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सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली ने महिला किसान शशिकांत की बदल दी जिंदगी
Published / 2023-04-15 14:06:04
सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली ने महिला किसान शशिकांत की बदल दी जिंदगी

एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। तोरपा प्रखंड की फटका पंचायत के गुटुहातू गांव की शशिकांत गुड़िया का नाम अपने गांव-घर को छोड़कर शायद ही किसी को पता था। लेकिन कृषि के क्षेत्र में उसने इतनी मेहनत की और स्वयं सेवी संस्था "प्रदान" से तकनीकी प्रशिक्षण लेकर उसने खेती के क्षेत्र में एक नयी पहचान कायम कर ली। शशिकांत बताती हैं कि जून 2021 में उन्हें सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के बारे में पता चला, जिसे गांव में आयोजित महिला मंडल और ग्राम संगठन बैठक में प्रदान ने प्रस्तुत किया था। जैसे ही उन्हें इस प्रणाली के बारे में पता चला, वह गांव में गठित सौर उपयोगकर्ता समूह का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हो गयीं और आज वह कारो सोलर सिंचाई समिति की एक सक्रिय सदस्य हैं। इस गांव के लिए सिंचाई के बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी कमी थी। इसके कारण गांव के लोग बरसात को छोड़कर अन्य किसी मौसमों में खेती नहीं कर पाते थे।खेती के लिए पूरा गांव मॉनसूनी वर्षा पर बारिश पर निर्भर रहते थे। शशिकांत का परिवार खरीफ की फसल के दौरान कुछ जमीन पर केवल धान और मडुआ की खेती करती थी। सिंचाई की कमी के कारण दूसरी फसल के बारे में वह सोच भी नहीं सकती थी। इसक कारण पूरा खेत खाली पड़ी रहती थी। हालांकि शशिकांत की जमीन कारो नदी के तट पर ही थी, पर नदी के पानी को खेतों तक ले जाना गंभीर समस्या थी। गांव में बिजली की स्थिति वैसी ही थी। इसके कारण वह मोटर पंप से भी सिंचाई नहीं कर पाती थी।डीजल और केरोसिन महंगा होने के कारण खेती में लागत अधिक होती थी। उसी दौरान उसे प्रदान संस्स्था से जानकारी मिली कि सौर लिफ्ट सिंचाई की जानकारी मिली। सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली की स्थापना की प्रक्रिया के लिए वह गांव में होनेवाली नियमित बैठकों में भाग लिया और सौर उपयोगकर्ता समूह में अपने हिस्से की राशि का योगदान दिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर अपने हिस्से का योगदान दिया और दूसरों को भी शामिल होने और योगदान करने के लिए प्रेरित किया।सितंबर माह में नयी सौर साइट सौर सिंचाई समिति को सौंपने के साथ ही उन्होंने रबी मौसम में सौर सिंचाई का उपयोग कर आलू, गोभी और फूलगोभी सहित अन्य सब्जियों की खेती करने लगी। अब वह खेती से अच्छा लाभ प्राप्त कर रही है। शशिकांत अपने खेत से अब एक वर्ष में तीन फसल का उत्पादन कर रही है। महिला किसान बताती है कि वह अपनी जमीन का एक-एक इंच का उपयोग खेती में कर रही है।शशिकांत नयी कृषि तकनीकों को अपना कर खेती कर रही है और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही है। आज वह खेती-किसानी से ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर दूसरों के लिए प्रेरणा श्रोत बन गयी हैं।

खुशखबरी : 1 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा
Published / 2023-04-15 08:18:03
खुशखबरी : 1 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा

एबीएन सोशल डेस्क। अमरनाथ मंदिर की वार्षिक यात्रा एक जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगी। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में शिवलिंग के दर्शन के लिए यह तीर्थ यात्रा प्रत्येक वर्ष आयोजित होती है। यात्रा के लिए पंजीकरण 17 अप्रैल से शुरू होगा।राजभवन में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) की 44वीं बैठक में तीर्थयात्रा का कार्यक्रम तय किया गया। उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रा के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि प्रशासन सुचारू और निर्बाध तीर्थ यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि परेशानी मुक्त तीर्थ यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन आने वाले सभी श्रद्धालुओं और सेवा प्रदाताओं को सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य सेवा और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगा।इस साल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किये जा रहे है। पहलगाम विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक यात्रा के लिए पोनी स्टेशन भी बनाया जा रहा है, जहां से यात्री अपनी सुविधानुसार घोड़े-खच्चर की सेवा प्राप्त करेंगे। इसी के साथ हैलीपेड और मार्ग पर सफाईकर्मियों को तैनात किया जायेगा।

