टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ की संस्कृति के प्रतीक लोकपर्व गणगौर की सार्वजनिक पूजा की व्यवस्था श्री माहेश्वरी सभा ने 1981 से राजस्थान की पुरानी परंपरा की विरासत को संजोये हुए गणेश नारायण साबू चौक, सेवा सदन पथ, अपर बाजार स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में हर साल की गयी। गणगौर पूजा मारवाड़ी समाज का प्रमुख लोक पर्व है, जो होलिका दहन के दूसरे दिन से 16 दिनों तक कुंवारी कन्या व सुहागन महिलाओं का त्योहार है।आज 11 अप्रैल 2024 दिन गुरुवार को गणगौर विसर्जन के साथ संपन्न होने के दिन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में सुबह 6 बजे से शुरू हुई गणगौर पूजा अपराह्न 2 बजे तक अनवरत चलती रही। मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने बताया गणगौर मिलान एवं विसर्जन के लिए अपराह्न 3 बजे से मारवाड़ी समाज की महिलाओं के आने का सिलसिला जो शुरू हुआ वो संध्या 6.30 बजे तक जारी रहा। मंदिर परिसर में गणगौर मिलान एवं बड़ा तालाब में गणगौर विसर्जन घाट की व्यवस्था माहेश्वरी समाज के तीनों संगठन (श्री माहेश्वरी सभा, माहेश्वरी महिला समिति, माहेश्वरी युवा संगठन) के सहयोग से सुचारू रूप से चला। माहेश्वरी भवन में लगाये गये गणगौर मेला में गणगौर विसर्जन करने आयी महिलाओं ने रात्रि 8 बजे तक लजीज व्यंजन का आनंद लिया। इस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक शिव शंकर साबू ने यह जानकारी दी। इस महोत्सव को सफल बनाने में प्रदेश माहेश्वरी सभा अध्यक्ष राज कुमार मारु, सभा अध्यक्ष किशन साबू, सचिव नरेंद्र लाखोटिया, ओमप्रकाश बोड़ा, कुमुद लाखोटिया, लक्ष्मी चितलांगिया, शारदा लड्डा, विकास काबरा, अंकित बियानी, नयन बोड़ा, राधव सारडा, गोवर्धन भाला, दीपक मारु, प्रभात साबू, बसंत लाखोटिया, अमित मालपानी, मनमोहन मोहता, श्याम बिहानी, सौरभ डागा, अंकुर डागा, युवा संगठन अध्यक्ष विनय मंत्री, सचिव हेमंत माहेश्वरी, महिला समिति अध्यक्षा भारती चितलांगिया, सचिव बिमला फलोड़, अजय शंकर साबू, राजेश सोमानी, बिभोर डागा, सुरेश सारडा, राजेश साबू, अनिल साबू, राम बांगड़, विजय साबू, अनीता साबू, शशि डागा, सरिता चितलांगिया, अर्चना साबू, मोहित सोमानी, गौरव काबरा, सौविक बोड़ा, प्रकाश काबरा एवं समाज के तीनों संगठन के सदस्यों का साथ रहा।
टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी समाज का लोकप्रिय पर्व होलिका दहन के दूसरे दिन से लगातार 16 दिनों तक कुंआरी लड़कियां एवं नवविवाहिता द्वारा पूजा किया जाने वाला गणगौर पूजा, मूल रूप से ईसर- गौरा को शिव-पार्वती के रूप में पूजा जाता है। कुंआरी लड़कियां अच्छे वर की कामना के लिए और सुहागन पति की लंबी आयु की कामना के लिए ईशर-गणगौर की पूजा करती है।राजस्थान में इस त्योहार की अपनी महता और अलग बहार होती है। इस राजस्थानी परंपरा की विरासत को बनाए रखने के लिए श्री माहेश्वरी सभा, रांची ने 1981 से श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, गणेश नारायण साबू चौक, सेवा सदन पथ, अपर बाजार में सार्वजनिक ईशर-गणगौर पूजा एवं मेला का भव्य आयोजन माहेश्वरी महिला समिति एवं माहेश्वरी युवा संगठन के सहयोग से करते आ रहा है।तत्कालीन माहेश्वरी महिला समिति की अध्यक्षा स्व सूरज देवी भाला ने जयपुर से ईशर गणगौर की प्रतिमा मंगाकर मंदिर परिसर में सार्वजनिक पूजा की शुरूआत की। स्व.