टीम एबीएन, रांची। जतरा टांड़ विकास समिति के तत्वावधान में आज दिनांक 30 अप्रैल दिन रविवार को जतरा टांड़ मैदान और उसके आसपास सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व देवनारायण उरांव ने किया और नगर निगम और समिति के ऊर्जावान सदस्यों ने मिलकर झाडू लगाते हुए पूरे मैदान को सुसज्जित बनाने में बारह पारह के सहयोग करने के लिए सभी सदस्यों ने बधाई दी। इस प्रकार के आयोजन से समाज में स्वक्षता के प्रति जागरूक करने की पहल से मुहल्ले में एक नया जोश भरने का काम किया है। आज इस स्वक्ष माहौल में नन्हे बच्चे खेल कुद के प्रति अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं। युवाओं में नशा के प्रति जागरूक करने का जो अभियान चलाया गया उसमें भी सफलता प्राप्त हो रही हैं सभी मिलकर इस धार्मिक स्थल को इसी प्रकार सुंदर रूप देने में सहयोग करने की बीड़ा उठाने के लिए तैयार है। आज के इस कार्यक्रम में देवनारायण उरांव, ओम नारायन श्रीवास्तव, शिवाजी मिश्रा, ललित लिंडा, मनीष जायसवाल, रत्नेश कुमार, विवेक उरांव, प्रदीप उरांव, कृष्णा उरांव, प्रदीप लकड़ा विशाल शर्मा, रणवीर सिंह, विजय कुमार, सन्नी गाड़ी, मनीष सिन्हा सहित मुहल्ले के वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया यह जानकारी मीडिया प्रभारी प्रदीप लकड़ा ने दी। धन्यवाद ज्ञापन के बाद सामुहिक जल पान करते हुए इस अभियान को अनवरत जारी रखने के लिए शपथ लिया गया।
केदारनाथ में बर्फबारी, लैंडस्लाइड का भी खतरा एबीएन सेंट्रल डेस्क। केदारनाथ और बद्रीनाथ में खराब मौसम के कारण श्रीनगर पुलिस ने एहतियात के तौर पर चारधाम यात्रा रोक दी है। श्रीनगर एसएचओ रवि सैनी ने बताया कि यात्रियों को श्रीनगर में ठहरने का पुख्ता इंतजाम किया गया है। यात्रियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। यात्रियों से मौसम साफ होने पर अपनी यात्रा जारी रखने की अपील की जा रही है। वहीं उत्तराखंड के चमोली जिले में पहाड़ का मलबा सड़क पर आ गया। चमोली पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि कोतवाली चमोली क्षेत्र के बाजपुर में पहाड़ी से मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया है। दिल्ली-एनसीआर, यूपी, राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों से चार धाम जाने वाले तीर्थ यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ गयी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गयी याचिका को निपटाने के लिए जिस प्रकार की जल्दबाजी माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा की जा रही है, वह किसी भी तरह से उचित नहीं है। यह नए विवादों को जन्म देगी और भारत की संस्कृति के लिए घातक सिद्ध होगी। इसलिए इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले माननीय सर्वोच्च न्यायालय को धर्मगुरुओं, चिकित्सा क्षेत्र, समाज विज्ञानियों और शिक्षाविदों की समितियां बनाकर उनकी राय लेनी चाहिए। यह विचार विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन, काशी विद्वत परिषद के प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी, गंगा महासभा के श्री गोविंद शर्मा और धर्म परिषद के महंत बालक दास जी ने वाराणसी में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि एक ओर तो समलैंगिक संबंधों को प्रकट करने के लिए मना किया गया, वहीं दूसरी ओर उनके विवाह की अनुमति पर विचार किया जा रहा है। क्या इससे निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं होगा? विवाह का विषय विभिन्न आचार सहिताओं द्वारा संचालित होता है। भारत में प्रचलित कोई भी आचार संहिता इनकी अनुमति नहीं देती। क्या सर्वोच्च न्यायालय इन सब