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37वें नेशनल गेम में रांची विवि की सहायक प्राध्यापिका संतोषी कुमारी को मिला बेस्ट टेक्निकल का अवॉर्ड
Published / 2023-11-09 19:17:00
37वें नेशनल गेम में रांची विवि की सहायक प्राध्यापिका संतोषी कुमारी को मिला बेस्ट टेक्निकल का अवॉर्ड

योगासन भारत द्वारा 8 नवंबर 2023 को गोवा में नेशनल योगासन अवार्ड 2023टीम एबीएन, रांची। योगासन भारत ने 8 नवंबर 2023 को गोवा में नेशनल योगासन अवार्ड 2023 का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के खेल मंत्री रेखा आर्य एवं योगासना भारत के सेके्रटरी जनरल डॉ जयदीप आर्य थे। इस सम्मान समारोह में स्कूल आफ योग, रांची विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका संतोषी कुमारी को बेस्ट टेक्निकल आफिसर के अवार्ड से सम्मानित किया गया। संतोषी कुमारी कई वर्षों से योग के क्षेत्र में अपना योगदान दे रही है। राष्ट्रीय स्तर के खेलों में जैसे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, नेशनल गेम्स स्टेट गेम्स सहित कई जगह पर निर्णायक की भूमिका में रह चुकी है। संतोषी योग थैरेपिस्ट के रूप में 37वें नेशनल गेम्स में अपना योगदान दे रही है। संतोषी की इस उपलब्धि के लिए योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह, सचिव बिपिन पांडेय, स्कूल आफ योग की डॉयरेक्टर डॉ मधुलिका वर्मा, कॉर्डिनेटर डॉ गुरुचरण साहू, एस के घोषाल, आचार्य प्रह्लाद, आचार्य शंकर, विकास, प्रशांत सिंह, चैताली मुखर्जी, पूजा सिंह, सोनाली सरकार, दयानंद, ऋषि रंजन एवं संस्था के अन्य अधिकारियों ने बधाई दी।

कोडरमा में 16 को दिवाली मिलन समारोह करेगा अग्रवाल समाज
Published / 2023-11-08 20:30:33
कोडरमा में 16 को दिवाली मिलन समारोह करेगा अग्रवाल समाज

अग्रवाल समाज की बैठक में लिया गया निर्णयटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। अग्रवाल समाज की एक बैठक श्री अग्रसेन भवन में बुधवार के देर शाम आयोजित की गयी। बैठक में आगामी 16 नवंबर को दिवाली मिलन सह लघु मेला आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसमें विभिन तरह के गेम और सेल्फी प्वाइंट एवम कई अन्य कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमती बनी। बैठक में समाज के अध्यक्ष गोपी कृष्ण अग्रवाल सचिव हिमांशु केड़िया ने कहा की दिवाली मिलन का मुख्य उद्देश्य समाज के बुजुर्ग को समानित करने के साथ और एक दूसरे को आशीर्वाद लिया जायेगा। बैठक में कार्यक्रम के संजयोक संजीव खेतान एवम आकृति चौधरी को बनाया गया। उन्होंने कहा कि समाज के द्वारा कुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन एवम कुल देवी मां लक्ष्मी जी की पूजा मुख्य उद्देश्य है एवम समाज में छिपी प्रतिभा को भी सामने लाना है। जबकि कार्यक्रम के सवनायक यश बंसल को बनया गया। बैठक में सह सचिव अरविंद चौधरी कोषाध्यक्ष प्रदीप बंसल सदस्य संजय खेमानी, उमंग अग्रवाल, विपुल चौधरी, आयुष पोद्दार के अलावा श्रेया केडिया, सारिका लड्डा, स्नेह चौधरी, अनुराग हिसारिया, वत्सल कंदोई आदि उपस्थित थे।

श्रीमद्भागवत समस्त वेदों का तिलक : पंडित अमरनाथ चौबे
Published / 2023-11-07 23:42:33
श्रीमद्भागवत समस्त वेदों का तिलक : पंडित अमरनाथ चौबे

