नये साल के लिए कश्मीर घाटी में पर्यटकों की भारी भीड़एबीएन सोशल डेस्क। क्रिसमस और नववर्ष का जश्न मनाने के लिए पर्यटकों का जम्मू-कश्मीर पहुंचना जारी है और घाटी के प्रसिद्ध स्थलों के होटलों के कमरे आगामी हफ्तों के लिए बुक हो चुके हैं। पर्यटकों को खासकर बर्फबारी की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि पर्यटक कश्मीर घाटी, खासकर उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में गुलमर्ग के प्रसिद्ध स्कीइंग रिसॉर्ट और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में पहलगाम का रुख कर रहे हैं।पर्यटन सचिव सैयद आबिद रशीद शाह ने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि सर्दियों के महीने पर्यटन के मामले में कश्मीर के लिए अच्छे साबित होंगे। उन्होंने कहा, जिस तरह से घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है और रुझान आ रहे हैं, मुझे उम्मीद है कि सर्दियां बेहद सफल होंगी। गुलमर्ग और पहलगाम जैसे गंतव्यों के होटलों के कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं। क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या के लिए गुलमर्ग पूरी तरह बुक हो गया है। यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से 50 किमी उत्तर में 8,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित पर्यटन स्थल गुलमर्ग को एशिया का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। शाह ने कहा कि कश्मीर के लोगों और सभी हितधारकों के गर्मजोशी भरे आतिथ्य ने पर्यटन को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। पर्यटन विभाग ने नये साल का जश्न मनाने वालों के अनुभव को यादगार बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों की योजना बनायी है, जिसमें एक संगीतमय शाम, आतिशबाजी शो, नाइट स्कीइंग और टार्च स्कीइंग शामिल हैं। घाटी में विभिन्न स्थानों पर होटल श्रृंखला अहद होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के प्रबंध निदेशक आसिफ बुर्जा ने कहा कि हालिया बर्फबारी ने कश्मीर में पर्यटकों की आमद बढ़ा दी है। बुर्जा ने बताया कि पर्यटकों का आगमन और बुकिंग बहुत अच्छी है। उन्होंने कहा कि गुलमर्ग में होटल पूरी तरह से बुक हो चुके हैं, जबकि पहलगाम और श्रीनगर में भी होटलों में पर्यटकों की आमद काफी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन कारोबार से जुड़े हितधारकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बर्फबारी के साथ पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होगा। उन्होंने कहा, दिसंबर के आखिरी दस दिनों और जनवरी के पहले सप्ताह के लिए होटल पूरी तरह बुक हो चुके हैं। ट्रेवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (टीएएके) के अध्यक्ष रऊफ ट्रैंबू ने कहा कि दिसंबर के अंत और जनवरी के लिए बुकिंग बहुत अच्छी थी। उन्होंने कहा कि क्रिसमस और नये साल के आंकड़े बहुत अच्छे हैं। पिछले साल की तुलना में बुकिंग बेहतर है। बड़ी संख्या में पर्यटक घाटी पहुंच रहे हैं। टीएएके अध्यक्ष ने कहा कि कश्मीर हर मौसम के लिए उपयुक्त गंतव्य बन गया है और पूरे वर्ष पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड नेवल वेटरन वेलफेयर सोसाईटी बैठक के सक्रिय सदस्य पुंदाग निवासी चंद्रेश्वर साहू 72 वर्ष के ब्रह्मभोज पर आज सोसाईटी के सदस्यों ने उनके आवास पर जाकर शोक व्यक्त किया गया एवं उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। इस अवसर पर सोसाईटी की ओर से स्व साहु की पत्नी को 16 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग किया गया। इस अवसर पर सोसाईटी के अध्यक्ष शक्तिधर महतो, कोषाध्यक्ष यशवंत कुमार गुप्ता, सचिव एस एन अहीर, जेएन महतो, आर केवट, निरंजन नाग समेत कई सदस्य उपस्थित थे।
