एबीएन सोशल डेस्क। आज सुबह श्वेताम्बर जैन मंदिर डोरंडा से सुबह 9 बजे भगवान महावीर की शोभायात्रा धूमधाम से गाजे बाजे के साथ निकली। श्रद्धालुओं के द्वारा जगह जगह पर अक्षत एवं नारियल अर्पण करके भगवान का स्वागत किया गया। जिसमें गायक अक्षय सेठिया ओर भजन मंडली के द्वारा भगवान महावीर के भजनों को सुनकर लोग झूम रहे थे। शोभा यात्रा जैन मंदिर डोरंडा से निकलकर एजी मोड़, हाइकोर्ट होते हुए वापस मंदिर पहुंची। इस वर्ष की शोभायात्रा में महिलाओं, बच्चों एवं समाज के लोगों ने काफी संख्या में उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें भगवान महावीर के जन्मोत्सव की झलकियां दिखायी गयी। भगवान महावीर के संदेश को घेवर चंद नाहटा, अमरचंद बैंगानी, उत्तम चोरडिया आदि ने बताया। महिलाओं और बच्चों ने नाट्य मंचन एवं नृत्य के माध्यम से भगवान महावीर के जीवनी एवं आदर्शों के बारे में बताया, जिसमें संतोष बैंगानी, सोनल नाहटा, प्रीति रामपुरिया, खुशबू दस्सानी, पूजा नाहटा, सोनू पारख, नेहा बैंगानी, भावना बैंगानी, दिशा बैंगानी, शालिनी बेगवानी, प्रीति बोथरा आदि ने गीत तथा मनमोहक नृत्य पेश किया। तेरापंथ युवक परिषद एवं श्रृंगार समिति ने शोभा यात्रा में जूस-पानी के सेवा की व्यवस्था की थी। मंच का संचालन खुशबु बोथरा, रिद्धि बांठिया ने किया। दोपहर 2 बजे से स्वामीवात्सल्य का कार्यक्रम हुआ। तत्पश्चात कार्यक्रम की समाप्ति हुई। संघ के अध्यक्ष संपत लाल जी रामपुरिया, सुभाष चंद बोथरा ने सभी को कार्यक्रम सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में छोटे लाल चोरड़िया, पूनम चंद भंसाली, मूल चंद सुराणा, प्रकाशचंद नाहटा, नवीन रामपुरिया, विनय नाहटा, संजय कोठारी, बालवीर बोथरा, ललित सेठिया, पंकज बोहरा, मयंक बेगानी आदि एवं सम्पूर्ण समाज का योगदान रहा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
सदग्रंथ जीते-जागते देवता होते हैं, उनका स्वाध्याय करना, उनकी उपासना करने के समान ही है... पर संवाद हुआएबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार युगतीर्थ के परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम आचार्य जी की लिखित पुस्तक इक्कीसवीं सदी का संविधान नामक युग साहित्य पुस्तक स्वाध्याय पाठ-संवाद के अंतर्गत आज रविवार को आध्यात्मिक जीवन संपदा के चार सूत्रों पर आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ। स्वाध्याय, सत्संग, चिंतन एवं मनन इन चारों आधारों पर मानसिक दुर्बलता को हटाना और आत्मबल बढ़ाना चाहिए। साथ ही चार संयम में इन्द्रिय संयम, अर्थ संयम, समय संयम, विचार संयम, चार शक्तिसूत्र में इंद्रिय शक्ति, समय शक्ति, विचार शक्ति, अर्थ (धन) शक्ति तथा चार सूत्र साधना, स्वाध्याय, संयम सेवा, तथा साथ ही समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी के सूत्रों पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि जीवन एक युद्ध स्थली है, जीवनसंग्राम में संयमी पुरुष कभी दु:खी नहीं होता तथा विश्रृंखलित व अस्त-व्यस्त विचार उसे प्रभावित नहीं कर पाते। संयम एवं संघर्ष पर चचार्एं हुई। ये एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। असंयम