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मुंबई से आये स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया लोगों को किया संबोधित
Published / 2024-09-03 21:01:56
मुंबई से आये स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया लोगों को किया संबोधित

श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व टीम एबीएन, रांची। श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगंबर जैन भवन में चल रहा है। पर्युषण पर्व अंतर्गत श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में धर्म आराधना चल रही है एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेताम्बर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का दिगम्बर जैन भवन में पर्युषण कार्यक्रम हो रहा है। श्री दिगम्बर जैन भवन, हरमू रोड में श्री साधुमार्गी जैन श्वेताम्बर संघ के धर्म की प्रभावना करने मुंबई से आये स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया ने आज पर्युषण के तीसरे दिन अंत: गढ़ सूत्र की वाचना एवं प्रवचन दिया। आगमों का स्वाध्याय ज्ञान वृद्धि एवं कर्मनिर्जरा का साधन है, अत: प्रत्येक श्रावक को यथा शक्ति आगमों का निरंतर स्वाध्याय करना चाहिए। अंत: गढ़ सूत्र के माध्यम से 90 भव्यात्मा का वर्णन किया जा रहा है जिन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है।स्वाध्यायी श्री गौतम जी रांका ने प्रवचन में कहा की प्रमाद से कर्म बंधन होता है, अप्रमाद से नए कर्म के बंधन से बचा जा सकता है और पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा भी की जा सकती है।  जीवन को आध्यात्ममय बनाकर, सुसंस्कृत बना कर मनुष्य भाव को धन्य बनाया जा सकता है। जीव अनंतकाल से संसार में भटकता आ रहा है, इसके बीच यह मनुष्य जन्म मिला है, ऐसे दुर्लभतम मनुष्य भाव को हमें सम्यकरूप से जी कर मोक्ष की तरफ एक कदम आगे बढ़ना चाहिए। अभय कुमार के जीवन चरित्र की रसीली सूंदर व्याख्या की गयी। मौके पर अशोक सुराणा, उत्तम कोठरी और राजेश बछावत ने भजन प्रस्तुत किया! कल 4 सितम्बर को पारस हॉस्पिटल के सहयोग से हेल्थ चेकअप कैंप भी दिगम्बर जैन भवन में लगाया जायेगा जिसमे चेक अप और चिकित्शक परामर्श उपलप्ध रहेगा। आज सामायिक दिवस के उपलक्ष पर ज्यादा से ज्यादा सामायिक की प्रभावना की गयी। छोटेलाल जी चोरडिया, चेतन दास बोहरा, मूलचंद सुराणा,घेवर चंद नाहटा आदि उपस्थित हुए। जैन समाज के श्रावक काफी संख्या में उपस्थित थे। दोपहर में धर्म चर्चा और संध्या के समय प्रतिक्रमण एवं प्रवचन हुआ। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ, डोरंडा के तत्त्वाधान में चातुर्मास परम् पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणीप्रज्ञ सागर सूरीश्वर जी की परम् पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी, पु. अभिवर्षा श्री जी, पु.भव्योंदया श्री जी, पु. गुणोंदया श्री जी, पु. जिनवर्षा श्री जी आदि ठाना 5 का भव्य चातुर्मास चल रहा है! नित्य जप, तप, ज्ञान, ध्यान चल रहा है! आज सुबह 8 बजे से कल्पसूत्र वांचन, एवं 8:30 बजे से प्रवचन हुआ। कल 4 सितम्बर से भगवान महावीर का जन्म का वांचन किया जायेगा। श्रद्धालुओं से मंदिर खचाखच भरा हुआ था। कल सुबह 8 बजे मंदिर डोरंडा में कल्पसूत्र वांचन एवं तत्पश्चात 8:30 बजे से प्रवचन एवं दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में भक्ति भजन किये जायेगा। दिगंबर जैन भवन में सुबह 8 बजे से अंत: गढ़ सूत्र वांचन एवं तत्पश्चात 8:30 बजे से प्रवचन एवं दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में प्रतिक्रमण किया जायेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

