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पशुओं के गोबर से किसानों को होगा फायदा : बीटीएम
Published / 2023-05-25 18:41:09
पशुओं के गोबर से किसानों को होगा फायदा : बीटीएम

गोबर्धन योजना को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियानटीम एबीएन, पलामू। आत्मा पलामू की ओर से आज मेदिनीनगर के एग्री क्लिनिक सेंटर में गोवर्धन योजना को लेकर कृषक गोष्ठी का आयोजन सह जागरूकता अभियान चलाया गया। एक दिवसीय इस कार्यक्रम में प्रखंड तकनीकी प्रबंधक सुमित वर्मा ने किसानों को गोबर्धन योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान पशुपालन करें। पशुओं के गोबर से उन्हें फायदा होगा। उन्होंने गोबर से होने वाले विभिन्न प्रकार के फायदे के बारे में बताते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर से लेकर देश स्तर पर गोबर के उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गोबर के खाद की उपयोगिता कम हुई है, जबकि गोबर खाद (जैविक खाद) के उपयोग से खेतों में फसल का उत्पादन अत्यधिक होती है। इस योजना के तहत सरकार किसानों से गोबर खरीदने का काम करेगी और उस गोबर से बायोगैस, बायो सीएनजी बनाते हुए इसे किसानों तक पहुंचायेगी। गोबर से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि पशुओं गोबर तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थों से जैविक खाद बनाए जाएंगे।  इस योजना के तहत स्वच्छ भारत की परिकल्पना भी साकार होगी, क्योंकि पशुओं के गोबर एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ से जैविक खाद एवं बायोगैस या बायो सीएनजी बनाया जायेगा। जैविक खाद अधिकाधिक बनने से लोगों को रसायनिक खाद से मुक्ति मिलेगी। इससे लोग स्वास्थ्य भी रह सकेंगे। कार्यक्रम में एग्री क्लिनिक सेंटर के प्रखंड समन्वयक राकेश कुमार, सहायक प्रखंड समन्वयक विमलेश कुमार, किसान मित्र एवं किसान संजय यादव, राजेंद्र साल, मंगर उरांव, रविंद्र कुमार राम आदि किसान उपस्थित थे।

बचपन बचाओ आंदोलन की छापामार कार्रवाई में 41 बच्चे छुड़ाये गये, दर्जन भर फैक्ट्रियां सील
Published / 2023-05-25 00:05:50
बचपन बचाओ आंदोलन की छापामार कार्रवाई में 41 बच्चे छुड़ाये गये, दर्जन भर फैक्ट्रियां सील

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नई दिल्ली की आजाद मार्केट की खिलौना फैक्ट्रियों में बचपन बचाओ आंदोलन, कोतवाली, दरियागंज के एसडीएम, श्रम विभाग, बाल विकास धारा और पुलिस की साझा छापामार कार्रवाई में 41 बच्चे मुक्त कराए गए। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के सहयोग से मारे गए इन छापों के दौरान छुड़ाए गए बच्चे साफ तौर पर भूख और थकान के शिकार दिखाई दे रहे थे।  छापामार कार्रवाई के बाद आजाद मार्केट के राम बाग रोड पर स्थित दर्जन भर फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया और इनके मालिकों के खिलाफ बाड़ा हिंदू राव थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। छुड़ाए गए बच्चों की उम्र 13 से 17 साल के बीच थी और ये सभी फटे पुराने कपड़ों में और नंगे पांव थे। आरोप है कि इन सभी बच्चों को रोजाना सुबह नौ बजे से लेकर आधी रात तक खटाया जाता था। इन्हें न ठीक से खाना दिया जाता था और न इनके पास सोने की कोई जगह थी। आधी रात तक काम करने के बाद उन्हें फैक्ट्री में ही सोना पड़ता था। छुड़ाये गये बच्चे बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के हैं।छुड़ाये जाने के बाद मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी (मध्य दिल्ली) ने इन सभी बच्चों की चिकित्सा जांच की। इसके बाद इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया जहां से उन्हें एक आश्रय गृह भेज दिया गया।इस कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे कोतवाली, दरियागंज के एसडीएम अरविंद राणा ने आदेश में कहा कि इन फैक्ट्री मालिकों ने बाल एवं किशोर श्रम कानून, बाल न्याय कानून और बंधुआ मजदूरी उन्मूलन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। एसडीएम के आदेश पर पुलिस ने इन फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी कानून, बाल श्रम कानून, बाल न्याय कानून और ट्रैफिकिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कर लिया है।    बच्चों के दुर्व्यापार और बाल मजदूरी की खतरनाक समस्या पर बीबीए के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, यह पूरे समाज के लिए चिंता की बात है कि आजादी के दशकों बाद भी हम अपने बच्चों को बाल मजदूरी के कोढ़ से मुक्त नहीं करा पाए हैं। खिलौनों से खेलने की उम्र में बच्चों को खिलौना बनाते हुए देखना हम सभी को शर्मसार करने वाली बात है।राष्ट्रीय राजधानी में पिछले दस दिन में बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराने की बीबीए की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। पिछले हफ्ते बीबीए, दिल्ली कैंट के एसडीएम, श्रम विभाग और पुलिस की साझा कार्रवाई में नारायणा से 14 बच्चों को मुक्त कराया गया था। इसमें ज्यादातर की सेहत खराब थी और उनके हाथ-पांव पर जले के निशान थे। अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

