शहर में तोरण द्वार लगाने एवं 27 को मोटरसाइकिल जागरूकता रैली निकालने का निर्णयटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। नगर की धार्मिक संगठन श्री राम संकीर्तन मंडल की एक बैठक श्री सत्यनारायण मंदिर खुदरा पट्टी में हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडल के अध्यक्ष मुन्ना भदानी और संचालन सचिव अरविंद चौधरी ने किया। बैठक में सावन की अंतिम सोमवारी पर झरना कुंड धाम से ध्वजाधारी धाम तक कांवर पदयात्रा निकालने का निर्णय लिया गया। इस वर्ष मंडल के तत्वावधान में कांवर पदयात्रा का 24 वां वार्षिकोत्सव मनाया जायेगा। आगामी 28 अगस्त को यह कांवर पदयात्रा निकाली जायेगी। जिसमें लगभग 75 हजार से अधिक श्रद्वालु शामिल होंगे। अध्यक्ष मुन्ना भदानी ने कहा कि इस कार्यक्रम में जिले के सभी स्वयंसेवी संगठन, जिला प्रशासन समेत अन्य संगठनों का सहयोग मिलता है। इस कांवर पदयात्रा में कोडरमा के अलावे अन्य जिले से भी लोग शामिल होते हैं। वही मंडल के सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि दूसरे जिले से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इंदरवा बस्ती के सरकारी विद्यालय में रात्रि विश्राम भोजन के निशुल्क व्यवस्था मंडल करेगा। इसी दिन नगर में बाइक जागरूकता रैली निकाली जायेगी। शहर में तोरण द्वार लगाये जायेंगे। कार्यक्रम को लेकर सदस्यों को अलग-अलग विभाग सौंपे गये हैं। बैठक में बसंत गुप्ता ने आय-व्यय का व्यौरा प्रस्तुत किया। मौके पर राकेश कप्सीमे, नवीन सिन्हा, विक्की केसरी, विशाल कप्सीमे, अमन कप्सीमे, लखन सिंह, चंद्रशेखर जोशी, राजेश कप्सीमे, ज्योति पहाड़ी, सुजय सिंह, मनोज कुमार साव, अमित सुरेलिया, राजेश कुमार गुप्ता, अनूप वर्णवाल, विनोद चौरसिया आदि उपस्थित थे।
पश्चिमी धर्मग्रंथों में विवाद और बदलाव जारी है टीम एबीएन, रांची। आजकल लोग खाने पीने की तुलना शिव और दुर्गा जी से करते हैं और जब शिव और दुर्गा की तरह समाज कल्याण की जिम्मेदारी निभानी है, तो पुरुषार्थ विहीन हो जाते हैं। श्रीमद्देवीभागवत की कथा में पंडित रामदेव पाण्डेय ने कही।छद्मई भक्त कहते हैं हमारे शिव, कृष्ण दुर्गा जी जो करते हैं हम वही खाते-पीते हैं। शिव जी गांजा भांग लेते हैं। दुर्गा जी मधु पीती हैं, तो हम भी पीते हैं। शिव जी जहर पीते हैं और अमर है। सांप लपेटे है, कानों में बिच्छू का कुंडल है, दिगंबर भी है। श्मशान में रहते हैं, तो तुम शिव की तरह रहो और करो, दुर्गा जी मधु पीती है, दुर्गा जी फाइटर्स है। विदुषी है और ब्रह्मचारिणी हैं। आजकल बेटे-बेटियां अल्कोहल को मधु कहकर पीती है और समाज तथा राष्ट्र को मुश्किलों में डाल देती है, जो मधु दुर्गा पीती है। द्वारिका के यदुवंशी पीते थे वह अल्कोहल नहीं है वह है मधुपर्क जो कांसा के कटोरे में बनता है। उसका समिश्रण है मधु का आधा घी, घी का आधा दूध, दूध का आधा दही और दही का आधा गुड़ से जो पेय बनता है यह पेय पंचामृत और मधु कहलाता है। सनातन के हजारों ग्रंथ और करोड़ों देवता हैं, इसमें हरि भी अनंत हैं और इनकी कथा भी अनंत है। जबकि पश्चिम के कथित धर्म के पास जो एक ग्रंथ है। उसमें ओल्ड और न्यू हुए एक ग्रंथ को लेकर विश्व में विवाद है और न्यायलय में सैंकड़ों विवाद अटके हैं, जबकि वेद और गीता पर विश्व नासा और इसरो रिसर्च कर रहा है, यही है सनातन का गौरव।