सूरज देवी भाला ने स्व सीताराम मारु, स्व भगवान दास काबरा एवं समाज जनों के सहयोग से जयपुर की तर्ज पर ईशर-गणगौर शोभायात्रा पंद्रह वर्ष तक निकाली एवं गणगौर मेला का आयोजन की शुरुआत की।इस वर्ष माहेश्वरी सभा माहेश्वरी महिला संगठन और माहेश्वरी युवा संगठन के सहयोग से कल 11 अप्रैल 2024 दिन गुरुवार को श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में सुबह 6 बजे से अपराह्न 2 बजे तक सार्वजनिक गणगौर पूजा, अपराह्न 3 बजे से संध्या 6 बजे तक मंदिर परिसर में गणगौर मिलान एवं बड़ा तालाब में गणगौर विसर्जन घाट की व्यवस्था साथ ही माहेश्वरी भवन में अपराह्न 3 बजे से रात्रि 8 बजे तक गणगौर मेला में लजीज व्यंजन की व्यवस्था की गयी है।इस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक शिव शंकर साबू को सहयोग के लिए प्रकाश काबरा, ओमप्रकाश बोड़ा, कुमुद लाखोटिया, लक्ष्मी चितलांगिया, अंकुर डागा, नयन बोड़ा, राधव सारडा एवं समाज के तीनों संगठन के सदस्यों का सहयोग रहेगा। उक्त जानकरी मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
ईदगाहों-मस्जिदों में होगी नमाजआदिल रशीद टीम एबीएन, रांची। ईद का चांद बुधवार की शाम दिखा, गुरुवार को ईद मनायी जायेगी। ईदगाहों और मस्जिदों में गुरुवार 11 अप्रैल 2024 की सुबह नमाज अदा की जायेगी। एदारे शरिया झारखंड और इमारते शरिया झारखंड ने चांद की औपचारिक रूप से घोषणा कर दी हैं। चांद का दीदार होने के साथ ही ईद की खुशियां शहर की फिजा में घुल गयी। मस्जिदों में ईद नमाज से संबंधित एलान हुए, जबकि सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा रहा। लोग एक दूसरे को ईद की चांद की बधाई देते रहे।शहर के विभिन्न मुस्लिम मोहल्लों में खुशी के इस मौके पर पटाखे छोड़े गये। ईद की तैयारियां रात से ही शुरू कर दी गयींं। सभी मुस्लिम मोहल्लों, चौक चौराहों, गली कूचों को कुमकुमे, चमचमाती रंग बिरंगे झालर, लाइट से सजाया गया। बच्चो ने रात रात भर जाग कर सजाने का काम किया। रमजान के मुकद्दस महीने की 30 तारीख को देखते हुए बुधवार को मगरिब की नमाज के बाद दरगाह में एदारा ए शरिया की बैठक मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी की सदारत में हुई। तो इमारत शरिया झारखंड की बैठक इमारत शरिया बिल्डिंग में मुफ्ती मोहम्मद अनवर कासमी की सदारत में हुई। वहीं खानकाह मजहरिया मुनामिया फिरदौस नगर डोरंडा में अल्लामा मौलाना सैयद शाह अलकमा शिबली कादरी की सदारत में हुई। सभी ने चांद होने की खबर की पुष्टि की और ईद के चांद की घोषणा कर दी।देर रात तक होती रही खरीदारीईद का चांद का ऐलान होते ही बाजारों में उमड़ी भीड़। हर कोई खरीदारी करते नजर आए। सेवई, लच्छा की दुकानों में भीड़ रही। कपड़ा की दुकान, राशन दुकान, पानी पूरी ठेला, मेवाड़, आदि सभी जगहों पर भीड़ रही। देर रात तक होती रही खरीदारी। महिलाओं ने पकवान बनाने में जुटे रहेचांद का ऐलान होते ही मुस्लिम घरों में महिलाओं ने पकवान बनाने में जुट गई। छोला चाट, पानी पूरी, दही बाड़ा, बिरयानी, पुलाओ, हलवा, लच्छा, सेवई, गुलाब जामुन आदि पकवान बनाने में जुटी रही। कर्बला चौक में लगा झूलाहर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कर्बला चौक के पास झूला लगा। झूला के आसपास कई खाने पीने के स्टॉल लगाये गये। सुरक्षा का पुख्ता इंतजामरांची जिला पुलिस प्रशासन के द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम था। हर जगह पुलिस के जवान तैनात थे। ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाया जाये मुफ्ती अनवर कासमीइमारत शरिया के काजी मुफ्ती मुहम्मद अनवर कासमी ने कहा की ईद उल फितर एक बड़ा इस्लामी त्यौहार है। ईद की खुशी में अपने आस-पड़ोस और मोहल्ले के ऐसे लोगों को ईद की खुशी में शामिल करें जो कमजोर हो, उनकी मदद करें और उनकी मदद इस अंदाज में किया जाए कि उनकी इज्जत को ठेस ना लगे। ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाया जाए। ईतमिनान व सकून के साथ नमाज के लिए आए और जाएं। इस्लाम के पैगाम को आम किया जाये और यह कोशिश की जाए कि आप से किसी को तकलीफ न पहुंचे। ईद में अल्लाह पाक रोजा और तरावी के बदले इनाम से नवाजता है। इसलिए अल्लाह पाक से खूब दुआ करें, ईद की नमाज के बाद दुआ कुबूल होती है। ईद साल का एक बड़ा त्यौहार है। अल्लाह और उसके रसूल ने त्यौहार मनाने का जो तरीका बताया है, उसी तरीके में ईद मनाना है। और उसी से खुशी हासिल करना है। और जो इसमें अपनी मनमानी चलाएं और नई बातों को जोड़ें उसको ईद की रूहानी खुशी हासिल नहीं हो सकती।ईद-उल-फितर हमें न्याय, शांति, भाईचारे का संदेश देती है : मुफ्ती रहमतुल्लाह रांची मदरसा जमीयतुल मोहसिनात के प्रिंसिपल मुफ्ती रहमतुल्लाह मजाहिरी ने ईद के संदेश पर कहा कि ईद उल फितर हमारे लिए न्याय व निष्पक्षता, शांति व व्यवस्था, भाईचारा, करुणा, प्रेम और सहनशीलता का एक सुंदर संदेश देता है। ताकि हम अकेले नहीं बल्कि सामूहिक रूप से जश्न खुशी मना सकें। गरीबों को सहारा देकर, टूटे हुए दिलों को जोड़कर, रूठे हुए अपनों को मना कर, बिना भेदभाव के रूहानी और जिस्मानी गंदगी को दूर कर जाति कौम आपसी रंजिश और मतभेद भुलाकर इस्लामी जमीयत का सबूत देती है। ईद उल-फित्र ब्रह्मांड के निमार्ता से इनाम का दिन है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है की हम अपने आप को जांचे। पवित्र महीने में शरीयत और सुन्नत के पालन और नेक कामों से अल्लाह की इबादत कर कितने हक अदा किये हैं? जिसके द्वारा हम अल्लाह से इनाम और श्रम मजदूरी प्राप्त करने के योग्य हैं या नहीं? यह मानव का स्वभाव है कि वह सुख के अवसर की लालसा करता है। इस इच्छा को पूरा करने के लिए, इस्लाम ने हमें दो त्योहार दिए हैं पहला ईद उल-फितर है और दूसरा ईद अल-अजहा है।सदका फितरा अदा करने के लिए मालदार होना जरूरी नहीं : मौलाना कुतुबुद्दीनएदारा ए शरिया झारखंड के नाजिम आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने ईद के पैगाम में कहा कि रमजान महीने के आखिर में सदका फितरा अदा करना है। इसके पीछे हिक्मत (सोच) यह है कि इसकी अदायगी करने से एक तो गरीबों को खाने को कुछ मिलता है और दूसरा रोजेदार द्वारा रोजे के दौरान की गयी गलतियों और फुजूल कामों का कफ्फारा अदा हो जाता है। सही बुखारी और सही मुस्लिम के अनुसार, एक हदीस है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सदका फितरा को अनिवार्य (करार) दिया। सदका फितरा रमजान के महीने के अंत में ईद की नमाज से पहले हर मुसलमान, गुलाम, आजाद, मर्द, औरत, बच्चे, बूढ़े, एक सा (लगभग ढाई किलो) रोजाना खाने वाली चीजों में से अदा करना यानी निकालना है। अगर ईद की नमाज के बाद सदका फित्रा दिया जाए तो वह आम सदका में से एक होगा। फितरा अदा नहीं होगा। ईद की नमाज से पहले सदका फितरा निकालना सही है। सदका फितरा केवल अनाज के रूप में अदा करना बेहतर है। लेकिन यदि इस अनाज का मूल्य यानी नकद भी बतौर फितरा में दिया जाता है, तो यह सही है। सदका फितरा केवल गरीबों और बेसहारा (मिस्किन) लोगों को दिया जाएगा। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सदका फितरा अदा करने के लिए साहबे नसाब यानी मालदार होना जरूरी नहीं है।
