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शरीर के साथ-साथ पृथ्वी और जल के लिए भी घातक है सिगरेट
Published / 2023-05-31 11:44:39
शरीर के साथ-साथ पृथ्वी और जल के लिए भी घातक है सिगरेट

World No Tobacco day specialसिगरेट शरीर के साथ हमारे पृथ्वी और जल को भी जला रहा हैएबीएन सोशल डेस्क। हम अपने जीवन मे न जाने कितनी बार बड़ों के द्वारा समझाये गये हैं कि तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, ये सब बात सुनकर ही हम बड़े हुए हैं की मुंह का कैंसर फेफड़ा आदि को कितना नुकसान पहुंचता है इसके बावजूद अक्सर दुकानों या ज्यादातर पान की गुमटियों मे लोग या तो ऑफिस की कच- कच पर चर्चा या फिर देश में घटित घटना की चिंता कर रहे होते हैं। बात यही नहीं खत्म होती है। वह जो कई लोग ऐसे भी होते हैं कि अपनी बुद्धि को घोड़े जैसी चाल करवाने की बात सोचकर अक्सर सहारा लेने का प्रयास करते हैं, इसमें युवा भी जोशीले नजर आते हैं। आप सोच रहे होंगे कि बात को घुमा फिरा कर कहना क्या है, तो इन सब में कॉमन एक बात यह है कि हाथ में सिगरेट अक्सर होता है जो चाय के प्याले के साथ हो भी सकता है या नहीं भी, जो बिल्कुल सामान्य सा लगता है खास कर के अभी के जमाने में युवा पीढ़ी को। साफ शब्दों में यूं कहें तो फिल्मी हीरो जैसा फीलिंग आती है,वह स्टाइल आए भी क्यों न क्योंकि फिल्मों में एक्टर्स एक्ट्रेस भी  सिगरेट पीते हुए नजर आते हैं भले यह बात अलग है कि स्क्रीन के बॉटम में फिल्मी पॉलिसी के अनुसार लिख दिया जाता है धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और यह पॉलिसी छोड़िये उन पैकेट में जो मुंह का कैंसर वाला फोटो डराने के लिए लगवाया रहता है।पर मुझे नहीं लगता कि उससे लोगों के मन में घृणा पैदा होती है, ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि कंपनियों की उत्पादन क्षमता कभी घटती हुई नजर नहीं आती है, जिसे आप स्वयं या फिर दिमाग की क्रिएटिविटी बढ़ाने के लिए या फिर गम भुलाने के लिए सिगरेट का कश लगाते हैं। आप तो अपना स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ तो कर ही रहे हैं आस पास वाले को भी बिना सिगरेट का कश लगाये उतना ही असर करता है जितना पीने वाले को करता है, इसके अलावे एक खास बात की सिगरेट का आखरी हिस्सा जो अक्सर पीले रंग से मार्क रहता है जो सिगरेट बट कहलाता है उसे आप धरती पर यूं फेक देते हैं, कुछ तो उसमें आग बुझाने के लिए पैरों तले रौंदने में भी स्वैग फील करते हैं। लेकिन शोधकर्ताओं के आईने में जब आप झाकेंगे तो सच्चाई यह है कि आपको जो स्टाइल लग रहा है। वही सिगरेट बट धरती पर प्रदूषण और वातावरण को खराब करने की सबसे बड़ी वजह में से एक है। इस बट में प्लास्टिक होता है जो कभी गलता नहीं है, सिगरेट के बट माइक्रोप्लास्टिक से जुड़े प्रदूषण की एक बड़ी वजह बनते हैं। विश्व स्वास्थ संगठन के मुताबिक तंबाकू उत्पादों से जुड़े कचरे में करीब 7000 तरह के जहरीले रसायन मौजूद होते हैं। सिगरेट बट को बनाने वाले अहम पदार्थ सैलूलोज, एसिटेट पेपर और रेयान के साथ मिलकर पानी और जमीन को प्रदूषित करते हैं। अमेरिका के एक एनजीओ ट्रुथ इनिशिएटिव के रिपोर्ट के मुताबिक एक सिगरेट बट से जितना जहर निकलता है वह ताजे पानी और नमकीन पानी की 50 प्रतिशत मछलियों को मार सकता है।हालांकि सिगरेट बट से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने भी कोई खास कदम नहीं उठाये हैं। इसलिए सरकार को इस पर मंथन करना होगा। रहा बात सामान्य नागरिकों के लिए तो अधिकांश लोगों को सिगरेट बट के बारे में बहुत कम जानकारी है ज्यादातर लोगों को लगता है कि सिगरेट वह भाग केवल कॉटन यानी कपास से बनते हैं और यह बायोडिग्रेडेबल है पर कोई यह नहीं जानता कि यह उनका सिर्फ अंदेशा को पक्का मान जाने की वजह से हमारे पर्यावरण पर कितना नुकसान हो रहा है। अगर आपके मन मस्तिष्क में अगर निकोटीन का जहर उस कदर नहीं फैला है जहां पर सोचने की क्षमता खत्म न हुई हो तो क्यों न 2023 के थीम  वी निड फूड नॉट टोबैको को साकार बनाने में मिलकर सहयोग करें। (युवा लेखक शशि भूषण झारखंड राज्य खुला विश्वविद्यालय में बतौर पत्रकारिता विभाग में अध्यापक हैं।)

