टीम एबीएन, रांची। जय मां काली जगदंबा ट्रस्ट कल से तीन दिवसीय बड़ा पूजा महोत्सव प्रारंभ करेगा। ट्रस्ट के सचिव पवन पासवान ने बताया कि विगत 2 सालों कोरोना महामारी के कारण बड़ा पूजा महोत्सव का आयोजन नहीं हो पाया था। इस वर्ष तीन दिवसीय बड़ा पूजा महोत्सव बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। दिनांक 18 मई 2023 गुरुवार शाम 4 बजे से भव्य शोभायात्रा अपने परंपरागत मार्ग से होते हुए निकाली जायेगी। इसमें छत्तीसगढ़ के संघी बाजा, जमशेदपुर के ताशा पार्टी, हजारीबाग का ताशा पार्टी और झारखंड के परंपरागत ढोल नगाड़ों के साथ हजारों की संख्या में भव्य शोभायात्रा निकाली जायेगी। शोभायात्रा के बाद मां को छप्पन भोग लगाया जायेगा।जिसके उपरांत पूजा-अर्चना प्रारंभ होगी, जो देर रात तक चलेगी। दिनांक 19 मई 2023 प्रात: काल मुख्य पूजा सुबह 3 बजे से रात्रि 11 बजे तक आयोजित की जायेगी। इसी दिन भव्य भंडारे का भी आयोजन रखा गया है। जिसमें लाखों लोग भंडारा का प्रसाद ग्रहण करेंगे। ट्रस्ट के सचिव पवन पासवान ने बताया कि इस भंडारे में पूरे झारखंड ही नहीं देश-विदेश के लोग भी शामिल होंगे।दिनांक 20 मई 2023 शनिवार को शाम 4 से रात्रि 10 बजे तक मां का भव्य जागरण जय माता दी जागरण परिवार की ओर से आयोजित किया जायेगा, जिसमें कई नामी गामी भजन गायक अपनी प्रस्तुति देंगे।मां के दर्शन के लिए इस बार भीड़ को देखते हुए भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। मां के दर्शन में लंबी कतार होने के कारण महिलाओं के परेशानी को देखते हुए महिला दर्शनार्थियों को बैठने की व्यवस्था की गयी है। पूरे हिनू क्षेत्र को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। चंदन नगर के भव्य लाइट गेट बनाये जा रहे हैं। डायनासोर गोरिला राजस्थानी नृत्य पूजा के मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा। कुल 50 तोरण द्वार बनाये गये हैं। मां के परिसर को सजाने के लिए थाइलैंड से फूल मंगाये गये हैं। मां का भव्य दरबार सजाया जा रहा है। हिनू से बिरसा चौक तक सैकड़ों की संख्या में झंडे लगाये गये हैं। इस भव्य आयोजन में स्थानीय महिला समिति स्थानीय महिलाएं बच्चे समिति के सैकड़ों सदस्य रात दिन लगे हुए हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का असरएबीएन न्यूज नेटवर्क, पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के मरंगा थाने के एक गांव में सतर्क ग्रामीणों द्वारा समय पर दी गयी सूचना के नतीजे में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन (केएससीएफ) की टीम, पुलिस और चाइल्ड लाइन ने मौके पर पहुंच कर तेरह साल की बच्ची का विवाह रुकवाया। ग्रामीणों ने खुद केएससीएफ, पुलिस और चाइल्ड लाइन को फोन कर इस बाबत जानकारी दी। केएससीएफ टीम के प्रयासों से देर रात बच्ची को बालिका गृह में आश्रय दिलाया गया। ग्रामीणों को पता चला कि उनके गांव की एक नाबालिग की उत्तर प्रदेश के 17 साल के एक लड़के से शादी हो रही है तो उन्होंने एकजुट होकर इसका विरोध किया और केएससीएफ की पूर्णिया टीम और पुलिस के अलावा चाइल्ड लाइन पर भी इसकी सूचना दी। केएससीएफ की टीम सूचना मिलते ही देर रात मौके पर पहुंची और विवाह की रस्मों को रुकवाया। मरंगा थाने का यह गांव उन दस हजार गांवों में शामिल था जहां बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने बाल विवाह के खिलाफ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चलाया था। देश के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक इस अभियान में देश के 26 राज्यों के 500 से अधिक जिलों के करीब दस हजार गांवों में 70 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर दीये जलाये गये और केंडल मार्च निकाले गये। इस अभियान के दौरान दो करोड़ से अधिक लोगों ने बाल विवाह को खत्म करने की शपथ ली थी। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के प्रवक्ता बिधान चंद्र सिंह ने कहा कि हमने गांवों में बड़ी संख्या में महिला नेतृत्वकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है जो बाल विवाह की बीमारी के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध हैं। आखिरकार अब जाकर एक बदलाव होता देख रहे हैं। पहले ग्रामीण बाल विवाह पर अड़ जाते थे और अक्सर गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते थे। लेकिन अब परिवर्तन आ रहा है और इसका सबूत है कि ग्रामीणों ने खुद सूचना देकर यह बाल विवाह रुकवाया। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
टीम एबीएन, गढ़वा। जिले के मेराल प्रखंड के वनखेता गांव में तीन भाइयों ने मिलकर परंपरागत अनाज व सब्जियों की खेती से हटकर अब फूलों की खेती की तरफ अपने कदम बढ़ाये हैं। जिले के मेराल प्रखंड के किसान अरमा कुशवाहा के तीन बेटे रजनीकांत कुशवाहा, रवि कुशवाहा और मिथलेश कुशवाहा ने पहली बार व्यवसायिक दृष्टिकोण से फूलों की खेती प्रारंभ किया है। वे ऐसा करनेवाले प्रखंड के पहले किसान हैं। गेंदा के फूलों से वे माला बनाकर इसकी बिक्री करते हैं। अरमा कुशवाहा ने करीब 50 डिस्मिल जमीन पर गेंदा फूल की पुषा नारंगी और हजारा वेराईटी लगायी है। उन्होंने शादी-विवाह के मौसम को देखते हुए जनवरी महीने में फूलों को लगाया था और अप्रैल महीने से ही इसे बेचना शुरू कर दिया है।गढ़वा में तीन भाइयों की नयी पहलइससे वे करीब एक महीने के अंदर 35 हजार रुपये तक की आमदनी हासिल कर चुके हैं। जबकि तीन महीने में एक लाख रुपये तक कमाने का लक्ष्य है। इसमें लागत के नाम पर मेहनत व पांच हजार रुपये ही खर्च हुए हैं। इस वजह से अरमा कुशवाहा अगले साल इसे और बृहद पैमाने पर करना चाहते हैं। इस संबंध में रवि कुशवाहा और रजनीकांत ने बताया कि वे परंपरागत रूप से कद्दू, बैंगन आदि की खेती गर्मी के इस मौसम में करते हैं।फूलों की खेती से किया कमालइसमें एक तो मेहनत ज्यादा है और दूसरा इसमें खर्च भी अधिक है। इसकी तुलना में गेंदा फूल को सिर्फ एक बार लगाने में मेहनत है। इसके खरीदार घर तक आते हैं और माला लेकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे 20-20 माला की एक लड़ी बनाते हैं, इसकी बिक्री 250 रुपये तक की जाती है।
योगेश कुमार गोयल एबीएन एडिटोरियल डेस्क। डेंगू वैसे तो प्रतिवर्ष खासकर बारिश के मौसम में लोगों पर कहर बनकर टूटता रहा है। देश के अनेक राज्यों में अब हर साल डेंगू का प्रकोप देखा जाने लगा है। हजारों लोग डेंगू से पीड़ित होकर अस्पतालों में भर्ती होते हैं। इनमें से दर्जनों लोग मौत के मुंह में भी समा जाते हैं। इसीलिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष लोगों में डेंगू को लेकर जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। डेंगू की दस्तक हर साल सुनाई पड़ती है किन्तु हर तीन-चार वर्ष के अंतराल पर डेंगू एक महामारी के रूप में उभरकर सामने आता है। डेंगू की दस्तक के बाद प्रशासन की नींद टूटती है। तब जगह-जगह फैले कचरे और गंदगी के ढेर तथा विभिन्न अस्पतालों में सही तरीके से साफ-सफाई न होने और अस्पतालों में भी मच्छरों का प्रकोप दिखता है। प्रशासनिक लापरवाही का आलम यही रहता है कि ऐसी कोई बीमारी फैलने के बाद एक-दूसरे पर दोषारोपण कर जिम्मेदारी से बचने की होड़ दिखाई देती है। डेंगू का प्रकोप अब पहले के मुकाबले और भी भयावह इसलिए होता जा रहा है। अब डेंगू के कई ऐसे मरीज भी देखे जाने लगे हैं, जिनमें डेंगू के अलावा मलेरिया के भी लक्षण होते हैं और दोनों बीमारियों के एक साथ धावा बोलने से कुछ मामलों में स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों से डेंगू के कुछ ऐसे मामले भी सामने आने लगे हैं, जब सप्ताह भर बाद ही रोगी के शरीर में ज्यादातर अंग काम करना बंद कर देते हैं और रोगी दम तोड़ देता है। कुछ ऐसे मरीज भी देखे जाते हैं, जिनमें डेंगू के शिकार होने के बावजूद बुखार और तेज सिरदर्द जैसे डेंगू में आम लक्षण नदारद होते हैं। ऐसे मरीज केवल शारीरिक थकान की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, जहां उनमें रक्त जांच के बाद डेंगू की पुष्टि होती है। आमतौर पर सामने आने वाले लक्षणों रहित ऐसे मामले अब डॉक्टरों के लिए भी परेशानी का सबब बनने लगे हैं। डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है। यह एक खतरनाक बीमारी है, जो ऐडीस मच्छर के काटने से होती है, जो हमारे घरों के आसपास भरे पानी में ही पनपता है। ऐडीस मच्छर काले रंग का स्पॉटेड मच्छर होता है, जो प्राय: दिन में ही काटता है। डेंगू का वायरस शरीर में प्रविष्ट होने के बाद सीधे शरीर के प्रतिरोधी तंत्र पर हमला करता है। इस मच्छर का सफाया करके ही इस बीमारी से पूरी तरह से बचा जा सकता है। प्राय: मानसून के बाद ही डेंगू के ज्यादा मामले देखने को मिलते हैं। डेंगू प्राय: दो से पांच दिनों के भीतर गंभीर रूप धारण कर लेता है। ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को बुखार आना बंद हो सकता है और रोगी समझने लगता है कि वह ठीक हो गया है लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है बल्कि यह स्थिति और भी खतरनाक होती है। अत: बेहद जरूरी है कि आपको पता हो कि डेंगू बुखार होने पर शरीर में क्या-क्या प्रमुख लक्षण उभरते हैं। डेंगू के अधिकांश लक्षण मलेरिया से मिलते-जुलते होते हैं लेकिन कुछ लक्षण अलग भी होते हैं। तेज बुखार, गले में खराश, ठंड लगना, बहुत तेज सिरदर्द, थकावट, कमर व आंखों की पुतलियों में दर्द, मसूडों, नाक, गुदा व मूत्र नलिका से खून आना, मितली व उल्टी आना, मांसपेशियों व जोड़ों में असहनीय दर्द, हीमोग्लोबिन के स्तर में वृद्धि, शरीर पर लाल चकत्ते (खासकर छाती पर लाल-लाल दाने उभर आना), रक्त प्लेटलेट (बिंबाणुओं) की संख्या में भारी गिरावट इत्यादि डेंगू के प्रमुख लक्षण हैं। बीमारी कोई भी हो, उसके उपचार से बेहतर उससे बचाव ही होता है और डेंगू के मामले में तो बचाव ही सबसे बड़ा हथियार माना गया है। इसीलिए बारिश के मौसम से पहले ही लोगों को इसके बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी हो जाता है। घर की साफ-सफाई का ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है। आपके घर या आसपास के क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप न हो, इसके लिए जरूरी है कि मच्छरों के उन्मूलन का विशेष प्रयास हो। कुछ अन्य जरूरी बातों पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। जैसे, अपने घर में या आसपास पानी जमा न होने दें। जमा पानी के ऐसे स्रोत ही डेंगू मच्छरों की उत्पत्ति के प्रमुख कारक होते हैं। यदि कहीं पानी इकट्ठा हो तो उसमें केरोसीन आयल या पैट्रोल डाल दें ताकि वहां मच्छरों का सफाया हो जाए। पानी के बर्तनों, टंकियों इत्यादि को अच्छी प्रकार से ढ़ककर रखें। कूलर में पानी बदलते रहें। यदि कूलर में कुछ दिनों के लिए पानी का इस्तेमाल न कर रहे हों तो इसका पानी निकालकर कपड़े से अच्छी तरह पोंछकर कूलर को सुखा दें। खाली बर्तन, खाली डिब्बे, टायर, गमले, मटके, बोतल इत्यादि में पानी एकत्रित न होने दें। घर के दरवाजों, खिड़कियों तथा रोशनदानों पर जाली लगवाएं ताकि घर में मच्छरों का प्रवेश बाधित किया जा सके। पूरी बाजू के कपड़े पहनें। हाथ-पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें। मच्छरों से बचने के लिए मॉस्कीटो रिपेलेंट्स का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना मच्छरों से बचाव का सस्ता, सरल, प्रभावी और हानिरहित उपाय है। डेंगू के लक्षण उभरने पर तुरंत योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। डेंगू हो जाने पर रोगी को हर हाल में पौष्टिक और संतुलित आहार देते रहना बेहद जरूरी है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