टपक सिंचाई खेती ने फूलमनी को बनाया महिलाओं की आइकॉन
Published / 2023-04-14 20:33:05
टपक सिंचाई खेती ने फूलमनी को बनाया महिलाओं की आइकॉन

टीम एबीएन, खूंटी। लगभग दो साल पहले तक जिस महिला को पाई-पाई के लिए तरसना पड़ता था, आज वही महिला अपने गांव की ही नहीं, पूरे क्षेत्र में एक आइकॉन बन गई हैं। खूंटी जिले के कर्रा प्रखण्ड की गोविंदपुर पंचायत के गुस्सा आंबा टोली गांव की रहनेवाली फूलमनी होरो बताती हैं कि वह अधिक पढ़ी-लिखी नहीं है। इसलिए नौकरी की तो कहीं कोई आस नहीं थी। इसलिए उसने अपना पुश्तैनी धंधा खेती किसानी में ही भाग्य आजमाना शुरू किया, पर इसमें भी इतनी कमाई नहीं हो पाती थी, जिससे परिवार की गाड़ी भी आराम से चले और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी हो।हालांकि कि प्रखंड के कुछ अधिकारियों के कहने पर वह प्रकाश आजीविका सखी मंडल जुड़ गई। समूह में जुड़ने से पहले भी फूलमनी खेती करती थी, लेकिन आमदनी बहुत नहीं थी। वह सिर्फ मानसून के दौरान ही खेती कर पाती थी। पानी की कमी के कारण वह साल भर खेती नहीं कर पाती थी। इसका प्रभाव उसकी आजीविका पर सीधे तौर पर पड़ रहा था। समूह बैठक में कृषि सखी ने फूलमनी को टपक सिंचाई से खेती करने के संबंध में जानकारी दी और इसके लाभ के बारे में भी बताया। जेएसएलपीएस के माध्यम से उसे टपक सिंचाई मशीन की सुविधा मिली। इससे फूलमनी ने अब जाड़ा, गर्मी और बरसात सभी मौसम में खेती करना शुरू कर दिया। फूलमनी बताती है कि पहले वह परंपरागत तरीके से खेती करती थी, तो उसे काफी समय खेत में गुजारना पड़ता था। मेहनत अधिक करनी पड़ती थी, सिंचाई में भी काफी दिक्कत होती थी और मेहनत और लागत की तुलना में उत्पादन काफी कम होता था।फूलमनी कहती है कि अब टपक सिंचाई से खेती करने से उसे परेशानियों से राहत मिली है। अब वह कम मेहनत, कम पानी, कम लागत और कम समय में अच्छी खेती करती है और अच्छा मुनाफा भी कमाती है। इससे उसके जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ। इसे देख उसके गांव गुस्स अंबाटोली गांव की और महिलाएं भी उससे प्रेरणा लेने लगी और टपक सिंचाई पद्धति से खेती करना शुरू किया। इसके कारण आज गांव के खेत-बारी हर मौसम में हरे-भरे नजर आते हैं। अब तो उसे अपने विकास की गाथा सुनाने के लिए दूसरे गांव के लोग भी बुलाने लगे हैं।

16 अप्रैल को तमिलनाडु में 45 जगहों पर मार्च करेगा आरएसएस
Published / 2023-04-14 20:31:34
16 अप्रैल को तमिलनाडु में 45 जगहों पर मार्च करेगा आरएसएस