की परिणति ही दीन- हीन, दरिद्रता, रोग-शोक के रूप में होती है। जीवन देवता की उपासना तब ही भली प्रकार संभव है, जब अपने जीवन रसों को व्यर्थ बहाना छोड़कर मनुष्य उन्हें सृजनात्मक चिंतन व कर्त्तव्य में नियोजित करे। यदि व्यक्ति असंयम के दुष्परिणामों को भलीभाँति समझ जाये, तो आदर्श जीवन के भूतल पर स्वर्ग आ जाए तथा दु:ख दारिर्द्य सर्वथा समाप्त हो जाये। पूज्यवर श्रीगुरुदेव के उन विचारों पर प्रकाश डालकर बताया गया कि जीवन में खुशहाली व सद्ज्ञान के लिए स्वाध्याय का समय निकालना ही चाहिए। इसके लिए छोटा-सा आध्यात्मिक पुस्तकालय अपने-अपने घरों में शिक्षित लोग बना सकते हैं। पुस्तकें तो मांगकर भी पढ़ी जा सकती हैं। ज्ञान लेना और देना दोनों ही पुण्य कार्य समझकर किये जा सकते हैं। अपने परिवार में साप्ताहिक सत्संग किया जा सकता है। इसके लिए कोई सदग्रंथ, अखंड ज्योति, युग निर्माण योजना अथवा अपनी प्रज्ञा पुराण के प्रेरणाप्रद अंश पढ़कर सुनाए जा सकते हैं। सदग्रंथ जीते-जागते देवता होते हैं। उनका स्वाध्याय करना, उनकी उपासना करने के समान ही है। पाठ आरंभ गुरु-ईश नमन वंदन, गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व समापन शान्ति-पाठ से हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
राजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। रामनवमी के दिन लोग अपने घर में हनुमान जी की ध्वजा (जिसे हनुमान पताका के नाम से भी जाना जाता है) का आरोहण करते हैं। इसे विजय पताका के रूप में भी देखा जाता है। 17 अप्रैल को श्रीरामचंद्र जी के जन्मोत्सव को रामनवमी के रूप में मनाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार रामलला का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोहर 12:00 बजे हुआ था। इस वर्ष रामनवमी के दिन रवि योग बन रहा था, जिस कारण रामनवमी का महत्व और भी बढ़ गया। रामनवमी के दिन भगवान राम की पूजा अर्चना के साथ उनके अनन्य भक्त हनुमान जी की आराधना की जाती है। कहते हैं रामनवमी के दिन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के सभी प्रकार के संकट का हरण हो जाता है। साथ ही बजरंगबली की पूजा करने से प्रभु श्री रामचंद्र जी भी प्रसन्न हो जाते हैं। रामनवमी के दिन क्यों होती है हनुमान जी की पूजा रामनवमी के दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है, क्योंकि हनुमान जी भगवान श्री राम के सबसे अनन्य भक्त हैं और हनुमान जी की पूजा करने से प्रभु श्री रामचंद्र जी भी प्रसन्न होते हैं। रामनवमी के दिन लोग अपने घर में हनुमान जी की ध्वजा जिसे हनुमान पताका के नाम से भी जाना जाता है का आरोहण करते हैं। इसे विजय पताका के रूप में भी देखा जाता है। हनुमान पताका का रहस्य शास्त्रों के अनुसार कौरव-पांडव युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के आदेशानुसार अर्जुन के रथ पर स्वयं पवन पुत्र विराजित हुए। महाभारत युद्ध के दौरान हनुमान जी अर्जुन के रथ पर मौजूद उसके झंडे पर विराजमान थे। उन्होंने अर्जुन की पग-पग पर रक्षा की थी। महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तभी भीम और दुर्योधन के मध्य गदा युद्ध प्रारंभ हुआ।