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गायत्री महाविद्या के तत्वदर्शन पर महिला मंडल का आनलाइन स्वाध्याय पाठ-संवाद
Published / 2024-09-10 17:54:38
गायत्री महाविद्या के तत्वदर्शन पर महिला मंडल का आनलाइन स्वाध्याय पाठ-संवाद

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज के तत्वावधान में राष्ट्र स्तरीय संचालित आनलाइन स्वाध्याय महिला मंडल, प्रज्ञामंडल के सानिध्य में पूज्यवर श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति- तपोनिष्ठ पण्डित श्रीरामशर्मा आचार्य जी की लिखित वांग्मय गायत्री महाविद्या के तत्वदर्शन पर आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवाद चल रहा है।इसमें आज इसके तत्वदर्शन पर प्रकाश डालकर बताया गया कि ब्रह्मवेत्ता, योगी, अध्यात्मवादी, तत्वदर्शी भक्त वर्ग गायत्री की आद्यशक्ति के एक-एक चरण के उपासक होते हैं। गायत्री को त्रिपदा कहा गया है। उसके तीन चरण हैं। इस त्रिवेणी शक्ति की अधिष्ठात्री को त्रिपदा गायत्री कही गई है। संसार के समस्त दु:खों के प्रधान कारण हैं- अज्ञान, अभाव, अशक्ति और इससे सत, रज, तम की विविधि प्रकृति से मनुष्य का निर्माण हुआ है। वस्तुत: सत्ता दो की है। सत और तम की। रज की उत्पत्ति तो दोनों के सम्मिश्रण से होती है। चर्चा हुई कि दु:खों के कारणों में भी प्रधान दो ही हैं- अज्ञान और अशक्ति। अभाव तो उनकी परिणति है। गायत्री की तीन शक्ति धाराएं हैं- हीं, श्रीं और क्लीं। ह्रीं सद्ज्ञान की, श्रीं वैभव की और क्लीं शक्ति की, बल की प्रतीक हैं। सत्-रज-तम से बनी काया को आवश्यकता तीनों ही शक्ति धाराओं की है। इनमें किसी का भी महत्व कम नहीं है। तीनों का संतुलन आवश्यक है। जीवन निर्वाह के लिए जितना महत्व ज्ञान का है, उतना ही साधनों एवं शक्ति का। एक भी पक्ष छोड़ा नहीं जा सकता।बताया गया कि गायत्री महामन्त्र में तीनों शक्ति धाराओं का समान रूप में समावेश है। साधनों के संग्रह की आपाधापी में विश्व मानस ने चेतना की महत्ता को लगभग भुला दिया है।बताया गया कि आज जरूरत है, उसके लिए आत्मा के अन्दर प्रकाश उत्पन होना चाहिए, जिससे सत्य और असत्य का विवेक जागे। सारांश में दीदी ने बताया कि कुमार्ग को छोड़कर श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिले, गायत्री मन्त्र में यही भावना विद्यमान है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।

दिगंबर जैन भवन में हुआ क्षमा याचना और पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम
Published / 2024-09-09 20:09:00
दिगंबर जैन भवन में हुआ क्षमा याचना और पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम

राज्यसभा सांसद, रांची और कांके के विधायक, डिप्टी मेयर आदि हुए  शामिल एबीएन सोशल डेस्क। पर्वाधिराज पर्युषण के उपलक्ष्य पर श्री जैन श्वेतांबर साधु मार्गी संघ एवं तेरापंथ धर्म संघ का संयुक्त रूप से दिगंबर जैन भवन में विगत आठ दिनों से चल रहा था। पर्युषण एक ऐसा पर्व है जो संयम, तपस्या, और आत्म-निरीक्षण के माध्यम से आत्मिक शुद्धि की ओर मार्गदर्शन करता है। आज श्वेतांबर जैन श्री साधु मार्गी संघ द्वारा पर्युषण पर्व के अंतिम दिन क्षमा याचना कार्यक्रम एवं पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम रखा गया था एवं कार्यक्रम में मुंबई से पधारे स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका और सुरेशजी बोरडिया का विदाई समारोह तथा सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया। पर्युषण पर्व आराधना के लिए श्री जैन श्री साधु मार्गी संघ के मुंबई से पधारें स्वाध्यायी स्वयं के आत्म उत्थान के साथ साथ आठ दिनों में जिन शासन की प्रभावना करवायी! पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के विभिन्न आगम में, शास्त्रों में उपलब्ध ज्ञान के माध्यम से श्रावक श्राविकाओं के जीवन को नियमन करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्वेताम्बर जैन श्री साधु मार्गी संघ के सहयोग से जैन समता युवा संघ ने आज समता शाखा एवं प्रार्थना पुस्तक का विमोचन किया। समता साखा से अध्यात्म अभिवर्द्धि एवं प्रार्थना पुस्तक के माध्यम से देव गुरु धर्म की आराधना जो कि प्रत्येक मानव मात्र के जीवन का आधार है। जिसका विमोचन आज के मुख्य अतिथि महुआ मांझी (राज्य सभा सांसद), सीपी सिंह (विधायक), समरी लाल (विधायक), संजीव विजवर्गीय (डिप्टी मेयर), रंजन यादव (युवा प्रदेश अध्यक्ष राजद), किशोर मंत्री (चेंबर अध्यक्ष), विनय अग्रवाल (चेंबर पूर्व अध्यक्ष), साधु मार्गी संघ के अध्यक्ष अशोक सुराना, साधु मार्गी जैन युवा संघ के अध्यक्ष राकेश बच्छावत, उत्तम चौरडिया, जय पिंचा, राजेश बच्छावत, संयम बच्छावत, सुरेश जैन, श्री राम, राहुल, प्रदीप, स्वराज, अनूप एवं अन्य लोग ने किया। आज सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया, जिसमें मुख्य रूप से छोटे लाल जी चोरड़िया के 8 उपवास, विशाल दस्सानी के 9 उपवास धर्मेंद्र बोहरा के 8 उपवास, दिशा बैंगानी, परी बैंगानी, अमन सेठिया, भव्य सुराणा के 3 उपवास,50 बयासना संगीता लोढा ने किया है। इन सभी का बहुमान साधुमार्गी जैन संघ, तेरापंथ सभा एवं  युवक परिषद ने किया।दिगंबर जैन पंचायत समाज के अध्यक्ष नरेंद्र गंगवाल, मंत्री पंकज पांड्या, दिगम्बर जैन भवन के अध्यक्ष सुरेश जैन, मंत्री अमित रारा के साथ मे समाज के अन्य लोग उपस्थित हुए। आज के कार्यक्रम में मोहन लाल पींचा, हुकमी चन्द चोरड़िया, संपतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, घेवरचंद नाहटा, मूलचंद सुराणा, देवचंद पींचा, जय पींचा, ललित पींचा, प्रकाश चन्द नाहटा आदि उपस्थित हुए।

क्षमा वीरस्य भूषणं अर्थात क्षमा ही वीरों का आभूषण है : भगवान महावीर
Published / 2024-09-08 18:53:01
क्षमा वीरस्य भूषणं अर्थात क्षमा ही वीरों का आभूषण है : भगवान महावीर