घरों और मंदिरों में श्रद्धापूर्वक मना राणी सती दादी जी का भादो बदी अमावस
Published / 2024-09-03 20:54:07
घरों और मंदिरों में श्रद्धापूर्वक मना राणी सती दादी जी का भादो बदी अमावस

टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी समाज का प्रमुख त्यौहार श्री राणी सती दादी जी का भादो बदी अमावस्या सभी के घरों एवं दादी जी के मंदिरों में श्रद्धा पूर्वक एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि राणी सती दादी जी को मारवाड़ी समाज की कुलदेवी भी है तथा इस पूजा का पितरों के संदर्भ में बहुत महत्व है। आज महिलाएं एवं पुरुष दादी जी की मंदिरों एवं अपने-अपने घरों मे विधिवत पूजा की तथा पितरों को धोक एवं दादी जी की जात दी गयी। घरों में भी दादी जी की तस्वीर को फूलों से सजाया गया, एवं  चुनड़ी चढ़ाई गई, महिलाएं ओढ़ना ओढ़कर पूरे परिवार के साथ ज्योत प्रज्वलित कर विधिवत पूजा अर्चना की,पूजा में रोली, मोली, मेहंदी, चावल, नाल जोड़ी काजल, चूड़ी, सिंदूर, नारियल, गट, प्रसाद, फल, दक्षिणा, दीपक, कलश, मीठा पूड़ा, घूघरे डिजाइन का पूड़ा, पूड़ी, दादी जी को अर्पित किया गया। एक साफ पाटे पर रोली की सथिया बनाई, दीपक प्रज्वलित की गई, सबों ने तेरह रोली, चावल, मेहंदी, काजल की टिकी दी। तथा दादी के भजनों के साथ सामूहिक आरती की गई तथा सभी के लिए सुख, शांति, समृद्धि की दादी जी से प्रार्थना की, तथा राणी सती दादी जी के मंदिर मे जाकर पूजा अर्चना की गई। राणी सती दादी का वास्तविक नाम नारायणी है।परम आराध्या दादी जी के प्रताप उनके वैभव और अपने भक्तों पर नि:स्वार्थ कृपा बरसाने वाली मां नारायणी सती दादी को मारवाड़ी समाज की कुलदेवी भी माना जाता है। तथा नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इष्ट देवी के रूप में श्री राणी सती दादी देवी दुर्गा का अवतार है। इस मान्यता के चलते माता के प्रतिरूप को त्रिशूल स्वरूप में प्रतिष्ठापित किया गया है। दादी का मंदिर स्त्री सम्मान ममता और स्त्री शक्ति का प्रतीक है।

श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व में हो रही धर्म आराधना
Published / 2024-09-02 20:37:23
श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व में हो रही धर्म आराधना

