टीम एबीएन, गुमला/ रांची। झारखंड में विकास भारती की कार्यकारिणी एवं वार्षिक आम सभा की बैठक 24 एवं 25 जून को अध्यक्ष डॉ अजय कुमार सिंह और संस्था प्रमुख सह महासचिव पद्मश्री अशोक भगत की उपस्थिति में बिशुनपुर, गुमला मुख्यालय में हुई।बैठक के बाद संस्था के अध्यक्ष डाॅ अजय कुमार ने बताया कि झारखंड के 27 हजार गांवों में संस्था की उपस्थिति है। उन्होंने कहा कि आप सभी की शुभकामना से हम स्वास्थ्य, कौशल विकास, कृषि, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में पिछले 40 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान के आर्थिक लेखा एवं कार्यों का सही दस्तावेज संकलन एवं परियोजना की त्रुटिहीन योजना बनाने के लिए आज विभिन्न प्रकल्पों के प्रमुख और प्रभारियों के साथ बैठक की गयी। इस दो दिवसीय बैठक कार्यशाला और आम सभा में इस संस्था के संस्थापक पद्मश्री अशोक भगत को पुन: विकास भारती का महासचिव एवं डॉ अजय कुमार सिंह को पुन: सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया।दो दिवसीय बैठक में झारखंड के सभी 24 जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में उपाध्यक्ष रंजना चौधरी, अनिल भगत, संयुक्त सचिव महेंद्र भगत, डॉ आर पी सिंह रतन, कोषाध्यक्ष बसंत ओहदार, निखिलेश मैथी, सम्राट जी, कुंती देवी, ज्यादा मंगल उरांव के साथ-साथ 300 प्रतिनिधि शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक के उद्घाटन आज पूर्वाह्न 9 बजे रायपुर, छत्तीसगढ़ के महेश्वरी भवन में पूज्य संत युधिष्ठिर महाराज, पूज्य संत विदेशी लाल, पूज्य संत सीताराम जी महाराज, अचार्य भगवती चंद्र शर्मा, विश्व हिंदू परिषद के पालक अधिकारी भैया जी जोशी, केंद्रीय अध्यक्ष डॉ आर एन सिंह, कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, महामंत्री मिलिंद परांडे, उपाध्यक्ष एवं श्री राम जन्म भूमि के महासचिव चंपत राय, उपाध्यक्ष जिवेशवर मिश्र, हुकुम चंद्र सावला, रमेश चंद्र गुप्ता, रमेश जी मोदी, सुशील सर्राफ, ओमप्रकाश सिंगल, उपाध्यक्ष रमेश चंद्र जैन (जर्मनी) सहित कई अधिकारियों के द्वारा भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम जी एवं भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण कर एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।पूज्य संत युधिष्ठिर जी महाराज ने कहा- सनातन परंपरा की मजबूती से विश्व-बंधुत्व भाव के जागरण का संदेश देती है। अलगाववाद, उग्रवाद, साम्यवाद, आतंकवाद जो हमारे संस्कृतिक स्मिता को तोड़ रही है, इसे दृढ़ता पूर्वक प्रतिकार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा समाज में संतों की अनुपम गरिमा है, संत यदि गांव की ओर जाता है तो समाज में स्वाभिमान जगता है। विश्व हिंदू परिषद के संपर्क अधिकारी भैया जी जोशी ने कहा सदैव अच्छे कार्यों को करने में बाधा आती है, सज्जनों को ही कष्ट होती है, कार्य करने वाले को ही कठिनाई होती है, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा संपर्क, संवाद, स्नेह व समझ से समाज की हर समस्या को समाधान कर सकते हैं। कार्यकर्ता में आंतरिक शुद्धता, वैचारिक प्रतिबद्धता, सांगठनिक समर्पण एवं सक्रियता से व्यक्ति अनुकरणीय बनता है। सभी कार्यकर्ताओं में शारीरिक, मानसिक, वैचारिक, आर्थिक एवं संगठनात्मक अनुशासन आवश्यक है। विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने भारत के कानून आयोग को समान नागरिक संहिता के संदर्भ का स्वागत करते हुए कहा इस विषय पर सभी हितधारकों से विचार आमंत्रित किया है। जल्द ही भारतीय समाज के सभी घटकों के सुझाव प्राप्त कर और विचार कर समान नागरिक संहिता लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा संविधान के अनुच्छेद 44 में सभी सरकारों को भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने के लिए निर्देशित करता है। उन्होंने कहा कि सरला मुद्गल मामले में भारत की सुप्रीम कोर्ट ने जल्द से जल्द यूसीसी लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। न्यायालय ने भी याद दिलाया है कि अनुच्छेद 51ए के तहत यह सभी नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है धार्मिक विविधताओं को पार कर भारत के सभी लोगों के बीच सामंजस्य और आम भाईचारा की भावना को बढ़ावा देना। उल्लेखित है भारत के सभी नागरिक अपराधिक कानून, संपत्ति, अनुबंध और वाणिज्यीक कानूनों सहित आम कानूनों में शासित है। अत: कोई कारण नहीं है कि परिवार के कानूनों को ही अपवाद के रूप में रखा जाए। उन्होंने कहा धार्मिक समुदाय के व्यक्तिगत कानून महिलाओं के गरिमा, समानता और अन्य अधिकारियों की गरिमा से उल्लंघन करते हैं। बहुविवाह, तलाक और उत्तराधिकारी के बारे में उनके प्रावधान आधुनिक समय से 1400 साल पीछे हैं। इस तरह की प्रथायों से संविधान प्रदत्त महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन होता है। बैठक में श्री राम जन्मभूमि शिला पूजन के यजमान कामेश्वर चौपाल, पटना क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार, चेन्नई क्षेत्र संगठन मंत्री आकरपू केशव राजू, क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, झारखंड प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, उत्तर बिहार प्रांत मंत्री राज किशोर सिंह, प्रांत संगठन मंत्री नागेद्र कुमार, दक्षिण बिहार प्रांत मंत्री परशुराम प्रसाद, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन प्रसाद सहित देश के 336 प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग ले रहे हैं। उक्त जानकारी विहिप, झारखंड के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
27 को केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थी कोडरमा से गया तक करेंगे भ्रमण टीम एबीएन, कोडरमा/झुमरी तिलैया। भारतीय रेलवे के महत्वकांक्षी योजना वंदे भारत ट्रेन रांची से पटना के बीच 27 जून के बीच चलाने में जुटी है। वंदे भारत को आधुनिक भारत के ट्रेन की संज्ञा दी गयी है। मालूम हो कि पहली वंदे भारत 2019 में दिल्ली से वाराणसी ग्रेड कोड सेक्सन के अंतर्गत परिचालन हुआ। तब से लेकर अब तक इस ट्रेन में कई परिवर्तन आये। इधर, 27 जून को उक्त ट्रेन रांची से पटना के बीच वाया हजारीबाग टाउन कोडरमा गया के रास्ते चलना शुरू होगी। इसके लिए 2 बार उक्त ट्रेन का सफल ट्रायल भी हो चुका है। इधर, देश के प्रधानमंत्री भोपाल स्थित कमलापति स्टेशन से एक साथ 5 वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायेंगे और इसके साथ ही उक्त ट्रेन बिहार व झारखंड की राजधानी से सीधे जुड़ जायेगी और लोगों को तीसरा विकल्प भी मिल जायेगा। वर्तमान में 18 वंदे भारत एक्स्प्रेस का परिचालन होगा और इधर रेलवे उक्त ट्रेन को चलाने के लिए रांची में झारखंड के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा कोडरमा में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी बरकट्ठा विधायक अमित यादव बरही विधायक अकेला यादव, कोडरमा विधायक डॉ नीरा यादव हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा विधायक मनीष जयसवाल उपस्थित होंगे। कोडरमा रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत पहुंचने पर फुलमाला से उक्त ट्रेन का स्वागत किया जायेगा। मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। मिली जानकारी के अनुसार रेलवे उक्त ट्रेन के लिए बुकिंग की सुविधा शीर्घ ही करेगी और 2024 तक देश के विभिन्न राज्यों में वंदे भारत ट्रेन 75 ट्रेने 2024 तक शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इधर, रांची से पटना तक चलने वाली उक्त ट्रेन को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार रेलवे 