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श्री श्याम ध्वजा निशान पदयात्रा 17 को
Published / 2024-03-12 22:11:05
श्री श्याम ध्वजा निशान पदयात्रा 17 को

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति रांची के तत्वाधान में 17 मार्च 2024 दिन रविवार को नेवरी विकास विद्यालय के समीप श्री दुर्गा मंदिर से सुबह 8 बजे बाबा श्री श्याम का ध्वजा पदयात्रा शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गो बूटी मोड़, बरियातू रोड, कचहरी रोड, अप्पर बाजार का भ्रमण करते हुए श्री श्याम मंदिर हरमू रोड रांची में श्री श्याम का ध्वजा निशान समर्पण के साथ समाप्त होगी। इस यात्रा की दूरी भी खाटू धाम की परंपरा अनुसार 17 किलोमीटर रिंग्स से खाटू धाम की है। समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि यूं तो इस पावन माह में कई ध्वजा पदयात्राएं होती है। पर इस यात्रा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो भी भक्त श्री श्याम प्रभु की निशान को अपनी मन की बात कहता है और उसे सच्चे विश्वास से श्री श्याम प्रभु को अर्पित करता है तो बाबा उन भक्तों की सारी मुरादें पूरी करते हैं।इसी परम्परा के अनुसार रांची मे 2 वर्षों से श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति द्वारा यह आयोजन हो रहा है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च को श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा के निशान कार्ड हेतु श्याम प्रेमी मोबाइल-95340 33233, 94300 55620, 82355 75481, 8210 091921 से अति शीघ्र संपर्क कर अपना नाम लिखवा कर ध्वजा निशान कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु हरिशंकर परशुरामपुरिया, ललित कुमार पोद्दार, गोपाल मुरारका, अशोक लाडिया, रवि चौधरी, संजय परशुरामपुरिया, आनंद चौधरी, प्रदीप अग्रवाल, प्रमोद परशुरामपुरिया, नवीन डोकानियां, राजेश ढांढनिया, संजय सर्राफ सहित अन्य श्याम भक्त जोर- शोर से तैयारियां मे लगे हुए हैं। उक्त जानकारी श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

समूह से जुड़कर पलामू की महिलाओं ने खड़ा किया स्वरोजगार, बन रही आत्मनिर्भर
Published / 2024-03-12 22:03:23
समूह से जुड़कर पलामू की महिलाओं ने खड़ा किया स्वरोजगार, बन रही आत्मनिर्भर

