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अब आपका एबीएन कई भाषाओं में उपलब्ध
Published / 2026-09-10 21:06:29
अब आपका एबीएन कई भाषाओं में उपलब्ध

प्रिय पाठकगण और सुधि दर्शकगण एबीएन न्यूज 24 डॉट कॉम के पांच साल पूरे होने के अवसर पर हमारी विकास यात्रा अब और भी आगे बढ़ चुकी है। आप एबीएन 24 डॉट कॉम न्यूज पोर्टल को हिंदी सहित अंग्र्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगाली, मैथिली और भोजपुरी भाषा में भी पढ़ सकते हैं। हमारा प्रयास है कि झारखंड-बिहार सहित देश दुनिया की अहम खबरों से आपको जल्द से जल्द अवगत करा सकें। खबरों की तेज होती दुनिया में आज की खबर अभी, अबतक और सच हो, ये हमारी टीम का प्रयास है। आप पाठकों का बड़ा सहयोग हम सब को मिल रहा है।  -एबीएन न्यूज 24 डॉट कॉम रांची झारखंड भारत

एयरटेल लाया एडोबी एक्सप्रेस प्रीमियम
Published / 2026-09-10 21:02:32
एयरटेल लाया एडोबी एक्सप्रेस प्रीमियम

इस गणेश चतुर्थी शुभकामनाओं को दें अनोखा और रचनात्मक अंदाज एबीएन नॉलेज डेस्क। गणेश चतुर्थी भारत में मनाये जाने वाली सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। लोग पंडाल दर्शन, घरों की सजावट, आरती के यादगार क्षण, परिवार के साथ बिताये खास पल और त्योहार की शुभकामनाएं सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर साझा कर रहे हैं। आज त्योहारों का उत्सव मनाना केवल प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने तक सीमित नहीं रह गया है। लोग इन खास पलों को डिजिटल रूप से कैप्चर करते हैं, रचनात्मक कंटेंट तैयार करते हैं और उसे दूसरों के साथ साझा करते हैं।  कंपनी से जुड़े मोहम्मद मुमताज ने बताया कि ग्राहकों को सर्वोपरि रखने की अपनी सोच के तहत, एयरटेल केवल बेहतरीन नेटवर्क अनुभव उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। कंपनी ऐसे डिजिटल लाभ भी मुहैया करा रही है, जो ग्राहकों को अपनों से जुड़े रहने, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्ति देने और उन पलों को साझा करने में मदद करते हैं जो उनके लिए सबसे अधिक मायने रखते हैं। इस त्योहार के माहौल में एयरटेल ग्राहक एडोबी एक्सप्रेस प्रीमियम की मदद से सोशल मीडिया पर अपने जश्न को रचनात्मक अंदाज में साझा कर सकते हैं। जिन ग्राहकों ने अभी तक इस सुविधा का लाभ नहीं उठाया है, वे जनवरी 2027 तक एडोबी एक्सप्रेस प्रीमियम का एक्सेस एक्टिवेट कर सकते हैं। प्रीमियम टेम्पलेट्स, एआई-संचालित क्रिएटिव टूल्स, इमेजेज, फॉन्ट्स और डिजाइन एसेट्स की मदद से ग्राहक इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा करने के लिए आकर्षक उत्सवी कंटेंट तेजी से तैयार कर सकते हैं, जो सोशल मीडिया पर उन्हें अलग नजर आने में मदद करता है। इस गणेश चतुर्थी पर ग्राहक आम फॉरवर्ड के बजाय पर्सनलाइज्ड त्योहार की शुभकामनाएं बनायें और ज्यादा अर्थपूर्ण बनायें। गणपति की सजावट, आरती सेलिब्रेशन और फैमिली मोमेंट्स दिखाने वाली इंस्टाग्राम स्टोरीज और रील्स डिजाइन करें। कम्युनिटी इवेंट्स, सोसाइटी सेलिब्रेशन और त्यौहार के समारोहों के लिए आकर्षक डिजिटल इनवाइट बनायें। क्रिएटिव एडिट्स, इफेक्ट्स और फेस्टिव थीम्स के साथ दर्शन के पलों को शेयर करने लायक पोस्ट में बदलें। गणपति स्थापना से लेकर विसर्जन तक के सफर को कैप्चर करते हुए हाइलाइट वीडियो और मेमोरी रील्स बनायें। जैसे-जैसे ग्राहक त्योहारों का जश्न मनाने और एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया का अधिक उपयोग कर रहे हैं, एडोबी एक्सप्रेस प्रीमियम उन्हें ऐसा कंटेंट बनाने की सुविधा देता है, जो अधिक व्यक्तिगत और आकर्षक हो और उनके उत्सव मनाने के अनूठे अंदाज को दर्शायें।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त को
Published / 2026-08-22 13:40:21
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त को