भागवत पुराण मृत्यु को भी मंगलमय बना देता हैश्रीकृष्ण परिपूर्ण योगी हैं, उनको कोई बंधन में नहीं बांध सकताहवन से वातावरण और वायुमंडल शुद्ध तो होता है, आत्मिक बल बढ़ता हैलोहरदगा महादेव आश्रम में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ हवन, भंडारे और महाआरती के साथ सम्पन्नश्रीकृष्णा और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनकर भाव विह्वल हुए श्रद्धालुटीम एबीएन, लोहरदगा। उपनगरीय क्षेत्र महादेव आश्रम बुढ़वा महादेव मंदिर परिसर और मंजूरमती हाई स्कूल लोहरदगा के प्रेक्षागृह में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ मंगलवार को श्रीकृष्णा और सुदामा के मित्रता की कथा, पूर्णाहुति,भंडारे और महाआरती के साथ संपन्न हो गया।भागवत ज्ञान कथा की आखिरी दिन सात नवंबर को बड़ी संख्या में भक्तजन उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से शामिल से शामिल हुए। देर रात तक यह कार्यक्रम चला रहा। भागवत कथा के अंतिम दिन श्री कृष्ण- सुदामा मिलन पर कथा वाचक पंडित अमरनाथ चौबे ने वाचन किया।कथा में बताया गया कि कैसे गरीब ब्राह्मण सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के कहने पर न चाहते हुए भी द्वारिका जाने को तैयार होते हैं। सुदामा को श्रीकृष्ण से मिलने से द्वारपाल रोकता है। सखा श्रीकृष्ण- सुदामा से मिलने के लिए अपने सिंहासन से उतरकर नंगे पांव दौड़ पड़ते हैं। इसके बाद श्रीकृष्ण सुदामा को गले लगाते हैं। सखा सुदामा से बचपन की बातें करते है। हालचाल पूछते है। अंत मे सुदामा के अपने गांव जाने पूर्व श्री कृष्ण कैसे सुदामा के घर को महल में तब्दील कर धन धान्य से भरपूर कर देते हैं।किसी भी धार्मिक आयोजन के उपरांत हवन की महत्ता पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हवन से वातावरण और वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं।हवन यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।कथा समापन के मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ कथा प्रेक्षागृह में मौजूद रही।श्रीमद्भागवत कथा जहां होती है। वहां की धरती पवित्र हो जाती है। इसलिए भागवत कथा का श्रवण पूरे श्रद्धा, विश्वास और भक्तिभाव से करना चाहिए।उक्त बातें वाराणसी से आए कथा व्यास पंडित अमरनाथ चौबे ने कही।उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा की भागवत समस्त वेदों का तिलक है।यह पुराण मृत्यु को भी मंगलमय बना देता है। भागवत व्यक्ति को शांति देने वाला और समाज को क्रांति देने वाला है। भागवत रस है, मीठा रस है।हम सभी भगवान के इस मीठे रस का पान करते हैं। दुनियां के लोग रस मुंह से पीते हैं, जबकि भगवान का रस कानों से पिया जाता है।अतः भागवत कथा महान है। यह काफी महत्वपूर्ण है। कथा का आनंद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया।वाराणसी से आये युवा संत पंडित अमरनाथ चौबे ने श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण माया से परे हैं। उन पर माया का कोई प्रभाव नही पड़ता। श्रीकृष्ण परिपूर्ण योगी हैं, उनको कोई बंधन में नहीं बांध सकता। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों और राधारानी का अभिमान नहीं रहने दिया। भगवान तो निर्मल हदय में वास करते है। भगवान का मन निर्मल है। जिसका मन निर्मल है, भगवान का वहां निवास है।मंगलवार को भी बुढ़वा महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया।इस दौरान मदन मोहन पांडेय ने कहा कि जीव का मन निर्मल होगा, तो भगवान पीछे-पीछे दौड़े आएगें।जीव को किसी भी वस्तु का अभिमान नहीं करना चाहिए। जीव को केवल प्रेम ही प्रेम होना चाहिए। प्रेम ही भगवान के मिलने का सही रास्ता है। जीव को दूसरों के गुण देखनी चाहिए, अपितु अवगुणों से परहेज करना होगा। कथा का संचालन मुख्य यजमान मदन मोहन पांडेय और रीता पांडेय ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज्ञ पांडेय, ऋषभ, अनुपम निधि पांडेय, कृपा शंकर पांडेय, रूपा पांडेय, रामस्वरूप प्रसाद, सुदीप्ता मुखर्जी, अनिल ठाकुर, विवेक कुमार सिद्धार्थ, ममता अग्रवाल, नंदकुमार पांडेय, राजेंद्र प्रसाद खत्री, राजेंद्र प्रताप देव, कृपा प्रसाद सिंह, दीपा कुमारी,शांति कुमारी, सुनीता कुमारी, अनुराधा कुमारी आदि ने योगदान किया।

