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ब्रह्मांड में मिला ऐसा एस्टेरॉयड, अद्भुत खोज से हैरत में वैज्ञानिक
Published / 2022-02-20 17:43:13
ब्रह्मांड में मिला ऐसा एस्टेरॉयड, अद्भुत खोज से हैरत में वैज्ञानिक

एबीएन डेस्क। ब्रह्मांड में कई ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में दुनिया को कोई जानकारी नहीं है। वैज्ञानिक लगातार ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने की कोशिश में लगे हैं। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने अनोखे एस्टेरॉयड की खोज की है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस एस्टेरॉयड के तीन चंद्रमा हैं। वैज्ञानिकों ने इस अनोखे एस्टेरॉयड की खोज सबसे पहले 19वीं सदी में की थी जिसकी पहचान अंतरिक्ष के पहले क्वाड्रूपल सिस्टम के तौर पर हुई है। यह अनोखा एस्टेरॉयड 257 किमी चौड़ा है। वैज्ञानिकों ने इस एस्टेरॉयड को 130 इलेक्ट्रा नाम दिया है। यह नाम यूनानी देवता के ऊपर रखा गया है। इस एस्टेरॉयड के साथ वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाली खोज की है। उन्होंने बताया है कि इसके 3 छोटे-छोटे चंद्रमा हैं। वैज्ञानिकों ने अभी तक 11 लाख एस्टेरॉयड खोजे हैं, लेकिन किसी के उपग्रह नहीं मिले थे। वैज्ञानिकों ने बताया है कि 11 लाख एस्टेरॉयड में से 150 के कम से कम एक चंद्रमा हैं, लेकिन हमेशा इनकी तलाश नहीं की जा सकती है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले इलेक्ट्रा को साल 1873 में खोजा था। यह मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित एस्टेरॉयड बेल्ट में पाया गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने 130 साल बाद इसके पहले चंद्रमा को खोजा। फिर साल 2014 में वैज्ञानिकों को इसके दूसरे चंद्रमा के सबूत मिले। इन एस्टेरॉयड को खोजना कठिन होता है, क्योंकि इनकी रोशनी बहुत कम होती है। छोटे उपग्रह के चक्कर लगाने से इनकी रोशनी और भी कम हो जाती है जिसकी वजह से इनके दिखने की संभावना कम होती है। इस अनोखे एस्टेरॉयड की खोज थाइलैंड के नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह इलेक्ट्रा पहला quadruple सिस्टम है जिसे खोजा गया है। उन्होंने बताया है कि इस एस्टेरॉयड का पहला चांद 6 किमी, दूसरा 2 किमी और तीसरा चांद 1.6 किमी चौड़ा है। नया मिला चांद 340 किमी की दूरी से एस्टेरॉयड की परिक्रमा कर रहा है।

5जी : वोडाफोन आइडिया ने किया "वीओएनआर" का सफल परीक्षण
Published / 2022-02-17 03:50:54
5जी : वोडाफोन आइडिया ने किया "वीओएनआर" का सफल परीक्षण

एबीएन डेस्क। दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड ने अपनी प्रौद्योगकी भागीदार नोकिया के साथ 5जी परीक्षण के दौरान "5जी वॉयस ओवर न्यू रेडियो" (वीओएनआर) क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। कंपनी का 5जी परीक्षण गुजरात के गांधीनगर में जारी है। वोडाफोन आइडिया ने बुधवार को एक बयान में यह जानकारी दी। कंपनी ने नई क्षमता के बारे में कहा कि वीओएनआर समाधान की तैनाती से ग्राहक 5जी पर बातचीत के "हाई-डेफिनिशन" अनुभव के साथ-साथ कई उन्नत "वॉयस एप्लिकेशन" का उपयोग कर सकेंगे। कंपनी गांधीनगर, गुजरात और महाराष्ट्र के पुणे में सरकार से प्राप्त 5जी स्पेक्ट्रम का परीक्षण कर रही है।

कार्बनिक पोलिमर के सहारे सूक्ष्म प्रदूषक हटाकर बनाया जायेगा पेयजल
Published / 2022-02-16 12:27:18
कार्बनिक पोलिमर के सहारे सूक्ष्म प्रदूषक हटाकर बनाया जायेगा पेयजल

