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पूजन के बाद बांटा गया अयोध्या से आया पूजित अक्षत
Published / 2023-12-15 15:17:29
पूजन के बाद बांटा गया अयोध्या से आया पूजित अक्षत

टीम एबीएन, रांची। अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को होने वाले श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए जन-जन को आमंत्रण देने हेतु रांची पहुंचे अक्षत कलश की आज श्री राम जानकी मंदिर तपोवन मंदिर में मंदिर के पूज्य महंत श्री ओम प्रकाश शरण जी द्वारा विधिवत पूजा अर्चना कर रांची महानगर के 16 नगरों में वितरित किया गया। सभी 16 नगरों के लिए पीतल के कलशो में पूजित पीला अक्षत भरकर नगर संयोजक एवं सहसंयोजक को सौंपा गया जिसे श्रद्धा पूर्वक  अपने माथे पर रखकर जय श्री राम के उद्घोष के साथ अपने-अपने नगरों में ले गये जिसे दर्शन पूजन के लिए नगर के मंदिरों में रखा जायेगा। 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच महानगर के सभी सनातनी परिवार के घर निमंत्रण के रूप में पूजित अक्षत, आमंत्रण पत्र एवं श्री राम मंदिर का चित्र कार्यकर्ताओं द्वारा पहुंचाया जाएगा। इस अवसर पर तपोवन श्री राम जानकी मंदिर में मुख्य रूप से उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र ने कहा पूरे विश्व के हिंदुओं एवं भारतवर्ष के लिए यह एक अभूतपूर्व आनंद का क्षण होगा जब प्रभु श्री राम अपने दिव्य, भव्य और नव्य मंदिर में विराजित होंगे।श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी 2024 को अयोध्या जी के साथ-साथ रांची महानगर के भी सभी मठ मंदिरों को सजाया जाएगा तथा भजन- कीर्तन एवं अनुष्ठान किये जायेंगे। प्रसाद बटेंगे तथा कई मंदिरों में भंडारा भी होगा। समस्त हिंदू समाज अपने आसपास के मंदिरों में एकत्र होकर सामूहिक पूजन एवं आरती में भाग लेंगे। संध्या काल में सभी अपने-अपने घरों में दीप जलाकर दीपोत्सव मनायेंगे।अक्षत कलश वितरण कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर के अध्यक्ष श्री कैलाश केसरी, कार्यक्रम के महानगर संयोजक श्री चंद्रदीप दुबे ,सहसंयोजक श्री अंकित सिंह, प्रांत प्रचार प्रसार प्रमुख श्री प्रकाश रंजन, प्रांत धर्मप्रसार परियोजना प्रमुख श्रीमती रेणु अग्रवाल, विभाग मंत्री श्री कृष्ण कुमार झा, विभाग धर्माचार्य संपर्क प्रमुख श्री सुरेंद्र तिवारी ,विभाग सेवा प्रमुख श्री रविशंकर राय, विभाग प्रचार प्रसार प्रमुख अमर प्रसाद, रांची महानगर सह मंत्री श्री विश्वरंजन, पारसनाथ मिश्र, मुकेश गिरी सहित सभी नगरों के संयोजक, सहसंयोजक सहित संघ, विहिप एवं अन्य सम वैचारिक संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रचार प्रसार सह प्रमुख प्रकाश रंजन (93344 33338) ने एक परर्स विज्ञप्ति जारी कर दी।

आम का अचार बना गूगल की सुर्खी
Published / 2023-12-14 20:36:35
आम का अचार बना गूगल की सुर्खी