गदा युद्ध में भीम ने दुर्योधन को पराजित कर दिया। दुर्योधन को मृत अवस्था में छोड़कर सभी पांडव अपने शिविर में लौट आये। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को संबोधित करते हुए कहा कि हे पार्थ! सबसे पहले तुम अपने गांडीव धनुष और अक्षय तरकश को लेकर रथ से उतर जाओ। अर्जुन ने श्रीकृष्ण के निर्देशों का पालन किया। इसके बाद श्रीकृष्ण भी रथ से उतर गये। श्रीकृष्ण के रथ से उतरते ही अर्जुन के रथ पर झंडे में विराजित हनुमान जी भी रथ को छोड़कर उड़ गये। तभी अर्जुन का रथ जलकर भस्म हो गया। इस दृश्य को देखकर अर्जुन ने कृष्ण से रथ को जलने का कारण पूछा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि हे पार्थ! तुम्हारा रथ तो अनेक दिव्यास्त्रों के प्रभाव से पहले ही जल चुका था लेकिन तुम्हारे रथ पर मेरे और पवन पुत्र हनुमान जी के विराजमान रहने के कारण ही तुम्हारा यह रथ ठीक स्थिति में था। और हे अर्जुन जब तुम्हारा युद्ध कर्तव्य पूरा हो गया तो मैंने और हनुमान जी ने तुम्हारे रथ का त्याग कर दिया। इसलिए तुम्हारा रथ भस्म हो गया है। इसीलिए कहा जाता है रामनवमी के दिन जिस घर में हनुमान पताका फहरायी जाती है वहां पर हनुमान जी के साथ-साथ श्रीराम भी विराजमान होते हैं।
लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु मंगलपाठ, प्रार्थना व जयघोष एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज के तत्वावधान में रांची गायत्री शक्तिपीठें, प्रज्ञापीठें, मंडल इकाइयों एवं गृहे गृहे आवासीय तपोवनों तथा आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह में शामिल साधक-शिष्यों ने नववर्ष चैत्र नवरात्र नौदिवसीय अनुष्ठान की मंगलमय यज्ञीय अनुष्ठान किए और महापूर्णाहूति विधिवत वैदिक विधान से गुरु-ईश वंदना करके प्रभु श्रीरामलला व पंचायतदेव सहित सर्व देवपूजन विराट षोडशोपचार व स्वास्तिवाचन पाठ कर सोल्लास व श्रद्धापूर्वक संपन्न किया। नौदिवसीय साधना अनुष्ठान में देश-विदेश से जुड़े सभी वरिष्ठ साधक एवं नन्हे साधक जनों ने गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय महामंत्र का सामूहिक जप अनुष्ठान, मंत्र लेखन, ध्यान व स्वाध्याय में शामिल हुए और साधना अनुष्ठान की ऊर्जा शक्ति भगवत सत्ता व गुरुसत्ता के चरणों में नवयुग सृजन और विश्व कल्याण हेतु समर्पित किये। यज्ञीय अनुष्ठान की महापूर्णाहुति में साधकों ने सत्प्रवृत्ति संवर्धन, अशुभ निवारण, धर्म की जय, सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन, सर्वत्र मंगलमय वातावरण विस्तार और लोका समस्ता: सुखिनो भवन्तु भाव से यज्ञ भगवान की स्तुति वंदना की गयी। नौदिवसीय अनुष्ठान काल में स्वाध्याय मंडल में साधक-शिष्यों ने पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम आचार्य की लिखित पुस्तक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, रामायण की प्रगतिशील प्रेरणा, राम का नाम ही नहीं काम भी और रामायण में पारिवारिक आदर्श जीवन दर्शन पर सप्ताह स्वाध्याय पाठ व संवाद हुए। महापूणार्हुति उपरान्त जय-जय श्रीराम सहित कई मंगलमय जयघोष हुए। अंत में शांतिपाठ कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
