सदी के अंत तक भारत में ही होगी सबसे अधिक आबादी, जानिए पाकिस्तान, चीन और यूएस में कितनी होगी जनसंख्याएबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक स्तर पर इस सदी की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है बढ़ती जनसंख्या। जनसंख्या के बढ़ने से कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब तक दुनिया की आबादी आठ अरब के पार हो चुकी है। साल 2100 तक आबादी 10.4 बिलियन तक पहुंच सकती है।भारत तीन महीने पहले ही मार्च में चीन को पछाड़कर विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। जनसंख्या बढ़ने के कई कारण होते हैं। इनमें घटती मृत्यु दर, परिवार नियोजन की कमी, गर्भनिरोधकों की कमी, सांस्कृतिक और धार्मिक मान्याताएं, अपर्याप्त शिक्षा, गरीबी और जागरूकता सहित कई पहलू शामिल हैं। आज हम आपको बताते हैं उन 10 देशों के बारे में जो संयुक्त राष्ट्र की जनसंख्या डिवीजन के अनुसार 21वीं सदी के अंत तक सबसे अधिक आबादी वाले देशों की सूची में शामिल होंगे। भारत : इसी साल मार्च में भारत की आबादी 1,425,775,850 हो चुकी है। भारत मार्च में चीन को पछाड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। उम्मीद है कि इस सदी के अंत तक भारत की आबादी 1,533 मिलियन को पार कर जायेगी। चीन : चीन फिलहाल जनसंख्या की समस्या से जूझ रहा है। चीन की वर्तमान जनसंख्या 1,295.33 मिलियन है। उम्मीद है कि चीन को इस सदी के अंत तक राहत मिल सकती है। देश की आबादी 771 मिलियन होने का अनुमान है। नाइजीरिया : देश की वर्तमान जनसंख्या 221,168,109 है। सदी की शुरुआत में आबादी 122.9 मिलियन थी। वहीं सदी के अंत तक जनसंख्या 546 मिलियन होने की संभावना है। पाकिस्तान : पाकिस्तान की वर्तमान जनसंख्या 233,515,417 है। सदी की शुरुआत में पाकिस्तान की आबादी 15.44 मिलियन थी। फिलहाल जनसंख्या के नजरिये से पाकिस्तान विश्व में पांचवें पायदान पर है। 2100 तक पाकिस्तान विश्व का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जायेगा, जिसकी जनसंख्या 487 मिलियन होगी। कॉन्गो : अफ्रीकी देश की आबादी 97,574,097 है, जो सदी की अंत में 431 मिलियन तक पहुंच सकती है। यूएस : अमेरिका की आबादी फिलहाल 336,708,490 है। सदी की अंत तक 394 मिलियन आबादी के साथ अमेरिका विश्व में पांचवा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। इथोपिया : सदी की अंत में आबादी 323 मिलियन तक पहुंच जाएगी। फिलहाल देश की आबादी 123,347,685 है। इंडोनेशिया : सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले देश की आबादी 282,022,033 है। सदी की अंत तक आबादी 287 मिलियन तक पहुंच सकती है। तंजानिया : देश की वर्तमान आबादी 64,745,038 है, जो साल के अंत तक 244 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है। इजिप्ट : देश की आबादी वर्तमान मंं 109.3 मिलियन है, जो सदी की अंत तक करीब दोगुनी 205 मिलियन हो जायेगी। इसके अलावा ब्राजील 185 मिलियन, मैक्सिको 116 मिलियन, रूस 112 मिलियन, अफगानिस्तान 110 मिलियन, तुर्किये 82 मिलियन, यूके 70 मिलियन, जर्मनी 68 मिलियन, फ्रांस 60 मिलियन, कनाडा 53 मिलियन और आॅस्ट्रेलिया की आबादी सदी की अंत तक 38 मिलियन पहुंचने की संभावना है।