सक्सेस स्टोरी  कभी पति के आय पर थी निर्भर, अब कहला रहीं लखपति दीदी समूह से लोन लेकर रोजगार गढ़ रही महिलाएं एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद/ मेदिनीनगर, (पलामू)। कभी घर की देहरी के अंदर रह रही महिलाएं आज स्वावलंबन की राह पर चल पड़ी हैं। महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं न केवल स्वरोजगार से जुड़ रही हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास जगा है। भीड़ के बीच अपनी बातों को रखने में वे काबिल हुई हैं। समूह से जुड़ी महिलाएं खुद तो आत्मनिर्भर हो रहीं हैं, दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनीं हैं। दूसरे महिलाओं को भी समूह से जोड़कर स्वरोजगार के लिए प्रेषित कर रही हैं। मेहनत और लगन के बदौलत महिलाएं पुरुषों के साथ कंधा-से-कंधा मिलाकर चल रही हैं। चंद पैसों के लिए अपने पति व परिवार पर निर्भर महिलाएं आर्थिक रूप से संपन्नता की ओर अग्रसर हैं। लाख रुपए ज्यादा तक की वार्षिक आय कर रहीं हैं। समूह से लोन लेकर स्वरोजगार का अलग-अलग व्यवस्थाएं करने में जुटी हैं। पशुपालन से लेकर कृषि कार्य में इनकी भागीदारी बढ़ी है। कई महिलाएं सिलाई केंद्र खोलकर कपड़ों की सिलाई कर न केवल अपनी, बल्कि पूरे परिवार का जीविकोपार्जन कर रहीं हैं, तो कई महिलाएं आटा चक्की चलाकर, बंबुक्राफ्ट का निर्माण कार्य से जुड़कर एवं अन्य आकर्षक एवं सजावटी सामग्री का निर्माण कर आर्थिक आमदनी करने में जुटी हैं। कई महिलाएं तो होटल व किराना दुकान का संचालन कर थोड़े-थोड़े बचत का सहारा लेकर घर-परिवार के लोगों को आर्थिक मदद कर रहीं हैं। इससे उनका घर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। 1600 से अधिक गांवों में 18 हजार से अधिक सखी मंडल झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की डीपीएम शांति मार्डी ने बताया कि पलामू जिले में जेएसएलपीएस द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम के तहत 1657 गांवों में 18,470 सखी मंडल, 1310 ग्राम संगठन एवं 60 संकूल संगठन का गठन किया गया है,  जिससे 2 लाख 12 हजार 350 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। 17,905 सखी मंडल सहित ग्राम संगठन एवं संकुल संगठन को चक्रीय निधि के रूप में 27.26 करोड़, सामुदायिक निवेश निधि के रूप में 92.89 करोड़ तथा स्थापना निधि के रूप में 4.47 करोड़ का अनुदान दिया गया है। 259.47 करोड़ का क्रेडिट लिंकेज किया गया है।आजीविका संवर्धन हेतु 16,659 सखी मंडल को प्रथम बैंक ऋण के रूप में 166.5 करोड़ की राशि प्रदान की गई है। साथ ही अतिरिक्त ऋण के रूप में 12 हजार 19 सखी मंगल को 324.3 करोड़ की राशि प्रदान की गई है, जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी आजीविका को सशक्त एवं समृद्ध बना रहीं हैं। श्रृंगार दुकान और उरउ से 40 हजार तक आमदनी कर रहीं सूर्य कांति हुसैनाबाद प्रखंड की सूर्य कांति देवी श्रृंगार दुकान और उरउ से 12 से 15 हजार रुपए प्रति माह आमदनी करतीं हैं। लगन/शादी-विवाह के समय उनकी आमदनी 30 से 40 हजार रुपए तक हो जाती है। सूर्य कांति देवी शिवम सखी मंडल से जुड़ी हैं। इसके पूर्व वह पति के साथ गुजरात में रहती थी। सूर्य कांति देवी के पति वहीं पर काम करते थे। करोना काल में कुछ करने की सोच आया तब 2021 में उरउ खोल कर चलाने लगी, परंतु इससे संतोषजनक आमदनी नहीं होती थी। इसके बाद उन्होंने श्रृंगार दुकान खोलने के लिए समूह से 2022 में एक लाख 20 हजार रुपये लोन लेकर श्रृंगार का दुकान खोल दी। कांति ने बताया कि एक समय वह पति के आमदनी के भरोसे थी, लेकिन आज उनके साथ कदम- से- कदम मिलाकर चल रही हैं। रीता देवी सब्जी बेच 20 हजार रुपये तक कर रहीं कमाई हुसैनाबाद प्रखंड के दंगवार गांव की रीता देवी सब्जी बेचकर 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह आमदनी कर रहीं हैं। रीता वर्ष 2018 में पार्वती सखी मंडल से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के पूर्व वें गृहिणी थी। समूह से जुड़कर वह ऋण लेकर कृषि कार्य में जुट गई। खेत में बैगन, फूल गोभी तथा  लहसुन की खेती की है, जो अगले माह तक तैयार होगी। रीता ने बताया कि आफ सीजन में भी वह सब्जी का उत्पादन करती है। इससे अधिक मुनाफा होता है। पिछले सीजन में करीब एक लाख रुपए तक की बिक्री की थी। इससे 25 से 30 हजार रुपए का फायदा हुआ था। उन्होंने इस वर्ष की खूबसूरत खेती को देख अधिक-से-अधिक मुनाफा की उम्मीद की है। रीता ने बताया कि खेत में लगे फूल गोभी शादी/विवाह के सीजन में  तैयार होगा। इस समय 40 से 50 रुपए किलो तक की बिक्री होगी, जिससे अधिक मुनाफा होगा। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कृषि उत्पाद खेत से ही बिक जाती है। बाजार जाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि व्यापारी यहां आकर सब्जी ले जाते हैं।  कपड़ा दुकान से होती लाख रुपये की आमदनी दंगवार गांव की ही शोभा देवी क्षेत्र में अपनी बदौलत पहचान बनायी है। वर्ष 2018 में जब पलाश के द्वारा समूह का निर्माण हो रहा था तब वह विश्वकर्मा समूह से जुड़ी। समूह से जुड़ने के बाद उसे कुछ करने का ख्याल आया। अपने पैरों पर खड़ा होने की चाहत रखते हुए शोभा ने 20 हजार रुपये लोन लिया और अपने घर में कपड़े का दुकान खोल ली। दुकान में आमदनी बढ़ी तो इसे विस्तारित करने के लिए समूह से 2020 में 1 लाख रुपये एवं बैंक से भी ऋण लेकर अपनी दुकान का विस्तारित किया। 2022 में समूह से 1.5 लाख रुपए लेकर दुकान को और विस्तारित किया। आज वह प्रति माह एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर रहीं हैं। इस कार्य में उनके पति का भी भरपूर सहयोग रहता है। दोनों मिलकर दुकान का संचालन करते हैं।? इनके दो बच्चे हैं, जो स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

