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बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई के लिए ठोस और समन्वित रणनीति जरूरी
Published / 2023-10-13 20:10:27
बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई के लिए ठोस और समन्वित रणनीति जरूरी

बाल विवाह रोकने के लिए बचपन बचाओ आंदोलन की पहल पर हुए सम्मेलन में सभी ने एक सुर से की मांगएबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना के साथ मिल कर 2030 तक देश से बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लक्ष्य को हासिल करने के उपायों पर चर्चा के लिए सम्मेलन का आयोजन किया। बिहार में बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए काम कर रहे 31 जिलों के तकरीबन तीन दर्जन गैर सरकारी संगठन भी इसमें शामिल हुए। सम्मेलन में सभी हितधारकों ने बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने की कड़ी में बिहार को बाल विवाह से मुक्त करने के उपायों का खाका तैयार करने पर गहन विचार विमर्श किया।मौके पर मुख्य अतिथि महिला एवं बाल कल्याण निगम, बिहार के निदेशक राजीव वर्मा, विशिष्ट अतिथि एवं बिहार राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण (बीएसएलएसए) की संयुक्त सचिव धृति जसलीन शर्मा, सशस्त्र सीमा बल के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के रंजीत और बीएससीपीसीआर की पूर्व अध्यक्ष निशा झा सहित अन्य लोग मौजूद थे। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश में 51,57,863 लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की होने से पहले हो गया गया था। बिहार में कुल 12.9 लाख बच्चों के बाल विवाह हुए। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के अनुसार देश में 20 से 24 साल की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष का होने से पूर्व ही हो गया था जबकि बिहार में यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा है जहां 40.8 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पूर्व हो गयी थी। हालांकि बिहार सरकार कई लक्षित कदमों और योजनाओं के जरिए पूरी गंभीरता से बाल विवाह की रोकथाम के प्रयास कर रही है। सरकार ने जुलाई 2022 में एक अधिसूचना भी जारी की जिसके अनुसार किसी भी गांव से बाल विवाह की सूचना मिलने पर गांव के मुखिया को इस गैरकानूनी कृत्य के लिए जवाबदेह ठहराया जायेगा। इन उपायों से बाल विवाह की रोकथाम में कुछ हद तक मदद मिली है।बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने सम्मेलन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा, पिछले साल पूरे देश में एक अप्रत्याशित और आश्चर्यचकित कर देने वाली प्रतिक्रिया देखने को मिली। देश भर के 7028 गांवों से 76,000 महिलाएं और बच्चे मशाल लेकर एक साथ सड़कों पर उतरे और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई। बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई और इसके पूरी तरह से खात्मे के लिए हमें एक बहुस्तरीय और बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। देश के 20 राज्यों में आयोजित होने वाले ये सम्मेलन 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में एक और कदम हैं। इन सम्मेलनों के जरिये  हम सभी हितधारकों को साथ लाना चाहते हैं कि ताकि इस अपराध के खिलाफ हम सभी साझा लड़ाई लड़ सकें। इस सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ाई में हम कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे और इसमें शामिल लोगों ने जिस तरह की प्रतिबद्धता दिखाई है, उससे हमारे संकल्प और हौसले को और बल मिला है।मुख्य अतिथि महिला एवं बाल कल्याण निगम, बिहार के निदेशक राजीव वर्मा ने राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए बहुआयामी प्रयासों पर जोर देने की वकालत करते हुए कहा कि कानूनों पर प्रभावी तरीके से अमल के साथ लोगों में इन कानूनों के बारे में जागरूकता का प्रसार, बच्चियों की आर्थिक सुरक्षा, उनकी शिक्षा और कौशल विकास जैसी चीजों को समाहित करते हुए एक समन्वित रणनीति अपनाने की आवश्यकता है ताकि इस बुराई के खात्मे के लिए सभी विभाग तालमेल के साथ एकजुट होकर काम करें। यद्यपि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसके खात्मे के लिए प्रयास कर रही हैं लेकिन नागरिक समाज अभी भी बाल विवाह के मामलों की सूचना देने आगे नहीं आ रहा है। हमें लोगों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है।बाल विवाह के खात्मे के लिए मौजूदा कानूनों को लागू करने में आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए विशिष्ट अतिथि एवं बिहार राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण (बीएसएलएसए) की संयुक्त सचिव धृति जसलीन शर्मा ने कहा- बाल विवाह के खिलाफ मौजूदा कानून काफी सख्त और इसे रोकने में सक्षम है लेकिन समस्या इनके अमल की है। बाल विवाह की बुराई में शामिल लोग अपने बीच के ही हैं। इसलिए जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चला कर लोगों को बाल विवाह के बच्चों पर होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।सशस्त्र सीमा बल के डीआईजी के रंजीत ने बाल विवाह एवं बाल दुर्व्यापार (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी बाल विवाह के पीछे मुख्य कारण हैं। जाति-पाति में बंटा रूढ़ीवादी समाज और कम विकास की समस्या के अलावा एक अन्य कारण जो कम महत्वपूर्ण नहीं है, वह है बड़े शहरों के साथ रेल संपर्क से जुड़ा होना। अगर हम बाल विवाह से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में कौशल विकास पर ध्यान दें तो गरीबी और बेरोजगारी की समस्या का निदान किया जा सकता है और नतीजे में यह बाल विवाह और बाल दुव्यार्पार जैसी बहुत सी सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए राजेश परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