टीम एबीएन, रांची। श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगम्बर जैन भवन में चल रहा है। पर्युषण पर्व अंतर्गत श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में धर्म आराधना चल रही है एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का दिगम्बर जैन भवन में पर्युषण कार्यक्रम हो रहा है। डोरंडा स्थित जैन मंदिर में परम् पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणीप्रज्ञ सागर सूरीश्वर जी की आज्ञा से परम पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी आदि ठाणा 5 का चातुर्मास चल रहा है, लयस्मिता श्री जी आज के प्रवचन में बताया की नदियों में गंगा श्रेष्ठ, पक्षियों में हंस श्रेष्ठ, पशुओं में गाय श्रेष्ठ, गुरुओं में गौतम स्वामी श्रेष्ठ है। पर्वों में पर्युषण को पर्व श्रेष्ठ कहा गया है। आज से कत्यसुत्र का वाचन शुरू हुआ। साधुसमाचारी-साधुओं को कैसा जीवन जीना का वांचन होगा। साथ ही प्रवचन में तीर्थंकर भगवान आदिनाथजी के समय के साधु, अजितनाथ, पार्श्वनाथ, शासनपति भगवान महावीर के समय के साधु के जीवन के बारे बताया गया। भगवान महावीर के 27 भवों का वर्णन किया गया। आज सुबह 6:30 बजे से नमिनाथ जिनालय में अभिषेक पुजा आदि शुरू हुई। दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में 7 बजे से भक्ति भजन कार्यक्रम हुआ। श्रद्धालुओं से मंदिर खचाखच भरा हुआ था। इधर दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ रांची का आज से पर्युषण पर्व कार्यक्रम शुरू हुआ। आज प्रथम दिन धर्म की प्रभावना करने मुंबई से आये स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया ने अंत: गढ़ सूत्र की वाचना एवं प्रवचन दिया। पर्युषण के दूसरे दिन श्री साधुमार्गी जैन संघ के कार्यक्रम में मुख्य विषय था अपने कर्मों की निर्जरा किस प्रकार कर सकते है। स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका एवं सुरेश जी बोरिया ने अंत: गढ़ सूत्र की वाचना एवं प्रवचन दिया।सुरेश जी बोरिया ने बताया कि अंत: गढ़ सूत्र में वर्णित ज्ञान एवं साधना से यह ज्ञात होता है की ज्ञान दर्शन चरित्र की सम्यक पालने से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। स्वाध्यायी जी गौतम रांका ने प्रवचन में कहा कि सुख दु:ख कर्म नियोजित हैं। जैसा कर्म करेंगे वैसा ही फल मिलेगा। कर्मों का कारण आस्रव - मिथ्यात्व, अव्रत, कषाय, प्रमाद, अशुभ योग कर्म जो रोकना संवर के द्वारा और खतम करना निर्जरा भावना से। अभय कुमार का जीवन चरित्र पर भी प्रवचन में चर्चा हुई। इस अवसर पर महिला समता मंडल ने गीत प्रस्तुत किया। मौके पर मोहन लाल पींचा, अमर चंद बेंगानी, राकेश बच्छावत सहित अन्य लोग उपस्थित थे। प्रवचन समाप्ति के अंत मे जय पींचा ने बताया कि 4 सितंबर को पारस हॉस्पिटल के सहयोग से हेल्थ चेकअप कैंप दिगंबर जैन भवन में लगाया जायेगा जिसमे चेक अप और चिकित्शक परामर्श उपलप्ध रहेगा। बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता रखी गयी है जिसका विषय है अहिंसा परमो धर्म। जैन समाज के श्रावक काफी संख्या में उपस्थित थे। दोपहर में धर्म चर्चा और संध्या के समय प्रतिक्रमण एवं प्रवचन हुआ। कल सुबह 8 बजे मंदिर डोरंडा में कल्पसूत्र वांचन एवं तत्पश्चात 8:30 बजे से प्रवचन एवं दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में भक्ति भजन किये जायेगा। दिगंबर जैन भवन में सुबह 8 बजे से अंत: गढ़ सूत्र वांचन एवं तत्पश्चात 8:30 बजे से प्रवचन एवं दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में प्रतिक्रमण किया जायेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

भक्तिमय माहौल में मना श्री सती सावित्री माता की भादो अमावस्या महोत्सव
Published / 2024-09-02 18:50:01
भक्तिमय माहौल में मना श्री सती सावित्री माता की भादो अमावस्या महोत्सव

