टीम एबीएन, रांची। 2 फरवरी को 1500 लोग आस्था स्पेशल ट्रेन से श्री अयोध्याधाम रामजन्मभूमि मंदिर तीर्थ के लिए रांची से गये थे। 3 फरवरी को ट्रेन श्री अयोध्या धाम पहुंची। 3 और 4 फरवरी को वहां सभी लोग सरयू नदी, हनुमान गढ़ी, श्रीरामजन्म भूमि दर्शन किये और अयोध्या क्षेत्र भ्रमण कर वापस रांची लौटे। यहां पहुंची पूरा स्टेशन परिसर जय जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। यात्रा प्रमुख रंगनाथ महतो विहीप प्रांत सह मंत्री ने बताया कि ट्रेन के अन्दर भी कोई जय जय श्रीराम के जयकारे लगा रहा था, तो कोई हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ रहा था, सभी लोग श्री राम जन्मभूमि मन्दिर दर्शन के उत्सव के साथ इस तीर्थ क्षेत्र भ्रमण में गये थे। राम भक्तों की टोली में महिला-पुरुष बुजुर्ग सभी शामिल थे। श्री महतो ने बताया कि यह सफर बहुत अच्छा रहा है। अयोध्या पहुंचने के लिए रेलवे ने ये बहुत अच्छी सुविधा दी है।यहां से लेकर अयोध्या तक स्वागत देखकर मन प्रफुल्लित है। श्री मिथलेश्वर मिश्र प्रान्त सामाजिक संस्था प्रमुख ने बताया कि प्रभु राम के दर्शन से जीवन धन्य हो गया। हमारे जीवन में यह अमृत पल आया और हम मन्दिर का दर्शन कर पाये। श्री मिश्र ने रेलवे को धन्यवाद देते हुए कहां की उनके तरफ से यह बहुत अच्छी व्यवस्था दी गयी थी।इस दौरान किसी भी यात्री को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है.लगभग 1500 यात्री ट्रेन से अयोध्या से यात्रा कर वापस पहुंचे हैं। इस यात्रा में विश्व हिंदू परिषद्, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय मजदूर संघ, अधिवक्ता परिषद, लघु उद्योग, वनवासी कल्याण केन्द्र, विद्या भारती, दुर्गा वाहिनी, मातृ शक्ति एवं अन्य आयाम के लोग इस दर्शन में शामिल हुए। विहिप प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, प्रान्त करवाह संजय कुमार, क्षेत्रीय कार्य समिति सदस्य राकेश लाल, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, सेवा प्रमुख अजय अग्रवाल, प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन, अरविन्द सिंह, कमलेश सिंह, मनोज चंद्रवंशी, रेणु अग्रवाल, विभाग मंत्री कृष्ण कुमार झा, रवि शंकर राय, कैलाश केसरी, चंद्रदीप दुबे, अमर प्रसाद, विनय कुशवाहा, जनार्दन पांडे, छोटू वर्मा, रामेश्वर दयाल एवं अन्य कार्यकर्ता इस यात्रा में शामिल थे। उक्त जानकारी विहिप के प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (93344 33338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। पवित्रम गो सेवा परिवार झारखंड के प्रांतीय संयोजक अजय कुमार भरतिया एवं प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने संयुक्त रूप से बताया है कि आज हमारी अधिकतर बीमारियों का कारण है यूरिया फार्टिलाईजर और केमिकल से उपजाया हुआ हमारा भोजन है तथा गो हत्या का भी एक मुख्य कारण है गौ आधारित खेती का बंद होना। पवित्रम गो सेवा परिवार पिछले कई वर्षों से घायल बीमार गोवंश की चिकित्सा, सेवा, गांव-गांव में जैविक खेती के नि:शुल्क प्रशिक्षण, पञ्चगव्य उत्पाद के प्रचार-प्रसार एवं गौ कथाओं के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहा है। ताकि देशी गोवंश को बचाया जा सके।