टीम एबीएन, धनबाद। जिले के झरिया श्री सत्यनारायण मंदिर स्टेशन रोड झरिया में संस्कृत पाठशाला में विद्यार्थियों को आज शिव पंचाक्षर स्तोत्र का चौथा श्लोक वसिष्ठ कुंभोद्भव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय... का अभ्यास कराया गया। इसके अलावा संस्कृत अंताक्षरी गीता पाठ एवं संस्कृत संभाषण का अभ्यास कराया गया। बोल बम के नारों से समस्त वातावरण शिव मय हो गया। संस्कृत पढ़ाने का कार्य हरीश कुमार जोशी अधिवक्ता द्वारा किया गया। प्रसाद वितरण नरेश शाह ने किया। मौके पर वैष्णवी देवी, हर्षिका गोयल, याचना कुमारी, चेल्सी गोयल, तृषा कुमारी, प्रतिज्ञा कुमारी, अंशिका कुमारी, रितिका कुमारी, पल्लवी कुमारी, रानी कुमारी, पीहू कुमारी सिंह, राधिका कुमारी, अंतरा कुमारी, कुमकुम कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, दिव्या कुमारी, खुशी कुमारी गुप्ता, दीपिका कुमारी, जयदेव कुमार, रौनक साव, अमित साव, सौरभ कुमार, सूरज ठक्कर, प्रेम कुमार, गोपाल पांडेय, रोहन कुमार, प्रणय आनंद, अनमोल कुमार, आर्यन कुमार आदि उपस्थित रहे।
झुमरी तिलैया में निकाली गयी श्याम निशान यात्रा, हरियाली शृंगार की झांकी आकर्षण का रहा केंद्र बिंदुटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। श्याम निशान महिला मंडल के तत्वावधान मे शनिवार को झुमरी तिलैया के झंडा चौक स्थित दुर्गा मंदिर से निशान यात्रा निकाली गयी। सर्वप्रथम निशान की पूजा अर्चना पंडित जीवकांत झा ने करायी। मौके पर निशान यात्रा में शामिल महिलाएं हाथों में निशान लिए स्टेशन रोड, भदानी रोड, भालोटिया मोहल्ला का भ्रमण कर श्याम मंदिर में निशान को अर्पण किया। इस दौरान हारे का सहारा श्याम बाबा हमारा एवं हर-हर महादेव के नारों से पूरा शहर के साथ मंदिर परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि श्याम कहते हैं डोर हिलाओ तुम मुझको झूला झूलाओ... जिस घर में खाटू वाले की नित्य जोत जलायी जाती है... दर्जी सील दे निशान मने खाटू जाना सय... भोले का शृंगार सारे श्रृंगारों से न्यारा है... जैसे भजन पर श्रद्धालु भक्त झूमते रहे। श्याम निशान महिला मंडल की पिंकी खेतान, कृतिका मोदी ने बताया कि आगामी 12 अगस्त को पानी टंकी रोड स्थित श्याम मंदिर में अखंड ज्योति पाठ किया जायेगा। उन्होंने कहा कि श्याम की भक्ति घर-घर में इस कलयुग में हो रही है। निशान यात्रा में अंजुला खाटूवाला, ममता नरेड़ी, सारिका केडिया, पूजा शर्मा, अंजना केडिया, पायल खाटूवाला, मूली शर्मा, पायल जोशी, रानी कालरा, मधु शर्मा, रश्मि गुटगुटिया, प्रीति गुटगुटिया, पूनम सहल, ज्योति शेखावत, बबिता जोशी, रश्मि शर्मा, गोपाल कुमार, अशोक कुमार आदि शामिल थे। वहीं दूसरी ओर रविवार को पानी टंकी रोड स्थित श्याम मंदिर मे बारस की ज्योत के अलावा खीर चूरमा का भोग बाबा को अर्पण किया जायेगा। इधर, एकादशी को लेकर झुमरी तिलैया से राजस्थान के खाटूधाम मे 22 श्रद्धालु भक्त पूजा अर्चना में शामिल होने गये।