फा सुशील टोप्पो एबीएन सोशल डेस्क। प्रति वर्ष हम ख्रीस्तीयों के लिए ख्रीस्त जयंती आनंद और शांति का संदेश लाता है। यह पर्व अपने आप में एक अद्भुत खुशी और उल्लास हमारे दिलों में भरता है। यह जयंती उस महान घटना की याद दिलाती है जब पिता ईश्वर ने मानव के मुक्ति इतिहास में लोगो के मुक्ति और उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र येसु मसीह को मुक्तिदाता के रूप में इस दुनिया में भेजा। वे कुंवारी मरियम और जोसफ के साधारण परिवार में जन्म लिये। बाद में वे अपने जीवन और शिक्षा से लोगों को प्रेम का पाठ सिखाया। वे अपने पिता ईश्वर के आज्ञा के अनुसार जीते हुए दुनिया के लिए आदर्श बने। उन्होंने अपने जीवन से सच्चे प्यार का मतलब समझाया कि अपने दुश्मनों के लिए एक अच्छी सोच रखना और उनकी गलतियों को क्षमा करना। हर एक क्रिसमस चरणी और तस्वीर इसी महान घटना को बतलाती है। यह चरणी येसु के जन्म का वर्णन करती है। यदि हम गौर से चरणी को निहारते हैं तो हम बाईबल के जीवित वचन को हमारे आंखों के सामने पाते है। ईश्वर ने हमसे से इतना प्यार किया कि वह हमारे बीच से एक बन गया है, ताकि हम उसके साथ एक हो सकें। चरणी में छिपा है क्रिसमस का अद्भुत संदेश। हर एक दुखित परिवार को हौसला देता है यह ख्रिस्तमस। चरणी में वर्णित कुंवारी मरियम, जोसफ और अन्य लोगों के जीवन हमें आदर्श मां, कर्त्तव्यनिष्ट पिता, आज्ञाकारी पुत्र पुत्रियां बनने के लिए प्रेरित करता है। हम तभी एक आदर्श परिवार की स्थापना कर पाएंगे जब हम स्वयं आदर्श बनेनेगे। हम तभी आदर्श बनेनेगे जब हम भी कुवारी मरियम और जोसफ के सामान ईश्वर के वचन को सुनेनेगे और प्रभु की इच्छा के अनुसार जीवन जियेंगे। (लेखक पोंतिफिकल यूनिवर्सिटी सत थॉमस अक्विनस (अन्जेलिकुम), रोम इटली के हैं।)
टीम एबीएन, रांची। गोस्सनर महाविद्यालय के आइक्यूएसी और दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गीता जयंती पर संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी का विषय था : भारतीय शिक्षा एवं संस्कृति के निर्माण में गीता की भूमिका। कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत व विषय- प्रवेश दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप गुप्ता ने किया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि/ मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे इस्कॉन रांची के जनरल मैनेजर मधुसूदन मुकुंद दास प्रभुजी (बीटेक, कंप्यूटर विज्ञान, एमबीए, आईआईटी कानपुर)। अपने उद्बोधन में मधुसूदन दास प्रभु ने कहा कि भगवतगीता विश्वभर में भारत के आध्यात्मिक ज्ञान के मणि के रूप में ख्यात है। इसका संदेश भगवान कृष्ण और अर्जुन तक ही सीमित न होकर संपूर्ण मानवता के लिए है। आगे उन्होंने कहा कि भारत में प्रति तीन सेकेंड में एक लोग आत्महत्या की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं, वहीं प्रत्येक वर्ष आठ लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसका मूलकारण चिंता, तनाव और डिप्रेशन है। भौतिकतावादी की अंधी दौड़ में पूरा विश्व शामिल है। हम सभी शरीर की तल में जीते हैं और वहीं मर जाते हैं। अपने मूल आत्मस्वरूप का विस्मरण सभी दु:ख का कारण है। गीता अवसाद से आनंद की यात्रा है।कार्यक्रम में हिंदी विभाग के सहायक प्रो डॉ हाराधन कोईरी ने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा की पराकाष्ठा है गीता। इसमें किसी मत का आग्रह न होकर संपूर्ण जीव के कल्याण का आग्रह है। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ प्रशांत गौरव ने की वहीं आभार ज्ञापन दर्शन शास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ विनोद राम ने किया।मौके पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें गीता प्रश्नोत्तरी, निबंध, भाषण आदि शामिल है। विजेता विद्यार्थियों को यथार्थ गीता की प्रति देकर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में कला संकायाध्यक्ष डॉ जयपाल कच्छप, डॉ ज्योति टोप्पो, डॉ एस के सेन गुप्ता, डॉ सुब्रतो सिन्हा, डॉ ध्रुपद चौधरी, डॉ अनीता रंजन, डॉ मीना सुरीन, डॉ नीलम तिरु, डॉ अब्दुल बासित, डॉ सुप्रीति जाना सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थी मौजूद थे।
देशभर के आदिवासियों को एकसाथ लाना चाहते थे रामदयाल मुंडा : गुंजल इकर मुंडाआदिवासी कथा में हिंसा का कोई स्थान नहीं : अश्विनी कुमार पंकजटीम एबीएन, रांची। राजकमल प्रकाशन समूह और डॉ रामदयाल मुंडा, जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किताब उत्सव के चौथे दिन की रिपोर्ट पेश की गयी। पहला सेशन हमारा झारखंड हमारा गौरव का रहा। यह सत्र झारखंड के गौरव विचारक-कथाकार डॉ रामदयाल मुंडा पर केंद्रित रहा। इस सत्र में आदिवासी विमर्श की चिंतक गुंजल इकर मुंडा, मोनिका रानी टूटी, डॉ संजय बसु मल्लिक ने उनके जीवन और व्यक्तित्व पर वक्तव्य दिया। इस सत्र में डॉ राम दयाल मुंडा जनजातीय शोध कल्याण संस्थान के निदेशक रणेंद्र ने सबका स्वागत करते हुए कहा कि रामदयाल मुंडा रांची में सरहुल जुलूस निकालना शुरू कर आदिवासी संस्कृति में एक नवजागरण लेकर आए। उन्होंने इसे एक आंदोलन के रूप दिया और जो लोग अपने आदिवासी जड़ों से कट गये थे उन्हें वापस आदिवासी संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने अपनी अमेरिकी नौकरी का त्याग कर यहां के जनजातीय भाषा का संरक्षण करने कार्य किया। वे झारखण्ड आंदोलन के नेतृत्वकर्ता, बेहतरीन साहित्यकार, और आदिवासी संस्कृति को पुनर्जागरण करने वाले महान व्यक्ति थे। वे वाकई में झारखण्ड के पुरोधा हैं। सत्र की पहली वक्ता मोनिका रानी टूटी ने कहा कि रामदयाल मुंडा एक बहुआयामी व्यक्तित्व वाले एक असाधारण व्यक्ति थे। उन्होंने अपना सारा जीवन यहां की भाषा साहित्य, संगीत और पूरे झारखंड को समृद्ध करने के लिए समर्पित कर दिया।डॉ संजय बसु मल्लिक ने रामदयाल मुंडा के साथ अपने जीवन संस्मरण याद करते हुए कहा कि महान विभूतियों के इर्द-गिर्द रहना एक सौभाग्य की बात होती है। उन्होंने झारखंड आंदोलन के संघर्ष के वक्त की उस घटना भी बतायी जब रामदयाल मुंडा और संजय बसु को सरकार द्वारा देखते ही गोली मार देने का आदेश जारी कर दिया था। उन्होंने कहा कि झारखण्ड आंदोलन की बौद्धिक ताकत रामदयाल मुंडा थे। अंतिम वक्ता और रामदयाल मुंडा जी के पुत्र डॉ गुंजल इकिर मुंडा ने कहा कि वे अपने समय से पहले के व्यक्ति थे। रामदयाल मुंडा जी का सपना था देशभर के आदिवासियों के एक साथ लाना। उनके अधूरे ख्वाब को पूरा करने की आवश्यकता है।रामदयाल मुंडा की लेखनी हमेशा द्विभाषी रही है। वे अलग अलग जनजाति समूह को जोड़ने के लिए हिंदी भाषा का उपयोग किया करते थे। अगला सत्र आदिवासी कथावाचन परंपरा विषय पर केंद्रित रहा। इस सत्र में प्रमुख आदिवासी लेखक-चिंतक अश्विनी कुमार पंकज ने विषय पर सारगर्भित वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि कहानी कहना आदिवासी समाज की परंपरा रही है। आदिवासी कहानियों में हिंसा को कभी प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। आदिवासी कथा और गीत में हिंसा का कोई स्थान नहीं। किताब उत्सव के चौथे दिन का तीसरा सत्र आदिवासी लोकगीतों की परंपरा और आधुनिक काव्य संवेदना विषय पर केंद्रित रहा। इस सत्र में डॉ पार्वती तिर्की, डॉ प्रवीणा खेस्स, डॉ पारूल ख्रस्तीना खलखो ने विषय पर सारगर्भित वक्तव्य दिया। पार्वती तिर्की ने कहा कि आदिवासी गीत परम्परा की खास विशेषता है कि कोई भी एक व्यक्ति किसी पुरखा गीत पर एकाधिकार का दावा नहीं करता है, गीत सामूहिक है, वह मदैत परम्परा की उपज है। गीत गाने वाली आदिवासी व्यवस्था इसलिए गणतांत्रिक है क्योंकि वह सामूहिक है। वर्तमान समय में गीत पर खतरा है, आदिवासी सामूहिकता मूल्य पर खतरा है।
