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27 और 28 को जोधपुर में होगी विहिप केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक
Published / 2024-07-23 18:47:53
27 और 28 को जोधपुर में होगी विहिप केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक

क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू (झारखंड-बिहार) व प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र आज रांची से रवानाटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद  केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक आगामी 27-28 जुलाई को राजस्थान के जोधपुर जिले में होगी। बैठक में देश के संपूर्ण प्रांतों के लगभग ढाई सौ कार्यकर्ता शामिल होंगे। बैठक में विगत 6 माह की कार्यक्रम यथा श्री रामोत्सव, श्री हनुमान जन्मोत्सव सहित अन्य वार्षिक कार्यक्रमों तथा विहिप, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी व मातृशक्ति  प्रशिक्षण वर्ग, सेवा कार्य सहित विभिन्न आयाम की समीक्षा के साथ आगामी 6 माह के कार्यक्रमों की योजना बनायी जायेगी। बैठक में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर चिंतन एवं आवश्यकतानुसार विषयों पर प्रस्ताव भी लाया जायेगा। बैठक में सम्मिलित होने के लिए झारखंड प्रांत के प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू (झारखंड - बिहार) व प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र आज रांची से प्रस्थान हुए। बैठक में क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार, क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल एवं प्रांत संगठनमंत्री देवी सिंह भी शामिल होंगे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार, प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

नौ धर्मों के धर्मगुरुओं ने लिया बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प
Published / 2024-07-22 22:06:50
नौ धर्मों के धर्मगुरुओं ने लिया बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प