प्रज्ञायोग में गायत्री महामंत्र के सस्वर उच्चारण से शरीर के साथ मन की एकाग्रता और भावनात्मक पवित्रता भी साथ होता है : दीदी
Published / 2023-11-07 18:34:23
प्रज्ञायोग में गायत्री महामंत्र के सस्वर उच्चारण से शरीर के साथ मन की एकाग्रता और भावनात्मक पवित्रता भी साथ होता है : दीदी

प्रज्ञायोग व्यायाम गायत्री महामंत्र के अक्षर, शब्द और व्याहृति सहित करने का अभ्यास क्रम बताया गयाटीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार राष्ट्र स्तरीय आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व व संवाद की श्रृंखला में स्वास्थ्य संवर्धन युग साहित्य कैटगरी में एक सप्ताह तक स्वाध्याय पाठ व संवाद के उपरांत इसके स्वाध्याय व अभ्यास से लाभान्वित होने का अनुभव साझा किया गया और भागीदार व लाभान्वित साधक-शिष्य भाई-बहनों ने इसपर अपना विचार प्रस्ताव रख कर सत्र संचालिका सह प्रशिक्षका पूजा पटेल दीदी से अनुरोध कर इसका अभ्यास क्रम बढ़ाने तथा और अधिक लाभान्वित होने के लिए इस प्रज्ञायोग व्यायाम प्राणायाम आसन मुद्रा को  कुछ दिन अधिक चलाने का अनुरोध किया।उनमें आधा दर्जन शामिल भाई-बहनों ने इस स्वाध्याय पाठ-संवाद व अभ्यास क्रम से अपनी स्वास्थ्य लाभ में वृद्धि महसूस कर पुष्ट करते हुए बताया कि अपने कन्धों, बांहों, कमर,कूल्हे पीठ, पीछे गर्दन की दर्द निवारण में बहुत राहत की अनुभूति की गयी। अत: इस योगासन व्यायाम प्राणायाम को हर्षोल्लासपूर्वक एक स्वर से कुछ और समय तक बढ़ाया गया। साथ ही साथ गुरुवर श्रीपूज्यवर की लिखी व बतायी गयी प्रज्ञायोग व्यायाम की श्रृंखला गायत्री महामंत्र के अक्षर, शब्द और व्याहृति सहित भावभरा सस्वर उच्चारण साथ जोड़कर  करने का अभ्यास क्रम बताया गया।आगे दीदी ने बताया कि प्रज्ञायोग में गायत्री महामंत्र के सस्वर उच्चारण से शरीर के साथ मन की एकाग्रता और भावनात्मक पवित्रता भी साथ-साथ होता रहता है। प्रज्ञायोग की मुद्रायें चित्र सहित समझायी गयी। इसमें 16 मुद्रा निर्देश की श्रृंखला होती है। इस पर विस्तार से प्रकाश डालकर सिखाया व कराया गया। अगला स्वाध्याय घरेलू चिकित्सा, ऊषा-पान, शाकाहार व उपासनात्मक प्राणायाम पर स्वाध्याय और मार्गदर्शन किया जायेगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

श्रीमद्भागवत पुराण में विद्या का अक्षय भंडार है : पं अमरनाथ चौबे
Published / 2023-11-06 22:35:04
श्रीमद्भागवत पुराण में विद्या का अक्षय भंडार है : पं अमरनाथ चौबे