ध्यान-योग से सभी पापों का नाश : स्वामी गंगाधर
Published / 2023-10-13 20:08:10
ध्यान-योग से सभी पापों का नाश : स्वामी गंगाधर

एबीएन सोशल डेस्क। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वावधान में महर्षि मेंही आश्रम चुटिया, रांची में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर में आज तेरहवें दिन के सत्संग में दूर-दूर से पधारे साधकों एवं भक्तों को ऋषिकेश आश्रम से आये हुए पूज्य स्वामी गंगाधर जी महाराज, आश्रम के वरिष्ठ स्वामी श्री निर्मलानंद जी महाराज व चतरा आश्रम के स्वामी डॉ रविंद्रनाथ ने संबोधित किया। पूज्य स्वामी गंगाधर जी महाराज ने कहा कि ध्यान भारतीय मनोवियों की एक अनुपम देन है। शून्यगत मन को ध्यान कहते हैं। ध्यान के माध्यम से साधक अपने मन पर नियंत्रण करते हैं। मन की चंचलता के कारण मनुष्य को सुख और शांति नहीं मिलती है। ध्यान से मनोनिरोध किया जाता है। मन पर विजय प्राप्त होने से सभी इंद्रियों पर विजय पाया जाता है। आगे उन्होंने कहा कि ध्यान योग के अतिरिक्त इस संसार में पाप का नाश करने कोई दूसरा तत्व नहीं है। महर्षि मेंही आश्रम के स्वामी पूज्य श्री निर्मलानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि संसार के प्राय: सभी धर्मों में ध्यान की पद्धति है। वैदिक धर्मावलंबी इसे ध्यान, इस्लाम धर्मावलंबी इसे मराकवाह और इसाई धर्म वाले इसे मेडिटेशन कहते हैं। मन को वश में करने के लिए इश्वरवाचक नाम का जप एवं नाम से संबंधित रूप का ध्यान किया जाता है। स्थूल से सूक्ष्म में प्रवेश करने के लिए बिंदु ध्यान और शब्द साधना की आवश्यकता है। संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने इसी को मानस जप, मानस ध्यान, दृष्टि योग और नादानुसंधान कहते हैं। आगे उन्होंने कहा कि ध्यान में सफलता के लिए गुरुकृपा, सच्ची लगन व दृढ़ अभ्यास की आवश्यकता है। संतों ने मानवमात्र के लिए इसे उपयोगी कहा है। संतमत सत्संग से अंतर्साधना करने की प्रेरणा हो जाती है जिसे करने पर ही मानव अपना परम कल्याण कर सकते हैं। ज्ञात हो कि शिविर में प्रतिदिन स्तुति प्रार्थना, भजन गायन, सत्संग योग एवं रामचरितमानस का पाठ एवं प्रवचन के कार्यक्रम होते हैं। साधकों एवं साधू संतों के लिए प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था होती है। शहर एवं अन्य जगहों के श्रद्धालु गण इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु समिति के पदाधिकारी गण पूरी तत्परता से कार्य कर रहे हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता से लुप्त होता मुंडाओं का संबंध
Published / 2023-10-12 21:47:32
सिंधु घाटी सभ्यता से लुप्त होता मुंडाओं का संबंध