एबीएन सोशल डेस्क। पर्वाधिराज पर्युषण श्री जैन श्वेतांबर साधु मार्गी संघ एवं तेरापंथ धर्म संघ का संयुक्त रूप से दिगंबर जैन भवन में चल रहा है। श्वेतांबर जैन श्री साधु मार्गी संघ के आज अंतिम आठवें दिन के कार्यक्रम में स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका और सुरेशजी बोरडिया ने सुबह अंत:गढ़ सूत्र का वांचन किया एवं  प्रवचन में बताया कि भगवान महावीर ने कहा है- क्षमा वीरस्य भूषणं अर्थात क्षमा ही वीरों का भूषण है क्षमा हमारे जीवन में आवश्यक है, संसार में रहते हुए कई तरह की भूलें हो जाना स्वाभाविक है ऐसी भूलों से एक दूसरे के प्रति ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती है कि जिनसे परस्पर मतभेद और द्वेष की भावना आ जाती है। ऐसे द्वेष को दूर करने के लिए सबसे सरल उपाय है क्षमा। क्षमा मनुष्य का एक सर्वश्रेष्ठ गुण है क्षमा से हम दुश्मन को भी मित्र बना सकते हैं और दुश्मनी को सदा सदा के लिए नष्ट कर सकते हैं। संवत्सरी का पर्व क्षमा के रूप में ही जाना जाता है। यही एक मात्र ऐसा पर्व है जो हमें त्याग, क्षमा, मैत्री का भाव सिखाकर आत्म कल्याण के लिए अग्रसर करता है। क्षमा वर्तमान में जीना सिखाती है, क्षमा पारिवारिक पृष्ठभूमि होती है, क्षमा शैतान को सन्त बनाने में सक्षम होती है क्षमा हर परिस्थिति में समभाव रखने की प्रेरणा देती है। शास्त्रों में कहा गया है, खामेमि सव्व जीवा, सव्व जीवा खमन्तु में। मिति में सव्वे भुएसु, वेरं मज्ज्झम न केणइ। अर्थात क्षमा दान देता हूं मैं सबकों सभी जीव मुझे क्षमा प्रदान करें, समस्त जगत के लोकों में किसी से मेरा बैर न रहे। प्रवचन के बाद छोटे छोटे बच्चों के द्वारा आने वाले समय में समाज मे धर्म, ज्ञान, संस्कार की विलुप्ति एवं वर्तमान में सुधार करने के बारे में नाट्य मंचन किया। तेरापंथ महिला मंडल एवं समता मंडल द्वारा संयुक्त रुप से भगवान महावीर के समय की प्रथमसती चंदनबाला जी के जीवनी के ऊपर नाट्य मंचन किये गये। शाम में 5 बजे आलोयणा एवं 6 बजे से श्रावक एवं श्राविकाओं ने सामुहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण किया प्रतिक्रमण के बाद स्वाध्यायी बन्धुओं एवं समाज के लोगों ने आपस मे एक दूसरे से क्षमा याचना की। आज छोटे लाल जी चोरड़िया, विशाल दस्सानी एवं धर्मेंद्र बोहरा के आज 8 उपवास, दिशा बैंगानी, परी बैंगानी, अमन सेठिया, भव्य सुराणा के आज 3 उपवास है, 50 बयासना संगीता लोढ़ा एवं आज सभी छोटे बड़े श्रावक श्राविकाओं का उपवास था। कल सुबह 9 बजे से क्षमापना कार्यक्रम, स्वाध्यायी  विदाई समारोह, तपस्वियों का बहुमान किया जायेगा एवं दोपहर 1:30 बजे से कन्या पाठशाला डोरंडा में स्वाध्यायी जी का प्रवचन है। दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में कल के क्षमा याचना कार्यक्रम में आप सभी पत्रकार बंधुओं को सादर आमंत्रित किया जाता है, आप सभी से निवेदन है कि समय निकाल कर अवश्य कार्यक्रम में शामिल होवें। मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में कल की क्षमा याचना कार्यक्रम में लोगों को आमंत्रित किया है।

श्री जीण माता प्रचार समिति रांची ने निकाली जीण धाम यात्रा
Published / 2024-09-08 18:49:24
श्री जीण माता प्रचार समिति रांची ने निकाली जीण धाम यात्रा

टीम एबीएन, रांची। श्री जीण माता प्रचार समिति रांची अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल नेतृत्व अपने 31 सदस्यों के साथ दिनांक 08.09.2024 को जीण धाम की यात्रा के लिए प्रस्थान किया। यात्रा में सदस्यों द्वारा माता के जीण धाम स्थित मंदिर राजस्थान में निशान चढ़ाया जायेगा एवं माता का मंगल पाठ होगा। यात्रा में अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल, नारायण विजयवर्गीय, बजरंग सोमानी, प्रदीप शर्मा, शशिकला, निधि, सविता, बिनोद, सरिता, संदीप, सुनीता, घनश्याम, मीनू, रौनक, मोहित, एकता, शीतल, ज्योति, सुनीता, संगीता, कुसुम, श्रवण, शकुंतला, श्यामसुंदर, संतोष देवी, लक्ष्मी, ऋतु, राशि, मीनू, सिद्धांत, गौरव शामिल हैं।

