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श्याम बाबा तेरे पास आया हूं, चरणों में अरदास लाया हूं...
Published / 2023-10-28 20:32:39
श्याम बाबा तेरे पास आया हूं, चरणों में अरदास लाया हूं...

श्याम शरण में आजा रे के द्वारा आयोजित अरदास कीर्तन में झूमते रहे श्रद्धालुटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। नंदिनी अपार्टमेंट, अड्डी बंगला रोड अशोक खाटूवाला के परिसर में स्थान पर श्याम शरण में आजा रे... के तत्वावधान में अरदास कीर्तन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बाबा श्याम का दरबार सजाया गया। अखंड ज्योत के साथ भजनों का कार्यक्रम शुरू हुआ। यजमान के रूप में अशोक खाटूवाला,  प्रतिमा खाटूवाला शामिल हुए। पूजा अर्चना पंडित अनिल मिश्रा ने कराई। इसके बाद गणेश वंदना प्रदीप कंदोई ने प्रस्तुत किया। सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। तत्पश्चात कीर्तन की है रात..., जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे..., भजन पर श्रद्धालु भक्त भक्ति के सागर में गोता लगाते रहे।भजन गायक रवि दाहिमा ने श्याम बाबा तेरे पास आया हूं, चरणों में तेरी अरदास लाया हूं..., प्रदीप कंदोई ने मैया मैया आयेगी कान्हा को बुलाएगी..., राकेश राजपूत ने दिल तुम बिन लगता नहीं..., तन्मय लड्ढा ने ओ सांवरे ओ सांवरे..., यश दाहिमा ने दीना नाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से... मनोज लड्ढा ने कान्हा रेई कान्हा आ जा तू आ जा..., सीमा सहल ने म्हारा बाला जी साला सर वाला..., संगीता जेठवा ने हाथ जोड़कर मांगता हूं... जैसे भजन पर घंटों श्रद्धालु भक्त झूमते रहे।कार्यक्रम का संचालन मनोज लड्ढा और संजय अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता, किडजी की निदेशक ब्यूटी सिंह, विपुल चौधरी, पप्पू सिंह, उमेश जोशी, संजय नरेड़ी, हिमांशु केडिया, धीरज जोशी, मनोज जोशी, उमंग कंदोई, विवेक सहल, विकास अठघरा, शुभम बरबिघईया, अंशु कुमार, आशीष कुमार, ज्योतिष कुमार, अनिल कूटरियार, रवि कुमार, नितेश कुमार निक्की, आयुष पोद्दार संतोष लड्ढा, रमेश कंदोई, अभिषेक कुमार, भोला सिंह, चिंटू अग्रवाल, यश बंसल, अनुराग हिसरिया, पियुष सहल, वत्सल कंदोई, आयुष कुमार, शालिनी दाहिमा, पिंकी खेतान, प्रीति गुटगुटिया, स्वेता गुटगुटिया, रश्मि गुटगुटिया, कबिता रूपमणि जोशी, रीना जोशी, सुजाता जोशी सहित कई श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे। श्याम स्तुति और आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

जतरा सामाजिक समरसता का प्रतीक : बिंदेश्वर उरांव
Published / 2023-10-26 20:23:12
जतरा सामाजिक समरसता का प्रतीक : बिंदेश्वर उरांव