अर्चना टोप्पोएबीएन सोशल डेस्क। सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पढ़ते पढ़ते अचानक उसके चित्र लिपियां एवं मोहरों ने मेरा ध्यान खींचा उत्सुकता हुई तो उसे डीकोड करने की मेरे नाना ने बचपन में मुझे मुंडाओं के इतिहास के बारे में बताया था। उन्होंने यह सब अपने पुरखों से सुना था। इस समय आप सबके साथ बांटना चाहती हूं। अंग्रेजों के समय से छोटा नागपुर के आदिवासी के विषय में कुछ लोगों ने पुस्तक लिखी थी। उसमें मुंडा समुदाय के सिंधु घाटी सभ्यता के साथ संबंध होने के प्रमाण मिलते हैं। उन पुस्तकों को बाद में कहां रखा गया है यह मुझे ज्ञात नहीं है। इसलिए जिज्ञासा बस मैं इंटरनेट से इस विषय के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए सर्च करने लगी।कई सारी रिसर्च आर्टिकल स्टूडेंट और डॉक्यूमेंट के अध्ययन के बाद जैसे उनसे कांटेक्ट प्रॉब्लम मुंडारियन बाय द आफ मैन हो विद द इंडस वैली सिविलाइजेशन बाय टोनी जोसेफ दिसंबर 23 2017 का हिंदू इत्यादि सहित कई बुद्धिजीवी वर्ग जो सिंधु घाटी सभ्यता पर लिख रहे थे। कुछ खास कुलू नहीं मिलने के वजह सेवे  निर्धारित नहीं कर पा रहे थे कि वास्तव में सिंधु घाटी सभ्यता पर कौन रहता था। वैदिक आर्य द्रविडियन मुंडा जनजाति या कोई और। पर एक बात अवश्य है कि उनके शोध में मुंडा जनजाति के पूर्वज जरूर शामिल है। इतने सालों के गांव के अवशेषों के दिए निर्देश के पश्चात एक कड़ी मुंडा जनजाति की ओर साफ इशारा करती है।हमारे पूर्वजों का मानना था कि मुंडा जनजाति ही सिंधु घाटी में बात करती थी मैं इस विषय पर क्रमश: प्रकाश डालना चाहती हूं। मुंडा सनदायक खूटकटी समुदाय है। अर्थात जब वह एक जगह से दूसरे जगह को जाते थे तभी जंगल के पेड़ों को काटते हुए। उसे रहने और खेती लायक बनाते जाते थे।उससे यह समझ में आता है कि जब यह भारत में एक जगह से दूसरी जगह फैल रहे थे तब से उसे जगह पर सबसे पहले बसने वाले होते थे । उनके बाद दूसरे समुदाय के पीछे आते थे दूसरी बात क्योंकि मुंडा जनजाति किसी जगह पर बसने वाले पहले होते थे। इसलिए उसे जगह का नामकरण भी हुए करते थे। प्रकृति पूजक और प्रकृति प्रेमी होने के वजह से हुए नामकरण भी प्राकृतिक चीजों के आधार पर ही करते थे। जैसे एक जगह का भौगोलिक स्थिति पशुओं पक्षियों पेड़ों और उसे जगह की खासियत के आधार पर ऐसा किया जाता था। उदाहरण के लिए रांची के डोरंडा क्षेत्र का नाम तुरंग दा गाता हुआ जिसका अर्थ था बहता हुआ पानी। क्योंकि वहां एक छोटी सी नदी बहती थी जो उसे समय के शांत बात में अपनी अपनी की आवाज में गाती हुई प्रतीत होती थी।इसी तरह कई और जगहें हैं जो वक्त के साथ - साथ अपना असली नाम का स्वरूप एवं मतलब खो रही हैं। हमारे पूर्वजों कहना है कि सिंधु घाटी सभ्याता वासी होने पर ही वहाँ का नामकरण मुंडा भाषा के आधार पर ही किया गया था। मोहनजोदड़ो का वास्तविक नाम मोइंजो दारू है। मोइंजो एक पेड़ का नाम है जो वहाँ पाया जाता था। दारू का मतलब पेड़ है। इसी तरह हड़प्पा का असली नाम हड़का बा है। हम अनि बूढ़ा ओ वा मतलब बाबा। सिंधु घाटी से होते हुए मुंडा लोग कश्मीर विंध्याचल और गंगा के समतल से होते हुए मध्य प्रदेश फाररखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल उड़ीसा में फैल गए। कश्मीर का कासोम बार था ! फासोम लंबे घास (जो में पाए जाते हैं) और बोर यानि लेबे घासों का जंगलनामका शुरूआती नाम शानि सॉफ औरअब कासोम बार से कश्मीर बन गया है। वैसे ही विंध्याचल बिंग दोशा था ।ब्रिंग दोया मतलब रास्ता है कि जबकहा जातायानि साँप जैसा रास्त विंध्याचल की पहाड़ियसे मुंडा लोग गुजर रहे थे तो पहाड़ों के बांच की घाटी टेढ़ी मेढ़ी लगी और उन्हें साँप के तरह -साँप जैसा रास्ताऔर इसीलिए उसका नामकरण बिंग दोया किया गया जो बाद में घिस घिस कर बिंध्याचल हो गया तरह कई और नाम है जो समय के अपना मूल स्वरूप खो चुके हैं। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर झारखंड तक कई नदी और स्थान है कई पठार और पर्वत हैं जो झारखंड के हमारे मुंडा जनजाति के इतिहास से गहरा संबंध रखता है। समय के साथ-साथ यह मिटता जा रहा है। मुंडाओं के अतीत सेजुड़ी गहरी सच्चाई...।

