विनोद बंसल एबीएन एडिटोरियल डेस्क। जो राज्य जनजातीय समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक मान्यताओं की रक्षा और उसके कल्याण के लिए बना, उसे छोड़ कर सरकार उन मिशनरियों पर पैसा लुटाने में लगी है जो कि वहां के मूल निवासियों के अवैद्य धर्मांतरण में लगे हैं। अब झारखंड सरकार इसी माह राज्य के ईसाइयों को फ्री में गोवा तीर्थ दर्शन करायेगी। प्रश्न ये है कि... इस प्रकार की सांप्रदायिक यात्रा कराना क्या सेक्युलर सरकार को उचित है! जनजातीय समाज के पैसे का व्यय ईसाइयों पर क्यों! तीर्थ तो हिंदुओं के सुने थे ईसाइयों के कैसे!! यदि यात्रा करानी ही थी तो जनजातीय समाज के तीर्थो की कराते जैसे भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील, तिलका मांझी, थलक्कल चंथू, बुद्धु भगत, सिद्धू और कान्हू, रेन्डो मांझी, चक्रा विसोई इत्यादि से जुड़े पुण्य स्थल। गोवा के चर्चों से झारखंड का क्या नाता! क्या इस कदम से राज्य में धर्मांतरण करने वालों को बढ़ावा नहीं मिलेगा! राज्य सरकार @JharkhandCMO @ChampaiSoren को अपने इस निर्णय पर तुरंत रोक लगाकर यह पैसा जनजातीय समाज के कल्याण में खर्च करना चाहिए ना कि उनका धार्मिक व संस्कृतिक शोषण करने वालों पर। झारखंड की धर्म-संस्कृति के हत्यारों पर राज्य सरकार द्वारा धन का दुरुपयोग किया जाना निन्दनीय व चिंतनीय है। सरकार द्वारा मिशनरियों को दिया जा रहा यह प्रोत्साहन जनजातीय समाज की भावना के विरुद्ध भी है, जिसे रोका जाना जरूरी है। (लेखक विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।)
टीम एबीएन, रांची। सत्यानंद योग मिशन केन्द्र, बसंत बिहार कॉलोनी, कांके रोड में स्वामी मुक्तरथ के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण पर वर्कशॉप और योगाभ्यास का संचालन हुआ। केन्द्र के योग प्रशिक्षक अवनीश कुमार तथा यहां की प्रबंधक शांति सिंह ने मुक्तरथ जी को पुष्प गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। अंजना सिंह यहां के योग संचालन और योग की उपयोगिता के बारे में बताई। मुक्तरथ जी ने कहा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में योग की बहुत जरूरत है। स्वास्थ्य संवर्धन में योग का कोई जोड़ नहीं है। यह शारिरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक हर तरफ से महिलाओं को मजबूत बनाता है तथा उनके बहुत सारी समस्याओं को दूर करता है। आज महिलाएं जिस तरह से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं वो देश के लिए बहुत अच्छा है उन्हें संस्कारित और आत्मबल से मजबूत भी होने की जरूरत है। इस केन्द्र में बिहार योग विद्यालय मुंगेर की शिक्षा प्रदान की जाती है। यहाँ तरह-तरह की बीमारियों पर योग सत्र चलते हैं, विद्यार्थियों के मानशिक सबलता और एकाग्रता के लिये ध्यान सत्र चलते हैं तथा सामान्य योग सत्र भी नियमित रूप से चलते हैं। आज यहां के सभी प्रतिभागी बड़े ही उत्साह के साथ योगासन, प्राणायाम और ध्यान की साधना को करके अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सेलिब्रेट किये।
एबीएन सोशल डेस्क। स्वस्थ और सुखी जीवन मनुष्य की प्रमुख आवश्यकता रही है* विश्व योग दिवस पर गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में गायत्री साधक-शिष्य गण , परिव्राजक टीम तथा युग निर्माण कन्या विद्यालय के विद्यार्थियों ने आज योग दिवस बड़े उत्साहपूर्वक मनाया। इस अवसर पर योग शिक्षक विजय कुमार यादव ने योग, आसन, व्यायाम व प्राणायाम की दिशा और धारा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि योगासन अभ्यास, व्यायाम व प्राणायाम जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं। कहा कि स्वस्थ और सुखी जीवन मनुष्य की प्रमुख आवश्यकता रही है।