राजधानी में छह दिनों तक मुंगेर प्रवाहित होगी योग की गंगा
Published / 2023-05-30 14:01:18
राजधानी में छह दिनों तक मुंगेर प्रवाहित होगी योग की गंगा

एबीएन सोशल डेस्क। योग की जब बात आती है तो दुनिया में सबसे ज्यादा योग को लोकप्रिय बनाने वाली संस्था बिहार योग विद्यालय नाम आता है। जिसे दुनिया का प्रथम योग विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त है। यहां से सम्पूर्ण विश्व में योग एक विज्ञान के रूप में पहुंचा जो मनुष्य के जीवन स्तर को संवारने में, रोगमुक्ति में और मानसिक विकास तथा आध्यात्मिक प्रगति में सहायक सिद्ध हुआ।उसी बिहार योग विद्यालय से स्वामी सत्यानन्द सरस्वती के वरिस्ठ शिष्य स्वामी गोरखनाथ सरस्वती 05 से 10 जून तक, छह दिनों के प्रवास पर रांची आ रहे हैं। राजधानी में उनका योग-ध्यान  कार्यक्रम कई महत्वपूर्ण संस्थानों में आयोजित होगा। अरविन्दो आश्रम, सत्यानन्द योग मिशन केन्द्र, बीएसएनएल मुख्य कार्यालय और भी अन्य जगहों पर योग, ध्यान और सत्संग का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम के वृहत आयोजन को लेकर बीएसएनएल मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय में एक योग-संगोष्ठी कार्यशाला को आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य महाप्रबंधक उमेश प्रसाद साह समेत कई महत्वपूर्ण अधिकारी भाग लिये। स्वामी मुक्तरथ के निर्देशन में बीएसएनएल कर्मियों ने अपने सिटिंग लाइफ के दुष्परिणाम से बचने हेतु योग के गुड़ सीखे और ध्यान किये।

जनजातीय समाज के उत्थान और धर्मांतरण से मुक्ति हेतु कृत संकल्पित है हिंदू समाज : विनोद बंसल
Published / 2023-05-29 19:38:00
जनजातीय समाज के उत्थान और धर्मांतरण से मुक्ति हेतु कृत संकल्पित है हिंदू समाज : विनोद बंसल

एबीएन सोशल डेस्क। जनजाति समाज के उत्थान यानी सर्वांगीण विकास के साथ धर्मांतरण के अभिशाप से मुक्ति हेतु कृत्य संकल्पित है हिंदू समाज। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने आज कहा कि जनजातीय समाज में व्याप्त अशिक्षा, अभाव व अंधकार को दूर कर ही भारत को प्रकाश मान बनाने का स्वप्न साकार हो सकता है। जनजाति क्षेत्रों में सेवा कार्यों के विकास के साथ मिशनरियों और जिहादियों के कुकृत्य पर भी अंकुश लगाना होगा। देश के अनेक भू भाग जो जनजातीय समाज के लिए आरक्षित थे, उनमें से अनेक स्थानों पर जिहादियों और मिशनरियों का आतंक स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।  उन्होंने कहा कि फादर और चादर की कुसंस्कृति से उनकी पुरातन वैभवशाली आदर्श परंपराओं को हिंदू समाज धूमिल नहीं होने देगा। भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील, सिद्धू कान्हु जैसे महापुरुषों के बंसज, जो लोग किन्हीं कारणों से धर्मांतरित हो गए, उनको भी परिजनों के साथ हम स्वधर्म में सादर वापसी करामेंगे। भारत के प्रत्येक नागरिक को वनवासी समाज की हितों की रक्षा हेतु आगे आना होगा। नई दिल्ली के सिविक सेंटर स्थित केदारनाथ साहनी आडिटोरियम में, अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ के 40वें 10 दिवसीय वैचारिक क्रांति शिविर के समापन अवसर पर बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत का एक परिवार किसी एक जनजाति बच्चे को भी गोद लेकर उसकी शिक्षा स्वाबलंबन व सांस्कृतिक उत्थान की ओर तनिक सा भी प्रयास करे तो उस क्षेत्र का कोई भी बच्चा अशिक्षित नहीं रह पाएगा। इस अवसर पर संबोधित करते हुए झाबुआ मध्य प्रदेश के सांसद गुमान सिंह डामोर ने कहा कि झाबुआ व आसपास के क्षेत्र में संघ का कार्य स्पष्ट रूप से दिखता है। ईसाई मिशनरियों के पापों से मुक्ति व जनजातीय बच्चों में शिक्षा, संस्कार व स्वावलंबन हेतु किए जा रहे आर्य समाज के कार्य सराहनीय हैं। इस अवसर पर दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान श्री धर्मपाल आर्य, महामंत्री श्री विनय आर्य, अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ के प्रधान श्री सुरेंद्र कुमार आर्य व महामंत्री श्री जोगिंदर कट्टर, वरिष्ठ संत स्वामी शांतानंद सरस्वती व आर्य विदुषी विमलेश आर्या सहित जनजाति क्षेत्रों से आए लगभग 500 से अधिक शिविरार्थी बच्चों के साथ आर्य समाजों के पदाधिकारी सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े लोग उपस्थित थे।