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के मार्गदर्शन में गायत्री परिवार शिष्य-साधक समूह आनलाइन संचालन प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि हम सब शिष्य साधकों की प्रत्येक मासिक पूर्णिमा पर साधना का विशेष अनुष्ठान पर्व पिछले कई वर्षों से मनाया जा रहा है। साथ ही नवयुग सृजन के निमित्त किये जा रहे अखंड पूर्णिमा जप साधना की नई आवृत्ति भी बढ़ रही है। इसमें उच्चस्तरीय आध्यात्मिक चांद्रायण व्रत-उपवास अनुष्ठान से देश-विदेश में भी परिजन जुड़े हैं। यह मासिक अनुष्ठान भी गत पावन गुरु पूर्णिमा से शुभारंभ होकर आज श्रावण मास अधिक पूर्णिमा को आज संपन्न हुआ। श्रावण मास की महिमा, चंद्रायण व्रत-उपवास, जप-अनुष्ठान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि गुरुसत्ता की सूक्ष्म उपस्थति, संरक्षण और आशीर्वाद से नवयुग निर्माण के निमित्त शृंखलाबद्ध प्रत्येक पूर्णिमा को 24 घंटे के लिए आनलाइन आयोजित होने वाले अखंड जप में सम्मिलित होने का यह भावभरा आमंत्रण आते ही सबमें खुशी व प्रसन्नता का भाव जाग्रत होकर शीघ्र शामिल होने का संकल्प होने लगता है। इस निमित्त समय आज मंलवार सुबह 5 बजे से 2 अगस्त बुधवार की सुबह 5 बजे तक का निर्धारित किया गया है। सभी से अनुरोध किया गया है कि इस दैवीय योजना मे घर बैठे- बैठे जप करते हुए सहयोग भाव से क्षुब्ध प्रकृति, विरुद्ध पर्यावरण और दु:ख-संताप से त्रस्त दुनिया में सर्वत्र शांति एवं सबके आत्मिक उत्थान, आत्म कल्याण और सर्वत्र मंगलमय, सभी के लिए कल्याण सद्बुद्धि व उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना में अपने बहुमूल्य समय का एक अंश नवयुगनिर्माण हेतु अवश्य देने का प्रयास करें और सब में आत्मीयता का विस्तार एवं परिष्कृत व अनुशासित जीवन जीने की कला का विकास हो।इस भाव के साथ अपनी सुविधानुसार गायत्री महामंत्र जप सहित कम-से-कम अतिरिक्त एक माला महामृत्युंजय मंत्र एवं चंद्र- गायत्री मंत्र का जप भी आवश्यक रूप से सम्मिलित करने एवं यज्ञीय पूर्णार्हति में गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, चंद्र गायत्री मंत्र सहित यज्ञाहुति कर प्रार्थना व शांति-पाठ करने का सुझाव दिया गया। विधिवत सर्व देवपूजन व स्वस्तिवाचन पाठ कर जप-अनुष्ठान शुभारंभ हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
सरस्वती विद्या बुद्धि तो दुर्गा युद्ध की देवी हैं बेटियों को दुर्गा सप्तशती और बेटों को गीता सप्ताह में एक दिन दो से बीस साल तक पढ़ायें टीम एबीएन, रांची। नारी को अबला समझकर महिषासुर ने भी नारी से मरने का वरदान ब्रह्मा जी से ले लिया और कैलाश पर नारी पार्वती को पाने चला। यही विडंबना है आदि काल की, कि नारी को पग-पग पर हिंसा, शोषण, दोहन और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि नारी का शरीर दु:ख का घड़ा है। महिषासुर और सहोदर भाई रक्तबीज सहित करोड़ों सेना का संहार हिमालय पर विराजमान दुर्गा जी ने अनेक रूपों में किया। दानवों को जीत पाना देवताओं के लिए मुश्किल था। वहां भारत की बेटियों ने विजय प्राप्त कर बताया कि मान-सम्मान, अस्मिता, धर्म और राष्ट्र के लिए रणचंडी बन जाओ। देवी दुर्गा से लेकर लक्ष्मी बाई तक की कथा है। अत्याचार पर टूट पड़ो। अबला बनकर अतिबला बनकर सबला हो जाओ। परशुराम शस्त्र और शास्त्र लेकर चलते हैं। वैसे हमारी बेटियों को सरस्वती