पंछी को दाना - पंछी को पानी टीम एबीएन, रांची। श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची, (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) ने सोमवार को पंछी को दाना - पंछी को पानी : जन जागरूकता अभियान वर्ष 2023 का दूसरा चरण गुरुकृपा पब्लिक स्कूल, दयाल नगर, पिस्का मोड़ में आयोजित किया। कार्यक्रम में गुरुकृपा स्कूल के आठवें, नवें एवम दसवें कक्षा के बच्चों के बीच सकोरा (मिट्टी का बर्तन) एवं दाना का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया ताकी इस भीषण गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी एवं दाना मिल सके साथ ही उनके प्राणों की रक्षा हो सके। कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों के बीच लगभग 80 सकोरा एवं दाना के पैकेट का वितरण किया गया एवं उनसे निवेदन किया गया कि अपने घरों के छत एवं आंगन पर इसमें पानी भर कर रखें और साथ ही पक्षियों के खाने के लिए दाना भी दें। पंछी को दाना-पंछी को पानी : जनजागरूकता अभियान वर्ष 2023 का यह दूसरा चरण था। पहले चरण में श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची द्वारा किशोर गंज, रोड न.1 स्थित एलपी पब्लिक स्कूल के बच्चों के बीच 200 सकोरा का वितरण किया जा चुका है। आज के कार्यक्रम में गुरुकृपा पब्लिक स्कूल के तरफ से डायरेक्टर रतनेश सिंह के साथ वहां के शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समूह शाखा रांची की ओर से राधेश्याम सिंह, नवल किशोर सिंह, समरेन्द्र सिंह, श्रवण शर्मा, गौरीशंकर षाड़ंगी, विक्रांत सिंह, कीर्तिमान नाथ शाहदेव, द्वेद नाथ शाहदेव, सागर सिंह, अशोक परिदर्शी, यदुनाथ शाहदेव आदि सम्मलित हुए।
जगदीश सिंहएबीएन सोशल डेस्क। आज के आधुनिक युग में अनेक मानसिक तथा सामाजिक कारको के कारण व्यक्ति मानसिक रोगों के शिकार हो रहे हैं। मानसिक रोगों के उपचार तथा बचाव के लिए प्रयास किए जा रहे हैं पर फिर भी मानसिक रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।हमारा मस्तिष्क हमारी सारी क्रियाओं तथा विचारों का केंद्र बिंदु है। जब तक यह ठीक से कार्य करता रहता है, हमारा व्यवहार सामान्य रहता है। इसके कार्य में थोड़ी सी भी अव्यवस्था आने पर हमारा व्यवहार बदल जाता है। विचार शक्ति का तारतम्य टूटने लगता है। इस स्थिति में हमारा व्यवहार असामान्य होने लगता है। यह सामान्यता कभी-कभी इतनी अल्प होती है की इससे दूसरे व्यक्ति अधिक प्रभावित नहीं होते या परिवार और समाज में इसमें कोई अव्यवस्था नहीं उत्पन्न होती। इनके और सामान्य व्यक्तियों के व्यवहार में बहुत कम अंतर होता है।इसके विपरीत कुछ मनोरोगी असामान्यता से बहुत गहरे रूप से प्रभावित होते हैं। इनका सारा विचार एवं व्यवहार अस्त व्यस्त हो जाता है। लगभग सभी प्रकार के मानसिक रोगों का मूल कारण तनाव है। सामान्यता यह देखा गया है की तनाव मुख्य रूप से दो कारणों से उत्पन्न होता है।वाह्य वातावरण में उपस्थित कारक तथाव्यक्ति के भीतर व्यक्तिगत कारक।अतः तनाव संबंधी रोगों के उपचार तथा बचाव के लिए दो मापदंड होना आवश्यक हैवाह्य वातावरण के कारको को कम करने का मापदंडव्यक्ति के भीतर परिस्थिति से लड़ने की क्षमता तथा प्रकृति का विकास।भारत में हजारों वर्षों से योग का अभ्यास किया जा रहा है। यह अलग बात है कि मानसिक रोगों के रोकथाम तथा उपचार में युवकों योग के महत्व को हाल में दुनिया के अन्य देशों जैसे अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी आदि ने भी पहचाना है।