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सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान - वर्ष 2024 के पाँचवें चरण में 436 पौधौं का रोपण सह वितरण
Published / 2024-08-18 22:02:05
सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान - वर्ष 2024 के पाँचवें चरण में 436 पौधौं का रोपण सह वितरण

टीम एबीएन, रांची। रविवार को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, राँची) के द्वारा सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान : वर्ष - 2024 का पाँचवें चरण का आयोजन ग्राम - दुबलिया, प्रखण्ड - कांके,  जिला - रांची में किया गया जिसमें 436 पौधों का रोपण सह वितरण किया गया। ग्राम - दुबलिया के अखड़ा मैदान में ग्रामीण बंधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी कर श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय दिया गया तथा समूह द्वारा किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी ग्रामीण बंधुओं को अवगत कराया गया।  साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत करते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।  गोष्ठी के बाद ग्रामीण बंधुओं के बीच आम, अमरूद, मोहगनी, सागवान, अर्जुन, सीसम, मौलसरी, दालचीनी इत्यादि के 400 पौधों का वितरण किया गया। इसके उपरान्त स्थानीय ग्रामीण बंधु श्री अजय कुजूर एवं अन्य ग्रामीण बंधुओं के बागान में लगभग 36 पौधों का रोपण भी किया गया। ज्ञात हो कि अभी तक सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान - वर्ष 2024 के अंतर्गत पांच चरणों में लगभग 1416 पौधों का वित्रण एवं रोपण किया जा चुका है। यह वृक्षारोपण अभियान पूरे वर्षा ऋतु में चलाया जाएगा। कार्यक्रम में दुबलिया ग्राम से ग्राम प्रधान सतीश तिग्गा, संदीप उरांव एवं अजय कुजूर शामिल हुए एवं सहयोग किया। समस्त कार्यक्रम के आयोजन में आशुतोष नाथ शाहदेव ने विशेष एवं सराहनीय सहयोग प्रदान किया। श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची की ओर से नवल किशोर सिंह, सुनील सिंह, उदय नारायण पाण्डेय, गंगाधर नाथ शाहदेव, अंजनी कुमार सिंह, द्वेद नाथ शाहदेव, श्री सौरभ राज, उदित सिंह, नागदमनी नाथ शाहदेव, राधा मोहन मिश्रा, बद्रीनाथ शाहदेव, ऋषभ सिंह, राजेन्द्र साहु, सोमेश्वर नाथ शाहदेव, मानवेन्द्र नाथ शाहदेव, यदुनाथ शाहदेव के साथ शाखा के लगभग 20 सदस्यगण शामिल हुए।

गायत्री परिवार ने धुर्वा में किया गायत्री मंत्र का सामूहिक जप-अनुष्ठान
Published / 2024-08-16 20:08:34
गायत्री परिवार ने धुर्वा में किया गायत्री मंत्र का सामूहिक जप-अनुष्ठान