विहिप ने की प्रतिमा तोड़ने की घोर निंदा
Published / 2024-03-11 21:22:32
विहिप ने की प्रतिमा तोड़ने की घोर निंदा

टीम एबीएन, रांची। बुढ़मू प्रखंड के उमेडंडा गांव में बीती रात असामाजिक तत्वों द्वारा प्राचीन शिव मंदिर, बजरंगबली  मंदिर और देवी मंडप की मूर्तियों को खंडित किया गया। इस घटना का विश्व हिंदू परिषद घोर निंदा करता है। साथ ही प्रशासन से यह मांग करती है कि इसमें शामिल सभी अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी हो तथा उन्हें कानून द्वारा कड़ी से कड़ी सजा मिले। विखंडित मूर्तियों की पुनर्प्रतिष्ठा विधि-विधान से हो तथा भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए मंदिरों की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। प्रांत मंत्री झारखंड मिथिलेश्वर मिश्र, ग्रामीण जिलाध्यक्ष रामेश्वर दयाल सिंह एवं जिला सामाजिक समरसता प्रमुख अजीत सिंह घटनास्थल पहुंचे एवं मंदिर के पुजारी एवं अन्य ग्रामीणों से मिलकर घटना की जानकारी ली। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, रांची के प्रांत प्रचार प्रसार सह प्रमुख प्रकाश रंजन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

दुनिया को एकजुट करने के लिए कैलाश सत्यार्थी ने छेड़ा एक नया वैश्विक आंदोलन
Published / 2024-03-11 19:42:36
दुनिया को एकजुट करने के लिए कैलाश सत्यार्थी ने छेड़ा एक नया वैश्विक आंदोलन