समाज के किसी भी स्तर में रहने वाला व्यक्ति स्वस्थ सुखी जीवन की आवश्यकता अनुभव करता ही है। स्वास्थ्य केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक और आत्मिक भी होता है। भारतीय जीवन पद्धति तो हमेशा से शारीरिक, मानसिक, आत्मिक स्वास्थ्य का महत्त्व दर्शाती रही है। आज के चिकित्सा विज्ञानी भी रोगों का कारण शरीर के अलावा मन में भी खोजने लगे हैं। मन को भी स्वस्थ व प्रसन्न रखना आवश्यक है। इस अवसर पर अनेक प्रकार के खड़े होकर, बैठकर, लेटकर करने वाले आसन,अभ्यास योग व प्राणायाम कराया और शुद्ध आहार-विहार करने के लिए नियम-संयम के सूत्र बताये। उक्त जानकारी व्यवस्थापक जटाशंकर झा और रांची जिला समन्वयक गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।
मौके पर 456 यूनिट रक्तदान भी किया गया कमल सिंह लोधा की रिपोर्ट एबीएन न्यूज नेटवर्क, बैतूल। भारत में कबीर पंथ से कई समुदाय ताल्लुक रखते हैं, लेकिन वे उन्हें केवल सतगुरु मानते हैं और उनकी जयंती मनाते हैं। वहीं दूसरी तरफ संत रामपाल जी महाराज भी कबीर पंथी हैं लेकिन एक नयी जानकारी मिली कि संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी कबीर जयंती नहीं बल्कि कबीर प्रकट दिवस मनाते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कबीर साहेब जी का 627वां प्रकट दिवस है और इस उपलक्ष्य में संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में सतलोक आश्रम उड़दन बैतूल में तीन दिवसीय महाविशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। कई दिनों से आश्रम में महा समागम की जोरों शोरों से तैयारियां चल रहीं थीं और दिनांक 20 जून 2024 को शुरू हुए इस विशाल भंडारे का आज दूसरा दिन है। जिसका समापन कल अर्थात 22 जून को होगा। समागम में लगातार लाखों श्रद्धालुओं का आना जारी है और साथ ही संत गरीब दास जी महाराज द्वारा बोली गई वाणियों का संग्रह अमर ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ संत रामपाल जी महाराज जी के मुखारविंद से पहले ही दिन प्रारंभ हो चुका है। यह भंडारे का दूसरा दिन है और अनुमान है कि लाखों की तादाद में श्रद्धालु भंडारा ग्रहण करने पहुंचे है। आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध घी से निर्मित हलवा प्रसाद वितरित किया जा रहा है। बात पकवानों की करें तो उसमें पूड़ी राम, सब्जी राम, रोटी जिसे संत रामपाल जी के अनुयाई फुल्का राम कहते हैं, बीमार लोगों के लिए दलिया व मिष्ठान के रूप में लड्डू, जलेबी, बर्फी व विभिन्न प्रकार की मिठाईयां भी भंडारे में परोसी जा रही हैं। चूंकि यह कबीर परमेश्वर जी का प्रकट दिवस है इसलिए कबीर साहेब जी के प्रकट होने की लीला व उनके द्वारा बाद में की गयी लीलाओं पर आधारित आध्यात्मिक प्रदर्शनी भी लगाई गई है जिसे देखकर आने वाले श्रद्धालु बहुत ही आनंदित हो रहे हैं।इसके साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज जी जिन शास्त्रों को आधार बताते हुए सत्संग प्रवचन करते हैं उन्हें भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया है ताकि लोगों की शंकाओं का समाधान किया जा सके। संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेने के लिए नि:शुल्क नामदीक्षा की भी व्यवस्था की गयी है। इसके साथ ही आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग व्यवस्था भी की गयी है जिससे आगंतुकों को भी असुविधा न हो। साथ ही हाईवे पर ट्रैफिक जाम जैसी समस्या उत्पन्न न हो। उसका भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। समागम के दूसरे दिन समाज से दहेज नामक कुप्रथा को खत्म करने के लिए संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में सतलोक आश्रम बैतूल में कुल 151 जोड़ों की दहेज रहित शादियां संपन्न हुईं। इन विवाहों में किसी प्रकार की फिजूलखर्ची नहीं की गई, न ही दहेज का लेनदेन हुआ। बल्कि ये विवाह बहुत ही सभ्य व साधारण तरीके से गुरुवाणी द्वारा 33 करोड़ देवी-देवताओं की स्तुति करते हुए 17 मिनट में संपन्न हुए इस विशेष अवसर पर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों द्वारा सामाजिक व परोपकारी कार्य रक्तदान को कैसे भूला जा सकता था। यहीं कारण था कि समागम के दूसरे दिन 21 जून को रक्तदान शिविर भी लगाया गया, जिसमें संत रामपाल जी के अनुयायियों द्वारा 456 यूनिट रक्तदान किया गया। 