श्रीमद्भागवत दस गुण महापुराण वाला सर्वश्रेष्ठ पुराणों में से एक हैंहमारी मातृशक्ति संस्कार की धुरि और राष्ट्र की रक्षिका हैं: एमएम पाण्डेयलीलाओं से भरा हुआ है,भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवनपूर्णाहुति और भंडारा के साथ आज संपन्न होगा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञसुदीप्ता मुखर्जीटीम एबीएन, लोहरदगा। उपनगरी क्षेत्र महादेव आश्रम स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर और मंजूरमती हाई स्कूल, लोहरदगा के प्रेक्षागृह परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन सोमवार को वाराणसी से आए व्यास पंडित अमरनाथ चौबे ने रुक्मणी विवाह का प्रसंग और राम विवाह की झांकी का अलौकिक वर्णन किया। कथावाचक व्यास पीठ से कथा की भाव- भंगिमाओं की प्रस्तुति काफी प्रभावकारी ढंग से किया। इससे वहां मौजूद महिलाएं, युवतियां और सभी आयु वर्ग के लोग अपने को झूमने से नहीं रोक पाये।उन्होंने भारतीय मातृशक्ति को तोड़कर भारत को तोड़ने की कुत्सित प्रयास जो पश्चिमी देशों के द्वारा किया जा रहा है, उनका भी चित्रण किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत  कथा के छठे दिन सोमवार को पंडित अमरनाथ चौबे ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन लीलाओं से भरा हुआ है। द्वारकाधीश श्रीकृष्ण का रुक्मणी विवाह का विस्तार पूर्वक बताते हुए कथा वाचक ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। रुक्मिणी विवाह शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि के दिन रुक्मिणी विवाह का प्रसंग हुआ था। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु और रूक्मिणी जी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण और देवी रूक्मिणी के विवाह को समर्पित है। दृश्य का कथा वाचन के दौरान मंच पर सुंदर प्रस्तुति दी गयी। जिसे देख उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कार्तिक माह के अवसर पर इस कार्यक्रम का भक्त आनंद लेकर पुण्य का भागी बन रहे हैं। राम विवाह की झांकी ने सभी का मन मोह लिया। यज्ञ के मुख्य यजमान मदन मोहन पांडेय और रीता पांडेय के अलावा वाराणसी के कलाकारों में विद्यानंद तिवारी, राजीव उपाध्याय, दिवाकर पांडेय कौस्तुभ चतुर्वेदी ने साजवाज से भागवत में रौनक है।इस आयोजन को सफल बनाने में मनोज्ञ पांडेय, अनुपमा निधि पांडेय,ऋषभ पाण्डेय, वत्सा, रुपा पाण्डेय, सुदीप्त मुखर्जी, सुमन राय, राजेंद्र प्रसाद खत्री, कृपा प्रसाद सिंह, शिव शंकर सिंह, राजेंद्र प्रताप देव, नंदकुमार पांडेय, शिव प्रसाद राजगढ़िया, रेणुका गुप्ता, रामस्वरूप प्रसाद, अनिल ठाकुर, अनुराधा कुजूर, ममता अग्रवाल, विनीता कुमारी, शांति कुमारी, सुनीता कुमारी, आदि समस्त युवा जुटे हुए हैं।पंडित अमरनाथ चौबे ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में ज्ञान, भक्ति, तथा वैराग्य की महानता के बारे में बताया गया है। इस पुराण में विष्णु और कृष्णावतार की कथाओं के सम्पूर्ण ज्ञान के बारे में वर्णन किया गया है।श्रीमद्भागवत पुराण में विद्या का अक्षय भंडार है। यह पुराण सभी प्रकार के कल्याण व सुख देने वाला है। श्रीमद्भागवत पुराण हैं। पुराण का अर्थ जो प्राचीन में हुआ हैं, और वर्तमान में उसका अस्तित्व हो। श्रीमद्भागवत कोई पुराण नहीं है बल्कि यह महापुराण है। इस पुराण में दस गुण हैं। सर्व श्रेष्ठ पुराणों में से एक हैं।संस्कार की धुरि और राष्ट्र की रक्षिका है भारतीय नारीइसके पूर्व सुबह श्रीमद्भागवत महापुराण की विधिवत् पूजा अर्चना होने के बाद शिक्षाविद और धर्म शास्त्रों के जानकार मदन मोहन पांडेय ने कहा कि भारतीय स्त्री, संस्कार की धुरि और राष्ट्र की रक्षिका है। पश्चिम ने भारतीय नारी के मन पर प्रहार कर संस्कार मिटाने और भारत को मिटाने का प्रयास किया। सनातन धर्म की मातृ केन्द्रित व्यवस्था है।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नर से नारायण बनने की प्रक्रिया में माता की भूमिका मुख्य है। पृथ्वी पर भाषा और संस्कार देने वाली मां ईश्वर स्वरुप है। सन्तान को मां से ही सबकुछ मिलता है। मां के संस्कारों से ही बालक सज्जन और दुर्जन बनते हैं। पश्चिम ने षड्यंत्र पूर्वक स्वच्छंदता का प्रवेश भारतीय नारियों के मन में कराकर उन्हें परम्परा विमुख बनाने का प्रयास किया। पश्चिमी षड्यंत्रकारी भारतीय नारी के मन से संस्कार मिटाकर भारत को तोड़ने का प्रयास निरन्तर कर रहे हैं। पश्चिम को ज्ञात है कि भारत की रक्षाधुरी स्त्री है। इसीलिए वह स्त्रियों पर प्रहार कर रहे हैं। भारतीय स्त्रियां समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं।स्त्रियां ही धर्म और यज्ञ का आधार हैं। शिवाजी और विवेकानन्द को जो संस्कार उनकी माता ने दिया, वहीं वह बने। सनातन का लक्ष्य जोड़ना है, न कि तोड़ना। भारत माता मातृशक्ति की प्रतीक हैं। इससे स्पष्ट है, कि शक्ति का केन्द्र नारी है। यह सब सनातन संस्कृति की सोच के कारण हुआ।