रांची के बुजुर्ग गणमान्य लोगों को किया गया सम्मानितटीम एबीएन, रांची। श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज रांची के तत्वावधान में आदिशक्ति श्री सती सावित्री माता जी (कोटड़ी वाली) का एक दिवसीय भादो अमावस्या महोत्सव मारवाड़ी ब्राह्मण भवन रांची के प्रथम तल्ला मे हर्षोल्लास एवं भक्तिमय के साथ मनाया गया। महोत्सव में आदिशक्ति माताजी का सुगंधित पुष्पों से अलौकिक नयनाभिराम श्रृंगार, अखंड मंगल पाठ, भजन जागरण, छप्पन भोग महाप्रसाद का आयोजन किया गया। महोत्सव दोपहर 2:30 बजे से श्री गणेश पूजन एवं मंगल पाठ से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अखंड मंगल पाठ जयपुर राजस्थान की मां की लाडली सरोज तोसार्व (सोनी) ने सुमधुर भजनों के साथ सावित्री मंगल पाठ प्रस्तुत कर महिलाओं को खूब झुमायी। तत्पश्चात अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर छप्पन भोग महाप्रसाद का भोग लगाया गया। शाम 6 बजे से रांची के प्रसिद्ध भजन गायक मदन मोहन सोनी एवं मनीष सोनी ने भजनों की अमृत वर्षा की तथा अपने मधुर भजनों के गंगा प्रवाहित कर दादी जी के श्री चरणों में भजनों की लड़ी लगा दी। भक्तगण दादी दादी बोल दादी सुन लेसी.., आओ मां आओ मां आओ मां भक्तों के घर कभी आओ मां.., नारायणी लियो अवतार बधाई सारे भक्तों ने.. किस्मत का खोल देते ताला जी सालासर के बालाजी..आदि भजनों की लय पर भक्तगण भाव विभोर हो दादी जी के नाम की खूब मस्ती लूट रहे थे। खूब झूमे, महोत्सव में रांची की धार्मिक संस्थाएं श्री कृष्ण प्रणामी ट्रस्ट, श्री हनुमान मंडल भी पधारी, मारवाड़ी स्वर्णकार समाज द्वारा सभी आगंतुक अतिथियों एवं रांची के सभी बुजुर्ग गणमान्य  व्यक्तियों विजय दनवार, बनवारी लाल, गजानंद जी, दयानंद जी, रुकमानंद जी, जगदीश जी,ओम मदन जी, शिवप्रसाद सोनी को अंग वस्त्र एवं दादी जी का प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। देर रात सामूहिक रूप से महा आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।महोत्सव सफल बनाने में ओम प्रकाश सोनी, प्रतीक सोनी, किशन सोनी, कन्हैया सोनी, विष्णु सोनी, नारायण सोनी, गोपाल सोनी, प्रेम सोनी, सोनू सोनी, मदन मोहन सोनी, मनीष सोनी, अमित तोसावर, वीरेंद्र तोसावर, मनीष तोसावर सहित पूरा स्वर्णकार परिवार अपना भरपूर योगदान दिया। उक्त जानकारी मनीष सोनी (97092 55630) ने दी।

राणी सती दादी जी का भादो बदी मावस 3 सितंबर को
Published / 2024-08-31 20:46:12
राणी सती दादी जी का भादो बदी मावस 3 सितंबर को

श्री सती दादी को दुर्गा का अवतार व नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। श्री राणी सती दादी जी का भादो बदी अमावस्या 3 सितंबर मंगलवार को मनाया जा रहा है। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि भादी मावस मारवाड़ी समाज का प्रमुख त्योहार है। अमावस्या की तिथि 2 सितंबर को सुबह 5:24 मिनट से शुरू होगी जो दूसरे दिन 3 सितंबर तक रहेगी। सनातन धर्म में अमावस्या को स्नान- दान के लिए शुभ माना जाता है। भादी मावस की अमावस्या को सतियों की अमावस्या होती है। इस पूजा का पितरों के संदर्भ में बहुत महत्व है। इस दिन महिलाएं एवं पुरुष दादी जी की मंदिरों एवं अपने-अपने घरों में विधिवत पूजा करते हैं। तथा पितरों को धोक एवं दादी जी की जात दी जाती है। पूजा में रोली, मोली, मेहंदी, चावल, नाल जोड़ी काजल, चूड़ी, सिंदूर, नारियल, गट, प्रसाद, दीपक, कलश, चढ़ाने के लिए रुपया, मीठा पूड़ा, घूघरे डिजाइन का पूड़ा, पूड़ी बनाते हैं। एक साफ पाटे पर रोली की सथिया बनाते हैं, दीपक जलाते हैं तथा तेरह रोली, चावल, मेहंदी, काजल की टिकी देते हैं। राणी सती दादी का वास्तविक नाम नारायणी है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में चक्रव्यूह में वीर अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए थे इस समय उत्तरा जी को भगवान श्री कृष्ण जी ने वरदान दिया था कि तू कलयुग में नारायणी के नाम से सती दादी के नाम में विख्यात होगी। और हर किसी का कल्याण करेगी और पूरी दुनिया में पूजी जायेगी, इसी वरदान के स्वरूप श्री सती दादी जी आज लगभग 715 वर्ष पूर्व मंगल 1352 ईस्वी में सती हुई थी। श्री राणी सती दादी का जन्म संवत् 1638 कार्तिक शुक्ला नवमी को डोकवा गांव में हुआ था। परम आराध्या दादी जी के प्रताप उनके वैभव और अपने भक्तों पर नि:स्वार्थ कृपा बरसाने वाली मां नारायणी सती दादी को मारवाड़ी समाज की कुलदेवी भी माना जाता है। नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इष्ट देवी के रूप में श्री राणी सती दादी देवी दुर्गा का अवतार है। इस मान्यता के चलते माता के प्रतिरूप को त्रिशूल स्वरूप में प्रतिष्ठापित किया गया है। दादी का मंदिर स्त्री सम्मान ममता और स्त्री शक्ति का प्रतीक है।

