टीम एबीएन, रांची। श्री राम जन्मभूमि अयोध्या जी में नूतन श्रीरामलला जी प्राण प्रतिष्ठा आगामी 22 जनवरी को हो रहे कार्यक्रम के निमित्त अयोध्या जी से आया पूजित अक्षत व नूतन राम मंदिर का चित्र घर घर देकर निमंत्रित करने का आज 14वां दिन रहा। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने बताया कि हजारीबाग के प्रसिद्ध व्यवसायी नवल किशोर खंडेलवाल के द्वारा क्रमश: 40 एवं 50 फीट की ऊंचाई वाले दो महावीरी पताका श्रीअयोध्या जी में प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के निमित्त बनवाया गया है, जिसे आज हजारीबाग के कुशल खंडेलवाल, रामबाबू, दीपक कुमार, संजय अग्रवाल व पवन कुमार सिंह ने रांची स्थित विश्व हिंदू परिषद प्रांत कार्यालय पहुंचाया। कार्यालय परिसर में हजारीबाग से आए रामभक्तों का स्वागत करते हुए कार्यालय स्थित दुर्गा मंदिर में विधि विधान से पूजन कर अयोध्या जी के लिए भेजा गया। इस अवसर पर डॉ बीरेंद्र साहू ने कहा हजारीबाग श्रीरामनवमी महोत्सव के लिए प्रसिद्ध है। हजारीबाग के बने महावारी पताका के लहरने से झारखंड गौरवान्वित होगा। नवल किशोर खंडेलवाल के पुत्र कुशल खंडेलवाल ने कहा मेरे पिताजी भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम प्रति असीम श्रद्धा रखते हुए 500 साल के बाद भगवान श्री रामजी के अपने महल में पधारने के उपलक्ष में ध्वजारोहण करने के भाव रखते हुए दो महावीरी पताका बनाए हैं। इस अवसर पर प्रांत संगठनमंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, बजरंग दल महानगर सहसंयोजक दीपक साहू, अशोक सिंह, ज्ञान लोहरा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन झारखंड प्रदेश की पहली प्रदेश कार्य समिति की बैठक दिगंबर जैन धर्मशाला में संपन्न हुई। बैठक में राज्य भर के 24 जिलों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए बैठक में नवनिर्वाचित पदाधिकारी को परिचय के साथ बैठक की शुरुआत हुई। बैठक में सभी जिलों के पदाधिकारी ने संगठन की मजबूती पर बल देते हुए अति शीघ्र सभी जिलों की कमेटी गठित कर प्रदेश को सौंपने की बात कही साथ ही सभी पदाधिकारी ने वैश्य समाज को उचित प्रतिनिधित्व सहित कई समस्याओं से अवगत कराया। ओबीसी के 27 परसेंट आरक्षण, सहित राज्य में ओबीसी वर्ग पर हो रहे अत्याचार पर विस्तृत रूप से चर्चा हुई।प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान शंकर ने अपने संबोधन में कहा कि 52 पर्सेंट आबादी होने के बावजूद वैश्य समाज को राजनीति में उचित भागीदारी नहीं मिल पायी है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके लिए वैस वैश्य समाज को संगठित होना होगा। अब समय आ गया है सभी उपजाति को एक मंच पर आकर अपना अधिकार छीन कर लेना पड़ेगा। अगर आज हम सचेत नहीं हुई, तो हमारे बच्चे हमें कभी माफ नहीं करेंगे इसलिए सभी भेदभाव भुलाकर सभी वैश्य को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।आज की बैठक में आगामी 25 फरवरी को रांची में विशाल जनसभा करने की घोषणा की गई यह जनसभा रांची में अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के बैनर तले आयोजित की जायेगी, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के वैश्य समाज के नेता शामिल होंगे। सभी नवनियुक्त पदाधिकारी को प्रदेश अध्यक्ष ने सर्टिफिकेट का वितरण किया। मंच का संचालन प्रदेश महामंत्री संजय चौधरी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन रांची जिला अध्यक्ष संजय पोद्दार ने किया।
