टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के बरियातू हाउसिंग कॉलोनी स्थित राम-जानकी मंदिर में आयोजित शिवपुराण की पांचवें दिन की कथा में पं रामदेव पाण्डेय ने आज सती शिव प्रसंग में कहा कि द्वंद्व को ही हम शक या भ्रम भी कहते हैं। इस द्वंद्व में सती, सीता, ब्रह्मा, यशोदा और अर्जुन भी पड़े। यह द्वंद्व अपनों से ही होता है। कभी-कभी यह द्वंद पारिवारिक सुख शांति को भी छिन्न-भिन्न कर देता है। इस द्वंद्व को शीघ्र ही समाप्त कर देना चाहिए। सती को द्वंद्व है राम परम ब्रह्म हैं या नहीं। तो ब्रह्म दांपत्य जीवन में रोता है तो फिर ब्रह्म क्यों रोता है? इस द्वंद्व का समाधान शिव करते हैं। पर शिव पर विश्वास नहीं कर राम की परीक्षा लेने जाती हैं। परिणाम शिव से हजारों साल दूर रहना पड़ा; क्योंकि शिव सती के इस कृत्य से महासमाधि में चले गये और सती को स्वयं ही पिता के यज्ञ में जलकर मरना पड़ता है। अब इस द्वंद्व का लाभ दुष्ट पड़ोसी उठाता है। तारकासुर ने फायदा उठाया कि अब शिव काम गृहस्थी से दूर हैं। सती को माता का दर्जा दे चुके हैं, तो तारकासुर ने ब्रह्मा से आशीर्वाद लिया कि शिव के जैविक पुत्र से ही मरें या अमर रहें। इस द्वंद्व का परिणाम हुआ- दक्ष के यज्ञ का विनाश। क्योंकि दक्ष भी द्वंद में हैं। शिव अकाल पुरुष, महाकाल, त्रिलोकी नहीं श्मशानी अघोरी भी हैं। इन्हें यज्ञ में क्यों आमंत्रण करें? यशोदा को द्वंद है यह कृष्ण देवकी बसुदेव का उद्धार कंस को मारकर पायेगा कि नहीं? अर्जुन को द्वंद है यह कृष्ण मेरा फुफेरा भाई बहनोई और रथ चालक है। यह कैसे भगवान विश्वात्मा हो सकता है? सीता को द्वंद्व है सोने का हिरण, सोने की लंका की पर हनुमान जी ने पृथ्वी के आकार का अपना सोने का शरीर बना लिया और सीता का भ्रम दूर किया। यह काम तो राम का सेवक कर सकता है। माता-पिता तो विश्वात्मा हैं। इसलिए घर, कार्यालय, समाज और राष्ट्र में द्वंद्व है, तो शीघ्र दूर कीजिये।
टीम एबीएन, रांची। विचार क्रांति अभियान के अंतर्गत नवयुग का नवसृजन से संबंधित युग साहित्य पुस्तक का स्वाध्याय पाठ और उस पर संवाद में पूज्यवर श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की लिखी सैकड़ों में अनेक पुस्तकों के स्वाध्याय पाठ पर विचार विमर्श हुए। उसमें अलग-अलग सेट्स तैयार करने, उनके पठन-पाठन का समय आवंटन और संवाद में समय निर्धारित कर शिष्य साधक गण सोमवार शाम की ब्रह्म संध्या वंदन उपरांत आनलाइन जुड़े। संवाद-संदेश में बताया गया कि इस संबंध में शांतिकुञ्ज के तत्वावधान में राष्ट्र स्तरीय आनलाइन अच्छी संख्या में लगातार ब्रह्म मुहूर्त भोर से ही साधक-शिष्य जुड़ रहे हैं और शाम तक समयदान कर शिष्य साधक अपनी सुविधानुसार समय निर्धारित कर स्वाध्याय पाठ में शामिल हो रहे हैं। आगे चर्चा रही कि विषय अनुरूप युग साहित्य का स्वाध्याय पाठ, उसका आत्मसात एवं प्रचार प्रसार योजना तैयारी करनी है। आनलाइन राष्ट्रीय संयोजक ने बताया कि परम पूज्य गुरुवरजी और परम वंदनीय माताजी के आशीर्वाद से हम सबको विचार क्रांति अभियान से जुड़ कर पुस्तकों को आत्मसात कर के उनको जन जन एवं घर घर तक पहुंचाने का अति स्वर्णिम अवसर मिला है।इस विषय पर चर्चाओं में करीब 50 साधक-शिष्यों ने भाग लेकर अपने संवाद में प्रश्नोत्तरी सहित विचार व्यक्त किये। यह गोष्ठी क्रम अभी जारी रहेगा। शुभारंभ गुरु-ईश ध्यान नमन वंदन और समापन शान्ति पाठ से हुआ।