तमाम मुसीबतें झेल चुके गुलाब अब किसी पहचान की मोहताज नहीं
Published / 2023-05-28 14:55:10
तमाम मुसीबतें झेल चुके गुलाब अब किसी पहचान की मोहताज नहीं

एबीएन डेस्क। गुलाब सलाट ऐक्शन एक्टर की आने वाली फिल्म भविष्य का सुपरस्टार जिसमें लीड हीरो का रोल करेंगे, जिसकी शूटिंग गुजरात, महाराष्ट्र दिल्ली, बैंगलोर और कोलकाता में होगी। गुलाब को ऐसे अनेक मिले हैं।गुलाब को मिले पुरस्कारों में दिल्ली बॉलीवुड सिने रिपोर्टर अवार्ड, नागपुर गौरव, महाराष्ट्र पुरस्कार, मुंबई जनगौरव, कार्य दर्पण पुरस्कार, वडोदरा सिने मीडिया अवार्ड, वाइब्रेट गुजराती फिल्म अवार्ड से नवाजा गया है।गुलाब का जीवन परिचय गुलाब एक्शन एक्टर आनंद गुजरात की पैदाइश है। गुलाब के माता-पिता बहुत ही गरीब थे और उनका पूरा जीवन चारपाई के तंबू में गुजार दिया था। लेकिन गुलाब के पिता तम्मा भाई सलाट एक हाथ से मजदूरी कर अपने बेटे को एक अच्छे मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश में थे और उसमें एक नाम था गुलाब सलाट का। जिसे 8 वर्ष की उम्र से ही फिल्म और बॉलीवुड से लगाव था कि वह एक बार फिल्मों में काम करूंगा। पापा को यह बोला था।पापा ने उसी बात को लेकर मेहनत करना चालू कर दिया। रात दिन मजदूरी कर अपने बेटे को एक अकैडमी में जॉइनिंग करवा दिया। मार्शल आर्ट, कराटे, ऑल इंडिया वाडो काई कराटे, डो एकेडमी इंडिया इंटरनेशनल में जॉइनिंग करवा दिया था। गुलाब की मेहनत करीबन 5 साल तक लगातार रही। गुलाब ने मेहनत करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कराटे मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट की डिग्री हासिल की। साथ ही अपने डांस की कड़ी मेहनत कर कर प्रैक्टिस करते थे। बिना मास्टर के अब डांस एकेडमी में जॉइनिंग होना पड़ेगा। डांस के लिए तो उसने आनंद जिला छोड़कर जिमनास्टिक और डांस की ट्रेनिंग लेने गये हैदराबाद। वहां से कड़ी मेहनत कर 1 साल की डिग्री लेकर हैदराबाद से और अपने जिले को वह कर्तव्य दिखा दिया और कुछ नाम हुआ।इसे देख गुलाब के पिता का सर फ़कर से उठ गया कि अब मेरे बेटे को मुंबई लेकर जाऊंगा और कोई फिल्म में काम दिलाऊंगा। आनंद छोड़कर पिता तम्मा भाई गुलाब को लेकर मुंबई गये। वहां से एक डायरेक्टर के साथ मुलाकात हुई। ₹15000 का चूना लगाया। गुलाब के पिता तम्मा भाई को फंसा लिया डायरेक्टर ने। फिर भी काम नहीं मिला। मुंबई छोड़कर वापस अपने शहर आये। आनंद कुछ दिनों के बाद गुलाब के पिता तम्मा भाई का देहांत हो गया। गुलाब बिल्कुल अकेला और कमजोर पड़ गया। वह यह सोचने लगा कि अब मैं क्या करूंगा?  पिता के जाने के बाद हालात ऐसे थे। आनंद रामनगर की स्कूल में पढ़ाई करने जाते थे। मैत्री विद्यालय रामनगर हालात ऐसे थे कि आठवीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। काफी परेशानियां बढ़ने लगी। दो भाई थे दो बहनें थी। गुलाब की मां की सोनी बैन उनकी तबीयत भी दिन पे दिन बिगड़ती गयी और मां के ऊपर काफी ध्यान रखता था। वह अपनी मां को नहीं खोना चाहता हूं। पिता को तो हाथ से खो दिया है, लेकिन मां को नहीं खोना चाहता। वहां से डांस के कुछ परफॉर्मेंस कर और कराटे क्लासेस चला कर कुछ पैसा जमा कर अपना गुजारा चलाते थे। गुलाब और कुछ दिनों के बाद हर जगह हर स्टेट में गये। गुलाब और फिल्म प्रोड्यूसर डायरेक्टर से अपने काम के लिए गुजारिश की, लेकिन नाकाम रहा। अपने शहर वापस आये और फिर अपनी ट्रेनिंग करना चालू कर दिया। अपने पापा का शहर का नाम रोशन करुंगा, यह सोचते हुए उसने हिम्मत नहीं हारा।किस्मत ऐसी जगी कि सीरियल जय जय जग जननी, दुर्गा मां, जय बजरंगबली फिल्म में काम करने की शुरुआत सीरियल से हुई। छोटी बड़ी 17 फिल्मों में काम मिला। हिंदी, गुजराती, भोजपुरी फ़िल्म में गुलाब रात दिन कम से कम 8 घंटा मेहनत और प्रैक्टिस लगातार कराटे, मार्शल आर्ट, जिमनास्टिक, योगा, बॉडी स्टंट, ब्रेक डांस, लाठी, नानचाकू, तलवार, राइफल, शूटिंग एवं फिल्मी एक्टिंग करते थे। अपने फिल्म के काम के लिए कभी थमने का नाम नहीं लेते थे। सिर्फ काम करने की ललक से काम करने वाले गुलाब एक्शन एक्टर अपने पिता का नाम रोशन करने का सपना बहुत जल्द पूरा करेंगे। आज गुलाब सलाट ऐक्शन ऐक्टर नाम मीडिया के वजह से पूरे भारत में अपनी एक अच्छी पहचान बनाया है।