आज की कथा के मुख्य यजमान अशोक सिंह, सपत्नी चंचल सिंहमंगल कलश शोभा यात्रा से प्रारंभ हुआ श्री राम कथा का आयोजनटीम एबीएन, रांची। हरिद्वार धाम से पधारे श्री श्री 1008 जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी डॉक्टर उमाकांतनंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में अयोध्या में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची के हरमू मैदान में श्री राम कथा का यह आयोजन किया जा रहा है। हरमू हाई कोर्ट शिव मंदिर श्री राम कथा के निमित कलश पूजन के साथ हजारों की संख्या में महिलाओं के द्वारा कलश शोभायात्रा निकाली गयी। कलश शोभा यात्रा परम पूज्य श्रद्धेय महाराज श्री के सानिध्य में निकाली गयी। वही महाराज श्री आज फूलो से सजी घोड़े की बघी पर बिराजमान थे जगह जगह गुरु जी व शोभायात्रा का धर्मप्रेमियों ने सवागत किया। राकेश भास्कर माथे पर पवित्र ग्रंथ लेकर चल रहे थे।गाजे बाजे के साथ निकाली गई शोभायात्रा में काफी संख्या में धर्म प्रेमी व श्री राम प्रेमी सहित गणमान्य लोग उपस्थित थे। शोभायात्रा मुख्य मार्ग से होते हुए हरमू मैदान कथा स्थल पहुंची। जहां पवित्र कलश को विराजमान किया गया। हम सभी लोगों के लिए परम सौभाग्य की बात है की श्री मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के पावन कथा के श्रवण की अमृत वर्षा का लाभ परम पूज्य स्वामी डॉक्टर उमाकांतनंद सरस्वती जी महाराज के मुखारविंद से प्राप्त हो रहा है। व्यास पीठ पर पवित्र ग्रंथ श्री रामायण का पूजन, वंदन, माल्यार्पण मुख्य यजमान श्री अशोक सिंह, सपत्नी ने किया।ब्यास पीठ पर विराजमान स्वामी जी को चंदन, वंदन, माल्यार्पण और आरती के बाद महराज जी कथा अमृत वर्षा का लाभ देते हुए महाराज श्री ने कथा प्रारंभ की। व्यास पीठ पर विराजमान परम पूज्य महाराज जी ने कथा स्थल में उपस्थित सभी श्रोताओं का अभिवादन किया। उन्होंने कथा के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया की कथा हम सुनते जरूर है लेकिन कथा का मर्म तभी सही होगा जब उसे जीवन मे उतारेंगे। उन्होंने श्री राम के प्रसंग पर चर्चा कर कहा भगवान श्री राम भारत की आत्मा है। उन्होंने भगवान के बाल रूप की वंदना की उन्होंने कहा भगवान के नाम जपने से सारी परेशानियां दूर हो जाती है। भव सागर से पार होना है तो राम कथा 9 दिनों तक सुने ये भव सागर से पर कर देगी। उन्होंने आस्था पर चर्चा कर बताया आस्था हिन्दू धर्म का मोल है कण कण में ईश्वर है जिसके जीवन मे संशय है उसका विनाश निश्चित है।उन्होंने कहा राम राज्य पूरे विश्व के लिए स्वर्णमय युग का संकेत है। राजनीतिक पर चर्चा करते हुए कहा कि धर्म के बिना राजनीतिक अधर्म है भगवांन की कथा कहानी नही जीवन का दर्शन व पथ प्रदर्शक, जीवन दर्शन, राष्ट्र नायक, राजा का जीवन, भक्ति, बैराग्य, राजनीतिक क्या है। भगवान राम एक ऐसे अवतार है जिन्हें हम मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं।इसके पूर्व मंच पर मुख्य यजमान अशोक सिंह व पत्नी चंचल सिंह व उनके परिवार के द्वारा व्यास जी की आरती की गयी। मौके पर अध्यक्ष राकेश भास्कर, सांसद समीर उरांव, राज किशोर सिंह, वीरेंद्र सिंह, अजय सिंह, सुरेश सिंह, प्रमोद सारस्वत, धर्मेंद्र तिवारी, अखिलेश पांडेय ने गुरु जी को माल्यार्पण कर स्वागत अभिनंदन किया। मुख्य यजमान सपत्नी के द्वारा सायं आरती की गयी। कथा स्थल पर प्रसाद का वितरण किया गया। मुख्य रूप से इंद्रजीत यादव, गोपाल सोनी, रामचंद्र जायसवाल, राजीव चौधरी, पुनीत सहित कई लोगों ने अपनी सेवा दी। हजारों लोगों ने कथा का श्रवण किया पूरा पंडाल आज श्रोताओ से भरा था। बुजुर्गों को महिलाओं को प्रथम प्राथमिकता देकर कुर्सियों पर बैठाया गया कथा स्थल में पेयजल की व्यवस्था, शौचालय की व्यवस्था, चरण पादुका की व्यवस्था की गयी थी।आयोजन समिति के प्रवक्ता प्रमोद सारस्वत ने बताया की कल की कथा समय अपराहन 3 बजे से 7 बजे तक होगी। समय पर कथा स्थल पहुंचकर अपना उचित स्थान ग्रहण करे। रांची की सभी धार्मिक और सामाजिक संस्था व धर्म प्रेमियों से आग्रह किया है कि महाराज श्री के मुखारविंद से श्री राम कथा की अमृत वर्षा का हरमू मैदान में आकर लाभ प्राप्त करें।
भगवान पुरुषोत्तम श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा निमंत्रण को लेकर कार्यकर्ता पहुंच रहे हैं गांवों व नगरों के गली-गलीटीम एबीएन, रांची। अयोध्या धाम, श्रीरामजन्मभूमि से पुजीत होकर आया अक्षत व नूतन मंदिर का चित्र से झारखंड प्रांत के सभी जिलों में आज 13वें दिन भी कार्यकर्ताओं ने काफी उत्साह पूर्वक झारखंड के प्रत्येक गांवों व नागरों के गली-गली में हजारों परिवार को निमंत्रण दिया। आज विश्व हिंदू परिषद क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार ने बोकारो, धनबाद साहिबगंज, पाकुड़ वहीं प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह ने रामगढ़, हजारीबाग के डेमोटांड़ व चरही, कोडरमा, देवघर, गिरिडीह के पीरटांड़, इसरी, बगोदर, बिशुनगढ़ प्रखंड के गांव गोविंदपुर तथा प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार एवं बजरंग दल प्रांत संयोजक दीपक ठाकुर ने खूंटी, गुमला, लातेहार व पलामू प्रवास कर कार्यकर्ताओं को उत्साहवर्धन कर अभियान की गति प्रदान किये। अभियान के क्रम में कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर जाकर दर्जनों परिवारों को निमंत्रण दिये।निमंत्रण देते हुए प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने कहा कि पूरे झारखंड प्रांत में भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर प्रत्येक गांवों व नागरों की गली गली में उत्साह के साथ कार्यकर्ताओं के द्वारा पूजित अक्षत एवं नूतन मंदिर का चित्र देकर के निमंत्रण दिया जा रहा है। डॉ साहू ने कहा- झारखंड के प्रत्येक गांव एवं शहरों के लगभग 31,000 से अधिक बड़े मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान एवं महाआरती का कार्यक्रम करेंगे। प्रत्येक परिवार के महिलाऐं अपने घरों से दीपक सजाकर लायी गयी थाली से महाआरती कर भगवान को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। डॉ साहू ने कहा 22 जनवरी को 11 से 1 तक संपूर्ण हिंदू समाज मंदिर में एकत्रित होकर धार्मिक अनुष्ठान एवं महाआरती करेंगे। साथ ही संध्या बेला में भव्य दीपोत्सव कर भगवान पुरुषोत्तम श्री राम लला के प्राण प्रतिष्ठा का खुशियां मनायेंगे। प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह ने कहा- चाहे गांव हो चाहे शहर, भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा को देखकर, लगता है मानो त्रेतायुग में भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम जी बनवास से लौटे हैं और उनका राजतिलक की तैयारी चल रही हो। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के उत्साह व हिंदू समाज के भगवान के प्रति असीम श्रद्धा ने संपूर्ण भूमंडल को उल्लासित कर रहा है। उक्त जानकारी विहिप के प्रचार प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक पे्रस विज्ञप्ति जारी कर दी।