27 जून को जनप्रतिनिधियों के अलावा रेलवे के अधिकारी के अलावा रांची के केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थी बरकाकाना तक तथा हजारीबाग के विद्यार्थी बरकाकाना से हजारीबाग तक कोडरमा स्टेशन से केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थी गया तक नि:शुल्क सफर कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित विद्यालयों को पत्र भेजा जा रहा है। विद्यार्थी इस दिन जंगल पहाड़, नदियां, झरना, डैम और गुफाओं का भी लुत्फ उठा सकेंगे। बहरहाल, कोडरमा में उद्घाटन के मौके पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। वहीं दूसरी ओर ट्रेन के परिचालन को लेकर समय का निर्धारण अभी तक नहीं हुआ है तथा मूल्य तालिका भी जारी नहीं हुई है। संभावना है कि एक दो दिनों में जारी हो जायेगा। क्या है वंदे भारत ट्रेन की खासियत वंदे भारत ट्रेन में इंटेलीजेंट ब्रेकिंग सिस्टम दिया हुआ है, जिसके कारण ये ट्रेन तेजी से गति पकड़ सकती है और साथ ही इसे तेजी से रोका भी जा सकता है। इससे ट्रेन की यात्रा के समय अन्य ट्रेन के मुकाबले 25 से 45 प्रतिशत से कम हो जाता है। वंदे भारत ट्रेन में आटोमेटिक डोर दिये गये हैं और दरवाजे बंद होने के बाद ही ये ट्रेन आगे बढ़ती है। इस ट्रेन में जीपीएस की सुविधा है, जिसकी मदद से कोई यात्री अपनी यात्रा की पूरी जानकारी ले सकता है। इसमें आनबोर्डिंग इंटरनेट की सुविधा भी दी गयी है।
एबीएन सोशल डेस्क। ये एक बौद्ध मंदिर है, जिसका निर्माण बुद्धिस्ट नन काकुसान शीडो-नी ने वर्ष 1285 में बनवाया था। गौरतलब है कि 1185 से लेकर 1333 के बीच जापान में महिलाओं की स्थिति सामान्य नहीं थी और उन्हें किसी तरह के अधिकार नहीं दिये गये थे। जापान में उस दौर में महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाये गये थे।आमतौर पर लोग मंदिर इसलिए जाते हैं कि उनके जीवन में खुशियां रहे। खासतौर से शादीशुदा जोड़े अपने जीवनसाथी का साथ पाने और आशीर्वाद लेने मंदिर जाते हैं। मगर अगर किसी कारण से महिला का तलाक हो जाये तो ऐसी महिलाओं के लिए समाज में रहना काफी मुश्किल हो जाता है।मगर ऐसा एक मंदिर है जहां तलाकशुदा महिलाओं को आश्रय दिया जाता है। ये मंदिर जापान में है जिसका निर्माण आज नहीं बल्कि 600 वर्ष पहले हुआ था। जापान और दुनिया भर में ये मंदिर तलाक वाले मंदिर के नाम से काफी मशहूर है। इस मंदिर को डिवोर्स टेंपल के नाम से ही जाना जाता है। माना जाता है कि तलाकशुदा महिलाओं के लिए ये मंदिर दूसरा घर हुआ करता था।जानकारी के मुताबिक ये मंदिर जापान के कनागवा प्रांत के कामाकुर शहर के मतसुगाओका तोकेई जी मंदिर है। इसे आम भाषा में डिवोर्स टेंपल कहा जाता है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि जिस समय महिलाओं के पास किसी तरह का अधिकार भी नहीं होता था, तब इस मंदिर में महिलाएं आश्रय लिया करती थी। यहां वो महिलाएं आती थी जो घर में प्रताड़ित होती थी। इस मंदिर में आश्रय लेकर ही उनका जीवन गुजरता था।बता दें कि ये एक बौद्ध मंदिर है, जिसका निर्माण बुद्धिस्ट नन काकुसान शीडो-नी ने वर्ष 1285 में बनवाया था। गौरतलब है कि 1185 से लेकर 1333 के बीच जापान में महिलाओं की स्थिति सामान्य नहीं थी और उन्हें किसी तरह के अधिकार नहीं दिये गये थे। जापान में उस दौर में महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाये गये थे। वहीं अगर किसी महिला के साथ घरेलू हिंसा होती थी या किसी महिला को शादी में नहीं रहना होता था तो वो इस मंदिर में आश्रय लेती थी।माना जाता है कि मंदिर में महिलाओं के रहने की शुरुआत के बाद मंदिर की तरफ से तलाक लिए जाने के सर्टिफिकेट भी जारी होने लगे है। इन सर्टिफिकेट को दिए जाने का मकसद है कि महिलाएं अपना जीवन खुशहाली के साथ जी सकें। मंदिर एक तरह से खराब शादी से महिलाओं को बाहर निकालकर उन्हें सशक्त करने का काम करता है।