वैष्णो देवी की यात्रा से पहले जानें ये जरूरी टिप्स
Published / 2023-05-28 14:30:08
वैष्णो देवी की यात्रा से पहले जानें ये जरूरी टिप्स

एबीएन सोशल डेस्क। हर साल भारी संख्या में माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए उनके दरबार में पहुंचते हैं। ऐसे में अगर आप भी पहली बार दर्शन करने जा रहे हैं। तो आपको यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी होना आवश्यक है।अगर आप भी पहली बार वैष्णो देवी की यात्रा के लिए जा रहे हैं तो यात्रा से जुड़ी तमाम जानकारियों को हासिल करना जरूरी है। जिससे कि यात्रा में आपको किसी तरह की तकलीफ का सामना न करना पड़े। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वैष्णों देवी यात्रा से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारी देने जा रहे हैं। बता दें कि हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने उनके दरबार में पहुंचते हैं। जम्मू-कश्मीर स्थित त्रिकूट पर्वत पर एक गुफा में वैष्णों माता का दरबार है।मां के दरबार में पहुंचने के लिए भक्तों को 13किमी की मुश्किल चढ़ाई करनी पड़ती है।समुद्र तल से 5 हजार 300 फीट की ऊंचाई पर वैष्णो देवी तीर्थ स्थान स्थित है। बेस कैंप कटरा से माता के दरबार तक पहुंचने के लिए करीब 13 किलोमीटर की मुश्किल चढ़ाई करनी पड़ती है। अगर आप सक्षम हैं तो इस चढ़ाई को पैदल ही पूरा कर सकते हैं। वहीं अगर आप पैदल चढ़ाई करने में असमर्थ हैं तो घोड़ा, खच्चर, पिट्ठू या पालकी की सवारी की सुविधा भी मौजूद रहती है। यह आपको कटरा से माता के दरबार तक ले जाते हैं। इसके अलावा कटरा से सांझी छत के बीच हेलिकॉप्टर सर्विस भी ले सकते हैं। बता दें कि सांझी से आपको महज ढाई किमी की चढ़ाई करनी होती है। यात्रा हो गयी है थोड़ी आसानमुश्किल भरी इस चढ़ाई के बाद भी करीब 1 करोड़ भक्त हर साल माता रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस यात्रा को पूरा करने में आपको कितना समय लगता है, यह वहां की भीड़, मौसम और आपकी स्पीड पर निर्भर करता है। वहीं पिछले कुछ सालों में वैष्णों देवी की यात्रा में कई सुविधाओं को जोड़ा गया है। जिससे यह यात्रा बहुत हद तक आसान हो गयी है।पहाड़ों को काटकर प्लेन रास्ते को बनाया गया है। वहीं चढ़ाई के दौरान पूरे रास्ते में आपको गह-जगह आराम करने के लिए शेड्स, पानी और भोजन आदि की व्यवस्था की गयी है।कटरा है बेस कैंपजम्मू का छोटा सा शहर कटरा वैष्णो देवी का बेस कैंप है। यह जम्मू से 50 किमी की दूरी पर स्थित है। वैष्णो धाम की यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। क्योंकि तभी आपको मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। कटरा से माता के भवन के बीच में कई पॉइंट्स हैं जिसमें गर्भजून, हिमकोटि, बाणगंगा, अर्धकुवांरी, चारपादुका, इंद्रप्रस्थ, सांझी छत और भैरो मंदिर शामिल है। लेकिन यात्रा का मिड-पॉइंट अर्धकुवांरी है।यहां पर श्रद्धालु रुकने के बाद आगे 6 किमी की चढ़ाई करते हैं। बता दें कि साल 2018 में बाणगंगा से अर्धकुंवारी के बीच नए रास्ते को बनाया गया है। ताकि जो किमी की रास्ता बचता है, वहां से श्रद्धालुओं की भीड़ को कम किया जा सके।कब करें यात्रावैसे तो मां वैष्णों देवी के दर्शन के लिए आप कभी भी जा सकते हैं। लेकिन गर्मियों में मई से जून और नवरात्रि के बीच यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। वहीं जुलाई-अगस्त में बारिश के कारण यात्रा करने से बतना चाहिए। क्योंकि पहाड़ों पर फिसलन के कारण चढ़ाई मुश्किल हो जाती है। इसके साथ ही दिसंबर से जनवरी के बीच यहां जबरदस्त ठंड रहती है।ऐसे पहुंचें वैष्णो धामहवाई मार्ग : वैष्णो देवी का नजदीकी एयरपोर्ट जम्मू का रानीबाग एयरपोर्ट है। जिसके बाद जम्मू से आप सड़क मार्ग के जरिए वैष्णो देवी के बेस कैंप कटरा पहुंच सकते हैं। जम्मू से कटरा की दूरी 50 किमी है। कटरा जाने के लिए आपको आसानी से बस व टैक्सी मिल जायेगी।रेल मार्ग : जम्मू और कटरा दो नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं। जम्मू रेल मार्ग देशभर के मुख्य शहरों से के जरिए जुड़ा हुआ है। वैष्णो देवी का बेस कैंप कटरा भी अब रेलवे स्टेशन बन गया है। जम्मू-उधमपुर रेल रूट पर स्थित है। साल 2014 में माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन की शुरुआत हुई थी। दिल्ली के साथ ही अन्य शहरों से भी जम्मू के लिए सीधे ट्रेन आती है। सड़क मार्ग : देश के विभिन्न हिस्सों के सड़क मार्ग से जम्मू जुड़ा हुआ है। जम्मू होते हुए सड़क मार्ग से आप कटरा पहुंच सकते हैंसाथ में रखें ये सामानसमुद्र तल से 5 हजार 200 फीट की ऊंचाई पर वैष्णो देवी का मंदिर स्थित है। जिसके कारण यहां के तापमान में काफी गिरावट रहती है। इसलिए मॉनसून में यात्रा के दौरान रेनकोट व छाता जरूर रख लें। वहीं सर्दियों में ऊनी कपड़े, जैकेट्स, टोपी आदि को रखना न भूलें। इसके अलावा आप अगर गर्मी में यात्रा कर रहे हैं तो भी हल्के गर्म कपड़े साथ रख सकते हैं।