टीम एबीएन, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची में गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व में गायत्री महामंत्र का समूह जप- अनुष्ठान, सत्संग, भजन हुआ। फिर युग निर्माण योजना पत्रिका का स्वाध्याय पाठ हुआ। इस क्रम में वरिष्ठ-साधिका दीदी ने बताया कि स्वाध्याय एक उच्चस्तरीय सत्संग है और ज्ञान ही प्रगति की आधारशिला है।ज्ञान रहित मनुष्य मानवीय जीवन व उसकी गरिमा का अर्थ नहीं समझ पाता है।आज मनुष्य जितनी प्रगति कर सका है, उसके महत्वपूर्ण आधारों में एक बौध्दिक संपदा भी है ,जिसका पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षण व संवर्द्धन भी है।आध्यात्मिक ज्ञान में इसके संशोधन, संवर्धन व परिमार्जन के लिए विचारों को ठीक  दिशा में गतिशील व विकसित होना चाहिए। बताया कि विचारों का विकास एवं उनकी निर्विकारिता दो बातों पर निर्भर है... सत्संग व स्वाध्याय।सकारत्मक सोच को बढ़ाने के लिए स्वाध्याय करना चाहिए। नकारात्मक सोच से बाहर निकलना हो तो सकारात्मक सोच को बढ़ाने के लिए स्वाध्याय करना चाहिए। कहा कि स्वाध्याय से मन शुभ व सद्विचारों की ऊर्जा से भर जाता है। मनन एवं चिन्तन से मन की क्रियाशीलता बढ़ती है तथा श्रेष्ठ विचारों को आकर्षित करने का माध्यम बन जाता है।  कल स्वतंत्रता-दिवस पर शक्तिपीठ में गायत्री परिवार शिष्य-साधकों और  युग निर्माण कन्या विद्यालय के छात्र छात्राओं और आचार्यों ने बड़ी धूमधाम व उत्साहपूर्वक ध्वजारोहण किया और अनेकानेक उत्कृष्ट एवं सराहनीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में यह महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक प्रदर्शित किया। धूर्वा बस स्टैंड पास गायत्री प्रज्ञापीठ मंदिर परिसर में भी हर्षोल्लास पूर्वक विशिष्ट अतिथियों सहित स्वतंत्रता-दिवस मनाया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

जानिये कैसे हुई भद्रा की उत्पत्ति, क्यों भद्रा से भय खाते हैं लोग...
Published / 2024-08-10 21:12:31
जानिये कैसे हुई भद्रा की उत्पत्ति, क्यों भद्रा से भय खाते हैं लोग...

राजकुमारी पाण्डेय एबीएन सोशल डेस्क। ऐसा माना जाता है कि दैत्यों को मारने के लिए भद्रा गर्दभ (गधा) के मुख और लंबे पूंछ और 3 पैरयुक्त उत्पन्न हुई। पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य नारायण और पत्नी छाया की कन्या व शनि की बहन है। भद्रा काले वर्ण, लंबे केश, बड़े दांत वाली तथा भयंकर रूप वाली कन्या है। इसका स्वभाव भी शनि की तरह ही कड़क बताया गया है। जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी।क्या है भद्रा और क्यों इसे अशुभ माना जाता हैउसके दुष्ट स्वभाव को देखकर सूर्यदेव को उसके विवाह की चिंता होने लगी। वे सोचने लगे कि इस दुष्ट कुरूपा कन्या का विवाह कैसे होगा? सभी ने सूर्यदेव के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया। तब सूर्यदेव ने ब्रह्माजी से उचित परामर्श मांगा। ब्रह्माजी ने तब विष्टि से कहा कि भद्रे! बव, बालव, कौलव आदि करणों के अंत में तुम निवास करो तथा जो व्यक्ति तुम्हारे समय में गृह प्रवेश तथा अन्य मांगलिक कार्य करे, तो तुम उन्हीं में विघ्न डालो। जो तुम्हारा आदर न करे, उनका कार्य तुम बिगाड़ देना। इस प्रकार उपदेश देकर ब्रह्माजी अपने लोक चले गये। तब से भद्रा अपने समय में ही देव-दानव-मानव समस्त प्राणियों को कष्ट देती हुई घूमने लगी। इस प्रकार भद्रा की उत्पत्ति हुई और यही कारण है कि भद्राकाल में किये गये कार्यों में वह विघ्न-बाधा उत्पन्न करती है।

नाग पंचमी पर नाग देव की पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-समृद्धि
Published / 2024-08-08 21:01:33
नाग पंचमी पर नाग देव की पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-समृद्धि

राजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। नाग पंचमी को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। ब्रह्म पुराण में वर्णन मिलता है कि ब्रह्मा जी ने सांपों को नाग पंचमी के दिन पूजे जाने का वरदान दिया था। इस तिथि को लेकर कई मान्यताएं मौजूद हैं जिनमें से एक यह भी है कि इस तिथि पर रोटी नहीं बनानी चाहिए।  हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी मनाई जाती है। इस साल नाग पंचमी का पर्व शुक्रवार, 09 अगस्त को मनाया जायेगा। इस तिथि भगवान शिव के साथ-साथ नाग देवता की पूजा का भी विधान है। रोटी भारतीय व्यंजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन नाग पंचमी के दिन रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता। चलिए जानते हैं इसका कारण...नाग पंचमी का महत्वधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा-अर्चना से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही इस दिन खेतों में फसलों की रक्षा के लिए भी नाग देवता की पूजा की जाती है। नाग पंचमी के दिन नाग देव की आराधना से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।इसलिए नहीं बनती रोटीनाग पंचमी के दिन लोहे से बनी चीजों का इस्तेमाल करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोटी बनाने के लिए जिस तवे का इस्तेमाल किया जाता है उसे नाग के फन से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नाग पंचमी पर चूल्हे पर तवा रखने से नाग देवता नाराज हो सकते हैं। साथ ही तवे को राहु के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है और नाग पंचमी पर इसके इस्तेमाल से कुंडली में राहु ग्रह का प्रभाव बढ़ सकता है। ऐसे में नाग पंचमी पर तवे पर रोटी बनाने से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है।

बांग्लादेश में हिदुओं सुरक्षा पर नजर रखे सरकार : विहिप
Published / 2024-08-07 21:56:46
बांग्लादेश में हिदुओं सुरक्षा पर नजर रखे सरकार : विहिप

विहिप की पहल : बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो इसकी केंद्र सरकार करे कड़ी पहल टीम एबीएन, रांची। बुधवार को विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने कहा कि विचित्र अनिश्चितता, हिंसा, हिंदू नरसंहार और अराजकता के बीच अशांत बांग्लादेश में हिंदुओं का जीवन भयभीत एवं असुरक्षित भरा है, जो सनातन हिंदू समाज के लिए चिंतनीय विषय है। हसीना सरकार के त्यागपत्र और उनके देश छोड़ने के बाद अन्तरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया के बीच भी हिंदू नरसंहार, हिंदुओं के प्रतिष्ठानों में लूटपाट, हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ जारी है।  डॉ साहु ने कहा पंचगढ़ जिले में 22 घर, झीनैदाह में 20 घर व जैसोर में 22 दुकानें सहित पूरे बांग्लादेश में हिंदू तथा हिंदुओं के प्रतिष्ठानों कट्टरपंथियों के निशाने बने तथा अनेक जिलों में तो शमशान तक तोड़ दिए गए। मंदिर और गुरुद्वारों को भी क्षति पहुंचायी गयी है। बांग्लादेश में शायद ही कोई जिला बचा हो जो इनकी हिंसा व आतंक का निशाना न बना हो। डॉ साहु ने कहा बांग्लादेश में 32% से अब 8% बचे हिंदू लगातार जिहादी उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में विश्व समुदाय की यह जिम्मेवारी है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा व मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कार्यवाही करें। डॉ साहु ने कहा बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो इसकी केंद्र सरकार कड़े पहल करे। उक्त जानकारी विहिप के झारखंड-बिहार क्षेत्र सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

समाज के सभी वर्गों को जोड़कर प्रखंडों में बड़ा कार्यक्रम करेगा विहिप
Published / 2024-08-06 21:18:54
समाज के सभी वर्गों को जोड़कर प्रखंडों में बड़ा कार्यक्रम करेगा विहिप

