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इजराइल-हमास की जंग में बच्चों की सुरक्षा की जाये सुनिश्चित
Published / 2023-10-20 18:56:58
इजराइल-हमास की जंग में बच्चों की सुरक्षा की जाये सुनिश्चित

कैलाश सत्यार्थी सहित 29 नोबेल विजेताओं ने की अपीलएबीएन सोशल डेस्क। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी सहित 29 नोबेल विजेताओं ने एक साझा बयान में इजराइल-हमास के बीच जारी जंग में पिस रहे निर्दोष मासूमों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और कत्लोगारद के इस माहौल में उनकी देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहानुभूतिपूर्ण कदमों एवं कार्रवाइयों का आग्रह किया है। कैलाश सत्यार्थी की पहल पर 29 नोबेल विजेताओं ने अपने बयान में दुनिया को याद दिलाया कि इजराइल और गाजा के बच्चे भी हमारे बच्चे हैं तथा उन्हें तत्काल सुरक्षा एवं मानवीय सहायता की आवश्यकता है। नोबेल पुरस्कार की सभी छह श्रेणियों के इन पुरस्कार विजेताओं ने मांग की कि सभी अपहृत बच्चों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए और बच्चों को युद्धस्थल से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाना चाहिए। बच्चों को पानी, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और आश्रय से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्हें और दूसरे जरूरतमंद व्यक्तियों को तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाई जानी चाहिए। संभवत: दुनिया में यह पहली बार हुआ है जब इतने नोबेल विजेताओं ने एक साथ मिल कर जंग के शिकार बच्चों की सुरक्षा और उनकी मदद के लिए आवाज उठायी है।  नोबेल विजेताओं ने बयान में संयुक्त रूप से कहा, करुणा सिर्फ एक समूह के बच्चों के लिए ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। केवल एक समूह के बच्चों की मौत पर अफसोस जताया जा रहा है, विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और नेतागण उस पर बातें कर रहे हैं। लेकिन हमारे दिलों में निश्चित रूप से, दोनों ही पक्ष के बच्चों के लिए एक जैसी पीड़ा है। गाजा पट्टी में रहने वाले दस लाख बच्चों और इजराइल में रहने वाले तीस लाख बच्चों के जीवन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उनकी हिफाजत की जानी चाहिए।आने वाले हफ्तों में जान माल के और भी गंभीर नुकसान के आसन्न खतरे के बारे में दुनिया को चेतावनी देते हुए बाल अधिकार योद्धा कैलाश सत्यार्थी ने कहा, हम सभी से यह याद रखने का अनुरोध करते हैं कि इन युद्धों में बच्चों की रत्ती भर भूमिका नहीं है और वे कहीं से भी मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। न्यायसंगत और स्थायी शांति की दिशा में बढ़ने के लिए हमें सभी पीड़ित बच्चों के प्रति करुणा की आवश्यकता है। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, शांति का कोई रास्ता नहीं होता, शांति ही रास्ता है।नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने सभी से इजराइल, फिलिस्तीन और उससे आगे पूरी दुनिया में स्थायी शांति के लिए उनकी अपील में शामिल होने और तीन मोमबत्तियां जलाने का आग्रह किया। बयान में कहा गया- आज रात, इस घटाटोप अंधेरे के बीच, हम तीन मोमबत्तियां जलायेंगे - एक इजराइल में मारे गये और अपहृत बच्चों के लिए, एक गाजा में बमबारी और लड़ाई में मारे गये और अपंग हुए सभी बच्चों के लिए और एक मानवता और आशा व उम्मीद के लिए। उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनी बच्चे हमारे बच्चे हैं। इजरायली बच्चे हमारे बच्चे हैं। यदि हमने बच्चों को युद्ध की बलि चढ़ने दी, तो हम खुद को सभ्य नहीं मान सकते। हमारी प्रत्येक व्यक्ति से अपील है कि वह यह न भूले कि बच्चे किसी युद्ध का कारण नहीं होते। और इन परिस्थितियों के लिए वे रत्तीभर भी जिम्मेवार नहीं हैं।नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के साथ इस बयान पर दस्तखत करने वालों में जोस मैनुअल रामोस-होर्टा (1996 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), ऑस्कर एरियस (1987 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), डॉ स्टीवन चू (भौतिकी में नोबेल पुरस्कार विजेता), डॉ बैरी बैरिश (2017 भौतिकी का नोबेल), डॉ जोहान डेसेनहोफर (1988 रसायन विज्ञान का नोबेल), शिरीन इबादी (2003 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), डॉ मोहम्मद अलबरदेई (2005 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), लेमाह ग्बोवी (2011 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), डॉ रिचर्ड हेंडरसन (2017 रसायन विज्ञान का नोबेल), डॉ तासुकु होंजो (2018 चिकित्सा का नोबेल), डॉ लुईस इग्नारो (1998 चिकित्सा का नोबेल), काज़ुओ इशिगुरो (2017 नोबेल साहित्य पुरस्कार), तवाक्कोल करमन (2011 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), डॉ मार्टिन कारप्लस (2013 रसायन विज्ञान का नोबेल), डॉ ब्रायन कोबिल्का (2012 रसायन विज्ञान का नोबेल), डॉ युआन ली (1986 रसायन विज्ञान का नोबेल), डॉ एरिक मास्किन ( 2007 अर्थशास्त्र में नोबेल), ओलेक्सांद्रा मतविइचुक (2022 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), रिगोबर्टा मेन्चू तुम (1992 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), डॉ जियोर्जियो पेरिसी (2021 भौतिकी में नोबेल पुरस्कार विजेता), क्रिस्टोफर ए पिसाराइड्स (2010 अर्थशास्त्र का नोबेल), डॉ वेंकटरमण रामकृष्णन (2009 रसायन विज्ञान में नोबेल), पीटर रैटक्लिफ ( 2019 नोबेल चिकित्सा पुरस्कार), डॉ रिचर्ड जे रॉबर्ट्स (1993 नोबेल चिकित्सा पुरस्कार), कोराज़ोन वाल्डेज़ फैब्रोस और फिलिप जेनिंग्स (अंतरराष्ट्रीय शांति ब्यूरो, 1910 नोबेल शांति पुरस्कार), जोडी विलियम्स (1997 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता) और सर ग्रेगरी विंटर (2018 रसायन विज्ञान में नोबेल) शामिल हैं।