जनजातीय समाज के उत्थान और धर्मांतरण से मुक्ति को कृत संकल्पित है हिंदू समाज : विनोद बंसल
Published / 2023-05-27 23:28:17
जनजातीय समाज के उत्थान और धर्मांतरण से मुक्ति को कृत संकल्पित है हिंदू समाज : विनोद बंसल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जनजाति समाज के उत्थान यानी सर्वांगीण विकास के साथ धर्मांतरण के अभिशाप से मुक्ति हेतु कृत्य संकल्पित है हिंदू समाज। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने आज कहा कि जनजातीय समाज में व्याप्त अशिक्षा, अभाव व अंधकार को दूर कर ही भारत को प्रकाश मान बनाने का स्वप्न साकार हो सकता है। जनजाति क्षेत्रों में सेवा कार्यों के विकास के साथ मिशनरियों और जिहादियों के कुकृत्य पर भी अंकुश लगाना होगा। देश के अनेक भू भाग जो जनजातीय समाज के लिए आरक्षित थे, उनमें से अनेक स्थानों पर जिहादियों और मिशनरियों का आतंक स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। उन्होंने कहा कि फादर और चादर की कुसंस्कृति से उनकी पुरातन वैभवशाली आदर्श परंपराओं को हिंदू समाज धूमिल नहीं होने देगा। भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील, सिद्धू कान्हु जैसे महापुरुषों के बंसज, जो लोग किन्हीं कारणों से धर्मांतरित हो गए, उनको भी परिजनों के साथ हम स्वधर्म में सादर वापसी करामेंगे। भारत के प्रत्येक नागरिक को वनवासी समाज की हितों की रक्षा हेतु आगे आना होगा।नई दिल्ली के सिविक सेंटर स्थित केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में, अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ के 40वें 10 दिवसीय वैचारिक क्रांति शिविर के समापन अवसर पर बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत का एक परिवार किसी एक जनजाति बच्चे को भी गोद लेकर उसकी शिक्षा स्वाबलंबन व सांस्कृतिक उत्थान की ओर तनिक सा भी प्रयास करे तो उस क्षेत्र का कोई भी बच्चा अशिक्षित नहीं रह पायेगा।इस अवसर पर संबोधित करते हुए झाबुआ मध्य प्रदेश के सांसद गुमान सिंह डामोर ने कहा कि झाबुआ व आसपास के क्षेत्र में संघ का कार्य स्पष्ट रूप से दिखता है। ईसाई मिशनरियों के पापों से मुक्ति व जनजातीय बच्चों में शिक्षा, संस्कार व स्वावलंबन हेतु किए जा रहे आर्य समाज के कार्य सराहनीय हैं।इस अवसर पर दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान श्री धर्मपाल आर्य, महामंत्री श्री विनय आर्य, अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ के प्रधान श्री सुरेंद्र कुमार आर्य व महामंत्री श्री जोगिंदर कट्टर, वरिष्ठ संत स्वामी शांतानंद सरस्वती व आर्य विदुषी विमलेश आर्या सहित जनजाति क्षेत्रों से आए लगभग 500 से अधिक शिविरार्थी बच्चों के साथ आर्य समाजों के पदाधिकारी सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ नई दिल्ली के महामंत्री जोगेंदर खट्टर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