पीएम मोदी को भेजा न्योताएबीएन सेंट्रल डेस्क। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर है। यहां भूतल का काम लगभग पूरा हो चुका है। तीन मंजिला राम मंदिर के निर्माण के लिए दिन रात काम किया जा रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि ग्राउंड फ्लोर का काम अक्टूबर तक पूरा हो जायेगा। इसी बीच मंदिर में रामलला की गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी। इसे लेकर जानकारी सामने आयी है कि 2024 में मकर संक्रांति के बाद राम मंदिर का उद्घाटन किया जायेगा। अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामलला विराजमान की पूजा को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से पीएम मोदी को न्योता भेजा गया गया था, जिसको लेकर अभी प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं आया है। वहीं अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अभी से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।पूरे देश में होगा भव्य आयोजनराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम पूरे देश में मनाया जायेगा। अयोध्या के अलावा देशभर के सभी मंदिरों को सजाया जायेगा। इतना ही नहीं कई मंदिरों में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को वर्चुअल तरीके से देश के अलग-अलग स्थानों पर भी दिखाया जायेगा। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान वास्तु पूजा से लेकर विभिन्न अनुष्ठान और पूजन भी किए जायेंगे। ये कार्यक्रम करीब सात दिनों तक चलेगा।तीन मूर्तियां हो रहीं तैयारअयोध्या में रामलला की तीन मूर्तियों को तराशने का काम किया जा रहा है। एक मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा के बाद गर्भगृह में स्थापित किया जायेगा जबकि दो अतिरिक्त मूर्तियों को मंदिर में ही उचित स्थान पर स्थापित किया जायेगा। ऐसा इसलिए किया जायेगा ताकि उन मूर्तियों की पवित्रता बनी रहे। अयोध्या में तराशी जा रही रामलला की तीन मूर्तियों में से सर्वश्रेष्ठ को ही मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जायेगा। ट्रस्ट के सदस्य के अनुसार, मंदिर की पहली और दूसरी मंजिल पर एक-एक मूर्ति स्थापित की जा सकती है।मंदिर का कितना काम हुआ पूराराममंदिर में रामलला के गर्भगृह के ऊपरी हिस्से पर निर्माण कार्य चल रहा है। अक्टूबर 2023 तक राम मंदिर का प्रथम तल बनकर तैयार हो जायेगा। गर्भगृह के अलावा, मंदिर में पांच मंडप – गुड मंडप, रंग मंडप, नृत्य मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप हैं। इनका भी निर्माण किया जायेगा। पांच मंडपों के गुंबद का आकार 34 फुट चौड़ा और 32 फुट लंबा और आंगन से ऊंचाई 69 फुट से 111 फुट तक है। मंदिर की लंबाई 380 फुट, चौड़ाई 250 फुट और और यह प्रांगण से 161 फुट ऊंचा है।
एबीएन सोशल डेस्क। आयुष विभाग के निदेशक डॉक्टर फजलुर शमी ने बताया की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मध्यनजर सात दिवसीय योग का काउंटडाउन 15 जून से राज्य योग केंद्र रांची में शुरू होगा जो 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य के सभी वैलनेस सेंटर में एनजीओ के माध्यम से योग प्रशिक्षक की सेवा ली जा रही है। हर गांव - आंगन तक योग को पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। आज राज्य योग केंद्र मे योगाभ्यास के विशेष सत्र के दौरान उन्होंने यह बातें कहीं।इस अवसर पर रांची जिला आयुष पदाधिकारी डॉ सच्चिदानंद सिंह एवं राज्य योग केंद्र प्रभारी डॉ मुकुल कुमार दीक्षित एवं अन्य चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित थे।विशेष सत्र में राज्य योग केंद्र की योग प्रशिक्षिका डॉ अर्चना कुमारी ने उपस्थित लोगों को योगाभ्यास कराया और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बारे में जानकारी दी।