श्वेतांबर जैन धर्म संघ का महापर्व पर्यूषण पर्व कल से दिगंबर जैन भवन में
Published / 2024-08-30 20:14:19
श्वेतांबर जैन धर्म संघ का महापर्व पर्यूषण पर्व कल से दिगंबर जैन भवन में

टीम एबीएन, रांची। श्वेतांबर जैन धर्म संघ का महापर्व पर्यूषण पर्व 31 अगस्त से जैन मंदिर डोरंडा में एवं 01 सितंबर से दिगंबर जैन भवन में मनाया जायेगा। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में 31 अगस्त से एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का 1 सितंबर से दिगंबर जैन भवन में शुरू हो रहा है। श्री श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक संघ का 31 अगस्त से पर्वाधिराज पर्यूषण जैन मंदिर डोरंडा में शुरू हो रहा है। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, डोरंडा के तत्वावधान में चातुर्मास परम पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणीप्रज्ञ सागर सूरीश्वर जी की परम पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी, पु. अभिवर्षा श्री जी, पु.भव्योंदया श्री जी, पु. गुणोदया श्री जी, पु. जिनवर्षा श्री जी आदि ठाना 5 का भव्य चातुर्मास चल रहा है। नित्य जप, तप, ज्ञान, ध्यान चल रहा है। पर्यूषण पर्व के दौरान जैन मंदिर डोरंडा में 31 अगस्त को स्नात्र पूजा, 2 सितंबर से प्रतिदिन, कल्पसूत्र वाचन, 4 सितंबर को भगवान महावीर जन्म वांचन, 7 सितंबर को सांवत्सरिक प्रतिक्रमण का कार्यक्रम होगा एवं साथ साथ  प्रतिदिन व्याख्यान, धार्मिक अनुष्ठान, ज्ञानशाला, नित्य शाम में भक्ति भावना आदि का कार्यक्रम किया जायेगा। दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में श्री साधुमार्गी जैन श्वेताम्बर संघ रांची ने 1 सितंबर से पर्युषण कार्यक्रम रखा है। मौके पर धर्म की प्रभावना करने स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया मुंबई से रांची आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह प्रार्थना के पश्चात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक 1 सितंबर 2024 से प्रवचन होगा। दोपहर में धर्म चर्चा और संध्या के समय प्रतिक्रमण होगी। इसके उपरान्त हर दिन अलग अलग कार्यक्रम आयोजित होंगे। 4 सितंबर 2024 को पारस हॉस्पिटल के सहयोग से निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर और चिकित्सक से निशुल्क परामर्श का आयोजन होगा। 8 सितंबर 2024 को संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया जाएगा जो त्याग और तपस्या का प्रतीक है। क्षमा याचना और विदाई समारोह 9 सितंबर को आयोजित किया जायेगा। जैनों के लिए पर्वाधिराज पर्युषण सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। आठ दिन का यह पर्व, जिसमें आत्मचिन्तन, तप-जप, त्याग, उपवास, भक्ति-भावना, पाप कर्म की निर्जरा आदि की जाती है। मनुष्य के द्वारा स्वयं के किये गये पापों का पश्चाताप का निरीक्षण किया जाता है एवं अधिक से अधिक धर्म ध्यान, तप आदि किया जाता है। पर्यूषण के अंतिम दिवस में सभी उपवास रखते हुए प्रतिक्रमण करके आत्मा की शुद्धि से एक दूसरे से मिच्छामि दुक्कड़म क्षमा याचना करते हैं। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