में परिवर्तन करना चाहेगा? उन्हें स्मरण रखना चाहिए कि हिंदू धर्म में शादी केवल यौन सुख भोगने का एक अवसर नहीं है। इसके द्वारा शारीरिक संबंधों को संयमित रखना, संतति निर्माण करना, उनका उचित पोषण करना, वंश परंपरा को आगे बढ़ाना और अपनी संतति को समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाना भी है। समलैंगिक विवाहों में ये संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं। यदि इसकी अनुमति दी गई, तो कई प्रकार के विवादों को जन्म दिया जाएगा। दत्तक देने के नियम, उत्तराधिकार के नियम, तलाक संबंधी नियम आदि को विवाद के अंतर्गत लाया जाएगा। समलैंगिक संबंध वाले अपने आप को लैंगिक अल्पसंख्यक घोषित कर अपने लिए विभिन्न प्रकार के आरक्षण की मांग भी कर सकते हैं। यह ऐसे अंतहीन विवादों को जन्म देगा, जो स्वयं सर्वोच्च न्यायालय के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है। रोजगार के अधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण के अधिकार, आतंकवाद से मुक्ति प्राप्त करने के अधिकार, मजहबी कट्टरता से मुक्ति प्राप्त करने के अधिकार जैसे कई विषय हैं, जिनका निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय से होना है। इन प्राथमिक विषयों को छोड़कर केवल कुछ लोगों की इच्छा को ध्यान में रखकर इतनी तीव्रता कैसे दिखाई जा सकती है? यह कथन कि हम इसको वैसे ही सुनेंगे जैसे राम जन्मभूमि का मामला सुना गया, बहुत आपत्तिजनक है। राम जन्मभूमि के लिए 500 वर्ष तक हिंदू समाज ने संघर्ष किया। लाखों लोगों ने बलिदान दिए। न्यायालय द्वारा तथ्य और सत्य का परीक्षण लंबे समय तक लगातार किया गया। इस विषय की तुलना राम जन्मभूमि के साथ करना न केवल भगवान राम का अपमान है, अपितु हिंदू समाज और उसके संघर्ष का भी अपमान है। इसलिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय से निवेदन है कि वे इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी को वापस लें। इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले इसके विभिन्न पक्षों तथा उनके परिणामों का गहन अध्ययन करवाएं अन्यथा इस प्रक्रिया का समाज के द्वारा विधि सम्मत ढंग से विरोध किया जायेगा।
22 जनवरी को होगी राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, "सूर्य तिलक" होगा खास एबीएन सेंट्रल डेस्क। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस साल अक्तूबर महीने तक मंदिर का प्रथम तल बनकर तैयार हो जायेगा। वहीं मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बड़ी खबर आयी है। योगी सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला की गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा होगी और इसके बाद भक्त मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे। सुरेश खन्ना ने ट्वीट किया- अगले साल 22 जनवरी को गर्भगृह में होगी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, जय श्री राम। 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर के गर्भ गृह में पूरे विधि विधान और पूजा पाठ के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी। जिसके बाद राम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा और भक्त यहां भगवान राम के दर्शन कर सकेंगे। गर्भगृह के लिए बनाये गये पिलरों का काम पूरा हो गया है और अब छत की ढलाई का काम शुरू हो गया है। श्री रामजन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक गर्भगृह को पूरा करने के लिए सितंबर महीने तक का समय तय किया गया है जबकि अक्टूबर माह तक मंदिर का प्रथम तल बनकर तैयार हो जायेगा। प्रथम तल में राम दरबार होगा, जबकि दूसरा तल खाली रहेगा, इसे मंदिर