यौगिक उपचार का सीधा संबंध व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाना तथा उसकी उसमें परिस्थिति से लड़ने की ताकत पैदा करने से है। स्वास्थ्य के संबंध में योग का संबंध बचाव, उपचार तथा विकास तीनों से है। दूसरे शब्दों में योग मानसिक रोगों को उत्पन्न होने से रोकता है, मानसिक रोगों के लक्षणों का निराकरण करता है तथा व्यक्ति मे अच्छे गुणों का विकास कर परिस्थिति से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।दूसरे शब्दों में कहे तो उसका व्यक्तित्व पूरी तरह से विघटित हो जाता है। वह पारिवारिक एवं सामाजिक नियमों की खुली अवहेलना करता है। परिस्थितियों की उससे कोई समझ नहीं होती। कर्म योग साधना एक ऐसा मार्ग है, जिससे लौकिक एवं पारलौकिक दोनों पक्षों का उत्थान होता है। इस साधना के लिए सन्यास लेने या कहीं वन में जाकर रहने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि गृहस्थ में रहते हुए भी मनुष्य कर्म योग का साधक हो सकता है और फल की इच्छा को त्याग कर कर्म करता हुआ भी मुक्ति को प्राप्त कर सकता है।कोई भी व्यक्ति कर्म किए बिना नहीं रह सकता। जीवन का आधार श्वास की प्रक्रिया भी एक कर्म है। जब कर्म में योग शब्द जुड़ जाता है तो इसका अर्थ होता है सजगता के साथ क्रिया। जब कोई व्यक्ति किसी क्रिया को पूर्ण सजगता तथा बिना किसी आसक्ति या अपेक्षा के साथ करता है तो वह कर्म योग कहलाता है।दैनिक जीवन में हम हजारों क्रियाएं करते हैं पर अक्सर वे सब अपेक्षा युक्त होते हैं। इस अपेक्षा या आसक्ति के कारण राग तथा द्वेष की उत्पत्ति होती है, जो आगे चलकर व्यक्ति को मानसिक रोगी बनाने में अहम भूमिका अदा करती है।कर्म योग का अभ्यास मानसिक रोगो से बचाव तथा उनके उपचार मे बहुत उपयोगी है, क्योंकि यहां व्यक्ति किसी भी कार्य को अनासक्त भाव से करना सीखता है। इसके अलावा कर्म योग के अभ्यास से संस्कारों का क्षय होता है, तो अचेतन की गंदगी दूर होती है, जो मानसिक रोग की उत्पत्ति हुई अहम भूमिका निभाते हैं।जब व्यक्ति पूर्ण सजगता के साथ किसी क्रिया को करता है तो धीरे-धीरे उसकी सजगता अवचेतन तथा अचेतन मन में जाने लगती है। वहां व्यक्ति का सामना अचेतन की गंदगी से होता है जब व्यक्ति उन अचेतन की अतृप्त इच्छाओं तथा लालसाओ को अनासक्त भाव से देखता है तो उसका क्षय हो जाता है। इस प्रकार कर्म योग के अभ्यास से मन की गंदगी दूर हो जाती है तथा संतुलित मानसिक स्वास्थ्य का विकास होता है।भक्ति योग :: भक्ति योग के अभ्यास से व्यक्ति में उच्च प्रेम भाव का विकास होता है। जहां वह परम सत्ता के सामने अपने अहंकार को पूर्ण रूप से समर्पित कर देता है। जब भक्ति भाव का विकास होता है तो अहम का भाव समाप्त हो जाता है।भक्ति योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति जीवन की समस्याओं के प्रति एक दूसरा दृष्टिकोण अपनाने लगता है। व्यक्ति सहनशील हो जाता है। जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी वह अपना मानसिक संतुलन नहीं खोता है।भजन कीर्तन के अभ्यास से मन की चंचलता समाप्त हो जाती हैं। भजन कीर्तन में तल्लीन हो जाने से चेतना का विस्तार होता है तथा मन नकारात्मक विचारों, भावो तथा संवेगो मुक्त हो जाता है।फलत: मन शांत तथा स्थिर हो जाता है। अकेलापन का भाव, जो मानसिक रोग का एक प्रमुख कारण है, भक्ति योग के अभ्यास से दूर हो जाता है, क्योंकि भक्त स्वयं को हमेशा परमसत्ता के साथ अनुभव करता है। परमसत्ता के प्रति यह समर्पण उसके भीतर शांति तथा आनंद का संचार करता है।(लेखक जगदीश सिंह Masters in Yogic Science, Level 1 Yoga Instructor (Yoga Certification Board, Ayush Ministry हैं।).