काउंटडाउन का कार्यक्रम15 जून 2023सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अंतरराष्ट्रीय योगा प्रोटोकोल का अभ्यासशाम तक 4 बजे से 6 बजे तक भाषण प्रतियोगिता16 जून 2023 सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अंतरराष्ट्रीय योगा प्रोटोकोल का अभ्यासशाम 4 बजे से 6 बजे तक योगासन प्रतियोगिता ( सीनियर )17 जून 2023 सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अंतरराष्ट्रीय योगा प्रोटोकोल का अभ्यासशाम 4 बजे से 6 बजे तक योगासन प्रतियोगिता (जूनियर )18 जून 2023सुबह 6 बजे से 8 बजे तक रन फॉर योगा एवमअंतरराष्ट्रीय योगा प्रोटोकोलशाम 4 बजे से 6 बजे तक चित्रांकन प्रतियोगिता19 जून 2023 सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल का अभ्यासशाम 4 बजे से 6 बजे तक बच्चों का योगाभ्यास20 जून 2023सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अंतरराष्ट्रीय योगा प्रोटोकॉल का अभ्यासशाम 4 बजे से 6 बजे तक रिदमिक, आर्टिस्टिक, एडवांस योगा और पुरस्कार वितरण समारोह21 जून 2023सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल का अभ्यासशाम 6 बजे बजे तक समापन समारोह
एबीएन सोशल डेस्क। बिहार स्कूल ऑफ योगा मुंगेर द्वारा आयोजित योग शिविर का आज रांची में समापन हुआ। स्वामी गोरखनाथ सरस्वती शिविर के षष्ठ दिवस पर आज लोगों को बहुत बड़ा यौगिक साधना बतला गये जिसको करके मनुष्य डॉयबिटीज से मुक्त हो सकता है और अपनी पाचन प्रणाली की पूरी सफाई मात्र बीस से पच्चीस मिनट में कर सकता है। योग के तो बहुत आयाम हैं उसमें हठयोग व्यक्ति के आंतरिक शरीर की सफाई करता है और यह तनाव को भी शक्तिशाली तरीके से खत्म कर देता है। हठयोग की विधियों में एक क्रिया है शंखप्रक्षालन जो धौति क्रिया में आता है। यह है शरीर को भीतर से धोने की क्रिया (सम्पूर्ण पाचन प्रणाली का क्लींजिंग) जिसमें मुंह से लेकर पूरा ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और मलाशय की सफाई की जाती है। यह क्रिया डाईबिटीज में बहुत कारगर है। मधुमेह प्रबंधन में 40 दिन तक प्रतिदिन शंखप्रक्षालन का लघु रूप, कुंजल, नेति, शरीर के हिसाब से सूर्यनमस्कार या कुछ आसनों का समूह, शशांकासन, नाड़ीशोधन, कपालभाति तथा भ्रामरी और प्रतिदिन योगनिद्रा का अभ्यास बहुत ज्यादा प्रभावकारी है। डाइबिटीज बालों पर देखा गया है कि चालीस दिन के लगातार अभ्यास से इस रोग को खत्म किया जा सकता है। स्वामी गोरखनाथ जी ने कहा यह देन है हमारे गुरु परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का। परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का आविष्कार है योगनिद्रा जो आज दुनिया की सबसे प्रचलित ध्यान की विधि है।अरविन्दो आश्रम के सचिव श्री रमेश भाई स्वामी जी के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती की महती कृपा है जो उन्होंने स्वामी गोरखनाथ सरस्वती जैसे सिद्ध आचार्य को हमारे आश्रम में भेजकर छह दिनों तक योग विद्या का संचालन कराने का सुअवसर दिये। रांची नगर के हजारों लोगों को इससे शारिरिक लाभ प्राप्त हुआ है और मन की पीड़ा खत्म हुई है। मात्र छः दिन के योग से लोग बहुत खुश नजर आ रहे हैं। स्वयं में बहुत गहरा अनुभव लोगों को हुआ है। यह हमारे लिये, रांची नगर वासियों के लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद मिला है इसे जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने अहर्निश इस योगोत्सव कार्यक्रम में सहयोग देने और हर तरह से सफल बनाने में यहां के प्रख्यात योगाचार्य संन्यासी मुक्तरथ जी एवं इनके सहयोगी बने रहे आदित्य कुमार और रूपम कुमारी का भी तहेदिल से आभार व्यक्त किया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त किये।