बाल विवाह मुक्त भारत राज्यों के साथ मिलकर जागरूकता के प्रसार के साथ कानूनी हस्तक्षेपों के इस्तेमाल से बाल विवाह की रोकथाम के लिए काम कर रहा है बाल विवाह पर नई दिल्ली में अंतर धार्मिक संवाद में 17 धार्मिक नेताओं ने एक सुर से कहा, कोई भी धर्म बाल विवाह की इजाजत नहीं देता धार्मिक नेताओं ने सभी धार्मिक स्थलों पर बाल विवाह के खिलाफ जानकारी प्रदर्शित करने का समर्थन किया इस अनूठे और अभिनव संवाद का आयोजन बाल विवाह मुक्त भारत के गठबंधन सहयोगी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन ने किया  एबीएन सोशल डेस्क। सभी धर्मों में बाल विवाह की स्वीकार्यता और सामाजिक धारणाओं में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में एक कदम उठाते हुए, नौ धर्मों के धार्मिक नेताओं ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया। ये धार्मिक नेता बाल विवाह मुक्त भारत के गठबंधन सहयोगी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की ओर से बाल विवाह के खिलाफ अंतर धार्मिक संवाद में इकट्ठा हुए थे। कार्यक्रम में उपस्थित धार्मिक नेताओं ने एक स्वर से कहा कि कोई भी धर्म बाल विवाह का समर्थन नहीं करता और इसलिए किसी भी धर्मगुरु या पुरोहित को बाल विवाह संपन्न नहीं कराना चाहिए। इस बात पर सहमति जताते हुए कि सभी धर्मस्थलों को अपने परिसर में बाल विवाह के खिलाफ संदेश देने वाले पोस्टर -बैनर लगाने चाहिए, इन धर्मगुरुओं ने अपने समुदाय के बीच बाल विवाह की कुप्रथा के खात्मे के लिए काम करने पर सहमति जतायी। हिंदू, इस्लाम, सिख, ईसाई, बौद्ध, बहाई, जैन, यहूदी और पारसी धर्म के इन धर्मगुरुओं ने इस साझा लक्ष्य की प्राप्ति में एकता के महत्व पर जोर दिया। संवाद का आयोजन बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) के गठबंधन सहयोगी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन ने किया। बाल विवाह मुक्त भारत के 200 से अधिक सहयोगी गैरसरकारी संगठन 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लक्ष्य के साथ देश भर में काम कर रहे हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि सभी बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और विकास तक पहुंच होनी चाहिए, इन धर्मगुरुओं ने यह भी कहा कि जो भी बाल विवाह संपन्न करा रहा है या इसे प्रोत्साहित करता है, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यह संवाद इस तथ्य की पृष्ठभूमि में था कि भारत जैसे अत्यधिक धार्मिक प्रकृति के देश में सामाजिक मानदंडों और प्रथाओं को आकार देने और उन्हें कायम रखने में धार्मिक नेताओं की खासी बड़ी भूमिका है। वे अक्सर सामाजिक और नैतिक दोनों स्तरों पर सामुदायिक गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं। बाल विवाह के कानूनन अपराध होने के बावजूद विभिन्न समुदाय अक्सर इस कुप्रथा को जारी रखने के लिए धर्म की आड़ लेते हैं जो बाल विवाह को समाप्त करने के रास्ते में एक बड़ी चुनौती है। इस संवाद के महत्व पर बोलते हुए, चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया के संस्थापक और व्हेन चिल्ड्रन हैव चिल्ड्रेन: टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरिज के लेखक भुवन ऋभु ने कहा- बाल विवाह जैसे सामाजिक रूप से स्वीकृत अपराध को तभी खत्म किया जा सकता है जब सभी समुदाय इसके खिलाफ लड़ाई में साथ आयें। आस्था, धर्म और कानून सभ्यता की आधारशिला हैं और बाल विवाह को जड़मूल से खत्म करने के लिए इन्हें मिलकर काम करने की जरूरत है। ईश्वर की नजर में सभी बच्चे समान हैं तो कानून और न्याय की नजर में भी समान होने चाहिए। धार्मिक रीति-रिवाजों की आड़ में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ अस्वीकार्य है। बाल विवाह के खात्मे के लिए बाल विवाह मुक्त भारत देश का सबसे जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इसके तहत गांवों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाने और कानूनी हस्तक्षेपों के अलावा अपने मतावलंबियों के बीच असर रखने वाले धर्मगुरुओं को भी इससे जोड़ा जा रहा है। पूरे देश में मंदिरों, मस्जिदों और गिरिजाघरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी धर्मों के पुरोहितों जैसे पुजारियों, मौलवियों को शपथ दिलायी जा रही है कि वे बाल विवाह नहीं करायेंगे।   इस्लाम में बाल विवाह के बारे में प्रचलित धारणाओं का खंडन करते हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद के डॉ एम इकबाल सिद्दीकी ने संवाद में कहा कि इस्लाम में विवाह की किसी उम्र का प्रावधान नहीं है लेकिन इस्लाम निश्चित रूप से कहता है कि दूल्हे और दुल्हन दोनों को विवाह पर सहमति देनी होगी और यह एक खास उम्र और परिपक्वता के बाद ही आ सकती है। इसके अलावा इस्लाम कहता है कि ज्ञान हर मुस्लिम के लिए जरूरी है लेकिन दुर्भाग्य से कुछ मजहबी नेताओं ने ज्ञान को दीनी तालीम तक सीमित कर दिया है। यह पूरी तरह से गुमराह करने वाली बात है क्योंकि एक दुआ में कहा गया है- मुझे वो ज्ञान दो जिससे मुझे लाभ हो। मजहबी नेताओं को इन शिक्षाओं पर तार्किक अमल के बारे में सोचना चाहिए और उन्हें यह समझना होगा कि मानवता को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कानून शरिया के खिलाफ है। उनकी बात से इत्तेफाक जताते हुए वर्ल्ड पीस आर्गेनाइजेशन के महासचिव मौलाना मोहम्मद एजाजुर रहमान शाहीन कासमी ने कहा कि इस्लाम बाल विवाह की इजाजत नहीं देता है। बाल विवाह के खात्मे के लक्ष्य के प्रति समर्थन जताते हुए भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा- बाल विवाह की समस्या सभी धर्मों और समुदायों में है और हम सभी धार्मिक नेता साथ मिलकर इस समस्या के समाधान की कोशिश में हैं। यह अनूठा और ऐतिहासिक संवाद बाल विवाह मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए विभिन्न धर्मों के प्रभावशाली धर्मगुरुओं के बीच एकजुटता का साक्षी बना।  देश में बाल विवाहों की भारी संख्या पर क्षोभ जताते हुए सीबीसी के उप महासचिव रेवरेंड डॉ मैथ्यू कोइकाल ने दशकों पहले बाल विवाह की एक घटना को याद करते हुए कहा कि यह देखना दुखद था कि एक 14 वर्ष की बच्ची के उसके माता पिता ने जबरन हाथ पीले कर दिए। वह अभी बच्ची थी और इसके बावजूद उसका बचपन उससे छीन लिया गया। उन्होंने आगे कहा कि ईसाइयों में शादी विवाह चर्च के कानूनों से संचालित होते हैं। आचार्य सुनील मुनि मिशन (एएसएमसी) के संस्थापक और जैन धर्मगुरु आचार्य विवेक मुनि जी महाराज ने संवाद में कहा, हर धर्म कहता है कि ज्ञान मनुष्यों को डर, अंधेरे और अज्ञानता से मुक्त करता है। बाल विवाह को अगर रोकना है तो हमें उन जगहों को चिह्नित करना होगा जहां बाल विवाह की प्रथा अब भी जारी है और उन जिलों में जागरूकता का प्रसार करना होगा। हम बाल विवाह मुक्त भारत के इस अभियान में साथ हैं। संवाद में मौजूद अन्य धर्मगुरुओं ने इन विचारों से सहमति जताते हुए अपने समुदायों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता के प्रसार के साथ ही हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का भी संकल्प लिया। संवाद में मौलाना मोहम्मद एजाजुर रहमान शाहीन कासमी, महासचिव वर्ल्ड पीस आर्गेनाइजेशन; सुश्री कार्मेल एम त्रिपाठी, निदेशक, बहाई केंद्र बहापुर; स्वामी चंद्र देवजी महाराज, संस्थापक अध्यक्ष, वैश्विक संत समाज कल्याण फाउंडेशन; रब्बाई ईजेकील मालेक्कर यहूदी प्रमुख, यहूदी समुदाय; डॉ. इमाम उमर अहमद, इलियासी मस्जिद; डॉ. एम. इकबाल सिद्दीकी, जमात-ए-इस्लामी हिंद; सुश्री जसमिंदर कस्तूरिया, पूर्व राजदूत उत्तर कोरिया; रेवरेंड डॉ. रॉबी कन्ननचिरा सीएमआई, निदेशक, चावारा सांस्कृतिक केंद्र; रेव. डॉ. मैथ्यू कोइकल, उप महासचिव, सीबीसीआई; मरजबान नरीमन जैवाला, बेहदीनपाशबान, पारसी समुदाय दिल्ली; भारत के बहाईयों की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा की सार्वजनिक मामलों की निदेशक सुश्री नीलाक्षी राजखोवा; राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य श्रीमती रिनचेन लामो, रेवरेंड डॉ. रॉबी कन्ननचिरा सीएमआई, निदेशक, चावारा सांस्कृतिक केंद्र; फादर सेबस्टियन कोलिथानम, कॉर्नर स्टोन फाउंडेशन;  संजय जैन, महासचिव, अखिल भारतीय धर्म परिषद; गोस्वामी सुशील जी महाराज, द्वार मंदिर, ग्रेटर नोएडा; आचार्य विवेक मुनि जी महाराज, संस्थापक, आचार्य सुनील मुनि मिशन (एएसएमसी); और तिब्बती सर्वोच्च न्याय आयोग के बौद्ध आचार्य येशी फुनस्टॉन्ग भी उपस्थित थे।