आनलाइन स्वाध्याय, नौदिवसीय महामंत्र जप-साधना में गायत्री महाविद्या तत्वदर्शन पर नौदिवसीय विशेष स्वाध्याय आयोजनगायत्री और ब्रह्म की एकता पर आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवादटीम एबीएन, रांची। शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रत्येक इकाई संस्थान, शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, महिला मंडल, प्रज्ञा मंडल गृहे गृहे आवासीय तपोवन में तथा आनलाइन स्वाध्याय मंडल व जप-अनुष्ठान समूह प्रतिनिधित्व में स्वाध्यायी पाठक सह साधक- शिष्य, भाई-बहन श्रोतागणों में वेदमाता, देवमाता, विश्व माता आद्य शक्ति गायत्री तथा सर्वश्रेष्ठ महामंत्र, महाविज्ञान स्वरूप संजीवनी महाविद्या स्वरूप महामंत्र की नौदिवसीय जप-अनुष्ठान में शामिल हुए हैं। इस नौदिवसीय नौरात्रि गायत्री महामंत्र जप-अनुष्ठान अभियान व स्वाध्याय में पूज्यवर श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीरामशर्मा आचार्य जी की वांग्मय युग साहित्य गायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन पर पाठ-संवाद प्रारंभ हुआ है। पाठ-संवाद में बताया गया कि गायत्री कोई स्वतंत्र देवी देवता नहीं है, वह परब्रह्म परमात्मा का क्रिया भाग है। ब्रह्म निर्विकार है, बुद्धि से परे है, साक्षी रूप है, अपनी क्रियाशील चेतना शक्ति रूप होने के कारण उपासनीय है और उस उपासना का अभीष्ट परिणाम भी प्राप्त होता है। ईश्वर-भक्ति, ईश्वर- उपासना, ब्रह्म साधना, आत्म साक्षात्कार, ब्रह्म- दर्शन, प्रभु- परायणता आदि पर्यायवाची शब्दों का जो तात्पर्य और उद्देश्य है, वही गायत्री है, उपासना आदि है। बताया गया कि गायत्री उपासना वस्तुत: ईश्वर उपासना का एक अत्युत्तम सरल और शीघ्र सफल होने वाला मार्ग है। इस मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति एक सुरम्य उद्यान से होते हुए जीवन के चरम लक्ष्य ईश्वर- प्राप्ति तक पहुंचते हैं। ब्रह्म और गायत्री में केवल शब्दों का अन्तर है, वैसे दोनों ही एक हैं। चर्चा हुई कि श्रीकृष्ण भगवान का कथन है कि गायत्री छंद सामहम छंदों में में गायत्री छंद मैं ही हूं। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुंज, हरिद्वार, उतराखंड के मार्गदर्शन व सान्निध्य में गत दिनांक 05 अप्रैल 2024 से 08 अप्रैल 2024 तक 24 कुंडीय राष्ट्र जागरण गायत्री महायज्ञ अनुष्ठान कार्यक्रम दीपयज्ञ विधान महायज्ञ आरती, मंगल कामना, प्रार्थना और जयकारों से युक्त जयघोषों के साथ हर्षोल्लास व शांतिपूर्वक सुसंपन्न हो गया। यज्ञ स्थल अशोक वाटिका, बैंक्वेट हॉल, रवि स्टील, कमड़े, रातू, रांची था। इस दौरान गायत्री यज्ञ टीम प्रतिनिधियों ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक, संरक्षक एवं अभिभावक वेदमूर्ति तपोनिष्ठ युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं स्नेह सलिला परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डालकर मानव में देवत्व का उदय, घर परिवार में सुखद वातावरण विस्तार