टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति रांची के तत्वाधान में 17 मार्च 2024 दिन रविवार को रांची नगर में राजस्थान के खाटू श्रीश्याम जी की परंपरा अनुसार ही श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा का आयोजन होने जा रहा है। ध्वजा पदयात्रा की तैयारीयां जोर-शोर प्रारंभ किया गया। समिति के सदस्यों ने श्री गणेश जी के मंत्रोचार के साथ श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा के पोस्टर का विमोचन किया गया। मौके पर हरिशंकर परशुरामपुरिया, ललित कुमार पोद्दार, गोपाल मुरारका, अशोक लाडिया, रवि चौधरी, संजय परशुरामपुरिया, आनंद चौधरी, प्रदीप अग्रवाल, प्रमोद परसरामपुरिया, नवीन डोकानियां, राजेश ढांढनिया उपस्थित थे। श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा रांची के नेवरी (विकास विद्यालय) से शुरू हो कर श्री खाटू श्री श्याम मंदिर हरमु रोड़ में ध्वजा समर्पण के साथ समाप्त होगी।ज्ञात हो कि खाटू धाम में यह परंपरा है की श्याम भक्त बाबा श्याम की ध्वजा निशान यात्रा 17 किमी की पदयात्रा कर बाबा श्री श्याम को समर्पित करते है। मान्यता है कि जो भी भक्त श्री श्याम प्रभु की निशान को अपनी मन की बात कहता है और उसे सच्चे विश्वास से श्री श्याम प्रभु को अर्पित करता है तो बाबा उन भक्तों की सारी मुरादें पूरी करते हैं।इसी परम्परा के अनुसार रांची मे 2 वर्षों से श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति द्वारा यह आयोजन हो रहा है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च को श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा के निशान कार्ड हेतु श्याम प्रेमी मोबाइल-95340 33233, 94300 55620, 82355 75481, 82100 91921, से अति शीघ्र संपर्क कर अपना नाम लिखवा कर ध्वजा निशान कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। उक्त जानकारी श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। श्याम परिवार की ओर से शहर में श्याम निशान अमृत महोत्सव-2024 शोभायात्रा शनिवार को निकाली गई। इसमें श्याम प्रभु और हनुमान जी का निशान धारण कर 301 भक्त शोभायात्रा में शामिल हुए। मुख्य आकर्षण रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित रथ पर विराजमान प्रभु श्याम रहे। राधा-कृष्ण, राम-लखन-जानकी और हनुमान जी की जीवंत झांकी शोभायात्रा में शामिल थी। शोभायात्रा में हारे का सहारा श्री श्याम बाबा हमारा..., समेत श्याम प्रभु के जयकारों लगे। शोभायात्रा श्याम हवेली, दुर्गा बाड़ी मेन रोड समेत सभी प्रमुख मार्गों से गुजरी। जगह-जगह इसका स्वागत हुआ। इससे पूर्व श्रवण जालान के नेतृत्व में निशान व सभी देवी-देवताओं का पूजन हुआ। शोभायात्रा का संचालन राहुल अग्रवाल, प्रकाश दालानिया, अमित चौधरी, राजेश अग्रवाल, विमल झुनझुनवाला, सुनील साबू, गोपाल चांगल, जयदीप राज, पवन लोहिया व मोनू शर्मा ने किया।
श्री शिव बारात आयोजन केंद्रीय महासमिति पहाड़ी मंदिर (मुख्य द्वार) द्वारा महा शिवरात्रि के उपलक्ष्य में 5 मार्च को हल्दी, मेहंदी और महाआरती का कार्यक्रमटीम एबीएन, रांची। महा शिवरात्रि को लेकर श्री शिव बारात आयोजन केंद्रीय महासमिति पहाड़ी मंदिर (मुख्य द्वार) द्वारा 5 मार्च, मंगलवार को पहाड़ी मंदिर स्थित महाकाल मंदिर में सुबह 11 बजे से हल्दी, मेंहदी एवं बाबा भोले का भव्य श्रृंगार का आयोजन किया गया है। इस मौके पर महा आरती भी होगी जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल होंगे। शिव बारात के संस्थापक नंद किशोर चंदेल ने बताया कि श्री शिव बारात आयोजन