बेची गयी नाबालिग की शादी, बचपन बचाओ आंदोलन ने छुड़ाया
Published / 2023-05-23 18:29:17
बेची गयी नाबालिग की शादी, बचपन बचाओ आंदोलन ने छुड़ाया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने खरीदी गयी 17 साल की एक नाबालिग की 33 साल के व्यक्ति से शादी कराने के मामले में राजस्थान के जयपुर में एफआईआर दर्ज कराया है।इस नाबालिग को पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले से खरीद कर लाया गया था और उसे खुद को उसकी तथाकथित नानी बताने वाली एक महिला ने बेचा था। महिला ने सगाई का झांसा देकर धोखे से नाबालिग का विवाह करा दिया। नाबालिग किसी तरह वहां से भाग निकली और इस मामले की सूचना बीबीए की टीम को मिली। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बीबीए के सदस्यों ने पीड़िता से मुलाकात की और उसे लेकर जवाहर सर्कल थाने पहुंची जहां पुलिस ने पीड़िता का बयान लेने के बाद एफआईआर दर्ज की। एफआईआर के अनुसार दलाल महिला ने वर पक्ष से पैसे लेने के बाद नाबालिग से झूठ बोला कि अभी सिर्फ उसकी सगाई होगी और विवाह बाद में उसकी मर्जी से होगा। लेकिन रिश्तेदार ने धोखे से मंदिर में नाबालिग की शादी करा दी। तीन-चार दिन तक लगातार यौन उत्पीड़न झेलने के बाद नाबालिग किसी तरह वहां से भाग निकली और एक रात पार्क में बिताने के बाद चाइल्डलाइन के दफ्तर पहुंची जहां बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता मौजूद थे। उन्होंने बच्ची की काउंसलिंग की और फिर थाने ले जाकर एफआईआर दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (संशोधित) सहित तमाम अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। बताते चलें कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चला रखा है। बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर देश के सबसे बड़े इस अभियान की शुरुआत 16 अक्तूबर, 2022 को हुई। इस दौरान देश के 26 राज्यों के 500 से अधिक जिलों के करीब दस हजार गांवों में 70 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर दीए जलाये गये और केंडल मार्च निकाले गये।  बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा कि अभी भी बड़े पैमाने पर बच्चियां बाल विवाह की शिकार हो रही हैं और अब उन्हें उनके परिजनों द्वारा ही बेचे जाने की घटनाओं में जिस तरह इजाफा हो रहा है, वह चिंताजनक है। हर साल देश भर में तमाम जगहों से हजारों लड़कियों को बाल विवाह के चंगुल से मुक्त कराया जा रहा है फिर भी इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि सतत सतर्कता और जागरूकता से ही बाल विवाह की घटनाओं पर रोक लग सकती है। हमने देश को बाल विवाह और बाल श्रम के अभिशाप से देश को मुक्त कराने के संकल्प लिया है और इस दिशा में प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ी जायेगी। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क किया जा सकता है।

