सक्सेस स्टोरी नंदिनी ने कहा-पढ़ाई में हो रही बड़ी मदद, सरकार एवं मुख्यमंत्री को धन्यवाद एबीएन न्यूज नेटवर्क, बरडंडा/हैदरनगर, (पलामू)। सरकार द्वारा चलायी जा रही सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना से हैदरनगर प्रखंड अंतर्गत बरडंडा पंचायत के बरवाडीह गांव निवासी नंदिनी कुमारी की उम्मीदों में पंख लगा है। इस योजना के तहत नंदिनी को आज तीसरे किस्त की राशि 5000 रुपये मिला। नंदिनी दृष्टि दिव्यांग है। करीब 60% से अधिक दृष्टि दिव्यांग होने के बावजूद नंदिनी में पढ़ाई का जज्बा देखने लायक है। उसके चेहरे की आभा से ही पढ़ाई की रूचि का आकलन किया जा सकता है। आपकी योजना-आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत बरडंडा पंचायत में लगे शिविर में नंदिनी को योजना का लाभ मिला। शिविर में नंदिनी उत्साह से लबरेज थी। उन्होंने बताया कि उसके पिता का नाम नंदलाल राम है, जो दैनिक मजदूरी करते हैं। वहीं मां सुशीला देवी ग्रहिणी है। मध्यवर्गीय परिवार है। नगदी आमदनी नहीं होने के कारण पढ़ाई जारी रखने में बहुत ही कठिनाई होती थी, लेकिन सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के लाभ से वह पढ़ाई को अबतक जारी रखी है। योजना से मिली राशि का उपयोग पढ़ाई एवं पाठ्य सामग्री की खरीद में करती है। यह राशि उसके लिए काफी मददगार साबित हुई है। वर्तमान में मिले राशि का भी उपयोग वह पढ़ाई में करेगी। नंदिनी ने झारखंड सरकार एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे शब्दों में धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से प्रशासनिक पदाधिकारी उनके पंचायत तक पहुंचकर इस योजना का लाभ दिया है। यह बड़ी बात है। नंदिनी ने अन्य योग्य बालिकाओं से भी सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ मिलने से बालिका स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हो रही हैं। वह अपने अभिभावकों पर आश्रित न होकर खुद से अपनी पढ़ाई को जारी रख सकेंगी। पलामू उपायुक्त शशि रंजन ने कहा कि आपकी योजना-आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में आॅन स्पॉट सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजनों को दिया जा रहा है। सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ पलामू की बालिकाओं को दिया जा रहा है। इस योजना का लाभ से बालिका अपनी शिक्षा को बढ़ावा दे रही हैं। बालिकाओं को अलग-अलग कक्षाओं में निर्धारित राशि के अनुरूप दी जाती है। शिविर के दौरान आवेदन करने से लेकर लाभ लेने में भी लाभुकों को सहुलियत हो रही है। सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत बालिकाओं को अच्छी शिक्षा के लिए 40,000 रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है।
जगन्नाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एयर कंडिशन्ड स्ट्रक्चर करेगी स्थापितएबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कतार प्रबंधन प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के वास्ते पुरी स्थित ग्रैंड रोड पर वातानुकूलित लचीली फैब्रिक संरचना स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओबीसीसी) के एक वरिष्ठ अभियंता प्रभात कुमार पाणिग्रही ने कहा कि कपड़े की यह लचीली संरचना तीन तरफ से ढंकी होगी और यह एक सुरंग की तरह दिखेगी। यह 12 मीटर चौड़ी और 84 मीटर लंबा होगी। ओबीसीसी, पुरी में विरासत गलियारा परियोजना के तहत विभिन्न बुनियादी ढांचे का कार्यान्वयन कर रहा है। पाणिग्रही ने कहा कि यह संरचना ग्रैंड रोड पर मंदिर से पहले धर्मज्योति लॉज से मंदिर कार्यालय तक नाले से लगभग दो मीटर की दूरी पर स्थापित की जायेगी। उन्होंने कहा कि समर्पित गलियारे का उपयोग केवल