की ऊंचाई बढ़ाने के लिए तैयार किया जायेगा। रामलला की मूर्ति के लिए भी कई जगहों से पत्थर मंगाये गये हैं। इनमें नेपाल की गंडक नदी से मंगाए गए शालिग्राम पत्थर भी शामिल हैं। मंदिर में जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी वो भगवान राम के बाल्यकाल की होगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि रामनवमी पर रामलला के मस्तक पर सूर्य किरणों का अभिषेक हो, इसके लिए भी वैज्ञानिकों की टीम ने अपना काम पूरा कर लिया है। इसे सूर्य तिलक नाम दिया गया है। तकरीबन पांच मिनट तक भगवान राम के ललाट पर सूरज की किरणें रहेंगी, यह प्रयोग सफल भी हो गया है।
टीम एबीएन, रांची। अक्षय तृतीया के दिन मां गंगा का अवतरण धरती पर हुआ और मां अन्नपूर्णा का जन्म भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ इसलिए इस दिन जल और अन्य का दान महत्वपूर्ण है। इस शुभ अवसर पर माहेश्वरी महिला समिति रांची ने सर्जना चौक राम मंदिर के समीप शरबत एवं चना बांटा गया। 11 किलो चना एवं 5000 ग्लास रोज शरबत स्कूल कॉलेज के स्टूडेंट्स, आने-जाने वाले सभी राहगीरों के बीच दिया गया। आज के इस पुण्य कार्यक्रम में प्रदेश सचिव संगीता चितलांगिया, अध्यक्ष भारती चितलांगिया, सभाध्यक्ष किशन साबू, शिव शंकर साबू, नरेंद्र लखोटिया, निवर्त्तमान अध्यक्ष विजयश्री साबू, सचिव बिमला फलोर, अनीता साबू, शारदा लड्डा, मंजू मंत्री, कुमुद लाखोटिया, सीमा मालपानी, रश्मि मालपानी, रेखा कल्याणी आदि का सहयोग रहा।
एबीएन सोशल डेस्क। देखो अपना देश के तहत अब पुणे से पुरी-गंगासागर दिव्य काशी की यात्रा की जा सकेगी। इस यात्रा के लिए भारत गौरव ट्रेन की शुरुआत 28 अप्रैल से होगी। तीर्थ यात्रा में पुरी, कोलकाता, गया, वाराणसी और प्रयागराज के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है।पर्यटक, जगन्नाथ पुरी, कोणार्क मंदिर, पुरी स्थित लिंगराज मंदिर, कोलकाता में काली बाड़ी और गंगा सागर, गया में विष्णुपद मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट और प्रयागराज में त्रिवेणी संगम देख सकेंगे। पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए रेलवे थीम आधारित ट्रेन चला रहा है। आईआरसीटीसी ने भारत गौरव ट्रेन को चलाने का निर्णय लिया है। सात स्लीपर श्रेणी कोच, थ्री एसी, थ्री टियर और फर्स्ट एसी, टू टियर कोच से इस ट्रेन को लैस किया गया है, ताकि सभी वर्ग के लोग यात्रा का लुत्फ उठा सकें। रेलवे ने तीन श्रेणियों में इकॉनमी, कंफर्ट और डीलक्स टूर पैकेज की पेशकश की है। इकॉनमी श्रेणी में 750 यात्री सफर कर सकेंगे।
रांची के भुतहा रेलवे स्टेशन पर भूत ट्रेन से लगाता है रेस...एबीएन सोशल डेस्क। कहते हैं कि भूत-वूत कुछ नहीं होते हैं, लेकिन झारखंड के रांची में एक भुतहा रेलवे स्टेशन है जहां भूत रहता है और लोगों ने भूत को देखा भी है, जिसके चलते डर के मारे स्टेशन पर लोग नहीं जाते। वहीं, इस स्टेशन को अब रेलवे ने बंद कर दिया है।इस स्टेशन पर भूत ट्रेन से रेस लगाता है रेसमामला जिले से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बेगुनकुदर स्टेशन का है। यह स्टेशन भुतहा स्टेशन है। यहांं भूत ट्रेन से रेस लगाता है। भूत के डर से अब कोई भी लोको पायलट ट्रेन को इस स्टेशन पर नहीं रोकता हैं। लोग भी डर के मारे यहां नहीं जाते, जिसको देखते हुए अब रेलवे ने इस स्टेशन को बंद कर दिया है। बताया जाता है कि यहां पर भूतों का खौफ इस कदर है कि शाम के 5 बजते ही स्टेशन वीराने में डूब जाता है। वहीं, बेगुनकुदर स्टेशन साल 1960 में खुला था, लेकिन कुछ सालों बाद यहां भूत होने की अफवाह फैल गयी थी। ग्रामीणों के मुताबिक 1967 में एक रेलकर्मी को उस महिला को भूत दिखा, जिसका कुछ दिन पहले स्टेशन पर ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। इसके बाद कुछ दिन बाद ही यहां के स्टेशन मास्टर और उनके परिजनों की लाशें उनके रेलवे क्वार्टर से मिली।