केंद्रीय महासमिति पहाड़ी मंदिर (मुख्य द्वार) द्वारा महा शिवरात्रि के आयोजन की तैयारीयां अंतिम चरण में हैं और इसको लेकर मुख्य आयोजक राजू काठपाल द्वारा रोजाना बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है साथ ही रांची के सभी गणमान्यों को शिव बारात में शामिल होने के लिए न्योता भी भेजा जा रहा है। इसी क्रम में श्री शिव बारात आयोजन केंद्रीय महासमिति पहाड़ी मंदिर (मुख्य द्वार) के सदस्य आज नंद किशोर चंदेल के नेतृत्व में रांची के एसडीओ उत्कर्ष कुमार के कार्यालय जाकर उनसे मिले और उनको 8 मार्च को पहाड़ी मंदिर, रांची के मुख्य द्वार से निकलने वाली भव्य शिव बारात में शामिल होने का न्योता दिया। महासमिति के महासचिव जीतू अरोड़ा ने उन्हें माता की चुन्नी ओढ़ाकर सम्मानित किया और अध्यक्ष गुलशन मिढ़ा ने निमंत्रण पत्र सौंपा। निमंत्रण देने वालों में नंद किशोर चंदेल, गुलशन मिढ़ा, जीतू अरोड़ा, राजू काठपाल, नरेश मक्कड़, विनय सिंह एवं अजीत सिंह शामिल थे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा (8709349310) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा संचालित पहाड़ी मंदिर रोड में स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर अन्नपूर्णा सेवा में 200 लोगों ने भोजन प्रसाद प्राप्त किया। आज की अन्नपूर्णा सेवा स्वर्गीय अवनिका कुमारी की पुण्य स्मृति में उनके पिता अवधेश सिन्हा एवं माता जी मीरा सिन्हा द्वारा प्रायोजित थी। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा संचालित पुरुलिया रोड स्थित स्वर्ण भूमि अन्नपूर्णा सेवा मे 198 लाभुकों ने भोजन प्राप्त किया। मौके पर रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार ने कहा की माता अन्नपूर्णा लोगों को इसी प्रकार सेवा करने की प्रेरणा प्रदान करें और प्रभु की कृपा सदैव इनके परिवार पर बनी रहे। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अन्नपूर्णा सेवा निरंतर चलती रहेगी। इस अवसर पर- प्रमोद अग्रवाल, सुरेश चंद्र अग्रवाल, पुरुषोत्तम विजयवर्गीय, प्रदीप नारसरिया, ललित कुमार पोद्दार, मनोज रूईया, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, सांवरमल बुधिया, रमेश बंका, संजय सर्राफ, सहित अन्य लोग उपस्थित थे। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया है कि दोनों अन्नपूर्णा सेवा स्व सत्यनारायण नारसरिया एवं स्व शारदा देवी नारसरिया की स्मृति में रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के द्वारा संचालित है। उक्त जानकारी रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
बाल मृत्यु दर कम करने के लिए जन्म दोष पर ध्यान देने की आवश्यकता एबीएन सेंट्रल डेस्क। नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने शुक्रवार को कहा कि बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए जन्म दोषों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ पॉल ने आज यहां राष्ट्रीय जन्म दोष जागरूकता माह 2024 का शुभारंभ करते हुए कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बाल स्वास्थ्य की गारंटी है। कार्यक्रम के तहत 16 करोड़ बच्चों की जांच की गयी है और यह बाल स्वास्थ्य की गारंटी है। उन्होंने मलेरिया, निमोनिया और अन्य बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना में जन्म दोषों की मृत्यु का अनुपात कम होने का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकार की प्राथमिकता बच्चों के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त करना है और यह राष्ट्रीय