वायु प्रदूषण के कारण हो रहे प्रीमेच्योर बेबी
Published / 2023-05-22 13:48:20
वायु प्रदूषण के कारण हो रहे प्रीमेच्योर बेबी

दुनियाभर में प्रीमेच्योर बच्चों की मौत को लेकर सामने आयी चौंकाने वाली रिपोर्टएबीएन सोशल डेस्क। दुनियाभर में समय पूर्व जन्मे जिन बच्चों की मौत का संबंध वायु प्रदूषण से है, उनमें से 91 प्रतिशत शिशुओं की मौत कम एवं मध्यम आय वाले देशों में होती है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार अमीर देश हैं, लेकिन इसका खामियाजा इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार देशों को भुगतना पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और मातृ नवजात एवं बाल स्वास्थ्य साझेदारी ने हाल में बॉर्न टू सून: डिकेड ऑफ एक्शन ऑन प्रीटर्म बर्थ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें गर्भावस्था पर जलवायु परिवर्तन के कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावों के कारण मृत शिशुओं के जन्म, समय पूर्व जन्म और गर्भावस्था के कम समय को रेखांकित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन गर्मी, तूफान, बाढ़, सूखे, जंगल में लगने वाली आग और वायु प्रदूषण के अलावा खाद्य असुरक्षा, दूषित पानी एवं भोजन से होने वाली बीमारियों, मच्छर जनित बीमारियों, पलायन और संघर्ष के जरिए गर्भावस्था को प्रभावित करता है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जोखिम को उल्लेखनीय रूप से कम करने के लिए और निवेश करने और जलवायु आपात संबंधी नीतियों एवं कार्यक्रमों में महिलाओं एवं बच्चों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसा अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण हर साल 60 लाख शिशुओं का समय से पहले जन्म होता है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में चिकित्सकीय अनुसंधान इकाई की डॉ एना बोनेल ने कहा कि जो असमानता का सबसे अधिक शिकार हैं, उन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे अधिक नुकसान होता है।रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव काल पर जलवायु परिवर्तन का हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे जीवाश्म ईंधन जलने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण जैसे प्रत्यक्ष तरीकों से अस्थमा पीड़ित माताओं में शिशुओं के समय पूर्व जन्म का खतरा 52 प्रतिशत बढ़ जाता है और अत्यधिक गर्मी के कारण यह खतरा 16 प्रतिशत बढ़ जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, हालांकि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव दुनिया के सभी क्षेत्रों में महसूस किया जाता है, लेकिन इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार देशों को सर्वाधिक खामियाजा भुगतना पड़ता है।उदाहरण के लिए समय पूर्व जन्मे जिन बच्चों की मौत का संबंध वायु प्रदूषण से है, उनमें से 91 प्रतिशत शिशुओं की मौत कम एवं मध्यम आय वाले देशों में हुई, जबकि जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार उच्च आय वाले देश हैं।

श्री सर्वेश्वरी समूह ने रिम्स में किया हाथ के पंखे का वितरण
Published / 2023-05-21 20:10:52
श्री सर्वेश्वरी समूह ने रिम्स में किया हाथ के पंखे का वितरण