सुप्रीम कोर्ट से जीत के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मिली नयी ऊर्जा एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समग्र तमिलनाडु में 16 अप्रैल को 45 स्थानों पर मार्च का आयोजन करेगा। गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एमके स्टालिन  के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज कर दी थी। तमिलनाडु  सरकार ने यह अपील मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दाखिल की थी, जिसमें आरएसएस को रूट मार्च निकालने की अनुमति दी गई थी। जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और पंकज मिथल की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के आरएसएस के रूट मार्च पर आदेश को बरकरार रखा था। मद्रास एचसी के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था, मुख्य रिट याचिकाओं या समीक्षा आवेदनों में न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश में गलती निकालना हमारे लिए संभव नहीं है।  इसलिए सभी विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज किए जाने योग्य हैं।  आरएसएस ने कैडर से तैयारियों को मूर्त रूप देने को कहातमिलनाडु के आरएसएस अध्यक्ष आर वन्नियाराजन ने बयान में कहा, 1925 में अपने गठन के बाद से आरएसएस हर साल विजयादशमी पर पूरे देश में रूट मार्च आयोजित करती आ रही है। यह कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत के हर हिस्से में आयोजित होने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है। हम उम्मीद करते हैं कि आम जनता और अन्य भाई हमारे साथ सार्वजनिक बैठक में शामिल होंगे और बड़ी संख्या में मार्च देखेंगे। हम मार्च आयोजित करने की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और पुलिस को धन्यवाद देते हैं। आरएसएस द्वारा जारी बयान में भी कहा गया है। तमिलनाडु के डीजीपी ने पूरे तमिलनाडु में 45 स्थानों पर रूट मार्च करने के लिए आरएसएस को अनुमति दे दी है। ऐसे में जिला कैडरों संबंधित जिला पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों से संपर्क कर 16 अप्रैल 2023 को मार्च निकालने के लिए मार्ग का चयन और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर लें।  सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार की आपत्ति कर दी खारिज शीर्ष अदालत ने कहा था कि उच्च न्यायालय के समक्ष राज्य द्वारा उठाई गई मुख्य आपत्ति यह थी कि किसी अन्य दूसरे संगठन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के बाद कानून-व्यवस्था की समस्याएं कुछ स्थानों पर सामने आईं। इसके कारण कई मामले भी दर्ज किए गए। उन मामलों का विवरण वास्तव में विशेष अनुमति याचिका के आधार के ज्ञापन में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए चार्ट से पता चलता है कि प्रतिवादी संगठन के सदस्य उन कई मामलों में पीड़ित थे और वे अपराधी नहीं थे। इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वे पूरी तरह से आरएसएस के रूट मार्च के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर इसकी अनुमति नहीं दे सकते। सर्वोच्च अदालत मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें आरएसएस को राज्य में रूट मार्च करने की अनुमति दी गयी थी। 10 फरवरी को मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु पुलिस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को राज्य भर के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक सड़कों पर रूट मार्च करने की अनुमति देने का निर्देश दिया था।

वाह वाह गोविंद सिंह जी, आप ही गुरु-चेले...
Published / 2023-04-14 20:26:53
वाह वाह गोविंद सिंह जी, आप ही गुरु-चेले...

गुरुद्वारा में मना बैशाखी का पर्व, लंगर में जुटे श्रद्धालु खालसा पंथ की स्थापना कर गोविंद सिंह जी ने चिड़ियों को दी थी बाज जैसी शक्ति : शालिनी टीम एबीएन, कोडरमा। खालसा पंथ के 324 वें सृजन दिवस व बैशाखी पर्व को लेकर झुमरीतिलैया के दो गुरुद्वारों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन शुक्रवार को किया गया। सुबह से ही गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धालु पहुंचे और मत्था टेककर मन्नतें मांगी। झुमरीतिलैया के गुरुद्वारा रोड स्थित गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा में शबद कीर्तन का आयोजन किया गया। जहां ज्ञानी राजा सिंह, कुलदीप सिंह, बीबी इंद्रजीत कौर, अमरजीत कौर, सिया कौर, सोनिया कौर, हरबिन छाबड़ा, शतवीर कौर, राजवीर सिंह ने भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालु भक्तों को निहाल किया।मौके पर सचिव यशपाल सिंह गोल्डन कहा कि बैशाखी विशेषकर किसानों का त्योहार है। जब गेहूं की फसल को देखकर उनका मन नाचने लगता है। कार्यक्रम में वाह वाह गोविंद सिंह जी आप ही गुरु-चेले एवं जो बोले सो निहाल... से गूंजता रहा।  बतौर मुख्य अतिथि पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कहा कि सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों को 1699 में अमृत पान कराकर बैशाखी की प्रथा चलाई। उस दिन से सिख जगत बैशाखी पर्व मनाते हैं। इस दिन से फसल काटने की शुरुआत होती है और इस दिन को शुभ भी माना जाता है। उन्होंने आगे कहा के खालसा पंथ की स्थापना कर गुरु गोविंद सिंह जी ने चिड़ियों को बाज की शक्ति भी दी। मौके पर समाज के शकुंतला देवी ने शॉल ओढ़ाकर तथा गुरुद्वारा के प्रधान अवतार सिंह ने प्रतीक चिह्न देकर शालिनी गुप्ता को सम्मानित किया। मौके पर कोषाध्यक्ष हरभजन सिंह, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश सलूजा, कंवलजीत सिंह, माहुरी समाज के अध्यक्ष मुन्ना भदानी, सचिव संजय तर्वे, अमन कपसीमें, निवर्तमान वार्ड पार्षद बसंत सिंह, मिलन शाहाबादी कोबरा बटालियन के जवान भी उपस्थित थे। इसके पूर्व 12 अप्रैल से चल रहे अखंड पाठ की लड़ी का भी समापन हुआ। कलगीधर गुरुद्वारा में भी हुआ आयोजन वहीं दूसरी ओर डॉक्टर गली स्थित कलगीधर गुरुद्वारा में भी बैशाखी पर्व मनाया गया। यहां भी दिवान सजाया गया और शबद कीर्तन प्रस्तुत किये गए। इस अवसर पर, संजू लांबा, अवतार सिंह समेत कई श्रद्धालु उपस्थित थे। यहां छबील का वितरण और लंगर का आयोजन किया गया।