एबीएन सोशल डेस्क। आज दिनांक 19 दिसंबर 2023 को विश्व हिंदू परिषद अगाशे नगर में श्री अयोध्याधाम राम जन्मभूमि पूजित अक्षर को लेकर भ्रमण किया किया गया। महर्षि नगर मंदिर से बसंत विहार मंदिर में अक्षत लाया गया। मौके पर क्षेत्र के सभी श्रद्धालु इस शोभायात्रा अपने शीश में अक्षत कलश को लेकर मंदिर पहुंचे। मंदिर में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। मौके पर विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के अलावा क्षेत्र के सभी लोग शामिल हुए। मंदिर कमेटी से बीएन सिंह, एनके पाठक, प्रभात रंजन सिंह, सत्य नारायण सिंह, एसपी सिंह, बीरेंद्र शर्मा, मंदिर के पुजारी अर्जुन पंडित, आरएसएस से भोला विश्वास, उदय सिंह, रावत जी, डीएन सिंह, एसके दुबे, दीपक वर्मा, पवन, दिनानाथ गुप्ता, विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन एवं नगर के लोग उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा, कृष्णा नगर कॉलोनी में आज 16 दिसंबर, शनिवार को सिख पंथ के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शहीदी गुरुपर्व मनाया गया। इस उपलक्ष्य में कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा साहब में रात 8 बजे से विशेष दीवान सजाया गया। दीवान की शुरूआत स्त्री सत्संग सभा की शीतल मुंजाल द्वारा श्री हरकिशन धियाइए जिस डिठे सब दुख जाए... शबद गायन से हुई। हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह जी एवं साथियों ने गुरु तेग बहादुर सिमरियै घर नव निधि आवे धाई सब थाई होए सहाई... शबद गायन कर संगत को निहाल किया।शहीदी गुरुपर्व में विशेष रूप से शिरकत करने पहुंचे सिख पंथ के महान कीर्तनी जत्था भाई जसप्रीत सिंह जी (सोनू वीर जी) ने तिलक जंझू राखा प्रभु ताका कीनो बडो कलू महि साका, साधन हेत इति जिन करी सीस दिया पर सी न उचरी... एवं धरम हेत साका जिन किआ सीस दिया पर सिर ना दिया... तथा मैं गरीब मैं मसकीन तेरा नाम है आधारा... जैसे कई शबद गायन कर साथ संगत को गुरुवाणी से जोड़ा।कीर्तन के साथ कथावाचन करते हुए श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बारे में साध संगत को बताया कि मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में उन्होंने वीरता का परिचय दिया। उनकी वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने उनका नाम त्यागमल से तेग बहादुर (तलवार के धनी) रख दिया। मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को हिंदुओं की मदद करने और इस्लाम नहीं अपनाने के कारण उन्हें मौत की सजा सुना दी। इस्लाम अपनाने से इनकार करने की वजह से औरंगजेब के शासनकाल में उनका सर कलम कर दिया गया। गुरु जी के त्याग और बलिदान के कारण उन्हें हिन्द दी चादर कहा जाता है। जहां गुरु तेग बहादुर जी ने शहादत दी, चांदनी चौक दिल्ली के उसी स्थल पर उनकी याद में शीश गंज साहिब गुरुद्वारा बनाया गया है, जो उनके धर्म की रक्षा के लिए किए गए कार्यों को हमें याद दिलाता रहता है। सत्संग सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बारे जिक्र करते हुए बताया कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी ने शहादत दी और ऐसी दूसरी मिसाल दुनिया में नहीं है। श्री अनंद साहिब जी के पाठ, अरदास, हुक्मनामा और कढ़ाह प्रसाद वितरण के साथ विशेष दीवान की समाप्ति रात 11.30 बजे हुई। मंच संचालन मनीष मिढ़ा ने किया। मौके पर सत्संग सभा द्वारा साध संगत के लिए गुरु का अटूट लंगर चलाया गया।