8138 अनुयायियों ने देहदान के संकल्प फार्म भरे। साथ ही संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को समझकर 2108 नयी पुण्यात्माओं ने नि:शुल्क नामदीक्षा लेकर अपने मानव जीवन को सफल बनाया।
समणी जी का डोरंडा कन्या पाठशाला में आज प्रवचन हुआएबीएन सोशल डेस्क। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी की विद्वान शिष्या समणी मधुर प्रज्ञा जी, शुभ प्रज्ञा जी, मनन प्रज्ञा जी आदि ठाना 3 का प्रवास दिगंबर जैन भवन रांची में चल रहा है। आज समणी श्री जी ने डोरंडा कन्या पाठशाला में प्रवचन दिया। अपने प्रवचन में बच्चियों को संबोधित करते हुए समणी मधुर प्रज्ञा जी ने कहा कि विद्यार्थियों को अनुशासन का पालन करना चाहिए, अनुशासन ही है जो आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचाता है। अनुशासन का अर्थ समय से अपने शिक्षा के कार्यों को करना, अपने गुरुजनों का आदर करना तथा पढ़ाई करने में एकाग्रता बरतना। ऐसा अक्सर होता है कि बच्चे घर में पढ़ाई करते-करते बीच में कुछ देर मोबाइल चलाने लग जाते हैं।इससे उनका ध्यान भी भटकता है और वापस पढ़ाई में एकाग्रता बनाने में समय लग जाता है। इसलिए विद्यार्थियों को हमेशा एकाग्रता से पढ़ाई करनी चाहिए। विद्यार्थियों में विवेक होना आवश्यक है, विवेक एक ऐसा माध्यम है जो कि एक विद्यार्थी को ऊंचाई पर ले जाता है। आज के प्रवचन में डोरंडा बालिका उच्च विद्यालय की प्रधानाध्यपिका उपमा पाल तथा डोरंडा कन्या पाठशाला की प्रधानाध्यपिका पारमिता सामल के साथ साथ समाज के गणमान्य लोग तथा श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित हुए। कल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में दिगंबर जैन भवन में समणी जी के सानिध्य में सुबह 9:30 से 10:30 बजे से योगा कार्यक्रम किया जा रहा है जिसे प्रशिक्षिका रूबी बांठिया करेंगे। समाज के लोगों को अधिक से अधिक संख्या में योगा कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह किया गया है। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
जल ही जीवन है जल है तो कल है : पाटोदियाटीम एबीएन, रांची। अग्रवाल सभा रांची मानव सेवा हेतु निरंतर प्रयत्नशील है। इसी क्रम में अग्रवाल सभा ने 18वां आधुनिक प्याऊ का निर्माण प्रसिद्ध समाजसेवी राजकुमार मित्तल के बहुमूल्य सहयोग से जिला स्कूल शहीद चौक के परिसर में करवाया। राजकुमार मित्तल ने सपत्नीक विधिवत पूजन कार्य करके नवनिर्मित प्याऊ का उद्घाटन किया। इस आधुनिक प्याऊ का निर्माण राजकुमार मित्तल एवं संगीता मित्तल ने अपनी पूजनीय माता-पिता स्व नंदकिशोर मित्तल एवं स्व चंद्रकला देवी की पुण्य स्मृति में करवाया है। मौके पर अग्रवाल सभा के अध्यक्ष नंदकिशोर पाटोदिया ने मित्तल परिवार के प्रति आभार आभार व्यक्त करते हुए कहा मानव सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है। स्थायी आधुनिक प्याऊ लगने से सभी को शुद्ध ठंडा जल मिल सकेगा। उन्होंने कहा है कि जल ही जीवन है जल है तो कल है। मौके पर सभा के अध्यक्ष नंदकिशोर पाटोदिया, मंत्री मनोज चौधरी, पूर्व अध्यक्ष अशोक नारसरिया, पवन पोद्दार, प्रमोद अग्रवाल, प्रेम मित्तल, मनोज रुईया, आनंद जालान, विजय खोवाल, सुनील केडिया, सुनील पोद्दार, प्रमोद