नर-तन की उपादेयता प्रभु भजन के साथ-साथ समाज सेवा में है : स्वामी गंगाधर
Published / 2023-10-12 21:30:09
नर-तन की उपादेयता प्रभु भजन के साथ-साथ समाज सेवा में है : स्वामी गंगाधर

पक्ष ध्यान साधना शिविर का 12वां दिनटीम एबीएन, रांची। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वाधान में महर्षि मेंही आश्रम, चुटिया में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर के बारहवें दिन के सत्संग में प्रवचनकर्ताओं ने मानव शरीर की उपादेयता पर प्रकाश डाला। देवभूमि ऋषिकेश से आये स्वामी पूज्य श्री गंगाधर जी महाराज ने सत्संग में उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि मानव शरीर को पाने के लिए देवता भी लालारत रहते हैं। मानव-तन प्राप्त कर प्रभु का भजन करना चाहिए। इस शरीर में सभी देवता, सभी तीर्थ व सभी विद्याएं विद्धमान है। मानव तन प्राप्त कर हमें इसे सिर्फ विषयों में नहीं लगाना चाहिए। वरन निर्विषय तत्व को प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। भगवान श्री राम ने भी अपनी प्रजा को यहीं उपदेश दिया था।  महर्षि मेंही आश्रम, चुटिया के मुख्य स्वामी पूज्य श्री निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि मानव तन की उपादेयता प्रभु भजन में है। इस शरीर में स्वर्ग, नरक और मोक्ष में जाने का मार्ग है। गुरु युक्ति से साधन कर साधक मोक्ष को प्राप्त कर सकते है। आगे उन्होंने कि परमात्मा की सृष्टि में मानव तन सबोत्कृष्ट है। इसको प्राप्त कर हम सबों परमात्मा की भक्ति करने के साथ-साथ अपने माता-पिता, समाज व देश की सेवा अवश्य करनी चाहिए। जहां तक बन पड़े दीन-हीन व्यक्तियों की सहायता करना मानव-मात्र का परम कर्त्तव्य होना चाहिए। हमारे संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज का भी उद्घोष है कि यही मानुष देह समैया में करू परमेश्वर में प्यार इस अवसर पर करीब साठ साधक ध्यानाभ्यास कर रहे हैं। साथ ही सैकड़ों श्रद्धालु सत्संग लाभ ले रहे हैं। अब यह शिविर समापन की ओर है। अत: समिति सभी श्रद्धालुओं से आग्रह करती है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में आश्रम पहुंचकर सत्संग का लाभ उठायें एवं पुण्य के भागी बनें।

व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : मायूसी के हालात में उम्मीद जगाती किताब
Published / 2023-10-11 18:38:57
व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : मायूसी के हालात में उम्मीद जगाती किताब