मंदिर में प्रवेश के लिए किया जायेगा। वर्तमान में 12वीं शताब्दी के मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए मंदिर के सामने एक अस्थायी संरचना स्थापित की गयी है। अभियंता ने कहा कि बुजुर्ग श्रद्धालुओं और बच्चों को मंदिर में प्रवेश करने से पहले घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, जिससे उन्हें कठिनाई होती है। पाणिग्रही ने कहा कि मंदिर में भक्तों की सुचारू यात्रा सुनिश्चित करने के लिए वातानुकूलित संरचना स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि ढांचा स्थापित करने के लिए बुधवार को माप लेने की प्रक्रिया शुरू की गयी तथा इसे 25 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कुलदीप तिर्कीएबीएन सोशल डेस्क। आगमन काल आत्मिक तैयारी का समय है हम मनुष्य सांसरिक दृष्टिकोण से क्रिसमस की तैयारी अधिक करते हैं परंतु आत्मिक रूप से कमएक जंगल में बारहसिंगा रहता था। उसे अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत ही ज्यादा घमंड था। अब पानी पीते हुए अपनी परछाई देखता तो सोचता, मेरे सिंग कितने सुंदर है, पर मेरी टांगें कितनी भद्दी है। उस दिन जंगल में शिकारी आये। जब उन्होंने सुंदर सींगों वाले बरहसिंगा को देखा तो उसे पकड़ने के लिए दौड़े।बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ता हुआ शिकारियों को बहुत पीछे छोड़ दिया। तभी अचानक उसके सींग एक पेड़ की शाखाओं में अटक गये। बारहसिंगा अपने सींग निकालने के लिए भरसक मेहनत कर रहा था। काफी समय से जोर लगाने के बाद भी वह सींग पूरी तरह से अटके हुए थे। तब तक शिकारी और भी करीब आ जाता है। कैसे भी कर वह अपने सींग निकालने में कामयाब हो जाता है।अब सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर वह सोचने लगा, मैं कितना बड़ा मूर्ख हूं।आज सींग के कारण मारा जाता और पैरों के कारण आज बच पाया। हमें विश्वास है कि जब हम जन्म लिये हैं तो हमारी मृत्यु भी तय है और हमारा अंतिम लक्ष्य स्वर्ग राज्य की प्राप्ति करना है, जहां हमारा ये शरीर हमारे साथ नहीं जायेगा। जिसकी सुंदरता पर हम घमंड करते हैं। हमारे साथ हमारी आत्मा जायेगी। जिसको हम अनदेखा करते हैं। आगमन काल हमें उसी आध्यात्मिक तैयारी का सुअवसर देता है जो हमें स्वर्ग तक लेकर जायेगी। (लेखक रांची महाधर्मप्रान्तीय यूथ कोर्डिनेटर हैं।)
6 दिसम्बर/इतिहास-स्मृति राष्ट्रीय कलंक का परिमार्जनएबीएन सोशल डेस्क। भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया। इनमें से श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर (अयोध्या), श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) और काशी विश्वनाथ मन्दिर के सीने पर बनी मस्जिदें सदा से हिन्दुओं को उद्वेलित करती रही हैं। इनमें से श्रीराम मन्दिर के लिए विश्व हिन्दू परिषद् ने देशव्यापी आन्दोलन किया, जिससे 6 दिसम्बर, 1992 को वह बाबरी ढांचा धराशायी हो गया।श्रीराम मन्दिर को बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीर बाकी ने 1528 ई. में गिराकर वहां एक मस्जिद बना दी। इसके बाद से हिन्दू समाज एक दिन भी चुप नहीं बैठा। वह लगातार इस स्थान को पाने के लिए संघर्ष करता रहा। 23 दिसम्बर, 1949 को हिन्दुओं ने वहां रामलला की मूर्ति स्थापित कर पूजन एवं अखण्ड कीर्तन शुरू कर दिया। विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा इस विषय को अपने हाथ में लेने से पूर्व तक 76 हमले हिन्दुओं ने किये; जिसमें देश के हर भाग से तीन लाख से अधिक नर नारियों का बलिदान हुआ; पर पूर्ण सफलता उन्हें कभी नहीं मिल पायी।