इसीलिए न कहते हैं कि जरूरत से ज्यादा धर्मनिरपेक्ष मत बनो...
Published / 2023-10-20 15:33:01
इसीलिए न कहते हैं कि जरूरत से ज्यादा धर्मनिरपेक्ष मत बनो...

सपोलों को दूध पिलाने की कीमत क्या होती हैएबीएन सोशल डेस्क। कल रात इजराइल के एक चैनल पर कनाडा मूल की यहूदी 74 साल की महिला विवियन सिल्वर की कहानी देखी।।इस महिला ने अपना पूरा जीवन फिलिस्तीन के मुसलमानों को दे दिया। यह गाजा में दो बड़े निशुल्क हॉस्पिटल चलती थी। 200 एंबुलेंस का एक फ्लीट मुफ्त में गाजा वालों के लिए ऑपरेट करती थी। इसे पूरी दुनिया से सैकड़ो शांति पुरस्कार मिले। दो बार यह महिला नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुई और यह हमेशा इजराइल सरकार की सबसे बड़ी विरोधी थी। यहूदी होते हुए भी हर एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसने इजराइल की सरकार और सेना को दरिंदा कहा, अत्याचार करने वाला कहा। यह पूरी दुनिया से डोनेशन लाकर फिलिस्तीन वालों पर गाजा वालों पर खर्च करती थी। अब पता यह चला कि हमास वाले इसे भी उठा ले गये और बोले तुम डरो मत हम बड़े ईमान वाले हैं और आज सुबह खबर आयी कि हमास वालों ने इसके शरीर के आठ टुकड़े करके एक सुरंग में फेंक दिये, जिसे इजरायल की सेना ने बरामद किया। अब इजराइल वाले भी इसका हाल देखकर सोच रहे होंगे की सपोलों को दूध पिलाने की कीमत क्या होती है। तीन दिन पहले इसका बेटा बीबीसी पर रो रहा था कि मैं अपनी मम्मी के बारे में किसी खबर मिलने का इंतजार कर रहा हूं।वह चाहे अच्छी खबर हो या बुरी खबर हो... और जब उसे बुरी खबर मिली तब रोते हुए कह रहा है कि मेरी मम्मी ने गांधी दर्शन की किताब पढ़ी थी तब से वह अपने रास्ते से भटक गयी और अंत में उनका यह हाल हुआ।