आज के दीवान में सभा के प्रधान द्वारका दास मुंजाल, सचिव अर्जुन देव मिढ़ा, सुंदर दास मिढ़ा, हरविंदर सिंह बेदी, अशोक गेरा, चरणजीत मुंजाल, जीवन मिढ़ा, मोहन काठपाल, हरगोविंद सिंह, सुरेश मिढ़ा, वेद प्रकाश मिढ़ा, अमरजीत गिरधर, नरेश पपनेजा, लक्ष्मण दास मिढ़ा, लक्ष्मण सरदाना, हरीश मिढ़ा, लेखराज अरोड़ा, राजकुमार सुखीजा, इंदर मिढा, रमेश पपनेजा, प्रेम मिढ़ा, कवलजीत मिढ़ा, महेश सुखीजा, सुभाष मिढ़ा, हरजीत बेदी, जीतू काठपाल, पाली मुंजाल, राजेंद्र मक्कड़,अनूप गिरधर, बिनोद सुखीजा, लक्ष्मण दास सरदाना, अमरजीत मुंजाल, पवनजीत सिंह, महेन्द अरोड़ा, मोहन लाल अरोड़ा, जीतू अरोड़ा, नीरज गखड़, अश्विनी सुखीजा, सागर थरेजा, राकेश गिरधर, नीरज सरदाना, ईशान काठपाल, कमल अरोड़ा, रमेश तेहरी, हरविंदर सिंह, उमेश मुंजाल, कमल मुंजाल, गुलशन मिढ़ा, रमेश गिरधर, पंकज मिढ़ा, सूरज झंडई, गौरव मिढ़ा, रौनक ग्रोवर, अमन डावरा, पियूष मिढ़ा, आशु मिढ़ा, नवीन मिढ़ा, रिक्की मिढ़ा, बबली दुआ, गीता कटारिया, मंजीत कौर, खुशबू मिढ़ा, दुर्गी देवी मिढ़ा, बिमला मिढ़ा, तीर्थी काठपालिया, नीता मिढ़ा, इंदु पपनेजा, रेशमा गिरधर, ममता सरदाना, मीना गिरधर, श्वेता मुंजाल, उषा झंडई, नीतू किंगर, ममता थरेजा, कंचन सुखीजा, सुषमा गिरधर समेत अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा (8709349310) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
आगमन काल का सन्देशफा सुशील टोप्पोएबीएन एडिटोरियल डेस्क। हमेशा से आगमन काल ईसाईयों के लिए एक विशेष अवधि होती है, जहां वे बड़े हर्षोल्लास के साथ येसु के जन्म दिवस की तैयारी करते हैं। आगमन का अर्थ होता है किसी के आने की प्रतीक्षा। ख्रीस्तीय लोग अपने मुक्तिदाता और शांति के राजकुमार के दूसरे आगमन की तैयारी करते हुए प्रति वर्ष बड़े धूमधाम से 25 दिसम्बर को येसु ख्रीस्त का जन्म दिन मनाते हैं, जिसे ख्रीस्त जयंती या बड़ा पर्व से भी जाना जाता है।ईसाईयों के पूजन विधि कलेंडर के अनुसार, आगमन काल के प्रथम रविवार से ख्रीस्तीय नए पूजन वर्ष में प्रवेश करते है। अर्थात आगमन काल का पहला रविवार पूजन-वर्ष का पहला दिन होता है और जिसका समापन ख्रीस्त राजा के पर्व के साथ होता है। आगमन काल चार सप्ताह का पुण्य अवधि होता है। इस समय में, ख्रीस्त विश्वासी गण ईश्वर की मुक्तियोजना और ईसा के जन्म की इस महान घटना को याद करते हुए अपने आप को येसु के स्वागत की आध्यात्मिक तैयारी करते हैं। हर ख्रीस्त भक्त अपने जीवन का मूल्यांकन करता है। प्रभु और अपने पड़ोसियों के साथ अपने सम्बन्ध को सुधारने का प्रयत्न करता है। इसके लिए वह प्रार्थना, मिस्सा बलिदान, पाप स्वीकार संस्कार, पुण्य कार्यों और अन्य धार्मिक कार्यों के माधयम से अपने जीवन को निखारने का प्रयास करता है। अतः हर विश्वासी के लिए यह आगमन काल प्रभु के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा है। आगमन काल ख्रीस्तीय भाई-बहनों के लिए दो महत्वपूर्ण सन्देश देता है : पहला है आशा का सन्देश। यह अवधि याद दिलाता है कि ईश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता है, जब भी हम कठिनाईयों, दुःख, तकलीफ में हों, हताश, निराश हों या अपने जीवन से थके हों। यह अडवेंट अपने विश्वासियों को प्रभु से जुड़े रहकर आशावान बनने के लिए प्रेरित करता है। दूसरा सन्देश है हर विश्वासी को अपने जीवन में जागरूक तथा चौकस