एवं धरती पर स्वर्ग के अवतरण के लिये गायत्री (सद्ज्ञान) एवं यज्ञ (सत्कर्म) के तत्वदर्शन को जन मानस में अवतरित कराना आवश्यक है। गायत्री मंत्र के अवलंबन से एक ओर मनुष्य के सद्बुद्धि क्षमता का विस्तार, पर्यावरण का परिष्कार, विस्तार होता है, वहीं पर पूर्ण श्रद्धा सम्मत भाव से किये हुए महायज्ञ से पर्यावरण का परिष्कार, संवर्धन एवं समाज में सांस्कृतिक एकता, समरसता और भाई चारे का वातावरण निर्मित होता है। इस कार्यक्रम के विषय बिन्दु थे।सद्गुरु ज्ञान गंगा सदग्रंथ युग साहित्य की शोभायात्रा एवं मंगलजल कलश यात्रा युग संगीत एवं युग संदेश (आद्यशक्ति गायत्री-युगशक्ति गायत्री का उद्देश्य, आवश्यकता, उपयोगिगता, महत्ता, महा मंत्र जप-अनुष्ठान से शीघ्र लाभान्वित होना, गायत्री महायज्ञ का ज्ञान विज्ञान एवं देवपूजन, नारी सशक्तीकरण, नारी, सम्मान और नारी के उत्थान पर प्रकाश डाला गया और बताया गया कि जहां नारी का सम्मान है, वहीं घर में सुख शान्ति व स्वर्ग है।इस बीच कार्यकर्ता गोष्ठी (संगठनात्मक स्वरूप), संगीत प्रवचन (नारियों जागो, स्वर्य को पहचानो) विशाल पुस्तक मेला व वृक्ष गंगा नि:शुल्क वितरण अभियान, गायत्री महायज्ञ में विभिन्न संस्कार, सामूहिक पुंसवन संस्कर, संगीत प्रवचन, सत्कार्यों का अभिनंदन,21 वी सदी का सत्संकल्प पाठ व दीप माहयज्ञ के उद्देश्य, प्रवचन, महापूणार्हूति एवं टोली विदाई आदि रहा। महायज्ञ के आयोजक थे अखिल विश्व गायत्री परिवार, रांची। आज प्रात:काल से नौ दिवसीय नवरात्र अनुष्ठान सभी शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, मंडलों, इकाइयों सहित आनलाइन जप-अनुष्ठान व स्वाध्याय पाठ-संवाद मंडलों में भक्तिभाव से साधक-शिष्य भाई-बहन शामिल हो गये हैं। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद, राजपति कुमार और नीरज कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
गणगौर का त्यौहार स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य प्राप्ति का पर्व हैटीम एबीएन, रांची। गणगौर का त्यौहार 11 अप्रैल को मनाया जायेगा। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह अग्रवाल सभा के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गणगौर पर्व मारवाड़ी समाज का प्रमुख त्योहारों में से एक है। गणगौर पूजा हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को होती है इस दिन कुंवारी कन्या और सुहागन महिलाएं व्रत रखती है। माता पार्वती और साथ भगवान शिव की पूजा करती है। गणगौर दो शब्दों से बना है गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ पार्वती से है। वास्तव में गणगौर पूजन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का दिन नवरात्रि के तीसरे दिन यानी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला गणगौर का त्योहार स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य प्राप्ति का पर्व है। गणगौर का पहला और सबसे महत्वपूर्ण परंपरा मिट्टी के बर्तनों कुंडा में पवित्र अग्नि से राख इकट्ठा करना और उनमें गेहूं और जौ के बीज बोना है। तथा 7 दिनों के बाद महिलाएं राजस्थानी लोकगीतों को मंत्रमुग्ध करते हुए गौरी और ईसर की रंग बिरंगी मूर्ति बनाती है। मान्यता है कि कामदेव की पत्नी रति ने भगवान शंकर की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर लिया तथा उन्हीं के तीसरे नेत्र से भस्म हुए अपने पति को पुन: जीवन देने की प्रार्थना की रति की प्रार्थना से प्रसन्न हो भगवान शिव ने कामदेव को पुनः जीवित कर दिया था तथा विष्णु लोक जाने का वरदान दिया उसी के स्मृति में प्रतिवर्ष गणगौर का उत्सव मनाया जाता है। गणगौर पर्व पर विवाह के समस्त नेगाचार व रस्में की जाती है। होली के दूसरे दिन से प्रारंभ होकर 16 दिनों तक गणगौर पर्व चलता है। 26 मार्च से शुरू हुई गणगौर पर्व 11 अप्रैल को गणगौर विसर्जन के साथ संपन्न होगी।