टूटते-बिखरते विश्व को करुणा की डोर से जोड़ने की कैलाश सत्यार्थी की एक नयी पहलनोबेल पुरस्कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कम्पैशन का हुआ आगाजएबीएन सेंट्रल डेस्क। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने नई दिल्ली में आयोजित लॉरेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन कॉन्क्लेव में एक नयी वैश्विक पहल सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कम्पैशन (एसएमजीसी) का आगाज किया। नोबेल पुरस्कार विजेताओं और नेताओं, व्यवसायों, शिक्षाविदों, युवाओं और नागरिक समाज को साथ लेकर छेड़े गए करुणा के इस नये आंदोलन का उद्देश्य, टूटन और बिखराव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही दुनिया को एकजुट करके एक न्यायपूर्ण, समावेशी और पक्षपात रहित विश्व का निर्माण करना है।एसएमजीसी की शुरुआत ऐसे वक्त में हुई है जब दुनिया कई बड़ी वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है। इस अवसर पर बोलते हुए, एसएमजीसी के संस्थापक श्री सत्यार्थी ने कहा कि पिछले कई दशकों से, मैं करुणा के वैश्वीकरण की जरूरत पर बात करता रहा हूँ। आज एसएमजीसी के साथ हमने उस दिशा में आगे एक और कदम बढ़ा दिया है। मैं आप सभी से आह्वान करता हूं कि आप अपने भीतर छुपी करुणा की उस चिंगारी को पहचानें और इस आंदोलन में शामिल हों। टूटन और बिखराव से त्रस्त हमारी इस दुनिया को करुणा ही एकजुट कर सकती है।उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि विश्व को आज करुणा के एक आंदोलन की आवश्यकता है, के उत्तर में श्री सत्यार्थी ने कहा- दुनिया आज जितनी समृद्ध और एक दूसरे से जितनी जुड़ी हुई है, उतनी पहले कभी नहीं रही। लेकिन इसके साथ ही बिखराव, युद्ध, गैर-बराबरी, नफरत, जलवायु संकट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित खतरों जैसी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके सबसे बड़े शिकार हमेशा बच्चे ही होते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) पटरी से उतर गए हैं। अभूतपूर्व धन, संसाधन और ज्ञान के बावजूद, ये समस्याएं क्यों बनी हुई हैं? संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं, विश्व की सरकारें और दुनिया के सबसे अमीर लोग, इसे एकजुट रखने में बुरी तरह असफल रहे हैं।श्री सत्यार्थी ने आगे कहा, एसएमजीसी, करुणामय संवाद और करुणापूर्ण कार्यों के माध्यम से वैश्विक शासन विधि में सुधार चाहता है। यह एक ऐसे लोकतांत्रिक, समावेशी और गतिशील संस्थानों के निर्माण में मदद करेगा जिसके शीर्ष नेतृत्व का दृष्टिकोण करुणामय हो। हमने एशिया और अफ्रीका में जमीनी स्तर पर बाल-मित्र समुदायों का सफलतापूर्वक निर्माण किया है। उस अनुभव का लाभ उठाते हुए एसएमजीसी ऐसे समुदायों का निर्माण करेगी जो समावेशिता, बराबरी और सामाजिक सुरक्षा हासिल करने में मददगार होंगे और इसमें युवाशक्ति केंद्रीय भूमिका में होगी।कैलाश सत्यार्थी ने एसएमजीसी का शुभारंभ लॉरिएट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन कॉन्क्लेव में नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं और दुनिया की अनेक जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति में किया। इनमें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता जोडी विलियम्स, मोनाको के पूर्व प्रधानमंत्री सर्ज टेल, पद्म विभूषण डॉ आर ए मशेलकर, भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग, रॉबर्ट एफ कैनेडी ह्यूमन राइट्स की प्रेसिडेंट केरी कैनेडी, ब्राजील की सुपीरियर लेबर कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश लेलियो बेंटेस कोर्रा, और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी सहित कई क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल थे।कैलाश सत्यार्थी ने सिविल सोसाइटी द्वारा छेड़े गए दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सफल आंदोलनों का नेतृत्व किया है जिनमें बाल श्रम के खिलाफ 103 देशों में 80,000 किमी लंबा अभूतपूर्व ग्लोबल मार्च और ग्लोबल कैंपेन फॉर एजुकेशन प्रमुख हैं। ग्लोबल मार्च के परिणामस्वरूप आईएलओ ने सबसे खतरनाक रूप के बालश्रम पर प्रतिबंध लगाने वाला कन्वेंशन पारित किया जो दुनियाभर में सबसे तेजी से लागू हुआ प्रस्ताव है। उसी प्रकार शिक्षा को एक मानव अधिकार का दर्जा दिलाने में ग्लोबल कैंपेन फॉर एजुकेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बाल श्रम मुक्त कालीनों के लिए पहली टिकाऊ वैश्विक पहल रगमार्क की स्थापना भी श्री सत्यार्थी की अन्य अभूतपूर्व पहलों में शामिल है। बच्चों की आजादी और शिक्षा के लिए दुनियाभर में किये गये उनके प्रयासों के लिए, 2014 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

श्री राणी सती दादी मंदिर में तीन दिवसीय होली रंगोत्सव 15 से
Published / 2024-03-09 22:25:27
श्री राणी सती दादी मंदिर में तीन दिवसीय होली रंगोत्सव 15 से