जानें मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पावन कथा
Published / 2023-10-20 00:02:34
जानें मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पावन कथा

राजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय और जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलायीं। इनका गुण शोधकार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे हो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गयी । मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं।भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गयी थी। इसीलिए ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं।इनकी चार भुजाएं हैं। दायीं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।मां कात्यायनी की पूजा विधिपूजा प्रारंभ करने से पहले मां को स्मरण करें और हाथ में फूल लेकर संकल्प जरूर लें। इसके बाद वह फूल मां को अर्पित करें। फिर कुमकुम, अक्षत, फूल आदि और सोलह श्रृंगार माता को अर्पित करें। उसके बाद उनके प्रिय भोग शहद को अर्पित करें और मिठाई इत्यादि का भी भोग लगाएं।

अपार शांति और अद्भुत शक्ति की अनुभूति का दरबार है मां भद्रकाली
Published / 2023-10-19 22:03:39
अपार शांति और अद्भुत शक्ति की अनुभूति का दरबार है मां भद्रकाली

एक ही शिला में विराजमान हैं महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वतीटीम एबीएन, चतरा। शारदीय नवरात्र के पवित्र दिनों में हर मंदिर और घरों में श्रद्धालू देवी अराधना में लीन हैं। ऐसा ही देवी दरबार जिले के इटखोरी में मां भद्रकाली है, जहां से लोगों की असीम आस्था जुड़ी है। यहां मां के दर पर मांगी गयी मुराद जरूर पूरी होती है। भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं को अपार शांति और अदभुत शक्ति की अनुभूति होती है। लोग दूर-दूर से माता भद्रकाली के दरबार में अपनी मन्नत लेकर पहुंचते हैं। माता के दरबार में जो भी सच्चे मन से शीश झुकाकर मन्नत मांगता है,  माता उसकी हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। यह मंदिर सिद्ध पीठ में शुमार है। मां के भद्र रूप माता भद्रकाली की पूजा आदिकाल से होती आ रही है। महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती यहां एक ही शिला पर कमल के आसन पर मां भद्रकाली की आदमकद प्रतिमा वरदायिनी मुद्रा में विराजमान हैं। माता की बायीं ओर महाकाली और दाहिनी ओर माता सरस्वती भक्तों को दर्शन दे रही है। मंदिर में स्थापित मां भद्रकाली की मूर्ति लोकमानस में दूर्गा के रूप में पूजित है। प्रात:काल में सूर्योदय से पहले ही सिंह द्वार से प्रवेश के साथ ही भक्तों का मां के दरबार में हाजिरी लगाना प्रारंभ हो जाता है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अर्जी लगाने का सिलसिला प्राचीन समय से चला आ रहा है। भक्ति और उपासना की अनोखी डोर भक्तों को मां के आशीर्वाद से बांधे हुए खास दृश्य निर्मित करती है। मंदिर की तीनों दिशाओं में कलकल बहती मुहाने नदी और मनमोहक हरी- भरी वादियां भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। मुहाने व बक्सा नदी के संगम पर अवस्थित मां भद्रकाली मंदिर झारखंड के विख्यात मंदिरों की श्रेणी में आता है। जप, पाठ पूजन से मिलता है मनोवांछित फल मंदिर के पुजारियों का कहना है कि नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में जप, पाठ पूजन से मनोवांछित फल मिलता है। यहां साल भर भक्तों की भीड़ रहती है। नवरात्र को लेकर विशेष पूजा पद्धति के लिए मंदिर प्रसिद्ध माना जाता है। यह मंदिर सिद्ध