आदिशक्ति श्री सती सावित्री माता की भादो अमावस्या महोत्सव 1 सितंबर को मारवाड़ी ब्राह्मण भवन में
Published / 2024-08-30 18:18:16
आदिशक्ति श्री सती सावित्री माता की भादो अमावस्या महोत्सव 1 सितंबर को मारवाड़ी ब्राह्मण भवन में

एबीएन सोशल डेस्क। श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज रांची के तत्वाधान में आदिशक्ति श्री सती सावित्री माता जी (कोटड़ी वाली) का एक दिवसीय भादो अमावस्या महोत्सव 1 सितंबर दिन रविवार को मारवाड़ी  ब्राह्मण भवन रांची के प्रथम तल्ला में मनाया जा रहा है। महोत्सव में माताजी का भव्य श्रृंगार, अखंड मंगल पाठ, भजन जागरण, छप्पन भोग महाप्रसाद का आयोजन किया गया है।महोत्सव दोपहर 2:30 बजे से श्री गणेश पूजा एवं मंगल पाठ से कार्यक्रम का प्रारंभ होगा। अखंड मंगल पाठ करने के लिए माँ की लाडली श्रीमती सरोज तोसावर् ( सोनी) जयपुर से पधार रही है जो कि सावित्री मंगल पाठ प्रस्तुत करेगी, और उसके बाद अखंड ज्योत प्रज्वलित कर छप्पन भोग महाप्रसाद का भोग लगाया जाएगा। शाम 6 बजे से रांची के प्रसिद्ध भजन गायक मदन मोहन सोनी एंव मनीष सोनी भजनों की अमृत वर्षा बहायेंगे। इसी के साथ मारवाड़ी स्वर्णकार समाज के सभी परिवार के द्वारा श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार सभा रांची संस्था की स्थापना भी हो रही है जिससे हमारे रांची महानगर के सभी मारवाड़ी स्वर्णकार समाज की एक विशिष्ट पहचान भी बन सके।  महोत्सव के सफल आयोजन हेतु ओम प्रकाश सोनी, प्रतीक सोनी, किशन लाल सोनी, कन्हैया सोनी, विष्णु सोनी, नारायण सोनी, गोपाल सोनी, प्रेम सोनी, सोनू सोनी, मदन मोहन सोनी, मनीष सोनी, अमित तोसावर, वीरेंद्र तोसावर, सहित पूरा स्वर्णकार परिवार अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं। उक्त जानकारी मनीष सोनी (97092 55630) ने दी।

नारी ही संस्कृति की संरक्षिका... विषय पर हुआ स्वाध्याय और पाठ-संवाद
Published / 2024-08-29 20:09:30
नारी ही संस्कृति की संरक्षिका... विषय पर हुआ स्वाध्याय और पाठ-संवाद