बगड़िया तथा अग्रवाल सभा के सदस्यगण एवं मित्तल के परिवारगण, बंधुगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी अग्रवाल सभा के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी की विद्वान शिष्या समणी मधुर प्रज्ञा जी, शुभ प्रज्ञा जी, मनन प्रज्ञा जी आदि ठाना 3 का प्रवास दिगंबर जैन भवन रांची में चल रहा है। प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 प्रवचन, दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक ज्ञान चर्चा तथा रात्रि 8:15 से अरिहंत वंदना की जाती है।आज अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए समणी मधुर प्रज्ञा जी ने कहा कि अष्ट मंगल भावना में दूसरी मंगल भावना है श्री संपन्नोहं स्याम अर्थात में अनुशासन संपन्न बनूं। जीवन की बागडोर को चलाने के लिए पग-पग पर हमें अनुशासन की जरूरत है। एक कार चलाने वाला यदि सीट बेल्ट को नहीं बांधता है, तो उसे जुर्माना देना पड़ता है; क्योंकि उसने अनुशासन का नियम का भंग किया है।इसलिए यदि हमें अपने जीवन को शिखर तक पहुंचाना है तो अनुशासन को समझना जरूरी है। मन का अनुशासन, वचन का अनुशासन, काया का अनुशासन जहां होता है वहां व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित कर सकता है, अपने वाणी को नियंत्रित कर सकता है तथा उसमें विवेक होता है कि हमें कहां पर किसके सामने कैसी शिष्ट भाषा का प्रयोग करना है। आचार्य श्री तुलसी जी ने कहा है निज पर शासन- फिर अनुशासन। समणी जी ने आगे फरमाते हुए कहा कि इंद्रियों का संयम भी बहुत जरूरी है, यदि इंद्रियों पर अनुशासन नहीं होगा तो अनेक बीमारियों को आमंत्रण स्वत: मिल जायेगा। स्वस्थ और अच्छा जीवन जीना है तो अनुशासन के महत्व को समझे और अपने जीवन रूपी गाड़ी को सही पटरी पर चलायें। आज के प्रवचन में समाज के काफी श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे। शाम में धार्मिक प्रश्नोत्तरी एवं भजन आदि का कार्यक्रम हुआ जिसमें बच्चों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी की विद्वान शिष्या समणी मधुर प्रज्ञा जी, शुभ प्रज्ञा जी, मनन प्रज्ञा जी आदि ठाना 3 का प्रवास रांची में चल रहा है। प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 प्रवचन, दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक ज्ञान चर्चा तथा रात्रि 8:15 से अरिहंत वंदना की जाती है। आज के प्रवचन में समणी मधुर प्रज्ञा जी ने श्री अर्थ के बारे में तथा बुजुर्गों की सेवा के बारे में बताया। समणी जी ने बताया कि श्री अर्थात लक्ष्मी लक्ष्मी का वास वहीं होता है जिस घर में बड़ो बुजुर्गों का सम्मान होता है तथा जहां कलह क्लेश नहीं होता है। जिस घर के बुजुर्ग का सम्मान होता है वे खुश रहते हैं तथा घर में शांति एवं आपसी रिश्तों में प्रेम होता है वहां लक्ष्मी स्थायी रूप से वास करती हैं। घर के लोगों को आपसी छोटी-छोटी बातों पर टकराव, मनमुटाव से बचना चाहिए। आजकल छोटी छोटी बातों पर आपस मे बोलचाल बंद हो जाती है। कभी कभी पति पत्नी का तलाक भी हो जाता है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। पुराने लोग घर में कितने भी मतभेद हो जाते थे पर साथ में ही मिल-जुल कर रहते थे। माता-पिता की बुढ़ापे में हमें सेवा करनी चाहिए। अच्छे से देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में जब हम भी वृद्ध होंगे तो हमारे बच्चे भी आज की हमारी बुजुर्गों की सेवा देखकर हमारी सेवा करेंगे। प्रत्येक माता पिता चाहते हैं कि बुढ़ापे में उनके बच्चे उनका सम्मान करें तथा उनकी जरूरत के अनुसार देखभाल करें और उनकी सेवा करना हमारा सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य है। हमें हमेशा अपने घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना चाहिए