भागवत पुराण में रसभाव की भक्ति का निरुपण है : किशोरी
Published / 2023-05-26 23:48:27
भागवत पुराण में रसभाव की भक्ति का निरुपण है : किशोरी

वैष्णवी लोहरदगा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ संपन्नकथा के आखिरी दिन श्रीकृष्ण के 16108 विवाह के रहस्य से भक्त हुए अवगतआखरी दिन सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण- उद्धव संवाद, प्रभु के स्वधाम गमन और राजा परीक्षित की मोक्ष की कथा सुनायी गयीटीम एबीएन, लोहरदगा। मौसम की प्रतिकूलता के बीच शुक्रवार को राणा चौक स्थित स्थित अग्रसेन भवन परिसर में लोहरदगा में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा की पूर्णाहुति भव्यता के साथ महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हो गया।श्रीकृष्ण धाम वृंदावन की कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने कथा के आखरी दिन शुक्रवार को भगवान श्री कृष्ण के 16108 विवाह की कथा, सुदामा चरित्र, पौंड्रक उद्धार, श्री कृष्ण- उद्धव संवाद, प्रभु के स्वधाम गमन, परीक्षित मोक्ष और भागवत सार के बारे में भक्तों को विस्तार से बताया। संगीतमय कथा वाचन का रसपान कराया। भक्ति की अथाह सागर में भागवत प्रेमियों ने डुबकियां लगायी।किशोरी वैष्णवी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर और रोचक लीलाओं में से एक लीला है, भगवान श्री कृष्ण की 16108 रानियां आखिर क्यों किया था विवाह, इसके पीछे भगवान की क्या लीला थी, कि श्रीकृष्ण भगवान ने जब स्वयं को राधा को समर्पित कर दिया था, तो फिर भी राधा के होते हुए भी क्यों उन्हें इन रानियों से करना पड़ा विवहा, तो आज हम आपको इसी आश्चर्यचकित रहस्य के सत्य को बताया।कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने कहा कि सत्य है कि नरकासुर नामक राक्षस जिसको पृथ्वी का पुत्र होने के कारण भोमासुर भी कहा जाता था,ने 16108 रानियों को बंदी बनाया हुआ था। उक्त कन्याएं द्वापर युग के राजाओं की पुत्रियां थी। बंदी बनी इन कन्याओं ने भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना की थी हे भगवान हमारी रक्षा करें। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर इन सभी कन्याओं को उसके बंदी ग्रह से मुक्त करवाया था।किशोरी वैष्णवी ने इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के मित्र सुदामा के चरित्र के बारे में कहा कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा की अद्भुत कथा है। सुदामा महान कृष्ण भक्त थे। वह बालपन में कृष्ण का मित्र भी थे। इस ब्राह्मण की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण में भी उल्लेखित है।कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने कथा का विस्तार करते हुए राजा परीक्षित की मोक्ष कथा के बारे में बताया कि श्री शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को भगवान श्रीनारायण के मुख्यतः नौ अवतारों के साथ दसवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीला में माखन चोरी, राजा कंस द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों के उद्धार, कंस वध, रास लीला, रुक्मिणी विवाह सहित अनेक लीलाओं को विस्तार से बताया।उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत कथा में भगवान नारायण के 24 अवतारों का वर्णन है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मित्र श्री सुदामा जी के चरित्र का वर्णन किया।।किशोरी वैष्णवी ने राधाजी के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया राधाजी भगवान श्रीकृष्ण से किस प्रकार प्रेम करती थी। साथ ही प्रेम और प्यार में क्या अंतर है। यह भी बताया।किशोरी वैष्णवी ने अंत में राजा परीक्षित के मोक्ष और भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम सिधारने के प्रसंग का वर्णन किया। महाआरती के पश्चात श्रीमद्भागवत कथा को विराम दिया गया। इसके बाद महाप्रसाद वितरित की गयी।कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने श्रीमद्भागवत सार का उल्लेख करते हुए कहा कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद्भागवतम् या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य वर्ण्य विषय भक्ति योग है, जिसमें कृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरुपण भी किया गया है। परंपरागत तौर पर इस पुराण के रचयिता वेद व्यास को माना जाता है।कथा की पूर्णाहुति के समय प्रो परमानंद अग्रवाल, बिसुनदेव अग्रवाल, राजीव रंजन,अनिता अग्रवाल, धीरज अग्रवाल, संजय अग्रवाल, उपेंद्र कुमार कुशवाहा, आद्या देवी, सुरेश अग्रवाल, विकास अग्रवाल, संतोष कुमार, सचिता प्रसाद अग्रवाल, जय गोविन्द सोनी, प्रमोद प्रजापति, अशोक कुमार, आरती अग्रवाल, तान्या अग्रवाल, रूपा अग्रवाल, आशीष गोयल, अमर प्रसाद अग्रवाल, आनंद गोयल, रोबिन अग्रवाल, बैजनाथ अग्रवाल, अमर प्रसाद अग्रवाल सुरेश अग्रवाल, निशांत अग्रवाल बड़ी संख्या में भागवत प्रेमी उपस्थित थे हालांकि मौसम के कारण कथा सात दिन के बजाय आठवें दिन खत्म हुआ।