गुरु-पूर्णिमा एक महान अनुशासन पर्व भी : लक्ष्मण मंडल
Published / 2024-07-21 22:17:43
गुरु-पूर्णिमा एक महान अनुशासन पर्व भी : लक्ष्मण मंडल

एबीएन सोशल डेस्क। गुरुपूर्णिमा आध्यात्मिक माहात्म्य बोध पर प्रकाश डालते हुए यज्ञाचार्य लक्ष्मण मंडल ने बताया कि गुरु-पूर्णिमा एक महान अनुशासन पर्व भी है। गुरु-पर्व शिष्य के लिए अपनी श्रद्धा, निष्ठा, तपस्चर्या व साधना द्वारा सशक्त सृजन का प्रयास जारी रखना चाहिए,यही अवसर लेकर पर्व आता है।गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में मंडल जी ने आगे गुरु शिष्य की संबन्धों व शिक्षा दीक्षा, अनुशासनपूर्ण जीवनचर्या पर  प्रकाश डाल कहा कि यह पर्व गुरु-शिष्य दोनों वर्गों के लिए अनुशासन का सन्देश लेकर आता है, इसलिए यह अनुशासन पर्व कहा जाता है। अनुशासन मानने वाला ही शासन करता है, यह तथ्य समझे बिना राष्ट्रीय या आत्मिक प्रगति सम्भव नहीं है।गुरु पूर्णिमा पर व्यास पूजन का भी क्रम है। जो स्वयं चरित्रवान् हैं और वाणी एवं लेखनी से प्रेरणा संचार करने की कला भी जानते हैं, ऐसे आदर्शनिष्ठ विद्वान् को व्यास की संज्ञा दी जाती है। इसलिए गुरु-पूजा को व्यास पूजा भी कहते हैं। महर्षि व्यास अपने आप में महान् परम्परा के प्रतीक हैं। आदर्श के लिए समर्पित प्रतिभा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। बताया कि सामान्यरूप से भी सिखाने वाले गुरुजनों का अनुशासन स्वीकार किये बिना कुशलता में निखार नहीं आ सकता। जहाँ यह आवश्यक है कि गुरुजनों को अपना क्रम ऐसा बनाकर रखना चाहिए कि शिष्य वर्ग में उनके प्रति सहज श्रद्धा-सम्मान का भाव जागे, वहाँ यह भी आवश्यक है कि सीखने वाले, शिष्य भाव रखें और गुरुजनों का सम्मान और अनुशासन बनाये रखें।आगे सोदाहरण प्रस्तुत कर बताया कि द्रोणाचार्य कौरवों के सामान्य वेतनभोगी शिक्षक से अधिक कुछ नहीं बन सके ,किन्तु पाण्डवों के लिए अजेय विद्या के स्रोत बने और एकलव्य के लिए एक अद्भुत चमत्कार बन गये।रामकृष्ण परमहंस भी जन सामान्य को एक बाबा जी से अधिक लाभ न दे सके, किन्तु जिन ने अपनी श्रद्धापूर्ण भक्ति से गुरु रूप में विकसित कर लिया,उसके लिए अवतार तुल्य सिद्ध हुए। अतः गुरुपर्व शिष्य के लिए अपनी श्रद्धा, निष्ठा, तपस्चर्या, साधना द्वारा सशक्त सृजन का प्रयास जारी रखना चाहिए, यही अवसर लेकर आता है। इस वर्ष में साधक-शिष्यों की संख्या वृद्धि तथा जन्मदिवस संस्कार, विवाह दिवस संस्कारोत्सव  सहित अनेकानेक संस्कार शिक्षण ग्रहण में उत्तरोत्तर वृद्धि को भांपते हुए गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू में परिवार जनों, साधक-शिष्यों समूहों की उपस्थिति में सुविधानुसार यज्ञ आहुति प्रदान करने वास्ते 24 कुण्डीय महायज्ञ आयोजन की व्यवस्था की गई।इस अवसर पर कई संस्कार प्रकरण संपन्न किये गये।शान्तिकुञ्ज की ओर से तथा गायत्री परिवार संगठन समन्वय समिति प्रभारियों की ओर से जेएनपी समन्वयक ने गुरु पूर्णिमा पर हार्दिक बधाई संदेश सुनाया।साथ-साथ जेएनपी ने बुद्ध-पूर्णिमा से गुरु-पूर्णिमा तक एक हजार नये गृहे गृहे हुए यज्ञीय अनुष्ठानों ,जागिए जगाइए, जुड़िए जोड़िए, नयी नीति- रीति आधार पर,कुछ प्रखंड स्तर में हुए नवगठन समिति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर समयदान करने का आवाहन किये।गुरु-शिष्य के पावन-पुण्य पर्व अवसर पर  कई संस्कार भी हुए, जिनमें दो दर्जन गायत्री महामंत्र का दीक्षा संस्कार व यज्ञोपवीत संस्कार, विद्यारम्भ, नामकरण हुए। साथ ही सैकड़ों अस्वस्थ व बीमार जनों के स्वास्थ्य लाभ व परिजनों के सफल सुफल जीवन के लिए गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान तथा मंत्र लेखन और उच्चस्तरीय चंद्रायण व्रत-उपवास व मासपारायण अनुष्ठान का संकल्प कराया गया और गायत्री के सहायक 24 मंत्रों की मंगलमय दिव्य आहुतियां सर्वार्थ मंगलमय वातावरण के लिए प्रदान की गयी। भोजन प्रसाद में अमृताशन की व्यवस्था थी। इसके अतिरिक्त गायत्री शक्तिपीठ अलकापुरी, बस स्टैंड स्थित धूर्वा प्रज्ञापीठ, चेतना केन्द्र टाटीसिलवे और अन्य इकाइयों में यह कार्यक्रम सोल्लास संपन्न हुए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।