आम का अचार बनाने की इस रेसिपी को गूगल पर साल 2023 में किया गया सबसे ज्यादा सर्चएबीएन सोशल डेस्क। आम का अचार बनाने की रेसिपी सदियों पुरानी है लेकिन फिर भी समय के साथ-साथ इस रेसिपी में कई बदलाव आए हैं। आप अगर इन सर्दियों को मौसम में कच्चे आम काटकर धूप में सुखाकर उसका अचार बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो हम आपको आम का अचार बनाने की सबसे स्वादिष्ट रेसिपी बता रहे हैं। ये रेसिपी इस साल 2023 में लोगों ने सबसे ज्यादा सर्च की है। टॉप 5 रेसिपी की सर्च में साल 2023 में आम का अचार सबसे टॉप पॉजिशन पर है। तो आइये इसे आप घर पर कैसे बना सकते हैं ये रेसिपी जानते हैं।  आम का अचार बनाने की रेसिपी  500 ग्राम कच्चे आम (धोकर कद्दूकस कर लें) 3/4 कप सरसों का तेल 2 छोटे चम्मच सेंधा नमक 1 छोटी चम्मच हींग (अस्तबलास्त) 2 छोटे चम्मच मेथी दाना (भूनकर पीसा करें) 1 छोटी चम्मच राई 1 छोटी चम्मच जीरा 1/2 कप सौंफ 1/2 कप काली मिर्च पाउडर 1/4 कप हल्दी पाउडर 1/2 कप गुड़ (चीनी के स्थान पर इस्तेमाल की जा सकती है) आम का अचार बनाने का तरीका : आमों को कद्दूकस करें। कच्चे आमों को धोकर कद्दूकस कर लें और उन्हें एक बड़े बाउल में रखें। सारी सामग्री तैयार करें। सेंधा नमक, हींग, मेथी दाना, राई, जीरा, सौंफ, काली मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, और गुड़ को अलग-अलग कटले में तैयार करें।तेल गरम करें। कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें। खड़ा-मसाला तैयार करें। गरम तेल में हींग, राई, जीरा, मेथी दाना, और सौंफ डालें। आमों को मिलायें। खड़ा-मसाला में डाली गयी सामग्री में कच्चे आम को मिलाएं और अच्छे से मिला दें। मसाला तैयार करें। अब इसमें सेंधा नमक, काली मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, और गुड़ डालें और अच्छे से मिला दें। आम का अचार पकायें। अब इस मिश्रण को धीरे-धीरे पकाएं, सुबह शाम में उतारते रहें ताकि अचार अच्छे से पके और मसाला अच्छे से सेंके। ठंडा होने पर भंडारित करें। जब आम का अचार पूरी तरह से पक जाये और ठंडा हो जाये, तो इसे स्टेरिलाइज्ड भंडारित जार में भरकर ठंडा करें। इस आम के अचार को जीरे के रोटी, परांठे या चावल के साथ सर्व करें। इस तरीके से बनायें, आपका आम का अचार तैयार है।

बाल विवाह के खिलाफ का अहम वर्ष रहा 2023
Published / 2023-12-14 20:22:16
बाल विवाह के खिलाफ का अहम वर्ष रहा 2023