28 से शुरू होगा 5156वां माहेश्वरी वंशोत्पति दिवस महेश नवमी पखवाड़ा
Published / 2023-05-26 20:56:57
28 से शुरू होगा 5156वां माहेश्वरी वंशोत्पति दिवस महेश नवमी पखवाड़ा

रविवार 28 मई 2023 से रविवार 4 जून 2023 तक महेश नवमी महोत्सव-2023 टीम एबीएन, रांची। माहेश्वरी समाज की वंशोत्पत्ति ज्येष्ठ शुल्क नवमी के दिन भगवान महेश के आशीर्वाद से हुआ, इसलिए हर वर्ष  इस तिथि  के दिन माहेश्वरी समाज में उत्सव मानते हैं। इस बार हिंदी कैलेंडर के अनुसार विक्रम संवत-2080 ज्येष्ठ शुल्क नवमी दिनांक 29 मई दिन सोमवार को है। इस अवसर पर रांची श्री माहेश्वरी सभा, महिला संगठन एवं युवा संगठन के संयुक्त रूप से आयोजित होने वाला कार्यक्रम इस प्रकार है : 28 मई रविवार  स्कूटोथोन : स्कूटोथोन रोचक एवं रोमांचक प्रतियोगिता के साथ बुद्धिमत्ता की परख, समय की प्रतिबद्धता, शहर का ज्ञान प्रतिभागियों को कितनी है यह देखा जायेगा। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सभी  को  सरकार द्वारा सड़क परिवहन के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रतियोगिता प्रात:6.00 बजे माहेश्वरी भवन से शुरू होगी। रक्तदान शिविर : रक्तदान कर किसी के जीवन को बचाने में अपना योगदान अवश्य है समय प्रात: 9बजे से अपराह्न 3बजे तक माहेश्वरी भवन में होगा  हड्डी एवं नेत्र जांच शिविर : शार्प साइटआई हॉस्पिटल के सहयोग से नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर के साथ शुगर एवं बीपी जांच, साथ ही नागरमल मोदी सेवासदन के हड्डी रोग (आॅर्थो) चिकित्सक डा रोहित कुमार रुंगटा जोड़ो के दर्द, कमर दर्द, गर्दन दर्द अथवा हड्डी से संबंधित दर्द के निवारण हेतु निशुल्क परामर्श एवं थाइरोकेयर के सौजन्य से रियायती दर पर 69 टेस्ट मात्र 900/-में माहेश्वरी भवन में 28 मई से 4 जून तक सुबह 7 बजे से उपलब्ध होगा। शतरंज प्रतियोगिता : सभी आयु वर्ग के लिए माहेश्वरी भवन में प्रात: 11बजे से। कैरमबोर्ड प्रतियोगिता : ग्रुप अ :- 10वर्ष से 15 वर्ष आयु के बच्चे एवं बच्चियों के लिए। समय अपराह्न 2 बजे से ग्रुप इ :- 15वर्ष से अधिक आयु के सभी के लिए।समय अपराह्न 3.30बजे से माहेश्वरी भवन में होगा। पेंटिंग (चित्रांकन) प्रतियोगिता : 6 वर्ष से 10 वर्ष तक के बच्चे एवं बच्चियां अपनी पंसद की पेंटिंग बना सकते है। 11 वर्ष से 16 वर्ष तक के लिए विषय है:- जलवायु परिवर्तन अथवा भूस्खलन 17 वर्ष से अधिक के लिए विषय है धार्मिक अनुष्ठान/प्रसंग संध्या4बजे से माहेश्वरी भवन में। आशीर्वाद : समाज में आयी नयी बहू का समाज से परिचय और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने का नया कार्यक्रम संध्या 5बजे से माहेश्वरी भवन में। फैमिली प्रीमियर लीग : परिवार के पांच सदस्य की एक टीम के मनोरंजनक गेम्स का आयोजन होगा संध्या 6.30 बजे से श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर हॉल में आयोजित होगा। 29 मई दिन सोमवार के कार्यक्रम:- प्रभातफेरी : प्रात: 6 बजे प्रभातफेरी शोभायात्रा माहेश्वरी भवन से प्रारंभ होकर बंशीधर आडुकिया रोड, कार्टसराय रोड, हरमु रोड, किशोरी यादव चौक रातु रोड, मैकी रोड,महाबीर चौक, नोर्थ मार्केट रोड, वेस्ट मार्केट रोड, जेजे रोड एवं बड़ालाल स्ट्रीट होते हुए श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर में समाप्त होगी। रुद्राभिषेक : समाज की ओर से श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर स्थित शिवालय में समाज जनों द्वारा प्रात:7बजे से रुद्राभिषेक किया जायेगा। जिंदगी के चौरास्ते : सभी आयुवर्ग के लिए एक समाजिक परिचर्चा ओडियो विजुअल माध्यम से संध्या 7 बजे से माहेश्वरी भवन में। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मीडिया प्रभारी  माहेश्वरी सभा - अशोक साबू एवं दीपक मारू, माहेश्वरी महिला समिति - रश्मि मालपानी,  माहेश्वरी युवा संगठन - विकास काबरा जोर-शोर से जुटे हुए हैं। उन्होंने ही उक्त जानकारी दी।