गुरु पूर्णिमा पर गायत्री परिवार करेगा गुरु सत्ताश्री को नमन-वंदन
Published / 2024-07-20 18:59:42
गुरु पूर्णिमा पर गायत्री परिवार करेगा गुरु सत्ताश्री को नमन-वंदन

एबीएन सोशल डेस्क। प्रत्येक पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व व भारत स्तरीय आनलाइन गायत्री परिवार जप-अनुष्ठान व व्रत उपवास करने वाले समूह संचालन प्रतिनिधिमंडल सदस्य के सानिध्य में महापावन पुण्यदायी आषाढ़ी गुरु-पूर्णिमा 21 जुलाई रविवार को मना रहे हैं। इस दिन अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में स्थानीय सेक्टर टू शक्तिपीठ सहित अन्य पीठों, इकाइयों और मडलों में गुरुपूर्णिमा के पावन पुण्यदायी अवसर के पूर्व संध्या पर 24 घंटे और 12 घंटे का सुविधानुसार समयदान निर्धारित कर अखंड जप-अनुष्ठान किया जा रहा है।आगे के लिए सूचना संदेश दिया है कि इस महापर्व दिवस पर इच्छुक, सक्रिय, श्रद्धालु साधक गण विश्वस्तरीय चाद्रायण महाव्रत एवं मासपारायण साधना अनुष्ठान हेतु संकल्पित होने के लिए साधकों को  युगतीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार से श्रद्धेय द्वय ने दोष परिमार्जन, संरक्षण एवं आशीर्वाद पत्रक भिजवाया है। अतः इसे सभी साधक गण हृदय और मस्तिष्क से लगा कर श्रद्धा पूर्वक गुरुसत्ताश्री को नमन वंदन कर ग्रहण करेंगे। साथ ही ध्यान आकर्षित कर बताया कि सभी साधक-शिष्य गण इस महान अनुष्ठान हेतु संकल्पित होने जा रहे साधकों का संकल्प 21 जुलाई गुरु पूर्णिमा को ही प्रातःकाल ऑनलाइन के माध्यम से शांतिकुंज से (LIVE) संपन्न करवाया जायेगा। अतः इच्छुक व उत्सुक सभी अपनी तैयारी और पूर्ण व्यवस्था के साथ लाइव प्रसारण से जुड़कर लाभान्वित होने के लिए उपस्थित रहेंगे और मार्गदर्शन के अनुसार व्रत व साधना-अनुष्ठान के नियम संयम का पालन करेंगे। गायत्री शक्तिपीठ टीम सदस्यों द्वारा यहां साधना कक्ष परिसर में गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान सुबह 5 बजे से शाम बजे तक का जप किया। कल सुबह 8 बजे गुरुपूर्णिमा को इसकी विधिवत यज्ञीय विधान से महापूर्णाहुति होगी।आज वृक्षारोपण कार्यक्रम भी संपन्नआज रविवार को एसटीएफ जगुआर टेंडरग्राम कैम्पस में 2 हजार पौधों का रोपण भी गुरुपूर्णिमा के पावन दिवस के पूर्व मध्यान्ह 11 से अपरान्ह 3 बजे रांची शक्तिपीठ के जिला समन्वय एवं युवा प्रकोष्ठ डिवाइन इन्डिया यूथ एसोसिएशन (दीया) सक्रिय व श्रद्धावान, निष्ठा सदस्यों के माध्यम और वन विभाग तथा एसटीएफ फोर्स दीम व अधिकारी गणों के सानिध्य में वृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ। इसमें पौधों को विधि-विधान से पूजा-पाठ व मंगलमय स्वस्तिवाचन स्वर और वृक्षारोपण संबंधित नारों, जयघोषों से वातावरण को गुंजायमान सहित सानन्द किया।वृक्षों के संग नवजीवन का उमंग, मां की ममता पेड़ का दान, दोनों करते जनकल्याण, बंजर भूमि करे पुकार- पेड़ लगाकर करो श्रृंगार, जड़ी बूटियों का संयोग, हमें करते स्वस्थ निरोग जैसे अनेक मंगलमय वातावरण से सबको उत्साहित प्रमुदित किया। सभी ने सामूहिक योगदान प्रदान कर परस्पर सबको हृदय से सानन्द धन्यवाद दिया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।