एबीएन सोशल डेस्क। वर्ष 2023 को एक ऐसे साल के रूप में याद किया जायेगा जब बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में देश ने उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की। वर्ष 2023 में ऐसी दो घटनाएं हुईं जो देश की सामूहिक चेतना पर अमिट छाप छोड़ गयी। पहला, जब भारत ने अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगायी और चंद्रयान सफलतापूर्वक चांद पर उतरा। दूसरा, जब देश ने अपनी अंतरात्मा में झांक कर देखा और एक सुर में तय किया कि अब वह न तो अपने बच्चों को बाल विवाह के नाम पर दासता की बेड़ियां पहनायेगा और न ही उन्हें और यातनाओं का शिकार होने देगा। पहली उपलब्धि बहिमुर्खी थी। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक लंबी छलांग थी जिसे देखा जा सकता था लेकिन दूसरी उपलब्धि जमीनी प्रयासों का नतीजा थी जहां देशवासियों ने एक साथ हाथ उठाकर निश्चय किया कि वे बाल विवाह की सदियों पुरानी कुरीति को खत्म करके मानेंगे।दुनिया में कुल 223 मिलियन बाल वधुएं हैं हैं जिसमें एक तिहाई अकेले भारत की हैं। स्वतंत्र भारत में बाल विवाह के खिलाफ आज से कुछ वर्षों पहले तक समाज सुधारकों से लेकर सरकारी विभागों तक के प्रयास कभी अनसुने हो कर रह गए तो कभी मामूली से शोर से आगे नहीं बढ़े। और ये किसी बदलाव के लिए पूरी तरह नाकाफी थे। लेकिन अब स्थिति अलग है। आज से चंद वर्षों बाद अगर कोई बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई की शुरूआत और इसके खात्मे का क्रमिक वृतांत लिखेगा तो 2023 को उस साल के रूप में याद किया जायेगा जहां बच्चों के साथ इस अपराध के खात्मे के अभियान ने निर्णायक शक्ल अख्तियार की। पहली बार 2023 में यह हुआ जब देश के 17 राज्यों ने एक साथ मिलकर बाल विवाह मुक्त भारत अभियान छेड़ा जो जल्द ही सुनामी में बदल गया। देश के 3,79,972 गांवों और 9,91,859 स्कूलों में बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई और कुल 4,91,25,475 लोगों ने शपथ लेकर कहा; बहुत हो चुका, बाल विवाह की आड़ में बच्चों के साथ बलात्कार और उनकी हत्या अब और नहीं। एक अभिनव पहल और बाल विवाह के खिलाफ बेमिसाल राष्ट्रव्यापी अभियान में 16 अक्टूबर को पूरे देश से सरकारी विभागों के कर्मचारी, युवा और बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे नारे लगाते हुए सड़कों, गलियों और गांवों की पगड़ंडियों पर निकले। बाल विवाह को रोकने की शपथ लेते हुए इन्होंने पूरे दिन तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया और शाम को हाथ में मशाल और मोमबत्ती लेकर जुलूस निकाल कर इस कुप्रथा के खिलाफ अलख जगाया। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में हिस्सेदारी करते हुए थानों से लेकर कचहरी तक, पंचायतों से लेकर सामुदायिक भवनों तक बच्चों से लेकर वृद्ध महिलाएं और बाल विवाह की पीड़िताओं सहित पूरे देश ने इस अभियान के प्रति व्यापक समर्थन जताया और देश से इस अभियान के खात्मे की प्रतिबद्धता जताई।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि खामोशी से शुरू हुआ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान अब सुनामी में तब्दील हो चुका है। तमाम सरकारी विभाग खुद आगे आकर इस अभियान को दिशा दे रहे हैं और इसे सफल बनाने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी अभियान की अगुआई महिला कार्यकर्ता और 160 सामुदायिक संगठन मिलकर कर रहे हैं। देश के 300 जिलों में चलाये जा रहे इस अभियान का लक्ष्य 2030 तक बाल विवाह का खात्मा करना है।इसी बीच, प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भुवन ऋभु की किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज का 11 अक्टूबर को देश के 200 जिलों में एक साथ लोकार्पण हुआ। यह चर्चित किताब 2030 तक भारत से बाल विवाह के खात्मे के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी कदमों और उपायों की एक स्पष्ट रूपरेखा पेश करती है। इस किताब ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान से जुड़े 160 सामुदायिक संगठनों की इस साझा लड़ाई को एक सशक्त रणनीतिक औजार मुहैया कराया है। भारत को 2030 तक बाल विवाह मुक्त कराने का यह महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के उन अनुमानों के विपरीत है कि अगर देश में बाल विवाह के खिलाफ प्रगति की मौजूदा रफ्तार पिछले दशक जैसी ही रही तो 2050 तक कहीं जाकर बाल विवाह की दर छह फीसद तक आ पायेगी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार 20 से 24 साल के आयुवर्ग की 23.3 फीसद महिलाओं का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया था। इस संदर्भ में देखें तो बाल विवाह के खिलाफ महज साल भर से कुछ ज्यादा के अर्से में 4,91,25,475 लोगों के शपथ लेने की घटना अभूतपूर्व है। यह भले ही दिल्ली के अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाई लेकिन इस उपलब्धि को देश के हर व्यक्ति को बताने की आवश्यकता है ताकि लोग इसके बारे में जान सकें और साथ ही इस अभियान ने जो रफ्तार पकड़ी है, वह मद्धिम नहीं होने पाये। ध्यान रहे... यदि और विस्तृत जानकारी चाहिए तो आवश्यकता पड़ने पर हम कुछ चीजें और उपलब्ध करा सकते हैं। आपके राज्य से बाल विवाह के केस स्टडीज। बाल विवाह संबंधी आपके राज्य के विशिष्ट आंकड़े।  राज्य सरकार की अधिसूचनाएं। अभियान की तस्वीरें। यदि इनके अलावा किसी अन्य जानकारी की आवश्यकता हो तो सूचित करें।

भगवान राम का आदर्श आज भी पूजनीय : गोपालाचार्य
Published / 2023-12-12 20:56:43
भगवान राम का आदर्श आज भी पूजनीय : गोपालाचार्य