बचपन बचाओ आंदोलन व एसएसबी ने नाबालिग को अपहर्ताओं के चंगुल से बचायाएबीएन सेंट्रल डेस्क। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के सहयोग से उत्तर प्रदेश के उन्नाव से जबरन विवाह के लिए अगवा करके ले जायी जा रही एक नाबालिग को बिहार के सीतामढ़ी जिले के नेपाल सीमा पर बेरिगिनिया स्थित सशस्त्र सीमा (एसएसबी) की सीमा चौकी पर मुक्त कराया गया। नेपाल सीमा पर स्थित एसएसबी 20 बटालियन ने दो आरोपियों को हिरासत में लेकर उन्हें बेरिगिनिया थाने को सुपुर्द कर दिया। हिरासत में लिया गया एक आरोपी अगवा की गयी नाबालिग का जीजा है। जांच में पता चला कि नाबालिग के परिजनों ने 19 जून को उन्नाव के मौरावां थाने में नाबालिग के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। नाबालिग की बड़ी बहन की शादी आरोपी से हुई थी। परंतु वह उसकी छोटी बहन से विवाह करना चाहता था और इसी इरादे से उसने एक अन्य अभियुक्त के साथ मिलकर नाबालिग का अपहरण कर लिया और उसे नेपाल ले जा रहा था। एसएसबी 20 बटालियन ने उन्हें चौकी पर रोक कर पूछताछ की और शक होने पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के कार्यकर्ताओं को बुलाया गया। इस दौरान बीबीए और प्रयास के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने नाबालिग की काउंसलिंग की और उसके परिजनों से फोन पर बातचीत की। इसके बाद दोनों आरोपियों को बेरिगिनिया पुलिस को सौंप दिया गया।नाबालिग ने बताया कि उसका जीजा उसे अपने पैसों और गाड़ी का हवाला देते हुए उससे शादी करने को कहता था। इससे पहले वह उसे जम्मू ले गया था जहां उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाये। घटना के दिन उसके जीजा ने उसे कपड़े लेने के बहाने बुलाया और कार में बैठा कर अगवा कर लिया। एफआईआर के मुताबिक नाबालिग की बड़ी बहन ने बताया कि आरोपी अपने पैसे की धौंस दिखा कर उसकी छोटी बहन से जबरन विवाह करना चाहता था। इस मामले में उसने 9 मई को उसके खिलाफ मौरावां थाने में शिकायत दर्ज करायी थी। बीबीए के निदेशक मनीष शर्मा ने नाबालिग को बचाने में दिखाई इस तत्परता के लिए एसएसबी 20 बटालियन की सराहना करते हुए कहा- नाबालिगों को अगवा कर उनके साथ जबरन विवाह जैसे अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस, प्रशासन और सशस्त्र बलों के इस तरह के समन्वित प्रयासों से निश्चित रूप से ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। बाल विवाह के खिलाफ कानूनों पर सख्ती से अमल करने की जरूरत है। इस संबंध में अधिक जानकारी और सहयोग के लिए संगठन के जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
2050 तक दुनियाभर में 1.3 अरब लोग होंगे डायबिटीज के शिकार...इन देशों में होंगे सबसे ज्यादा मरीज एबीएन सोशल डेस्क। वर्तमान में दुनियाभर में 50 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और अगले 30 साल में हर देश में मधुमेह पीड़ितों की संख्या में इजाफा होने का अंदेशा है जो दोगुनी होकर 1.3 अरब तक पहुंच सकती है। द लैंसेट में प्रकाशित एक नये विश्लेषण में यह दावा किया गया है। मुख्य लेखक एवं यूनिवर्सिटी आफ वाशिंगटन के स्कूल आॅफ मेडिसिन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैलुएशन में मुख्य शोध विज्ञानी लियान ओंग ने कहा, जिस गति से मधुमेह के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है वह न केवल चिंताजनक है बल्कि दुनिया में प्रत्येक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए चुनौतीपूर्ण भी है। शोधकर्ता ने कहा कि लगभग सभी वैश्विक मामलों में 96 प्रतिशत मामले टाइप 2 मधुमेह (टी2डी) के हैं। ओंग ने ग्लोबल बर्डेन आफ डिजीज (जीबीडी) 2021 अध्ययन का इस्तेमाल किया और 1990 एवं 2021 के बीच 204 देशों में उम्र एवं लिंग के आधार पर मधुमेह