यज्ञ एक प्रकार का टैक्स है , विषय पर स्वाध्याय पाठ संपन्न
Published / 2024-07-19 20:30:22
यज्ञ एक प्रकार का टैक्स है , विषय पर स्वाध्याय पाठ संपन्न

एबीएन सोशल डेस्क। यज्ञ परमार्थ प्रयोजन के लिए किया गया एक उच्चस्तरीय पुरुषार्थ है। श्रद्धेया शशिकिरण बहिन द्वारा राँची गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू में महिला मंडल सत्संग स्वाध्याय में यज्ञीय जीवन, उसका क्रम, उसका यज्ञीय वातावरण विस्तार, भावार्थ व व्याखात्मक विश्लेषण पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुरुवरश्री के लेखनी के अनुसार बताया कि यज्ञ शब्द के अर्थ को समझाते हुए परमपूज्य गुरुदेव समग्र जीवन को यज्ञमय बना लेने को ही वास्तविक यज्ञ कहते हैं। यज्ञ शब्द मात्र स्वाहा मंत्रों के माध्यम से आहुति दिये जाने के परिप्रेक्ष्य में नहीं समझा जाना चाहिए, यह स्पष्ट करते हुए उनने इसमें लिखा है कि यज्ञीय जीवन से हमारा आशय है - परिष्कृत देवोपम व्यक्तित्व। वास्तविक देव पूजन यही है कि व्यक्ति अपने अंतःकरण में निहित देव शक्तियों को यथोचित सम्मान देते हुए उन्हें निरन्तर बढ़ाता चले।महायज्ञैश्च, यज्ञैश्च ब्राह्मीयं क्रियते तनुः  उक्ति के अनुसार  सर्वश्रेष्ठ यज्ञ वह है, जिसमें व्यक्ति ब्रह्ममय व ब्राह्मणत्व भरा देवोपम जीवन जीते हुए स्वयं को अपने तन, मन, अंतःकरण को परिष्कृत करता हुआ चला जाता है। यज्ञ परमार्थ प्रयोजन के लिए किया गया एक उच्चस्तरीय पुरुषार्थ है। मानव जीवन में अंतरस्तल में, भावनाओं में यदि सत्प्रवृत्ति का समावेश होता चला जाय तो यही वास्तविक यज्ञ है। युग ऋषि ने यज्ञ के भावार्थ में कहते हैं कि यज् धातु से बना यज्ञ शब्द देवपूजन, दान व परमार्थ के बाद तीसरे अंतिम अर्थ संगतिकरण सज्जनों के संगठन, राष्ट्र को समर्थ सशक्त बनाने वाली सत्ताओं के एकीकरण के अर्थ में परिभाषित करता है।चौबीस अवतारों में एक अवतार यज्ञ भगवान भी है। यज्ञ हमारी संस्कृति का आराध्य इष्ट रहा है तथा यज्ञ के बिना हमारे किसी दैनन्दिन् क्रिया कलाप की कल्पना तक नहीं की जा सकती। आगे बताया कि यज्ञ का विज्ञान पक्ष समझाते हुए पूज्यवर ने बताया है कि सारी सृष्टि की सुव्यवस्था बनाये रखने के लिए यज्ञ प्रक्रिया बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।देव तत्वों की तुष्टि से अर्थ है : सृष्टिसंचालन को सुस्थिर बनाये रखने वाली शक्तियों का पारस्परिक संतुलन।यज्ञ एक प्रकार का टैक्स है, कर है देव-सत्ताओं के प्रति इसे न देने पर जैसे :- राज्य प्रशासन, जन समुदाय को दण्डित करता है, उसी प्रकार विभीषिकाएँ भिन्न-भिन्न रूपों में आकर सारी जगती पर अपना प्रकोप मचा देती हैं। दैवी प्रकोपों से बचने का वैज्ञानिक आधार हैयज्ञअपने इस प्रतिपादन की पुष्टि में परमपूज्य गुरुदेव ने यज्ञ की महिमा का वेदों में, उपनिषदों में, गीता में, रामायण में, श्रीमद्भागवत में, महाभारत में, पुराणों में, गुरु ग्रन्थ साहब आदि में कहाँ-कहाँ किस प्रकार वर्णन किया गया है- यह प्रमाण सहित विस्तार से अपने वांग्मय में दिया है। यज्ञ मात्र समस्त कामनाओं की पूर्ति का ही मार्ग नहीं है।यज्ञोऽयं सर्वकामधुक् अपितु जीवन जीने की एक श्रेष्ठतम विज्ञानसम्मत पद्धति है।यज्ञ का भावार्थ है- परमार्थ, उदार कृत्य।संस्कृति की यज् धातु से यज्ञ शब्द बना है, जिसके तीन अर्थ होते हैं- (१) देवत्त्व, (२) दानकरण, (३) संगठन। इन तीनों ही प्रवृत्तियों को व्यक्ति और समाज के उत्कर्ष की दिव्य धारायें कहा जा सकता है।देवत्त्व का अर्थ है- परिष्कृत व्यक्तित्त्व, दैवी सद्‌गुण।संगठन अर्थात् एकता, सहकारिता, संघबद्धता। दान अर्थात् समाज परायणता, विश्व कौटुम्बिकता, उदार सहृदयता। इन तीन प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्त्व यज्ञ करता है।यज्ञ अभियान में स‌द्भावनाओं को सत्कर्मों के रूप में परिणत करने की प्रेरणा है। इनमें गायत्री और यज्ञ के सिद्धान्तों को झाँकते हुए देखा जा सकता है।संक्षेप में यज्ञदर्शन-व्यक्तिगत जीवन में चरित्रनिष्ठा और लोक व्यवहार में समाज निष्ठा के आदर्श को अपनाये जाने की प्रेरणा देता है। व्यक्ति और समाज की सर्वतोमुखी प्रगति और सुख-शान्ति का यही एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उक्त जानकारी जय नारायण प्रसाद वरिष्ठ-साधक, रांची जिला समन्वयक ने दी।