टीम एबीएन, रांची। श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) द्वारा राजेन्द्र इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज - रिम्स में हाथ पंखों का वितरण किया गया।आज दिनांक 21 मई 2023 (दिन - रविवार) को रिम्स अस्पताल के न्यूरो वार्ड, ऑर्थो वार्ड, बर्न वार्ड, मेडिसिन वार्ड एवं पेडरियाटिक्स वार्ड में भर्ती मरीजों के बीच श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची द्वारा ताड़पत्र से निर्मित 300 हाथ पंखों का वितरण किया गया।इस कार्यक्रम को श्री सर्वेश्वरी समूह के उन्नीस सूत्री कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया। ज्ञात हो कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्वस्तरीय सामाजिक एवं धार्मिक संस्था है जो जनकल्याण के अनेक कार्यक्रम लगातार करती रहती है। समूह का प्रधान कार्यालय पड़ाव, वाराणसी में स्थित है एवं शाखा पुरे देश एवं विदेश में जगह-जगह फैले हुए हैं जो इन जनकल्याण के कार्यक्रमों को संपादित करते रहते हैं। राँची की शाखा औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड़ पश्चिम में स्थित है।श्री सर्वेश्वरी समूह का नाम गिनीस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड एवम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्जित है।अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों को इस भीषण गर्मी में इस हाथ पंखे का मिलना  किसी वरदान से कम नही है। एक तरफ बीमारी दूसरी तरफ आग जैसी लहलहाती गर्मी की व्यथा अकल्पनीय है।कार्यक्रम में श्री सर्वेश्वरी समूह -  शाखा रांची की ओर से श्री नवल किशोर सिंह, श्री हेमन्त नाथ शाहदेव, श्री समरेन्द्र सिंह, श्री हर्षवर्धन नाथ शाहदेव, श्री उमाशंकर नन्द, श्री गिरेन्द्र नाथ शाहदेव, श्रीमती सुचित्रा शाहदेव, श्री अभिजीत रौनियार, श्री नितिन चौरसिया, श्री सिद्धार्थ सिंह, श्री अशोक प्रियदर्शी, श्री सोमेश्वर नाथ शाहदेव, श्री सागर सिंह, श्री यदुनाथ शाहदेव आदि शामिल हुए।

हर मंडल में साप्ताहिक बैठक करेंगे हिन्दू संगठन
Published / 2023-05-21 19:53:39
हर मंडल में साप्ताहिक बैठक करेंगे हिन्दू संगठन

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 20.05.2023 दिन रविवार को हिन्दू जागरण मंच, रांची महानगर की बैठक पहाड़ी मंदिर में सम्पन्न हुई। बैठक में संगठन विस्तार को लेकर चर्चा हुई। बैठक में यह तय किया गया कि संगठन के द्वारा साप्ताहिक बैठक मंडल में की जायेगी। साथ ही महाआरती का आयोजन मंडल के विभिन्न  मंदिरों में साप्ताहिक रूप से किया जायेगा। जिससे कि हिंदुत्व एकता को बल मिले। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सुजीत सिंह जी के आदेशनुसार महानगर अध्यक्ष चन्दन मिश्रा ने श्री अशुतोष द्विवेदी को महानगर मठ मंदिर सुरक्षा प्रमुख और राहुल व्यास को महानगर मीडिया प्रमुख का दायित्व सौंपा।बैठक में महानगर महामंत्री निशान्त चौहान, महानगर मंत्री विवेक प्रताप सिंह, प्रीतम सिंह मुन्ना, निशान्त यादव, ऋषभ अनिल वर्मा, रंजय वर्मा, ओमप्रकाश जी, सचिन चौधरी जी, अनुभव जी, आशीष बरनवाल श्रीकांत ठाकुर विष्णु चौरसिया कुशाग्र सिंह, आयुष बरनवाल, मनीष सिंह, राहुल गुप्ता, राजकुमार केशरी सुमित चौधरी, नितिन कुमार, मानस दे सरकार, दीपम बनर्जी, सत्या सिंह सहित वीरांगना वाहिनी प्रमुख शिवानी पांडे सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।

रांची : 500 महिलाओं को दिखायी गयी द केरल स्टोरी
Published / 2023-05-19 21:53:27
रांची : 500 महिलाओं को दिखायी गयी द केरल स्टोरी