गो आधारित जैविक खेती से केवल गाय ही नहीं पर्यावरण एवं लोगों के स्वास्थ्य को बचाया जा सकता है। पवित्रम गो सेवा परिवार ने इसी श्रृंखला के तहत धनबाद में सरायढेला में 4 फरवरी से पवित्रम स्वदेशी प्रचार केंद्र शुरू करने जा रहा है, जिस पर बहुत ही अच्छे मूल्यों पर समाज तक सीधे किसानों के घर से गो आधारित खेती से उपजाये हुए अन्न, ढेकी से कूटे चावल, जैविक बिना पॉलिश किया हुआ बाजरा, मिट्टी के बर्तन, हाथ से बिलौया देशी गो का घी, कोल्हू से निकाला गया तेल, सल्फर फ्री चीनी, आर्गेनिक गन्ने से घर का बना गुड़, गोबर से बनी बिना केमिकल वाली धूप, गोबर निर्मित दीपक, मूर्तियां, पंचगव्य से बनी औषधियां, शैंपू, गोमूत्र अर्क इत्यादि अनेक स्वदेशी वस्तुएं पहुंचाने के लिए प्रयास किया जायेगा। इस तरह के केंद्र अन्य शहरों में भी खोलने की योजना है। उन्होंने सभी से आग्रह किया है कि हम सभी जन जन को निरोगी बनाने, गो हत्या रोकने, पर्यावरण रक्षा के अभियान में शामिल हो, हमारी सहभागिता से वनवासी भाई बहनों, ग्रामीणों, दिव्यांगजनों एवं गो शालाओं को संबल प्राप्त होगा।
योगाचार्य महेश पालएबीएन सोशल डेस्क। प्राणायाम जीवन का रहस्य है सांसों के आवागमन पर ही हमारा जीवन निर्भर है और आॅक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा से रोग और शोक उत्पन्न होते हैं। प्रदूषण भरे माहौल और चिंता से हमारी सांसों की गति अपना स्वाभाविक रूप खो ही देती है, जिसके कारण प्राण वायु संकट काल में हमारा साथ नहीं दे पाती। ऐसे में प्राणायाम को सीखकर अपने जीवन का अंग बनायें। योगाचार्य महेश पाल भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हैं कि प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में से एक भस्त्रिका प्राणायाम है। संस्कृत में भस्त्रिका का अर्थ होता है धोकनी। आज हम भस्त्रिका प्राणायाम का मानव जीवन में किस प्रकार से महत्व एवं वो किस प्रकार से हमारे दैनिक दिनचर्या में हमारे उत्तम स्वास्थ्य के लिए उपयोगी सिद्ध होता है। इसके विषय में जानेंगे भस्त्रिका का शाब्दिक अर्थ है धोकनी अर्थात एक ऐसा प्राणायाम जिसमें लोहार की धोकनी की तरह आवाज करते हुए वेग पूर्वक शुद्ध प्राणवायु को अंदर ले जाते हैं और अशुद्ध वायु को बाहर निष्कासित करते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम की चर्चा योग ग्रंथ हठयोग प्रदीपिका में स्वामी स्वात्माराम जी ने विस्तार पूर्वक की है। भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन या सुखासन में बैठकर कमर गर्दन और रीड की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर और मन को स्थिर रखें। ज्ञान या ध्यान मुद्रा का चयन कर आंखें बंद कर लें। फिर तेज गति से दोनों नाशिकाओं से सांस लें और तेज गति से ही सांस बाहर निकाले श्वास लेते समय पेट फूलना चाहिए और सांस छोड़ते समय पेट अंदर की और जाना चाहिए। इससे नाभि स्थल पर दबाव पड़ता है। इस प्राणायाम को करते समय श्वास की गति को पहले थोड़ा धीर रखें फिर श्वास भरना और सांस छोड़ना धीरे-धीरे गति को बढ़ायें। भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास से हमारे शरीर पर कई प्रकार के प्रभाव देखने को मिलते हैं। विषाक्त तत्व खत्म हो जाते हैं। वात पित्त कफ संतुलित हो जाते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों के साथ आंख, कान और नाक के स्वास्थ्य और इम्यूनिटी को बनाये रखने के लिए भी लाभदायक है। इस प्राणायाम से पाचन संस्थान, लीवर और किडनी की भी एक्सरसाइज हो जाती है। साथ ही मोटापा, दमा, टीबी और सांसों से जुड़े रोग दूर हो जाते