टीम एबीएन, रांची। श्री राणी सती मंदिर कमेटी के तत्वाधान में 15 -17 मार्च तक श्री राणी सती दादी मंदिर के प्रांगण में तीन दिवसीय होली रंगोत्सव महोत्सव 2024 का आयोजन किया गया है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सतीश तुलस्यान, मंत्री गजानंद अग्रवाल एवं महोत्सव के संयोजक प्रदीप नारसरिया ने संयुक्त रूप से बताया कि श्री राणी सती मंदिर रांची में प्रथम बार होली रंग उत्सव में श्री नारायणी नमो नम: का भजन उत्सव का भव्य आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को संध्या 4 बजे से श्री गणेश पूजन एवं श्री राणी सती दादी जी की संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। जिसके कथा वाचक श्री तेजस राणा होंगे। 16 मार्च को प्रात: 8  बजे श्री दादी जी का जलाभिषेक, 10 बजे से मेहंदी उत्सव कार्यक्रम कृष्ण यादव एवं मनोज शर्मा द्वारा होगा, पूर्वाह्न 11 बजे दादी जी का भव्य शोभा यात्रा निकाली जायेगी। संध्या 4 बजे ज्योत प्रज्वलित कार्यक्रम के पश्चात प्रसिद्ध भजन गायको मनोज शर्मा, हर्षिता डीडवानिया एवं पायल अग्रवाल द्वारा सुमधुर वाणी से भजन संकीर्तन करेंगे। तथा रात्रि 7 बजे चुनरी महोत्सव का आयोजन होगा। रात्रि 8 बजे महाआरती के साथ दूसरे दिन के कार्यक्रम का समापन होगा। 17 मार्च को प्रात: 7 बजे अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित किया जायेगा। प्रात: 8 बजे  सैकड़ो महिलाओं द्वारा राजस्थानी वेशभूषा चुनरी ओढ़ कर मंगला पाठ करेगी। अपराह्न- 2 बजे भजन कीर्तन का कार्यक्रम होगा। तथा शाम 5 बजे से प्रसिद्ध भजन गायक सौरभ मधुकर एवं केशव मधुकर द्वारा भजनों की हाउजी महोत्सव का विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। रात्रि 8 बजे फूलों की होली खेली जायेगी। रात्रि 9 बजे बनारस के आचार्यों द्वारा गंगा आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु भक्तों को विभिन्न विभागों की जिम्मेवारी एवं दायित्व दी गई। उन्होंने सभी भक्तों से आग्रह किया है कि समस्त कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर महोत्सव को सफल बनाएं एवं पुण्य के भागी बने। उक्त जानकारी श्री राणी सती दादी मंदिर कमेटी के महोत्सव संयोजक प्रदीप नारसरिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

अठारह की उम्र तक मुफ्त शिक्षा से 2030 तक हो सकता है बाल विवाह का खात्मा
Published / 2024-03-08 19:08:45
अठारह की उम्र तक मुफ्त शिक्षा से 2030 तक हो सकता है बाल विवाह का खात्मा