मुख्य मंदिर वापस लौटे भगवान जगन्नाथ
Published / 2024-07-17 21:28:10
मुख्य मंदिर वापस लौटे भगवान जगन्नाथ

जगन्नाथ रथ यात्रा : सैकड़ों भक्तों ने खींची रस्सी रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर वापस लौटे भगवान जगन्नाथ टीम एबीएन, रांची। भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम व बहन सुभद्रा बुधवार को रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी से अपने धाम यानी जगन्नाथपुर मुख्य मंदिर लौट आये। नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विश्राम के बाद दसवें दिन भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर आरूढ़ होकर मुख्य मंदिर लौट आये। रथ मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की। महिलाओं ने घरेलू सामान खरीदा और बच्चों संग झूला का आनंद लिया। बुधवार की दोपहर चार बजे सैकड़ों भक्त भगवान जगन्नाथ समेत सभी विग्रहों को रथ पर आरूढ़ कर रस्सी से खींच मुख्य मंदिर तक लाये। वहीं, इस दौरान प्रशासनिक खेमा भी विधि व्यवस्था की मजबूती में तैनात नजर आया। जब भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर की ओर रवाना हो रहे थे तो उस वक्त सिर्फ उनके नाम का जयकारा ही लगाया जा रहा था। हजारों भक्तों की भीड़ भगवान जगन्नाथ की मुख्य मंदिर वापसी के दौरान उनकी एक झलक पाने को पूरी तरह से बेताब दिखे। वहीं, दूसरी तरफ भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी थामें श्रद्धालु उनके अप्रतिम श्रृंगार को देखते थक नहीं रहे थे। रथ मेला में मंगलवार को लोगों ने जमकर खरीदारी की। महिलाओं ने घरेलू सामान खरीदा और बच्चों संग झूला का आनंद लिया। वहीं रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण लोगों का आनंद थोड़ा फीका रहा।

गुरुसत्ताश्री की सूक्ष्म उपस्थिति और आशीर्वाद से 24 घंटे के आॅनलाइन एकादशी अखंड जप में जुटे गायत्री साधक
Published / 2024-07-17 21:25:34
गुरुसत्ताश्री की सूक्ष्म उपस्थिति और आशीर्वाद से 24 घंटे के आॅनलाइन एकादशी अखंड जप में जुटे गायत्री साधक

जप व यज्ञीय अनुष्ठान में दैवी सत्ता के समक्ष शुभकामना व साष्टांग प्रणाम का विधान व भावार्थ बतायाएबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज तत्वावधान में एकादशी व्रत उपवास, जप-अनुष्ठान राष्ट्रीय आनलाइन प्रतिनिधित्व में गायत्री साधक समूह आनलाइन जप- अनुष्ठान में 24 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान आज 17 जुलाई सुबह 4 बजे से कल 18 जुलाई गुरुवार को सुबह 4 बजे तक अपना समय निर्धारित कर शुरू किये। मौके पर आनलाइन संचालन प्रतिनिधिमंडल ने सभी से अनुरोध किया कि इस दैवीय योजना में घर बैठे सहयोग करें व राष्ट्रीय नवनिर्माण के लिए,सभी के लिए स्वस्थ-सुखद जीवन,सबको सद्बुद्धि प्राप्ति व उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना भाव के साथ सभी साधक अपने बहुमूल्य समय का एक अंश अवश्य देने का संकल्प ले जप-अनुष्ठान में योगदान करें। इस पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में स्थानीय पीठों एवं मंडल शाखाओं और गृहे गृहे आवासीय तपोवन में साधकों ने भागीदारी की है। प्रात:काल से शक्तिपीठ सेक्टर टू में साधकों ने जप-अनुष्ठान के साथ यज्ञीय अनुष्ठान किये। इसमें साधक सदस्यों ने  मंगलाचरण से रक्षा विधान में गुरु-ईश व सर्वदेव आवाह्न नमन वंदन सहित षोडशोपचार, स्वस्तिवाचन पाठ कर  यज्ञीय विधान किया। यज्ञीय अनुष्ठान विधान में यज्ञाचार्य ने क्षमा प्रार्थना, शुभकामना व साष्टांग नमन-वंदन का विधान व भावार्थ सोदाहरण बताया। कई साधकों ने सर्वे भवन्तु सुखिन: व वसुधैव कुटुंबकम् कल्याणार्थ भाव से गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र के साथ अन्य सहायक मंत्रों के भी जप किये। गुरुवार महिला मंडल प्रतिनिधित्व में रांची शक्तिपीठ में समूह जप, सत्संग व स्वाध्याय पाठ होगा।आगामी चंद्रायण व्रत-उपवास संबंधित आध्यात्मिक कायाकल्प जप-अनुष्ठान की भी आनलाइन समूह संदेश में चर्चा हुई। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