कुप्रथा के घोर विरोधी थे डॉ अंबेडकर
Published / 2023-04-13 21:19:16
कुप्रथा के घोर विरोधी थे डॉ अंबेडकर

जयंती (14 अप्रैल) पर विशेष रमेश सर्राफ धमोरा एबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारतीय संविधान के रचयिता डॉ भीमराव अंबेडकर का सपना था कि भारत जातिमुक्त हो, औद्योगिक राष्ट्र बने, सदैव लोकतांत्रिक बना रहे। उन्होंने जातिवाद से मुक्त आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ भारत का सपना देखा था। मगर देश की गंदी राजनीति ने उन्हें सर्वसमाज के नेता के बजाय दलित समाज का नेता के रूप में स्थापित कर दिया। डॉ अंबेडकर का एक और सपना था कि दलित धनवान बनें। वे हमेशा नौकरी मांगने वाले ही न बने रहें अपितु नौकरी देने वाले भी बनें। डॉ अंबेडकर का मानना था कि वर्गहीन समाज गढ़ने से पहले समाज को जाति विहीन करना होगा। आज महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए हमारे पास जो भी संवैधानिक सुरक्षा कवच, कानूनी प्रावधान और संस्थागत उपाय मौजूद हैं, इसका श्रेय डॉ अंबेडकर को जाता है। भारतीय संदर्भ में जब भी समाज में व्याप्त जाति, वर्ग और लिंग के स्तर पर व्याप्त असमानताओं और उनमें सुधार के मुद्दों पर चिंतन हो तो डॉ आंबेडकर के विचारों और दृष्टिकोण को शामिल किए बिना बात पूरी नहीं हो सकती। हर वर्ष 14 अप्रैल को डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मनायी जाती है। डॉ अंबेडकर की जयन्ती पर लोगों को संकल्प लेना चाहिये कि हम सब सच्चे मन से उनके बताये मार्ग का अनुशरण करेंगे। उनके बनाये संविधान का पालन करेंगे। ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे देश के किसी कानून का उल्लंघन होता हो। चूंकि वे हमेशा जाति प्रथा, ऊंच- नीच जैसी बातों के विरोधी थे इसलिए उनकी जयन्ती पर उनको श्रद्धांजलि देने का सबसे अच्छा तरीका है, उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनायें। डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के मऊ में एक गरीब परिवार में हुआ था। वो भीमराव रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं संतान थे। उनका परिवार मराठी था जो महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिला स्थित अंबावडे नगर से संबंधित था। उनके बचपन का नाम रामजी सकपाल था। वे हिंदू महार जाति के थे। उनकी जाति के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। एक अस्पृश्य परिवार में जन्म लेने के कारण उनका बचपन कष्टों में बीता। भारतीय संदर्भ में देखा जाये तो डॉ अंबेडकर संभवत: पहले अध्येता रहे हैं। जिन्होंने जातीय संरचना में महिलाओं की स्थिति को समझने की कोशिश की थी। उनके संपूर्ण विचार मंथन के दृष्टिकोण में सबसे महत्वपूर्ण मंथन का हिस्सा महिला सशक्तिकरण था। डॉ अंबेडकर यह बात समझते थे कि स्त्रियों की स्थिति सिर्फ ऊपर से उपदेश देकर नहीं सुधरने वाली, उसके लिए कानूनी व्यवस्था करनी होगी। हिंदू कोड बिल महिला सशक्तिकरण का असली आविष्कार है। इसी कारण अंबेडकर हिंदू कोड बिल लेकर आये थे। हिंदू कोड बिल भारतीय महिलाओं के लिए सभी मर्जों की दवा थी। पर अफसोस यह बिल संसद में पारित नहीं हो पाया और इसी कारण अंबेडकर ने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। स्त्री सरोकारों के प्रति