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 19.05.2023 दिन शुक्रवार को हिंदू जागरण मंच रांची महानगर द्वारा पिस्का मोड़ स्थित पोपकोर्न सिनेमा हॉल में लगभग 500 महिलाओं को दि केरला स्टोरी फिल्म दिखायी गयी। मौके पर प्रदेश अध्यक्ष ऋषि नाथ शाहदेव ने सबको संबोधित करते हुए कहा कि यह स्टोरी केवल केरला की नही परंतु पूरे भारत की है। हमे इन सभी षडयंत्रों से बचते हुए इनका चरित्र उजागर करने की आवश्यकता है। साथ ही प्रदेश उपाध्यक्ष सिंह ने कहा कि लवजिहाद केवल धर्म परिवर्तन तक सीमित नहीं है। वरन इसका संबद्ध आइएसआइएस से है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महानगर अध्यक्ष चंदन मिश्रा ने कहा की यह कार्यक्रम हिन्दू जागरण मंच द्वारा छोटा सा पहल है। संगठन शुरू से ही लवजिहाद के मामलों को उजागर करते रहा है। आने वाले दिनों में संगठन के द्वारा और भी महिलाओं को भी यह फिल्म दिखायी जायेगी। कार्यक्रम में महिलाओं के अलावे महानगर महामंत्री निशांत चौहान, राकेश कर्ण, वीरांगना वाहिनी प्रमुख शिवानी पाण्डेय, गनिता देवी जी, सोनू गुप्ता, ऋषभ सिंह, कुशाग्र सिंह राजपूत, चंदन सिंह, गोल्डी जी, नेहा शर्मा, कंचन जी, सहित सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद थे।

स्वस्थ जीवन, अखंड राज्य और दीर्घायु पति की कामना पूर्ण करता है वट सावित्री का व्रत
Published / 2023-05-19 19:04:13
स्वस्थ जीवन, अखंड राज्य और दीर्घायु पति की कामना पूर्ण करता है वट सावित्री का व्रत

राजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। वटसावित्री व्रत सौभाग्यवती स्त्रियों का मुख्य त्यौहार माना जाता है। यह व्रत मुख्यत: ज्येष्ठ कृष्ण की अमावस्या को किया जाता है। इस दिन वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा होती है। इस दिन सत्यवान-सावित्री और यमराज की पूजा की जाती है। स्त्रियां इस व्रत को अखंड सौभाग्यवती अर्थात अपने पति की लंबी आयु, सेहत तथा तरक्की के लिए करती हैं। सावित्री ने इसी व्रत के द्वारा अपने पति सत्यवान को धर्मराज से छीन लिया था। वट सावित्री व्रत की पूजन विधि इस दिन स्त्रियां सुबह-सवेरे केशों सहित स्नान करें। तत्पश्चात एक बांस की टोकरी में रेत भरकर ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए। ब्रह्मा के वाम-पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्तियां स्थापित करके दोनों टोकरियां वट वृक्ष के नीचे रखनी चाहिए। सर्वप्रथम ब्रह्मा और सावित्री का पूजन करना चाहिए, उसके बाद सत्यवान तथा सावित्री की पूजा करें तथा वट के पेड़ को पानी दें। जल, फूल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिंगोया चना, गुड़ तथा धौप-दीप से वट वृक्ष की पूजा करी जाती है। वट वृक्ष को जल चढ़ा कर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करें। वट के पत्तों के गहने पहनकर वट-सावित्री की कथा सुननी चाहिए। भींगे हुए चने का बायना निकालकर उसपर रुपये रखकर अपनी सास को दें तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। यदि सास दूर हो तो बायना बनाकर वहां भेज दें। वट तथा सावित्री की पूजा के बाद प्रतिदिन पान, सिंदूर तथा कुंकुम से सुहागिन स्त्री की पूजा का भी विधान है। पूजा के समाप्त होने पर ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि बांस के पत्ते में रखकर दान करनी चाहिए। यदि आपके आसपास कोई वट वृक्ष नहीं हो, तो दीवार पर वट वृक्ष की तस्वीर लगा कर पूरी श्रद्धा और आस्था से पूजा करें। इसके पश्चात वट-सावित्री की कथा सुननी चाहिए। वट सावित्री व्रत कथा एक समय मद देश में अश्वपति नामक परम ज्ञानी राजा राज करता था। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए अपनी पत्नी के साथ सावित्री देवी का विधिपूर्वक व्रत तथा पूजन किया और पुत्री होने का वर प्राप्त किया। इस पूजा के फल से उनके यहां सर्वगुण संपन्न सावित्री का जन्म हुआ। सावित्री जब विवाह योग्य हुई तो राजा ने उसे स्वयं अपना वर चुनने को कहा। अश्वपति ने उसे अपने पति के साथ वर का चुनाव करने के लिए भेज दिया। एक दिन महर्षि नारद जी राजा अश्वपति के यहां आये हुए थे तभी सावित्री अपने वर का चयन करके लौटी। उसने आदरपूर्वक नारद जी को प्रणाम किया। नारद जी के पूछने पर सावित्री ने कहा- राजा द्युमत्सेन, जिनका राज्य हर लिया गया है, जो अंधे होकर अपनी पत्नी के साथ वनों में भटक रहे हैं।उन्हीं के इकलौते आज्ञाकारी पुत्र सत्यवान को मैंने अपने पतिरूप में वरण किया है। तब नारद जी ने सत्यवान तथा सावित्री के ग्रहों की गणना करके उसके भूत, वर्तमान तथा भविष्य को देखकर राजा से कहा- राजन! तुम्हारी कन्या ने नि:सन्देह बहुत योग्य वर का चुनाव किया है। सत्यवान गुणी तथा धर्मात्मा है। वह सावित्री के लिए सब प्रकार से योग्य है परंतु एक भारी दोष है। वह अल्पायु है और एक वर्ष के बाद अर्थात जब सावित्री बारह वर्ष की हो जायेगी उसकी मृत्यु हो जायेगी। नारद जी की ऐसी भविष्यवाणी सुनकर राजा ने अपनी पुत्री को कोई अन्य वर खोजने के लिए कहा।इस पर सावित्री के कहा- पिताजी! आर्य कन्याएं जीवन में एक ही बार अपने पति का चयन करती है। मैंने भी सत्यवान को मन से अपना पति स्वीकार कर लिया है, अब चाहे वह अल्पायु हो या दीर्घायु, मैं किसी अन्य को अपने हृदय में स्थान नहीं दे सकती। सावित्री ने आगे कहा- पिताजी, आर्य कन्याएं अपना पति एक बार चुनती है। राजा एक बार ही आज्ञा देते हैं, पंडित एक बार प्रतिज्ञा करते हैं तथा कन्यादान भी एक बार किया जाता है। अब चाहे जो हो सत्यवान ही मेरा पति होगा। सावित्री के ऐसे दृढ़ वचन सुनकर राजा अश्वपति ने उसका विवाह सत्यवान से कर दिया। सावित्री ने नारद जी से अपने पति की मृत्यु का समय ज्ञात कर लिया था। सावित्री अपने पति और सास-ससुर की सेवा