के पुस्तक और वीणा के साथ दुर्गा के खड्ग, धनुष बाण, जैसे आयुध और सर्प की जगह विष लेकर आत्मरक्षार्थ चलना होगा। यदि बेटियां स्वयं को रणचंडी, दुर्गा, काली, भवानी की आत्मभुता समझ लेगी तो महिला हिंसा समाप्त हो जायेगा। इसलिए भारत की बेटियों को दो साल से ही आत्मरक्षार्थ कलाओं को सीखना अतिआवश्यक है। यह सतानन का मूल संकेत है। इसलिए सनातन में तीन सौ साठ दिन में छत्तीस दिन नवरात्रि और दस दिन महाविद्या जयंती देकर नारी को देवी रूप कहा है।देवी सरनेम भी दिया, जिसका अर्थ है सृष्टि में सबसे उच्च ज्ञान, विज्ञान, समृद्धि, यश, विभूति और बल से परिपूर्ण मानवीय कृति। सरस्वती विद्या-बुद्धि तो दुर्गा युद्ध की देवी हैं। बेटियों को दुर्गा सप्तशती और बेटों को बालगंगाधर तिलक का गीता सप्ताह में एक दिन दो से बीस साल जरूर पढ़ायें। उक्त बाते पंडित रामदेव पाण्डेय ने बरियातू हाउसिंग कॉलानी स्थित राम जानकी मंदिर में आयोजित छठे दिन की श्रीमद्ददेवीभागवत कथा में कही।
अब आंध्र प्रदेश के किसान की चमकी किस्मत... 45 दिन में 40,000 टमाटर के बक्से बेच कमाये 4 करोड़ रुपयेएबीएन सोशल डेस्क। टमाटर की महंगाई ने जहां आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है वहीं इस साल टमाटर की खेती करने वाले किसान मालामाल हो गये हैं। देसभर में ऐसे कई किसान सामने आए है जिन्होंने टमाटर की खेती से अपने सालों की मेहनत को एक ही झटके में पूरा कर लिया।दरअसल, अब आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में एक किसान ने 45 दिनों में टमाटर की बिक्री कर करीब 4 करोड़ रुपये की आमदनी की। किसान चंद्रमौली ने इस साल 22 एकड़ कृषि भूमि में टमाटर की खेती की और 45 दिनों की अवधि में 40,000 बक्से टमाटर बेचे, जिसके परिणामस्वरूप देश में टमाटर की बढ़ती कीमतों के बीच, 4 करोड़ रुपये की प्रभावशाली आय हुई।पिछले 45 दिनों में, चंद्रमौली ने अपनी टमाटर की उपज कर्नाटक के नजदीकी कोलार बाजार में बेची, जो सुविधाजनक रूप से उनके गृहनगर के करीब स्थित है।इस अवधि के दौरान, टमाटर की 15 किलोग्राम क्रेट की कीमत ₹1,000 और ₹1,500 के बीच रही। वहीं, चंद्रमौली के हवाले से कहा, अब तक मुझे जो उपज मिली है, उससे मैंने ₹4 करोड़ कमाए हैं। कुल मिलाकर, मुझे उपज प्राप्त करने के लिए अपनी 22 एकड़ जमीन में ₹1 करोड़ का निवेश करना पड़ा और इसमें कमीशन और परिवहन शुल्क शामिल है। इसलिए, मुनाफा ₹3 करोड़ ही रहेगा।
अमरनाथ तीर्थयात्रियों का 28वां जत्था जम्मू आधार शिविर से रवानाएबीएन सोशल डेस्क। जम्मू कश्मीर में तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था रविवार को यहां भगवती नगर आधार शिविर से दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित श्री अमरनाथ गुफा तीर्थ के लिए रवाना हुआ।आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि 1974 तीर्थयात्री 85 वाहनों के काफिले में आधार शिविर से रवाना हुए। कुल 1410 तीर्थयात्रियों (1107 पुरुष, 240 महिलाएं, दो बच्चे, 45 साधु और 16 साध्वियां) का एक समूह 56 वाहनों के काफिले में पहलगाम के लिए रवाना हुआ।इसके साथ ही बालटाल के लिए 564 तीर्थयात्री कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 29 वाहनों के काफिले में रवाना हुए।गत एक जुलाई से शुरू हुई यात्रा 31 अगस्त को संपन्न होगी।