टीम एबीएन, गिरिडीह। जिले को बाल श्रम मुक्त जिला बनाने को लेकर मिठाई दुकानों ढाबो ,लाईन होटलों सहित जेनरल स्टोरों में छापामारी अभियान चलाया जा रहा है। बताया गया कि धावा दल का गठन कर श्रम अधिक्षक कार्यालय एवं बाल कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में जिले भर में आगामी 30 जून तक छापामारी अभियान चलाया जोयगा।इस बाबत श्रमायुक्त रवि शंकर ने बताया कि अभियान के प्रथम चरण में धावा दल द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठानों, होटलों, ढाबों इत्यादि का निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के क्रम में मुफस्सिल थाना क्षेत्र एवं गिरिडीह शहरी क्षेत्र में कान्हा स्वीट्स, एंड नमकीन नामक होटल से एक बच्चे को रेस्क्यू कर मुक्त कराया गया। बच्चा ग्लास, कप, प्लेट धोने व साफ सफाई के काम में लगा हुआ था।उन्होंने कहा कि धावा दल ने एक अन्य परिवार के घर में छापा मारा। परिवार के लोग पिछले सात साल से एक नाबालिग किशोरी को अपने घर में रखकर घर का काम काज करवा रहे थे। नाबालिक की मां के अनुसार कई बार बच्ची को मुक्त कराकर अपने घर ले जाने का प्रयास हुआ था लेकिन घर वाले उसे घर जाने को नहीं दे रहे थे।धावा दल के सदस्यों ने माना कि इस लड़की को बंधुआ मज़दूर बनाकर रखा गया था, जो अपराध है। दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। धावा दल में सहायक श्रम आयुक्त रवि शंकर, बाल कल्याण समिति अध्यक्षा पूजा सिन्हा, जिला समन्वयक नीति आयोग के अंजलि, जिला बाल सरक्षण इकाई के कामेस्वर प्रसाद, प्रोटेक्शन पदाधिकरी श्यामा प्रसाद, बनवासी विकास आश्रम, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन, चाईल्ड लाईन के सदस्य शामिल थे।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद की महिला इकाई दुर्गा वाहिनी एवं मातृशक्ति के सात दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के आज दिनांक 9 जून, 2023 को संध्या 5 बजे समापन कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।समापन सत्र में संबोधित करते हुए केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा हिंदू समुदाय के सम्मुख अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं, जिसके लिए समाज के हर वर्ग को संगठित रूप में सामना करना होगा। उन्होंने कहा विगत 1000 वर्ष के संघर्ष में हिंदू समाज की व्यवस्था तहस-नहस हो गयी। अक्रांताओं के आक्रमण का निरंतर सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा इस्लाम के क्रूर आक्रमण तथा ईसाइयों की दमनकारी नीति के कारण भारतीय संस्कृति की क्षति हुई है। आज के भारतीय अपने पराक्रम एवं शौर्य को भूल गये हैं कि कभी हम विश्व के परम वैभवशाली देश के नागरिक थे। संपूर्ण विश्व को शिक्षा एवं स्वालंबन का पाठ पढ़ाते थे। हमारे प्रत्येक गांव में गुरुकुल के माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था थी। काल खंड में वामपंथी इतिहासकारों ने हमारे समृद्ध शिक्षा प्रणाली को नकारते हुए मैकाले शिक्षा पद्धति को बढ़ावा दिया, जो इस देश के लिए दुर्भाग्य का कारण बना।