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिन्दू परिषद, झारखंड प्रांत की टोली बैठक रांची स्थित प्रांत कार्यालय शक्ति आश्रम किशोरगंज चौक रांची में की गयी। बैठक की अध्यक्षता प्रांत अध्यक्ष माननीय चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में हुई। जिसकी शुरुआत संगठन में तीन बार प्रणवोच्चार, एकता मंत्र, व तेरह बार विजय महामंत्र से हुआ। बैठक में गत माह हुए कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी। आगामी कार्यक्रमों के संदर्भ में  प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने बताया विश्व हिंदू परिषद की स्थापना श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन 1964 ईस्वी में हुई थी। यह वर्ष 2024 संगठन का षष्टिपूर्ति वर्ष है। इस अवसर पर समाज के सभी वर्गों को जोड़कर प्रखंडों में बड़े कार्यक्रम करने की योजना है। इसकी तैयारी के लिए सभी जिलों में प्रखंडवार बैठक कर षष्ठिपूर्ति वर्ष का समापन समारोह हेतु कार्यक्रम संयोजक बनाया जायेगा। आगामी कार्यक्रमों में अखंड भारत संकल्प दिवस, पूजन, आगामी प्रांत बैठक में नवीन कार्यकर्ताओं की सूची, समिति पूर्ण कर सूची संकलन करना, समिति सत्यापन, सत्संग विस्तार रामायण ज्ञान परीक्षा आदि के विषय में विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में क्षेत्र सहमंत्री डॉ. बीरेंद्र साहू, प्रांत कार्याध्यक्ष तिलकराज मंगलम, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख किशुन झा,विभाग बजरंग दल प्रांत संयोजक दीपक ठाकुर, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख अरविन्द सिंह, प्रांत विशेष सहप्रमुख प्रिंस अजमानी, प्रांत परियोजना सहप्रमुख रेनू अग्रवाल, विभाग मंत्री विनय कुमार, अनूप यादव रवि शंकर शर्मा, विभाग संगठन मंत्री दीपक मंडल ,कौलेश्वर टुडू आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

युग निर्माण कन्या विद्यालय का 14वां स्थापना वर्ष बालकों ने धूमधाम से मनाया
Published / 2024-08-05 21:13:07
युग निर्माण कन्या विद्यालय का 14वां स्थापना वर्ष बालकों ने धूमधाम से मनाया

टीम एबीएन, रांची। आज सोमवार गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर स्थित युग निर्माण कन्या विद्यालय के प्रधानाचार्य, आचार्यों की टीम और बच्चों ने बड़े धूमधाम व उत्साहपूर्वक गीत, नृत्य, संगीत धुन और संवाद के साथ मनाया। प्रधानाचार्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर भावपूर्ण सस्वर पाठ से गुरुवंदना, पूजन-अर्चना और उद्बोधन किया। बताया कि विद्यालय के प्रथम स्थापना दिवस पर 5 बच्चों का प्रवेश व उस वर्ष की दशा दिशा पर अपने विवरण प्रस्तुत किये। क्रमश: आज पौने दो सौ बच्चों के प्रवेश, शिक्षा, विद्या, कला कौशल और उनके उदय-भाग्योदय का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किये। बच्चों के पारिवारिक दिनचर्या पर बताया कि वे जागरण बेला में धरती माता का प्रात: नमन-वंदन करते हैं, दैवी सत्ता का स्मरण एवं माता-पिता का चरण स्पर्श प्रणाम करना सिखाया गया है और  छात्र करते है भी, ऐसा बच्चों ने हाथ उठाकर जवाब दिये। आगे उन्होंने युग निर्माण कन्या विद्यालय के भावार्थ व अभिप्राय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरुवर श्रीराम शर्मा आचार्य जी का जो ध्येय रहा है, उसी के अनुरूप यहां सामान्य शिक्षा कला के साथ साथ संस्कार विद्या का समावेश है। गायत्री परिवार जिला समन्वयक ने अपनी दुगुनी खुशी अभिव्यक्त कर कहा कि इस विशेष अवसर की उपस्थिति पर और इस युग निर्माण नामक विद्यालय की प्रगतिशील संस्कार युक्त शिक्षा ही नहीं अपितु जीवन विद्या युक्त वातावरण पर बहुत संतोष व खुशी है। गुरुवर श्रीपूज्यवर वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पं श्रीरामशर्मा आचार्यजी के विशेष विषयगत लेखन पर जिला समन्वयक ने बताया कि गायत्री परिवार का गुरुमंत्र है :- युग निर्माण योजना और वह कैसे होगा तो व्यक्ति के नवनिर्माण से, वह कैसे होगा तो संस्कारवान परिवार व पीढ़ी के नवसृजन से। कहा कि  भारतवर्ष संस्कार परम्परा का आधार स्तम्भ रहा है। यहां सुगढ़ परिवार व्यवस्था एवं गुरुकुल परम्परा के माध्यम से  बाल विद्यार्थियों में श्रेष्ठ संस्कार देने की परम्परा रही है। आज भारतीय संस्कृति देव संस्कृति की स्थिति चिन्ताजनक है। भारतीय संस्कृति और दर्शन में संस्कारों का विशेष महत्व है। यह भारत विकास परिषद रांची मध्य शाखा और गायत्री परिवार एवं विद्यालय के अध्यापन टीम के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रथम कक्षा से पांचवी कक्षा के बच्चों ने सांस्कृतिक महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया, जिसमें झारखंडी, आदिवासी नृत्य संगीत, लालबहादुर शास्त्री की भूमिका, गुलाबी रंग साड़ी में नृत्य, घर मोर परदेशिया नृत्य, फैंसी डांस, भोजपुरिया नाच,कविता पाठ में बहुत सुन्दर सराहनीय संदेश दिये। अंत में शांति पाठ, बधाई संदेश व उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ और विकास परिषद टीम की ओर से प्रसाद व मिष्ठान वितरण हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