भूत के डर से इस रेलवे स्टेशन को कर दिया गया बंदइसके बाद से कई लोगों ने यहां भूत देखने के दावे किये। सभी जगहों पर यहां पर भूत होने की बात फैल गई। स्टेशन पर काम करने वाले रेलकर्मी भी यहां से भाग निकले और रेल कर्मचारियों ने इस स्टेशन पर अपनी पोस्टिंग कराने से इंकार कर दिया। लोको पायलट ने भी यहां ट्रेन रोकना बंद कर दिया क्योंकि लोको पायलट का कहना था कि भूत ट्रेन से रेस लगाती है व ट्रेन के आगे पटरी के ऊपर जाकर नाचने लगती है और कभी-कभी तो ट्रेन से भी तेज दौड़ कर आगे निकल जाती है। इसके बाद रेलवे ने इस रेलवे स्टेशन को बंद कर दिया, लेकिन आज भी ट्रेन का इस रूट से होकर गुजरना जारी है। हालांकि ट्रेन यहां रुकती नहीं है।2009 में एक बार फिर से इसे खोला गया था, लेकिन स्थिति वही थीरांची रेल मंडल के सीनियर डीसीएम निशांत कुमार ने इस बात को स्वीकारा कि यह एक भूत बाधित स्टेशन है और रेलवे ने उसे बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रेतात्मा ट्रेन के आगे पटरियों पर देखी जाती है और भूत के खौफ के कारण वहां पायलट ट्रेन नहीं रोकना चाहता था, जिस कारण रेलवे को यह कदम उठानी पड़ा। हालांकि 2009 में एक बार फिर से इसे खोला गया था, लेकिन स्थिति वही थी।
एबीएन सोशल डेस्क। स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा संघ के तत्वावधान में आज कांके रोड स्थित कृषि भवन में भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया गया, जिसमें अध्यक्ष मनोज सिंह, संयोजक दिलीप राय, कोषाध्यक्ष मनीष कुमार पांडे, सचिव विकास चौधरी, वरिष्ठ सदस्य जितेंद्र ठाकुर, विक्रम शर्मा, सुनील सिंह, विनोद पांडे, सत्येंद्र नारायण सिंह, प्रवक्ता नरेंद्र पांडे, संगठन मंत्री रजनीश राय आदि ने भाग लिया और आगंतुक में श्री विकास सिंह - चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष, प्रखर नेत्री सीमा शर्मा, भाजपा के प्रदेश मंत्री सुबोध कुमार गुड्डू, भाजपा नेता शिव कुमार सिंह, संवेदक बीरेन सिंह, सुनील कुमार एवं कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष मनोज सिंह ने कहा कि हम लोग समाज के आखिरी छोर तक जाकर के और समाज का विकास करने को तत्पर हैं।संगठन को प्रवक्ता नरेंद्र पांडे, नेत्री श्रीमती सीमा शर्मा, भाजपा के प्रदेश मंत्री सुबोध कुमार गुड्डू एवं विकास सिंह ने संबोधित करते हुए भगवान परशुराम के जीवनी एवं उनके आदर्शों पर चर्चा की। आचार्य पंडित अर्जुन मिश्रा जी के द्वारा भगवान परशुराम जी का विस्तृत पूजन कराया गया एवं आरती में 300 लोगों से अधिक की उपस्थिति रही और सबने फिर मिलकर स्वरुचि भोज का आनंद लिया।
राजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। हिंदू धर्म में वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन देश भर में अक्षय तृतीया का महापर्व मनाया जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन किये गये शुभ एवं धार्मिक कार्यों के अक्षय फल मिलते हैं। अक्षय तृतीया के अलावा इस तिथि में विष्णु जी के छठे अवतार भगवान परशुराम का भी जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को भगवान परशुराम की जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।