नौ दिवसीय श्री राम कथा के समापन पर राज्य अभिषेक, सीता हरण, सबरी वानर सेना पर हुआ व्याख्यान, झांकी बना आकर्षण का केंद्रटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। सामंतो काली मंदिर परिसर में काली मंदिर महिला समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा का समापन मंगलवार को हो गया। कथा का समापन मंत्रोचारण हवन के साथ हुआ। इसके पूर्व राम कथा के अंतर्गत सबरी के पास श्री राम का पहुंचना, सीता हरण, वानर सेना के आलावा श्री राम का राज्य अभिषेक पर व्याख्यान दिया गया। वहीं, भगवान श्रीराम और रावण के युद्ध के मौके पर आयोजित भजन सब निहारे रास्ते आयेंगे श्री राम पर श्रद्धालु झूमते नजर आये। इस दौरान विभिन्न झांकियां भी प्रस्तुत की गयी। इसमें भगवान श्री राम की भूमिका में पूनम वर्णवाल, मां सीता की भूमिका में रेखा जायसवाल, भ्राता लक्ष्मण की भूमिका इंदु जायसवाल, भ्राता भरत की भूमिका में मुन्नी वर्णवाल, भ्राता शत्रुघ्न की भूमिका अनीता वर्णवाल, वीर हनुमान की भूमिका में इंदु यादव, ऋषि की भूमिका में फूलकुमारी भारती व विभा वर्णवाल शामिल हुई। मौके पर कथावाचक जगतगुरु रामानुजाचार्य श्री त्रिदंडी स्वामी गोपालाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री राम का आदर्श आज भी पूजनीय है। उनके आदर्श को अपना कर ही हम राष्ट्र को अग्रणी भूमिका में ला सकते हैं। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्री राम लला मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा होगा और ऐसे समय में यह श्री राम कथा प्रेरणा का स्रोत भी बन रही है। उन्होंने कहा कि मां सीता का पता लगाने का अथक प्रयास वीर हनुमान ने किया था। उन्होंने कहा कि हनुमान जी अपनी शक्तियों को भूल गये थे, तो उन्हें शक्तियों का स्मरण कराया गया कि वे सौ योजन लगाने की क्षमता रखते हैं। जिससे माता सीता का पता लगाने मर वो सहायक सिद्ध हुए। इसके बाद वानर सेना के द्वारा समुन्द्र में सेतु बांध कर लंका पहुंचे और भगवान श्री राम रावण का वध कर माता सीता को लेकर लौटे। उन्होंने कहा कि भगवान राम आज भी पूजनीय है और उनके द्वारा कहे कथन का अनुसरण करना चाहिए। हवन में देवेंद्र कुमार पांडेय, सुमन पांडेय, विनोद वर्णवाल, पूनम वर्णवाल, सुरेश वर्णवाल आशा मोदी, रत्नेश जायसवाल सोनी जायसवाल, देवेंद्र प्रसाद तिवारी सावित्री तिवारी, राकेश जायसवाल रेखा जायसवाल आदि शामिल हुए।

त्रेतायुग से भी भव्य दीपोत्सव होगा 22 जनवरी को : डॉ बीरेंद्र साहू
Published / 2023-12-11 21:31:53
त्रेतायुग से भी भव्य दीपोत्सव होगा 22 जनवरी को : डॉ बीरेंद्र साहू

