रावण के सेना ओर उसके बेटे अक्षयकुमार को मारना, फिर मेघनाथ द्वारा हारने कि स्थिति में हनुमान पर ब्रह्मपाश छोड़ना और हनुमान का उसमें बंधाना, रावण की सभा में जाना, रावण को उपदेश देना, रावण का क्रोधित होना, पूंछ में आग लगाना और उस आग से हनुमान द्वारा पूरी लंका का दहन करना, सागर में पूंछ में लगी आग बुझाकर वापस सीता के पास अशोक वाटिका में आना, उनसे चूड़ामणि लेकर सागर के पार आना, वानर साथियों से मिलना। मधुबन के फल खाना ओर उसे उजाड़ना, रामजी के पास सीता का संदेश सुनाना, राम द्वारा हनुमान को गले लगाना सुदरकाण्ड की ये सारी कथाएं बड़ी ही सुंदरतम हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। खड़गपुर मंडल के खेमाशुलि स्टेशन एवं आद्रा मण्डल के कुसतौर स्टेशन पर आदिवासी कुर्मी समाज द्वारा रेल पटरी पर दिनांक 05/04/2023 के सुबह 5 बजे से आहूत धरने की वज़ह से निम्नांकित ट्रेनें रद्द रहेंगी :ट्रेन संख्या 08641आद्रा - बरकाकाना मेमू पैसेंजर यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 03595 बोकारो स्टिलसिटी - आसनसोल मेमू पैसेंजर ट्रेन यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 18085 खड़गपुर - रांची एक्सप्रेस ट्रेन यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 18036 हटिया - खड़गपुर एक्सप्रेस ट्रेन यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 18035 खड़गपुर - हटिया एक्सप्रेस ट्रेन यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 22892 रांची - हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 22891 हावड़ा - रांची एक्सप्रेस ट्रेन यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।ट्रेन संख्या 03598 आसनसोल - रांची मेमू पैसेंजर यात्रा प्रारंभ दिनांक 05/04/2023 को रद्द रहेगी।
टीम एबीएन, रांची। शहर की सुप्रसिद्ध धार्मिक संस्था श्री सालासर हनुमान मण्डल, रांची का श्रीहनुमान जन्मोत्सव महोत्सव आगामी दिनांक 6 अप्रैल 2023, दिन गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर मे श्री सालासर हनुमान मंदिर, मारवाड़ी ब्राह्मण भवन प्रांगण, बंसीधर अडूकिया रोड, रांची में धूमधाम से मनाया जायेगा। उपरोक्त जानकारी कार्यक्रम संयोजक धर्म चंद शर्मा ने बताया कि प्रात: 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्री हनुमान महोत्सव मे नयनाभिराम झाँकी, अखंड ज्योत, रसमाधुरी श्रृंगार से सुसज्जित सालासर बालाजी के सानिध्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि 6 अप्रैल को प्रात: 8 बजे गणेश पूजन सह अखंड ज्योत मुख्य यजमान श्रीकिशन शर्मा सहपत्नी प्रज्ज्वलीत करेंगे। प्रात:9 बजे से सामूहिक सस्वर सुन्दरकाण्ड पाठ का भव्य आयोजन श्री जनार्धन जी जोशी के द्वारा किया जायेगा, सायं 4 बजे से 108 सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ का वृहत आयोजन किया गया है साथ ही भक्तो के द्वारा छप्पन भोग व सवामणी भोग भी लगाया जायेगा। ततपश्चात संध्या 5 बजे से राँची के सुप्रसिद्ध भजन प्रवाहको द्वारा भजनों की अविरल गंगा प्रवाहित की जाएगी एवं रात्रि 10 बजे महाआरती के साथ महोत्सव का समापन होगा । ज्ञातव्य हो कि मारवाड़ी ब्राह्मण भवन प्रांगण मे श्री सालासर बालाजी का जागृत विग्रह प्रतिमा सन् 1995 मे प्राण प्रतिस्थापित है। विगत 27 वर्षो से प्रत्येक मंगलवार को सुंदरकांड पाठ एवम शनिवार को खिचड़ी वितरण व भजन कीर्तन होता है। ब्राह्मण समाज द्वारा संचालित इस मंदिर मे श्रधालुओ भक्तो का तांता लगा रहता है एवम मनोकामना पूर्ण होती है। साक्षात जागृत दरबार है सालासर बालाजी। कार्यक्रम संयोजक ने कहा कि हनुमान जन्मोत्सव मे जो भी श्रधालु सवामणि भोग लगवाना चाहते है 1500 की सहयोग राशि देकर बालाजी को अर्पित कर सकते है, सुंदरकांड पाठ के पर्चि 11 रुपये एवम हनुमान चालीसा पाठ पर्ची 11 रुपये सहयोग शुल्क मात्र देकर प्राप्त कर सकते है। महोत्सव को सफल बनाने में रमेशचंद्र शर्मा, पूर्व अध्यक्ष रवि शंकर शर्मा (टोली), सचिव किशन लाल शर्मा, अमित शर्मा, पायल शर्मा, पिंकी शर्मा, अमृता शर्मा, अनीता शर्मा, वीणा शर्मा, अनीता शर्मा, अरुण जोशी, अशोक पुरोहित, प्रदीप कुमार शर्मा, महेंद्र शर्मा, अमित सारस्वत (काली), गुलाब शर्मा, धर्मचंद शर्मा (भोपली), नथमल शर्मा, कमल शर्मा (कल्लू) , सुनील शर्मा (मुन्ना), राहुल शर्मा (चिंटू), मनीष शर्मा, भगवती व्यास गुड्डू, चेतन माटोलिया आदि सहयोग कर रहे हैं। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी अमित शर्मा (मो- 9835903000) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
जरूरी दवाओं की कीमतों में 17% तक कमीएबीएन सोशल डेस्क। दवाइयों की दुकानों पर अब एक रुपये से भी कम कीमत में पैरासिटामोल दवा उपलब्ध होगी। जरूरी दवाओं की सूची में संशोधन के बाद अब तक 651 दवाओं की कीमतें घटी हैं। पैरासिटामोल की एक गोली 89 पैसे और मधुमेह टाइप-2 के रोगियों के लिए मेटफार्मिन दो रुपये में मिलेगी। 200 से ज्यादा दवाओं की कीमतें अगले 15 से 25 दिन में कम होने वाली हैं।राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने दावा किया कि जरूरी दवाओं की कीमताें में 17 फीसदी तक गिरावट आई है। पैरासिटामोल 500 एमजी की गोली 12 फीसदी तक सस्ती हुई है। उच्च रक्तचाप, हृदयाघात जैसी जटिलताओं में उपयोगी टेल्मिसर्टन दवा 7.65 फीसदी तक सस्ती हुई है। मेटफार्मिन की कीमत में 5.63 फीसदी की कमी आई है। पहले मेटफार्मिन 2.13 रुपये और टेल्मिसर्टन 40 एमजी की एक गोली 7.32 रुपये में मिलती थी। एनपीपीए के मुताबिक, दवा मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत सरकार हर साल कीमतों की समीक्षा करती है। नवंबर, 2022 में आवश्यक दवाओं की सूची में संशोधन किया गया था। इस सूची में 870 तरह की दवाएं शामिल हैं। इनमें से 651 दवाओं की कीमतें कम हुई हैं। एक अप्रैल से आवश्यक दवाओं की अधिकतम कीमत में 12.12 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई, पर संशोधित सूची की समीक्षा के चलते दवाएं सस्ती हुई हैं।
देश का वो स्कूल जहां रविवार को होती है पढ़ाई, 101 सालों से यही नियमएबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के इस इलाके में एक ऐसा हाई स्कूल है जो रविवार को खुला रहता है पर यहां सोमवार को छुट्टी होती है। यह नियम इस स्कूल में पिछले 101 वर्ष से लागू है। दूसरे स्कूल सोमवार से शनिवार तक, सप्ताह में छह दिन खुले रहते हैं और रविवार को इन स्कूलों में छुट्टी होती है। लेकिन पूर्वी बर्धमान का यह स्कूल अपवाद है।जमालपुर ब्लॉक में स्थित पूर्वी बर्धमान के इस स्कूल का नाम है गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय। रविवार को स्कूल के खुले होने का नियम देश के आज़ाद होने से पहले से यहां लागू है और जैसा कि स्पष्ट है, इसके पीछे एक इतिहास है। इस बारे में स्कूल के हेडमास्टर देबब्रत मुखर्जी ने कहा कि इस नियम का इतिहास काफ़ी पुराना है। इस स्कूल की स्थापना से देश की आज़ादी का एक अध्याय जुड़ा है। गांधी जी के नेतृत्व में देश भर में असहयोग आंदोलन चलाया गया था जिसका मुख्य नारा था विदेशी वस्तुओं, विदेशी शैक्षिक संस्थानों, विदेशी भाषाओं का बहिष्कार और देशी वस्तुओं, देशी शिक्षा आदि को अपनाने पर जोर दिया गया था। इस समय इस गांव के जो प्रसिद्ध व्यक्ति गांधी जी के असहयोग आंदोलन का यहां नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने स्वदेशी विचारधारा से प्रेरित होकर इस स्कूल की स्थापना की थी। चूंकि अंग्रेजों ने रविवार को स्कूल की छुट्टी का नियम निर्धारित किया था, तो स्वदेशी की विचारधारा को अपनाते हुए इस दिन इस स्कूल को खुला रखने का नियम बनाया गया और इसके बदले सोमवार को स्कूल में छुट्टी होना निर्धारित किया गया। तभी से इस स्कूल में यह नियम चलता आ रहा है। इस स्कूल की