तथा उनके अनुभव से सीखना चाहिए। हमारे पास बुद्धि, शक्ति, पैसा सब हो सकता है पर अनुभव हमारे घर के बड़े बुजुर्गों के पास ही मिलेगा। जीवन में कभी कभी ऐसा समय भी आता है जब हम समस्या में हो और उससे निकल पाने का तरीका हमे समझ नहीं आता है। परंतु घर के बुजुर्ग हमे आसानी से संकट का हल बता देते है, इसे एक कहानी के माध्यम से समणी जी ने समझाया। आज काफी संख्या में समाज के लोग प्रवचन में उपस्थित थे, जिनमें मुख्य रूप से तेरापंथ सभा के अध्यक्ष विमल दस्सानी, अमरचंद बैंगानी, लाल चंद बोथरा, कोमल गेलड़ा, अशोक सुराणा, संजय सिंघी, प्रकाश चंद नाहटा, देवचंद पींचा, अमित बैंगानी, ललित सेठिया, सुमन बरमेंचा, रूबी बांठिया आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। शक्तिपीठ सेक्टर टू के यज्ञशाला में उपाचार्य मंडल ने बताया कि ब्रह्म गायत्री है और गायत्री ही ब्रह्म है। इसलिए जो गायत्री की उपासना करता है, वह ब्रह्म की ही उपासना करता है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है- छंदों में मैं गायत्री छंद हूं। गायत्री को कामधेनु भी कहा गया है; क्योंकि गायत्री साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और साधक के सभी कष्टों का निवारण भी करती हैं। इसके साथ गायत्री की उत्पति, महिमा, जयंती, गंगा अवतरण की कथा, महिमा और परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी संक्षिप्त जीवन कथा, उनकी कठोर तपस्या, 24-24 लाख का गायत्री महापुरश्चरण, हिमालयन ऋषि सत्ता की संसद में चार बार बुलावे व भागीदारी विषय पर आध्यात्मिक चर्चा हुई। गायत्री महामंत्र दीक्षित साधक-शिष्य को उनके द्वारा दिए पांच सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए उपासना साधना आराधना समयदान और अंशदान की आवश्यकता एवं महत्ता को स्मरण कराया। कहा कि आज का समयदान ही युग धर्म है। सात सूत्रीय अभियान कार्यक्रम, संचालन पर भी ध्यान आकर्षित कर समयदानी की संख्या हर इकाई में बढने की जरूरत बताया। गत 23 मई को गृहे गृहे यज्ञीय अनुष्ठान से निकले नये नये परिवारों व परिजनों को हर प्रखंड व पंचायत स्तर पर नवगठन व नवसृजन अभियान में आस्तिकता, आध्यात्मिकता से जोड़ कर गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की योजना को सफल सुफल बनाना है। इस माध्यम से राष्ट्र के नवनिर्माण में व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण व समाज कल्याण के साथ भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रति अधिकाधिक परिजनों को जोडने के सूत्रों पर प्रकाश डाला गया। इस महत्वपूर्ण संदेश के साथ सहायक हारमोनियम गायक उपाचार्य रोशन शर्मा और उपाचार्य रणवीर सिंह ने प्रज्ञागीत के बोल के स्वर लहर मिलाये... भगीरथ तो गये किन्तु गंगा उनकी गुण गाती है,आज स्वयं गायत्री माता गुरुवर ! तुम्हें बुलाती है। गायन-वादन के बाद गुरु, गंगा, गायत्री, गौरी, गणेश और ब्रह्मा विष्णु महेश सहित सर्वदेव आवाह्न नमन वंदन, षोडशोपचार, स्वस्तिवाचन एवं रक्षा विधान पाठ करके 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ अनुष्ठान कर जप-अनुष्ठान की पूर्णाहुति की गयी। अलकापुरी शक्तिपीठ व सेक्टर टू में चार चार पाली में यज्ञ हुआ और दर्जन भर गायत्री महामंत्र की गुरुदीक्षा, विवाह दिवस संस्कार, नामकरण सहित कई संस्कार हुए। अनिल कुमार शर्मा के सानिध्य में टाटीसिलवे में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सर्वत्र मंगलमय वातावरण विस्तार और सबके स्वस्थ-सुखद व मंगलमय जीवन के लिए शुभकामना पाठ हुआ। यज्ञ के उपरांत भोजन प्रसाद ग्रहण किये गये। उक्त जानकारी व्यवस्थापक जटाशंकर झा और रांची जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद ने दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.