स्वामी विवेकानंद ने आत्मबल से भरे युवाओं को आह्वान किया उन्होंने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति के महत्व और सार्थकता को स्थापित किया एबीएन एडिटोरियल डेस्क। युवा दिवस के अवसर पर उर्सूलाइन इंटर कॉलेज रांची के सभागार में स्वामी विवेकानंद आज के युवाओं के लिए प्रेरणा विषय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विज्ञान 11वीं की छात्राओं को संबोधित करते हुए जीवन मूल्यों का जीवन के संकल्प और सफलता से संबंधों का विस्तार से विवेचना किया। इस अवसर पर एबीएन के एडिटर इन चीफ सह खबर मन्त्र के चीफ सब एडिटर एनके मुरलीधर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो सहित पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति के सार को समझाते हुए कहा कि हमारी भौतिक साधनों से अधिक मानवीय मूल्य अधिक उपयोगी है। कई घटनाओं और कथाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्कित का भाव सदैव व्यापक बहुत ही व्यापक होना चाहिए। इसी भाव से भगवत प्राप्ति होती है। युवाओं को स्वामी की जीवन से प्रेरणा लेते हुए अपने शैक्षणिक और बौद्धिक विकास के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। हमारे अंदर जो गुण है उनके विकास के लिये प्रतिबद्धता परिवार, समाज और दुनिया के लिए हितकारी है। इस अवसर पर प्राचार्या डॉ मेरी ग्रेस ने कहा कि स्वामी का युग वाक्य उठो जागो और तब तक न रूको जब तक लक्ष्य को प्राप्त न कर लो वर्तमान समय में युवाओं के लिये सबसे बड़ी प्रेरणा है। आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हमारी मानवीय गुणों को लेकर हमें सचेत रहने की आवश्यकता है। हमारा मन भौतिक साधनों के बीच विकृत न होकर हमारा मन और मस्तिस्क हमारे ज्ञानवान और बौद्धिकता को लेकर सजग रहे यह प्रेरणा हमें स्वामी जी के बातों से मिलती है। युवा दिवस पर दो दिवसीय कार्यक्रम का शनिवार को दूसरा और अंतिम दिन था। इसे प्रेरणा लेने की शपथ ली।
टीम एबीएन, रांची। श्री अयोध्या धाम राम जन्मभूमि पूजित अक्षत निमंत्रण अभियान के 12 दिन विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री वीरेंद्र विमल जी ने कहा कि अपने वनवास काल में रामजी ने संपूर्ण समाज को जोड़ा था। आज उनका अक्षत सभी जाति-पंथ-वर्ग-भाषा-प्रान्त के स्त्री-पुरुष, युवा-बाल और वृद्ध, सबको जोड़ रहा है। सभी रामजी का अक्षत बड़ी श्रद्धा से ग्रहण कर रहे हैं। अक्षत निमंत्रण की टोलियां पहुंचने पर भक्तों को ऐसा लग रहा है, मानो स्वयं रामजी ही आ गये हैं। स्थान स्थान पर कार्यकर्त्ताओं का स्वागत आरती, तिलक और पुष्पवर्षा से हो रहा है। माता-बहनें सिर पर पल्लु रखकर आंचल में अक्षत ग्रहण कर कार्यकर्त्ताओं कि चरण स्पर्श कर रही हैं। सर्वत्र जय श्रीराम के उद्घोष से अवनि-अंबर गुंजायमान हो रहा है। हिन्दू समाज को तोड़ने और बांटने