अमरनाथ यात्रा को लेकर इस साल टूटेगा बड़ा रिकॉर्ड...6.35 लाख के पार पहुंच सकती है श्रद्धालुओं की संख्याएबीएन सेंट्रल डेस्क। अमरनाथ यात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं ने इस बार भारी जोश दिखाया है। इस बार रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालु बाबा बफार्नी के दर्शनों को पहुंच रहे हैं। सोमवार को 37वें दिन अमरनाथ यात्रा के लिए 2,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने यात्रा की, जबकि 534 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था सोमवार को जम्मू से कश्मीर के लिए रवाना हुआ।अधिकारियों ने कहा कि 2,585 यात्रियों ने रविवार को पवित्र गुफा के अंदर दर्शन किए, जबकि 534 यात्रियों का एक और जत्था सोमवार को सुरक्षा काफिले में भगवती नगर यात्री निवास से घाटी के लिए रवाना हुआ। इन 534 तीर्थयात्रियों में से 451 पुरुष, 67 महिलाएं, एक बच्चा, 14 साधु और एक साध्वी हैं। अधिकारियों ने कहा- इनमें से 354 यात्री पहलगाम आधार शिविर जा रहे हैं जबकि 180 बालटाल आधार शिविर जा रहे हैं।श्रद्धालुओं की संख्या 6 लाख पार जाने की संभावनाइस वर्ष की 62 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई को शुरू हुई और 31 अगस्त को रक्षा बंधन त्योहार के साथ श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होगी। हालांकि अभी यात्रा के लिए पंजीकरण जारी है और श्रद्धालु दर्शनों के आ रहे हैं। वहीं अब तक करीब 4.20 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन कर लिये हैं। संभावना जतायी जा रही है कि 30 अगस्त तक 6.35 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं। यह रिकॉर्ड संख्या होगी। इस बार मौसम ने भी भक्तों का पूरा-पूरा साथ दिया और ज्यादा समय तक यात्रा स्थिगत नहीं करनी पड़ी। बता दें कि इससे पहले 2011 में 6.35 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बफार्नी के दर्शन किए थे। वहीं दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। सावन उत्सव सह हरियाली तीज पर्व को लेकर प्रेरणा शाखा ने द सौरभ रेस्टोरेंट में सावन मिलन कार्यक्रम किया। मौके पर प्रेरणा शाखा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एक से बढ़कर एक सतरंगी छटा बिखेरी। मौके पर महिलाएं हरी और पीली साड़ियों में कार्यक्रम में चार चांद लगाती नजर आ रही थी। वहीं सेल्फी का दौर भी खूब चला। कार्यक्रम में सास- बहू, ननद-भाभी, जेठानी- देवरानी ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना के साथ शुरू हुई, जिसे प्रियंका अग्रवाल ने प्रस्तुत किया। वहीं उषा शर्मा ने रंगीलो सावन संजीलो सावन आयो आयो आयो... तीज त्योहार..., नेहा बजाज ने मिश्री से मीठी बाता थारी..., नेहा जैन ने गज भर पानी ले चाली..., खुशबू केडिया, आशा बजाज, प्रगति चौधरी, निशा संघई अनु संघई ने ग्रुप डांस प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को खूब झूमाया।मौके पर शाखा अध्यक्ष श्रेया केडिया ने कहा कि सावन महीना सबसे पवित्र माह होता है और इस माह में सभी भक्त शिव भक्ति और शिव आराधना में लीन रहते हैं। वर्षा ऋतु होने के कारण पृथ्वी पर हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है। सचिव सारिका लड्ढा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से जहां राजस्थानी और कला संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम में इकट्ठा होकर मौज मस्ती का लुफ्त उठाते हैं। वही अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवाते हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन कार्यक्रम की परियोजना निदेशक प्रगति चौधरी एवं प्रियंका अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में विभिन्न तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी। कार्यक्रम के समापन के पूर्व सदस्यों के जन्मदिन एवं सावन मिलन को लेकर केक भी काटा गया। मौके पर उपाध्यक्ष नेहा हिसारिया, पूर्व अध्यक्ष प्रीति केडिया, मिनी हिसारिया, दीपा गुप्ता, निशा केडिया, पूनम सहल, ज्योति अग्रवाल, रश्मि केडिया, बबीता केडिया, श्वेता गुटगुटिया, प्रति गुटगुटिया, निशा संघई,आशा बजाज, तनवी चौधरी, रिचा खाटू वाला, नीतू बगड़िया, रश्मि शर्मा, स्नेहा चौधरी, ममता बंसल, पिंकी मोदी, पिंकी खेतान, अनिता चौधरी, सुमन सर्राफ, पूनम तिबड़ेवाल, कविता चौधरी आदि उपस्थित थीं।इस माह कई कार्यक्रम आयोजित करने का लिया गया निर्णय प्रेरणा शाखा का मुख्य उद्देश्य समाज सेवा है, और समाज सेवा के तहत समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना ही मुख्य उद्देश्य है। इसी उद्देश्य को लेकर इस अगस्त माह में कई कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। शाखा की अध्यक्ष श्रेया केडिया, सचिव सारिका लड्ढा ने बताया कि सभी सदस्यों के सहयोग एवं परियोजना निदेशक एवं शुभचिंतकों के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाया जायेगा। इसमें 8 अगस्त को वृद्धा आश्रम में भोजन कराया जायेगा, 10 अगस्त को गौहार आहार कार्यक्रम, 14 अगस्त को गांधी स्कूल में सेनेटरी वेंडिंग मशीन उपलब्ध कराया जायेगा। 15 अगस्त को झंडोतोलन एवं विविध कार्यक्रमों का आयोजन और 27 को साइक्लोट्रॉन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। शिव प्रकृति पुरुष हैं। अष्ट भैरव हैं। अष्ट मंगल हैं। शिव अष्टमूर्ति हैं। शिव की प्रकृति आठ रूपों में बंटी है : पृथ्वी, जल, आग, हवा, आकाश, मन, बुद्धि और अंहकार है। इंद्रियां, मन और बुद्धि भौतिक प्रकृति से है। यही आठ वसुधा के समान और सम्मिलित रूप ब्रह्मांड में हैं और जो ब्रह्मांड में हैं। वह इस मानव शरीर में है, इसलिए मानव शरीर और शिव लिंग को भी पिंड कहा जाता है। मानव शरीर की रचना में आठ प्रकृति है। इसमें पांच उंगलियां और ज्ञान इंद्रियां पांच देवता के प्रतिनिधि हैं। इस प्रकृति के जीव रूप में कामदेव के पांच बाण है : रूप, रस, गंध, स्पर्श और आकाश। जो देवता, गन्धर्व, मनुष्य और पशु-पक्षी सभी जीवों में है।शिव काम कैलाश को दबाकर बैठे हैं, तो बसहा बैल धर्म को गतिमान रूप में सवारी बनाकर रखे हैं। काम कैलाश पर शिव के अलावा कोई चढ़ भी नहीं सकता है, जहां आज भी ओमकार स्वयं प्रतिध्वनित होती है। जबकि पास ही एवरेस्ट उसे हजार मीटर बड़ी चोटी है। उस पर सैकड़ों पर्वतारोही ध्वज फहराये। शिव ही अमृत और अकाल मृत्यु के कारण हैं।शिव कामारि होकर भी कुशल गृहस्थ हैं, जो इस पंचबाण को जीत लिया वह कामारि हो गया। वह सत्यम शिवम सुंदरम को प्राप्त कर लिया। गीता में कृष्ण ने भी कहा- मैं देवताओं में शंकर हूं। शिव के पूजन से कृष्ण सहित ब्रह्मांड के सभी देवताओं की पूजा हो जाती है। रूद्र अष्टाध्यायी के वैदिक मंत्र में गणेश, विष्णु लक्ष्मी, इंद्र, सूर्य, रूद्र, सोम, महामृत्युंजय देव, अग्नि, शिव सहित सभी वैदिक देवता की पूजा केवल रुद्राभिषेक करने से प्राप्त होती है। यह शिव अपने को त्रिदेवों में विभक्त करता है। ब्रह्मा, विष्णु महेश