बड़े सौभाग्य से मिलते हैं सद्गुरु : त्रिलोचन साहू
Published / 2024-07-14 19:42:47
बड़े सौभाग्य से मिलते हैं सद्गुरु : त्रिलोचन साहू

गायत्री महामंत्र सस्वर पाठ व मातृ वंदना, गुरु वंदना से शुभारंभ हुआ आज का पांच जिला उपजोन समन्वयन संगोष्ठीटीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार संगोष्ठी कार्यक्रम प्रारंभ पूर्व गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में एक प्रसिद्ध व विशिष्ट वृक्ष कल्पतरू (वैज्ञानिक नाम एडेनसोनिया डिजिटाटा) का पौधरोपण हुआ। यह पौधरोपण रवि शंकर प्रसाद मुख्य तकनीकी अधिकारी, वन उत्पादकता संस्थान लालगुटवा रांची के सौजन्य से गायत्री शक्तिपीठ के अतिथि, विशिष्ट व प्रभारियों के सानिध्य में पौधरोपण कार्य विधिवत मांगलिक मंत्रोच्चारण, पवित्रीकरण, पृथ्वी पूजन, चंदन तिलक, रक्षासूत्र बांधकर, जगह का शुद्धिकरण और अभिसिंचन सहित स्वस्तिवाचन, पूजा-पाठ करके किया गया। इसके बाद संगोष्ठी कार्यक्रम प्रज्ञागीत गायन हारमोनियम व ढफली वादन साथ हुआ। मां इतनी कृपा कर दो, इतनी दया कर दो, तुम से मांग रहे हम वरदान, देश धर्म-संस्कृति की खातिर हों जाएं, हम हंसते हंसते बलिदान, स्वयं भगवान हमारे गुरु ,परम सौभाग्य हमारा है, स्वयं नारायण नर तन धरे हमारे बीच पधारा है, समयदान व अंशदान मानव को श्रेष्ठ बनाता है, जो इसे अपनाता है, वह धन्य धन्य हो जाता है जैसे प्रज्ञागीतों, संगीतमय व डफली वादन के मधुर स्वर व करतल ध्वनि से गुंजायमान हुआ संगोष्ठी वातावरण। अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुंज के पूर्वीजोन प्रकोष्ठ से झारखंड प्रभारी श्रद्धेय त्रिलोचन साहू की उपजोन स्तरीय संगोष्ठी दिनांक 14/07/2024 (रविवार) को पूर्वाह्न 11 से गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची में आयोजित हुई। जिसमें गायत्री शक्तिपीठ एवं परिवार के उपजोन के 5 जिलों से जिला स्तर और प्रखंड स्तरीय समन्वय समिति के आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, युवा, दीया मंडल के सक्रिय, नैष्ठिक, गतिशील, उद्यमी प्रतिनिधि सदस्यगण, ट्रस्टीगण, प्रज्ञा/ महिला/ मंडल, युवा मंडलों के सभी सदस्यगण की उपस्थिति बहुत सुंदर सराहनीय रही। संगोष्ठी में उपजोन के पांचों जिला से करीबन डेढ़ सौ से अधिक सदस्यगण उपस्थित होकर सफल सुफल बनाये। इससे संबंधित शांतिकुञ्ज मुख्यालय की परम आदरणीया जीजी के दिशा-निर्देश, पत्र एवं कार्यक्रम की सिड्यूल चर्चा हुई। बताया गया कि मिशन के कार्यक्रम स्वरूप को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ और अधिक गति देने की आवश्यकता है। इसमें केंद्रीय प्रतिनिधि त्रिलोचन साहू,  झारखंड प्रभारी राम नरेश प्रसाद, उपजोन प्रभारी श्रद्धेय उदय शंकर पंडित के पावन सानिध्य में एक विशिष्ट संगोष्ठी हुई। संगठनात्मक स्वरूप को मजबूत करना है इस  विषय पर रांची जिला के सभी प्रखंडों और प्रखंडों के अंतर्गत पंचायतों व गांवों की चर्चा हुई। शांतिकुञ्ज के तत्वावधान व मार्गदर्शन में कार्यक्रम को जमीन पर उतारना है, गतिशील व सार्थक बनाना है। रामनरेश प्रसाद ने बताया कि यह असामान्य व संकटग्रस्त समय है। संक्रांति काल है। यह परिवार संगठन अन्य से भिन्न है। यह अवतारी चेतना से संचालित है। यह साधारण समय नहीं है। दादा गुरुदेव व गुरुदेव के मध्य हुई लक्ष्य निर्धारित रचनात्मक लक्ष्यों का जिक्र हुआ। वायुमंडल का शुद्धिकरण, वातावरण का परिष्करण, नवयुग का सृजन (निर्माण), महाविनाश से बचाव जैसे कार्य, देवमानव का उत्पादन आदि अनेक गुह्य विषयों पर प्रकाश डालकर बताया। देश विदेश के शासनाध्यक्ष, धनाध्यक्ष, वैज्ञानिक गतिविधियों की स्थिति व विपरीत भयानक स्वरूप पर प्रकाश डाला।  त्रिलोचन साहू ने शांतिकुञ्ज मुख्यालय आदरणीय दीदी का पावन मार्गदर्शक संदेश सुनाये। गुरुमाता भगवती का जन्म शताब्दी सह दिव्य व प्रचण्ड अखंड ज्योति दीप का होने जा रहे 100 वर्ष के शताब्दी वर्ष पर मंगल कलश ज्योति यात्रा पर चर्चा व गुरुदेव श्री प्रज्ञावतार का नवयुग सृजन अभियान संदेश गावं गांव-गांव, घर घर जन-जन तक पहुंचाये जाने का कारण, साधन, प्रचार प्रसार मार्गदर्शन विस्तार से भगवान व भक्त के कल्याणप्रद संबन्धित अनेकानेक सटीक उदाहरण दृष्टांत से प्रस्तुत कर किया। आगे मार्गदर्शन में बताया कि हर एक इकाई में स्थापित शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, चरणपीठ को मजबूत संगठनात्मक, रचनात्मक सुपरिणाम देना है। इसके बाबत समयदान व अंशदान के योगदान पर चर्चाएं हुईं।  अंत में आगामी झारखंड के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के बारे में दीपक दयाल प्रसाद ने संवाद किया और शांति पाठ, जयघोष तथा उपरांत भोजन प्रसाद ग्रहण कर गोष्ठी कार्यक्रम समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रांची जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद, उपजोन समन्वयक दयाशंकर पंडित और रांची के व्यवस्थापक जटाशंकर झा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