शांति और उल्लास पूर्ण माहौल में संपन्न हुआ चट्टी का ऐतिहासिक जतराटीम एबीएन, भंडरा। लोहरदगा, रांची और गुमला जिले के सीमांत स्थित चट्टी का ऐतिहासिक जतरा 26 अक्टूबर को हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में लोग जतरा में शामिल हुए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। जतरा का उद्घाटन मुख्य अतिथि भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री बिंदेश्वर उरांव ने किया। मौके पर उन्होंने कहा कि जतरा सामाजिक समरसता का प्रतीक है। आपसी दूरियां को पाटने में जतरा की हमेशा बड़ी भूमिका रही है। जतरा में आयोजित पारम्परिक गीत नृत्य में झारखंड का इतिहास छुपा है। विरासत में मिली इस संस्कृति को जिंदा रखना जरूरी है। इस दौरान आजसू के विधानसभा प्रभारी नीरू शांति भगत, आजसू के केंद्रीय सचिव अरविंद यादव, सदस्य अंजू देवी, स्थानीय मुखिया कैली उरांव, उदरंगी मुखिया परमेश्वर महली, विभिन्न गावों के पहान, ग्राम प्रधान जतरा आयोजन कमेटी के दूबराज तिवारी, मनोज तिवारी, प्रदीप तिवारी, राजदीप तिवारी, कृष्णा तिवारी, मुकेश तिवारी, कुलदीप तिवारी, लक्की तिवारी, आकाश तिवारी, अवधेश तिवारी आदि उपस्थित थे। अन्य अतिथियों ने कहा की पूर्वजों ने जतरा का आयोजन सिर्फ गीत संगीत के लिये नहीं बल्कि रिश्तों के आदानप्रदान के लिये शुरू किया था। यह परम्परा आज भी चट्टी जतरा में कायम है। जतरा का मुख्य आकर्षण कमेटी द्वारा आयोजित नागपुरी नृत्य कार्यक्रम,  लापुंग से आये सांस्कृतिक खोडहा नृत्य दल और विभिन्न गावों से आया  खोड़हा नृत्य समूह था। लोगों के अलावे अतिथियों ने भी नृत्य का जमकर लुत्फ उठाया। जतरा कमेटी ने सभी को पुरस्कृत किया। बच्चों और युवाओं ने झूला व अन्य मनोरंजक स्टॉलों का आनंद लिया। मिठाई और अन्य दुकानों में भी भीड़ थी। शांति व्यवस्था में थाना प्रभारी गौतम कुमार, पुलिस के अन्य जवान, पदाधिकारी और कमेटी के लोग अपने दलबल के साथ जुटे थे। जतरा में भीड़ नियंत्रण  के लिये चट्टी रांची मुख्य सड़क और चट्टी कैरो सड़क पर बैरीकेटिंग की व्यवस्था की गयी थी।

पापाकुंशा एकादशी उत्सव पर उमड़े श्याम भक्त
Published / 2023-10-25 19:00:01
पापाकुंशा एकादशी उत्सव पर उमड़े श्याम भक्त

एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। क्यों गरीबों का साथी बना, बन गया है तो निभाना पड़ेगा... भजनों की लय पर भक्तगण भाव विभोर हुए लोग। अवसर था अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 25 अक्टूबर 2023 को आश्विन शुक्ला पापाकुंशा एकादशी उत्सव अत्यंत भक्तिभाव व श्रद्धा के साथ मनाया गया। विजयदशमी का उल्लास लिये भक्तगण प्रात: काल से ही श्री श्याम प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। प्रात:काल में श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर विभिन्न प्रकार के फूलों जैसे गुलाब, जूही, बेला, मोगरा, गेंदा व तुलसी दल से मनभावन श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार और बजरंगबली का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया। रात्रि 9 बजे श्री श्याम देव के जयकारों के बीच ज्योत प्रज्वलित कर भक्तगण कतारब्रध होकर ज्योत में आहुति प्रदान कर मंगलमय जीवन की कामना कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने संगीतमय संकीर्तन प्रारंभ कर भजनों की अमृतवर्षा की।श्याम नाम मुख से बोल भाई काम आवेगोअलबेली इनकी सरकार रटेजा श्याम प्यारे श्याम तेरा साथ हमको दो जहां से प्यारा है हम तुम्हारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो...इत्यादि भजनों की लय पर देर रात तक भक्तगण श्री श्याम प्रभु को रिझाते रहे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा का भोग अर्पित किया गया।  रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनिया, विकास पाडिया, ज्ञानप्रकाश बगला, सुदर्शन चितलंगिया, अजय साबू, अरुण धानुका, जीतेश अग्रवाल और श्याम सुंदर पोद्दार का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल सह श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ, रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

जानें मां दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री की पावन कथा
Published / 2023-10-22 23:55:06
जानें मां दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री की पावन कथा