जन्म दोष जागरूकता माह 2024 अभियान इस उद्देश्य के लिए जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि जन्म दोषों की समस्या के निवारण के लिए अधिक तीव्रता और अधिक व्यापकता की आवश्यकता है। डॉ पॉल ने छात्रों से बाल स्वास्थ्य को समर्थन और मजबूत करने के लिए पीजी में पेडियाट्रिक्स चुनने का भी आग्रह किया क्योंकि बच्चे जन्म के समय पाए जाने वाले दोषों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार भी जन्म दोष के मुद्दों को जानकर अलग-थलग महसूस करता है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था से पहले की देखभाल एक महिला के लिए महत्वपूर्ण है, पोषण संबंधी स्थिति, बीएमआई, थायराइड और यूटीआई आदि का भी ध्यान रखा जाना चाहिए क्योंकि इससे स्वस्थ बच्चे के जन्म में मदद मिलेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने जन्म दोषों विशेषकर क्लब फुट, श्रवण दोष, रेटिना दोष, कटे होंठ आदि की शीघ्र पहचान पर जोर दिया, क्योंकि ये बच्चे के भविष्य को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि एक महीने तक चलने वाला यह जागरूकता अभियान बाल जन्म दोष के मुद्दे से निपटने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि एबीएचए के माध्यम से बाल जन्म दोषों की रजिस्ट्री रखना इलाज किए गए या इलाज न किए गए बच्चों का रिकॉर्ड रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और पहचान और उपचार के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। राष्ट्रीय जन्म दोष जागरूकता माह सभी जन्म दोषों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बच्चों की देखभाल और उपचार में सुधार करने का एक अभियान है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत महीने भर की गतिविधियों की योजना बनायी गयी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत के बाद से देश में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी देखी गयी है। नमूना पंजीकरण प्रणाली 2020 रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में नवजात मृत्यु दर 20 प्रति 1000 जीवित जन्म है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर 28 प्रति 1000 जीवित जन्म है और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 32 प्रति 1000 जीवित जन्म है। जन्म दोष प्रसवकालीन, नवजात और पांच साल से कम उम्र की रुग्णता और मृत्यु दर में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
टीम एबीएन, रांची। महाराजा अग्रसेन भवन में कवि सम्मेलन आयोजन समिति की एक बैठक समिति के अध्यक्ष अशोक नारसरिया की अध्यक्षता में हुई। बैठक मे अशोक नारसरिया ने होली के अवसर पर 23 मार्च को कवि सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा मारवाड़ी भवन मे आयोजित हास्य व्यंग कवि सम्मेलन के संदर्भ में विगत बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम संयोजक सुरेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि कवि सम्मेलन में इस वर्ष देश के कई नामी गिरामी सुप्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा दिल्ली, अनिल अग्रवंशी, साक्षी तिवारी लखनऊ, राजेश अग्रवाल, दीपक सैनी, ज्ञानी बैरागी, सहित अन्य कई हास्य कवि भाग लेंगे। जो कि अपने हास्य व्यंग कविताओं से लोगों को खूब हंसते हुए होलियाना अंदाज में भरपूर मनोरंजन करेंगे। कवि सम्मेलन में 3000 लोगों की बैठने की व्यवस्था की गई है तथा महिलाओं के लिए भी विशेष बैठने की व्यवस्था की गयी है। दर्शकों के लिए एलईडी भी मैदान में लगाये जायेंगे। बैठक