गैरसरकारी संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों से इसे चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने की अपील कीएबीएन सोशल डेस्क। अठारह वर्ष की उम्र तक सभी बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा 2030 तक देश से बाल विवाह के खात्मे में निर्णायक भूमिका निभा सकती है क्योंकि 18 वर्ष से पहले पढ़ाई छोड़ने और बाल विवाह में एक सीधा और स्पष्ट अंतरसंबंध है। उदाहरण के तौर पर 96 प्रतिशत महिला साक्षरता वाले केरल में बाल विवाह की दर सिर्फ छह प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत है। इसके उलट बिहार में जहां महिला साक्षरता की दर सिर्फ 61 प्रतिशत है, बाल विवाह की दर 41 प्रतिशत है। देश में बाल विवाह के खिलाफ जारी लड़ाई में परिवर्तनकारी साबित हो सकने वाला यह अहम निष्कर्ष देश में 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए अभियान चला रहे 160 गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन बाल विवाह मुक्त भारत अभियान (सीएमएफआई) द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  जारी एक शोधपत्र एजुकेट टू इंड चाइल्ड मैरिज : एक्सप्लोरिंग लिंकेजेज एंड रोल ऑफ एजुकेशन इन एलिवेटिंग चाइल्ड मैरिजेज में उजागर हुआ है। शोधपत्र के अनुसार, भारत बाल विवाह की बुराई के 2030 तक खात्मे की राह में टिपिंग प्वाइंट की तरफ बढ़ रहा है। टिपिंग प्वाइंट वह बिंदु है जहां से बाल विवाह अपने आप खत्म हो जाएगा। ऐसे में यदि 18 वर्ष की उम्र तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा एक वास्तविकता बन जाए तो बाल विवाह के अपराध को जड़मूल से समाप्त करने की इस लड़ाई को एक नई धार और दिशा मिल जायेगी। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की नीति एवं शोध निदेशक ज्योति माथुर ने कहा यद्यपि केंद्र व राज्य सरकारें, दोनों ही बाल विवाह के खात्मे के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और गंभीरता से काम कर रही हैं, फिर भी यदि मौजूदा शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव कर 18 वर्ष तक शिक्षा अनिवार्य और निशुल्क कर दी जाए तो यह बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में प्रयासों को नई गति दे सकता है।बताते चलें कि दुनिया के तमाम देश संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों यानी एसडीजी के तहत 2030 तक बाल विवाह और जबरन विवाह के खात्मे के लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान 2030 तक इस सामाजिक बुराई के खात्मे के लिए बाल विवाह की ऊंची दर वाले 300 से ज्यादा जिलों में इसके खिलाफ जमीनी अभियान चला रहे 160 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है। इस गठबंधन ने पिछले छह महीनों के दौरान ही देश में 50,000 से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं जबकि 10,000 से ज्यादा मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गयी है। अपने विशाल नेटवर्क और जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र के माध्यम से इसने पूरे देश में कुल बाल विवाहों के पांच प्रतिशत बाल विवाह रुकवाने में कामयाबी हासिल की है। शोधपत्र के निष्कर्षों को जारी करते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान ने कहा कि यद्यपि केंद्र व राज्य सरकार ने इस सामाजिक अपराध के खात्मे में प्रशंसनीय इच्छाशक्ति व गंभीरता दिखाई है, फिर भी बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई को धार देने के लिए कुछ और अहम कदम उठाने की दरकार है। शोधपत्र के निष्कर्षों से यह स्पष्ट है कि बाल विवाह के खात्मे के लिए 18 वर्ष तक अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा का कदम  परिवर्तनकारी साबित हो सकता है और इसलिए सभी राजनीतिक दलों से अपील है कि वे हमारी इस मांग को आगामी लोकसभा के अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करें।   शोधपत्र में भारत के विभिन्न हिस्सों से लिए गए आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर महिला साक्षरता दर और बाल विवाह की दर के अंतरसंबंधों को रेखांकित किया गया है। उदाहरण के तौर पर 93 प्रतिशत महिला साक्षरता वाले राज्य मिजोरम में बाल विवाह की दर सिर्फ आठ प्रतिशत है। मध्य प्रदेश जहां कि महिला साक्षरता दर 67.5 प्रतिशत है, वहां बाल विवाह की दर 23.1 प्रतिशत है जबकि 73.8 प्रतिशत महिला साक्षरता वाले हरियाणा में बाल विवाह की दर काफी कम 12.5 प्रतिशत है।शोधपत्र के अनुसार अध्ययन से यह स्पष्ट है कि शिक्षा तक पहुंच के विस्तार से लड़कियों के विवाह की उम्र आगे खिसकती है जिसके सकारात्मक नतीजे बेहतर आर्थिक-सामाजिक स्थिति और लैंगिक समानता के रूप में सामने आते हैं। यद्यपि, शोधपत्र में एकाध ऐसे दृष्टांतों का भी जिक्र है जहां महिला साक्षरता और बाल विवाह की दर के बीच जो अंतरसंबंध पूरे देश में दिखाई देते हैं, उससे उलट स्थिति है। मसलन पश्चिम बंगाल में महिला साक्षरता की दर 77 प्रतिशत है लेकिन इसके बावजूद वहां बाल विवाह की दर अत्यधिक रूप से ऊंची 42 प्रतिशत है। इसी तरह त्रिपुरा में महिला साक्षरता दर 82 फीसद होने के बावजूद बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत है। असम में साक्षरता दर 78.2 प्रतिशत है जबकि बाल विवाह की दर 31.8 प्रतिशत है।   शोधपत्र के अनुसार ये अपवाद इस बात का संकेत हैं कि महिला साक्षरता दर की भूमिका भले ही महत्वपूर्ण हो लेकिन कुछ क्षेत्रों में आर्थिक-सामाजिक कारक और सांस्कृतिक परंपराएं बाल विवाह के चलन को प्रभावित करती हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनएचएफएस 019-21) के अनुसार देश में 20 से 24 आयुवर्ग की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो जाता है। जबकि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार हर तीन में से दो लड़कियों का विवाह 15 से 17 की उम्र के बीच हो जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि कुल 52 लाख में से 33 लाख लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया।