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त कोचांद से आगे अंतरिक्ष की नई उड़ान विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक : संजय सर्राफएबीएन नॉलेज डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन देश के अंतरिक्ष इतिहास की उस गौरवपूर्ण उपलब्धि की स्मृति में समर्पित है, जब 23 अगस्त 2023 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की और प्रज्ञान रोवर ने वहां वैज्ञानिक कार्य शुरू किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में भारत सरकार ने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया। चंद्रयान-3 की सफलता भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य, तकनीकी दक्षता, आत्मनिर्भरता और दृढ़ संकल्प का विश्वस्तरीय उदाहरण बनी। भारत चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने वाला दुनिया का चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट पहुंचने वाला पहला देश बना। चंद्रयान-3 के लैंडिंग स्थल को शिव शक्ति प्वाइंट नाम दिया गया।राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का उद्देश्य केवल चंद्रयान-3 की सफलता का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि देश की नई पीढ़ी में विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के प्रति रुचि पैदा करना भी है। इस अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को अंतरिक्ष विज्ञान तथा उसके अनुप्रयोगों से परिचित कराने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसका लक्ष्य युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को करियर के रूप में अपनाने तथा वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।अंतरिक्ष तकनीक आज केवल रॉकेट और उपग्रहों तक सीमित नहीं है। मौसम की सटीक जानकारी, कृषि, संचार, नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, जल संसाधनों की निगरानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अनेक क्षेत्रों में उपग्रह तकनीक आम जनजीवन को लाभ पहुंचा रही है।इस प्रकार अंतरिक्ष कार्यक्रम देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 का विषय है-विकसित भारत की दिशा में नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा। यह विषय भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में वैज्ञानिक प्रगति के महत्व को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हमें यह संदेश देता है कि आकाश सीमा नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का द्वार है। चंद्रयान-3 की सफलता ने देश के करोड़ों युवाओं में यह विश्वास जगाया है कि भारतीय प्रतिभा और परिश्रम के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। आज भारत चंद्रमा से आगे सूर्य, मंगल और मानव अंतरिक्ष यात्रा जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ नवाचार, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के सपने को साकार करने का प्रेरणापर्व भी है।

आखिर पंचक को क्यों माना जाता है अशुभ
Published / 2026-07-30 20:30:20
आखिर पंचक को क्यों माना जाता है अशुभ

जानें वार के अनुसार पंचक का फल और नाम  एबीएन नॉलेज डेस्क। जब भी कोई शुभ कार्य किया जाता है, तो उसमें पंचक का विशेष ख्याल रखा जाता है। आखिर लोग पंचक को इतना अशुभ क्यों मानते हैं। आइये जानते हैं वार के अनुसार पंचक का क्या फल और नाम है। रविवार (रोग पंचक): इस दिन शुरू होने से शारीरिक कष्ट, रोग और मानसिक तनाव का डर रहता है। सोमवार (राज पंचक): इस दिन से शुरू होने वाला पंचक शुभ माना जाता है। इसमें सरकारी कार्य और संपत्ति से जुड़े काम पूरे होते हैं। मंगलवार (अग्नि पंचक): इस दिन आग लगने का भय, दुर्घटना या कोर्ट-कचहरी के विवादों में नुकसान की संभावना रहती है। बुधवार और गुरुवार: इन दोनों वारों से शुरू होने वाले पंचक में सामान्य नियम रहते हैं और विशेष कार्यों को छोड़कर बाकी काम किए जा सकते हैं। शुक्रवार (चोर पंचक): इस दिन से शुरू होने पर धन की हानि, व्यापार में घाटा या चोरी का खतरा रहता है। शनिवार (मृत्यु पंचक): इस दिन पंचक लगने से मृत्यु के समान कष्ट, बड़े हादसे या भारी नुकसान का योग बनता है। पंचक के दौरान क्या न करें लकड़ी या ईधन इकट्ठा करना: पंचक में लकड़ी खरीदना या घर में लाना मना है। निर्माण कार्य: घर की छत डलवाना या नई नींव रखना वर्जित माना गया है। यात्रा: दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना अशुभ माना जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस 20 को
Published / 2026-07-18 18:14:53
अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस 20 को

अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस 20 कोमानव जिज्ञासा, विज्ञान और अंतरिक्ष अन्वेषण का उत्सव : संजय सर्राफएबीएन नॉलेज डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस प्रत्येक वर्ष 20 जुलाई को मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन वर्ष 1969 में मानव इतिहास की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक, अपोलो-11 मिशन के अंतर्गत अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था। यह घटना विज्ञान, तकनीक और मानव साहस की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक मानी जाती है। अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के वैज्ञानिक अध्ययन, शांतिपूर्ण उपयोग तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति वैशिक सहयोग को बढ़ावा देना है। यह दिवस लोगों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति रुचि जागृत करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। साथ ही यह अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं और मानवता के साझा प्रयासों को रेखांकित करता है। चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है, जिसका पृथ्वी के पर्यावरण और जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। समुद्र में ज्वार-भाटा, पृथ्वी की धुरी की स्थिरता तथा कई प्राकृतिक प्रक्रियाएं चंद्रमा से प्रभावित होती हैं। प्राचीन काल से ही चंद्रमा मानव सभ्यता, संस्कृति, साहित्य, कला और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आज आधुनिक विज्ञान चंद्रमा को भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, अनुसंधान केंद्रों तथा अन्य ग्रहों की यात्राओं के लिए आधार के रूप में देख रहा है। भारत के लिए भी यह दिवस अत्यंत गौरव का विषय हैभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 तथा चंद्रयान-3 जैसे सफल अभियानों के माध्यम से विश्व अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। विशेष रूप से चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला विश्व का पहला देश बनाया, जिसने भारतीय वैज्ञानिक क्षमता का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया इस दिवस का संदेश है कि अंतरिक्ष किसी एक देश की संपत्ति नहीं, बल्कि समस्त मानवता की साझा धरोहर है। चंद्रमा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण, वैज्ञानिक और मानव कल्याण के उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस हमें विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, नवाचार, सहयोग और सतत विकास की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। यह दिवस नयी पीढ़ी को बड़े सपने देखने, वैज्ञानिक सोच अपनाने और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। मानवता के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में चंद्रमा आज भी आशा, अनुसंधान और असीम संभावनाओं का प्रतीक बना हुआ है।

एएससीआई एआई से बने विज्ञापनों पर हुआ सख्त
Published / 2026-07-15 20:10:53
एएससीआई एआई से बने विज्ञापनों पर हुआ सख्त

एआई से बने विज्ञापनों पर सख्ती: एएससीआई ने जारी किया ड्राफ्ट, कंटेंट पर भी लागू होगा नियम एबीएन सेंट्रल डेस्क। तकनीक के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए डीपफेक और एआई कंटेंट से लोगों को जाल साज गुमराह कर रहे हैं। इसे लेकर देश में पहली बार एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार होने वाले विज्ञापनों के लिए अलग नियम की तैयारी शुरू हो गयी है। विज्ञापन नियामक संस्था एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल आॅफ इंडिया (एएससीआई) ने इसका मसौदा जारी किया है। एआई से बने बने विज्ञापनों पर लगाना होगा टैग विज्ञापन नियामक संस्था ने कहा किसी विज्ञापन में एआई की मदद से किसी सेलिब्रिटी की आवाज या चेहरा बनाया गया है, प्रोडक्ट का डेमो तैयार किया गया है, वर्चुअल इन्फ्लुएंसर दिखाया गया है या ऐसा दृश्य है जो उपभोक्ता के खरीदी के फैसले पर असर डाल सकता है, तो उस पर साफ तौर पर बताना होगा कि यह एआई से बनाया गया है। हालांकि, केवल टैग लगा देना हर मामले में पर्याप्त नहीं होगा। फर्जी डॉक्टर, नकली प्रशंसापत्र (टेस्टिमोनियल), बढ़ा-चढ़ाकर दिखाये गये नतीजे या बिना अनुमति किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरा इस्तेमाल करने वाले एआई विज्ञापनों को सीधे खारिज किया जायेगा। विशेषज्ञ बोले- छोटा-सा लेबल पर्याप्त नहीं संसदीय समिति पहले ही उपभोक्ताओं को एआई आधारित ठगी से बचाने के लिए सख्त नियम बनाने की सिफारिश कर चुकी है। सुझावों में तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा है कि स्क्रीन पर छोटे-से एआई लेबल से काम नहीं चलेगा। उन्होंने डिजिटल ट्रैकिंग, वाटरमार्क, कंपनियों की जवाबदेही और नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की भी सिफारिश की है। मालूम हो, एएससीआई ने मसौदे पर सुझाव मांगे थे। ये सरकार को मिल चुके हैं। इन्हीं के आधार पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किये जायेंगे। ये हैं प्रस्तावित नियम एआई विज्ञापनों को हाई, मीडियम और लो-रिस्क श्रेणियों में बांटा जायेगा। हाई-रिस्क में आने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगेगा। मीडियम-रिस्क विज्ञापनों पर एआई से तैयार या एआई संवर्धित टैग जरूरी होगा। सामान्य फोटो एडिटिंग, रंग सुधार, बैकग्राउंड म्यूजिक पर लेबल जरूरी नहीं होगा। एआई आधारित सिफारिशों वाले प्रायोजित प्रचार में भी बताना होगा कि सामग्री स्पॉन्सर्ड है। सोशल मीडिया के बाद अब विज्ञापनों की बारी इससे पहले केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर डीपफेक और एआई कंटेंट की पहचान तथा शिकायत मिलने के तीन घंटे के भीतर उसे हटाने के नियम बना चुकी है। अब एआई से तैयार विज्ञापनों के लिए दिशा-निर्देश लाये जा रहे हैं। इससे यह तय होगा कि कौन-से विज्ञापन टैग से चल सकेंगे और किन पर रोक लगेगी।