झारखंड : अब बुजुर्ग कर सकेंगे कई तीर्थ स्थलों के दर्शन, जानें प्रक्रिया
Published / 2024-07-13 20:37:44
झारखंड : अब बुजुर्ग कर सकेंगे कई तीर्थ स्थलों के दर्शन, जानें प्रक्रिया

घर के बुजुर्गों के लिए बेहतरीन मौका, इस साल इन तीर्थ स्थलों का कर सकेंगे दर्शन, ऐसे करें आवेदनटीम एबीएन, रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना एक फिर राज्य में शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को इसाई धर्मावलंबियों का एक जत्था गोवा के लिए रवाना हो गया। हटिया स्टेशन से सैकड़ों इसाई तीर्थ यात्री गोवा के लिए रवाना हुए। यह कार्यक्रम 8 दिनों का है। जिसमें उनके साथ एक कॉर्डिनेटर भी होगा जो उन्हें गाइड करेगा और उनका ध्यान रखेगा। पर्यटन विभाग ने लोगों को रहने और खाने की सुविधा दे रहा है। अगर आप भी इस योजना के बारे में जानना चाहते हैं तो हम इस आर्टिकल में आपको पूरी जानकारी देंगे।यह योजना बीपीएल कार्डधारी गरीब वरिष्ठ नागरिकों के लिए है जो पैसे की कमी के कारण किसी भी तीर्थ स्थल पर नहीं जा पाते हैं। यह योजना हिंदू, मुस्लिम और इसाईयों के लिए है। इस योजना के अंतर्गत हिंदू धर्म धर्मावलंबियों के लिए 20 जुलाई से लेकर 27 जुलाई 2024 तक द्वारिका सोमनाथ की यात्रा करायी जायेगी। इस यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम आखिरी तारीख 15 जुलाई 2024 है। वहीं मुस्लिम धर्मवलंबी इस योजना के तहत अजमेर फतेहपुर सिकरी का दर्शन कर पायेंगे। जिसका कार्यक्रम 2 से 8 अगस्त निर्धारित किया गया है। इस यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई 2024 है। इस योजना का लाभ लेने के लिए यात्रियों को अपना आवेदन प्रखंड/ जिला/ अनुमंडल या नगर निगम कार्यालय में दे सकते हैं। बस शर्त ये है कि आप स्थानीय निवासी होने के साथ-साथ बीपीएल कार्डधारी हो और आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो। साथ ही यह भी जरूरी है कि आपने इससे पहले इस योजना का लाभ नहीं लिया हो। अगर आप किसी को अपने साथ सहायता के लिए लेकर जाना चाहते हैं तो परिवार के किसी एक सदस्य को ले जा सकते हैं। यदि कोई समूह में यात्रा करना चाहता है तो पूरे समूह के तरफ से एक ही आवेदन मान्य होगा। इस समूह में लोगों की संख्या 25 से अधिक नहीं होनी चाहिए। जो कि सरकार के इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं उन्हें आवेदन करते समय दो फोटो चिपकाना अनिवार्य है। इसके अलावा आपको अपने साथ स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र भी साथ रखना होगा। आप इसके लिए प्रूफ के रूप में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल, मतदाता पहचान पत्र या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी एक प्रमाण पत्र को दे सकते हैं। इसके अलावा आपको फिट फॉर ट्रैवल सर्टिफिकेट भी देना होगा। तीर्थयात्रियों का चयन जिला स्तरीय प्रबंधन समिति करेगी। पहले आओ और पहले पाओ के तहत लोगों को चयनित किया जायेगा। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है तो एक अतिरिक्त प्रक्रिया भी लागू होगी। समर्पित आवेदनों को पर्यटन विकास निगम को दिया जायेगा।

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