राधा अष्टमी पर्व 11 को
Published / 2024-09-08 18:48:53
राधा अष्टमी पर्व 11 को

पूजा उपासना करने से सुख-समृद्धि धन व ऐश्वर्य की होती है प्राप्ति : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है राधा अष्टमी पर्व 11 सितंबर दिन बुधवार को मनाया जायेगा। हिंदू सनातन धर्म में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधारानी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद आता है। इस वर्ष शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर होगी वही इस तिथि का समापन 11 सितंबर को रात के 11 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व 11 सितंबर को मनाया जायेगा। राधा अष्टमी पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी की तरह ही व्रत रखा जाता है साथ ही इस दिन राधा रानी की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन राधा रानी की पूजा उपासना करने से व्यक्ति को सुख समृद्धि धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। विवाहित जीवन खुशहाल रहता है। राधा अष्टमी के दिन राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा अर्चना एवं विशेष चीजों मे मालपुए व रबड़ी का भोग लगाई जाती है। घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है और गृह क्लेश की समस्या से मुक्ति मिलती है। यह पर्व राधा रानी को समर्पित है इस खास दिन पर बरसाना समेत देश भर मे खास उत्साह देखने को मिलता है। श्री राधा रानी के मंदिरों को सजाया जाता है। इस अष्टमी तिथि को राधा रानी का जन्म बरसाना में हुआ था इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस संसार में जब-जब प्रेम की बात होती है तब तक राधा कृष्ण की जोड़ी को याद किया जाता है इनके बीच आध्यात्मिक प्रेम था। जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथो में आज भी किया जाता है हिंदू धर्म में राधा और कृष्ण को प्रेम का प्रतीक माना गया है।उनकी पूजा करने के लिए भाद्रपद सबसे खास माना जाता है। जहां भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष को अष्टमी को जन्माष्टमी होती है वहीं इसी माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है इस दिन राधा कृष्ण की जोड़ी पूजा करने से विवाहित जीवन में सुख समृद्धि का वास होता है साथ ही पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता बनी रहती है।

हम प्रत्येक प्रभु की दृष्टि में मूल्यवान हैं : महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद
Published / 2024-09-08 18:47:48
हम प्रत्येक प्रभु की दृष्टि में मूल्यवान हैं : महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद

एबीएन न्यूज नेटवर्क, बेड़ो, दिघिया। रांची महाधर्मप्रांत के दीघिया के संत बर्कमंस चर्च प्रांगण में आज रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद ने पल्ली विश्वासियों के लिए पहली बार मिस्सा बलिदान अर्पित किया और दृढ़करण संस्कार प्रदान किया।  दिघिया पल्ली में आज रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद का आगमन हुआ, जहां उन्होंने पल्ली के कैथोलिक विश्वासियों के लिए रविवार का मिस्सा बलिदान अर्पित करने के साथ ही 6 व्यस्कों को दृढ़करण संस्कार प्रदान किया।महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद के पहली बार आने पर पल्ली के विश्वासियों ने उनका हर्षोल्लास से स्वागत किया और बेड़ो से बाइक रैली से उनका एस्कोर्टिंग किया। उन्होंने माता मरियम के पर्व पर माता मरियम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए अपने धर्मोपदेश में कहा कि: हम प्रभु ईश्वर की दृष्टि में हम प्रत्येक मूल्यवान हैं। माता मरियम एक साधारण परिवार से ताल्लुक रहते हुए भी ईश्वर की कृपापात्री बनी। प्रभु की आशीष के कारण ही वह कष्टों और दुखों में भी प्रभु के आज्ञा अनुसार चलते हुए उनकी इच्छा को पूरा कर ने में सक्षम बनी। उनके जीवन को आदर्श मानकर हमारे जीवन को भी उन्हीं के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है। मिस्सा  के अंत में महाधर्माध्यक्ष और सभी पुरोहितों का पल्लीवासियों ने जोरदार स्वागत किया और उनका आभार प्रकट किया। सांस्कृतिक समारोह में पल्लीवासियों ने रंगारंग प्रस्तुति से लोगों का हृदय जीत लिया। महाधर्माध्यक्ष ने पल्ली के विश्वासियों को और मजबूत बनने और बच्चों को उनके विश्वास तथा सहभागी जैसे गुणों के विकास करने में उनकी अगुवाई करने की सलाह दी। यह दिन युवाओं के लिए भी खास रहा क्योंकि पल्ली में युवा दिवस मनाया गया उन्होंने ने भी मन मोहक प्रस्तुति दी।  इस दृढ़करण संस्कार और सांस्कृतिक कार्यक्रम समारोह में रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद के आलावा, दिघिया के पल्ली पुरोहित फा विंसेंट मिंज, सहायक पल्ली पुरोहित फा परमदयाल खेस्स, फा रॉबर्ट मिंज, फा अजय मिंज, फा ब्रिसियूस मिंज, आर्चबिशप के सेक्रेटरी फा असीम मिंज, धर्मबहनें एवं हजारों की संख्या में ख्रीस्त विश्वासी शामिल हुए।

पर्युषण पर्व की आराधना कर्मों की निर्जरा एवं व्यक्तित्व निर्माण से : गौतम जी रांका
Published / 2024-09-07 21:04:47
पर्युषण पर्व की आराधना कर्मों की निर्जरा एवं व्यक्तित्व निर्माण से : गौतम जी रांका