में हास्य व्यंग कवि सम्मेलन को सफल बनाने हेतु जोर- शोर से तैयारीयां प्रारंभ किया गया तथा 12 विशेष सहयोगी सदस्यों को विभिन्न विभागो की जिम्मेवारियां दी गई। बैठक का संचालन एवं धन्यवाद- ज्ञापन सचिव अनिल कुमार अग्रवाल ने दी। तथा कहा की समिति की अगली बैठक 7 मार्च को रखा गया है। उक्त जानकारी देते हुए समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि बैठक में-ललित कुमार पोद्दार, विनोद कुमार जैन, सुरेश चंद्र अग्रवाल, पवन शर्मा, पवन पोद्दार, अनिल अग्रवाल, मनोज बजाज, रतन मोर, मनोज चौधरी, संजय सर्राफ, कौशल राजगढ़िया, निर्भय शंकर हारित, अमित चौधरी, विकास अग्रवाल, मनीष लोधा, सनी टिबडेवाल, अमित बजाज आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी कवि सम्मेलन आयोजन समिति के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। विहिप की तीन दिवसीय केंद्रीय प्रबंध समिति व प्रन्यासी मंडल की बैठक में झारखंड प्रांत के दायित्व में परिवर्तन किया गया। झारखंड में प्रांत अध्यक्ष और प्रांत मंत्री की जिम्मेदारी नए लोगों को दी गयी।झारखंड प्रांत के मंत्री डा. बीरेंद्र साहू को झारखंड व बिहार के सह क्षेत्र मंत्री का दायित्व दिया गया। वहीं झारखंड प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र को झारखंड प्रांत मंत्री व प्रांत उपाध्यक्ष चंद्रकांत रायपत को झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।उल्लेखनीय है कि विश्व हिंदू परिषद में प्रत्येक तीन वर्षों पर चुनाव होता है। नए सभी दायित्वों को संगठन के लोगो ने शुभकामना संदेश दिया है। मौके पर प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, मनोज पोद्दार, प्रांत सह मंत्री रंगनाथ महतो, मातृ शक्ति प्रमुख दीपा रानी कुंज, दुर्गा वाहिनी प्रांत संयोजिका अनुराधा कश्यप, रांची महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, विभाग मंत्री किशुन कुमार झा, विभाग प्रचार प्रसार अमर प्रसाद, मंत्री चंद्रदीप दुबे एवं अन्य लोग शामिल रहे। उक्त जानकारी विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी, संवत् 2080) विश्व के इतिहास में एक स्वर्णिम तिथि बन गयी है। इस दिन 496 वर्षों के संघर्ष की गौरवमयी, सफल, सुखद परिणिति की अनुभूति सम्पूर्ण विश्व को हुई। रामलला के साथ उनकी मर्यादाओं व हिन्दू संस्कृति की भी पुनर्प्राणप्रतिष्ठा हुई। इस दिन यह सिद्ध हो गया कि राम ही राष्ट्र हैं और राष्ट्र ही राम हैं।समस्त विघटनकारी व राष्ट्र विरोधी षड़यंत्र धूमिल हो गये। सम्पूर्ण विश्व भी इस दिन आह्लादित था क्योंकि उन्हें लगा कि एक नये भविष्य की रचना की जा रही है। हिन्दू समाज ने जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण के लिए विश्व का सबसे लम्बा संघर्ष किया। 76 बार हुए भीषण युद्धों में सम्पूर्ण देश के रामभक्तों ने सहभागिता की, इनके बिना यह पावन दिवस सम्भव नहीं था। इन संघर्षों में बलिदान हुए लाखों बलिदानियों को प्रन्यासी मण्डल नमन् करता है।पूज्य सन्तों और महापुरुषों के संकल्प, दूरदृष्टि और बलिदानों के बिना यह गौरवशाली पल नहीं आ सकता था। उन सभी ज्ञात-अज्ञात संतों-महापुरुषों को वंदन है। पूज्य शिवरामाचार्य जी महाराज, महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज, महंत रामचन्द्र परमहंस दास जी महाराज, महंत अभिराम दास जी महाराज, महंत अवेद्यनाथ जी महाराज, पूज्य वामदेव जी महाराज, महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज, पूज्य देवरहा बाबा, पेजावर स्वामी विश्वेशतीर्थ जी महाराज, श्रद्धेय हनुमान प्रसाद पोद्दार, मोरोपंत पिंगले, अशोक सिंहल, युग पुरुष परमानन्द गिरि जी महाराज, दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा आदि स्वनाम धन्य संतों-महापुरुषों का हिन्दू समाज सदैव आभारी रहेगा।