सनातन में प्रेम कथा सुखांत है, बाकी आज की लव स्टोरी केवल दुखांतएबीएन सोशल डेस्क। आदर्श पति की बात करते हैं तो भगवान शिव, च्यवन ऋषि का पोता रूर और श्री राम हैं। यह सब प्रेम कहानी है। पर यहां सभी प्रेम कहानी सुखांत है, जबकि शेष कथित लव स्टोरी दुखांत ही होते हैं।श्री मद्भदेवीभागवत कथा के तीसरे दिन पंडित रामदेव पाण्डेय ने कहा कि रूर ने अपनी प्रेयशी प्रेमदता को आधी आयु देकर जीवन दिया था, तो शिव ने सती के शरीर को लेकर अफगानिस्तान से म्यांमार तक विरह वेदना में भटकते रहे और एक सौ आठ सिद्ध पीठ बना। जहां सती के जले शरीर का अंग गिरा और हजारों साल समाधि में रहकर फिर पार्वती के रूप में प्राप्त किये। राम ने सीता के लिए रावण को जीत लिया, तो बृहस्पति ने तारा को पुनः गृहस्थी में अवसर देकर आदर्श दाम्पत्य का परिचय दिया। साथ ही तारा, सीता, सती के द्वारा की गयी गलतियों को क्षमा भी किया। नारी सदैव क्षमा की पात्र है। राम जानकी मंदिर हाउसिंग कॉलोनी बरियातू में कथा चल रही है।
सती आदर्श को भगवान भी नमन करते हैं एबीएन, सोशल डेस्क। कल आदर्श पुत्र में राम, परशुराम, भीष्म, पुरु, रोहिताश्व की कथा थी। आज आदर्श नारी किसे कहते हैं? सीता को अनुसुइया जी ने कहा- वह नारी तुम है, जो अपने पति में देवत्व का निवास करा देती है। जिसके मन में सिर्फ उसका पति ही हीरो ही नहीं ब्रह्मा विष्णु महेश समझती है। सती, सीता, सावित्री, शकुंतला, कुंती और मुगलकालीन जौहर करने वाली देवियां इसकी उदाहरण है। सती नारी वही है जो अपने पति, पिता, परिवार, परिजनों की मर्यादा का सदैव ख्याल रखे। सती का कतई भाव नहीं है पति संग चिता में जलकर मरना। मध्यम चरित्र की नारी वह है, जो दूसरे पुरुषों को अपना भाई, पिता और पुत्र की तरह व्यवहार करती है। जो धर्म से अपने और कुल की पवित्रता, संरक्षण का संवर्धन करती है। अधम नारी वह है जो अपने कुल, गोत्र, धर्म, माता-पिता के मानसिक भावों के विपरीत है। इन तीसरे दर्जे के नर नारी सनातन से बाहर है। इनकी संख्या अधिक है। ये बहु-विवाह करते हैं। बहु विवाह, बहु पति, बहु पत्नी का प्रचलन है। ऐसे में जैविक पिता और पालक पिता तथा माता की पहचान करना मुश्किल हो जाती है। इस परिस्थिति में ये फादर डे मदर डे मनाते हैं, जो फादर-मदर है। उसको याद करायें, हम ही बेटा हैं। उक्त बातें पंडित रामदेव पांडेय ने कुंती प्रसंग में कही। राम जानकी मंदिर हाउसिंग कॉलोनी बरियातू में श्रीमद् देवी भागवत कथा के दूसरे दिन कही। यह कथा बारह अगस्त तक चलेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू कश्मीर के भगवती नगर आधार शिविर से बम बम भोले के जयकारों के बीच 3111 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था गुरुवार को यहां दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित श्री अमरनाथ गुफा तीर्थ के लिए रवाना हुआ। एक अधिकारी ने बताया कि 3111 तीर्थयात्री 124 वाहनों के काफिले में आधार शिविर से रवाना हुए। इसी तहर 2154 तीर्थयात्रियों (1686 पुरुष, 424 महिलाएं, छह बच्चे और 47 साधु) का एक समूह 83 वाहनों के काफिले में पहलगाम के लिए रवाना हुआ। बालटाल के लिए 907 तीर्थयात्री ( जिनमें 616 पुरुष, 336 महिलाएं और पांच बच्चे शामिल है ) कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 41 वाहनों के काफिले में रवाना हुए। एक जुलाई को शुरू हुई यात्रा 31 अगस्त को समाप्त होगी।