मातृत्व और ड्यूटी साथ-साथ निभा रहीं पिंकी
Published / 2024-03-07 21:58:53
मातृत्व और ड्यूटी साथ-साथ निभा रहीं पिंकी

महिला दिवस पर विशेष आधुनिक नारी के लिए आदर्श बनीं हैं थाना प्रभारी टीम एबीएन, कोडरमा। कोडरमा में महिला थाना प्रभारी पिंकी रानी मातृत्व और ड्यूटी साथ-साथ निभा रही रही हैं। पिंकी रानी आधुनिक नारी के लिए आदर्श बनी हैं। उन्होंने बेटियों का पक्ष लेते हुए कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में आज की बेटियां अपना दबदबा साबित कर रही हैं। उन्हें सिर्फ एक अवसर प्रदान करने की जरूरत है। बता दें कि पिंकी रानी ने 17 अक्टूबर 2023 को महिला थाना प्रभारी के रूप में ज्वाइन किया था। जबकि पुलिस में उनकी नियुक्ति 2018 के अगस्त महीने में हुई थी। इन दिनों वे मातृत्व का पालन और श्रम साधना साथ-साथ करती दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि अब पहले वाली बेटियां नहीं हैं, अब की बेटियां शिक्षित और सशक्त हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को अधिकार देने की आवश्यकता है। लड़की और महिलाओं से संबंधित उनके थाने में जो भी मामले जाते हैं उनका वे निष्पक्षता से निष्पादन करती हैं। उन्होंने जिले के अभिभावकों से कहा है कि वे अपनी बेटियों को अवसर दें, उन पर भरोसा जतायें, वे उनका सर गर्व से ऊं चा कर देंगी। उन्होंने कहा कि चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो विज्ञान का हो, या खेल का मैदान, हर जगह बेटियां अपनी उपस्थिति का एहसास कर रही हैं। पिंकी रानी ने कहा कि आज की बेटियां सीमा पर तैनात हैं, रेलवे की सुरक्षा में लगी हैं और जहाज भी उड़ा रही हैं। उन्होंने पुरुष प्रधान समाज से महिलाओं और बेटियों को सम्मान और सहयोग करने की अपेक्षा जतायी है।