समाज को अनुशासन, बौद्धिक, शारीरिक विकास और उन्नति की राह पर ले जाना है : सच्चिदानन्द
Published / 2023-05-25 21:39:59
समाज को अनुशासन, बौद्धिक, शारीरिक विकास और उन्नति की राह पर ले जाना है : सच्चिदानन्द

आरआरएस के स्वयंसेवकों के पद संचलन में अनुशासन, लयबद्धता और राष्ट्रप्रेम की झलक देखी प्रथम और द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के शिक्षार्थियों ने लोहरदगा में पद संचलन किया  आरएसएस के पद संचलन कार्यक्रम को लेकर शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे शहरवासियों और महिला मंडल की सदस्यों ने पुष्प वृष्टि कर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा में चल रहे बीस दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम और द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के निमित्त शिक्षार्थियों ने गुरुवार शाम को लोहरदगा शहर में पथ संचलन कार्यक्रम किया।  पद संचलन के मद्देनजर शहर में सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था किए गए थे। शहर के तमाम इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे। चौक चौराहों में स्टैटिक पुलिस बल और मजिस्ट्रेटों को तैनात किया गया था। इसके अलावात्न बड़ी संख्या में बाइक दस्ता महिला पुलिस को भी ड्यूटी में लगाया गया था। पथ संचलन लोहरदगा  ललित नारायण मिश्र स्टेडियम से प्रारंभ होकर बरवाटोली महावीर चौक, बड़ा तालाब, अमला टोली होते हुए सुभाष चंद्र बोस चौक से होते हुए न्यू रोड, वीर शिवाजी चौक अजय उद्यान से होते हुए स्टेडियम पहुंच कर सम्पन्न हो गया। भव्य पथ संचलन किया गया विभिन्न चौक चौराहों में सनातन धर्मावलंबियों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया।  झारखंड प्रांत आरएसएस संघचालक सच्चिदानंद लाल ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग पथ संचलन कार्यक्रम में प्रथम वर्ष के संघ शिक्षा में भाग लेने वाले संगठन के दृष्टिकोण से राज्य के सभी 28 जिलों के स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। विशेष द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग में झारखंड और बिहार के स्वयंसेवक हैं। जिनकी अवस्था 40 से 60 वर्ष तक के शामिल है। संघ शिक्षा वर्ग का पथ संचलन का एकमात्र उद्देश्य है, कि हमारे समाज को अनुशासन बौद्धिक और शारीरिक विकास के साथ उन्नति की राह पर ले जा सकते हैं। साथ ही राष्ट्रीय के प्रति अपनी स्वयं की जिम्मेवारी किस प्रकार होनी चाहिए, यह एहसास दिलाता है।  कार्यक्रम में प्रांत विभाग जिले और अलग-अलग दायित्व के निर्वहन करने वाले अधिकारी और समाज के निस्वार्थ सहयोग से यह संकल्प पूरे होते हैं। स्वयंसेवकों ने घोष बैंड के धुन में कदम से कदम मिलाकर एकबद्ध होकर पद संचलन में भाग लिया। सभी स्वयंसेवकों के कदम नपे- तुले थे। जैसे किसी सैनिक के दस्ते का परेड हो रहा हो। संघ के सॉन्ग सेवकों ने संघ शिक्षा वर्ग के दौरान किस तरह से अनुशासन से बंधे हुए रहते हैं।राष्ट्र उनके लिए सर्वप्रथम होता है। इसकी झलक पद संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने प्रस्तुत किया।

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