अक्षय तृतीया के शुभ दिन को लेकर यह भी मान्यता है कि इसी दिन गंगा नदी स्वर्ग से धरती पर आयी थी। साथ ही अक्षय तृतीया को अन्न एवं रसोई की देवी मां अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में इस दिन के कई महत्व एवं इससे जुड़ी कई तरह की पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। चलिये उन कथाओं और महत्वों के बारे में भी जानें :-अक्षय तृतीया व्रत कथाअक्षय तृतीया से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, धर्मदास नामक एक वैश्य था। धर्मदास की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वह हमेशा अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए चिंतित रहता था, आर्थिक स्थिति ठीक न होते हुए भी वह स्वभाव से बहुत ही धार्मिक एवं दानी था। एक बार धर्मदास ने किसी कथा के दौरान अक्षय तृतीया के दिन किये जाने वाले दान का महत्व सुना। कथा का महात्म्य सुनने के बाद वह हर साल अक्षय तृतीया को सुबह गंगा नदी में स्नान कर सभी देवी देवताओं की विधिपूर्वक पूजा करने लगा। अपने सामर्थ्य अनुसार जल से भरे घड़े, जौ, अनाज, गुड़, घी, जैसी कई वस्तुओं को भगवान और ब्राह्मणों को अर्पित करता था।यह सब देखकर धर्मदास की पत्नी उसे रोकने की कोशिश करती थी, क्योंकि उसे लगता था कि अगर इतना सब दान में दे देंगे तो परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा। अपनी पत्नी की बातों को सुनकर धर्मदास बिल्कुल भी विचलित नहीं होता और वह अपने सामर्थ्य अनुसार दान पुण्य करते रहता था। वृद्धावस्था में अनेक रोगों से ग्रस्त होने के बावजूद भी धर्मदास अक्षय तृतीया के दिन व्रत एवं दान पुण्य किया करता था। पौराणिक कथा के अनुसार, यही धर्मदास वैश्य अक्षय तृतीया के दान-धर्म के पुण्य के कारण अगले जन्म में कुशावती राजा हुआ। धर्मदास अपने अगले जन्म में भी दान-पुण्य करने वाला धार्मिक स्वभाव का था। कहा जाता है कि उनके महायज्ञ के आयोजन में त्रिदेव वेश बदलकर शामिल हुआ करते थे। प्रतापी राजा होने के बावजूद भी वह कभी दान धर्म के मार्ग से नहीं भटका और अपने पुण्य फल से अपने अगले जन्म में यही राजा भारत के महान सम्राट चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुये थे। अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य से खुश होकर भगवान ने धर्मदास पर कृपा की, वैसे ही जो कोई भी अक्षय तृतीया के इस दिन दान पुण्य कर व्रत कथा सुनता एवं पढ़ता है उसे भी अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक शास्त्रों में भी यह कहा गया है कि जीवन में सुख, समृद्धि, यश और वैभव की प्राप्ति के लिये इस दिन दान-पुण्य करके व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य से खुश होकर भगवान ने धर्मदास पर कृपा की वैसे ही जो कोई भी अक्षय तृतीया के इस दिन दान पुण्य कर व्रत कथा सुनता एवं पढ़ता है उसे भी अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथो में भी यह कहा गया है कि जीवन में सुख, समृद्धि, यश और वैभव की प्राप्ति के लिये इस दिन दान-पुण्य करके व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।अखा तीज के नाम से प्रसिद्ध है अक्षय तृतीयावैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाने वाली अक्षय तृतीया को हिंदू पंचांग के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। अक्षय तृतीया को "अखा तीज" भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों उच्च राशि में स्थित होते हैं। इसलिए इस दिन सोना खरीदना या नयी चीजों में निवेश करना शुभ माना जाता है।अक्षय तृतीया पर 125 सालों बाद पंचग्रही योग भी बनने जा रहा है। मेष राशि में 5 ग्रह सूर्य, गुरु, बुध, राहु और यूरेनस पंचग्रही योग का निर्माण करेंगे। जबकि, इस दिन चंद्रमा और शुक्र दोनों वृष राशि में होकर बेहद शुभ फलदायी स्थिति में होंगे। ये शुभ संयोग कई राशियों के लिए अच्छा साबित होगा।
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