एबीएन डेस्क। भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा व अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के वैज्ञानिकों ने एक कार्बनिक पोलिमर विकसित किया है। यह पानी में से उच्च ध्रुवीय कार्बनिक सूक्ष्म प्रदूषकों (पीओएम) को हटाकर जल को पीने के लिए सुरक्षित बनाएगा। दावा है कि प्रयोगशाला के स्तर पर कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने के लिए इन पोलिमर का परीक्षण किया जा चुका है। इन सामग्री का औद्योगिक साझेदारों के साथ बड़े पैमाने पर निर्माण करके पानी में से जहरीले ध्रुवीय कार्बनिक सूक्ष्म प्रदूषकों को हटाकर साफ किया जा सकता है। अनुसंधान अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के एसीएस अप्लाइड मैटीरियल्स एंड इंटरफेसेस में प्रकाशित भी हुआ है। भोपाल के आईआईएसईआर के रसायन विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर अभिजीत पात्रा ने बताया कि भारत में घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों द्वारा सतह पर और भूजल में छोड़े गए मानव जनित अपशिष्ट के कारण जल प्रदूषण होना चिंता का मुख्य विषय है। उन्होंने कहा कि इन अपशिष्टों में कार्बनिक और अकार्बनिक सूक्ष्म प्रदूषक होते हैं और कार्बनिक सूक्ष्म प्रदूषकों की पानी में जरा सी मौजूदगी भी मानव की सेहत के लिए और जलीय जंतुओं के लिए खतरा होती है। पानी को शुद्ध करने के लिए सोखना प्रक्रिया अच्छी तकनीक : एसोसिएट प्रोफेसर अभिजीत पात्रा के मुताबिक, कार्बनिक सूक्ष्म प्रदूषकों से पानी को शुद्ध करने के लिए "सोखना" नामक एक प्रक्रिया सबसे अधिक ऊर्जा कुशल तकनीकों में से एक है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में कई अड़चनें हैं, इसलिए सोखने वाले प्रभावी सामग्री की जरूरत है जो न केवल तेजी से पानी में उच्च कार्बनिक सूक्ष्म प्रदूषकों को साफ करे, बल्कि निर्माण की साधारण तकनीकों के माध्यम से बड़े पैमाने पर उसका कृत्रिम उत्पादन भी किया जा सके। इस परियोजना का वित्तपोषण भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने "सस्टेनेबल ट्रीटमेंट, रीयूज एंड मैनेजमेंट फॉर एफिशिएंट, अफोर्डेबल एंड सिनर्जिस्टिक सॉल्यूशंस फॉर वाटर" के तहत किया है।

सेमीकंडक्टर विनिर्माण पहल को उद्योग जगत से मिली शानदार प्रतिक्रिया : वैष्णव
Published / 2022-02-15 18:14:45
सेमीकंडक्टर विनिर्माण पहल को उद्योग जगत से मिली शानदार प्रतिक्रिया : वैष्णव

एबीएन डेस्क। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से की गई पहल को उद्योग जगत से मिली "शानदार" प्रतिक्रिया का मंगलवार को स्वागत किया। वैष्णव ने आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम के रणनीतिक समीक्षा संवाददाता सम्मेलन में उद्योग जगत से अपनी कोशिशें और बढ़ाने का आह्वान भी किया। वैष्णव ने कहा, मुझे बेहद खुशी है कि बहुत कम समय में सेमीकंडक्टर विनिर्माण से जुड़े भागीदारों से शानदार प्रतिक्रिया देखने को मिली है। वैष्णव का सेमीकंडक्टर अभियान को शानदार प्रतिक्रिया मिलने का यह बयान वेदांता का फॉक्सकॉन के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए हुए करार के एक दिन बाद आया है। इसके पहले टाटा समूह भी सेमीकंडक्टर विनिर्माण में उतरने को लेकर दिलचस्पी दिखा चुका है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गत 15 दिसंबर, 2021 को घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 76,000 करोड़ रुपये लागत वाली योजना को मंजूरी दी थी। इससे सेमीकंडक्टर की किल्लत को दूर करने और देश में इसका उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर चिप के डिजाइन एवं विनिर्माण दोनों ही क्षेत्रों में उद्योग जगत ने खासा उत्साह दिखाया है। उन्होंने कहा कि इससे देश में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा, ये सभी रोजगार के नए अवसर होंगे। उद्योग जगत से मेरा अनुरोध है कि वह अपनी कोशिशों को और तेज करें। आप नए विचार एवं सुझावों के साथ सामने आएं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस नए विनिर्माण क्षेत्र में उद्योग जगत से मिलने वाले सुझावों का इंतजार है। इसके साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2021-22 में आईटी क्षेत्र में 4.5 लाख नए रोजगार अवसर पैदा करने के लिए उद्योग का आभार भी जताया। इस तरह आईटी क्षेत्र में मिलने वाले प्रत्यक्ष रोजगार की संख्या 50 लाख हो चुकी है।