पीठ में शुमार है। पुजारी नागेश्वर तिवारी का कहना है कि माता भद्रकाली की पूजा आदिकाल से होती आ रही है। मान्यता है कि नवरात्र के 9 दिन जो भी भक्त देश की किसी भी कोने से से आकर यहां जो मन्नत मांगते हैं सभी की मन्नत पूरी होती आयी है। शारदीय नवरात्र में यहां पर कलश स्थापना के बाद प्रत्येक दिन पंडितों के द्वारा सप्तशती का पाठ किया जाता है। नवरात्र में मनोकामना कलश रखने का सिलसिला एक कलश से शुरू हुआ था जो साल दर साल बढ़ते चला गया। इस वर्ष पांच दर्जन से अधिक मनोकामना कलश की स्थापना की गयी है। ब्रह्म मुहूर्त में होती है मां भद्रकाली की पूजा  मां भद्रकाली मंदिर में दैनिक पूजा विधान में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में माता भद्रकाली की पूजा किया जाता है। प्रात: कालीन और संध्याकाल में आरती वाद यंत्रों की लय और ताल पर किया जाता है। पूजा विधान में पुजारियों द्वारा संकल्प करा कर मां के मस्तक पर लाल गुड़हल के फूल अर्पित किया जाता है। जिससे माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करती हैं।  चोरी गयी मूर्ति मिलने के बाद से बलि प्रथा बंद मां भद्रकाली मंदिर परिसर से मूर्ति चोरी की घटना ने यहां पशु बकरे की बलि देने की परंपरा ही बदल दी। पहले मंदिर में बकरे की बलि दी जाती थी। इस घटना के बाद यहां शाकाहारी बलि देने का चलन शुरू हो गया। नौवीं-दसवीं शताब्दी में बसी इस नगरी में साठ वर्ष पहले तक मन्नत पूरी होने की खुशी में श्रद्धालु बकरे की बलि देते थे। इस बीच 1968 में इस मंदिर से मूर्ति चोरी हो गयी, बाद में मां भद्रकाली की मूर्ति कोलकाता से बरामद हो गयी। इसके बाद तो स्थानीय लोगों में माता के प्रति आस्था और गहरी हो गयी। लोगों को लगा कि यहां बलि के कारण ही माता की मूर्ति चोरी हुई। शायद अब माता नहीं चाहतीं कि यहां किसी की जान ली जाये। इसके बाद से बलि प्रथा बंद कर दी गयी। अब नवरात्र पर भक्त माता को कुष्मांड (भतुआ), ईख और फलों की बलि अर्पित करते हैं। मां भद्रकाली मंदिर परिसर के किसी भी होटल के व्यंजन में प्याज और लहसुन तक का इस्तेमाल नहीं होता। नवरात्र में होती है शास्त्रों की पूजा; पूरी होती है मन्नतें सिद्धपीठ मां भद्रकाली में नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा होती है और मां के मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगता है। नवरात्रि के दौरान माता की विशेष पूजा-अर्चना से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्र की अष्टमी तिथि को यहां शास्त्रों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त उपवास रखकर देवी की भी पूजा करते हैं।

जानें मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पावन कथा
Published / 2023-10-18 23:53:07
जानें मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पावन कथा

एबीएन सोशल डेस्क। पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वाली स्कंदमाता। नवरात्रि में पांचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है। शास्त्रों में इनका काफी महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्तो की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है।उनकी पूजा से मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है यानी चेतना का निर्माण करने वालीं। कहते हैं कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं।

राजधानी के पूजा पंडालों में तैनात रहेंगे सुरक्षा दस्ता के सदस्य
Published / 2023-10-18 23:43:50
राजधानी के पूजा पंडालों में तैनात रहेंगे सुरक्षा दस्ता के सदस्य