उन्होंने कहा धर्मांतरण, लवजिहाद, घुसपैठ जैसे षड्यंत्रकारी नीति के कारण आज झारखंड सहित देश के आंतरिक सुरक्षा का संकट बढ़ता चला जा रहा है। पाकुड़, साहिबगंज के मार्ग से गोवंश की तस्करी की जा रही है, जिसे समाज को आगे आकर रोकना होगा। उन्होंने कहा आज सरकार एवं प्रशासन को जिहादी मानसिकता एवं दमनकारी नीति वाले कट्टरपंथियों को कठोरता के साथ समाप्त करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।उन्होंने कहा कि 1984 में श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को लेकर बजरंग दल एवं दुर्गा वाहिनी का स्थापना की गयी थी। आज सभी युवा भाई-बहनों को स्वयं के साथ परिवार की रक्षा के लिए स्वयं को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा अपने धर्म- संस्कृति की रक्षा करने, समाज के कमजोर पक्ष की सेवा करने व समाज में समरसता भाव स्थापित कर स्वाभिमान पूर्वक जीवनयापन करने से ही भारत परम वैभवशाली बनने की ओर अग्रसर होगा। समापन सत्र में बहनों के द्वारा शानदार शारीरिक प्रदर्शन किया गया। जिसमें न्यूद्ध कला, दंड चालन कला, छुरीका चालन कला सहित कई कौशल का शानदार प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद पांडेय, प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, सामाजिक समरसता प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्रा, मातृशक्ति प्रांत प्रमुख दीपारानी कुंज, दुर्गा वाहिनी प्रांत संयोजिका अनुराधा कश्यप, मार्गदर्शक मंडल प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, बजरंग दल रांची महा नगर संयोजक प्रकाश रंजन, सुनील पांडेय, युगल किशोर प्रसाद, महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, महानगर मंत्री चंद्रदीप दुबे, सहमंत्री विश्वरंजन कुमार, बजरंग दल सहसंयोजक दीपक साहू, पारसनाथ मिश्रा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। योगोत्सव के पांचवें दिवस पर आज बीएसएनएल मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय में स्वामी गोरखनाथ राज्य के बीएसएनएल कर्मी को बिहार योग का टिप्स दिये। स्वामी जी ने बताया कि योगमय जीवन को अपनायें, इसके बिना स्वास्थ्य का प्रबंधन कर पाना बहुत मुश्किल है। सिर्फ शरीर का हिस्ट-पुष्ट होना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी नहीं है।स्वास्थ्य आप की स्थिरता को, आप के व्यवहार को दर्शाता है, आप की विनम्रता, आपकी कर्तव्यनिष्ठा, आप की निर्मलता, आप के विवेक को परिभाषित करता है। जब ये सभी गुण समस्त मानवता के लिए काम आने लग जाये तब इसका मतलब है कि आप योग कर रहे हैं। सिर्फ आसन और प्राणायाम के कर लेने से योग नहीं हो जाता है, ये तो योग के छोटे से अंग हैं। ध्यान, कीर्तन, मन्त्र-जप, विचारों का द्रष्टा बनना, ये सारे अभ्यास से मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। हर आदमी का सबसे बड़ा बाधक है अहंकार। सबसे बड़ी बात है कि व्यक्ति हमेशा अपनी ही बातों को मनवाना चाहते हैं। अपनी बातों को दूसरे पर थोपते रहते हैं, अपने भीतर कभी झांकते ही नहीं हैं, दूसरों की मनोदशा के बारे में किन्चित सोचते नहीं हैं। आप अपने ऑफिस के तनाव को लेकर घर जाते हैं और वहां अपने बच्चों पर, पत्नी पर, परिवार के अन्य सदस्यों पर जाकर बरसते हैं। आप ऑफिस के वारदातों को ऑफिस में ही छोड़ कर जायें। न तो ऑफिस के तनाव को लेकर घर जायें और न घर के तनाव को लेकर ऑफिस आयें।स्वामी गोरखनाथ सरस्वती का स्वागत महाप्रबंधक उमेश प्रसाद साह एवं उनकी धर्मपत्नी सुप्रिया जायसवाल ने किया। योगाचार्य संन्यासी मुक्तरथ और नेचुरोपैथी के रूपम कुमारी का भी बीएसएनएल की तरफ से स्वागत किया गया। मुक्तरथ जी ने स्वामी जी के भारत भ्रमण और बिहार योग विद्यालय की लम्बी योग परंपरा का ब्यौरा दिये तथा स्वामी सत्यानन्द परम्परा का विस्तृत वर्णन बताये।