एबीएन सोशल डेस्क। मां दुर्गा का आखिरी स्वरूप सिद्धिदात्री हैं। ये मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति हैं। मां सिद्धिदात्री व्यक्ति को सिद्धि प्रदान करती हैं। अगर इनकी पूजी विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ की जाये तो व्यक्ति सभी सिद्धियों की प्राप्ति करता है।साथ ही ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की हिम्मत भी व्यक्ति में आ जाता है। देवीपुराण में कहा गया है कि मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही शिवशंकर ने सिद्धियां प्राप्त की थीं। ये मां की ही अनुकम्पा थी कि भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ। इन्हें अर्द्धनारीश्वर कहा गया।मां सिद्धिदात्री के कई नाम हैं। इनमें अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, वाशित्व, सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञत्व, दूरश्रवण, परकायप्रवेशन, वाक्‌सिद्धि, कल्पवृक्षत्व, सृष्टि, संहारकरणसामर्थ्य, अमरत्व, सर्वन्यायकत्व, भावना और सिद्धि शामिल हैं। कमल पुष्प पर आसीन मां की 4 भुजाएं हैं। मां का वाहन सिंह है। सिद्धिदात्री मां की आराधना-उपासना कर भक्तों की लौकिक, पारलौकिक सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। मां अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं जिससे कुछ भी ऐसा शेष नहीं बचता है जिसे व्यक्ति पूरा करना चाहे। व्यक्ति अपनी सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं से ऊपर उठता है और मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता है और फिर विषय-भोग-शून्य हो जाता है। इन सभी को पाने के बाद व्यक्ति को किसी भी चीज को पाने की इच्छान नहीं रह जाती है।मां की आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। हालांकि, देखा जाये, तो आज के जमाने में इतना कठोर तप कोई नहीं कर पाता है। लेकिन अगर व्यक्ति अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना करें तो मां की कृपा उस पर बनी रहती है। मां की कृपा पाने के लिए नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करना चाहिए।पूजा विधिदुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष हवन किया जाता है। यह नौ दुर्गा का आखिरी दिन भी होता है तो इस दिन माता सिद्धिदात्री के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है। सर्वप्रथम माता जी की चौकी पर मां सिद्धिदात्री की तस्वीर या मूर्ति रख आरती और हवन किया जाता है। हवन करते वक्त सभी देवी दवताओं के नाम से आहुति देनी चाहिए। बाद में माता के नाम से आहुति देनी चाहिए।दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत:सप्तशती के सभी श्लोक के साथ आहुति दी जा सकती है। देवी के बीज मंत्र “ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:” से कम से कम 108 बार आहुति दें। भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा के बाद अंत में आरती करनी चाहिए। हवन में जो भी प्रसाद चढ़ाया जाता है उसे समस्त लोगों में बांटना चाहिए।आरतीजय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दातातू भक्तों की रक्षक  तू दासों की माता,तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धितेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!कठिन काम सिद्ध कराती हो तुमजब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,तेरी पूजा में तो न कोई विधि हैतू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!रविवार को तेरा सुमरिन करे जोतेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,तुम सब काज उसके कराती हो पूरेकभी काम उसके रहे न अधूरे!!तुम्हारी दया और तुम्हारी यह मायारखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशालीजो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरामहा नंदा मंदिर में है वास तेरा,मुझे आसरा है तुम्हारा ही मातावंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!

दर्शनार्थियों को हरसंभव मदद पहुंचा रहे युवा दस्ता के सदस्य : राजीव
Published / 2023-10-22 21:20:37
दर्शनार्थियों को हरसंभव मदद पहुंचा रहे युवा दस्ता के सदस्य : राजीव

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 22/10/2023 को युवा दस्ता के संस्थापक राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि युवा दस्ता के सदस्यों के द्वारा श्री दुर्गापूजा महोत्सव के दौरान मां भवानी के दर्शन करने आये दर्शनार्थियों के सहयोग में पिछले 3 दिन से विभिन्न पूजा पंडाल एवं प्रमुख मार्गों में तैनात रहकर सैकड़ो महिलाओं एवं बुजुर्गों को माता रानी के दर्शन कराने में सहयोग किया एवं 47 बच्चों एवं बिछड़े हुए परिवारों को मिलाने एवं घर तक पहुचाने का काम किया।युवा दस्ता रांची के द्वारा स्वागत शिविर लगाया गया एवं शिविर में युवा दस्ता के द्वारा प्रचार किया जा रहा है कि  सभी दर्शनार्थियों के साथ मे आये सभी बच्चों एवं बुगुर्गो के पॉकेट में नाम पता एवं फ़ोन नंबर डाल दे ताकि भीड़ में बिछड़ने पर दस्ता के सदस्य उनको घर तक पहुँचा सके एवं किसी भी दर्शनार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो तुरंत दस्ता के सदस्य को संपर्क करे ताकि उनकी परेशानी का समाधान निकल सके।श्री दुर्गापूजा महोत्सव को सफल बनाने में युवा दस्ता के अध्यक्ष राजेश गुप्ता के नेतृत्व में टिंकू महतो , पीयूष आनंद , मंटू दुबे ,शाहिल कुमार , राकेश सिंह ,नावनीत पाण्डेय , ओम प्रकाश शर्मा , सोनू भारद्वाज सहित सैकड़ों पदाधिकारी एवं सदस्यों ने  अहम भूमिका निभायी। उक्त जानकारी युवा दस्ता रांची के संस्थापक राजीव रंजन मिश्रा (9431574184) ने दी।

