टीम एबीएन, रांची। हुलहुंडू पल्ली के हाड़दाग स्थित क्लारेशियन धर्मसंघ के 3 धर्मबहनों सि. दिव्या लकड़ा, सि. एमरेंसिया डोडराई और सि. मनीषा लकड़ा ने महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद के सम्मुख अपना प्रथम व्रतधारण स्वीकार किया। आज रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद ने हाड़दाग में व्रत धारण समारोह के अवसर पर उपस्थित सभी धर्मबहनों एवं विश्वासियों को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि: समर्पित जीवन में ईश्वर से जुड़े रहना और जीवित प्रभु के अनुभव को अपने जीवन में संजो कर रखना ही उसके संदेश को लोगों तक पहुंचाने में उत्साह से भर देता है। प्रथम व्रतधारण स्वीकार करने वालों धर्म बहनों को महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद ने बधाईयां एवं शुभकामनाएं दी और अपना जीवन प्रभु और उसकी प्रजा के लिए समर्पित करने का संदेश दिया।इस समारोह के अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद के अलावा फा. संजय तिर्की, हुलहुंडू पल्ली के पल्ली पुरोहित, फा. नरेश कुजूर, फा. अमित डुंगडुंग, फा. ब्रिसियुस मिंज, फा. नेलशन बरला, अन्य पुरोहितगण एवं संत अन्ना की धर्म, व्रत धारण करने वालों धर्म बहनों बहनें के रिश्तेदार मौजूद रहे।
जब शिव अपनी पत्नी को न समझा सके, तो यदि हम भी पत्नी को न समझा सके तो दुखी मत होनाटीम एबीएन, रांची। भागवत की कथा मृत्यु सिखलाती है और रामायण कथा जीवन जीना बतलाती है। इसलिए भागवत कथा मरने में कल्याण करती है और मरने के बाद भी कल्याण करती है। परीक्षित और धुन्धकारी इसके उदाहरण हैं। इतना ही नहीं रोगी का रोग भी छूट जाता है। भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग्य से हम यह सीखते हैं। शिव जब कथा सुनने अगस्त के आश्रम में आये तब शम्भू हुए। सुने तो महेश और जब कथा सुन चले तो त्रिपुरारि हो गये। भगवान की लीला और चरित्र में अन्तर है। सती शिव प्रसंग कहता है- जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती को न समझा सके, तो हम सब अपनी पत्नी को न समझा सके तो दुखी मत होना। भागवत कथा के प्रसंग के दूसरे दिन कथा में आचार्य दीनानाथ शरण जी (वृन्दावन वाले) ने श्रीराम जानकी मन्दिर हाउसिंग कालोनी बरियातु के प्रांगन में कही। कथा आयोजन में जय सिंह, विभा सिंह, प्रतिमा सिंह वगैरह का सहयोग है। यह जानकारी पंडित रामदेव पांडेय ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची के लोयोला ग्राउंड में कैथोलिक कलीसिया के हज़ारों विश्वासी धूमधाम से पास्का रात्रि जागरण धर्मविधि में शामिल हुए। सम्पूर्ण मैदान पास्का मोमबत्ती से जगमग हुआ और अल्लेलूया के नारों से गूंज उठा। ईसाइयों के मुख्य त्यौहारों में से प्रमुख पास्का त्यौहार आज रांची के लोयोला ग्राउंड में हर्षोल्लास एवं उत्साह पूर्ण मनाया गया। रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइन्द ने पास्का रात्रि जागरण धर्मविधि संपन्न किया। इस पवित्र समारोह का आरंभ आग की अशीष से शुरू हुआ। तत्पशात उस पवित्र आग से पास्का मोमबत्ती जलाकर कर सभी विश्वासियों ने उसी पास्का मोमबत्ती से ही अपने मोमबत्ती को जलाया। सभों के हाथों में मोमबत्ती का दृश्य मनोहर और आकर्षित रहा जो संपूर्ण अंधकार को चीरता प्रतीत होती रही। प्रकाश की यह धर्मविधि सत्य का असत्य पर और प्रकाश का अंधकार पर विजय का प्रतीक है। बारिश होने के बावजूद विश्वासीगण अपने जगह पर डटे रहकर अपने भक्ति और विश्वास का परिचय दिया।