विश्व हिन्दू परिषद ने लोकतान्त्रिक रीति से जनजागृति के लिए श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन कर 1984 में श्री रामजानकी रथयात्रा निकाली, जो सीतामढ़ी से प्रारम्भ होकर अयोध्या पहुंची। इसके बाद हिन्दू नेताओं ने शासन से कहा कि श्री रामजन्मभूमि मन्दिर पर लगे अवैध ताले को खोला जाए। न्यायालय के आदेश से 1 फरवरी, 1986 को ताला खुल गया।इसके बाद वहां भव्य मन्दिर बनाने के लिए 1989 में देश भर से श्रीराम शिलाओं को पूजित कर अयोध्या लाया गया और बड़ी धूमधाम से 9 नवम्बर, 1989 को श्रीराम मन्दिर का शिलान्यास कर दिया गया। जनता के दबाव के आगे प्रदेश और केन्द्र शासन को झुकना पड़ा।पर मन्दिर निर्माण तब तक सम्भव नहीं था, जब तक वहां खड़ा ढांचा न हटे। हिन्दू नेताओं ने कहा कि यदि मुसलमानों को इस ढाँचे से मोह है, तो वैज्ञानिक विधि से इसे स्थानान्तरित कर दिया जाये; पर शासन मुस्लिम वोटों के लालच से बंधा था। वह हर बार न्यायालय की दुहाई देता रहा। विहिप का तर्क था कि आस्था के विषय का निर्णय न्यायालय नहीं कर सकता। शासन की हठधर्मी देखकर हिन्दू समाज ने आन्दोलन और तीव्र कर दिया।इसके अन्तर्गत 1990 में वहां कारसेवा का निर्णय किया गया। तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी। उन्होेंने घोषणा कर दी कि बाबरी परिसर में एक परिन्दा तक पर नहीं मार सकता; पर हिन्दू युवकों ने शौर्य दिखाते हुए 29 अक्तूबर को गुम्बदों पर भगवा फहरा दिया। बौखला कर दो नवम्बर को मुलायम सिंह ने गोली चलवा दी, जिसमें कोलकाता के दो सगे भाई राम और शरद कोठारी सहित सैकड़ों कारसेवकों का बलिदान हुआ।इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। एक बार फिर 6 दिसम्बर, 1992 को कारसेवा की तिथि निश्चित की गयी। विहिप की योजना तो केन्द्र शासन पर दबाव बनाने की ही थी; पर युवक आक्रोशित हो उठे। उन्होंने वहां लगी तार बाड़ के खम्भों से प्रहार कर बाबरी ढांचे के तीनों गुम्बद गिरा दिये। इसके बाद विधिवत वहां श्री रामलला को भी विराजित कर दिया गया। इस प्रकार वह बाबरी कलंक नष्ट हुआ और तुलसी बाबा की यह उक्ति भी प्रमाणित हुई - होई है सोई, जो राम रचि राखा।
एबीएन सोशल डेस्क। देश में हर मिनट तीन बच्चों के बचपन को बाल विवाह के दलदल में झोंक दिया जाता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि रोजाना बाल विवाह के सिर्फ तीन मामलों की ही थानों में शिकायत दर्ज हो पाती है। इसका अर्थ यह है कि देश में रोजाना 4320 बाल विवाह होते हैं जबकि मामले सिर्फ तीन दर्ज होते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के हालिया जारी आंकड़े बताते हैं कि 2021 के मुकाबले 2022 में बाल विवाह के मामले दर्ज होने की संख्या पांच फीसद और घटी है। देश में 2021 में बाल विवाह के 1050 मामले दर्ज किए थे जबकि 2022 में 1002 मामले ही दर्ज किये गये।संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार देश में हर साल 15 लाख से ज्यादा लड़कियों की शादी 18 साल की होने से पहले हो जाती है। इसका मतलब यह है कि देश में हर मिनट तीन बाल विवाह हो रहे हैं जबकि एनसीआरबी के आंकड़े कुछ और कहते हैं। अपराध की दर और उसकी शिकायत में यह भयावह खाई बाल विवाह की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी एजेंसियों की जवाबदेही, उनके कामकाज के तरीकों और प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान खड़े करती है।