साल का पहला रडार इमैजनिंग सैटेलाइट लॉन्च
Published / 2022-02-14 04:37:52
साल का पहला रडार इमैजनिंग सैटेलाइट लॉन्च

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो-ISRO) ने इस साल का अपना पहला रडार इमैजनिंग सैटेलाइट Earth Observation Satellite (EOS-04) को आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आज सुबह सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इसरो ने यह सैटेलाइट लॉन्च पैड से आज सुबह 05.59 बजे दो छोटे सह-यात्री उपग्रहों के साथ पीएसएलवी से लॉन्च किया है। पीएसएलवी के जरिए इसरो ने धरती के पर्यवेक्षण उपग्रह या अर्थ ऑब्जर्वेश उपग्रह (orbit earth observation satellite EOS-04) को अंतरिक्ष में भेजा है। इस सैटेलाइट का नाम रडार इमैजनिंग उपग्रह भी है जो धरती की सतह की सटीक तस्वीर इसरो को भेजेगा। इसरो ने इस सैटेलाइट के साथ छोटे-छोटे दो और सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा है। पीएसएलवी-सी52 के जरिए 1,710 किलोग्राम वजन वाला ईओएस-04 उपग्रह को सूर्य की ध्रुवीय कक्षा में ग्रह से 529 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा। इसरो ने चार चरणों वाला रॉकेट पीएसएलवी से एक स्टूडेंट्स का उपग्रह INSPIRESat और दूसरा INSAT-2DT उपग्रह भी इसी उपग्रह के साथ लॉन्च किया है। INSAT-2DT भारत और भूटान का संयुक्त मिशन है। मिशन की सफलता के बाद इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट किया, PSLV-C52 का मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है। दरअसल, रडार इमैजनिंग सैटेलाइट को ही अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-4 कहा जाता है। यह सैटेलाइट किसी भी मौसम में धोरती की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीर भेजेगा। इससे बाढ़, मृदा अपरदन, जंगल, कृषि, हरियाली आदि की सटीक मैपिंग की जा सकेगी। यह अंतरिक्ष यान रिसोर्स सैटेलाइट, कार्टोसैट और RISAT-2B सीरीज के उपग्रह से प्राप्त डाटा को सी-बैंड में कलेक्ट करेगा। इस उपग्रह का कार्यकाल 10 साल का होगा।

कल सुबह 5:59 मिनट पर इओएस-04 के साथ उड़ान भरेगा PSLV-C52
Published / 2022-02-13 06:48:08
कल सुबह 5:59 मिनट पर इओएस-04 के साथ उड़ान भरेगा PSLV-C52

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के 2022 के पहले मिशन की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 14 फरवरी को सुबह 5:59 बजे मिशन पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C52) का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण होगा। इसके जरिए धरती का पर्यवेक्षण उपग्रह (ईओएस)- 04 अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो ने एक ट्वीट में बताया कि पीएसएलवी-सी52, ईओएस-04 मिशन के प्रक्षेपण के लिए 25 घंटे 30 मिनट की उलटी गिनती आज सुबह 04:29 बजे से शुरू हो गई है। पीएसएलवी-सी52 के जरिए 1,710 वजनी ईओएस-04 को 529 किमी ऊंचे परिक्रमा पथ में स्थापित किया जाएगा। क्या है इओएस-04 : इसरो ने बताया कि ईओएस-04 रडार इमेजिंग उपग्रह है। इसका उपयोग पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने में होगा। इनसे कृषि, वन, पौधरोपण, मिट्टी में नमी, पानी उपलब्धता और बाढ़ ग्रस्त इलाकों के नक्शे को तैयार करने में मदद मिलेगी। यह दो उपग्रह भी साथ जाएंगे :- इंस्पायर सेट-1: यह उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान तकनीक संस्थान ने कोलोराडो विश्विद्यालय के अंतरिक्ष भौतिक शास्त्र व वायुमंडलीय प्रयोगशाला के साथ तैयार किया है। • आईएनएस-2टीडी : साथ प्रक्षेपित होने वाला यह दूसरा उपग्रह इसरो का ही है। इसे भारत व भूटान के संयुक्त उपग्रह आईएनएस-2वी के पहले विकसित कर भेजा रहा है। इनसेट-4बी बना देश का 21वां डी-कमीशन होने वाला उपग्रह : इस बीच इसरो ने बताया कि इनसेट-4बी को 24 जनवरी को डी-कमीशन कर पोस्ट मिशन डिस्पोजल (पीएमडी) पर भेजा गया है। पीएमडी भेजने मतलब है कि उपग्रह ने अपना समय पूरा कर लिया है और अब इसे डिस्पोज किया जा रहा है। यह 21वां उपग्रह जिसे इसरो पीएमडी कर रहा है। 11 मार्च 2007 को यह 1,335 किलो वजनी इनसेट-4बी अंतरिक्ष में 12 साल काम करने के लिए भेजा गया था। संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष मलबा नियंत्रण गाइडलाइन के तहत इसे डिस्पोज करने के लिए 340 किमी ऊंचाई के परिक्रमा पथ "ग्रेवयार्ड-आर्बिट" में भेजा गया है।