जानें मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी की पावन कथा
Published / 2023-10-22 00:00:40
जानें मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी की पावन कथा

राजकुमारी पाण्डेयमहागौरी : मां दुर्गा की आठवीं शक्ति की पावन कथाएबीएन सोशल डेस्क। नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। महागोरी नाम से इसलिए प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गयी है।अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गयी है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए इनको वृषारूढ़ा भी कहा गया है।इनके ऊपर वाला दायें हाथ में अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बायें हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है। पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसीलिए ये महागौरी कहलायीं।ये अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।महागौरी के पूजा विधि और भोगसुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करायें।मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें।मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें।मां को रोली कुमकुम लगायें।मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें।

मां उग्रतारा नगर मंदिर में होती है 16 दिवसीय शारदीय पूजा
Published / 2023-10-21 22:34:14
मां उग्रतारा नगर मंदिर में होती है 16 दिवसीय शारदीय पूजा

फूल गिरते ही मनोकामना पूर्ति का संकेत देती हैं मांएबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। चंदवा प्रखंड के नगर ग्राम स्थित प्रसिद्ध मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर में 16 दिवसीय शारदीय दशहरा पूजा की अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है। मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर 16 दिवसीय शारदीय पूजा आयोजित होती। मां की पूजा भक्तोें की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। महाविद्या के इस मंदिर में फूलों के आश्चर्यजनक ढंग से गिरने तथा मनोकामना पूर्ति के बीच अटूट संबंध किसी नास्तिक के हृदय में भी आस्तिकता की भावना जागृत करने में सक्षम है।फूल गिरना कामना पूर्ण होने का संकेतमंदिर के सेवायत मुंतजिमकार पंडित गोविंद बल्लभ मिश्र ने बताया कि प्रकृति की गोद में अवस्थित नगर का मां उग्रतारा देवी मंदिर अपने अपने महात्म्य के कारण पूरे श्रद्धा का केंद्र है। देवी की महिमा से अभिभूत सभी संप्रदायों के लोग अपनी मनोकामना तथा मनौती के लिए यहां आते हैं। इस जाग्रत सिद्ध स्थल में देवी की महिमा स्पष्ट परिलक्षित होती है। मनोकामना के पूर्णता या अपूर्णता की जानकारी हेतु देवी की गद्दी पर प्रत्येक कामना के लिए ग्यारह फूल रखे जाने का विधान है, फूलों का स्वयंमेव गद्दी से नीचे गिरना कामना पूर्ण होने का संकेत समझा जाता है।मंदिर की प्राचीनता एवं इतिहासवैसे तो मंदिर का कोई लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है, पर मंदिर के पूजा प्रयुक्त हस्त लिखित पुस्तक मंदिर की प्राचीनता सिद्ध करती है। शारदीय नवरात्र पूजा पद्धति जो दूसरी बार लिखी गयी है, में विक्रम संवत सन 1607 ई) अंकित है, स्पष्ट है कि इससे पूर्व की पुस्तक भी काफी प्राचीन रही होगी।खास है पूजा पद्धति है खासइस मंदिर में बाहरी पकवान या लड्डू का भोग सर्वथा वर्जित है। मंदिर कार्य में नियुक्त व्यक्ति द्वारा ही निर्मित पकवान भोग चढ़ाये जाते हैं। देवी के प्रसाद के स्वरूप मिश्री, गुड़, एवं फल अर्पित किये जा सकते हैं। मंदिर में दैनिक पूजा सूर्योदय के एक घंटे पश्चात देवी श्रृंगार एवं आरती से प्रारंभ होती है। दोपहर में कच्ची भोग के पश्चात देवी शयन करती हैं, तब मंदिर का पट बंद रहता है।  जाते हैं एवं शाम में सूर्यास्त के थोड़ी देर पहले संध्या आरती के लिए मंदिर के पट खुलते हैं। आरती के पश्चात बंद हो जाते हैं। मंदिर में रविवार एवं भाद्रपद मास को छोड़कर सभी दिन बलि चढ़ायी जाती है।16 दिवसीय शारदीय पूजा, विशेष बलिइस मंदिर की विशेष बात यह है कि यहां प्रतिवर्ष अश्विन कृष्ण पक्ष नवमी से शुक्ल पक्ष विजयादशमी तक धूमधाम से शारदीय नवरात्र की पूजा संपन्न होती है। उक्त अवसर पर मंदिर की शोभा देखते बनती है, शारदीय नवरात्र पूजा में बकरों की बलि के अतिरिक्त भैंसें एवं मछली बलि का भी विधान है।