रहे, क्योंकि आगमन काल प्रतीक्षा का समय है, येसु के आगमन का समय है। चौकन्ना रहने मतलब है प्रभु की शिक्षा के अनुसार जीवन जीने के लिए हमेशा तत्पर रहना। और वही प्रभु से मिल पाएगा जो अपने जीवन में आशावान, मुस्तैदी से प्रभु की इच्छा के अनुसार जीते हुए, प्रार्थना, उपवास, दान, पुण्य का काम करता है। आगमन काल अपने विश्वासियों को ईश्वर और अपने पड़ोसी के प्रति विश्वास, आशा, प्रेम और शांति का सन्देश देता है। अतः वही ख्रीस्त जयंती और येसु के शांति को अपने दिल, जीवन और परिवार में अनुभव कर पाएगा जो ईश्वर की उपस्थिति में जीते हुए उनकी आज्ञा के अनुसार जीने के लिए हमेशा तत्पर है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजधानी दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में मारे गए छापों में ढाबों व आटो के कल पुर्जे बेचने वाली दुकानों से 16 बच्चों को मुक्त कराया गया। स्थानीय एसडीएम आशीष कुमार की अगुआई में छापों की यह कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन जिसे बचपन बचाओ आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है और बाल विकास धारा के सहयोग से हुई। कार्रवाई में श्रम विभाग के अधिकारी तथा राजौरी गार्डन और हरि नगर थानों के प्रभारी भी शामिल थे।इस कार्रवाई में मुक्त कराये गये एक बाल मजदूर की उम्र महज दस साल है। राजौरी गार्डन इलाके की एक दुकान से जब उसे मुक्त कराया गया तो वह डर से कांप रहा था और उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी। छापे में शामिल अफसरों और बीबीए की टीम के सदस्यों ने जब बच्चे को अच्छे खाने का लालच दिया तब कहीं जाकर उसका डर कुछ कम हुआ। खाने के बाद उसने बातचीत शुरू की और बताया कि वह आटो के कल पुर्जे बेचने वाली एक दुकान में पिछले साल भर से काम कर रहा था। बच्चे ने अपने पिता का नाम तो बताया पर उनका फोन नंबर या अपने गांव का नाम नहीं बता पाया।मुक्त कराये गये इन सभी बच्चों की उम्र 10 से 17 साल के बीच है और ये उत्तर प्रदेश व बिहार के हैं। छुड़ाये गये सभी बच्चे साफ तौर से कुपोषित, नींद की कमी के शिकार और थके से लग रहे थे। इन्हें रोजाना 12-12 घंटे से भी ज्यादा खटाया जाता था।छापों के बाद एसडीएम ने राजौरी गार्डन और हरि नगर के थाना प्रभारियों को नियोक्ताओं के खिलाफ बाल श्रम (रोकथाम एवं नियमन अधिनियम, 1986), किशोर न्याय (संरक्षण एवं सुरक्षा) कानून, 2015 के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। सभी बच्चों की चिकित्सा जांच कराने के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।तमाम प्रयासों के बावजूद देश में बाल मजदूरी जारी रहने और इन बाल मजदूरों की स्थिति पर चिंता जताते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सख्त कानूनों एवं सतत चौकसी के बावजूद बाल दुर्व्यापार जारी है। दुर्व्यापारी दूसरे राज्यों से बच्चों को यहां ले आ रहे हैं और नियोक्ता इन बाल मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। बच्चे हमारे समाज का सबसे अरक्षित हिस्सा हैं। अपने लालच में कुछ लोग एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को रौंद रहे हैं और देश के आर्थिक विकास पर बुरा असर डाल रहे हैं। लेकिन हमारा संघर्ष जारी है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक हम बाल मजदूरी का खात्मा नहीं कर लेते और एक-एक बाल मजदूर को मुक्त नहीं करा लेते। हम उम्मीद करते हैं कि इस लड़ाई को गति देने के लिए एंटी-ट्रैफिकिंग विधेयक को जल्द से जल्द पारित किया जायेगा। इससे संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (85959 50825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.