टीम एबीएन, रांची। एदार ए शरीया झारखंड के नाजिमे आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी (6202583475) ने कहा है कि दिनांक 9 अप्रैल 2024को माहे रमजानुल मुबारक 1445 हिजरी की 29 तारीख है जिसमें ईद उल फितर का चांद नजर आने की संभावना है। सभी धार्मिक कार्यक्रम व इबादतें चांद की तारीख के अनुसार संपन्न होते हैं। अत:चांद देखने की भर पूर कोशिश करें अगर कहीं चांद नजर आ जाये तो दारुलकजा एदार ए शरीया झारखंड इसलामी मरकज हिंद पीडी रांची को सूचित करें। साथ ही अपने संबंधित जिला में काइम जिला या क्षेत्रीय रूयते हेलाल केंद्र (राज्य के 65 स्थानों से ज्यादा स्थानों में अवस्थित में से किसी भी एक) के जिम्मेदार आलिमे दीन को खबर करें, ताकि जरूरत पड़ने पर शरई शहादत हासिल की जा सके। 9 अप्रैल को चांद देखने के लिए काजीयाने शरीयत व उलेमा ए केराम दरगाह हजरत कुतुबुद्दीन रेसालदार डोरनडा रांची में मौजूद रहेंगे। चांद देखने के लिए एदार ए शरीया झारखंड ने राज्य भर में बडी व्यवस्था की है। एदार ए शरीया झारखंड रांची से संपर्क के लिए निम्न मोबाईल नंबर हैं : 62025 83475/ 98355 53380/ 91997 80992/ 97713 38239/ 99341 37121/ 98013 70638/ 99392 35678/ 70702 07995/ 73668 54786/ 93344 27997/ 93044 11329/ 98353 65215/ 91998 83085/ 96939 74786/ 88629 81017/ 62025 83475/ 98351 30183/ 98351 26780
मनुष्य को अन्य प्राणियों से सर्वश्रेष्ठ माना गया है... विषय पर चर्चा हुईएबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रज्ञा मंडल, महिला मंडल प्रतिनिधित्व में वरिष्ठ साधक परिवार ने अपने सुपौत्र शिवेश का जन्मदिवसोत्सव संस्कार अपने आवासीय गृह तपोवन में अपने ईष्टदेव को नमन-वंदन, अखंड दीप प्रज्ज्वलित व पंच देवतत्व का गायत्री युग यज्ञ पद्धति वैदिक विधान से पूजन-अर्चन कर हर्षोल्लास मनाया। इस दौरान वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ परम पूज्य गुरुवर श्रीआचार्य और शांतिकुञ्ज का संदेश भी सुनाकर संस्कार परंपरा पर बताया गया कि मनुष्य को अन्य प्राणियों से सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जन्मदिन वह पावन पर्व है, जिस दिन स्रष्टा ने हमें श्रेष्ठतम जीवन में पदोन्नत किया, श्रेष्ठ जीवन प्रदान करने के साथ स्रष्टा प्राणी से उसी अनुरूप में श्रेष्ठ आचरण की भी अपेक्षा रखता है। हमें अपने अंदर क्रमश: श्रेष्ठतर मानवोचित संस्कारों का विकास करने के संकल्प लेने चाहिए। युग ऋषि ने जन्मदिन को विवेक सम्मत संस्कार का रूप दिया है।जेएनपी ने बताया कि प्रचलित अनेक पर्व-त्यौहार मनाये जाते हैं, पर व्यक्तिगत दृष्टि से मनुष्य का अपना जन्मदिन ही उसके लिए सबसे बड़े हर्ष, गौरव एवं सौभाग्य का दिन हो सकता है।