मसालों पर महंगाई की मार, गड़बड़ाया रसोई का बजटएबीएन सोशल डेस्क। जनता पर महंगाई का बोझ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हरी सब्जियों की कीमतों में गिरावट शुरू भी नहीं हुई थी कि इससे पहले ही मसाले भी महंगे हो गये। इनकी कीमत में भी कई गुना अधिक बढ़ौतरी दर्ज की गयी है। इससे आम जनता के किचन का बजट बिगड़ता ही जा रहा है। खास बात यह है कि मसालों में सबसे अधिक महंगा जीरा हुआ है। इसकी कीमत में कई गुना बढ़ौतरी दर्ज की गयी है। इससे गरीब आदमी के लिए दाल में जीरे का तड़का लगाना मुश्किल हो गया है। वहीं, व्यापारियों और दुकानदारों का कहना है कि आने वाले दिनों में मसाले और महंगे हो सकते हैं।हालांकि, जीरे के साथ-साथ मेथी, बड़ी इलायची, मिर्च, हल्दी और धनिया भी बहुत अधिक महंगे हो गये हैं। कुछ महीने पहले तक मार्केट में जीरे का रेट 200 रुपये किलो था। अब इसकी कीमत 700 रुपये किलो के पार पहुंच गयी है। उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक किलो जीरे की कीमत 700 से 720 रुपए हो गयी है। वहीं, दुकानदारों का कहना है कि आने वाले दिनों में जीरा और ज्यादा महंगा हो सकता है। इसकी नयी फसल आने के बाद ही कीमतों में गिरावट आ सकती है।13 साल की ऊंचाई पर पहुंची हल्दीइसी तरह हल्दी भी बहुत महंगी हो गई है। इसकी कीमत 13 साल की ऊंचाई पर पहुंच गयी है। खास बात यह है कि एक महीने के अंदर हल्दी की कीमत में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। वहीं, तीन महीने के अंदर इसकी कीमत में 76 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित कुरुंदा मार्कीट में हल्दी 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। हालांकि, कुछ महीने पहले तक इसका रेट 10 हजार रुपये क्विंटल से भी कम था। अभी रिटेल मार्कीट में एक किलो हल्दी का रेट 150 रुपए के करीब है, जबकि पहले यह 70 से 80 रुपये किलो बिकती थी।बड़ी इलायची की कीमत में 100 रुपये की बढ़ोतरीवहीं, खुदरा मार्कीट में लाल मिर्च काफी महंगी हो गयी है। इसकी कीमत में भी लगभग बंपर बढ़ौतरी हुई है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के बहराइच में 150 रुपए किलो मिलने वाली लाल मिर्च अब 280 रुपये किलो बिक रही है। इसी तरह अजवाइन, मेथी, लौंग और बड़ी इलायची भी महंगे हो गके हैं। अजवाइन की कीमत 150 रुपये किलो से बढ़कर 220 रुपये किलो हो गयी है। मेथी की कीमत में भी 20 रुपए का उछाल आया है। अब यह 120 रुपये किलो बिक रहा है। इसी तरह लौंग की भी कीमत 900 रुपये किलो हो गयी है। वहीं, बात अगर बड़ी इलायची की करें तो यह 1200 रुपये किलो बिक रही है, जबकि पहले इसका रेट 1000 रुपये किलो था।
13 वर्षों से राजधानी के मुख्यमार्ग पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव का मन रहा उत्सव इस बार भगवान श्री कृष्ण को मोटे अनाज का भोग जन्माष्टमी पर लगाया जायेगा : संजय सेठ आयोजित की जायेगी अमृत दही हांडी प्रतियोगिता टीम एबीएन, रांची। पूर्वी क्षेत्र का सबसे बड़ा जन्माष्टमी पर्व है जो काफी वर्षों से चल रहा है अभी अमृत काल चल रहा है इसलिए इस उत्सव का नाम इस बार अमृत दही हांडी प्रतियोगिता रखा गया है। अमृत दही हांडी उत्सव के साथ भजन संध्या का भी कार्यक्रम रखा गया है। श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के सानिध्य में अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड में 