मारवाड़ी महिला सम्मेलन ने रामपुर गांव के बच्चों के बीच शिक्षा संबंधित एवं खेल सामग्री का किया वितरण टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा द्वारा चलो गांव खुशियों की और प्रकल्प के तहत रामपुर गांव के बच्चों के बीच कॉपी, पेंसिल और रबड़ का वितरण किया गया और सभी बच्चों के बीच कविता पाठ की प्रतियोगिता करवायी गयी। प्रत्येक बच्चे को कुछ-कुछ आकर्षक उपहार भी दिये गये बच्चों को ज्ञानवर्धक एवं अच्छी-अच्छी बातें भी सिखायी गयी। जैसे कि उनको हम लोगों ने बताया कि किस तरीके से अपने आप को स्वच्छ रख के वह अपने आप को स्वस्थ रख सकते हैं। पर्यावरण की रक्षा एवं जल संरक्षण के बारे में भी जानकारी दी गयी। इस गांव के ग्रीन गार्डन स्कूल में निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरा बथवाल की तरफ से बच्चों के बीच में फुटबॉल, फुटबॉल की टीशर्ट, पेंट वितरित की गयी। यह सभी बच्चे रांची जिला की फुटबॉल टीम को रिप्रेजेंट करते हैं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने मे पूर्व अध्यक्ष बिना मोदी, मंजू गाडोदिया, छाया अग्रवाल, रीना सुरेखा, और प्रीति पोद्दार ने सहयोग दिया। उक्त जानकारी सम्मेलन की अध्यक्ष मधु सर्राफ और सचिव उर्मिला पाड़िया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
जनवरी में हुई थी प्रतिमा क्षतिग्रस्त टीम एबीएन, रांची। श्रीराम जानकी मंदिर हाउसिंग कालोनी बरियातू में एक साथ चौदह विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। ज्ञात हो कि 8 जनवरी को असामाजिक तत्वों ने रात में इन मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। उन्हें जयपुर, रांची और मयूरभंज के कारीगरों ने सफेद संगमरमर और काले ग्रेनाइट से बना डाला है। मूर्तियों में नर्मदेश्वर शिव लिंग, सिंदूरिया सिद्धि विनायक, पार्वती, कार्तिक काले ग्रेनाइट में, वरद हनुमान, कच्छप अवतार, सिंहवाहिनी दुर्गा, राजदरबार सफेद संगमरमर की आदमकद प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई। मंदिर के पुजारी पं. रामदेव पांडेय ने उक्त कार्यक्रम संपन्न कराया। जुमार नदी से जल यात्रा हुई। शाम को भंडारा संपन्न हुआ। मौके पर आचार्य बालकृष्ण, गोविंद पांडेय, मनोज पांडेय, आशुतोष पाठक, रजनीश पाठक, मनराज पांडेय, मंगल पांडेय, विद्या पांडेय, अनुराग पांडेय सहित अनेक ब्राह्मण यज्ञ में सम्मिलित रहे। आज के इस अनुष्ठान में जय सिंह, प्रतिमा सिंह, मेघा पांडेय, नवीन कुमार सिंह सहित अनेक यजमान रहे।
एबीएन सोशल डेस्क। नाट्य संस्था मैट्रिक्स (स्टेप फॉर ह्यूमनीटी) संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं कला संस्कृति विभाग झाराखण्ड सरकार के से आयोजित 3 दिवसीय नाट्य महोत्सव (नट रंग -3) का समापन नाटक राज रक्त का मंचन हुआ जिसमें नाटक राज रक्त एक पोलिटिकल ड्रामा है, जिसमें हम देखते हैं कि राज्य के कई उच्च पद के लोग एक साथ मिलकर राजा को गद्दी से हटाना चाहते हैं पर उन्हें कोई रास्ता नहीं नज़र आता।