दुर्गा पूजा का स्वर्णिम वर्ष मना रहा श्री महावीर मंदिर थड़पखना
Published / 2023-10-21 22:25:21
दुर्गा पूजा का स्वर्णिम वर्ष मना रहा श्री महावीर मंदिर थड़पखना

टीम एबीएन, रांची। श्री महावीर मंदिर थड़पखना रांची अपना 100 वर्ष मना रही है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार इस वर्ष दिल्ली की तर्ज पर महा भंडारा का आयोजन हो रहा है। आज सप्तमी को महा भंडारा का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत विकास रंजन, विक्की वर्मा और उनकी पत्नी आरती देवी ने किया। यह महा भंडारा दिन 1 बजे से पुरी-सब्जी एवं लड्डू भक्तों के बीच में बांटकर शुरू किया किया। कल महा अष्टमी को खीर-जलेबी एवं संध्या में जीरा राइस और मटर-पनीर बांटा जायेगा। आज के कार्यक्रम में  8000 से श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस सारे कार्यक्रम में महामंत्री रविंद्र वर्मा, अध्यक्ष जय वर्मा, बजरंग वर्मा, युवा अध्यक्ष अनुज वर्मा, सचिव आशीष वर्मा, संयोजक आदित्य दुबे, संयोजक राजेंद्र प्रसाद साहू, युवा सचिव रिशु वर्मा, आयुष वर्मा, पीयूष वर्मा, गोलू, मोलू शाही अन्य शामिल हुए। उपरोक्त जानकारी महामंत्री रविंद्र वर्मा ने दी।

जानें मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पावन कथा
Published / 2023-10-20 20:28:43
जानें मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पावन कथा

नवरात्रि का सातवां दिन : आज मां कालरात्रि का पूजन, जानिए कथा, पूजा विधि, आराधना मंत्र और प्रिय भोगएबीएन सोशल डेस्क। आज नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि का पूजन किया जायेगा। इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित होता है। ये दुष्टों का संहार करती हैं। इनका रूप देखने में अत्यंत भयंकर है परंतु ये अपने भक्तों को हमेशा शुभ फल प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। इनका वर्ण काला है व तीन नेत्र हैं, मां के केश खुले हुए और गले में मुंड की माला धारण करती हैं। ये गदर्भ (गधा) की सवारी करती हैं। इनके नाम का उच्चारण करने मात्र से बुरी शक्तियां भयभीत होकर भाग जाती हैं।मां कालरात्रि की पावन कथाएक पौराणिक कथा के अनुसार, एक रक्तबीज नाम का राक्षस था। मनुष्य के साथ देवता भी इससे परेशान थे।रक्तबीज दानव की विशेषता यह थी कि जैसे ही उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरती तो उसके जैसा एक और दानव बन जाता था। इस राक्षस से परेशान होकर समस्या का हल जानने सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव को ज्ञात था कि इस दानव का अंत माता पार्वती कर सकती हैं।भगवान शिव ने माता से अनुरोध किया। इसके बाद मां पार्वती ने स्वंय शक्ति व तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया। इसके बाद जब मां दुर्गा ने दैत्य रक्तबीज का अंत किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को मां कालरात्रि ने जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में भर लिया। इस रूप में मां पार्वती कालरात्रि कहलायी।मां कालरात्रि की आराधना मंत्र-ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।मां कालरात्रि का प्रिय भोगमां कालरात्रि को गुड़ व हलवे का भोग लगाना चाहिए, इससे वे प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं।कालरात्रि माता की पूजा विधिमां कालरात्रि की पूजा के लिए सुबह चार से 6 बजे तक का समय उत्तम माना जाता है।इस दिन प्रातः जल्दी स्नानादि करके मां की पूजा के लिए लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए।इसके बाद मां के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।अब फल-फूल मिष्ठान आदि से विधिपूर्वक मां कालरात्रि का पूजन करें।पूजा के समय मंत्र जाप करना चाहिए, तत्पश्चात मां कालरात्रि की आरती करनी चाहिए।इस दिन काली चालीसा, सिद्धकुंजिका स्तोत्र, अर्गला स्तोत्रम आदि चीजों का पाठ करना चाहिए।इसके अलावा सप्तमी की रात्रि में तिल के तेल या सरसों के तेल की अखंड ज्योति भी जलानी चाहिए

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