टीम एबीएन, रांची। श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर डोरंडा मे मूर्तिपूजक संघ के आज पर्युषण पर्व अपनी अंतिम दिन के पूर्णता पर है! मंदिर में नमिनाथ जिनालय में सुबह भगवान का अभिषेक व स्नात्र पुजा हुई, सात दिनो से कल्पसूत्र का वांचन हो रहा था, उसका आज प्राकृतभाषा में मुलसूत्र का वांचन हुआ। शाम में सभी श्रावक एवं श्राविकाओं ने सामुहिक प्रतिक्रमण किया। प्रतिक्रमण के बाद सभी साध्वी भगवंतों ने संकुल संघ से क्षमायाचना की, सकल संघ ने भी गुरु भगवंतों से क्षमा मांगी एवं एक दूसरे से क्षमा मांगी। क्षमा इस प्रकार मांगी जाती है 12 मास, 24 पक्ष, 365 दिन में किसी भी प्रकार से मैंने आपको दु:ख पहुंचाया हो तो मन, वचन, काया से आप मुझे अपने उदार र्ह्दय से क्षमा प्रदान करें। सुरेश बोथरा व श्रुति सेठिया के आज आठ उपवास था। किसी के आज बीस उपवास, किसी के आठ उपवास, तीन एवं दो उपवास एवं आज प्राय: सभी श्रद्धालुओं का उपवास था। रात्रि में 16 सतियों के जीवन का वांचन एवं मंचन हुआ। इधर, दिगम्बर जैन भवन में पर्वाधिराज पर्युषण के आज छठे दिन श्री साधु मार्गी जैन संघ के कार्यक्रम में स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका और सुरेशजी बोरडिया ने बताया कि पर्युषण पर्व की आराधना स्वाध्याय, संस्कार, वातावरण एवं समय नियोजन से की जा सकता है।पढमं नाणं तओ दआ अर्थात पहले ज्ञान फिर आचरण ज्ञान। आत्मशुद्धि, ज्ञान एवं प्रज्ञा की निर्मलता, आत्मा की सरलता स्वाध्याय से की जा सकती है। संस्कार से व्यक्तित्व कनिर्माण होता है, संस्कार मनुष्य के जीवन की नींव है। बाल संस्कार, युवा संस्कार, परिवार संस्कार से सशक्त राष्ट्र निर्माणहो सकता है। वातावरण अर्थात समाज एवं सरकार का दायित्व है कि ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे चारों ओर शांति व स्मृद्धि की गूंज हो। समय नियोजन अर्थात जिस तरह से विद्यार्थी, खिलाड़ी, प्रशिक्षक समय का नियोजन करते है उसी तरह आध्यात्मिक चेतना के लिए एवं आत्म शांति के लिए समय का नियोजन करना चाहिए। साधुमार्गी जैन संघ के झारखंड प्रभारी उत्तम चोरड़िया ने बताया कि आज छोटे लाल जी चोरड़िया, विशाल दस्सानी एवं धर्मेंद्र बोहरा के आज सात उपवास है। घेवरचंद नाहटा ने अपने उद्गार व्यक्त किये, रूबी भाटिया ने प्रेक्षा ध्यान के बारे मे बताया एवं महिला मंडल, समता मंडल द्वारा तपस्या के उपलक्ष्य में गीत पेश किये गये। दिगंबर जैन भवन में कल पर्युषण के अंतिम दिवस में सुबह 8 बजे से प्रवचन तत्पश्चात बच्चों, महिलाओं का सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम को प्रतिक्रमण है, उसके बाद सभी एक दूसरे से क्षमा याचना करेंगे। कल जैन मंदिर डोरंडा में प्रवचन  सुबह 8:30 बजे से यथावत रहेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी। 