कहानी में एक मोड़ ऐसा आता है जहां राजा अपनी प्रजा की भलाई के कुछ ठोस कदम उठाते हैं, जिसका राज्य के कई पद धारी लोग साथ नहीं देते और उनके खिलाफ हो जाते हैं। बस यही मौका उन उच्च कुल के लोगों को मिलता है जिसमें राजा का भाई नक्षत्रराय, राजा की पत्नी गुणवती और राज्य का पुरोहित रघुपति शामिल होते हैं, वे सभी नक्षत्रराय को राजा बनाने की लालसा देते हैं और उसे राजा के गोद लिए हुए पुत्र ताता की हत्या करवाने को उकसाते हैं।जब ये बात पुरोहित के द्वारा पोषित पुत्र जयसिंह को पता चलती है, तो वो अपने पिता का साथ नहीं देना चाहता और उसे समझने की बेजोड़ कोशिश करता है। पर रघुपति अपने पुत्र की बात नहीं सुनता और कोई रास्ता ना पाकर जयसिंह स्वयं की जान दे देता है।इधर नक्षत्रराय ताता को मारवा देता है। जब ये बात राजा को पता चलती है तो वो अपने भाई और पुरोहित को देश से 8 वर्ष के निर्वासन का दंड देता है। पुरोहित आत्मग्लानि में राज्य छोड़ कर चला जाता है पर नक्षत्रराय अपने भाई को मारने का निश्चय करता है।नक्षत्ररय राज्य के बाहर के मुगल दुश्मनों से मिल जाता है और अपने भाई पर हमला कर के उसे मार देता है। गोविंद के मरने पर वो राज्य का राजा बन जाता है और गुणवती उसकी पत्नी। राजा बनने के बाद वो पुराने राजा के सभी को हटा कर अपने बनाये कानूनों को लागू कर देता है।सोनु सोनार, शिवांग चौबे, शंकर पाठक, अंकिता केरकेट्टा, शर्मिष्ठा शर्मा, अंकित कुमार, शाश्वत चौधरी, किरणमय महतो, सनी देवगम, सुजल पासवान, श्वेता, सुशांत सरीन, गिरीश दत्त, मणिकांत और आकांक्षा ने इस नाटक में कमाल का अभिनय किया है, म्यूजिक - अभिराज कुमार, मेकअप - रीतू रागिनी और लाइट दिबाशीष दा ने किया।
ईश्वरीय संकल्प शक्ति, एकोऽहंबहुस्याम,मनुष्य ईश्वर का अंश है,कई विषय पर संवाद हुआएबीएन सोशल डेस्क। शांतिकुञ्ज के तत्वावधान में गायत्री परिवार शिष्य-साधकों, परिजनों का भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2081 चैत्र शुक्ल पक्ष नौदिवसीय गायत्री महामंत्र का लोकप्रिय जप-अनुष्ठान हर एक शक्तिपीठ, मंडल इकाई, शाखा व आवासीय तपोवन गृहे गृहे प्रारंभ है। इसमें नवयुग सृजन अभियान के अंतर्गत बाल-संस्कार पाठशाला के भी छोटे बालक वृंद भी परिवार जनों के साथ सीधे शांतिकुञ्ज गतिविधि के मार्गदर्शन में जुड़े हुए हैं।साथ ही साधक-शिष्यों का आनलाइन स्वाध्याय मंडलप्रतिनिधित्व में स्वाध्याय पाठ व संवाद जारी हैं। इसमें पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्यजी की एक लिखित पुस्तक इक्कीसवीं सदी का संविधान पर भी आज-कल स्वाध्याय हो रहा है। इस के अंतर्गत ईश्वरीय संकल्प शक्ति, एकोऽहंबहुस्याम, मनुष्य ईश्वर का अंश है, हम बदलेंगे-युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा, संकल्प की शक्ति अपार है, जैसे विषय बिंदुओं पर पाठक व श्रोतागणों का संवाद चल रहा है। बताया कि इस पुस्तिका में अट्ठारह संकल्प सूत्र हैं, जिसे 21 वीं सदी उज्ज्वल भविष्य के लिए आध्यात्मिक स्तर पर बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें चार सूत्रों पर पठन-पाठन व विचार विमर्श हुए : हम ईश्वर को सर्वव्यापी, न्यायकारी मानकर उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतारेंगे शरीर को भगवान का मन्दिर समझकर आत्म- संयम और नियमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करेंगे मन को कुविचारों और दुर्भावनाओं से बचाये रखने के लिए स्वाध्याय एवं सत्संग की व्यवस्था रखे रहेंगे इंद्रीय- संयम, अर्थ- संयम, समय- संयम और विचार- संयम का सतत अभ्यास करेंगे इसके साथ साथ ईश्वर का उपहार व दंड दोनों असाधारण है, इसपर चर्चाएं हुर्इं। इस पुस्तक का नाम 21वीं सदी का संविधान नाम दिया गया है। नवयुग निर्माण अभियान का घोषणा पत्र कहा गया है। बताया गया कि यह नव युग निर्माण अभियान व संकल्प सूत्र हम में से प्रत्येक को दैनिक धार्मिक कृत्य की तरह इसे नित्य प्रात:काल पढ़ना चाहिए। पूज्यवर ने बताया है कि संकल्प की शक्ति अपार है। यह विशाल ब्रह्मांड परमात्मा के एक छोटे संकल्प का ही प्रतिफल है। परमात्मा में इच्छा उठी एकोऽहं बहुस्याम मैं अकेला हूं- बहुत हो जाऊं, उस संकल्प के फलस्वरूप सारा संसार बनकर तैयार हो गया। मनुष्य के संकल्प द्वारा ही इस ऊबड़- खाबड़ दुनिया को ऐसा सुव्यवस्थित रूप मिला है। यह उसकी ऐसी इच्छा, आकांक्षा व संकल्प बल का परिणाम है। पाठ-संवाद में बताया हम गया कि मानव को ईश्वर का अंश कहा गया है। यह उपलब्धि स्वर्णिम सौभाग्य की है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी समाज का लोकप्रिय त्योहार गणगौर पर्व उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह अग्रवाल सभा के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गणगौर पर्व मारवाड़ी समाज का प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व होली दहन के दूसरे दिन से लगातार 16 दिनों तक कुंवारी लड़कियां एवं नवविवाहिता द्वारा ईशर-गोरा (शिव पार्वती) की पूजा करती है। आज सभी महिलाएं राजस्थानी परंपरागत पोशाक पहनकर पूरे विधि विधान से गणगौर की पूजन की। गणगौर को पारंपरिक व्यंजनों में मिठाई, फल, हलवा पूड़ी और गेहूं चढ़ाया गया। अनुष्ठान के साथ उद्यापन किया गया। महिलाएं आपस में अबीर-गुलाल लगायी। राजस्थानी गणगौर की मंत्रमुग्ध लोकगीतों के साथ नाचते गाते तथा तालाबों में गणगौर की प्रतिमा के विसर्जन के साथ 16 दिनों से चल रहा गणगौर महोत्सव का समापन हुआ। गणगौर पूजा हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को होती है इस दिन कुंवारी कन्या और सुहागन महिलाएं व्रत रखती है। माता पार्वती और साथ भगवान शिव की पूजा करती है। गणगौर दो शब्दों से बना है गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ पार्वती से है। वास्तव में गणगौर पूजन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का दिन नवरात्रि के तीसरे दिन यानी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला गणगौर का त्योहार स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य प्राप्ति का पर्व है। गणगौर पर्व पवित्रता, भक्ति, वैवाहिक प्रेम का प्रतीक तथा सामूहिक पूजा, प्रार्थना और उत्सव के माध्यम से पारिवारिक बंधन, सामूहिक सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देता है।
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