सच्ची भक्ति से कैंसर भी ठीक होगा : संत रामपाल जी महाराज
Published / 2024-08-04 22:02:50
सच्ची भक्ति से कैंसर भी ठीक होगा : संत रामपाल जी महाराज

कुंभराज के मांगलिक भवन में एलईडी टीवी पर प्रसारित हुआ सत्संगएबीएन न्यूज नेटवर्क, मध्य प्रदेश गुना। रविवार को जिले के तहसील कुंभराज के डॉ अंबेडकर मांगलिक भवन में संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आसपास के तहसीलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सत्संग सुनने पहुंचे सत्संग में संत रामपाल जी ने सभी धर्मों और पंथों में फैले पाखंड के प्रति सचेत किया तथा शास्त्र अनुकूल सत्य आध्यात्मिक ज्ञान और पूर्ण मोक्ष मार्ग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सच्चे संत से सच्ची भक्ति करने से कैंसर क्या,  कैंसर का बाप भी ठीक हो सकता है।संत रामपाल जी के अनुयायियों द्वारा जगह-जगह सत्संग के माध्यम से आम जनता में आध्यात्मिकता के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही, संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान किए जा रहे सभी धर्मों के सत शास्त्रों से प्रमाणित तत्वज्ञान का प्रचार-प्रसार कर जनता को सतभक्ति का मार्ग बता रहे हैं।इस मार्ग को अपनाकर लोग तंबाकू, शराब, मांस जैसे व्यसन तथा चोरी, मिलावट, भ्रष्टाचार, दहेज और भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों को छोड़कर एक बेहतर जीवन जी रहे हैं और सभ्य समाज का निर्माण कर रहे हैं। इस प्रकार के सत्संग कार्यक्रमों से लोग न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी ला रहे हैं।संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के माध्यम से लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सत्संग में उपस्थित सेवादार धर्मेंद्र दास, हंसराज दास, करण दास, मुकेश दास, कमल दास,बाबूलाल दास, मुराली दास, कल्याण दास सीताराम दास, बिहारी दास आदि सेवादार मौजूद रहे।