बाल विवाह की जमीनी हकीकत और मामले दर्ज होने में भारी फासले पर चिंता जताते हुए बाल विवाह मुक्त भारत के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, ये आंकड़े बता रहे हैं कि हम कितनी भयावह समस्या से जूझ रहे हैं। अगर इस फासले को खत्म करना है तो बाल विवाह की सूचना अनिवार्य करने के साथ अपराधियों को सख्त सजा एक पूर्व शर्त है। इसे एक सामान्य घटना के बजाय अपराध के तौर पर देखना होगा। इससे भी कहीं ज्यादा समस्या से निपटने के लिए समाज और न्यायिक तंत्र का लक्ष्य निरोधक कानूनी उपायों के जरिए लोगों में सजा का भय पैदा कर उन्हें बाल विवाह के प्रति हतोत्साहित करने का होना चाहिए। देश को 2030 तक बाल विवाह से मुक्त कराने के लक्ष्य के साथ 160 से ज्यादा गैर सरकारी संगठनों के गठबंधन द्वारा महिलाओं की अगुआई में देश के 300 जिलों में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में तब अप्रत्याशित मोड़ आया जब अक्टूबर में 17 राज्यों की सरकारों ने बाल विवाह के खिलाफ युद्ध जैसा रुख अपनाते हुए अपने राज्यों में विभिन्न विभागों और उनके अफसरों व कर्मियों को इसके खात्मे के प्रयासों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने का निर्देश दिया।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार भारत में बाल विवाह की मौजूदा दर 23.5 फीसद है और देश के 257 जिलों में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। बाल विवाह बच्चों से बलात्कार है। इसका नतीजा बाल गर्भावस्था के रूप में सामने आता है जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। दशकों से और पीढ़ी दर पीढ़ी हम अपने बच्चों के भविष्य को बाल विवाह के नर्क में झोंक रहे हैं। प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भुवन ऋभु हाल ही में आई चर्चित किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज के लेखक है। यह किताब पिकेट रणनीति के जरिए 2030 तक देश में बाल विवाह के खात्मे के लिए एक समग्र, लक्ष्य केंद्रित और टिकाऊ उपायों का रणनीतिक खाका पेश करती है। इस खबर या इस विषय से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (08595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
श्रीराम जन्मभूमि के नूतन मंदिर का चित्र एवं राम भक्तों से निवेदन व मंदिर का विवरण पत्रक का हुआ लोकार्पणटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत कार्यालय शक्ति आश्रम हरमू रोड रांची परिसर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने समस्त सनातनियों के घर-घर में दी जाने वाली श्रीराम जन्मभूमि नूतन मंदिर का चित्र एवं विश्व के रामभक्तों से निवेदन व श्रीराम जन्मभूमि मंदिर विवरण पत्रक का लोकार्पण किया।श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा है कि आगामी पौष शुक्ल द्वादशी, विक्रम संवत 2080, सोमवार तदनुसार दिनांक 22 जनवरी 2024 के शुभ दिन प्रभु श्रीराम के बाल रूप नूतन विग्रह को, श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे नवीन मंदिर भूतल के गर्भगृह में विराजित करके प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी। मौके पर अयोध्या में अभूतपूर्व आनंद का वातावरण होगा। इस पुण्य काल के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने निवेदन किया है कि प्राण प्रतिष्ठा के दिन पूर्वाह्न 11 से अपराह्न 1 के मध्य समस्त सनातनी समाज अपने ग्राम, मोहल्ले, कॉलोनी में स्थित किसी मंदिर में आस-पड़ोस के रामभक्त एकत्रित होकर भजन-कीर्तन करें, टेलीविजन अथवा कोई पर्दा, एलईडी स्क्रीन लगाकर अयोध्या का प्राण प्रतिष्ठा समारोह समाज के सभी रामभक्त देखें।शंखध्वनि, घंटानाद, महाआरती करें, महाप्रसाद वितरण करें। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र आग्रह किया है कि कार्यक्रम का स्वरूप मंदिर केंद्रित रहे। अपने मंदिर में स्थित देवी - देवता का भजन-कीर्तन, आरती, पूजा तथा श्री राम जय राम जय जय राम... विजय महामंत्र का 108 बार सामूहिक जाप करें। इसके साथ हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामरक्षा स्त्रोत आदि का सामूहिक पाठ करें। सभी देवी-देवता प्रसन्न होंगे, वातावरण सर्वत्र सात्विक एवं राममय हो जायेगा। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दिन सायंकाल सूर्यास्त के बाद अपने घर के सामने देवताओं की प्रसन्नता के लिए दीपक जलाएं, दीपमलिका सजायें, विश्व के करोड़ों घरों में दीपोत्सव मनाया जाये। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने यह भी निवेदन किया है कि प्राण प्रतिष्ठा दिन के उपरांत प्रभु श्रीराम लला तथा नवनिर्मित मंदिर का दर्शन हेतु अपने अनुकूल समय अनुसार अयोध्या जी में परिवार सहित अवश्य पधारे तथा श्रीराम जी की कृपा-आशीष प्राप्त करें। अयोध्या जी का पावन भूमि में पर्यावरण ठीक रहे इस निमित्त राम भक्तों से आग्रह किया गया है कि रामलला दर्शन के निमित्त अयोध्या जी पर किसी भी प्रकार का पॉलिथीन का उपयोग न करें। दूसरे पृष्ठ के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का विवरण प्रस्तुत की गयी है।लोकार्पण कार्यक्रम में विहिप के क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव व सुभाष नेत्रगवांकर, प्रांत मंत्री डॉ बीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार व रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, बजरंग दल प्रांत संयोजक दीपक ठाकुर, सामाजिक समरसता प्रांत प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, रेनू अग्रवाल, अरविंद सिंह सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप, झारखंड के प्रचार प्रसार, प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। शिखाबन्धन (वन्दन) आचमन के पश्चात् शिखा को जल से गीला करके उसमें ऐसी गांठ लगानी चाहिये, जो सिरा नीचे से खुल जाये। इसे आधी गांठ कहते हैं। गांठ लगाते समय गायत्री मन्त्र का उच्चारण करते जाना चाहिये।शिखा, मस्तिष्क के केन्द्र बिन्दु पर स्थापित है। जैसे रेडियो के ध्वनि विस्तारक केन्द्रों में ऊंचे खम्भे लगे होते हैं और वहां से ब्राडकास्ट की तरंगें चारों ओर फेंकी जाती हैं, उसी प्रकार हमारे मस्तिष्क का विद्युत् भण्डार शिखा स्थान पर है, उस केन्द्र में से हमारे विचार, संकल्प और शक्ति परमाणु हर घड़ी बाहर निकल-निकलकर आकाश में दौड़ते रहते हैं। इस प्रवाह से शक्ति का अनावश्यक व्यय होता है और अपना कोष घटता है। इसका प्रतिरोध करने के लिये शिखा में गांठ लगा देते हैं। सदा गांठ लगाये रहने से अपनी मानसिक शक्तियों का बहुत-सा अपव्यय बच जाता है।संध्या करते समय विशेष रूप से गांठ लगाने का प्रयोजन यह है कि रात्रि को सोते समय यह गांठ प्रायः शिथिल हो जाती है या खुल जाती है। फिर स्नान करते समय केश-शुद्धि के लिये शिखा को खोलना पड़ता है। संध्या करते समय अनेक सूक्ष्म तत्त्व आकर्षित होकर अपने अन्दर स्थिर होते हैं।वे सब मस्तिष्क केन्द्र से निकलकर बाहर न उड़ जाये, इसलिए शिखा में गांठ लगा दी जाती है। इसमें गांठ लगा देने से भीतर भरी हुई वायु बाहर नहीं निकल पाती। गांठ लगी हुई शिखा से भी यही प्रयोजन पूरा होता है। वह बाहर के विचार और शक्ति समूह को ग्रहण करती है। भीतर के तत्त्वों का अनावश्यक व्यय नहीं होने देती। आचमन से पूर्व शिखा बन्धन इसलिए नहीं होता, क्योंकि उस समय त्रिविध शक्ति का आकर्षण जहां जल द्वारा होता है, वह मस्तिष्क के मध्य केन्द्र द्वारा भी होता है। इस प्रकार शिखा खुली रहने से दुहरा लाभ होता है। तत्पश्चात् उसे बांध दिया जाता है।