रांची ग्रामीण के सभी प्रखंडों को समन्वय बैठक में दिया गया अयोध्या जी का पूजित अक्षतटीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 11/12/2023, सोमवार को विश्व हिंदू परिषद रांची ग्रामीण की समन्वय बैठक रातु स्थित आदिवासी बाल विकास विद्यालय में संपन्न हुई। बैठक के प्रथम सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर ने कहा भगवान श्रीराम सनातन हिंदू समाज के आदर्श रहे हैं। उनका जीवन से प्रेरणा लेकर जीने वाले हिंदू समाज आज अयोध्या जी में भगवान पुरुषोत्तम श्री रामजी के बन रहे मंदिर से उत्साहित हैं। समापन सत्र के मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने कहा कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम 14 वर्ष वनवास के बाद अयोध्या के पुण्य भूमि पर आए थे परंतु कलयुग में 496 वर्षों के प्रतीक्षा के बाद भगवान श्रीरामलला को अपना भव्य, दिव्य एवं अलौकिक निवास मिल रहा है। इसलिए त्रेतायुग से बड़ा दीपोत्सव का कार्यक्रम प्राण प्रतिष्ठा के पुण्य दिवस पर संपूर्ण राष्ट्र में होगा। उन्होंने कहा रांची जिला सहित संपूर्ण झारखंड में 1 जनवरी से 15 जनवरी तक घर जा जाकर के अयोध्या जी से पूजित अक्षत एवं श्री रामजन्मभूमि में बना रहे भव्य मंदिर का चित्र व कार्यक्रम आयोजन निर्देश पत्रक देते हुए निमंत्रित करेंगे कि प्राण प्रतिष्ठा आगामी पौष शुक्ल पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080 सोमवार तदनुसार दिनांक 22 जनवरी 2024 के शुभ दिन प्रभु राम के बाल रूप नूतन विग्रह को, श्री राम जन्मभूमि पर बना रहे नवीन मंदिर भूतल के गर्भ गृह में विराजित करके की जायेगी। इस पावन बेला में संपूर्ण हिंदू समाज अपने-अपने क्षेत्र के मंदिरों को साफ-सफाई, रंग-रोगन कर आकर्षक ढंग से सजा करते हुए 11 से 2 के बीच धार्मिक अनुष्ठान करें, अयोध्या जी में हो रहे आरती के समय अपने-अपने मंदिरों में रखे राम दरबार व मंदिर के चित्र के सामने आरती करें, भोग चढ़ायें एवं प्रसाद का वितरण करें। साथ ही संध्या काल में भव्य दीपोत्सव का कार्यक्रम करें। दूसरी निमंत्रण आगामी दिसंबर 2024 तक प्रत्येक हिंदू समाज भगवान रामलला का दर्शन पूजन करने के निमित्त अयोध्या जी अवश्य जायें। रांची ग्रामीण जिला के संघचालक सुका उरांव ने जिला एवं प्रखंड के संयोजक सहसंयोजकों की घोषणा की, जिसमें रोबिन कुमार को ग्रामीण जिला संयोजक एवं महावीर महतो व विनोद विश्वकर्मा को सहसंयोजक बनाया गया। साथ ही बेड़ो प्रखंड के लिए शशि गोप को संयोजक व मुकेश महतो को सहसंयोजक, इटकी प्रखंड के लिए कृष्णा राम तिवारी को संयोजक एवं अरुण कुमार को सहसंयोजक, नगड़ी प्रखंड के लिए रोहित कुमार को संयोजक एवं राहुल केसरी को सहसंयोजक, रातू प्रखंड के लिए लोकनाथ शाहदेव को संयोजक व मंदिप कुमार को सहसंयोजक, मांडर प्रखंड के लिए बजरंग सिंह को संयोजक एवं पवन सोनी को सहसंयोजक, चान्हो प्रखंड के लिए सरजू साहू को संयोजक एवं दिवाकर ठाकुर को सहसंयोजक, खलारी प्रखंड के लिए शशिकांत सिंह को संयोजक एवं अशोक प्रजापति को सहसंयोजक, बुढ़मू प्रखंड के लिए दीपक यादव को संयोजक एवं प्रशांत कुमार को सहसंयोजक, पिठोरिया प्रखंड के लिए रणविजय नाथ शाहदेव को संयोजक व अविनाश सिंह को सहसंयोजक, ओरमांझी  प्रखंड के लिए अजय महतो को संयोजक एवं छोटेलाल कुमार को सहसंयोजक, अनगड़ा प्रखंड के लिए दिनेश मिश्रा को संयोजक एवं सचिन केसरी को सहसंयोजक, सिल्ली प्रखंड के लिए चंदन विश्वकर्मा को संयोजक मनोनीत किए गए। बैठक में आगामी 20 दिसंबर तक सभी प्रखंडों की बड़ी बैठक करते हुए प्रखंड टोली, पंचायत टोली एवं मंदिर केंद्रित टोली गठन करने के लिए कहा गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रांची विभाग संघचालक विवेक भसीन ने कहां 22 जनवरी का उत्सव विश्व स्तरीय व ऐतिहासिक होगा। सभी कार्यकर्ता उत्साह पूर्वक मंदिरों को केंद्र बनाकर के ही कार्यक्रम करें किसी प्रकार से शोभा यात्रा अथवा जुलूस नहीं निकलना है। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक  संघ, विश्व हिंदू परिषद सहित सभी अनुषंगिक विचार परिवार के कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप, झारखंड के रांची ग्रामीण मंत्री रोबिन कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

झारखंड : न्याय देने में नाकाम हो रहीं फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें
Published / 2023-12-09 23:56:24
झारखंड : न्याय देने में नाकाम हो रहीं फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें

यौन शोषण के पीड़ित बच्चों को है न्याय का इंतजारएबीएन सोशल डेस्क। केंद्र सरकार की तमाम नीतियों, प्रयासों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद पॉक्सो के मामलों की सुनवाई के लिए बनायी गयी विशेष त्वरित अदालतों में 31 जनवरी 2023 तक देश में 2,43,237 मामले लंबित थे। अगर लंबित मामलों की इस संख्या में एक भी नया मामला नहीं जोड़ा जाये तो भी इन सारे मामलों के निपटारे में कम से कम नौ साल का समय लगेगा। झारखंड की बात करें तो यहां पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में तकरीबन 10 साल का वक्त लगेगा। साथ ही 2022 में देश में पॉक्सो के सिर्फ तीन फीसदी मामलों में सजा सुनायी गयी। ये चौंकाने वाले तथ्य इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से जारी शोधपत्र जस्टिस अवेट्स : ऐन एनालिसिस ऑफ द एफिकेसी ऑफ जस्टिस डेलिवरी मैकेनिज्म्स इन केसेज ऑफ चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज से उजागर हुए हैं। यौन शोषण के शिकार बच्चों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2019 में एक ऐतिहासिक कदम के जरिए फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन और हर साल इसके लिए करोड़ों की राशि देने के बावजूद इस शोधपत्र के निष्कर्षों से देश के न्यायिक तंत्र की क्षमता और दक्षता पर सवालिया निशान उठ खड़े होते हैं।शोधपत्र के अनुसार झारखंड की पॉक्सो अदालतों में जनवरी 2023 तक 4,408 मामले लंबित हैं। इस हिसाब से सभी पीड़ित बच्चों को 2033 तक ही न्याय मिल पायेगा। शोधपत्र आगे कहता है कि मौजूदा हालात में जनवरी, 2023 तक के पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में अरुणाचल प्रदेश को 30 साल लग जायेंगे, जबकि दिल्ली को 27, बिहार को 26, पश्चिम बंगाल को 25, मेघालय को 21 और उत्तर प्रदेश को 22 साल लगेंगे।फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों जैसी विशेषीकृत अदालतों की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य यौन उत्पीड़न के मामलों और खास तौर से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से मुड़े मामलों का त्वरित गति से निपटारा करना था। इनका गठन 2019 में किया गया और भारत सरकार ने हाल ही में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में इसे 2026 तक जारी रखने के लिए 1900 करोड़ रुपए की बजटीय राशि के आबंटन को मंजूरी दी है।इन फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन के बाद माना गया कि वे इस तरह के मामलों का साल भर के भीतर निपटारा कर लेंगी लेकिन इन अदालतों में आए कुल 2,68,038 मुकदमों में से महज 8,909 मुकदमों में ही अपराधियों को सजा सुनायी जा सकी है। अध्ययन से यह उजागर हुआ है कि प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालत ने साल भर में औसतन सिर्फ 28 मामलों का निपटारा किया। इसका अर्थ यह है कि एक मुकदमे के निपटारे पर नौ लाख रुपये का खर्च आया।शोधपत्र के अनुसार, प्रत्येक विशेष अदालत से हर तिमाही 41-42 और साल में कम से कम 165 मामलों के निपटारे की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन आंकड़ों से लगता है कि गठन के तीन साल बाद भी ये विशेष अदालतें अपने तय लक्ष्य को हासिल करने में विफल रही हैं।सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए शोधपत्र आगे कहता है कि बाल विवाह बच्चों के साथ बलात्कार है। उधर, वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजाना 4,442 नाबालिग लड़कियों को शादी का जोड़ा पहना दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि देश में हर मिनट तीन बच्चियों को बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता है जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि देश में बाल विवाह के रोजाना सिर्फ तीन मामले दर्ज होते हैं।  इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह को रोकने के लिए देश में मजबूत नीतियों, कड़े कानूनों और पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद सजा की मामूली दरों को गंभीर चिंता का विषय करार दिया। भुवन ऋभु ने कहा कि कानून की भावना को हर बच्चे के लिए न्याय में रूपांतरित होने की जरूरत है। अगर बच्चों के यौन शोषण के आरोपियों में महज तीन प्रतिशत को ही सजा मिल पाती है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि कानूनी निरोधक उपाय नाकाम हैं। अगर पीड़ित बच्चों को बचाना है तो सबसे जरूरी चीज यह है कि बच्चों और उनके परिवारों की सुरक्षा की जाये, उनके पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के इंतजाम किये जायें और पूरा न्यायिक तंत्र निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जैसी ऊपरी अदालतों तक मुकदमे का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करे।यौन शोषण के पीड़ित बच्चों को एक समयबद्ध और बच्चों के प्रति मैत्रीपूर्ण तरीके से न्याय दिलाना सुनिश्चित करने और लंबित मामलों के निपटारे के लिए इस शोधपत्र में कई अहम सिफारिशें की गयी हैं। सर्वप्रथम, सभी फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें संचालन में हों और वे कितने मामलों का निपटारा कर रहे हैं, इसकी निगरानी के लिए एक फ्रेमवर्क हो। इसके अलावा इन अदालतों से संबद्ध पुलिस से लेकर जजों और और पूरा अदालती स्टाफ को पूरी तरह सिर्फ इन्हीं अदालतों के काम के लिए रखा जाये ताकि ये प्राथमिकता के आधार पर मामलों को अपने हाथ में ले सकें। साथ ही लंबित मामलों के निपटारे के लिए इन अदालतों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही पारदर्शिता के लिए इन सभी सभी फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के कामकाज को सार्वजनिक दायरे में लाया जाये।यह रिपोर्ट विधि एवं कानून मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मिले आंकड़ों पर आधारित है। इससे संबंधित किसी भी अन्य जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।