हैं। मासपेशी से जुड़े किसी भी रोग में भी भस्त्रिका प्राणायाम को लाभकारी माना गया है। फेफड़ों में हवा की तेजी से अंदर बाहर होने की वजह से डाइफ्राम से आक्सीजन और कार्बन डाइआॅक्साइड की अदला बदली ज्यादा जल्दी होती है। इस वजह से चयापचय क्रिया की दर बढ़ जाती है। शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है और विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। डायाफ्राम के तेजी से और लयबद्ध तरीके से काम करने से आंतरिक अंगों की मालिश होती है और वह पूर्ण रूप से स्वस्थ व ऊर्जान्वित हो जाते हैं। जिससे उनकी कार्य क्षमता बढ़ती है और हमारा पूरा शरीर आंतरिक रूप से स्वस्थ और सुदृढ़ हो जाता है। ये बरतें सावधानी इस प्राणायाम को करते समय हमें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए भस्त्रिका प्राणायाम उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को नहीं करनी चाहिए। हृदय रोग, सिर चकराना, मस्तिष्क ट्यूमर, मोतियाबिंद, आंत या पेट के अल्सर या पेचिश के मरीजों को ये प्राणायाम नहीं करना चाहिए। गर्मियों में इसके बाद शीतली या शीतकारी प्राणायाम करना चाहिए, ताकि शरीर ज्यादा गर्म ना हो जाये। योग हमारे शरीर और मन को स्वस्थ बनाकर हमें जागरूक करता है और साथ ही हमें सही मार्ग पर चलने के लिए उचित विचार और हमारी भावनाओं को शुद्ध करता है जिससे हम आध्यात्मिक की और आगे बढ़ते हुए जीवन के मुख्य उद्देश्य को समझ कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते हुए अपने जीवन की यात्रा को सुखद समृद्ध और प्रभावशाली बनाते हुए समाधि को प्राप्त हो जाते हैं इसलिए हम सभी को हमारी दैनिक दिनचर्या में योग जरूर करना चाहिए। (लेखक गुना मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध योगाचार्य हैं।)
एबीएन सोशल डेस्क। सुंदरकांड पढ़ते हुए 25 वें दोहे पर ध्यान थोड़ा रुक गया। तुलसीदास जी ने सुंदर कांड में, जब हनुमान जी ने लंका मे आग लगायी थी, उस प्रसंग पर लिखा है -हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास। अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास।। अर्थात : जब हनुमान जी ने लंका को अग्नि के हवाले कर दिया तो भगवान की प्रेरणा से उनचासों पवन चलने लगे। हनुमान जी अट्टहास करके गर्जे और आकार बढ़ाकर आकाश से जा लगे। मैंने सोचा कि इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है? यह तुलसी दास जी ने भी नहीं लिखा। फिर मैंने सुंदरकांड पूरा करने के बाद समय निकालकर 49 प्रकार की वायु के बारे में जानकारी खोजी और अध्ययन करने पर सनातन धर्म पर अत्यंत गर्व हुआ। तुलसीदासजी के वायु ज्ञान पर सुखद आश्चर्य हुआ, जिससे शायद आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वेदों में वायु की 7 शाखाओं के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि वायु तो एक ही प्रकार की होती है, लेकिन उसका रूप बदलता रहता है, जैसे कि ठंडी वायु, गर्म वायु और समान वायु, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, जल के भीतर जो वायु है उसका वेद-पुराणों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों में 7 प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है। ये 7 प्रकार हैं- प्रवह, आवह, उद्वह, संवह, विवह, परिवह परावह। प्रवह : पृथ्वी को लांघकर मेघमंडलपर्यंत जो वायु स्थित है, उसका नाम प्रवह है। इस प्रवह के भी प्रकार हैं। यह