डॉ अंबेडकर का समर्पण किसी जुनून से कम नहीं था। डॉ अंबेडकर का मानना था कि भारतीय महिलाओं के पिछड़ेपन की मूल वजह भेदभावपूर्ण समाज व्यवस्था और शिक्षा का अभाव है। शिक्षा में समानता के संदर्भ में आंबेडकर के विचार स्पष्ट थे। उनका मानना था कि यदि हम लड़कों के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देने लग जाए तो प्रगति कर सकते हैं। शिक्षा पर किसी एक ही वर्ग का अधिकार नहीं है। समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा का समान अधिकार है। नारी शिक्षा पुरुष शिक्षा से भी अधिक महत्वपूर्ण है। चूंकि पूरी पारिवारिक व्यवस्था की धुरी नारी है उसे नकारा नहीं जा सकता है। डॉ अंबेडकर के प्रसिद्ध मूलमंत्र की शुरूआत ही शिक्षित करो से होती है। इस मूलमंत्र की पालना से आज कितनी ही महिलाएं शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। डॉ अंबेडकर कुल 64 विषयों में मास्टर थे। वे हिंदी, पाली, संस्कृत, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, मराठी, पर्शियन और गुजराती जैसे 9 भाषाओं के जानकार थे। इसके अलावा उन्होंने लगभग 21 साल तक विश्व के सभी धर्मों की तुलनात्मक रूप से पढ़ाई की थी। डॉ अंबेडकर अकेले ऐसे भारतीय है जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगाई गयी है। इतना ही नहीं उन्हें देश-विदेश में कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले हैं। भीमराव आंबेडकर के पास कुल 32 डिग्री थी। उनके के निजी पुस्तकालय राजगृह में 50 हजार से भी अधिक किताबें थी। यह विश्व का सबसे बड़ा निजी पुस्तकालय था। जब 15 अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार बनी तो उसमें डॉ अंबेडकर को देश का पहले कानून मंत्री नियुक्त किया गया। 29 अगस्त 1947 को डॉ अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना कि लिए बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने उनके नेतृत्व में बने संविधान को अपना लिया। अपने काम को पूरा करने के बाद बोलते हुए डॉ अंबेडकर ने कहा मैं महसूस करता हूं कि भारत का संविधान साध्य है, लचीला है पर साथ ही यह इतना मजबूत भी है कि देश को शांति और युद्ध दोनों समय जोड़ कर रखने में सक्षम होगा। मैं कह सकता हूं कि अगर कभी कुछ गलत हुआ तो इसका कारण यह नहीं होगा कि हमारा संविधान खराब था बल्कि इसका उपयोग करने वाला मनुष्य ही गलत था। डॉ अंबेडकर ने 1952 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे लोकसभा का चुनाव लड़ा पर हार गये। मार्च 1952 में उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया। अपनी मृत्यु तक वो उच्च सदन के सदस्य रहे। दिल्ली स्थित 26 अलीपुर रोड के उस घर में एक स्मारक स्थापित किया गया है जहां डॉ अंबेडकर सांसद के रूप में रहते थे। देशभर में अंबेडकर जयंती पर सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है। अनेक सार्वजनिक संस्थानों का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर रखा गया है। डॉ अंबेडकर का एक बड़ा चित्र भारतीय संसद भवन में लगाया गया है। हर वर्ष 14 अप्रैल व 6 दिसम्बर को मुंबई स्थित उनके स्मारक पर काफी लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आते हैं। (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं।)