मैरिज रजिस्ट्रेशन के प्रति रुचि नहीं दिखाते हैं लोग
Published / 2023-12-09 21:11:04
मैरिज रजिस्ट्रेशन के प्रति रुचि नहीं दिखाते हैं लोग

तीन साल में मात्र 120 शादियों का हुआ है निबंधनझारखंड मैरिज एक्ट में जरुरी है विवाहों का रजिस्ट्रेशनटीम एबीएन, कोडरमा। झारखंड मैरिज नियमावली 2013 के तहत विवाहों का निबंधन कराना अनिवार्य है। किंतु मैरिज रजिस्ट्रेशन के प्रति कोडरमा के लोग दिलचश्पी नहीं दिखाते हैं। विवाहों का निबंधन नहीं कराने से लोगों को समय पर कई कठिनाइयों का समाना करना पड़ता है। झुमरी तिलैया नगर परिषद में पिछले तीन साल में मात्र 120 लोगों ने मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया हैक्या कहते हैं अधिकारीइस बारे में नप के ईओ हर्षवर्धन से मिली जानकारी के अनुसार शादी विवाह के बाद निबंधन कराना अनिवार्य है। पिछले 3 वर्षों में नगर पर्षद में 120 विवाहों का निबंधन ही हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार 2020 में 35, 2021 में 48, 2022 में 21 तथा 2023 में 17 निबंधन हुए हैं।जाने विवाह का विवरणजानकारी के अनुसार मैरिज रजिस्ट्रेशन में हिंदू विवाह, विशेष विवाह और आनंद विवाह का प्रावधान किया गया है। हिंदू विवाह का निबंधन सेम डे या तीन महीने के अंदर कराया जा सकता है। विशेष विवाह के तहत कोई भी जाति मैरिज का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। जबकि आनंंद विवाह केवल सिख समुदाय के लिए है।  पूर्व रजिस्ट्रार से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 90 हिंदू विवाहों और 7 स्पेशल मैरिज का रजिस्ट्रेशन निबंधन कार्यालय में कराया गया। जबकि वर्ष 2018 में जुलाई तक 53 हिन्दू विवाहों और 4 विशेष विवाहों का निबंधन हुआ।क्या है रजिस्ट्रेशन का प्रावधाननिबंधन के लिए लोग स्वयं निबंधन कार्यालय, नगर परिषद, नगर पंंचायत या प्रखंड कार्यालय जाकर फॉर्म भरकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फॉर्म कोर्ट परिसर में उपलब्ध होता है। ई-निबंधन वेबसाइट से भी रजिस्ट्रेशन फॉर्म डानलोड किया जा सकता है।  जानें क्या है रजिस्ट्रेशन का फीविवाहों का निबंधन आसान राशि पर करायी जा सकती है। विवाह के दो महीने के अंदर निबंधन कराने पर 575 रुपये और दो महीने से तीन महीने के अंदर निबंधन कराने पर 825 रुपये देय होता है। यह शुल्क हिंदू विवाहों के निबंधन के लिए है। जबकि विशेष विवाह हेतु नोटिस के लिए ढाई रुपये और मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए पांच रुपये देय है। निबंधन के लिए क्या है जरूरतरजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड, एज प्रूफ सर्टिफिकेट, तीन गवाह, सभी का आधार, शादी का कार्ड और पार्षद से अटेस्टेड फोटो की जरूरत होती है। इसके बिना निबंधन में कठिनाई हो सकती है।जानें क्या है रजिस्ट्रेशन का लाभइसके बनने से बीजा और पास्पोर्ट बनाने में आसानी होती है। बैंको में ज्वाइंट अकाउंट खोलाने में सुविधा होती है। फैमिली आवास खोजने के लिए यह मदगार साबित होता है। सरकारी योजनाओं का भी लाभ लिया जा सकता है। वैसे तो यह सबके लिए लाभकारी है किंतु सरकारी कर्मियों के लिए विशेष लाभप्रद है।

शादी के बाद जरूर करें ये काम, वरना आप नहीं माने जायेंगे शादीशुदा
Published / 2023-12-09 21:07:44
शादी के बाद जरूर करें ये काम, वरना आप नहीं माने जायेंगे शादीशुदा