आर्यवीर दल झारखंड प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय युवा चरित्र निर्माण शिविर का छठा दिनटीम एबीएन, लोहरदगा। गुरुकुल आम सेना महाविद्यालय के उपाचार्य डॉक्टर कुंजदेव मनीषी ने आज दिनांक 14 मई को बौद्धिक कक्षा में शिखा संस्कृति पर उपस्थित प्रशिक्षुओं को बताए कि शिखा से मन एकाग्र होता है। शिखा का स्थल को लघु मस्तिष्क होता है, शिखा और जनेऊ भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। आदिकाल से ही शिखा रखने का विधान है। उन्होंने शाकाहारी आहार अपनाने को श्रेष्ठतम आहार बताया। बौद्धिक कक्षा के दौरान कई विद्वानों ने अपने विचारों से बच्चों को संस्कार, चरित्र निर्माण, सम्यक विचारों पर विचार प्रकट किये। जिनमें रांची के प्रसिद्ध नेत्र सर्जन डा गोपाल सिंह, सेवानिवृत प्रो बी एन घोष, पतंजलि के राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह जिला संरक्षक शिव शंकर सिंह, शिक्षक नवनीत गौड़, गणेश शास्त्री ने बच्चों को मार्ग दर्शन किया।मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव समापन समारोह के होंगे मुख्य अतिथिआर्य वीर दल झारखंड प्रदेश के तत्वावधान में सात दिवसीय युवा चरित्र निर्माण शिविर के समापन समारोह में झारखंड सरकार के कैबिनेट एवं वित्त मंत्री स्थानीय विधायक डॉ रामेश्वर उरांव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। उक्त आशय की जानकारी गुरुकुल शांति आश्रम के संचालक आचार्य शरदचंद्र आर्य ने दी।उन्होंने बताया कि संध्या 4 बजे से समापन समारोह के दौरान कई कार्यक्रमों का प्रदर्शन भी प्रशिक्षण के द्वारा किया जायेगा। कार्यक्रम में शहर के एवं आसपास जिले के गणमान्य जन भी उपस्थित रहेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शुक्रवार को 10वीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया। बोर्ड ने अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए पहली बार दोनों परीक्षाओं में विद्यार्थियों की मेरिट लिस्ट जारी नहीं की है। साथ ही, विद्यार्थियों के अंकों के आधार पर उन्हें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी (डिवीजन) देने की प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।यानी इस बार न तो कोई मेरिट लिस्ट होगी, न ही किसी की फर्स्ट, सेकेंड या थर्ड डिवीजन। हालांकि, बोर्ड 0.1 प्रतिशत विद्यार्थियों को मेरिट प्रमाणपत्र जारी करेगा जिन्होंने विभिन्न विषयों में सर्वाधिक अंक हासिल किए हैं। दोनों कक्षाओं में करीब 3.08 लाख विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हैं। 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 66 हजार रही। 12वीं में 1,12,838 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत, जबकि 22,622 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये। 10वीं में 1,95,799 विद्यार्थी 90 या इससे अधिक, जबकि 44,297 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किये।10वीं में 93.12 फीसदी स्टूडेंट पास10वीं में 93.12 फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए हैं। 94.25 फीसदी लड़कियां तो 92.72 फीसदी लड़के सफल हुए। इस साल उत्तीर्ण हुए छात्रों की संख्या पिछले साल की तुलना में 1.28 प्रतिशत कम है।12वीं में 87.33 फीसदी स्टूडेंट पास12वीं कक्षा में 87.33 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इस बार सफलता हासिल की है, जो पिछले साल के मुकाबले 5.38 प्रतिशत कम है। 90.68 फीसदी लड़कियां और 84.67 फीसदी लड़के उत्तीर्ण हुए। लड़कियां, लड़कों के मुकाबले 6.01 फीसदी आगे रहीं। त्रिवेंद्रम क्षेत्र में सबसे अधिक 99.91 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, जबकि प्रयागराज क्षेत्र में सबसे कम 78.05 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। 