ह्वाट्सऐप्प के नये फीचर पर मेटा को सरकार का नोटिस
Published / 2026-07-02 20:47:21
ह्वाट्सऐप्प के नये फीचर पर मेटा को सरकार का नोटिस

ह्वाट्सऐप्प के नये यूजरनेम फीचर पर सरकार की रोक मेटा को थमाया नोटिस, पूछा- क्यों न की जाए कार्रवाई? एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने मेटा को इस नोटिस का जवाब देने के लिए मात्र 3 दिनों का समय दिया है। जब तक सरकार इस मामले में पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक ह्वाट्सऐप्प भारत में इस फीचर को लॉन्च नहीं कर पायेगा। नोटिस में सरकार ने क्या कहा? सरकार की ओर से जारी नोटिस में लिखा है, ऐसा महसूस होता है कि यह फीचर आॅनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और नकली पहचान वाले हमलों के मामलों को काफी हद तक बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे बुरे लोग पीड़ितों को लुभाने और मैसेज करने में मदद कर सकते हैं। सरकार ने पूछा आप पर कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाये? सरकार ने साफ कहा है कि जब आप जानते हैं कि इस नए फीचर से आॅनलाइन ठगी और स्कैम बढ़ेंगे, तो फिर देश के आईटी कानून (आईटी एक्ट 2000) और नियमों को तोड़ने के आरोप में आप पर कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाये? मेटा को इसका लिखित और विस्तृत जवाब देना होगा। सरकार को किस बात का है डर? डिजिटल अरेस्ट और स्कैम बढ़ सकते हैं: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर के सिर्फ यूजरनेम के जरिए मैसेज करने की सुविधा से अपराधी और स्कैमर्स आसानी से छिपे रह सकेंगे। इससे वे मासूम लोगों को अपना शिकार बना सकते हैं। फर्जी पहचान का खतरा: इस फीचर के जरिए धोखेबाज किसी भी असली व्यक्ति, नामी कंपनी या सरकारी अधिकारी के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बना सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: अपराधी खुद को सीबीआई, पुलिस या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को डरा-धमका सकते हैं और ठगी को अंजाम दे सकते हैं।

शानदार सफलता : एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण
Published / 2026-05-09 21:36:33
शानदार सफलता : एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण

एबीएन नॉलेज डेस्क (नयी दिल्ली)। भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और शानदार खबर है। भारत ने एक साथ अनेक सामरिक लक्ष्यों पर एक साथ निशाना लगाने वाली उन्नत अग्नि मिसाइल (एमआइआरवी-मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टागेर्टेबल री-एंट्री व्हीकल) का सफल उड़ान-परीक्षण किया है। भारत ने शनिवार को इसकी घोषणा की।रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि यह परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह उड़ान-परीक्षण अनेक पेलोड के साथ किया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में स्थानिक रूप से फैले विभिन्न लक्ष्यों पर निर्देशित किया गया था। उड़ान संबंधी आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के दौरान मिशन के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक प्राप्त किये गये। यह मिसाइल एक ही समय में कई अलग-अलग टारगेट्स को भेदने में सक्षम है। इस महाविनाशक मिसाइल टेस्ट से दुनिया की नींद उड़ गयी। बांग्लादेश तक दिखा अद्भुत दृश्य परीक्षण के दौरान आकाश में चमकदार प्लूम (ग्लोइंग ट्रेल) पूर्वी भारत (ओडिशा, पश्चिम बंगाल) के साथ-साथ बांग्लादेश के तटीय इलाकों (जैसे सिताकुंडा, कॉक्स बाजार) से साफ दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोगों ने इसे आग की लकीर या अज्ञात उड़ान वस्तु बताया, जिससे विभिन्न कयास लगाए जाने लगे। कुछ ने इसे अग्नि-6 का परीक्षण माना।  यह क्षमता मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में बेहद प्रभावी है और भारत को परमाणु निरोधक क्षमता को मजबूत करती है। भारत इससे पहले मार्च 2024 में मिशन दिव्यास्त्र के तहत अग्नि-5 का एमआइआरवी परीक्षण कर चुका है, लेकिन यह नया टेस्ट और अधिक एडवांस सिस्टम की पुष्टि करता है। अग्नि-6 की मारक क्षमता 12,000 किमी  यह मिसाइल देशभर के उद्योगों के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित की गयी है। यह परीक्षण भारत की रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अग्नि सीरीज की मिसाइलें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के संदर्भ में निरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। एमआइआरवी और संभावित लंबी रेंज (5,000+ किमी या अधिक) के साथ यह मिसाइल एक साथ कई हमले की क्षमता प्रदान करती है। डीआरडीओ अध्यक्ष ने पहले ही अग्नि-6 कार्यक्रम की तकनीकी तैयारी की घोषणा की थी, जिसकी रेंज 10,000-12,000 किमी तक बताई जाती है। रक्षा क्षेत्र में बढ़ी अद्भुत क्षमता : राजनाथ  सरकार की ओर से बताया गया कि मिसाइल के लॉन्च से लेकर सभी पेलोड्स के टारगेट से टकराने तक की पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी गयी। इसके लिए कई जमीनी और समुद्री (शिप-बेस्ड) ट्रैकिंग स्टेशनों का इस्तेमाल किया गया। फ्लाइट डेटा ने इस बात की भी पुष्टि कर दी है कि इस ट्रायल के सभी लक्ष्य सफल रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान-परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय सेना और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह बढ़ती हुई खतरे की धारणाओं के विरुद्ध देश की रक्षा तैयारियों में एक अद्भुत क्षमता जोड़ेगा।

नासा की नयी छलांग: पहली बार चांद पर आईफोन ले जा सकेंगे अंतरिक्ष यात्री
Published / 2026-04-02 19:05:02
नासा की नयी छलांग: पहली बार चांद पर आईफोन ले जा सकेंगे अंतरिक्ष यात्री

खुद शूट करेंगे मून मिशन के खास पल एबीएन नॉलेज डेस्क। नासा (NASA) ने अपने ऐतिहासिक Artemis II मिशन में एक बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को अपने पर्सनल iPhone साथ ले जाने की अनुमति दी है। यह कदम अंतरिक्ष मिशनों में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस मिशन में चार सदस्यीय क्रू शामिल है:रीड वाइसमैन Reid Wiseman (कमांडर)विक्टर ग्लोवर Victor Glover (पायलट)क्रिस्टीना कोच Christina Koch (मिशन स्पेशलिस्ट)जेरेमी हैनसेन Jeremy Hansen (मिशन स्पेशलिस्ट)ये सभी Orion spacecraft में सवार होकर Space Launch System रॉकेट के जरिए Kennedy Space Center से लॉन्च हुए और चांद के चारों ओर 10 दिन की यात्रा पर निकले हैं। NASA के अनुसार, iPhone का इस्तेमाल कैमरे की तरह किया जाएगा ताकि अंतरिक्ष यात्री मिशन के बिहाइंड-द-सीन पलों को आसानी से कैद कर सकें। इससे भारी-भरकम सरकारी कैमरों पर निर्भरता कम होगी।अंतरिक्ष में कैसे काम करेंगे iPhone ?फोन एयरप्लेन मोड में रहेंगेकिसी भी तरह का सिग्नल इंटरफेरेंस नहीं होगाफोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए उपयोग होंगेInternational Space Station के पास पहुंचने पर Wi-Fi से डेटा भेजा जा सकेगामिशन की खास बातेंइंसानों का चांद के पास पहला मिशन (कई वर्षों बाद)चांद की सतह की लाइव इमेजिंगDeep space से आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारानए एंगल से चंद्र सतह का अध्ययनArtemis II मिशन भविष्य में इंसानों को फिर से चांद पर उतारने की तैयारी का अहम हिस्सा है। iPhone जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग इस बात का संकेत है कि अंतरिक्ष यात्रा अब ज्यादा टेक-फ्रेंडली और आधुनिक बन रही है।

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