पूर्णता की ओर बढ़ रहा जैन श्वेतांबर का पर्यूषण पर्व
Published / 2024-09-05 20:56:14
पूर्णता की ओर बढ़ रहा जैन श्वेतांबर का पर्यूषण पर्व

टीम एबीएन, रांची। श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगम्बर जैन भवन में चल रहा है। श्वेतांबर जैन धर्म का पर्वाधिराज पर्युषण गतिमान है, इस अवसर पर धर्म की आराधना और त्याग, तपस्या और संयम का विशेष महत्व है।  इस अवसर पर लोग अपने आत्म शुद्धि, आत्म साक्षात्कार, धर्म ध्यान, त्याग, तपस्या आदि करके अपने कर्मों की निर्जरा करतें हैं। पूरे चातुर्मास में एवं इस पर्युषण पर्व के दौरान अधिकतर लोग सूर्यास्त से पूर्व ही भोजन ग्रहण कर लेते है। अगले दिन सूर्योदय के पश्चात ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जैन मंदिर डोरंडापर्युषण पर्व धीरे धीरे अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर हो रहा है। कहते हैं कि पर्व के दिन संकरे यानी छोटे होते हैं। आज पर्यूषण पर्व का छठवें रोज जैन मंदिर डोरंडा में सुबह 6:30 बजे नमिनाथ जिनालय में सुबह अभिषेक व स्नात्र पूजा बड़े ही उत्साह व ठाठ बाठ से संपन्न हो रही हैं! आज प्रवचन में भगवान महावीर के जन्म महोत्सव का बहुत ही सजीव वर्णन पुज्य भव्योंदया श्री जी ने किया बताया दिक्कुमारियां, ढ़य इंद्र आदि नाचगान करके भगवान का जन्म बहुत ही आनंद से उत्सव मनाते हैं। क्षत्रियकुंड नगरी में संगंधित द्रव्यों का छिड़काव, पूरे राज्य में मिष्ठान वितरण सभी बंदियों को रिहा किया गया था, गर्भ में जब से बालक आया तब से राज्य में हर जगह सम्रद्धि आई इसीलिये भगवान का नाम वर्द्धमान भी रखा गया। आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भगवान के पिता सिद्धार्थ महाराज एवं माता त्रिशला रानी के द्वारा भगवान महावीर के जन्म का नाट्य मंचन हुआ।श्रद्धाल का उत्साह देखते ही बनता है ऐसा लग रहा है कि सभी श्रद्धालु नंदीश्वरदीप मैं ही परमात्मा की भक्ति पूजा कर रहे हैं। मौके पर संपतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, सुरेश बोथरा, आनंद गोठी, विनय नाहटा, अनिल कोठारी, संजय कोठरी, राजू रामपुरिया, बालवीर बोथरा, अक्षय सेठिया, विनायक मेहता, रिखभ चंद भंसाली, प्रमोद बोथरा आदि के साथ काफी श्रद्धालु उपस्थित थे। इधर, दिगंबर जैन भवन मे श्री साधुमार्गी जैन संघ रांची के पर्युषण के 5 दिवसयीय कार्यक्रम में स्वाध्यायी द्वय गौतम रांका और सुरेश बोरडिया ने बहुत ही सुंदर तरीके से जीवन में कैसे जैन धर्म के नियमों को अपना कर अपने कर्मों की निर्जरा कर सकते हैं, इस विषय पर प्रवचन दिया। जैन धर्म हमें संसार में जीवन जीने की कला सिखाता है। यह संस्कार बहुत आसानी से हम अपने बच्चों में देकर अपनी और उनके जीवन को सफल बना सकते हैं। सुबह 8 बजे से अन्त: गढ़ सूत्र वाचन सुरेश जी ने किया, जिसमें गजसुकुमार के जीवन अध्यन के बारे में बताया गया कि अनेकानेक भव में किये गए कर्म भी हमारा पीछा नहीं छोड़ते और हमें स्वजन, परिजन, महल, बगीचे, सोने धन वैभव सब नस्वर हैं और छूटने वाले हैं। रांची के जैन समाज में तपस्याओं की कड़ी चल रही है जिसमे श्री छोटे लाल चोरडिया, विशाल दस्साणी और धर्मेंद्र बोहरा लगातार 5 दिनों से उपवास कर रहें हैं।संगीता लोढ़ा 50 दिनों के आयम्बिल की तपस्या कर रही हैं।  सुबह 4:30  बजे रायसी प्रतिक्रमण, उसके बाद प्रार्थना और ध्यान का कार्यक्रम हुआ। आज दिगंबर जैन भवन में पारस हॉस्पिटल के सहयोग से स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया जिसमें 70 लोगो ने अपना स्वास्थ्य चेकअप करवाया।मौके पर प्रकाश चन्द नाहटा, छोटे लाल चोरड़िया, देव चन्द पींचा, मगन देवी पींचा, पायल कोठारी, पुष्पा बच्छावत, सुमन बरमेचा, वंदना चोरडिया और अन्य महिला मंडल के सदस्य उपस्थित थे। दिगंबर जैन भवन में कल सुबह सुबह 6 बजे से 24 घण्टे का अखण्ड नवकार महामंत्र का जप एवं अन्य कार्यक्रम यथावत रहेंगे एवं जैन मंदिर डोरंडा में सुबह कल्पसूत्र वांचन, प्रवचन एवं शाम में भक्ति भजन किया जायेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

श्वेतांबर जैनधर्म के पर्युषण पर्व में जुटी रही लोगों की भारी भीड़
Published / 2024-09-04 20:48:42
श्वेतांबर जैनधर्म के पर्युषण पर्व में जुटी रही लोगों की भारी भीड़