इस समारोह के अवसर पर आर्चबिशप विंसेंट आइन्द ने अपने प्रवचन में कहा कि: पास्का पर्व के पहले हमने चालीस दिनों तक अपने को तैयार किया और पिछले कुछ दिन पुण्य सप्ताह में हमरे लिए विशेष दिन रहे जिसमें हमने हमारे मुक्ति के रहस्यों में भाग लिया और उस पर मनन चिंतन करते रहे हैं। पवित्र शुक्रवार के दिन हमने प्रभु के दुखभोग और मृत्यु पर मनन चिंतन कर उसके दुखों को समझने का प्रयत्न किया है। अभी का समय हमारे लिए प्रभु के पुनरूत्थान पर विचार करने का क्षण है। प्रभु तो हमारे लिए मर गए हमरे मुक्ति के लिए अपने प्राण क्रूस पर न्यौछावर कर दिए। किंतु जब आज हम उनके पुनरूत्थान की घोषणा करते हैं, उनके मृत्यु में से जी उठने का प्रचार करते हैं तो हमें यह बात समझ लेने की आवश्कता है कि मृत्यु और अंधकार का राज्य सिर्फ थोड़े समय के लिए होता है अंत में जीवन और सच्चाई की ही जीत होती है और यह तथ्य प्रभु के जीवन से साबित होती है। इस समारोह के दरम्यान पवित्र जल की अशीष हुई और सभी विश्वासियों ने अपने बपतिस्मा प्रतिज्ञा का नवीनीकरण भी किया। अंत में आर्चबिशप विंसेंट आइंद ने सभी को पास्का महोत्सव की बधाईयां एवं शुभकामनाएं दी।इस पास्का रात्रि जागरण के अवसर पर रांची आर्चबिशप विंसेंट आइन्द के अलावा फाo आनंद डेविड खलखो, , फाo अजय कुमार खलखो, फाo अंजलुस एक्का, फाo विनय केरकेट्टा, फाo जॉर्ज मिंज, फाo बिपिन तोपनो, फाo रेजीनाल्ड और लगभग 60 अन्य पुरोहितगण एवं हजारों ख्रीस्त विश्वासी शामिल हुए।
कथा ऐसी हो जिसे ज्ञान, वैराग्य और भक्ति बढ़ेटीम एबीएन, रांची। भगवान पालन पोषण करते है पर संहार भी करते है , तब दयावान नहीं होते है , भगवान सबका एक जैसा पालन करते है, संहार इसलिए करते हैं। कि सत भगवान है और संसार बदलता रहता है, जो तीनों काल में है। वही सत है, इसी सत (सत्य), चित और आनन्द है। यह आनन्द परमानन्द भगवान ही देते हैं। सुख तो भोजन से भी मिलता है। भगवान विश्व का उत्पति पालन और संहार का कारक है। भगवान के शरण मे आने से तीनो ताप दैहिक, दैविक और भौतिक ताप नष्ट हो जाता है। भगवान के शरणागत होने का यही लाभ है कथा ऐसी हो जिसे भक्ति ज्ञान और वैराग्य बढ़े।वृन्दावन से आये आचार्य दीनानाथ जी ने आज की कथा में यह कहा। भागवत की यह कथा श्रीराम जानकी मन्दिर हाउसिंग कालोनी बरियातु मैदान में आगामी 6 अप्रैल तक सन्ध्या सात से दस बजे तक संगीत रसमयी कथा से चलेगी। यह जानकारी पंडित रामदेव पाण्डेय ने दी।
श्याम शरण में आजा रे का द्वितीय वार्षिक उत्सव पर निकाली गई भव्य निशान यात्रागूंजा हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा टीम एबीएन, कोडरमा। हो रही बाबा की नगरी में केसर चंदन का छिड़काव..., आयो सांवरिया सरकार नीले पर चढ़कर..., डोरी खींचकर रखियो यों है बाबा को निशान..., पैदल चालनीया के साथ चाला बाबा श्याम..., खाटूवाले श्याम धनी से हेत पुराना सा..., ओ दर्जी सील द निशान माने खाटू जाना सा..., हो गलती तेरी है सांवरिया फागुन दिखा दियो एक बार..., आ गया मैं दुनिया दारी सारी बाबा छोड़ कर..., सजना का शौकीन है कोई इसे... जैसे भजनों के साथ सैकड़ों श्रद्धालु भक्त हाथों में निशान लेकर झूमते नाचते हुए धनबाद के प्रसिद्ध गायक अभिषेक सिंघल के भजन पर गोता लगाते रहे। शहर के स्टेशन रोड स्थित काली मंदिर से बाबा श्याम की निशान यात्रा प्रारंभ हुई। जिसकी शुरुआत पंडित अनिल आचार्य एवं विजय उपाध्याय ने मंत्र उच्चारण के साथ निशान पूजा कर की। इसमें यजमान के रूप में हिमांशु केडिया, प्रीति केडिया शामिल हुए।