क्यों जरूरी है महिला सशक्तिकरण : योगाचार्य महेश पाल
Published / 2024-03-07 21:57:53
क्यों जरूरी है महिला सशक्तिकरण : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन सोशल डेस्क। जैसा कि हम सभी जानते हैं हर साल की भांति इस साल भी 8 मार्च को इंस्पायर इनक्लूजन (एक ऐसी दुनिया, जहां हर किसी को बराबर का हक और सम्मान मिले) थीम के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन महिला सशक्तिकरण से संबंधित बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और राजनीति से लेकर साइंस, कला, संस्कृति और भी कई दूसरे क्षेत्रों में अपना योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाता है, यह भारत ही नहीं पूरे विश्व में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं  युनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च 1975 को महिला दिवस मनाने की शुरुआत की थी।8 मार्च का यह खास दिन महिलाओं को समान हक सम्मान को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है महिला दिवस मनाने के लिए 8 मार्च का दिन चुनने की एक खास वजह है। दरअसल अमेरिका में काम करने वाली महिलाओं ने 8 मार्च को अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन छेड़ा था। सोशलिस्ट पार्टी आफ अमेरिका ने न्यूयॉर्क में 1908 में वर्कर्स को सम्मान देने के मकसद से ये दिन चुना था। वहीं रूसी महिलाओं ने महिला दिवस मनाते हुए पहले विश्व युद्ध का विरोध किया था।रूस की महिलाओं ने ब्रेड एंड पीस को लेकर 1917 में हड़ताल की थी। यूरोप में महिलाओं ने 8 मार्च को पीस एक्टिविस्ट्स को सपोर्ट करने के लिए रैलियां निकाली थीं।इस वजह से 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरूआत हुई। बाद में 1975 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मानने की मान्यता दे दी गयी, सशक्तिकरण शब्द से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है की वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे है जहां महिलाएं परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निमार्ता खुद हो। लोगों को जगाने के लिए महिलाओं का जागृत होना जरुरी है। एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है, परिवार आगे बढ़ता है, गांव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है। भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है महिलाओं के विकास में अवरोध पैदा करते हैं जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा  मानव तस्करी इसलिए महिला सशक्तिकरण जरूरी है,लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढकेलता है। भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली उपाय है इस तरह की बुराईयों को मिटाने के लिये। लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है। महिला सशक्तिकरण के उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इसे हर एक परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारित करना चाहिये। ये जरुरी है कि महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रुप से मजबूत हो, चूंकि एक बेहतर शिक्षा की शुरूआत बचपन से घर पर हो सकती है, महिलाओं के उत्थान के लिये एक स्वस्थ परिवार की जरुरत है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक है। आज भी कई पिछड़े क्षेत्रों में माता-पिता की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह और बच्चे पैदा करने का चलन है। महिलाओं को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिये सरकार द्वारा कई सारे कदम उठाएं जा रहे हैं। सरकार को महिलाओं के वास्तविक विकास के लिये पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाना होगा और वहां की महिलाओं को सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों से अवगत कराना होगा जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके। महिला सशक्तिकरण के सपने को सच करने के लिये लड़िकयों के महत्व और उनकी शिक्षा को प्रचारित करने की जरुरत है।

विजया एकादशी पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का आनलाइन गृहे गृहे अखंड जप- अनुष्ठान
Published / 2024-03-06 22:16:07
विजया एकादशी पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का आनलाइन गृहे गृहे अखंड जप- अनुष्ठान

सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैव कुटुंबकम् भाव से की गयी प्रार्थनाएबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज तत्वावधान में आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह प्रतिनिधित्व में गायत्री परिवार शिष्य-साधकों ने सुविधानुसार अपनी शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों, मंडल इकाइयों और गृहे गृहे आवासीय तपोवन में 24 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान अभियान में शामिल होने का आह्वान किया गया।प्रतिनिधित्व में सभी से अनुरोध किया गया कि इस दैवीय योजना मे घर बैठे बैठे सहयोग करें व राष्ट्र के नवनिर्माण, सभी के लिए सद्विचार विस्तार, सद्बुद्धि व उज्वल भविष्य की प्रार्थना में अपने बहुमूल्य समय का एक अंश अवश्य देने का प्रयास करने की अपील की। इस अवसर पर आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व व मार्गदर्शन में सैकड़ों साधक-शिष्य गणों भागीदारी कर लाभान्वित होने, सर्व मंगलाय गुरु-ईश, ब्रह्मा विष्णु महेश सहित सर्व देवपूजन, षोडशोपचार व स्वस्तिवाचन पाठ कर जप-अनुष्ठान आरंभ किया, जो बुधवार सुबह से गुरुवार सुबह संपन्न होगा। इस बीच आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह के कुछ कुछ साधक-शिष्य इस अवसर पर आगामी आठ मार्च की महाशिवरात्रि महापर्व पर विशेष ध्यान व विधिवत पूजा-पाठ यज्ञीय अनुष्ठान कर 9 मार्च को पूर्णाहूति करने का संकल्प किया है।  यह भी ज्ञातव्य हो इस दौरान 14 फरवरी से 24 मार्च तक विश्व स्तरीय आनलाइन गृहे गृहे 40 दिवसीय विशेष जप-अनुष्ठान अभियान भी शांतिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में चलाया गया है।  मुंबई अश्वमेधीय महायज्ञ के सफल आयोजन पर वहां पर सभी भागीदार समयदानी साधक-शिष्य व भाई-बहनों अपनी प्रसन्नतापूर्वक खुशी जाहिर की है और सबको हृदय से धन्यवाद तथा सर्वे भवन्तु सुखिन: तथा वसुधैव कुटुंबकम भाव से सबको सुस्वास्थ्य, सुखमय वातावरण और उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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