30 लाख परिवार को श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का देगा निमंत्रण : विहिपटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद की झारखंड प्रांत कार्यकारिणी बैठक आज पूर्वाह्न 10:00 बजे विश्व हिंदू परिषद प्रांत कार्यालय शक्ति आश्रम हरमू रोड किशोरगंज चौक रांची में संपन्न हुई। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू बताया कि आगामी 4 दिसंबर से 10 दिसंबर जिला बैठक 11 दिसंबर से 17 दिसंबर प्रखंड बैठक एवं 18 दिसंबर से 24 दिसंबर तक पंचायत बैठक की जायेगी। 22 दिसंबर गीता जयंती / शौर्य दिवस के पावन अवसर पर झारखंड के सभी प्रमुख मंदिरों में श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं महाआरती का आयोजन किया जायेगा। 23 दिसंबर से 30 दिसंबर तक स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस पर धर्म रक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, इसके तहत परावर्तन के कार्यक्रम किये जायेंगे।डॉ साहू ने बताया 1 जनवरी से 15 जनवरी 2024 तक झारखंड के 30 लाख परिवारों तक पहुंच कर अयोध्या जी में हो रहे श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त अपने-अपने क्षेत्र के सभी मंदिरों को अयोध्याधाम का प्रतीक मानकर 22 जनवरी 2024 को धार्मिक अनुष्ठान, महाआरती एवं रात्रि में अपने-अपने घरों में दीपोत्सव मनाने का आग्रह करेंगे। इस निमंत्रण में सभी हिंदू जनमानस को फरवरी मास के बाद एक बार पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ललाजी का दर्शन करने जाने का भी निमंत्रण दिया जायेगा। डॉ साहू ने कहा कि आज अयोध्या जी से लाये गये पूजित अक्षत को झारखंड प्रांत के सभी जिला केंद्रों में भेजा जा रहा है। इस पूजित अक्षत को जिला केंद्र से प्रखंड एवं पंचायत केंद्र तक पहुंचाया जायेगा।बैठक में क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव व सुभाष नेत्रगवांकर, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार व रंगनाथ महतो, बजरंग दल प्रांत संयोजक दीपक ठाकुर, सामाजिक समरसता प्रांत प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह, धर्माचार्य संपर्क प्रांत प्रमुख युगल किशोर प्रसाद, मार्गदर्शक मंडल प्रांत संयोजक स्वामी कृष्णचैतन्य ब्रह्मचारी, रांची विभाग मंत्री किशुन झा, धनबाद विभाग मंत्री विनय कुमार, गुमला विभाग मंत्री केशवचंद्र साय, पलामू विभाग सहमंत्री महेंद्रनाथ राम, धनबाद विभाग सह मंत्री राजेश दुबे सहित विभाग संगठन मंत्री, जिला संगठन मंत्री, जिला मंत्री, जिला अध्यक्ष, जिला बजरंग दल संयोजक उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप, झारखंड के प्रचार प्रसार, प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। साहित्य अकादमी का वार्षिक पुस्तक मेला पुस्तकायन शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में आरंभ हो गया, जो नौ दिसंबर तक चलेगा। यह पुस्तक मेला साहित्य अकादमी परिसर में नौ दिसंबर तक खुला रहेगा। इस बार पुस्तक मेले में 40 से अधिक महत्वपूर्ण प्रकाशक शामिल हो रहे हैं। पुस्तकायन पुस्तक मेले में अनेक साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ ही कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रतिदिन प्रस्तुत किये जायेंगे। मेले में विभिन्न भारतीय भाषाओं के लगभग 50 लेखक, कलाकार शामिल हो रहे हैं। मेले के दौरान आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों में मुशायरा, कवि सम्मिलन, युवा साहिती, बहुभाषी रचना-पाठ, पैनल चर्चा एवं अपने प्रिय साहित्यकार से मिलिये जैसे अनेक कार्यक्रम रखे गये हैं। मेले में बच्चों के लिए भी कार्टून कार्यशाला एवं उनके प्रिय बाल लेखकों से मिलने के कार्यक्रम रखे गये हैं। पुस्तक मेले के दौरान शामिल होने वाले कुछ मुख्य लेखक ममता कालिया, अनामिका, बलदेव सिंह, चंद्रभान ख़याल, ख़ालिद जावेद, प्रकाश मनु, बुद्धिनाथ मिश्र, ज्ञानप्रकाश विवेक, ख़ालिद महमूद, महुआ माजी, माधव जोशी, इरशाद खान सिकंदर आदि हैं।
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