के प्रसार, रोगियों की संख्या और इससे मृत्यु का अध्ययन किया तथा 2050 तक मधुमेह की स्थिति का आकलन किया। विश्लेषण के अनुसार, हालिया और सबसे अधिक व्यापक गणनाएं दिखाती हैं कि रोग की मौजूदा वैश्विक प्रसार दर 6.1 प्रतिशत है जो इसे मृत्यु एवं निशक्तता के 10 प्रमुख कारणों में से एक बनाती है। अध्ययन से यह पता चला है कि क्षेत्रीय स्तर पर यह दर उत्तर अमेरिका और पश्चिम एशिया में सबसे अधिक 9.3 प्रतिशत है जो 2050 तक बढ़कर 16.8 होने की संभावना है और लातिन अमेरिका एवं कैरेबियाई देशों में यह दर 11.3 प्रतिशत है। अनुसंधानकतार्ओं ने यह भी पाया कि मधुमेह के लक्षण विशेष रूप से 65 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में पाए गए हैं और उक्त जनसांख्यिकीय के लिए 20 प्रतिशत से अधिक की वैश्विक प्रसार दर दर्ज की गयी। क्षेत्रीय आधार पर उत्तर अफ्रीका और पश्चिम एशिया में इस आयु वर्ग में सर्वाधिक दर 39.4 प्रतिशत थी, जबकि मध्य यूरोप, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में यह सबसे कम 19.8 प्रतिशत थी।
परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के संकल्प का मूर्त रूप है अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : स्वामी मुक्तरथ एबीएन सोशल डेस्क। नवम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर स्वामी मुक्तरथ अपने केन्द्र में योग अनुयायियों को बिहार योग पद्धति के अनुसार योगाभ्यास, ध्यान और कीर्तन को कराये। स्वामी मुक्तरथ ने कहा जिस तरह से योग के प्रति लोगों में उत्साह को देखा जा रहा है यह वर्तमान समय की मांग है। आज भारत के हर न्याय परिसर में योग को बढ़ावा मिल रहा है।पुरा विश्व आज एक प्लेटफार्म पर आ गया है और वह है भारत का योग। यह भगवान शिव की विद्या महामुनि मत्स्येंद्रनाथ और महर्षि पतञ्जलि की योग साधना तथा आधुनिक योग के जनक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती का योगअनुसंधान,उनकी तपस्या और उनके संकल्प का परिणाम है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उन्हीं के संकल्पों का मूर्त रूप है। केंद्र के संचालक शांति रॉय, अंजना जी, साकेत जी, योगाचार्य मनीष कुमार, पियुष कुमार और सभी योग प्रशिक्षुओं ने आचार्य मुक्तरथ का स्वागत किया। रांची में यह केंद्र पूर्णरूप से बिहार योग विद्यालय मुंगेर के पैटर्न पर योग की शिक्षा देता है। यहां राजयोग, हठयोग, भक्तियोग, कर्मयोग तथा रोगियों के लिए योगा हेल्थ मैनेजमेंट, ध्यान सत्र, बच्चों के लिए योग एवं भगवतगीता, उपनिषद,रामायण जैसे शास्त्रों की भी शिक्षा दी जाती है। डॉ श्रीमती रेणु तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मुंगेर विश्व योग पीठ एवं स्वामी मुक्तरथ के प्रति आभार जताया।
अभी से हर दिन चलें 4-5 किमी, अमरनाथ यात्रा के लिए जारी हुई एडवायजरीएबीएन सोशल डेस्क। हिंदू धर्म में अमरनाथ यात्रा का काफी महत्व हैं। कहा जाता है कि जो कोई यहां बर्फ के शिवलिंग के रूप में विराजमान भगवान शिव के दर्शन कर लेता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शरू हो रही है। ऐसे में अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने हेल्थ एडवायजरी जारी की है ताकि श्रद्धालु पहले से ही पूरी तरह तैयार रहे और यात्रा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो।ज्यादा ऊंचाई वाली जगह पर स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए क्या-क्या करना जरूरी है, एडवायजरी में इससे जुड़ी सारी जानकारी दी गयी है। इसमें बताया गया है कि श्रद्धालुओं को यात्रा पर आने से पहले शारीरिक तौर पर फिट रहना जरूरी है। इसके लिए तुरंत तैयारी करना शुरू कर दें। यानी यात्रा से एक महीने पहले से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक शुरू करें। इस दौरान हर रोज 4-5 किलोमीटर पैदल चलें।