पूज्य संतों के आशीर्वाद से विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में 1984 से प्रारम्भ हुआ श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन विश्व का सबसे बड़ा आन्दोलन बन गया। आन्दोलन के विभिन्न चरणों में करोड़ों रामभक्तों की सक्रिय भूमिका और सम्पूर्ण देश की सहभागिता से यह एक हिन्दू पुनरुत्थान का महाअभियान बन गया। सैकड़ों कारसेवकों के बलिदान ने मंदिर निर्माण के लिए दृढ़ राष्ट्रीय संकल्प को प्रखर रूप से प्रकट किया। यह विश्व का सबसे लम्बा न्यायिक संघर्ष भी था जो 134 वर्षों तक निरन्तर चला। न्यायिक संघर्ष में विजय प्राप्त कर हिन्दू समाज ने इस अद्भुत रूप में संकल्प को साकार कराया। यह विश्व का एक विलक्षण घटनाक्रम रहा। भारत के वरिष्ठतम न्यायविद् के पाराशरन और वैद्यनाथन के कुशल नेतृत्व में समर्पित अधिवक्ताओं का सतत् परिश्रम व योगदान अविस्मरणीय रहेगा। स्वतन्त्रता के 77 वर्षों के पश्चात् इस संघर्ष की ऐसी गौरवशाली परिणिति के लिए वर्तमान भारत सरकार व वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार की कुशलता और समर्पण भी अभिनन्दनीय है।22 जनवरी 2024 के पश्चात् एक नए युग का आरंभ हो गया है। अब राम मंदिर से रामराज्य की यात्रा आरम्भ हो गयी है। यह एक सभ्यता का संघर्ष है जिसमें हिन्दू सभ्यता के सांस्कृतिक जीवन मूल्य स्थापित हो रहे हैं। इस नये युग के निर्माण का उत्तरदायित्व हिन्दू समाज को स्वीकार करना होगा और स्वयं को उसके लिए तैयार करना होगा।वर्तमान कालखण्ड भारत के लिए गौरवशाली तथा सकारात्मक परिवर्तन का कालखण्ड है। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है, क्योंकि उन्हें लगता है कि समस्त वैश्विक समस्याओं का समाधान हिन्दू संस्कृति और जीवन मूल्यों से ही मिल सकता है। आने वाला समय भारत का समय है। श्रीराम मन्दिर इस परिवर्तन का आधार बन रहा है। श्रीराम मन्दिर अनन्तकाल तक सम्पूर्ण मानवता को प्रेरणा का संदेश देता रहेगा।विश्व हिन्दू परिषद का केन्द्रीय प्रन्यासी मण्डल हिन्दू समाज से आह्वान करता है कि वह अनुशासित, संस्कारित, मर्यादित, कर्तव्यनिष्ठ और धर्माधारित जीवन जीने वाला समाज निर्माण करे। समरस, समृद्ध, सशक्त, सुरक्षित व संगठित समाज निर्माण में सभी अपनी सक्रिय भूमिका निभायें। महिलाओं की गरिमा और सहभागिता सुनिश्चित करने वाला, पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण करने वाला, समस्त विघटनकारी राष्ट्र विरोधी शक्तियों को पराजित करने वाला, सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करने वाला समाज निर्माण रामजी की कृपा से हम सभी कर सकेंगे, ऐसा हमारा दृढ़ विश्वास है।केन्द्रीय प्रन्यासी मण्डल आह्वान करता है कि रामलला की प्राणप्रतिष्ठा के बाद अब प्रत्येक हिन्दू अपने जीवन में रामलला के आदर्शों की प्राणप्रतिष्ठा करें। अपने जीवन को उनकी मर्यादाओं का दर्पण बनाना है, तभी हम इस महान कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बना पायेंगे।प्रस्तावक : कामेश्वर चौपाल, पटनाअनुमोदन : प्रज्ञा महाला, कटकप्रस्ताव क्र0 - 03राष्ट्रहित में मतदान करें - मतदान शत् प्रतिशत होभारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। प्रत्येक 5 वर्षों के पश्चात् राष्ट्रीय निर्वाचन का महापर्व आता है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के संचालन हेतु मतदान अत्यन्त आवश्यक है। यह हमारा राष्ट्रधर्म भी है। निर्वाचन की तिथियों की घोषणा कभी भी हो सकती है।