वाले सारे षडयंत्र चकनाचूर हो रहे हैं। आज अक्षत निमंत्रण हेतु नायक टोली तथा हेसल बड़काटोली के जनजातीय परिवारों में जाने का अवसर मिला। स्वयं भुनु पहान तथा मुन्ना पहान ने आगे आकर बहुत श्रद्धा भाव से रामजी का अक्षत निमंत्रण स्वीकार किया। बड़ी संख्या में माता-बहनें भी अक्षत लेने निकलीं। रामजी का अक्षत ले गली-गली घुमने से प्रेम, सद्भाव, समरसता एवं आत्मीयता सा प्रत्यक्ष दर्शन हो रहा था। कहीं कोई भेद- भाव नहीं, सब अपने, सब रामजी के। सब मिलकर एक ही स्वर... जय श्रीराम जय! श्रीराम!! उक्त जानकारी विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन ने वक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
मौनी माता के नाम से मशहूर हुई 85 वर्षीय महिलाराम मंदिर के निर्माण तक बात न करने का लिया फैसलाएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। धनबाद में रहने वाली 85 वर्षीय महिला इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। महिला का नाम सरस्वती देवी बताया गया है, जिन्हें अयोध्या में मौनी माता के नाम से जाना जाता है। कहा जा रहा है कि मौनी माता ने 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त पर प्रतिज्ञा की थी कि जब तक राम मंदिर के निर्माण नहीं होता तब तक वे बात नहीं करेंगी। महिला को लेकर पारिवारिक सदस्यों का दावा है कि महिला सांकेतिक भाषा के जरिए बातचीत करती थीं। वर्ष 2020 तक मौनी देवी प्रत्येक दिन दोपहर में एक घंटे के लिए बात करती थी। लेकिन जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी, वह पूरी तरह से चुप हो गयीं। इसी के साथ उनके एक अन्य पारिवारिक सदस्य इन्नू अग्रवाल ने बताया कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद, मेरी सास ने अयोध्या का दौरा किया और राम मंदिर के निर्माण तक मौन व्रत का संकल्प लिया। वह दिन में 23 घंटे मौन रहती थीं, केवल दोपहर में एक घंटे का ब्रेक लेती थीं। बाकी समय, वह कलम और कागज के माध्यम से हमसे संवाद करती थी। अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि, जब 2020 में पीएम मोदी द्वारा राम मंदिर की नींव रखी गयी, तो वह 24 घंटे के मौन व्रत के लिए चली गयीं और मंदिर के उद्घाटन के बाद ही बोलने की प्रतिज्ञा की। सरस्वती देवी के सबसे छोटे बेटे 55 वर्षीय हरे राम अग्रवाल ने कहा कि जिस दिन 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था, मेरी मां ने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने तक मौन रहने की शपथ ली थी। जब से मंदिर के अभिषेक की तारीख की घोषणा की गयी है तब से वह बहुत खुश हैं। आगे उन्होंने कहा कि देवी को महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्यों ने राम मंदिर उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंडी भाषा खतियान संस्कृति समिति रांची टीम द्वारा राजधानी रांची के बीचों बीच अल्बर्ट एक्का चौक में राजधानी टुसू महोत्सव का अयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रुप में पुलिस उपाधीक्षक रांची यातायत शामिल होकर सामूहिक नृत्य किए। मौके पर देवेन्द्र नाथ महतो ने बताया कि टुसू महोत्सव का उद्घाटन पारम्परिक रीति रिवाज परंपरा के साथ अविवाहित कन्या द्वारा टुसू स्थापना करके किया गया, महोत्सव में पूरे झारखंड प्रदेश से आदिवासी मूलवासी शामिल हुए