यात्रा पर जाने से पहले एक्सरसाइजइसके अलावा शरीर में ऑक्सीजन की सही मात्रा के लिए एक्सरसाइज काफी जरूरी है। यात्रा से पहले गहरी सांस वाली एक्सरसाइज और प्रणायाम करें। अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य की समस्या है तो यात्रा पर जाने से पहले डॉक्टर से चेकअप कराना जरूरी है। यात्रा के दौरान चढ़ाई करते वक्त धीरे-धीरे चलें और खड़ी ढलानों पर आराम करते हुए आगे बढे़ं। बाबा बर्फानी के नाम से भी मशहूर अमरनाथ धाम की यात्रा का श्रद्धालू हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस साल एक जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा का समापन 31 अगस्त को होगा।मान्यता है कि भगवान शिव ने बाबा बर्फानी की इस गुफा में ही माता पार्वती को उनके अमृत्व का रहस्य बताया था। अमरनाथ यात्रा को सबसे मुश्किल यात्राओं में से एक माना जाता है। जम्मू-कश्मीर में 14 किलोमीटर तक की इस यात्रा के दौरान, ऊंचाई, खड़ी ऊंचाई और पतले रास्तों से होकर जाना होता है। यही वजह है कि इस यात्रा से पहले श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ एडवायजरी जारी की गयी है।
टीम एबीएन, रांची। विश्व सिकल सेल दिवस मनाते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान में सिकल सेल एनीमिया रोग पर एक संवेदीकरण कार्यशाला की अध्यक्षता की। सिकल सेल रोग (एससीडी), एक आनुवंशिक स्थिति, भारत में जनजातीय आबादी के बीच व्यापक है, जहां यह अनुमान लगाया गया है कि एसटी के बीच 86 जन्मों में से लगभग 1 में एससीडी होता है। रोग लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन (शरीर में आक्सीजन ले जाने के लिए जिम्मेदार) को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप रुग्णता और मृत्यु दर अलग-अलग तरीकों से हो सकती है। इसलिए, एससीडी का शीघ्र पता लगाने, प्रबंधन और उपचार प्रभावित व्यक्तियों को एक लंबा और पूरा जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्र की सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिए रोग का उन्मूलन अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुरुआती पहचान और नए उपचार सहित सिकल सेल स्थिति के प्रबंधन में हाल के विकास पर चर्चा करने के लिए, कार्यशाला ने पूरे भारत से इस स्थिति पर विशेषज्ञों के एक समूह को एक साथ लाया गया। इस दिन के महत्व को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने अपील करते हुए कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन के तहत, जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा सिकल सेल उन्मूलन मिशन मोड में लिया गया है। हालांकि, हम सभी को व्यक्तिगत स्तर पर काम करके लोगों को बीमारी के बारे में शिक्षित करने के लिए विशेष रूप से जमीनी स्तर पर इस मुद्दे को हल करने के लिए एक सहयोगी प्रयास करने की आवश्यकता है। मुंडा ने आगे कहा- मैं सभी चिकित्सा विशेषज्ञों, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य संगठनों, स्वास्थ्य विभागों से अपील करता हूं कि वे आदिवासियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रोत्साहन दें और यह सुनिश्चित करें कि इस बीमारी से प्रभावित लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाए ताकि जनजातीय आबादी के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव हो। इसके अलावा, उन्होंने राज्य सरकारों से उचित बुनियादी ढांचा और सुविधाएं सुनिश्चित करके इस लक्ष्य में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा- हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि व्यक्ति विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे इस बीमारी से मुक्त हों और यह आने वाली पीढ़ी को प्रभावित न करे।
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