टीम एबीएन, कोडरमा। शादीशुदा लोग ध्यान दें, क्या आप कानूनन पति-पत्नी हैं या नहीं? दरअसल, कानूनन रूप से शादी के प्रमाण के रूप में शादी पंजीकरण होना जरूरी होता है। जागरूकता के अभाव में लोग इसकी अनदेखी कर रहे हैं। अगर आपने अब तक अपनी शादी का पंजीकरण नहीं कराया है तो निबंधन दफ्तर में पंजीकरण करा लें। झुमरी तिलैया नगर पर्षद के प्रशासक हर्षबर्धन ने बताया कि शादी के 1 दिन से 1 साल तक के अंदर विवाह पंजीकरण कराने पर 50 रुपये शुल्क पड़ता है। एक साल बाद पंजीकरण कराने पर प्रति साल प्रतिदिन के अनुसार 5 रुपये विलंब शुल्क देना होता है और यह अधिकतम 150 रुपये तक ही होता है। उन्होंने बताया कि लोगों में जागरूकता की कमी है और इसके लिए नगर पर्षद भी जागरूकता अभियान चलायेगा। कैसे करें आवेदन विवाह पंजीकरण के लिए आनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद निबंधन दफ्तर के प्रशासक के पास पति-पत्नी और तीन ग्राहक शादी की फोटो के साथ उपस्थित होना अनिवार्य है। आवेदन के साथ विवाह का कार्ड, यह न होने पर हलफनामा, निवास का प्रमाण जैसे आधार कार्ड, पहचान पत्र या बैंक पास बुक की छाया प्रति लगानी होती है।इसलिए जरूरी है विवाह पंजीकरणविवाह पंजीकृत होने पर विरासत में मिली संपत्ति का वितरण आसान हो जाता है।  कई मुकदमे ऐसे हुए, जिनमें पति की मौत की बाद दूसरी महिला पत्नी के रूप में खड़ी होकर संपत्ति पर दावा करने लगी। विवाह पंजीकरण बैंक या बीमा का दावा करने में सहायक होता है।  पति या पत्नी को विदेश ले जाने पर यही प्रमाणपत्र मान्य होता है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का 30 हजार रुपये का लाभ भी मिलता है। 3 साल में 120 निबंधन हुए नगर पर्षद मेंशादी विवाह के बाद निबंधन कराना अनिवार्य है। लेकिन न तो नगर पर्षद न ही प्रखंड मुख्यालयों में लोग रूचि के साथ निबंधन कराते हैं। ऐसे में अभी भी 3 वर्ष में नगर पर्षद में 120 निबंधन ही हुए हैं। मिली जानकारी के अनुसार 2020 में 35, 2021 में 48, 2022 में 21 तथा 2023 में 17 निबंधन हुए हैं।

अमेरिकी डॉलर को मात दे रहा देश का लहसुन
Published / 2023-12-08 21:02:52
अमेरिकी डॉलर को मात दे रहा देश का लहसुन

डॉलर के बराबर तनकर खड़ा है शिमला मिर्चटीम एमीएन, कोडरमा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारत का रुपया भले ही कमजोर हो, लेकिन भारत का लहसुन अमेरिकी डॉलर को इन दिनों मात दे रहा है। इतना ही नहीं शिमला मिर्च भी डॉलर से दो-दो हाथ करने को तनकर खड़ा है। कभी दाल तो कभी तेल तो कभी प्याज और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतें लोगों को परेशान करती रहीं हैं। लेकिन इस बार लहसुन ने सारे रिकार्ड तोड़ डाले हैं। झुमरी तिलैया के बाजार में लहसुन इन दिनों 280 रुपये से 300 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। कई लोगों ने तो लहसुन का उपयोग करना ही बंद कर दिया है। जबकि शिमला मिर्च भी कम नहीं है। शहर के बाजार में शिमला मिर्च इन दिनों 80 रुपये किलो बिक रहा है जो अमेरिकी डॉलर 83 रुपये 33 पैसे के बिलकुल करीब है।जानें दुकानदार की बातखुदरा गल्ला व्यापारी संदीप कुमार ने कहा कि लहसुन के महंगा होने से उसे बेचना मुश्किल हो रहा है। वैसे ग्रहकों के मेल के लिए दुकान में रखा गया है। इसे कोई पूछनेवाला नहीं है। लोग आते भी हैं तो लहसुन का दाम पूछकर चले जाते हैं। अपेक्षाकृत इसकी बिक्री काफी कम है।जानें ग्राहक की बातमहंगाई को लेकर ग्राहक विशाल कुमार ने कहा कि कमर तोड़ महंगाई ने लोगों को परेशान कर रखा है। आश्चर्य की बात है कि कोडरमा में चिकन 120 रुपये किलो और लहसुन तीन सौ रुपये किलो बिक रहा है। लोग तो बिना लहसुन के भी चिकन खाने लगे हैं। सरकार को महंगाई पर कंट्रोल करना चाहिए।

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