पुरुष महिलाओं की अपेक्षा मानसिक रूप से ज्यादा कमजोर
Published / 2023-04-13 13:08:09
पुरुष महिलाओं की अपेक्षा मानसिक रूप से ज्यादा कमजोर

अध्ययन : डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर के संयुक्त शोध में हुआ खुलासाएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में महिलाओं की तुलना में पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य अधिक कमजोर मिल रहा है जबकि हर दूसरा मानसिक रोगी अशिक्षित पाया गया। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक संयुक्त सर्वेक्षण और उसपर हुए अध्ययन में सामने आयी है।इसके मुताबिक, देश के 100 में से 71 मानसिक रोगियों की उम्र 17 से 59 वर्ष के बीच है। इनमें से करीब 50 फीसदी मरीजों में किसी भी बात को लेकर चिंता करने की परेशानी है जिसे शोधार्थियों ने अध्ययन में बेकार की चिंता उपनाम दिया है।सप्ताह भर पहले जर्नल ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि देश में मानसिक स्वास्थ्य, उसे लेकर परिवारों पर खर्च और गरीबी को लेकर अलग अलग राज्यों की स्थिति पर यह अध्ययन किया है।जुलाई से दिसंबर 2018 के बीच 76वें राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर डाटा एकत्रित किया गया। इस दौरान अलग-अलग जिलों में रिपोर्ट हुए छह हजार से ज्यादा मानसिक रोगियों से बातचीत भी की गयी।रोजमर्रा के काम को लेकर तनावआईसीएमआर के डॉ जितेंद्र यादव ने बताया कि अध्ययन में पता चला कि देश में प्रत्येक 100 में से 71 मानसिक रोगियों की उम्र 17 से 59 वर्ष के बीच थी। इनमें 56.8% पुरुष थे, जबकि 49.7% अशिक्षित थे। इनमें 50% लोगों ने स्वीकार किया है कि वे बेकार में बहुत ज्यादा चिंता करते हैं। वहीं, 29.6% ने असामान्य व्यवहार और 36.6% अपने रोजमर्रा के कामों को लेकर अक्सर तनाव में रहते हैं।इलाज के नाम पर बोझ... अध्ययन में शामिल बेंगलुरु के रमैया विवि के प्रो. डेनी जॉन ने कहा, मानसिक स्वास्थ्य पर परिवारों द्वारा की जा रहे खर्च और उसके वित्तीय प्रभावों को कम करने के लिए गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। इसकी शीघ्र जांच व प्रबंधन के जरूरी उपायों पर कार्य करना चाहिए।

चीफ जस्टिस बनने की चाहत रख रही 15 साल में बीए की परीक्षा देनेवाली तनिष्का
Published / 2023-04-11 20:20:18
चीफ जस्टिस बनने की चाहत रख रही 15 साल में बीए की परीक्षा देनेवाली तनिष्का

उम्र छोटी, काम बड़े... 15 साल की तनिष्का देंगी बीए की फाइनल पीक्षा एबीएन सोशल डेस्क। जब आप 15 साल के थे, तो क्या कर रहे थे? अगर आपसे ये सवाल पूछा जाए, तो आपका लगभग सभी के जैसा ही जवाब होगा कि हम स्कूल में थे। आमतौर पर इस उम्र में बच्चे 9वीं या 10वीं क्लास की पढ़ाई कर रहे होते हैं। मगर एक स्टूडेंट ऐसी भी हैं, जो बीए फाइनल ईयर एग्जाम देने जा रही हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली तनिष्का सुजीत 15 साल की उम्र में बैचलर आफ आर्ट्स (बीए) फाइनल ईयर का एग्जाम देने वाली हैं। तनिष्का का कहना है कि वह कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं, ताकि आगे चलकर वह देश की चीफ जस्टिस बन सकें। वह शुरू से ही पढ़ने में होशियार रही हैं। तनिष्का ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने भोपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान पीएम ने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। तनिष्का के लिए 2020 काफी बुरा रहा है। 2020 में कोविड-19 की वजह से उनके पिता और दादा दोनों की मौत हो गयी थी।इंदौर के देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली तनिष्का सुजीत ने कहा कि वह अपने बीए (साइकोलॉजी) फाइनल ईयर एग्जाम में हिस्सा लेंगी। एग्जाम 19 से 29 अप्रैल 2023 के बीचहोंगे। तनिष्का ने 10वीं क्लास फर्स्ट डिवीजन पास करने के बाद महज 13 साल की उम्र में 12वीं क्लास पास की। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में सोशल साइंस स्टडीज डिपार्टमेंट की प्रमुख रेखा आचार्य ने कहा कि तनिष्का को 13 साल की उम्र में बीए (साइकोलॉजी) कोर्स के फर्स्ट ईयर में एडमिशन दिया गया। एडमिशन से पहले एक एंट्रेंस टेस्ट भी देना पड़ा, जिसमें तनिष्का ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। एंट्रेंस टेस्ट की सुविधा इसलिए दी गई, क्योंकि उनका मामला स्पेशल था। पीएम मोदी जब एक अप्रैल को कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के लिए भोपाल गये थे, तब तनिष्का ने उनसे मुलाकात की थी। छात्रा ने बताया कि पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात 15 मिनट तक चली। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि वह बीए एग्जाम क्लियर करने के बाद अमेरिका में कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं। पढ़ाई खत्म करने के बाद वह देश वापस लौटना चाहती हैं, ताकि यहां पर चीफ जस्टिस बन पाएं। तनिष्का ने बताया कि मेरे लक्ष्य के बारे में जानने के बाद प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि मुझे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए, ताकि मैं वहां पर वकीलों की बहस देख पाऊं। ये मुझे मेरे लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रेरित भी करेगा। तनिष्का ने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा रहा।