अल्बर्ट एक्का चौक में ढ़ोल नगाड़ा के साथ टुसू प्रेमी थिरके, 100 के आस पास छौटा बड़ा टुसू शामिल हुआ, मौके गुड़ पिठा वितरण किया गया। मौके पर देवेंद्र नाथ महतो टुसू की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टुसू बारह मासे तेरह परब के रुप में मनाया जाने वाला अंतिम परब जो किसान बड़ी धूम धाम से मनाते है, किसान का प्रमुख फसल धान है जो रोहिन मास में बुना जाता जो अंकुर होकर बड़ा होता है फिर पकता होता है, खेत से जब सब धान काटते हैं तो तीन चार बुदा धान को छोड़ते हैं फिर पारम्परिक तरीके से खलिहान लाया जाता, खलियान पहुंचने से पहले जो धानी होता है।वही धानी खेत पहुंचते ही डीनीमनी होता है जिसे अघन सक्रांति के दिन डिनिमनी को अविवाहित कन्या द्वारा टुसू मनी का स्थापना किया जाता है, किसान टुसू मनी को बेटी के सदृश्य मानती है, इसीलिए बेटी का आगमन पर किसान खुशी मनाते हुए तरह तरह खाने का व्यंजन पाकवान बनाते हैं।एक माह बाद मकर संक्रांति के दिन बेटी रूपी टूसुमनी का बहती जलाशय में विसर्जन किया जाता है, मान्यता के अनुसार चौड़ाल टुसू मनी का विसर्जन समय का पालकी यानी वाहन है, और ढ़ोल नगाड़ा गाजा बाजा बिदाई के समय का नाच गान है, इस प्रकार टुसू किसानों द्वारा मनाया जाने वाला प्रसिद्ध लोक संस्कृति परब है, इसलिए इसका संरक्षण हेतु सर्वसम्मिति से प्रतिवर्ष 11 जनवरी को मनाने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से देवेंद्र नाथ महतो, फलींद्र करमाली, सुमित खतियानी, लखींद्र, मार्शल, सूरज, विराट, रविन्द्र, नकुल, राजू, गोविन्द महतो, राजेश बैठा, शिवराज, अंगत नायक, अजीत, सुभाष, नरेश, लक्की रामू, के अलावा अन्य सैकड़ों लोगों का अहम योगदान रहा।
टीम एबीएन, रांची। संत जेवियर कॉलेज, रांची हिंदी विभाग एवं हिन्दी साहित्य परिषद के तत्त्वावधान में विश्व हिन्दी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिन्दी विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। इस कार्यक्रम का सफल संचालन पीजी सेमेस्टर 3 की छात्रा नेहा कुमारी गुप्ता ने की। मौके पर हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. जय प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि मातृभाषा गर्भ से जुड़ी भाषा है। उन्होंने डॉ फादर कामिल बुल्के की इन इन पंक्तियों को भी याद किया संस्कृत महारानी है, हिन्दी बहुरानी है तथा अंग्रेजी नौकरानी है इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन हिन्दी भाषा जिह्वा के समान है। जिह्वा हमेशा दांतों से घिरी रहती है किंतु निर्भय होकर अपना अस्तित्व बचाये रखते हुए दांतों का हित करती है। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ सुनील कुमार भाटिया ने विश्व हिन्दी दिवस की सार्थकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी को तराशना तथा परिष्कृत कर शुद्ध उच्चारण एवं लेखन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। प्राध्यापक डॉ संजय कुमार ने भाषा की वैज्ञानिकता और वैश्विक स्तर पर हिन्दी के महत्त्व तथा विभिन्न कार्यक्षेत्रों की जानकारी दी। सहायक प्राध्यापिका सुश्री कोमल खलखो ने हिन्दी की उपयोगिता एवं उसके विस्तार की बात करते हुए कहा कि हिन्दी हमारी प्रतिष्ठा एवं मान-सम्मान की भाषा है।
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