जबकि बाबा श्याम के रथ और एक सुसज्जित वाहन में सजे विभिन्न देवी देवताओं के दरबार के समक्ष लड्डू गोपाल राजगढ़िया ने नारियल पधार कर एवं हरी झंडी दिखा कर निशान यात्रा को रवाना किया। निशान यात्रा शहर के झंडा चौक, पूर्णिमा टॉकीज, महाराणा प्रताप होते हुए आयोजन स्थल शिव वाटिका पहुंच कर संपन्न हुई। इस दौरान हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा के जयकारों से गूंजयमान होता रहा। वही ढोल नगाड़ों की गूंज से वातावरण भक्ति में हो गया। निशान यात्रा में महिलाएं लाल पीली साड़ी एवं पुरुष कुर्ता पजामा में नजर आये। निशान यात्रा में सबसे आगे एक बाबा श्याम का निशान एवं एक वीर हनुमान का निशान संजय शारडा एवं प्रवीण सिंह के साथ ही 351 निशान लेकर श्रद्धालु भक्त चल रहे थे। इस दौरान पुलिस प्रशासन की सक्रियता भी दिखी। शिव वाटिका में श्रद्धालु भक्तों ने निशान अर्पित करने के बाद अपने अपने घरों में ध्वज लहराने के लिए ले गये। वहीं लड्डू गोपाल की सामूहिक पूजा अर्चना हुई। जिसमें मुख्य यजमान के रूप में दीपेश जेठवा, संगीता जेठवा के अलावा कार्यक्रम के संयोजक विवेक सहल, सीमा सहल, सह संयोजक मनोज लड्ढा रश्मि लड्ढा, प्रवीण सिंह, मधु सिंह, संजय नरेडी, ममता नरेडी, संजय शारडा, सुनीता शारडा, मनोज जोशी, सुजाता जोशी सहित कई श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।वहीं दोपहर में कोलकाता से आये सुंदर कांड वाचक हरीश भारती ने सुंदर कांड का पाठ कराया। इसमें यजमान के रूप में मनोज केडिया और रश्मि केडिया शामिल हुए। इस दौरान मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अजर बिहारी... की गूंज से पूरा शिव वाटिका गूंजयमान होता रहा। इस दौरान बाबा का अलौकिक श्रृंगार, सवा मणि प्रसाद, छप्पन भोग बाबा श्याम को अर्पित किया गया। ज्योत प्रज्ज्वलन विकास वैश्यकियार व ज्योति वैश्यकियार ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्याम शरण में आजा रे के सुजीत लोहानी, अरविंद चौधरी, संतोष लड्ढा, संजू पिलानिया, अविनाश कपसीमे, संदीप लोहानी, विपुल चौधरी, रवि दाहिमा, सांसद प्रतिनिधि संजय शर्मा, संजय अग्रवाल, आयुष पोद्दार, संजय सूद, जय दाहिमा, उमंग कंदोई, तन्मय लड्ढा, चंद्रशेखर जोशी, वत्सल कंदोई, मनोज जोशी, शुभम कुमार, चिंटू अग्रवाल, प्रवीण जोशी, ऋषभ सिंह, आर्यन हर्षराज, सीताराम केसरी, विवेक कुमार, रणधीर कपसीमे, अजय शर्मा, विकास अठघरा, जोशी कुमार, महावीर खेतान, चिंटू अग्रवाल, युवराज सहल, उमेश जोशी, प्रिंस सहल, सज्जन शर्मा, संजय खेमानी, विजय अग्रवाल, सुधीर कुमार, आशीष भदानी, सत्यम कुमार, उदय बडगवे, रितेश सिंह, विनोद सोनी, रवि कुमार लोहानी, मनोज सोनी, पीयूष सहल, यश बंसल, सुजाता जोशी, सुनीता शारडा, शालिनी दाहिमा, पूनम सहल, वंशिका जोशी, कृतिका मोदी, पिंकी खेतान आदि मौजूद थे।