1.25 लाख से अधिक विद्यार्थियों को कम्पार्टमेंट की श्रेणी में रखा गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने राजस्थान को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त कराने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रयासों को एक साझा दिशा में ठोस आकार देने के लिए एक परिचर्चा की। विचार विमर्श के दौरान बाल मजदूरी की समस्या और इसके चंगुल से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास के उपायों पर चर्चा हुई। राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (आरएससीपीसीआर) के सहयोग से हुई इस परिचर्चा में प्रदेश सरकार के श्रम, शिक्षा, पुलिस, बाल अधिकार जैसे विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस परिचर्चा में बाल श्रम के उन्मूलन और बचाये गये बच्चों के पुनर्वास के लिए आगे की योजनाओं और उठाए जा सकने वाले कदमों पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया।बताते चलें कि हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। बचपन बचाओ आंदोलन राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ मिलकर जून को ह्यएक्शन मंथह्ण के रूप में मनाने की तैयारी में जुटा है। पूरे प्रयास हैं कि राजस्थान को बाल श्रम से मुक्त कराने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाने के लिए जून के महीने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाए। इस एक्शन मंथ के दौरान पूरे राज्य में बाल मजदूरी के खिलाफ प्रयासों को दोगुनी गति दी जाएगी और बाल मजदूरी के शिकार बच्चों को छापामार कार्रवाईयों के जरिए मुक्त कराने और उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ परिचर्चा इसी दिशा में एक कदम है ताकि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से बाल मजदूरी के उन्मूलन के साझा लक्ष्य को हासिल किया जा सके। सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से बाल श्रम के खिलाफ राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस परिचर्चा में जिसमें विभिन्न विभागों के 70 से अधिक अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद थे, आरएससीपीसीआर की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने कहा कि बाल मजदूरी पूरी तरह खत्म करने और हर बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों, एजेंसियों और संगठनों के साझा और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज से बाल मजदूरी की बुराई को मिटाने के लिए अब यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि जमीनी धरातल पर काम हो और जिला स्तर पर इसकी निगरानी का तंत्र हो। राजस्थान को बाल मजदूरी से मुक्त कराने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए बीबीए के एग्जीक्यूटिव डाइरेक्टर धनंजय टिंगल ने कहा कि सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की ओर से तय सीमा के अनुसार 2025 तक बाल मजदूरी की बुराई का खात्मा हो जाना चाहिए और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों और नागरिक समाज के संगठनों को मिलकर साझा प्रयास करने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर राजस्थान सरकार की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक है और वह प्रदेश को बाल मजदूरी से मुक्त बनाने की दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है। परिचर्चा में मौजूद राजस्थान सरकार के श्रम विभाग के सचिव सीताराम भाले ने भी इस राय से सहमति जताते हुए कहा कि बाल श्रम के संपूर्ण खात्मे के लिए ये साझा प्रयास खासे अहम हैं। इस परिचर्चा की सफलता इस बात में है कि इसमें राज्य सरकार के सभी महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी मौजूद हैं, इसलिए इसमें लिए गए फैसलों के समन्वित क्रियान्वयन में आसानी रहेगी। भाले ने कहा कि प्रत्येक लेबर इंस्पेक्टर को अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को अच्छी तरह जानना चाहिए और इसे अद्यतन करने के लिए हर तीसरे महीने एक प्रशिक्षण सत्र की आवश्यकता है। इस दौरान पुलिस महकमे के अफसरों ने बाल मजदूरी और बाल तस्करी रोकने की दिशा में विभाग द्वारा उठाये गये विभिन्न कदमों की जानकारी दी।
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