विहिप ने श्री अयोध्या जी में श्रीरामजन्म भूमि से पूजित अक्षत रांची लाया
Published / 2023-11-06 17:53:14
विहिप ने श्री अयोध्या जी में श्रीरामजन्म भूमि से पूजित अक्षत रांची लाया

श्रीराम मंदिर चुटिया में हुआ आरती पूजनटीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 6 नवंबर को अपराह्न 2:30 बजे श्री अयोध्याजी श्रीराम मंदिर जन्मभूमि से पूजित अक्षत को रांची लाया गया। रांची आने पर बहु बाजार चौक के पास से रांची महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी के नेतृत्व में गाजे-बाजे के साथ एवम् पुष्प वर्षा कर स्वागत करते हुए श्रीराम मन्दिर चुटिया लाया गया। पूजित अक्षत को लाने के लिए झारखंड प्रतिनिधि के रूप में रामगढ़ जिला मंत्री छोटू वर्मा, रामगढ़ सहमंत्री तरुण वर्मा, रामगढ़ नगर प्रचारक संजीव जी वह एबीवीपी के कार्यकर्ता गौतम महतो ने अयोध्याजी में पूजित अक्षत को लेकर रांची आये थे। मौके पर प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने कहा कि अयोध्या जी से लाया गया पूजित अक्षत को झारखंड प्रांत के सभी जिलों में भेजा जायेगा। सनातन परंपरा में पीले अक्षत चावल से ही आमंत्रण किया जाता है। अक्षत कलश को झारखंड की राजधानी रांची स्थित अभी मुख्य मंदिरों में रखा जायेगा एवं पूजन आरती होगा। दिसंबर माह में इस अक्षत को सभी जिला केंद्रों में भेजा जायेगा। जिला, प्रखंड, पंचायत एवं गांवों के कार्यकर्ता जन-जन तक पहुंचकर लोगों को आमंत्रित करेंगे। श्री साहू ने बताया कि इसकी तैयारी झारखंड प्रांत में कर ली गयी है। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रांत के सभी गांव के मुख्य मंदिर में अनुष्ठान किया जायेगा। सभी मंदिरों में उपस्थित जनमानस अपने-अपने स्थान पर ही अयोध्या जी की आरती में सम्मिलित होंगे एवं दीपोत्सव मनायेंगे। सामाजिक समरसता प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र ने इस अवसर पर कहा कि ये हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि हमारे जीवन काल में श्रीराम लला का मंदिर बन रहा है। जिस प्रकार से भगवान श्री राम 14 वर्ष के बाद लौटने पर उत्सव मना था उसी प्रकार इस बार भी झारखंड सहित संपूर्ण देश के मंदिरों में उत्सव मनायी जायेगी।अयोध्याजी से अक्षत कलश को लेकर आए रामगढ़ जिला मंत्री छोटू वर्मा ने कहा कि अयोध्या से कलश को लाना हमारे जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण गौरव का पल रहा। संपूर्ण देश के आये हुए प्रतिनिधियों के साथ अक्षत का पूजन एवं उस पूजित अक्षत को लाने का सौभाग्य प्राप्त हुए। महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी ने कहा कि कल से झारखंड की राजधानी रांची में स्थित प्रमुख मंदिरों में अक्षत कलश को पूजन-अर्चन एवं आरती के लिए रखे जायेंगे।मौके पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू , प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, सामाजिक समरसता प्रांत प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, प्रचार प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन, रांची महानगर अध्यक्ष कैलाश केशरी, रामगढ़ मंत्री छोटू वर्मा, महंत गोकुल दास, विक्रम साहू, रतन केशरी, संतोष कुमार, रेणु सिंह, सुभम केशरी, गोल्डी साहू, आशीष साहू, शिवलाल साहू, अक्षय केसरी, अमित केशरी, लक्की नायक शहीद कई राम भक्त उपस्थित थे। उक्त जानकारी संगठन के झारखंड प्रसार प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने वक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