एबीएन सोशल डेस्क। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन जिसे बचपन बचाओ आंदोलन के नाम से जाना जाता है, ने होली के दिन बर्बरता की शिकार एक नाबालिग घरेलू सहायिका को मुक्त कराया। बच्ची की शिकायत पर नियोक्ता के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामला दर्ज करने के बाद पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की रहने वाली इस बच्ची को चिकित्सा जांच के लिए ले जाया गया जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया।देश जब होली के रंगों की खुशियां मना रहा था, उसी समय बचपन बचाओ आंदोलन को किसी ने फोन कर सूचित किया कि गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में एक घरेलू सहायिका के साथ बर्बरता की गई है और उसकी स्थिति गंभीर है। सूचना के बाद बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और बच्ची को मुक्त कराया।कार्यकर्ताओं ने पाया कि बच्ची के दोनों हाथ सूजे हुए थे और उसके कान एवं चेहरे सहित जिस्म का हर हिस्सा जख्मी था। उसकी पीठ पर बेलन से मारा गया था जिसकी वजह से वो बोल नहीं पा रही थी । गर्दन पर जले एवं कटे के निशान भी थे। दाएं पैर पर खौलता हुआ पानी डाला गया था जिसकी वजह बच्ची के पैर जल गए थे। बाए पैर में जख्म था जो पिटाई की वजह से फट गया था और एक जगह टांग में हड्डियों से खून रिस रहा था।बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता उसे लेकर इंदिरापुरम थाने पहुंचे और उसकी नियोक्ता रीना शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बच्ची पिछले एक साल से यहां काम कर रही थी। बच्ची ने बताया कि होली की रात रीना शर्मा ने उसे बेरहमी से पीटा और मदद के लिए पुकार लगाने पर वह उसके सीने पर बैठ गई। सुबक रही बच्ची ने दरवाजा थोड़ा सा खुला देखा तो वहां से भाग निकली और रात को सीढ़ियों पर छिपी रही। सुबह किसी ने उसे देखा और बचपन बचाओ आंदोलन को सूचना दी।बच्ची ने बताया कि नियोक्ता रीना शर्मा उसकी डंडे से पिटाई करती थी और उससे सुबह छह बजे से लेकर रात को दो बजे तक काम कराया जाता था। नाबालिग ने अपने जले हुए पांव दिखाते हुए बताया कि एक बार वह कोई काम पूरा नहीं कर पाई तो मालकिन उसके पैर खौलता पानी फेंक दी। होली से एक दिन पहले भी उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी।बच्ची की मां सिलीगुड़ी के एक चाय बागान में काम करती हैं जबकि पांव की चोट के कारण पिता घर पर ही रहते हैं। बच्ची ने बताया कि उसे पखवाड़े में एक बार अपने घर फोन करने की इजाजत दी जाती थी और इस बीच अगर उसने इशारों में भी यहां के बदतर हालात के बारे में कुछ बताने की कोशिश की तो उसे बेरहमी से पीटा जाता था। बच्ची ने बताया कि तनख्वाह के नाम पर उसके हाथ में कभी एक पैसा भी नहीं मिला और उससे कहा जाता था कि हर महीने 4,000 रुपए उसके घर वालों को भेजे जाते हैं। बच्ची को एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए यहां भेजा गया था। बताया जा रहा है कि रीना ने इससे पहले भी एक घरेलू सहायिका को बुरी तरह पीटा था।देश में घरेलू सहायकों के काम करने के हालात और उनकी स्थिति पर चिंता जताते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, "शहरी भारतीयों के बढ़ते लालच को पूरा करने के लिए देश के दूरदराज के इलाकों के गरीब व लाचार परिवारों की लड़कियों को ट्रैफिकिंग के माध्यम से लाया जा रहा है। जैसे एक मासूम से उसका बचपन और घर छीन लेना ही काफी नहीं है, इन बच्चों को यातनाएं दी जाती हैं, उन पर अत्याचार किए जाते हैं और उन्हें वीभत्स स्थितियों में रहने को मजबूर किया जाता है। अगर हम अपने बच्चों को शोषण और उत्पीड़न से बचाना चाहते हैं तो हमें और कड़े कानूनों व प्लेसमेंट एजेंसियों की निगरानी की