पुस्तक की बतायी कार्य योजना पर हुआ अमल तो 2030 तक खत्म हो सकती है बाल विवाह की बुराईबाल विवाह के समग्र उन्मूलन का खाका पेश करने वाली भुवन ऋभु की किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन का झारखंड के 24 जिलों में लोकार्पणएबीएन सोशल डेस्क। देश में जहां हर साल लाखों नाबालिग बच्चियों को शादी का जोड़ा पहना दिया जाता है, वहां बाल विवाह से मुक्ति का सपना दूर की कौड़ी लगना स्वाभाविक है। यूनीसेफ का अनुमान है कि भारत में बाल विवाह की दर यही रही जो पिछले दस साल से है तो 2050 तक जाकर भारत में बाल विवाह की दर घट कर छह प्रतिशत पर आ पाएगी।मायूसी के इस हालात में भुवन ऋभु की किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू एंड चाइल्ड मैरेज 2030 तक भारत में बाल विवाह की दर 5.5 प्रतिशत तक लाने का एक समग्र रणनीतिक खाका पेश करती है। ये संख्या वो देहरी है जहां से बाल विवाह का चलन अपने आप घटने लगेगा और लक्षित हस्तक्षेपों पर निर्भरता भी कम होने लगेगी। बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक ठोस कार्य योजना और रणनीतिक खाका पेश करती भुवन ऋभु की किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन का अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर झारखंड के 24 जिलों में लोकार्पण किया गया।प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और महिलाओं एवं बच्चों के हकों की लड़ाई लड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भुवन ऋभु महिलाओं एवं बच्चों के लिए काम करने वाले 160 गैर सरकारी संगठनों के सलाहकार भी हैं। इस किताब का लोकार्पण बाल विवाह पीड़ितों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों और नागरिक समाज संगठनों से जुड़े लोगों ने किया। लोकार्पण के दौरान बाल विवाह पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि बाल विवाह की वजह से किस तरह उन्हें शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, किशोरावस्था में गर्भवती होने और नवजात बच्चे की मौत जैसी कितनी ही असंख्य और असह्य पीड़ाओं का सामना करना पड़ा।व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन नागरिक समाज और महिलाओं की अगुआई में सबसे ज्यादा प्रभावित करीब 300 जिलों में चल रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के लक्ष्यों को 2030 तक हासिल करने और इस प्रकार हर साल 15 लाख लड़कियों को बाल विवाह के चंगुल में फंसने से बचाने के प्रयासों में एक अहम हस्तक्षेप है। किताब इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक योजना की रूपरेखा भी पेश करती है। यह पिकेट रणनीति के माध्यम से सरकार, समुदायों, गैर सरकारी संगठनों और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील बच्चियों से नीतियों, निवेश, संम्मिलन, ज्ञान-निर्माण और एक पारिस्थितिकी जहां बाल विवाह फल-फूल नहीं पाए और बाल विवाह से लड़ाई के लिए निरोधक और निगरानी तकनीकों की मांग पर एक साथ काम करने का आह्वान करती है।बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन को एक सामयिक और अहम हस्तक्षेप बताते हुए कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के कंट्री हेड रवि कांत ने कहा कि नागरिक समाज और सरकार, दोनों ही बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरे समर्पण से काम कर रहे हैं। लेकिन जब तक इस अपराध से मुकाबले के लिए जब तक हमारे पास एक समन्वित योजना नहीं होगी, तब तक बाल विवाह के खिलाफ टिपिंग प्वाइंट के बिंदु तक पहुंचना एक मुश्किल काम होगा। यह किताब हमें एक जरूरी रणनीतिक योजना मुहैया कराने के साथ तमाम हितधारकों के विराट लेकिन बिखरे हुए प्रयासों को एक ठोस आकार और दिशा देती है।बाल विवाह के खात्मे के लिए देश के 300 से ज्यादा जिलों में 160  गैर सरकारी संगठन मिल कर 16 अक्तूबर 2023 को बाल विवाह मुक्त दिवस मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। ये सभी संगठन इस दिन देश के हजारों गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रमों, नुक्कड़ नाटकों, बाल विवाह के खिलाफ प्रतिज्ञाओं, कार्यशालाओं, मशाल जुलूस और तमाम अन्य गतिविधियों के माध्यम से संदेश दिया जाएगा कि बाल विवाह हर हाल में खत्म होना चाहिए। 16 अक्तूबर 2023 बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ है और तब से लेकर अब तक सामुदायिक सदस्यों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों के प्रयासों से हजारों बाल विवाह रोके गये हैं और लाखों लोगों ने अपने समुदायों में बाल विवाह नहीं देने की शपथ ली है।राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है झारखंड में बाल विवाह का आंकड़ाराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के अनुसार देश में 20 से 24 साल की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष का होने से पूर्व ही हो गया था जबकि झारखंड में यह औसत 32.2 प्रतिशत है। 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में हर साल 3.59 लाख बच्चों का विवाह 18 वर्ष की उम्र पूरी करने से पहले ही हो जाता है। यह एक गंभीर चिता की बात है और बच्चियों को बाल विवाह का शिकार होने से बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