बीएसएनएल को 4जी की तरह 5जी नेटवर्क शुरू करने का भी काम : अश्विनी वैष्णव
Published / 2022-02-09 17:34:57
बीएसएनएल को 4जी की तरह 5जी नेटवर्क शुरू करने का भी काम : अश्विनी वैष्णव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने बुधवार को कहा कि भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को 4जी की तरह 5जी नेटवर्क शुरू करने का भी कार्य सौंपा जाएगा। संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा, प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत 5जी के कोर नेटवर्क, रेडियो नेटवर्क, उपकरण, हैंडसेट की पूरी तैयारी हो गई है। बहुत जल्द इसकी भी प्रगति के बारे में सदन के सदस्यों को जानकारी दी जाएगी। 4जी बीएसएनएल को दिया गया है। 5जी भी बीएसएनएल को दिया जाएगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सौगत रॉय के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह कहा। वैष्णव ने कहा कि बीएसएनएल की बाजार हिस्सेदारी 2014 में साढ़े सात प्रतिशत रह गयी थी, जो आज 10 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मंत्री ने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि आज बीएसएनएल का नेटवर्क हर महीने एक लाख घरों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह (नेटवर्क) लगभग 20 लाख घरों तक पहुंच गया है।

दो दिनों तक फ्री सर्विस देगी रिलायंस जियो, इन्हें होगा फायदा...
Published / 2022-02-07 09:58:04
दो दिनों तक फ्री सर्विस देगी रिलायंस जियो, इन्हें होगा फायदा...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रिलायंस जियो अपने कुछ यूजर्स को दो दिनों की फ्री सर्विस दे रही है। आपको बता दें कि शनिवार को जियो का नोटवर्क दिल्ली और मुंबई में डाउन हो गया था। यूजर्स का कहना है कि यह दिक्कत लगभग 8 घंटे तक हुई। इसका हर्जाना भरने के लिए रिलायंस जियो ने अपने यूजर्स को दो दिनों तक फ्री सर्विस देने का ऐलान किया है। यह सुविधा यूजर्स के जियो अकाउंट में जोड़ दी जाएगी और यूजर्स के मौजूदा प्लान की वेलिडिटी दो दिनों तक बढ़ जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी जियो यूजर्स को मैसेज कर रही है, जिसमें कहा गया है कि गुडविल गेस्चर के तौर पर हम 2-DAY RENTAL CREDIT दे रहे हैं, जो आपके नंबर पर ऑटोमेटिक अप्लाई हो जाएगा।

अगस्त में अंतरिक्ष में छोड़ा जायेगा चंद्रयान-3
Published / 2022-02-03 15:30:20
अगस्त में अंतरिक्ष में छोड़ा जायेगा चंद्रयान-3

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने कहा है कि भारत के अंतरिक्ष मिशन-चंद्रयान-3 को अगस्त में प्रक्षेपित करने की योजना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान -3 अगस्त 2022 में प्रक्षेपित किया जानेवाला है। डॉ सिंह ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि चंद्रयान-2 से मिली सीख और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर चंद्रयान-3 की तैयारी जारी है। इसके कई कल पुर्जे और प्रणालियों का निर्माण और उनके के विशेष परीक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि इसका लॉन्च (प्रक्षेपण) अगस्त 2022 के लिए निर्धारित है। डॉ सिंह ने बताया कि इस वर्ष जनवरी से दिसंबर तक कुल 19 अंतरिक्ष मिशन प्रक्षेपित करने की योजना है। इनमें आठ प्रक्षेपण यान मिशन, सात अंतरिक्ष यान मिशन और चार प्रौद्योगिकी दशार्ने के मिशन होंगे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण चल रहे कई मिशन प्रभावित हुए हैं। सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में नितिगत सुधार और नए प्रस्तुत मांग संचालित मॉडल की पृष्ठभूमि में परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया है।

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