आवश्यकता है। लेकिन जिस तरह से किसी ने बच्ची के बारे में सूचना दी और आस पड़ोस के लोगों ने जिस तरह बच्ची को मुक्त कराने में सहयोग दिया, वह ऐसी तमाम बच्चियों के लिए आशा की किरण जगाने वाला है। अगर देश की सभी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्लूए) इसी तरह से सक्रिय भूमिका निभाएं जैसा कि इस मामले में देखने को मिला है तो हम बाल मजदूरी और बच्चों की ट्रैफिकिंग पर लगाम कसने में कामयाब हो सकते हैं। जाहिर है कि जब तक यह सबका दायित्व नहीं बन जाता तब तक यह किसी का कर्तव्य नहीं बन पाएगा।और जानकारी के लिए संपर्क करेंजितेंद्र परमार8595950825
टीम एबीएन, रांची। रविवार को विश्वासियों ने खजूर पर्व उत्साह के साथ मनाया। विश्वासियों ने खजूर की डाली हाथ में लिए प्रभु येसु के येरूशलम प्रवेश को याद किया। सुबह 6 बजे खजूर डाली के साथ हजारों विश्वासियों ने लोयला ग्राउंड से संतमारिया महागिरजा तक शोभायात्रा निकाली और गिरजाघर पहुंचकर चर्च की परिक्रमा की। चर्च प्रांगण में मिस्सा अनुष्ठान हुआ। इसके मुख्य अनुष्ठाता नए आर्च बिशप विंसेंट आइंद थे इनका सहयोग अन्य पुरोहितों ने किया। आर्च बिशप विंसेंट आइंद ने अपने प्रवचन संदेश में कहा कि येसु ख्रीस्त का येरूशलेम प्रवेश करना ही अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि उनकी यात्रा तो स्वर्ग राज रहा है। उनकी इस यात्रा के हम सहयात्री बनते हैं। उनके दुखभोग के द्वारा हमें मुक्ति मिली है। इसके माध्यम से उन्होंने ईश्वर की मानव मुक्ति योजना को पूरा किया। येसु के दुख का चिंतन करते हुए उनकी मुक्ति योजना में हम भी शामिल होकर स्वर्ग राज की ओर यात्रा करें। उन्होंने कहा कि येसु के गधे पर सवार होना उनकी विनम्रता का प्रतीक है। शांति के लिए नम्रता का गुण आवश्यक है। येसु ख्रीस्त सत्ता पलटने के लिए नहीं, बल्कि शांति और न्याय के राज्य की स्थापना के लिए पृथ्वी पर आये। उन्होंने पिता ईश्वर की योजना को मनुष्य के पाप और मृत्यु मुक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि नये जीवन प्रदान करने के लिए बताया। जब हम इस त्योहार को मनाते हैं तो अपने नए स्वाभाव और सोंच धारण करें। संत मारिया महागिरजा में पहले मिस्सा के दौरान पल्ली पुरोहित फादर आनंद डेविड खलखो ने कहा कि येसु ने दु:ख केवल अंतिम समय में ही नहीं, बल्कि बचपन से लेकर कूस मरण तक उठाया था। हमें पाप और मृत्यु से उठाने के लिए उन्होंने दुख सहा। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे जीवन में भी दुख और तकलीफ होते हैं। इन दुखों से हम ना घबराएं, बल्कि ऐसे समय में प्रभु येसु की उपस्थिति को महसूस करें।
रांची में फलों-फूलों, पान पत्ता व मुल्तानी मिट्टी से तैयार किया जा रहा केमिकल फ्री हर्बल गुलालटीम एबीएन, रांची। होली में एक दिन ही बचा है। होली के त्यौहार के चलते रांची के बाजार में रौनक लगी हुई है। रंग- बिरंगे रंगों से बाजार रंगा हुआ है। बाजार में हर्बल रंगों की डिमांड सबसे ज्यादा है, जिसे देखते हुए रांची में विभिन्न फलों के पल्प, फूलों, पान के पत्ते और मुल्तानी मिट्टी से गुलाल और नेचुरल रंगों को तैयार किया जा रहा है क्योंकि इसे लगाने से स्किन पर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता। व्यवसायी राकेश राजदान ने बताया कि राजधानी रांची से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तुपुदाना के साईं मंदिर के