टीम एबीएन, रांची। श्वेतांबर जैनधर्म का पर्युषण पर्व का कार्यक्रम डोरंडा जैन मंदिर एवं दिगम्बर जैन भवन में चल रहा है। पर्युषण पर्व अंतर्गत श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में धर्म आराधना चल रही है एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का दिगम्बर जैन भवन में पर्युषण कार्यक्रम हो रहा है। जैन मंदिर डोरंडा में आज पर्युषण पर्व के पांचवे दिवस पर सुबह 6.30 बजे नमिनाथ जिनालय में सामुहिक अभिषेक व स्नान, पूजा संपन्न हुई। तत्पश्चात कल्पसूत्र वाचन हुआ, जिसमें आज भगवान महावीर के जन्म के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया एवं श्रद्धालुओं द्वारा जन्म उत्सव मनाया गया। स्नात्र पूजा अर्थात जब भगवान का जन्म होता है तब इन्द्र महाराजा, भगवान को ले जाकर मेरुपर्वत पर सभी देवी देवाताओं के साथ पूजा करते है। आज पुज्य लयस्मिता की शिष्या जिनवर्षा जी ने भगवान पार्श्वनाथ जी का जीवन परिचय दिया, भगवान पार्श्वनाथजी को इतनी महिमा है कि हर मंदिर में इनकी मूर्ति होती है। नेमिनाथ जीवन चरित्र का वर्णन किया गया, नेमिनाथ भगवान श्रीकृष्ण के चचेर भाई हैं जिनका मोक्ष गिरनार पर्वत पर हुआ है। भगवान महावीर के जन्म पर वाचन किया गया, बताया गया कि जब भगवान का जन्म होता है, तब उनकी माता त्रिशला  चौदह चौदह स्वप्न देखते है। उन सपनों को प्रदर्शित किया गया एवं उनके बारे में साध्वी जी के द्वारा विस्तार पूर्वक बताया गया एवं श्रद्धालुओं के द्वारा सपनों की पुजा करके सबको दर्शन करवाया गया। भगवान पालना के सामने आज शाम में भक्ति भजन कार्यक्रम रखा गया है। सम्पतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, सुरेश बोथरा, आनंद गोठी, विनय नाहटा, अनिल कोठारी, संजय कोठरी, राजू रामपुरिया, बालवीर बोथरा, अक्षय सेठिया, विनायक मेहता, रिखभ चंद भंसाली, प्रमोद बोथरा, धर्म चंद भंसाली, प्रमोद बोथरा आदि के साथ काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इधर, दिगंबर जैन भवन में पर्युषण महापर्व के अपने आधे मार्ग को तय करते हुए आज चतुर्थ दिन श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ के स्वाध्यायी बंधु गौतम जी रांका एवं सुरेश जी बोरडिया ने प्रवचन दिया कि आत्म साधना के लिए पारिवारिक शांति कि आवश्यकता होती है। व्यक्ति अगर किसी तरह के पारिवारिक तनाव में रहकर जीता है तो वह धर्म कि सम्यक आराधना नहीं कर सकता, आत्म साधना के लिए घर का वातावरण भी सहायक होता है।धर्म आराधना जैसे कल्याणकारी कार्य के लिए परिवार में शांति कि आवश्यकता होती है। एक आदर्श सुखकर परिवार का निर्माण संस्कारों कि नींव पर आधारित होती है। परिवार में हर सदस्य एक दूसरे के प्रति सहज सरल समर्पित रहें, बड़ों का आदर और छोटों पर महर हो तो वह परिवार सुखी बना रहेगा, ऐसे सुखी परिवार के बीच मयार्दा का प्रस्फुटन स्वत: हो जाता है। राजेश पींचा एवं प्रकाश नाहटा ने अपने विचार प्रस्तुत किये। आज वाणी संयम दिवस अवसर पर वाणी कि सुचिता रखने कि चर्चा कि गयी अंत: गढ़ सूत्र की वाचना एवं अभय कुमार के जीवन चरित्र के माध्यम से धर्म जागरण और ज्ञान, दर्शन, चरित्र तप जीवन, परिवार और समाज में महत्व कीबात बताई गई। इस अवसर पर देव पींचा, राजेश बच्छावत, अर्जुन बोहरा, मोहन लाल नाहटा, मूलचंद सुराणा, केसर देवी पींचा, सरिता दस्सानी, पुष्पा बछावत, करुणा चोरड़िया, रेशमा बोहरा, पुष्पा सुराणा सहित कई श्रावक और श्राविकाएं उपस्थित थे। मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने बताया कि दिगंबर जैन भवन में सुबह 8 बजे से अंत: गढ़ सूत्र वांचन एवं तत्पश्चात 8:30 बजे से प्रवचन एवं दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में प्रतिक्रमण किया जायेगा।

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