6 व 7 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। वर्तमान में श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के संरक्षक व सांसद संजय सेठ, संरक्षक सह विधायक सी पी सिंह व संरक्षक अजय मारू है। आयोजन समिति के संरक्षक व माननीय सांसद संजय सेठ ने बताया कि 6 और 7 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची की ओर से अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड मै श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। समिति के सानिध्य में 13 वर्ष से जन्माष्टमी महोत्सव हम मनाते आ रहे हैं। प्रथम दिन 6 सितंबर को झांकी प्रतियोगिता के साथ महोत्सव का उद्घाटन किया जायेगा। प्रथम दिन 6 सितंबर को अपराह्न 3-00 बजे से श्री कृष्ण के बाल रूप की झांकी यानि बाल गोपाल सजाओ प्रतियोगिता व झांकी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है। जिसमें 10 वर्ष तक के बच्चे श्री कृष्ण के विभिन्न रूपों के साथ बच्चे ,बच्चियां इस प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे।दूसरे दिन 7 सितंबर को संध्या 5 बजे से अमृत दही-हांडी फोड़ प्रतियोगिता सह भजन संध्या सहित नृत्य नाटिका का भव्य विशाल आयोजन रखा गया है। अमृत दही हांडी प्रतियोगिता में पुरुष गोविंदा टीम व महिला गोविंदा टीम भाग ले सकेंगे। जिसका रजिस्ट्रेशन समिति में गोविंदाओं की टीम को करवाना अनिवार्य होगा। समिति के अध्यक्ष मुकेश काबरा ने बताया प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतिय व सांत्वना पुरस्कार भी रखा जायेगा। अमृत दही हांडी प्रतियोगिता में कुछ नियम व शर्ते भी रहेगी। पुरुष गोविंदा टीम के लिए हांडी 25 फीट पर वह महिला गोविंदा के लिए 15 फीट पर बांधी जायेगी वही पुरुष गोविंदा को हांडी फोड़ने का समय 5 मिनट वह महिला गोविंदा को 3 मिनट का समय दिया जाएगा।जो सबसे कम समय में हांडी फोड़ेगा उसे क्रमवार प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिया जायेगा। 18 साल से ऊपर के पुरुष एवं महिला गोविंदा हांडी फोड़ प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। इस बार पूरी रांची कृष्ण मय हो जायेगी। कृष्ण जन्म उत्सव पर रंग बिरंगी पताकाओ और फूलों से स्थल को सजाया जायेगा। इस बार ठाकुर जी को भोग प्रसाद मोटे अनाज का लगेगा। भजन संध्या अभूतपूर्व होगी। बाल गोपाल प्रतियोगिता एवं दही हाडी फोड़ो प्रतियोगिता का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। हांडी फोड़ प्रतियोगिता का रजिस्ट्रेशन फॉर्म सोमवार से प्राप्त होगा। फिरायलाल में केडिया साइकिल के राजेंद्र केडिया से स्टेसन रोड में पतंजलि से सतीश सिंहा के द्वारा प्राप्त किया जा सकेगा। रजिस्ट्रेशन फॉर्म 30 अगस्त तक ही जमा लिये जायेंंगे। आयोजन समिति के संरक्षक संजय सेठ ने कहा कि पूर्वी छेत्र का सबसे बड़ा जन्माष्टमी पर्व है अभी अमृत काल चल रहा है। इसलिए अमृत काल को देखते हुए अमृत दही हांडी प्रतियोगिता नाम रहेगा। हमारी संस्कृति हमारी धरोहर है। इस अवसर पर श्री कृष्ण के कई बाल रूप की झांकियों का भी अवलोकन कृष्ण भक्त आयोजन स्थल पर कर सकेंगे। अमृत दही हांडी सह भजन संध्या का कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर संरक्षक सी पी सिंह, अजय मारू ने भी प्रेस वार्ता को संबोधित किया। संरक्षक संजय सेठ, अध्यक्ष मुंकेश काबरा ने कहा