होकर ब्रह्म कहलाता है। यही सत, रज, तम है। यही पिता, कब और वात है। यही दर्शन शास्त्र में इड, इगो और सुपर इगो है। इसलिए दुनिया के जो प्रकृति पूजा है वे शैव है। सनातनी है। हर व्यक्ति को साल में एक बार शिव का रूद्राभिषेक जरूर करना चाहिए। यही काल है और स्थिति है, जो अमर है, जो अमर होगा। वहीं देवता आपको भी अमर करेगा। शिव ही पूजनीय और वंदनीय हैं। उक्त बातें बरियातू हाउसिंग कॉलोनी स्थित राम-जानकी मंदिर में आयोजित शिवपुराण की कथा में पंडित रामदेव पाण्डेय ने आज कही।
संतोष पाण्डेय (सोनू)एबीएन सोशल डेस्क। अपने जीवन में हर व्यक्ति को यथेष्ट मेहनत करनी चाहिए। बिना मेहनत फल की इच्छा कभी नहीं करनी चाहिए। आपके जीवन में यदि बिना मेहनत किये लाभ हो, तो समझ लीजिए कि विपत्ति दरवाजे पर आ खड़ी है। आइये इसे सरल भाषा मे अमझते हैं :- एक बार एक नदी में एक हाथी का मृत शरीर बहा जा रहा था। जब एक कौए ने यह देखा, तो बेहद प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया औऱ फ़िर नदी का भरपेट जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, अहा ! यह तो अत्यंत सुंदर यान है, यहां भोजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छोड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूं? कौआ नदी के साथ बहने वाले हाथी के उस मृत शरीर के ऊपर कई दिनों तक रमता रहा।भूख लगने पर वह मृत शरीर से मांस नोचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता, अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनोहरी दृश्य-इन्हें देख-देखकर वह विभोर होता रहा। नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की तो बड़ी दुर्गति हो गई। चार दिन की मौज-मस्ती ने कौवे को ऐसी जगह ला पटका था, जहां उसके लिए न भोजन था, न पेयजल और न ही कोई आश्रय। सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि थी।कौआ थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक तो चारों दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानों से झूठा रौब फैलाता रहा, किंतु महासागर का ओर-छोर उसे कहीं नजर नहीं आया। आखिरकार थककर, दुख से कातर होकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहरों में गिर गया औऱ एक विशाल समुद्री मछली ने उसे निगल गया।दोस्तों, शारीरिक सुख ,भोग-विलास औऱ परम तृष्णा में लिप्त हम मनुष्यों की भी गति उसी कौए की तरह होती है, जो आहार और आश्रय के क्षणिक सुख को ही अपनी परम गति मान कर अंधे हो जाते हैं और अंत में अनन्त दुःख व संकट रूपी गंभीर सागर में समा जाते है।
टीम एबीएन, रांची। माहेश्वरी महिला समिति रांची श्रावण अधिक मास शिवरात्रि के अवसर पर 15 अगस्त को सामूहिक महा रुद्राभिषेक रांची लक्ष्मी नारायण मंदिर (सेवा सदन के पास) में आयोजन कर रही है। कोलकाता से गोपाल जी व्यास जी के सान्निध्य में शिव मंत्र, भजन एवं शिव श्रृंगार के साथ यह अभिषेक संपन्न होगा। अध्यक्ष भारती चितलांगिया, सचिव बिमला फलोर ने बताया 15 अगस्त सुबह 9 बजे से पूजा प्रारम्भ होगी। 51 जोड़ों के लिए पार्थिव शिवलिंग के साथ पूर्ण पूजा की तैयारी महिला समिति ही करेगी। संयोजिका वंदना मारू, अनीता साबू, भावना काबरा, रेखा कल्याणी एवं मीडिया प्रभारी रश्मि कोठरीमालपानी के अनुसार अभिषेक में सम्मिलित होने के लिए पहले से पंजीकारण करवाना होगा। पूजा में आये सभी यजमान के लिए प्रसाद भी रहेगी। इस भव्य आयोजन के लिए महिला समिति के सभी सदस्य जुटी है। उक्त जानकारी माहेश्वरी महिला समिति की मीडिया प्रभारी रश्मि कोठरीमालपानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