परोमा भट्टाचार्य भीषण आग लगी है घर में कौन किसे बचायेगा क्या यह हमें विकसित भारत बतायेगा या नया भारत इसमें प्रकाश डालेगा बेबशी और आक्रोश के द्वंद में कब तक समाज बंटेगा देश की बेटियों को आखिर कब तक इम्तिहान देना पड़ेगा किस मिट्टी के बने हैं हम किस खून को बचाने चले हैं हम हत्या हो गयी हमारे अपने अस्तित्व की, क्या अब भी राजनीति करेंगे हम भीषण आग लगी है घर में कौन किसे बचायेगा (परोमा भट्टाचार्य विचारक, थिएटर आर्टिस्ट और कवि हैं।)
सन्तान तीन और पुत्र चार तरह के होते हैंटीम एबीएन, रांची। रोहित, राम भीष्म ने पिता के मनोभाव को पढ़कर स्वयं को पिता के आनंद और सत्य के लिए राजकाज का त्याग कर दिया। उत्तम पुत्र या पुत्री वह है जो माता-पिता के रूख या मनोभाव को समझकर उसका निदान करे। जैसे हरिश्चंद्र का पुत्र रोहित, दशरथ के राम और शांतनु के भीष्म। मध्यम संतान वह है, जो माता-पिता के कहने पर कोई कार्यवाही करे और अधम संतान वह है जो माता-पिता की बातों और मनोभाव के विपरीत कार्य करे। ठीक इसी तरह पुत्र भी चार तरह के होते हैं : सेवक, उदासीन, महाजन और शत्रु। जो माता-पिता को मारे पीटे।धुंधकारी, दुर्योधन की तरह वह शत्रु संतान है जो पहले जन्म का शत्रु इस जन्म में बदला लेने आया है। महाजन पुत्र वह है जो जन्म के बाद खा-पीकर मृत्यु को प्राप्त कर लिया। वह महाजन है जो पहले जन्म का कर्ज वसूलने आया है। उदासीन संतान वह है जो माता-पिता के लिए कुछ न किया है। सेवा भी न किया। उत्तम संतान वह है जो माता-पिता की सेवा दास या सेवक की तरह किया है। भीष्म चरित्र के प्रसंग में पंडित रामदेव पांडेय ने आज राम जानकी मंदिर हाउसिंग कालोनी बरियातू में देवी भागवत की कथा के दौरान कही। यह कथा बारह अगस्त तक चलेगी, जिसमें आसपास के भक्त कथा सुन रहे हैं।
पूर्व जिप अध्यक्ष ने किया सम्मेलन का आयोजन, अभिभावकों से मांगा मार्गदर्शन, लिया आशीर्वादटीम एबीएन, कोडरमा। कोडरमा के अभिभावकों बुजुर्गों और युवाओं के साथ पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने सम्मेलन का आयोजन किया और मंचासीन सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। झुमरी तिलैया के चित्रगुप्त नगर स्थित वृंदा भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कहा कि मेरे इस संघर्ष के सफर में आपके आशीर्वाद से एक नयी ऊर्जा मिली है। मैं सदैव नतमस्तक हूं। आपके आगे जिन्होंने मुझे एक परिवार से स्नेह सहयोग व आशीर्वाद दिया। एकजुटता के साथ चल रहे हैं। आशीर्वाद का सम्मान हमेशा रखूंगी। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान ही हमारी संस्कृति का परिचायक है। हमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सदैव मार्गदर्शन मिलता है। देश में सर्वाधिक युवा है। बुजुर्ग उन्हें मार्गदर्शन देते रहे, तो भारत को अग्रणी देश बनाया जा सकता है। बुजुर्ग हमारे समाज के धरोहर होते हैं और उनसे हमें सीखने के साथ-साथ सहजने की जरूरत है। यदि हम परिवार में स्थायी सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो बुजुर्गों के सम्मान के साथ-साथ देवतुल्य माता-पिता का भी सम्मान करना होगा। इसी उद्देश्य को लेकर यह कार्यक्रम किया गया। कोडरमा में बेरोजगारी, पलायन, क्रेशर, ढीबरा कई समस्याएं हैं। लेकिन इन सवालों पर जनप्रतिनिधियों की कमी अखरती है। मौके पर प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष प्रो बीएनपी बर्णवाल, ओमप्रकाश राय, अजय अग्रवाल, धर्मेंद्र सिंह आदि को साफा पहनाकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम को संबोधित हुए समाजसेवी वीरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ नरेश पंडित, डॉ बिरेंद्र कुमार, साजिद हुसैन लल्लू, गुलाम जिलानी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश सलूजा, ट्रक एसोसिएशन के विजय सिंह, सेवानिवृत डीएसपी भार्गव, यशपाल सिंह गोल्डन, बालगोविंद मोदी, सुषमा सुमन, अविनाश सेठ, मुन्ना भदानी, संतोष सहाय, डोमचांच नगर पंचायत के निवर्तमान अध्यक्ष राजकुमार मेहता, उपाध्यक्ष पप्पू मेहता, वीरेंद्र साव, महेंद्र साव, संतोष साव, अरुण पासवान, पवन सिंह, प्रकाश रजक के अलावा कई वक्ताओं के कहा कि समस्याओं के प्रति संजीदा रहने में शालिनी गुप्ता का प्रयास सराहनीय है। लोगों के सुख-दुख में हमेशा साथ देने और कोडरमा के हित में चिंतित होकर प्रयास करने की सराहना की गयी और 2024 के चुनाव में कोडरमा की जरूरतें गिनायी। कार्यक्रम में कोडरमा जिला केडीसीए के दिनेश सिंह, संजय अग्रवाल, संजय सिंह, अमित कुमार, नरेंद्र सिंह चंदेल, सुशील अग्रवाल, अजय पांडेय, अजीत बर्णवाल, नवल प्रसाद, संदीप मुखर्जी, बसंत सिंह, मिलन शहबादी, संजू लंबा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
नारी का केश कंस और कौरव ने पकड़ा, तो समूल राष्ट्र का विनाश हो गयाजिस धर्म, पंथ, घर, समाज और राष्ट्र में नारी का शोषण-दोहन होता है वह नष्ट हो जाता हैबच्चों को संस्कार दें अधिक, सहूलियत कमटीम एबीएन, रांची। राम जानकी मंदिर बरियातू में पांचवें दिन की कथा में राजधानी के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य सह कथावाचक पंडित रामदेव पांडेय जी ने कहा कि अधर्म जब बढ़ता है, तो पृथ्वी देवताओं के पास गुहार लगाती है। राम और कृष्ण के जन्म के समय भी यही हुआ। देवता पृथ्वी की वेदना को समझकर मनुष्य बन जाते हैं। यह कथा कहती है कि जब अधर्मी बढ़ते हैं तो सबसे अधिक शिकार नारी और राजा होता है। दुनिया के सभी युद्ध, विभाजन, आंदोलन और विभीषिका का शिकार नारी होती है। पृथ्वी नारी स्वरूप है और धर्म की ग्लानि को नारी और ईश्वर दोनों समझते हैं। नारी अधर्म को रोक सकती है। राम, कृष्ण, शिवाजी और गुरु गोविंद जैसे पुत को जन्म देकर या स्वयं दुर्गा-काली बनकर, सनातन की गौरव नारी है। सती अनुसूया से लेकर लक्ष्मी बाई, अहिल्याबाई, होलकर तक, बहन देवकी का केश जब कंस पकड़ा और द्रोपदी का केश दुशासन ने पकड़ा उसका परिणाम आप सब जानते हैं। कृष्ण ने छठी के दिन जहर लेकर आयी पुतना को माता की गति दी। कृष्ण ने भोंमासुर की जेल में बंद सोलह हजार नारियों को मर्यादा दिया और पति होने का नाम दिया। लाचार मजबूर द्रोपदी का भाई बनकर न्याय दिलाया। परंतु नारी अपने बच्चों के लिए प्रथम आचार्य है। इन्हें चाहिए कि सप्ताह में एक दिन बच्चों को मंदिर और कथा भजन कीर्तन में जरूर लें जायें। जो माता बेटा-बेटी में संस्कार नहीं देते, वही बाद में पुलिस, नेता, पंडित, मुल्लों के पीछे बच्चों के लिए रोती है। माता सब बच्चों संस्कार दें, तब सहूलियत दें। यह कथा बारह अगस्त तक चलेगी।
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