माया ईश्वर की दासी है : स्वामी गंगाधर
Published / 2023-10-10 18:33:48
माया ईश्वर की दासी है : स्वामी गंगाधर

एबीएन सोशल डेस्क। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वावधान में महर्षि मेंही आश्रम, चुटिया में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर में आजचल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर के दसवें दिन सद्ग्रंथों के पास से यह विदित हुआ कि आज के सत्संग का पतिपाद्द माया है। माया क्या है और आध्यात्म क्षेत्र में इसका क्या प्रभाव है? ईश्वर भक्ति में यह क्या क्या असर डालती है? इन्ही सब बातों का खुलासा सत्संग में उपस्थित साधु महात्माओं ने किया। देवभूमि ऋषिकेश से आए पुज्यस्वामी श्री गंगाधर महाराज जी ने कहा कि मैं - मेरा, तैं- तेरा सब माया है। श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी लिखा है:-  गो, गोचर जंह लगी मन जाई, सो सब माया जानहं भाई। आगे उन्होंने इस विषय की शुद्धता को स्पष्ट करते हुए कहा कि स्थल, सूक्ष्म कारण और महाकारण- ये चारों जड़ शरीर है। इसके अंदर रहने पर सभी इंद्रियां नहीं छूटती हैं। इंद्रियों के साथ रहकर जो देखा या सुना जाता है झ्र वह परमात्मा की माया है। माया में रह कर जीव न अपनी पहचान कर पाता है और ना ही परमात्मा का साक्षात्कार कर पाता है। इन चारों शरीरों से परे एक पांचवा शरीर कैवल्य शरीर है। यही शरीर परमात्मा का अत्यंत निकटवर्ती शरीर है। नादानुसंधान के द्वारा सूरत सब इंद्रियों से छूटकर अकेले कैवल्य शरीर में पहुंचकर अपना और परमात्मा का भी साक्षात्कार करती है। कैवल्य मंडल में परमात्मा का दर्शन होता है लेकिन इनमें मिलना नहीं। अत: यहां पर द्वैतता बनी रहती है। इसके आगे एक सार शब्द में लीन होने पर द्वैतता मिट जाती है और जीव-जीव एक हो जाता है झ्र जो साधना की पराकाष्ठा है। ज्ञातव्य है कि इस साधना शिविर में विभिन्न प्रांतों से आए सैंकड़ों साधक भक्ति में लीन हैं और सत्संग का भी लाभ ले रहें है। नगर के सभी धर्मप्रेमियों से हमारी समिति आग्रह करती है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में  पहुंचकर प्रवचन से लाभ उठाए और पुण्य के भागी बनें।

श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी रणदीरा एकादशी
Published / 2023-10-10 18:29:53
श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी रणदीरा एकादशी

टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पर स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 10 अक्टूबर 2023 को आश्विन कृष्ण पक्ष की रणदीरा एकादशी पर्व अत्यंत श्रद्धा सहित भक्ति में वातावरण में आयोजित किया गया।  प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया गया।साथी मंदिर में विराजमान बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी इस अवसर पर विशेष शृंगार किया गया। प्रात: 8 बजे श्रृंगार आरती के समय से ही प्रभु के दर्शन करने के लिए भक्तों की अपार भीड़ अनावृत बनी रही। लाल गुलाब, जूही, बेला, मोगरा रजनीगंधा व गेंदा के फूलों से श्री श्याम प्रभु का मनोहारी श्रृंगार किया गया।  रात्रि 9 बजे से श्याम प्रभु के जयकारों के बीच अखंड पावन ज्योत प्रज्वलित की गई, भक्तगण मंगल दर्शन कर ज्योति आहुति प्रदान कर मनोवांछित फल मांग रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वंदना के साथ संगीत में संकीर्तन प्रारंभ किया।  तुझको मनायेंगे भजन तेरा गायेंगे तेरा हूं दिवाना दिलदार सांवरे खड़ा हूं तेरी चौखट पर शरण में ले लो अब प्यारे किस्मत वाले को मिलता है श्याम तेरा दरबार इत्यादि भावपूर्ण भजनों ने पूरे वातावरण को श्याम मय बना दिया।  मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा एवम केसरिसा दूध व मगही पान का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।  आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, सुदर्शन चितलंगियां, बालकिशन परसरामपुरिया, नितेश केजरीवाल, जीतेश अग्रवाल, नितेश लाखोटिया, विकाश पाडिया का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची श्री श्याम मंडल के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