टीम एबीएन, रांची। स्वामी सत्यानन्द सरस्वती ने ऐसा योग सेतू को स्थापित किये जिस पर सभी धर्म के लोग चल रहे हैं। आज योग सत्र के चौथे दिवस पर सैकड़ों लोगों ने स्वामी गोरखनाथ सरस्वती से बिहार योग पद्धति के कुछ खास-खास अभ्यासों को सीखे।पूरे शरीर के मांसपेशियों और नाड़ियों को मजबूत बनाने हेतू योगासन, गले और थायराईड को दूर करने के योग तथा सम्पूर्ण शरीर को विश्राम देनें तथा मन को तनावमुक्त करने की यौगिक विधि और योगनिद्रा का अभ्यास। स्वामी जी ने कहा 1963 से 1988 तक परम् गुरुदेव स्वामी सत्यानन्द सरस्वती की विदेश योग यात्रा दुनिया को भारत से जोड़ दिया है। परमहंस जी योग का ऐसा सेतू बना दिये हैं जिस पर यूरोप हो या अमेरिका, अरब हो या लंका, सभी द्वीप के लोग उस सेतू पर चल रहे हैं और पूरी दुनिया शान्ति की खोज में भारत की तरफ तेजी से आ रहे हैं। आज का मन बहुत अशान्त और बेकाबू होते जा रहा है, किसी को चैन नहीं है, हर तरफ आपाधापी, निराशा की छाया, तनाव और बेचैनी ही नजर आ रही है। पेशेंस न माता-पिता को है न ही बच्चों में है। ऐसे हालात से हम कैसे लड़ पायेंगे? इस बेकाबू मन को कैसे बस में कर पायेंगे, महामारी के तरह बढ़ते डाइबिटीज, हृदय रोग, और डिप्रेशन को कैसे रोक पायेंगे ये बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न है हमारे सामने। सत्यानंद योग पद्धति जिसे बिहार योग पद्धति भी कहते हैं यह दुनिया में बहुत लोकप्रिय है। क्योंकि इस पद्धति से लोगों को विश्राम मिला है, निराशा को दूर किया है। लोगों को संतुलित रहने और अपने पैरों पर खड़ा करने का काम किया है। मुंगेर स्थित इस केन्द्र में दुनिया के अनेक राष्ट्र से लोग आते रहते हैं। रांची में इस संस्था से जुड़े कई योग विशेषज्ञ हैं जिससे आप जुड़कर बिहार योग विद्यालय से जुड़ सकते हैं। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन संन्यासी मुक्तरथ, आदित्य कुमार और रूपम कर रही हैं।साथ ही स्वामी जी के अनेकों शिष्य इस योगोत्सव के संदेश को दूर-दूर तक फैलाने में लगे हुए हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। आज अपराह्न 3 बजे स्वामी गोरखनाथ सरस्वती कांके रोड स्थित सत्यानन्द योग मिशन केन्द्र, सरोवर एन्क्लेव में योगोत्सव कार्यक्रम में ध्यान का अभ्यास कराये और सत्संग दिये। उन्होंने कहा ध्यान से पहले थोड़ा योगाभ्यास, प्राणायाम के कर लेने से मन को व्यवस्थित करना बहुत आसान हो जाता है।यह वर्ष परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती के जन्म का शताब्दी वर्ष है। इस उपलक्ष्य में स्वामी सत्यानन्द सरस्वती के योग शिक्षा और उनके विचार का पूरे विश्व में जगह-जगह आयोजन हो रहा है। 1963 में स्थापित बिहार योग विद्यालय मुंगेर आज दुनिया के सत्तर राष्ट्र के हर शहर में, उद्योगों में, शिक्षा जगत में, मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में तथा हर क्षेत्र में फैल गया है। मुंगेर की योग कला को विश्व का सबसे उत्तमशैली माना गया है।यह पूर्णतः वैज्ञानिक पद्धति है।सत्यानन्द योग केन्द्र के प्रमुख संन्यासी मुक्तरथ एवं यहां के प्रबंधक शान्ति देवी ने स्वामी गोरखनाथ जी का स्वागत किये। आचार्य मुक्तरथ ने सत्यानन्द योग परम्परा का संक्षिप्त वर्णन करते हुए कहा कि यहां का योग बहुत प्रायोगिक तथा साधनात्मक है।
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