वायु अत्यंत शक्तिमान है और वही बादलों को इधर-उधर उड़ाकर ले जाती है। धूप तथा गर्मी से उत्पन्न होने वाले मेघों को यह प्रवह वायु ही समुद्र जल से परिपूर्ण करती है जिससे ये मेघ काली घटा के रूप में परिणत हो जाते हैं और अतिशय वर्षा करने वाले होते हैं। आवह : आवह सूर्यमंडल में बंधी हुई है। उसी के द्वारा ध्रुव से आबद्ध होकर सूर्यमंडल घुमाया जाता है। उद्वह : वायु की तीसरी शाखा का नाम उद्वह है, जो चन्द्रलोक में प्रतिष्ठित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध होकर यह चन्द्र मंडल घुमाया जाता है।संवह : वायु की चौथी शाखा का नाम संवह है, जो नक्षत्र मंडल में स्थित है। उसी से ध्रुव से आबद्ध होकर संपूर्ण नक्षत्र मंडल घूमता रहता है। विवह : पांचवीं शाखा का नाम विवह है और यह ग्रह मंडल में स्थित है। उसके ही द्वारा यह ग्रह चक्र ध्रुव से संबद्ध होकर घूमता रहता है।परिवह : वायु की छठी शाखा का नाम परिवह है, जो सप्तर्षिमंडल में स्थित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध हो सप्तर्षि आकाश में भ्रमण करते हैं। परावह : वायु के सातवें स्कंध का नाम परावह है, जो ध्रुव में आबद्ध है। इसी के द्वारा ध्रुव चक्र तथा अन्यान्य मंडल एक स्थान पर स्थापित रहते हैं। इन सातो वायु के सात सात गण हैं जो निम्न जगह में विचरण करते हैं ब्रह्मलोक, इंद्रलोक, अंतरिक्ष, भूलोक की पूर्व दिशा, भूलोक की पश्चिम दिशा, भूलोक की उत्तर दिशा भूलोक कि दक्षिण दिशा। इस तरह 7 गुणा 7 = 49। कुल 49 मरुत हो जाते हैं जो देव रूप में विचरण करते रहते हैं। अद्भुत ज्ञान। हम अक्सर रामायण, भगवद् गीता पढ़ तो लेते हैं परंतु उनमें लिखी छोटी-छोटी बातों का गहन अध्ययन करने पर अनेक गूढ़ एवं ज्ञानवर्धक बातें ज्ञात होती हैं।
तीर्थ पुरोहितों ने पूजा-अर्चना कर की विश्व शांति की कामनाएबीएन न्यूज नेटवर्क, देवघर। बाबा मंदिर में बीते शनिवार को पुरोहितों ने भोलेनाथ की विशेष पूजा- अर्चना की और विश्व कल्याण की कामना की। बैद्यनाथ धाम में इस पूरे अनुष्ठान की पूर्णाहुति की अध्यक्ष विजय खवाड़े ने कहा कि इस पूरी यात्रा का मकसद सिर्फ विश्व कल्याण है ताकि समाज में समरसता बनी रहे और विश्व का कल्याण हो। उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ के परिसर में विशेष अनुष्ठान किया गया और सामूहिक रूप से तीर्थ पुरोहितों ने बाबा बैद्यनाथ को विशेष पूजा- अर्चना कर विश्व शांति और विश्व कल्याण की कामना की। बाबा मंदिर के गर्भ गृह में तीर्थ पुरोहितों ने बाबा भोलेनाथ का 16 प्रकार की वस्तुओं से पूजन किया। वहीं, यह दृश्य देखने के लिए बाबा मंदिर में काफी संख्या में यात्री मौजूद रहे।बता दें कि गोमुख गंगोत्री समाज के 31 सदस्य गंगोत्री से लेकर बैद्यनाथ धाम तक पैदल यात्रा कर 3 महीने में विश्व कल्याण की कामना की थी। इन पुरोहितों ने 1850 किलोमीटर की लंबी पांव पैदल यात्रा 74 दिन में तय किया था।
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में आनलाइन अंतरप्रांतीय जप-अनुष्ठान गायत्री साधक समूह तथा युग साहित्य स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व में पौष पूर्णिमा पर 24 घंटे का अखंड गायत्री महामंत्र जप-अनुष्ठान गुरुवार सुबह 5 बजे से शुरू हुआ। इस बीच दोपहर से गायत्री युग साहित्य स्वाध्याय पाठ-संवाद व महिला मंडल का प्रभुश्रीराम भगवान के आदर्शमय जीवन एवं गुरुवरश्रीराम श्रीवेदमूर्ति- तपोनिष्ठ पं श्रीराम