स्थापना भूषण चंद्र हलदर और अविनाश चंद्र हलदर ने की। स्कूल की स्थापना करने का निर्णय पूरी तरह अविनाश चंद्र हलदर का था और भूषण चंद्र हलदर ने उनको दिशा-निर्देश दिया। इस स्कूल की स्थापना में राजबल्लभ कुमार और विजयकृष्ण कुमार ने वित्तीय मदद दी। इन्हीं लोगों की पहल पर इस स्कूल की स्थापना 5 जनवरी 1922 को हुई। इस समय इस स्कूल में 972 छात्र हैं। कक्षा 10 में पढ़ाई करने वाले इस स्कूल के छात्र आतिफ मलिक का कहना है कि मुझे रविवार को स्कूल आना अच्छा लगता है। हमारे दोस्त भी स्कूल आते हैं और चूंकि सोमवार को हमारी छुट्टी होती है जिसके कई फ़ायदे हैं जैसे कि अगर सरकारी ऑफ़िस में कोई काम है तो वह आप इस दिन कर सकते हैं। अगर यह छुट्टी रविवार को होती तो यह काम नहीं किया जा सकता 101 वर्ष पुराने इस स्कूल में छात्र से लेकर शिक्षक तक, किसी को भी इस नियम से कोई परेशानी नहीं होती है। यह भी कहा जाता है कि सरकार ने शुरू में इस नियम पर आपत्ति की थी पर जब उन्हें स्कूल के नियम और इसके पीछे के इतिहास के बारे में पता चला तो इसे मान लिया गया।
टीम एबीएन, हजारीबाग। आरसी मिशन कैथोलिक आश्रम चर्च में खजूर रविवार धूमधाम से मनाया गया। ईसाई समुदाय ने कैथोलिक आश्रम से शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर शोभा यात्रा निकाली। यात्रा के समय सभी के हाथों में खजूर की डालियां थीं।बिशप आनंद जोजो के नेतृत्व में प्रभु का रुपांतरण महागिरजाघर में खजूर डाली की पवित्र जल से आशीष के साथ शुभारंभ किया गया। बिशप आनंद जोजो पल्ली पुरोहित फादर अंटोनी, फादर रेमंड सोरेंग, फादर विजय, फादर प्रदीप, फादर अब्राहम ने मिस्सा पूजा संत राबर्ट मध्य विद्यालय के प्रांगण में शुरू किया। प्रभु ईशू के येरुसलेम में प्रवेश करने पर मसीही समाज ने स्वागत किया।
जानें किन कार्यों के लिए मिला गोल्ड मेडलटीम एबीएन, रांची/ मुम्बई। मुंबई नेत्र सोसायटी एवं आई एडवांस संस्था द्वारा मुंबई में 25 मार्च को मुंबई नेत्र सोसाइटी की वार्षिक कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह में डॉ भारती कश्यप को नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में किये गये उत्कृष्ट कार्यों की वजह से गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।उन्हें यह गोल्ड मेडल पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं पद्मश्री डॉ विकास महात्मे ने दिया। प्रतिवर्ष संस्था द्वारा गोल्ड मेडल मोतियाबिंद एवं लासिक सर्जरी के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाले देश के कुछ चुनिंदा नेत्र चिकित्सकों को दिया जाता है।पहले भी मिल चुका है गोल्ड मेडलवर्ष 2019 में इंडियन सोसायटी ऑफ कैटरैक्ट एंड इफेक्टिव सर्जरी के द्वारा डॉ भारती कश्यप को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। भारती कश्यप ने वहां पर फेम्टो लेजर ब्लेडलेस मोतियाबिंद सर्जरी पर व्याख्यान दिये। बता दें कि लेजर एसिस्टेड ब्लेड रहित मोतियाबिंद सर्जरी की इस पद्धति को झारखंड में लाने का श्रेय कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल को जाता है। डॉ कश्यप ने बताया कि कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में वर्ष 2014 से ब्लेड रहित फेमटो लेजर मोतियाबिंद सर्जरी पद्धति शुरू की गयी है और इससे झारखंड के मरीजों को फायदा मिल रहा है।
एबीएन सोशल डेस्क। दूध की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों को पहले ही परेशान कर रखा है। अब देश की बड़ी कंपनी अमूल ने ग्राहकों को एक बार फिर झटका देते हुए अपने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा करने का फैसला किया है। कंपनी ने गुजरात में दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। नयी दरें आज यानी 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो चुकी हैं।
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