विश्व हिन्दू परिषद का प्रन्यासी मण्डल हिन्दू समाज से आह्वान करता है कि अपने निजी स्वार्थ, जातिगत अभिनिवेश, भाषावाद, सम्प्रदायवाद व क्षेत्रवाद आदि भेदभावों को छोड़कर राष्ट्रहित में मतदान अवश्य करें। यह निर्वाचन भारत के भविष्य को निर्धारित करने वाला है। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, समृद्ध और शक्तिशाली भारत सौंपना हम सबका सामूहिक दायित्व है। इस कार्य के लिए ऐसी सरकार का निर्वाचन आवश्यक है जो भारतीय संस्कृति व जीवन मूल्यों का सम्मान तथा उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हो।विश्व हिन्दू परिषद का प्रन्यासी मण्डल हिन्दू समाज से आह्वान करता है कि मतदान को राष्ट्रीय कर्तव्य मानते हुए स्वयं सपरिवार मतदान करें। राष्ट्रहित के लिए नोटा का प्रयोग न करें। यह सुनिश्चित करें कि अपने सभी योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में अवश्य हों तथा मोहल्ले/गांव में सौ प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करावें। मतदान के दिन पहले मतदान-फिर कुछ और काम का संकल्प समाज को दिलाना होगा। प्रस्तावक : जीवेश्वर मिश्रा, दरभंगाअनुमोदन : स्नेहलता पवार, अजमेर
आठ मार्च को मनाया जायेगा शिव उपासना का पर्वश्रवण एवं धनिष्ठा नक्षत्र में मनेगा शिवरात्रि : अनिल मिश्राटीम एबीएन, कोडरमा। शिव उपासना का पर्व महाशिवरात्रि प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। भगवान शिव के परिवार का प्रकृति से विशेष लगाव और संबंध माना जाता है। उक्त बातें मां तारा ज्योतिष संस्थान के आचार्य अनिल मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का वास पर्वत और जंगलों में माना गया है, जो हमें प्रकृति के साथ जुड़ने का संदेश देता है।भगवान शिव का जंगलों और पहाड़ों से संबंध बताता है की प्रकृति हमारे लिए ही नहीं बल्कि देवताओं के लिए भी महत्वपूर्ण था। ऐसे में शिवरात्रि का पर्व हमें प्रकृति से जुड़कर उसकी रक्षा और संरक्षण का संदेश देता है। इससे भगवान शिव के परिवार का प्रकृति से विशेष प्रेम समझा जा सकता है। आचार्य अनिल मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव के गले में सांप होता है जो किसानों का मित्र समझा जाता है। यह फसलों में लगने वाले कीड़े-मकोड़े को नष्ट कर उसकी रक्षा करता है। जबकि भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा और जटा में गंगा समाहित है। यानी समस्त संसार को भगवान शिव से जल की प्राप्ति होती है। शिव द्वारा अपनी जटाओं में गंगा को बांधे रखना प्रकृति में जल संरक्षण के महत्व को दर्शाता है। दूसरी ओर भगवान शिव की सवारी बल है जो खेती-बारी के कामों में किसानों की मदद करते हैं। चूहा भगवान शिव के परिवार का हिस्सा है। यह सिद्धिदाता गणेश की सवारी है। भगवान कार्तिकेय की सवारी मोर है। मोर, चूहा और सांप प्रकृति के अभिन्न अंग हैं। अनिल मिश्रा ने कहा कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनायी जाने वाली महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 8 मार्च को मनाया जायेगा। शास्त्रों के अनुसार इस दिन शिव-पार्वती की व्रत, पूजा विशेष फलदायी होती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष शिवरात्रि पर श्रवण एवं धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शिव योग का निर्माण होने से इस दिन को और विशिष्ट बना रहा है।
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