11 को मनेगा गुरुनानक देव जी का ज्योति ज्योत पर्व
Published / 2023-10-09 21:54:53
11 को मनेगा गुरुनानक देव जी का ज्योति ज्योत पर्व

टीम एबीएन, रांची। श्री गुरुनानक देव का ज्योति ज्योत पर्व गुरुद्वारा श्रीगुरुसिंह सभा, मेन रोड के तत्वावधान में बुधवार को मनाया जायेगा। इस समय दिन के 11:30 से 2:30 बजे तक निर्धारित है। इसकी समाप्ति के बाद गुरु का लंगर अटूट बटेगा। गुरुद्वारा साहिब के महासचिव सरदार गगनदीप सिंह सेठी ने बताया कि रागी जत्था भाई अनंतवीर सिंह यूएसए वाले भी आ रहे हैं। वहीं गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व को लेकर 15 अक्टूबर को गुरुद्वारा साहिब मेन रोड में आम सभा होगी।

नवरात्रि में जन्मी बेटियों को सम्मानित करेगी प्रेरणा शाखा
Published / 2023-10-09 20:15:40
नवरात्रि में जन्मी बेटियों को सम्मानित करेगी प्रेरणा शाखा

नवरात्रि में प्रेरणा शाखा बेटी के जन्म पर अस्पताल में जाकर सम्मान करने का लिया निर्णयटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। प्रेरणा शाखा की एक बैठक श्री अग्रसेन भवन में हुई। जिसमें अक्टूबर और नवंबर माह में जनसेवा का कार्यक्रम आयोजित करने पर चर्चा हुई। बैठक में सर्वप्रथम शाखा अध्यक्ष श्रेया केडिया ने सभी सदस्यों का स्वागत किया। इसके बाद कोषाध्यक्ष सीए गुंजन अग्रवाल ने आय-व्यय का ब्यूरा प्रस्तुत किया। सचिव सारिका लड्ढा ने कहा कि प्रांतीय और राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत अगले एक माह में जनसेवा के कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इसके तहत नवरात्रि में जन्म लेने वाली कन्याओं का उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। जिसके अंतर्गत बेटी के माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी जो उपस्थित रहेंगे उन्हें भी प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित किया जाएगा।आगे उन्होंने कहा कि नवरात्रि में समाज नौ कन्याओं का पूजन करता है। और दूसरी ओर आज भी इस सभ्य समाज में भ्रूण हत्या हो रही है। ऐसे में मारवाड़ी युवा मंच राष्ट्रीय स्तर पर कन्या भ्रूण संरक्षण के तहत बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम और बेटी नहीं तो बहू कहां से लाओगे और सुनी कलाई में राखी कौन बांधेगा।इसके प्रति युवाओं को सजकता के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। बैठक में 2 नवंबर से 10 नवंबर के बीच आनंद सबके लिए के तहत कई स्थलों पर जरूरतमंद एवं उनके अभिभावकों के साथ दीपोत्सव कार्यक्रम मनाया जायेगा। बच्चों के साथ दिवाली का त्यौहार मनाया जायेगा और साथ ही उन्हें मिठाई भी उपलब्ध करायी जायेगी। वहीं छठ व्रतियों के लिए सामग्री एवं ठंड को देखते हुए कंबल वितरण भी किए जाएंगे। बैठक के उपरांत इस माह में आने वाले सदस्यों का जन्मदिन केक काटकर मनाया गया।मौके पर उपाध्यक्ष नेहा हिसारिया, उप सचिव मीना हिसारिया, मिनी हिसारिया, कृतिका मोदी, नेहा बजाज, अनु संघई, निशा संघई, ज्योति अग्रवाल, प्रगति चौधरी, स्नेह अग्रवाल, सीमा सरावगी आदि उपस्थित थे। राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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