पास महिलाओं द्वारा काफी सस्ते में हर्बल रंग और गुलाल मिल जायेंगे। रांची के कारोबारी अंशुल गुप्ता ने बताया कि उन्होंने 5 वर्ष पहले स्थानीय महिलाओं की भागीदारी से हर्बल रंग और गुलाल निर्माण का कार्य शुरू किया। संस्थान के ओनर अंशुल गुप्ता का कहना है कि स्थानीय महिलाओं के भागीदारी के कारण हर्बल रंगों के उत्पादन में लगने वाले लोकल फूल मिलने में काफी सहूलियत हुई। खास बात ये है हर्बल रंग सब्जियों और फलों से बनाये जा रहे हैं। इससे स्किन को कोई नुकसान नहीं होगा। गुलाल बनाने के लिए अरारोट पाउडर के साथ प्राकृतिक रंगों के अर्क को मिलाया जा रहा है। इसमें चुकंदर से गुलाबी रंग, पालक के रस से हरा रंग, हल्दी और गेंदा का रस निकालकर पीला रंग, पलाश के फूलों से केसरिया रंग बनाया जा रहा है। अंशुल गुप्ता ने कहा कि जब उनका कारोबार बढ़ा तो रंग-गुलाल बनाने के लिए मशीनें भी लगा ली गयी है, जिसके वजह से उत्पादन काफी बढ़ गया है। एक समय में केवल रांची के बाजार में बिकने वाला हर्बल रंग और गुलाल अब हरियाणा, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में भी बेची जा रही है जहां इसकी अच्छी मांग है। वहीं स्थानीय गांव की महिलाओं इससे वो स्वावलंबी भी बन रही हैं।
इन लोगों को नहीं देखना चाहिए होलिका दहन, वरना जीवन में बढ़ सकती हैं समस्याएंराजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। होली का त्योहार सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। साथ ही हिंदू धर्म में होली को लेकर कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं। ऐसे में आज हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि होलिका दहन किन लोगों को नहीं देखना चाहिए वरना जीवन में नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।फाल्गुन महीने के पूर्णिमा तिथि को होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर अग्नि से विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद बच गये थे और वहीं अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त होने के बाद भी होलिका का दहन हो गया था। ऐसे में इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। इसके अनुसार, होलिका दहन 24 मार्च को किया जायेगा।इन लोगों पर पड़ सकता है बुरा प्रभावकई मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को न तो होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए और न ही होलिका दहन देखना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे मां और शिशु दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।नवजात बच्चों को रखें दूरगर्भवती महिलाओं के साथ-साथ नवजात शिशु को भी होलिका दहन देखना अशुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जिस जगह पर होलिका दहन होता है, वहां पर नकारात्मक शक्तियां व्याप्त हो जाती हैं। ऐसे में नवजात बच्चों को होलिका दहन वाली जगह से दूर रखना चाहिए।नव विवाहित रिश्ते में आ सकती है खटाससदियों से चली आ रही परम्परा के अनुसार, नव विवाहिता को अपनी सास के साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सास और बहू द्वारा होलिका दहन साथ में देखने से उनके रिश्तों में खटास आ सकती है। ऐसे में नव विवाहिता द्वारा अपनी पहली होली मायके में मनाने की प्रथा चली आ रही है।
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