गायत्री परिवार महिला मंडल ने सावन महोत्सव हर्षोल्लास पूजन-अर्चन सहित मनाया
Published / 2024-08-02 21:30:18
गायत्री परिवार महिला मंडल ने सावन महोत्सव हर्षोल्लास पूजन-अर्चन सहित मनाया

इस अवसर पर व्यवस्थापक ने बताया कि श्रावणी पर्व ब्राह्मणत्व और ऋषित्व के अभिवर्धन का पर्व हैएबीएन सोशल डेस्क। शुकवार सावन माह त्रयोदशी दिवस पर गायत्री युग तीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में सुबह युगावतार महाकाल का रूद्राभिषेक पूजन विस्तार से महिला मंडल द्वारा कराया गया। अपराह्न में गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व एवं भारत विकास परिषद रांची मध्य शाखा के संयुक्त तत्वावधान में सावन महोत्सव हर्षोल्लास और सानंद मनाया गया। महिला मंडल ने देवमंच बनाया, सजाया और भगवान भोलेनाथ परिवार देवगणों का पंचोपचार पूजन किया। इस दौरान पीठ व्यवस्थापक टीम को मंगल तिलक कर स्वागत अभिनन्दन किया गया। आयोजक टीम ने गायत्री महामंत्र का मंत्रोच्चारण, गुरु-ईश ध्यान नमन वंदन किया। दीप प्रज्ज्वलित कर सावन महोत्सव आयोजन का शुभारंभ किया गया और सावन माह के पर्व त्यौहार और महोत्सव आयोजन पर प्रकाश डाल बताया कि श्रावण मास अनेक पौराणिक महत्व से भरा हुआ है। इस अवसर पर व्यवस्थापक ने बताया कि श्रावणी पर्व ब्राह्मणत्व और ऋषित्व के अभिवर्धन का पर्व है। इस पावन मास में वेद पूजन व ऋषि पूजन का महत्व है। वेद अर्थात् सद्ज्ञान और ऋषि अर्थात सद्ज्ञान को सत्कर्म में परिणित करने कष्ट- साध्य साहसिक तपश्चर्या और भूल का प्रायश्चित करना। यह शिखा स्थापन, सिंचन, यज्ञोपवीत व द्विजत्व के संकल्प का एक प्रकार वार्षिक नवीनीकरण संस्कार है। इसका निरीक्षण व विश्लेषण करते रहना चाहिए। सहायक साधक ने बताया कि हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी महीने में भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को पीकर देवगणों और दुनिया को हानि से बचाने और दुष्प्रभावों से बचाया था। इन संदेशों के पश्चात भारत विकास परिषद के बैनर तले महिला मंडल ने हरियाली पर्व पर प्रकाश डाला। सभी हरे रंग निशान, पोशाक परिधान श्रृंगार में शामिल थीं। इनके महत्व पर प्रकाश डालकर अपना सावन का सांस्कृतिक महोत्सव हर्षोल्लास व सानन्द मनाया। बताया कि सावन माह का आनंद एक अलग ही पहचान है। इन दिनों में सर्वत्र हरियाली की छत्रछाया छायी व दिखायी पड़ती है, जो तन-मन को उल्लास, उत्साह से आनन्दित करती है। फिर बम बम बोलो, जय जय बोलो भोलेनाथ की मंगलमय ध्वनि से वातावरण गुंजायमान किये और सबका परस्पर स्नेह सौहार्द व सत्कार कर लोकगीत, प्रज्ञागीत, भजन-कीर्तन एवं नृत्य करते हुए खूब आनंद  मनाया। अंत में सबको प्रसाद व प्रीति पेय कराके सबको हार्दिक बधाई व धन्यवाद देकर शांतिपाठ व वंदना कर सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और आनंदमय मंगलमय भविष्य की शुभकामनाएं कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद और व्यवस्थापक जटाशंकर झा ने दी।

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