मौके पर गुरु ईश सहित पंचतत्त्व देव का पंचोपचार पूजन किया गया और शिक्षण एवं प्रेरणा में शिशु के माध्यम से उपस्थित आगंतुक अतिथि देवगणों को स्मरण कराया गया कि मानव शरीर पंचतत्त्व से बना है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश इन पांच तत्त्वों की विशेषता पर प्रकाश डाला गया। देवपूजन सहित दीपक व अगरबत्ती क्रमश: थाली में प्रज्ज्वलित कर पंचतत्व देवों का नमन वंदन और पंचोपचार पूजन-अर्चन कर एक भाव वंदना की गयी। मौके पर गायत्री परिवार साधक-शिष्य आनलाइन फेमिली सेलिब्रेशन समूह और उपस्थित परिवार जन व आगन्तुक परिजनों ने मंगलकामना व आशीर्वचन में बालक का नाम लेकर अक्षत-पुष्प की वर्षा व आशीर्वचन मंत्र पाठ कर उसकी दीघार्युष्य, स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्ज्वल भविष्य भव का संदेश व जयघोष किये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
नौ अप्रैल से चैत्र वासंतिक नवरात्र प्रारंभ, 17 अप्रैल को रामनवमीटीम एबीएन, रांची। इस वर्ष चैत्र वासंतिक नवरात्र 9 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। राष्ट्रीय सनातन एकता मंच एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि 9 अप्रैल को उदयातिथि में प्रतिपदा लगने के कारण इसी दिन से नवरात्र प्रारंभ हो जाएगा तथा घरों एवं मंदिरों में कलश की स्थापना कर मां की पूजा शुरू हो जायेगी। इस वर्ष चैती नवरात्रि की दुर्गा नवमी 17 अप्रैल को पड़ रहा है इसी दिन रामनवमी भी मनायी जायेगी। मान्यता है कि चैती नवरात्रि महानवमी तिथि पर देवी सिद्धिदात्री की पूजा करने से हर काम बन जाता है।मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए देवता, राक्षस, गंधर्व, ऋषि मुनि भी कठोर तपस्या किया करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि शिव जी ने देवी मां सिद्धि दात्री की कृपा से नौ सिद्धियों को प्राप्त किया था धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि आखिरी दिन माता रानी को लाल रंग की चुनरी चढ़ाने से सारे दु:ख परेशानी दूर हो जाते हैं और इसी दिन हवन करने की भी परंपरा है। इस दिन हवन करने से नवरात्रि की पूजा सफल हो जाती है। नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन हवन एवं सभी धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। चैती नवरात्रि के साथ प्रभु श्री राम का जन्म और रामराज्य की स्थापना का इतिहास जुड़ा है नवरात्रि मानसिक, शारारिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक होता है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने का विधान है। घट स्थापना से लेकर नवमी तिथि 9 दिनों तक लोग व्रत, पूजा पाठ आदि में लीन रहते हैं। नवरात्रि व्रत का मुख्य उद्देश्य अपनी इंद्रियों पर संयम रखना और आध्यात्मिक शक्ति का संचय करना है चैत्र नवरात्रि की महा नवमी पर व्रत रखने, कन्या पूजन और देवी पूजा करने से पूरे 9 दिनों की उपासना करने के समान फल प्राप्त होता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि दोनों में ही नवमी तिथि का प्रभु श्री राम से गहरा संबंध मिलता है। ऐसी मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि पर भगवान राम ने रावण का वध किया था और श्रीलंका पर विजय प्राप्ति की थी ऐसे ही चैत्र नवरात्रि की महानवमी पर राजा दशरथ के घर पुरुष अवतार के रूप में श्री राम का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को रामनवमी के रूप में जाना जाता है।
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