बजरंग दल का निकालेगा 300 स्थानों से शौर्य जागरण यात्रा, होगी 2,000 से अधिक सभाएं : नीरज दोनेरियाटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद के युवा शाखा बजरंग दल का राष्ट्रीय बैठक रांची के हरमू रोड, गौशाला के सम्मुख स्थित दिगंबर जैन भवन में आज 6 अगस्त को अपराह्न 2:45 बजे संपन्न हुई।समापन सत्र में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा विश्व हिंदू परिषद के शष्ठीपूर्ति वर्ष (60वर्ष पूर्ण होने) का प्रारंभ आगामी 7 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी के पावन दिवस पर होने वाला है। आगामी 1 वर्ष में विश्व हिंदू परिषद 1 लाख गांव तक संगठन विस्तार करने का लक्ष्य है। बजरंग दल का सेवा, सुरक्षा एवं संस्कार को ध्येय वाक्य मानकर हिंदू युवकों में समाज सेवक, देशभक्त, स्वावलंबी, कर्तव्यनिष्ठ बनाकर देश सेवा करने की भाव जगाता है। समाज में बढ़ रही चुनौतियों के प्रति जागरण कर समस्या का निदान के लिए संघर्ष करता है। धर्म संस्कृति रक्षा, गोरक्षा, हिंदू कन्या रक्षा, मठ मंदिर सुरक्षा सहीत अनेकानेक सेवा के कार्य कर समाज के लिए अग्रणी रक्षक के रूप में खड़ा रहता है।उन्होंने कहा 9 जून को घोषित मूलनिवासी / आदिवासी दिवस यूरोप-अफ्रीका में ईसाइयों के द्वारा वहां के स्थानीय जनजातियों को प्रताड़ना कर लाखों की संख्या में हत्या की स्वीकृति देकर उन्हें याद करने के उद्देश्य से घोषणा किया गया था। भारत में रामायण, महाभारत काल में भी जनजाति, गिरीवासी, बनवासी, नगरवासी साथ साथ जीने व रहने की परंपरा अपने शास्त्रों में बतायी गयी है। भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम एवं माता शबरी, केवट आदि उस काल में एक साथ रहते थे जो आज भी सभी हिंदू समाज एक साथ रहते आ रहे हैं। भारत में जनजातिय समाज के भगवान बिरसा मुंडा सहित अनेकों क्रन्तिकारी वीरों ने अपने धर्म संस्कृति के रक्षार्थ अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में अपने को बलिदान दिये, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाए जाने वाले जनजातीय गौरव दिवस को ही मनाया जाना उचित है। 9 जून विदेशी संकल्पना है जो हमें थोपी जा रही है, उससे बचना चाहिए।मणिपुर हिंसा के संदर्भ में उन्होंने कहा मणिपुर का संघर्ष हिंदू ईसाई के बीच नहीं है बल्कि मइती एवं कुकी जनजाति के बीच का संघर्ष है। ईसाइयों एवं वामपंथियों ने इस पर नकारात्मक विमर्श खड़ा कर हिंदू समाज को बदनाम करने की साजिश रच रहा है। उन्होंने कहा आपसी मतभेद को भूलकर वहां शांति व्यवस्था अपनाना चाहिए।बजरंग दल राष्ट्रीय संयोजक नीरज दोनेरिया ने कहा वर्तमान परिपेक्ष में ईसाइयत एवं मुस्लिम जेहादी मानसिकता का प्रतिकार करने के लिए समाज को संगठित होना ही एक विकल्प है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं के द्वारा 30 सितंबर से 14 अक्टूबर तक संपूर्ण देश में बजरंग दल शौर्य जागरण यात्रा निकालेगी, जिसमें देश के 300 स्थानों से प्रमुख यात्रा निकाली जायेगी एवं 2,000 से अधिक सभाएं होगी। उन्होंने कहा संपूर्ण देश में एक लाख बजरंग दल संयोजक बनाने की योजना है। 20 हजार सप्ताहिक मिलन केंद्र एवं 25 हजार बलोपासना केंद्र चलाया जायेगा। उन्होंने कहा विश्व हिंदू परिषद- बजरंग दल सदैव समाज की सेवा का करती है विगत माह 9000 स्थानों पर श्मशान घाट में सफाई के साथ पौधारोपण किया गया, सैकड़ों मंदिरों में प्रतिमा स्थापित की गयी।