चुनाव के बीच राहुल को आयी बाबा केदार की याद, की पूजा-अर्चना
Published / 2023-11-05 22:48:06
चुनाव के बीच राहुल को आयी बाबा केदार की याद, की पूजा-अर्चना

हर-हर महादेव, चुनावों के बीच केदारनाथ मंदिर पहुंचे राहुल गांधी, की पूजा-अर्चना, लोगों ने लगाए मोदी और जय श्री राम के नारे एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। राहुल हेलीकॉप्टर से वहां पहुंचे, जहां मंदिर के पुजारियों तथा कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने उनका स्वागत किया। राहुल गांधी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में केदारनाथ मंदिर की अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कहा- आज, मैंने उत्तराखंड में केदारनाथ धाम का दौरा किया और दर्शन व पूजा की। हर-हर महादेव। राहुल गांधी पांच विधानसभा चुनावों के लिए लगातार प्रचार कर रहे हैं और रविवार को उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। उत्तराखंड में समुद्र तल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड के चार धाम और पंच केदार का हिस्सा है और भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।मंदिर में बाहर से ही दर्शन करने के बाद वह होटल चले गये। इस दौरान मंदिर आते समय रास्ते में और मंदिर पहुंचे पर जब लाइन में लगे भक्तों ने राहुल गांधी को देखा तो मोदी और जय श्री राम के नारे लगाये। कांग्रेस ने बताया निजी यात्रा राहुल गांधी आज दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर स्पेशल चार्टर प्लेन से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उतरे, जहां से वह हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीधे केदारनाथ के लिए रवाना हुए। इस दौरान केदारनाथ धाम में तीर्थ पुरोहित समाज ने उनका स्वागत किया। फिलहाल कांग्रेस ने राहुल गांधी के केदारनाथ आगमन को निजी और आध्यात्मिक बताया है और अपील है कि कोई भी कार्यकर्ता उनसे नहीं मिले।

अयोध्या तो सज गयी, अब मथुरा की बारी : पं अमरनाथ चौबे
Published / 2023-11-05 22:36:52
अयोध्या तो सज गयी, अब मथुरा की बारी : पं अमरनाथ चौबे