आचार्यजी के आदर्शमय जीवन व समस्त मानव जीवन के कल्याण हेतु विचार क्रांति अभियान, युग निर्माण अभियान, उनकी लिखित, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, रामायण की प्रगतिशील प्रेरणा, राम का नाम ही नहीं, राम का काम भी, जैसे प्रेरणाप्रद, सद्चिन्तन, सद्विचार संवर्धन पर विचार व संवाद हुआ। फिर भजन-कीर्तन में सिया राममय सब जग जानी... मंगल भवन अमंगल हारी, औरों के हित जो जीता है... श्रीराम जय राम, जय जय राम राम, गीता रामायण पढ़ना पर्याप्त न होगा, उस सांचे में ढलना होगा, ऋषियों का जो संदेश मिला है, जीवन में अपनाना होगा जैसे अनेक प्रज्ञागीत का गायन व भजन-कीर्तन और विचार-संवाद किया गया। जप अनुष्ठान संचालन मंडल ने बताया कि यह जप-अनुष्ठान की ऊर्जा पूज्य गुरुवर श्री आचार्य की चरणों में नमन-वंदन कर आगामी माह के मुम्बई अश्वमेध महायज्ञ के मंगलमय आयोजन को समर्पित किया जायेगा। जप-अनुष्ठान गुरुवार सुबह 5 बजे से अगले दिन सुबह 5 बजे संपन्न होगा। गायन-वादन में दोनों अवतारी महाचेतना के आदर्श जीवन दर्शन के विचार संवाद में करीब चार दर्जन से अधिक साधक भाई बहन भागीदारी में शामिल रहे। सायंकालीन दीप यज्ञ कर सबके लिए सुस्वास्थ्य, सुखमय जीवन, उज्ज्वल भविष्य और मंगलमय वातावरण के वंदना प्रार्थना की गयी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
51 घंटे का अखंड दीप सहित एकादशी व्रत व श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा में निष्ठा से जप-यज्ञ कर साधक आनलाइन भी राममय व यज्ञमय हुए टीम एबीएन, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के तत्वावधान में घर-घर, परिवार तपोवन, शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों,महिला मंडलों, इकाइयों में पुत्रदा एकादशी व्रत-उपवास, जप-अनुष्ठान, यज्ञीय अनुष्ठान दो दिवसीय किया। इसमें प्रथम दिन पुत्रदा एकदाशी पर अखंड दीप साथ महामंत्र जप-अनुष्ठान रांची व झारखंड सहित आनलाइन अनेक प्रांतों से साधक जुड़े।जप-अनुष्ठान समूह में कुछ विशिष्ट परिवार साधकों ने एकदाशी व्रत जप-अनुष्ठान का शतक मनाया और इस दो दिवसीय अवसर पर 100 माला गायत्री महामंत्र व सहायक मंत्रों का जप किया। दूसरे दिन यज्ञीय अनुष्ठान और स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व में अयोध्या नगरी में अपने गर्भगृह में परम प्रभु श्रीराम भगवान के शुभ आगमन और प्राण प्रतिष्ठापन के महापावन अवसर पर साधक-शिष्य गण राममय यज्ञमय हुए। जप-अनुष्ठान मंडल ने विधिवत गुरु-ईश ध्यान, श्रीलक्ष्मी नारायण एवं सर्वदेव पूजा-पाठ सहित जप अनुष्ठान प्रारंभ किया। एक साधक-शिष्य ने इस एकादशी पर जप-अनुष्ठान का 100 वां एकादशी व्रत-उपवास बता प्रसन्नता अनुभव की। इसे नव निर्माण में परमार्थ व सामूहिक आध्यात्मिक जप-अनुष्ठान अभियान बताया। बताया कि यह एकदाशी दिवस आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह मंडल प्रतिनिधित्व की ओर से वर्ष 2020 फरवरी में रांची धूर्वा बस स्टैंड गायत्री प्रज्ञापीठ में शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित तत्कालीन 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के समय राष्ट्र स्तरीय आनलाइन जप-अनुष्ठान प्रतिनिधि मंडल के मार्गदर्शन व सानिध्य में संकल्पित होकर इसअभियान समूह में शामिल होकर एकादशी व्रत-उपवास जप-अनुष्ठान का नियमित सदस्य बन लगातार निष्ठापूर्वक किया और श्रीगुरुसत्ता के कमलचरणों