समापन सत्र में केंद्रीय सहसंयोजक सूर्य नारायण राव, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद पांडेय, क्षेत्र अध्यक्ष रामस्वरूप रुंगटा, क्षेत्र संयोजक जनमेजय कुमार, प्रांत कार्याध्यक्ष तिलक राज मंगलम, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु, प्रांत संगठनमंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, बजरंग दल प्रांत संयोजक दीपक ठाकुर, बजरंग दल मिलन केंद्र प्रांत प्रमुख संजय चौबे, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख अमित पासवान, समाजसेवी प्रिंस अजमानी, प्रचार प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन, समाजिक समरसता प्रांत प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह,रांची विभाग प्रचार प्रसार प्रमुख अमर प्रसाद, रांची महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, मंत्री चंद्रदीप दुबे, बजरंग दल रांची महानगर सहसंयोजक अंकित सिंह व दीपक साहू, रांची विभाग सेवा प्रमुख रवि शंकर राय, विनय कुमार, विनोद विश्वकर्मा, अंकित पांडे, नरेंद्र प्रजापति, आशीष वर्णवाल, सोनू सिंह, अरुण साहू, भोला लोहरा मुकेश गिरी, सुभाष चटर्जी, रवि वर्मा सहित देश के सभी राज्यों के 76 बजरंग दल प्रांत संयोजक-सहसंयोजक, 7 क्षेत्र संयोजक सहित कई स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के सहप्रमुख, प्रचार प्रसार विभाग के प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर कौन सा फल, फूल, रस चढ़ायें और मनोकामना पूरी करें। इसके बारे में शिवपुराण की कथा के दौरान पं रामदेव पाण्डेय ने कहा कि प्रतिष्ठित शिवलिंग की पूजा कर आधि-व्याधि और सांसारिक सुख शांति समृद्धि पा सकते हैं। पर पूजन का समय निश्चित हो। दिन या रात जो भी हो, आधी रात को भी शिव की आराधना होती है।क्या चढ़ाने और हवन से क्या लाभ होता है पीली सरसों, सरसों, तेल, मिर्च, गोलकी से शत्रु का नाश होता है। मधु से भय भागता है। ईख के रस, गुड़, शक्कर से आनन्द, गंगा जल से मुक्ति और भुक्ति, कुश तथा घी से निरोगिता, दुब घास से आयु वृद्धि, धतुरा और गेहूं से सन्तान का सभी सुख, तुलसी मंजरी और शम्मी से मुक्ति, आम मंजर से वैभव की प्राप्ति होती है।कनेर फूल से रोग निवारण और शत्रु उच्चाटन, चमेली से वाहन, पशु का लाभ, हरसिंगार से सुख, बेलपत्र से सभी कामनाओं की पुर्ति, तीसी से प्रसन्नता, निर्गुण्डी आंवला से सुन्दरता, अकवन से स्वयं की आयु सुन्दरता मिलती है।इस तरह कमल, बेलपत्र, कुश, शंखपुष्पी, कल्हार, सफेद उड़हुल, गुलाब, गेंदा, रातरानी, हरसिंगार, गजरा, क़दम, द्रोण, ईख, नारियल, अरहर, सात तरह के अनाज, गांजा, भांग,खजुर, ऋतु फल फुल, पंचमेवा, पंच पल्लव, पंचामृत, भष्म आदि शिव को प्रिय है। केवड़ा फूल शिव पर नहीं चढ़ता है पर साज सज्जा में लगता है। चम्पा फूल केवल भादो में चढ़ता है। आरती चार बार चरण, दो बार नाभी, एक बार मुख और सात बार सभी अंगों पर दीपक, कपूर, पानपत्ता, कपड़ा, चंवर से लगाना चाहिए। सोमवार, प्रदोष, त्रयोदशी, उतम तिथि है। गायत्री मंत्र, रूद्रा अष्टाध्यायी से अभिषेक करें। मंगल ग्रह इनके पुत्र हैं और भैरव, हनुमान अंश के अवतार हैं। यह कथा राम जानकी मंदिर हाउसिंग कालानी बरियातू में छब्बीस जुलाई से बारह अगस्त तक चलेगी।
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