टीम एबीएन, रांची। गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में गुरुवार संध्याकाल में गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व में गायत्री महिमा सत्संग में स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ। दीदी ने बताया कि नारी ही संस्कृति की संरक्षिका है। दीदी ने बताया कि यदि संस्कृति के उन्नयन-अभिवर्द्धन की सहभागिनी, सामाजिक जीवन की सुरभिवर्द्धिनी, नारी को बनाना है, तो उसके चहुंमुखी विकास का वातावरण बनाना, सुविधाएं देना तथा सहायता करना आवश्यक है। कहा कि जब-जब समाज ने नारी को विकसित हो सकने के अवसर दिए हैं, उसने अपनी सांस्कृतिक क्षमताएं सही दिशा में विकसित की हैं। ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक प्रगति के पर्याप्त अवसर पाने पर तथा समाज-व्यवस्था में समान भागीदारी निभाने का मौका मिलने पर उसने समाज को सदा दीप्तिमान ही बनाया है। पूज्यवर श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के युग निर्माण साहित्य पुस्तक का एक उद्धरण पर बताया कि "वाचस्पत्य शब्दकल्पद्रुम" के अनुसार माता शब्द का निर्माण ही निर्माणवाची धातु मा से हुआ है। इसलिए यह स्वाभाविक ही है कि सृजन तत्व, निर्माण तत्त्व में मातृरूपा नारी में विशेष रूप से रहे शील, सदाचार, धैर्य, क्षमा, उदारता एवं सहिष्णुता की जीवंत प्रतिमा-नारियां परिवार और समाज के निर्माण का दायित्व सदा से ही पूरा करती रही हैं। आगे बताया कि आत्मसाधना के क्षेत्र में भी नारियों पुरुषों को अपेक्षा अधिक संख्या में और अधिक उत्साह से आगे बढ़ती रही हैं। महामानवों के मार्मिक आह्वान को सुनकर युग-सृजन के लिए निकल पड़ना भारतीय नारियों की परंपरा रही है। श्रीकृष्ण के आह्वान पर हजारों गोपिकाएं महाकाल के महारास की सक्रिय सदस्याएं, सहयोगिनी व सखियां बनने को आगे आयीं। तथागत बौद्ध के आह्वान को हजारों नारी अंत:करणों ने सुना और बौद्ध भिक्षुणी बनकर सांस्कृतिक चेतना का अलख जगाने निकल पड़ीं। अंबपाली से आरंभ यह श्रृंखला संघमित्रा के बाद तक यानी शताब्दियों तक अविच्छिन्न रही। प्रबुद्ध नारियां देश-काल और स्थिति अनुसार अनेक उद्धरण  स्मरण दिलाते हुए बताया कि युगचेतना की समय की मांग व पुकार पर समयदान योगदान की है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

बछवारस व गोवत्स द्वादशी का त्योहार 30 अगस्त को
Published / 2024-08-28 18:27:30
बछवारस व गोवत्स द्वादशी का त्योहार 30 अगस्त को

गाय और बछड़ों की पूजा करने से गाय मे वास करने वाले सैकड़ों देवताओं का मिलता है आशीर्वाद : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राजस्थानी महिलाओं का लोकप्रिय पर्व बछवारस 30 अगस्त को मनाया जायेगा। यह पर्व जन्माष्टमी के चार दिन बाद यानी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गौ माता की बछड़े सहित पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि बछवारस के दिन गाय और बछड़ों की पूजा करने से भगवान कृष्ण सहित गाय में निवास करने वाले सैकड़ो देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। जिससे घर में खुशहाली और संपन्नता आती है। इस दिन माताएं अपने पुत्रों को तिलक लगाकर तलाई फोड़ने के बाद लड्डू का प्रसाद देती है। पुत्रवान महिलाएं अपने संतान की मंगल कामना के लिए व्रत रखती है और पूजा करती है। इस दिन गेहूं से बने पकवान एवं कटी हुई सब्जी नहीं खाए जाते हैं। बाजरे या ज्वार का सोगटा और अंकुरित अनाज की कढ़ी एवं सूखी सब्जी बनाई जाती है। महिलाएं द्वारा सुबह गौ माता की विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद घरों मे सामूहिक रूप से बनी मिट्टी व गोबर से बनी तलैया की अच्छी तरह सजाकर उसमें कच्चा दूध, दही, मोठ, कुमकुम, मोली, धूप दीप प्रज्वलित कर पूजा करती है। एक लकड़ी के पाटे पर मिट्टी से बछवारस बनाते हैं और उसमें बीच में एक गोल मिट्टी का बावड़ी बनाते हैं फिर उसको थोड़ा दूध दही से भर देते हैं, तथा सब चीज पूजा सामग्री चढ़ाकर पूजा करते हैं। और बछवारस की कहानी सुनी जाती है।इस दिन घरों में विशेष कर बाजरे की रोटी बनती है, तथा इस दिन गाय की दूध की जगह भैंस का दूध का उपयोग किया जाता है। इस पर्व को गोवत्स द्वादशी भी कहते हैं। भगवान कृष्ण के गायों और बछड़ों से बड़ा प्रेम था इसलिए इस त्यौहार को मनाया जाता है।

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