करती हुई वन में रहने लगी। समय बीतता गया और सावित्री बारह वर्ष की हो गयी। नारद जी के वचन उसको दिन-प्रतिदिन परेशान करते रहे। आखिर जब नारदजी के कथनानुसार उसके पति के जविन के तीन दिन बचे, तभी से वह उपवास करने लगी। नारद जी द्वारा कथित निश्चित तिथि पर पितरों का पूजन किया। प्रतिदिन की भांति उस दिन भी सत्यवान लकड़ियां काटने के लिए चला, तो सास-ससुर से आज्ञा लेकर वह भी उसके साथ वन में चल दी। वन में सत्यवान ने सावित्री को मीठे-मीठे फल लाकर दिये और स्वयं एक वृक्ष पर लकड़ियां काटने के लिए चढ़ गया। वृक्ष पर चढ़ते ही सत्यवान के सिर में असहनीय पीड़ा होने लगी। वह वृक्ष से नीचे उतर आया। सावित्री ने उसे पास के वट के वृक्ष के नीचे लिटाकर सिर अपनी गोद में रख लिया। सावित्री का हृदय कांप रहा था। तभी उसने दक्षिण दिशा से यमराज को आते देखा। यमराज और उसके दूत धर्मराज सत्यवान के जीव को लेकर चल दिये, तो सावित्री भी उनके पीछे चल पड़ी। पीछा करती सावित्री को यमराज ने समझाकर वापस लौट जाने को कहा। परंतु सावित्री ने कहा- हे यमराज! पत्नी के पत्नीत्व की सार्थकता इसी में है कि वह पति की छाया के समान अनुसरण करे। पति के पीछे जाने जाना ही स्त्री धर्म है।पतिव्रत के प्रभाव से और आपकी कृपा से कोई मेरी गति नहीं रोक सकता, यह मेरी मर्यादा है। इसके विरुद्ध कुछ भी बोलना आपके लिए शोभनीय नहीं है। सावित्री के धर्मयुक्त वचनों से प्रसन्न होकर यमराज ने उससे उसके पति के प्राणों के अतिरिक्त कोई भी वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने यमराज से अपने सास-ससुर की आंखों की खोयी हुई ज्योति तथा दीर्घायु मांग ली। यमराज तथास्तु कहकर आगे बढ़ गये। फिर भी सावित्री ने यमराज का पीछा नहीं छोड़ा। यमराज ने उसे फिर वापस जाने के लिए कहा। इस पर सावित्री ने कहा- हे धर्मराज! मुझे अपने पति के पीछे चलने में कोई परेशानी नहीं है। पति के बिना नारी जीवन की कोई सार्थकता नहीं है। हम पति-पत्नी भिन्न भिन्न मार्ग कैसे जा सकते हैं। पति का अनुगमन मेरा कर्तव्य है। यमराज ने सावित्री के पतिव्रत धर्म की निष्ठा देख कर पुन: वर मांगने के लिए कहा। सावित्री ने अपने सास-ससुर के खोये हुए राज्य की प्राप्ति तथा सौ भाइयों की बहन होने का वर मांगा। यमराज पुन: तथास्तु कहकर आगे बढ़ गये। परंतु सावित्री अब भी यमराज का पीछा किये जा रही थी। यमराज ने फिर से उसे वापस लौट जाने को कहा, किंतु सावित्री अपने प्रण पर अडिग रही। तब यमराज ने कहा- हे देवी! यदि तुम्हारे मन में अब भी कोई कामना है तो कहो, जो मांगोगी वही मिलेगा। इस पर सावित्री ने कहा- यदि आप सच में मुझ पर प्रसन्न हैं और सच्चे हृदय से वरदान देना चाहते हैं तो मुझे सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान दें। यमराज तथास्तु कहकर आगे बढ़ गये। यमराज ने पीछे मुड़कर देखा और सावित्री से कहा- अब आगे मत बढ़ो। तुम्हे मुंहमांगा वर दे चुका हूं, फिर भी मेरा पीछा क्यों कर रही हो? सावित्री बोली- धर्मराज! आपने मुझे सौ पुत्रों की मां होने का वरदान तो दे दिया, पर क्या मैं पति के बिना संतान को जन्म दे सकती हूं? मुझे मेरा पति वापस मिलना ही चाहिए, तभी मैं आपका वरदान पूरा कर सकूंगी। सावित्री की धर्मनिष्ठा, पतिभक्ति और शुक्तिपूर्ण वचनों को सुनकर यमराज ने सत्यवान के जीव को मुक्त कर दिया। सावित्री को वर देकर यमराज अंतर्ध्यान हो गये। सावित्री उसी वट वृक्ष के नीचे पहुंची, जहां सत्यवान का शरीर पड़ा था। सावित्री ने प्रणाम करके जैसे ही वट वृक्ष की परिक्रमा पूर्ण की, वैसे ही सत्यवान का मृत शरीर जीवित हो उठा। दोनों हर्षातुर से घर की ओर चल पड़े। प्रसन्नचित सावित्री अपने पति सहित सास-ससुर के पास गयी। उनकी नेत्र ज्योति वापस लौट आयी थी। उनके मंत्री उन्हें खोज चुके थे। द्युमत्सेन ने पुन: अपना राज सिंहासन संभाल लिया था।उधर, महाराज अश्वसेन सौ पुत्रों के पिता हुए और सावित्री सौ भाइयों की बहन। यमराज के वरदान से सावित्री सौ पुत्रों की मां बनी। इस प्रकार सावित्री ने अपने पतिव्रता का पालन करते हुए अपने पति के कुल एवं पितृकुल दोनों का कल्याण कर दिया। सत्यवान और सावित्री चिरकाल तक राज सुख भोगते रहे और चारों दिशाओं में सावित्री के पतिव्रत धर्म के पालन की कीर्ति गूंज उठी।