बाल लीला का वर्णन सुनकर श्रद्धालु आत्मविभोर हो उठे कथा श्रवण से आध्यात्मिकता और भक्ति मजबूत होती है : मदन मोहन पांडेय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ, लोहरदगा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण की बाल लीला, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग का प्रसंग भक्तों के दिल की गहराइयों में उतर गया महिला श्रद्धालु श्री कृष्णबाल लीला के प्रसंग में अपने को झूमने से नहीं रोक पायीं सत्ता और शक्ति पर कभी घमंड न करें टीम एबीएन, लोहरदगा। प्रभु श्रीराम का अवतार पहले हुआ था, इसलिए अयोध्या जी पहले सज गयी है। अब मथुरा सजाने का वक्त आ रहा है। श्रीमद्भागवत हमारा है। मतलब सभी सनातनियों का है। इसलिए मथुरा सजाने का दायित्व सभी सनातनियों का ही है। सभी तन, मन, धन से मथुरा जी को सजाने का संकल्प लें। यही भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा को भव्य बनाने का समय है। उक्त बातें महादेव आश्रम लोहरदगा स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर परिसर के मंजुरमती हाई स्कूल के प्रेक्षागृह से चल रहे, सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा व्यास पंडित अमरनाथ चौबे ने श्रीकृष्ण लीला, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग लगाने की कथा और उसके महात्म्य के बारे में भागवत प्रेमियों को विस्तार से बताने के दौरान कही।  श्रद्धालुजन भक्तिभाव में विभोर होकर श्रीकृष्ण के बाद लीला के अथाह गहराइयों में अपने को डुबोकर भक्त और श्रद्धालुओं ने जमकर जयकारे लगाते हुए झूमे रहे। यहां चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला का वर्णन किया गया। वाराणसी के कथा व्यास पंडित अमरनाथ चौबे के मुखारविंद से प्रभु श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन सुनकर श्रद्धालु आत्मविभोर हो उठे। बाल श्रीकृष्ण लीला की व्याख्या के क्रम में व्यास पीठ से पंडित अमरनाथ चौबे ने कहा कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका गर्व मर्दन करने के लिए भगवान ने व्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद करा दी। बालक श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू करा दी। इससे गुस्साये इंद्र ने ब्रजमंडल पर भारी बरसात करायी। प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ।  कथा वाचक अमरनाथ चौबे ने कहा कि गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के सम्मान में आयोजित एक उत्सव है। यह दीपावली के एक दिन बाद पड़ता है। गोवर्धन पूजा के रूप में जाना जाने वाला उत्सव अन्नकूट उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। यह त्योहार भक्तों द्वारा भगवान कृष्ण को अर्पित करने के लिए गेहूं, चावल, बेसन की सब्जी और बिना लहसुन और प्याज की सब्जी बनाकर मनाया जाता है।  गो-शब्द गाय को संदर्भित करता है, और वर्धन, पोषण को दर्शाता है। यह शब्द मिलकर गोवर्धन शब्द बनाते हैं। गोवर्धन की एक और व्याख्या यह है, कि यह भगवान कृष्ण की भक्ति के माध्यम से अपनी इंद्रियों को ऊपर उठाने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है। गो का अर्थ इंद्रियों से है। वर्धन का अर्थ है उन्नयन। इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा इस विश्वास के साथ की जाती है, कि ऐसा करने से व्यक्ति की आध्यात्मिकता और भगवान कृष्ण की भक्ति मजबूत होगी। मौके पर भागवत कथा के क्रम में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की झांकी सजाई गई। इस क्रम में भगवान श्री कृष्ण के कालिया मर्दन के रूपांतरण नृत्य नाटिका की प्रस्तुति से श्रद्धालुगण आनंदित हो उठे। कथा पंडाल में उपस्थित महिलाएं अपने आपको थिरकने से रोक नहीं पायीं। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में कलाकारों के साथ भाव भंगिमाओं पर झूमती महिलाओं ने खूब आनंद उठाया। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मुख्य यजमान मदन मोहन पांडेय-रीता पाण्डेय ने छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया और महाप्रसाद का वितरण किया। भागवत कथा को सफल बनाने में अन्य लोगों के अलावा वाराणसी से कथा व्यास अमरनाथ चौबे के साथ आए विद्यानंद तिवारी, मदन मोहन पांडेय, राजीव उपाध्याय, कौस्तुभ चतुवेर्दी, दिवाकर पांडेय के अलावा मनोज्ञ पांडेय, अनुपम पांडेय- निधि, वत्सा पांडेय, सुमन राय, राजेंद्र प्रताप देव, राजेंद्र प्रसाद खत्री, धनंजय अग्रवाल, रूपा पांडेय, सुरेश पांडेय, रामदेव भारती, नंदकुमार पांडेय, शिव कुमार राजगढ़िया, रामस्वरूप प्रसाद, सुदीप्ता मुखर्जी, अशोक अग्रवाल, रेणुका गुप्ता, कृपा प्रसाद सिंह, शिवशंकर सिंह, अनिल ठाकुर, विवेक सिद्धार्थ, सुनीता कुमारी, अनुराधा कुमारी, शांति कुमारी, विनीता कुमारी आदि महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान हर दिन प्रात: आठ से एक बजे तक वैदिक मंत्रोच्चार से पूजा अर्चना, मध्याह्न एक  से ढाई बजे तक रुद्र अभिषेक और संध्या चार से रात आठ बजे तक भागवत कथा का वचन हो रहा है।

वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंगों का वर्णन
Published / 2023-11-04 22:24:14
वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंगों का वर्णन

महादेव आश्रम लोहरदगा में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह यज्ञ के चौथा दिनटीम एबीएन, लोहरदगा। उपनगरीय क्षेत्र महादेव आश्रम लोहरदगा में स्थित मंजुरमती हाई स्कूल प्रेक्षागृह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव आदि प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।वाराणसी के कथा व्यास पंडित अमरनाथ चौबे ने श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन प्रसंग में बताया कि राजा बलि दानी राजा है। वह अश्वमेघ यज्ञ कराता हैं। जहां भगवान विष्णु-वामन रूप में प्रकट होते हैं। राजा बलि वामन भगवान से कुछ मांगने के लिए कहते हैं। वामन रूपधारी भगवान तीन पग भूमि दान में मांगते हैं। विराट रूप धारण कर एक पग में आकाश, दूसरे पग में पृथ्वी नाप लेते हैं। तीसरे पग में बलि अपना मस्तक आगे कर देता है। भगवान बलि की दानशीलता से प्रसन्न हो जाते हैं।अगले प्रसंग में व्यास पंडित अमरनाथ चौबे ने कृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनायी। कंस अपनी बहन देवकी का विवाह वासुदेव से कर दिया। जब कंस अपनी बहन को विदा करता है, तो आकाशवाणी होती है, कि देवकी का आठवां लाल तेरा काल होगा। कंस बासुदेव और देवकी को कारागार में डाल देता है। उनकी पैदा होने वाली संतानों को उसने एक- एक कर मार डाला। आठवीं संतान के रूप में भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लेते हैं। वासुदेव जी गोकुल में नंद के यहां कृष्ण को सौंप देते हैं। उनकी कन्या को लेकर वापस मथुरा आ जाते हैं।मौके पर आयोजन समिति के मदन मोहन पांडेय, रीता पाण्डेय, मनोज्ञा पांडेय, अनुराधा कुजूर, सुदीप्ता मुखर्जी, ममता, अनील ठाकुर, रामस्वरूप प्रसाद, वत्सा पाण्डेय, विवेक सिद्धार्थ, सूरज, बसंती, सिटी मैनेजर विजय कुमार, निधि पाण्डेय, सुमन राय, दीपा कुमारी, शांति कुमारी, सुनीता कुमारी, धनंजय अग्रवाल, सुदर्शन ठाकुर, इंदु देवी, ऋषभ पाण्डेय, ओमप्रकाश सिंह, शकुंतला अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में भागवत प्रेमी उपस्थित रहे। श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान हर दिन रुद्राभिषेक का आयोजन बुढ़वा महादेव मंदिर में हो रहा है। अपराह्न तीन से छह बजे तक महादेव आश्रम में कथा वाचन किया जा रहा है। यजमान के रूप में मदन मोहन पांडेय और रीता पांडेय शामिल हो रही है। कार्यक्रम सात नवंबर तक चलेगा।

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