में अर्पित किया। दूसरे दिन चिरप्रतीक्षित निर्णय व उद्देश्य पर प्रभु श्रीराम लला की गर्भ गृह में प्रतिष्ठापन के शुभ अवसर पर दो दिन में 100 माला गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान पूर्ण किया। इस अवसर पर सर्वत्र व्यापक स्तर पर गायत्री परिवार साधकों ने अपनी पीठों व इकाइयों में और आनलाइन भी सुबह गायत्री यज्ञ और सायंकालीन दीप यज्ञ कर दीपोत्सव बड़े उमंग उल्लास व उत्साहपूर्वक मनाया। संध्याकाल में भजन-कीर्तन युग-गायन का महिला मंडल ने शुभारंभ किया। शुद्ध हृदय से मुक्त कंठ से जय बोलो श्रीराम की, मन-मंदिर में भी दीप जला लो, नाम ले श्रीराम की... साधक-शिष्यों ने गाया। इस अवसर पर आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधि व साधक-शिष्य भाई-बहन शरीक हो बहुत ही भाव-विभोर होकर राममय, यज्ञमय और आनन्दमय बनाते हुए जोश में जयघोष कर वातावरण गुंजायमान किया। कुछ इकाइयों ने इसे और अधिक रूचिकर और प्रभु रूप श्रीरामलला और गुरुरूप श्रीराम आचार्य के जीवन वृतांत, आदर्शमय जीवन पर पाठ-संवाद, गायन वादन आज से पूर्णमासी तक जारी रखने का निर्णय लिया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
भगवान किसी जाति वर्ग के नहीं होते: लाल नवलश्रीराम ने सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया : अजयआदिवासी धर्मगुरु महादेव उरांव की अगुवाई में जनजातीय कल्याणयज्ञानुष्ठान में गांव के सभी परिवार के लोग हुए शामिलरावण के साथ हुए युद्ध में आदिवासियों ने भगवान श्रीराम का साथ दिया थाग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गांव के मडई (देवी मंडप) की सफाई कीटीम एबीएन, लोहरदगा। भारत के जन-जन के स्वांस -स्वांस में श्रीराम बसे हैं। इसलिए वह भारत के आत्मा है। उक्त बातें गुरुकुल शांति आश्रम लोहरदगा के आचार्य- सह- आर्य वीरदल के प्रदेश प्रमुख और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रित आचार्य शरच्चंद्र आर्य ने कही। वह लोहरदगा जिले के पेशरार प्रखंड अंतर्गत वन-पहाडियों से अच्छादित ओनेगड़ा गांव के मडई (देवी मंडप) परिसर में आयोजित मंडप परिसर सफाई अभियान और महर्षि दयानंद सरस्वती के दो सौवीं जयंती समारोह और 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला के होने वाले प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के पावन अवसर पर आयोजित विशेष जनजातीय कल्याण हवन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि कुछ लोग सनातन समाज को बांटने के लिए श्रीराम के सबसे प्रिय रहे जनजातीय समाज को भ्रम में डालने का काम करते हैं। जनजातीय समाज के लोग अब शिक्षित, जागृत और संगठित हैं। अपने धार्मिक, सामाजिक और पारंपरिक हक और अधिकार को जान रहे हैं। सनातन धर्मावलंबी प्रकृति पूजक है। धरती माता, गौ माता, पेड़- पर्वत, नदी-नाले,जीव- जन्तु सभी चीजों की पूजा अर्चना की जाती है। सरना समाज के लोग भी प्रकृति पूजक हैं वह भी सनातन के पंथ हैं।विशिष्ट अतिथि लाल नवल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि वैसे तो श्रीराम के काल में कोई ऊंचा या नीचा नहीं होता था। भगवान किसी जातिवर्ग के नहीं होते और न ही वह मनुष्य जाति में भेद करते हैं। रामायण काल में जातिगत जो भिन्नता थी। वह मनुष्यों के रंग, रूप और आकार को लेकर थी। जैसे वानर, ऋक्ष, रक्ष और किरात जातियां मनुष्य से भिन्न थी। केवट, शबरी, जटायु, सुग्रीव और संपाति आदि से राम के संबंध दर्शाते हैं कि उस काल में ऐसी कोई जातिगत भावना नहीं थी, जो वर्तमान में हमें देखने को मिलती है। हनुमानजी के गुरु मतंग ऋषि आज की जातिगत व्यवस्था अनुसार तो वह ही कहलायेंगे?विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बिहार-झारखंड क्षेत्र सेवा प्रमुख अजय कुमार ने कहा कि भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष वन में रहकर भारत भर में भ्रमण कर भारतीय आदिवासी, जनजाति, पहाड़ी और समुद्री लोगों के बीच सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया। यही कारण रहा की श्रीराम का जब रावण से युद्ध हुआ तो सभी तरह की वनवासी और आदिवासी जातियों ने श्रीराम का साथ दिया। इसके पूर्व महादेव उरांव आर्य की अगुवाई में जनजातीय कल्याण यज्ञानुष्ठान किया गया। इसमें गांव के सभी आदिवासी स्त्री-पुरुष और बच्चे शामिल हुए सभी लोगों ने संविदा समर्पित किया।इस मौके पर गांव के पहान बरतिया नगेसिया ने कहा कि यज्ञ गांव और ग्रामीणों के कल्याण के लिए किया जाता है। ग्राम देवता को संतुष्ट किया जाता है। शांति, प्रेम और विकास के साथ व्यक्ति और गांव के नकारात्मक ऊर्जा को बाहर कर सकारात्मक ऊर्जा को भरने का काम करता है।इसके पहले गांव के मडई (देवी मंदिर) का ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सामूहिक रूप से साफ सफाई किया। 22 जनवरी के शाम को सभी ग्रामवासियों ने मंडप में दीप प्रज्वलित करने के बाद अपने-अपने घरों में दीप जलाने की बात कही। गांव का अद्भुत माहौल था।
22 जनवरी को रामोत्सव व दीपोत्सव उल्लास पूर्वक मनाया जायेगाटीम एबीएन, रांची। श्री राम जन्मभूमि अयोध्या धाम में निर्मित दिव्य एवं भव्य श्रीराम मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा की पावन तिथि 22 जनवरी 2024 को होने वाले ऐतिहासिक दिन को रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन अत्यंत उत्साह पूर्वक एवं भव्य रूप से मनायेगा। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि 22 जनवरी को मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा संचालित पुरुलिया रोड स्थित स्वर्णभूमि अन्नपूर्णा सेवा केंद्र एवं पहाड़ी रोड स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर अन्नपूर्णा सेवा केंद्र में श्री राम उत्सव एवं दीपोत्सव उल्लास पूर्वक मनाया जायेगा। श्री रामचंद्र जी की पूजा-अर्चना, प्रसाद भोग एवं श्री राम का भगवा ध्वज फहराया जायेगा, इस दिन दोनों अन्नपूर्णा सेवा में भोजन प्रसाद निःशुल्क रहेगा। तथा मिठाइयां, फल बांटी जाएगी, दीपक जलाकर दीपोत्सव एवं पूरे वातावरण को राममय बनाया जायेगा। उन्होंने अपील की है कि 22 जनवरी को अयोध्या में पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का भव्य मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के दिन सभी मंदिरों में पूजा-पाठ, भजन- कीर्तन, महा आरती, श्रृंगार एवं प्रसाद वितरण एवं शाम को अपने-अपने घरों मे दीपक जलाकर एवं श्री राम का भगवा झंडा फहराकर राम उत्सव उल्लास के साथ मनायें।रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा 22 जनवरी को आकर्षक एवं भव्य बनाने हेतु आज जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा अपर बाजार रांची के तीन स्थानों पर पांच सौ श्री राम प्रभु के भगवा ध्वज का वितरण राम भक्तों के बीच किया गया।
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