सामाजिक संरचना को मजबूत करेगी योग विज्ञान और नैतिक शिक्षा
Published / 2023-05-19 16:53:29
सामाजिक संरचना को मजबूत करेगी योग विज्ञान और नैतिक शिक्षा

सीएसआर के तहत पहलटीम एबीएन, रांची। स्वामी मुक्तरथ ग्राम सिरका में पांच दिवसीय योग व नैतिक शिक्षा शिविर का आज  समापन हुआ। प्रतिदिन सिरका पंचायत के मुखिया रौशन लाल मुंडा, पंचायत समिति सदस्य साहेब लाल महतो, समाजसेवी एवं काव्य संगीतज्ञ जयशंकर मुंडा सहित सैकड़ों लोग बिहार योग विद्यालय मुंगेर की योगशैली से अवगत हुए और शारीरिक तथा मानसिक स्तर पर इसके लाभ को महसूस किये। किन्हीं का पाचन तंत्र मजबूत हुआ, किन्ही का श्वांस फूलना कम हुआ, माइग्रेन में प्राणायाम का असर दिखा, मधुमेह के रोगियों को इस शिविर से काफी लाभ हुआ।इस मौके पर मुखिया रौशन लाल मुंडा ने कहा "करें योग, रहें निरोग" योग से यह समझ आया कि हम घर में रहकर योग को करके ढेर सारी बीमारियों को रोक सकते हैं।सत्यानन्द योग मिशन, रांची के अध्यक्ष स्वामी मुक्तरथ ग्रामीण लोगों और युवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि योग की शुरुआत न तो योगासन से होती है और न ही प्राणायाम से, योग की शुरुआत होती है अनुशाशन से। अनुशाशन से व्यक्ति में नैतिक गुणों की वृद्धि होती है। राजयोग जिसमें हम आसन, प्राणयाम और ध्यान को सीखते हैं उसकी भी शुरुआत यम और नियम से होती है। यह "यम और नियम" अनुशासन, निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण की शिक्षा देती है।अंत में मुखिया जी ने कहा योगाभ्यास से व्यक्ति में सजगता बढ़ती है और तन-मन निरोग होता है। अगर हम अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में सजग रहे तथा नियमित योग करें तो स्वास्थ्य अच्छा होगा। जब हमारा मन मस्तिष्क व शरीर निरोग रहेगा, तभी  हम अपने परिवार के साथ साथ समाज को को आगे ले जा सकते हैं। श्री मुंडा आज अनगड़ा के सिरका गांव के मंदिर परिसर में आयोजित योग और नैतिक मूल्यों की शिक्षा अभियान के समापन समारोह पर बोल रहे थे। उषा मार्टिन फाॅउंडेशन और शालिनी अस्पताल के सौजन्य  से अनगड़ा और नामकुम प्रखंड के गांवों एवं स्कूलों में यह अभियान चलाया जा रहा है। पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि साहेब्राम महतो ने कहा कि फाउंडेशन एवं शालिनी अस्पताल द्वारा चलाए जा रहे इस योग प्रशिक्षण से हम ग्रामीण काफी लाभान्वित होंगे तथा लोगों को नियमित योग करने का आह्वान किया। मौके पर समाजसेवी जयशंकर मुंडा, शालिनी अस्पताल के शिशिर भगत, अजीत महतो, राजू मुंडा, मोहर महतो एवं ग्रामीणउपस्थित थे।

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