टीम एबीएन, रांची। सुरक्षा दस्ता रांची महानगर के प्रशिक्षण शिविर में सांसद संजय सेठ ने कहा कि राजधानी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा पूजा का विशाल आयोजन होता है। लाखों भक्त मां दुर्गा का का दर्शन करने आते हैं। सबों का जोरदार स्वागत करना है। इसका फायदा चोर उचक्के, पॉकेटमार और असामाजिक तत्व मौके का फायदा उठाने का काम करते हैं। ऐसे लोगों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करना है। ऐसे लोगों पर निगरानी रखनी है। उन्होंने कहा कि हर पूजा पंडाल में 5-10 सुरक्षा दस्ता के सदस्यों को तैनात रहना होगा। किसी तरह की परेशानी भक्तों को नहीं होनी चाहिएञ कहीं भी कोई भी घटना घटती है, तो तुरंत पुलिस को और हमको फोन करें। हम लोग 24 घंटे निगरानी रखते हैं। सुरक्षा दस्ता के रांची महानगर अध्यक्ष मंटू वर्मा ने कहा कि शहर में सुरक्षा दस्ता के दो से तीन स्टेज बनाये जायेंगे। जहां से पूरे शहर को कंट्रोल किया जायेगा और भक्तों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जायेगी। इसके लिए जल्द ही कुछ नंबर सार्वजनिक किये जायेंगे। कहीं भी कुछ भी घटना कर घटे तुरंत हम लोगों को फोन कीजिये। सुरक्षा दस्ता के संरक्षक रवींद्र वर्मा और बजरंग वर्मा ने कहा कि युवाओं को पूजा के दौरान नशा बिल्कुल नहीं करना होगा। जो भी सदस्य नशा करते पकड़ा गया, उसपर तुरंत कार्रवाई की जायेगी और जरूरत पड़े तो उसे भी पुलिस के हवाले किया जायेगा। जो लोग भी नशा करके पंडाल में घूमते हैं, उन्हें पकड़ कर पुलिस के हवाले किया जायेगा।प्रशिक्षण शिविर में संयोजक रुपेश चौरसिया, संरक्षक उत्तम यादव, दिलीप गुप्ता, शंकर सिंह, वरीय उपाध्यक्ष रोशन चौधरी, दीपू वर्मा, राजेश सरदाना, मिंटू सिंह, अनिल वर्मा, सुजीत वर्मा, शुभम चौधरी, राहुल कुमार, शिव किशोर शर्मा, कुणाल कुमार, विकास सिंह सहित सैकड़ों सदस्य उपस्थित थे।

जानें मां दुर्गा की चौथी शक्ति कुष्मांडा की पावन कथा
Published / 2023-10-17 23:58:16
जानें मां दुर्गा की चौथी शक्ति कुष्मांडा की पावन कथा

एबीएन सोशल डेस्क। नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है।इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलायीं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है।इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है।विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए।

नारी शक्ति जागरण हेतु ही दुर्गावाहिनी का शस्त्रपूजन : वीरेंद्र विमल
Published / 2023-10-17 19:44:27
नारी शक्ति जागरण हेतु ही दुर्गावाहिनी का शस्त्रपूजन : वीरेंद्र विमल