तीन मई से फिर शुरू होगा शुभ मुहुर्तों का दौर
Published / 2023-04-11 18:46:35
तीन मई से फिर शुरू होगा शुभ मुहुर्तों का दौर

गुरु उदय के साथ ही फिर से गूंजेंगी शादियों की शहनाई, ये हैं शुभ मुहुर्त एबीएन सोशल डेस्क। शादी विवाह जैसे शुभ कार्य के लिए मुहूर्त सबसे जरूरी होता है। कहा जाता है कि किसी भी शादी को तीन महत्वपूर्ण निर्णय सही व्यक्ति, सही तारीख और सही समय ही सफल बनाते हैं। सनातन धर्म में ज्योतिषियों के सलाह से विवाह के लिए उपयुक्त तिथि और समय का चयन किया जाता है। ऐसे में अगर आप भी इस साल विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं तो आप अप्रैल से लेकर दिसंबर 2023 तक शादी के बचे हुए शुभ मुहूर्त के बारे में जान लें। बता दें कि 1 अप्रैल को गुरु मीन राशि में अस्त हो गया है। करीब एक माह तक इसी राशि में अस्त रहने के बाद गुरु 3 मई को फिर उदित होंगे। ज्योतिष शास्त्र में गुरु का अस्त होना शुभ नहीं माना जाता है। गुरु के अस्त होने के बाद मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। बता दें कि इस साल जनवरी में विवाह के लिए सिर्फ 8 दिन का ही शुभ मुहूर्त था। वहीं फरवरी और मार्च का महीने भी बीत चुका है। वहीं अप्रैल महीने की अगर बात करें तो इस महीने विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। मई में लंबे अंतराल के बाद विवाह के लिए शुभ मुहूर्त की शुरूआत हो रही है। ऐसे में हम आपको मई 2023 से लेकर दिसंबर तक शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त के बारे में बताने जा रहे हैं। मई से दिसंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त अप्रैल 2023 विवाह मुहूर्त : अप्रैल में शादी के लिए एक भी शुभ मुहूर्त नहीं है। मई 2023 विवाह मुहूर्त :  मई में 6, 8, 9, 10, 11, 15, 16, 20, 21, 22, 27, 29 और 30 को शादी के लिए शुभ मुहूर्त है। जून 2023 विवाह मुहूर्त : जून महीने में 1, 3, 5, 6, 7, 11, 12, 23, 24, 26 और 27 को शादी के लिए शुभ मुहूर्त है। नवंबर 2023 विवाह मुहूर्त : नवंबर महीने में 23, 24, 27, 28 और 29 को शादी का शुभ मुहूर्त हैं। दिसंबर 2023 विवाह मुहूर्त : दिसंबर महीने में 5, 6, 7, 8, 9, 11 और 15 को विवाह का शुभ मुहूर्त हैं। इस साल जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में विवाह कार्य बंद रहेंगे। इसका कारण यह है कि भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से लेकर चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। जिसके चलते सभी शुभ और मांगलिक कार्य बंद रहते हैं।

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