कि अगली बैठक में समिति के अन्य पदों व कार्यो के लिए सदस्यो के नाम देकर समिति का बृहत् विस्तार किया जायेगा। आयोजन को सफल बनाने में काफी संख्या में सदस्यों को जोड़ा जा रहा है। जो नियमित बैठक कर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना पूर्ण योगदान समर्पित करेंगे। प्रेस वार्ता में आयोजन समिति के संरक्षक सह सांसद संजय सेठ,सी पी सिंह, अजय मारू,अध्यक्ष मुकेश काबरा महासचिव जवाहर तनेजा, प्रमोद सारस्वत, कमलजीत सिंह शंटी, राम बांगड़, सतीश सिन्हा, नीरज चौधरी, संजय पोद्दार, ललन श्रीवास्तव, मनोज तिवारी, विपिन वर्मा, नरेंद्र लाखोटिया, किशन साबु, गोवर्धन भाला, रमेन्द्र कुमार, राजकुमार सोमानी, शिव शंकर साबू, राजीव सहाय, जुगल दरगढ़, मनीष लोधा, अमित चौधरी, विकाश गोयल, सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी समिति के मीडिया प्रभारी प्रमोद सारस्वत और संजय पोद्दार (9431325438) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, सिमडेगा/ रांची। आज दिनांक 30.07.2023 (रविवार) को श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) ने सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान वर्ष - 2023 के दूसरे चरण का आयोजन ग्राम- जुरकेला, प्रखंड- कोलेबिरा, पंचायत- अघरमा, जिला- सिमडेगा में किया। कार्यक्रम में आम, अमरूद, मोहगनी, सागवान, आंवला, जामुन, बेल इत्यादि के 405 पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया। समस्त कार्यक्रम श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी कर कृपामयी उपस्थिति में हुई। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्यपाद बाबा जी ने विधिवत आरती-पूजन कर किया। तत्पश्यात पूज्यपाद बाबा जी के कर कमलों द्वारा बेल के पौधे का रोपण भी किया गया। उसके बाद समूह सदस्यों ने लगभग 65 पौधे लगाये। कार्यक्रम में जुरकेला ग्राम के ग्रामीण बंधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी की गयी। जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए समूह द्वारा किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी ग्रामीण बंधुओं को अवगत कराया गया। साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत करते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।गोष्ठी के बाद ग्रामीण बंधुओं के बीच लगभग 340 पौधों का वितरण किया गया। ज्ञात हो कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्व स्तरीय सामाजिक एवं धार्मिक संस्था है जो अनेक जनकल्याण के कार्यक्रम लगातार करती रहती है। जनसेवा के लिए श्री सर्वेश्वरी समूह का नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान उन्हीं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक है जिसे पूरे वर्षा ऋतु में चलाया जायेगा। इस वृहद वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से लोगों को वृक्ष लगाने एवं वृक्षों को बचाने के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञात हो कि आज के कार्यक्रम के पूर्व ग्राम- गंगड़ा, जिला गुमला में भी समूह शाखा 319 पौधों का रोपण एवं वितरण कर चुका है। कार्यक्रम में श्री सर्वेश्वरी समूह के रांची, गुमला, जशपुर एवं सिमडेगा शाखा से लगभग 50 श्रद्धालु-सदस्यगण शामिल हुए।
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