एबीएन सोशल डेस्क। श्रद्धामयी हिंदू नारी शक्तिस्वरूपा बने। जैसे सभी देवी-देवताओं की सम्मिलित शक्ति से प्रगट भगवती दुर्गा ने संपूर्ण दुर्जेय दैत्यों का संहार किया था; उसी प्रकार आज आवश्यकता है, हिन्दू नारी जाति, भाषा, प्रान्त, वर्ग, आदि भेदों को भुलाकर एकजुट हो शक्ति साधना करे। विश्व हिन्दू परिषद द्वारा दुर्गावाहिनी और मातृशक्ति के गठन का यही मुख्य उद्देश्य है। उक्त विचार  विहिप के झारखंड- बिहार के क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल ने शस्त्र पूजन कार्यक्रम में माता बहनों को संबोधित करते हुये व्यक्त किया। दुर्गावाहिनी का शस्त्र पूजन कार्यक्रम आज गुरुगोविंद सिंह नगर के देवी मंडप पथ स्थित हेसल अखाड़ा श्री हनुमान मंदिर में आयोजित था। दो सौ की संख्या में हेसल, सुखदेव नगर, इंद्रपुरी, पंडरा, हेहल, बजरा, कमड़े, लक्ष्मीनगर, दयालनगर आदि स्थानों से बड़काटोली हेसल अखाड़ा में एकत्र महिलाओं ने तीर धनुष, तलवार सहित सभी शस्त्रास्त्रों का पूजन कराया। दुर्गा चालीसा तथा हनुमान चालीसा पाठ एवं आरती के बाद धर्म सभा प्रारम्भ हुई। दुर्गावाहिनी की महानगर सह संयोजिका समृद्धि कुमारी तथा टोली सदस्य रीना तिर्की, मातृशक्ति की नीतू सिंह, शकुन देवी, आदि के उद्बोधन के बाद मुख्य वक्ता वीरेंद्र विमल ने विचार रखा। सभा के बाद महिलाओं ने शस्त्र लेकर नगर भ्रमण किया।इस कार्यक्रम के आयोजन में उषा सिंह, पुष्पा देवी, चन्द्रकान्ता गुप्ता, तारा देवी, सरोज मिश्रा, संगीता सुमन, आरती सिंह, रंजु सिंह, नीतू सिंह,  पार्वती देवी, लीला बड़ाईक, मंजु मुंडाईन, संध्या अग्रवाल, गीता सिंह, उषा वर्मा, प्रमिला शर्मा, द्रौपदी देवी, मीना देवी, आदि महिलाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।

दो दिवसीय एकल संगिनी लाइफस्टाइल प्रदर्शनी का समापन
Published / 2023-10-17 19:41:40
दो दिवसीय एकल संगिनी लाइफस्टाइल प्रदर्शनी का समापन

वनबंधु परिषद् की रांची महिला समिति ने किया आयोजन टीम एबीएन, रांची। रांची महिला समिति के तत्वावधान में डंगराटोली स्थित स्वर्णभूमि बैंक्वेट्स में दो दिवसीय एकल संगिनी लाइफस्टाइल प्रदर्शनी का समापन हो गया। मंगलवार को इस प्रदर्शनी में मुख्य अतिथि के रूप में फेमिना मिस इंडिया रिया तिर्की उपस्थित थी। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और खरीदारी भी की। मौके पर उन्होंने आयोजन समिति के लोगों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी से महिलाओं को एक प्लेटफॉर्म मिलता है। रांची महिला समिति आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर  काम कर रही है। समिति के लिए जो भी मदद होगा, मैं इसके लिए  उपस्थित रहुंगी। इस दो दिवसीय प्रदर्शनी में लोगों ने दुर्गा पूजा और दीवाली को देखते हुए सामानों की खरीदारी की। प्रदर्शनी में दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक हैप्पी आवर्स के दौरान उपस्थित लोगों के लिए आफर्स का लाभ उठाया। विशेष छूट और आफर में लोगों ने जमकर खरीदारी की। डायमंड ज्वेलरी, इमीटेशन ज्वेलरी, लखनऊ की चिकनकारी, कोलकत्ता का फैशन, टस्सर सिल्क के उत्पाद, बच्चों के परिधान, सौंदर्य उत्पाद, उपहार आइटम, एकल उत्पाद, गृह सज्जा और  हेल्थ-वैलनेस के उत्पाद एकल संगिनी के प्रदर्शनी में शामिल था।  एकल संगिनी की संयोजक सुनीता महनसरिया ने कहा कि वनबंधु परिषद् की महिला समिति एक सक्रिय शाखा है और आदिवासी समाज के विकास के क्षेत्र में काम करती है। एकल संगिनी, रांची महिला समिति की एक पहल है। हम गैर-लाभकारी संगठन हैं और एकल संगिनी का उद्देश्य एकल अभियान में हमारे निरंतर प्रयासों के लिए निधिसंग्रह करना हैं। यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। इस अवसर पर  एकल संगिनी की सह संयोजक राज जैन, अनुपमा राजगढ़िया, अनिता तुलस्यान, कोषाध्यक्ष राज राजगढ़िया समेत अन्य लोग मौजूद थे। उक्त जानकारी वन बन्धु परिषद् रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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