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एसआर डीएवी पुंदाग में मेरा आयुर्वृक्ष अभियान
Published / 2026-09-23 19:22:42
एसआर डीएवी पुंदाग में मेरा आयुर्वृक्ष अभियान

टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में आयुष मंत्रालय की परिकल्पना के अंतर्गत मेरा आयुर्वृक्ष अभियान चलाया गया। यह एक प्रगतिशील पर्यावरण-स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य एवं कल्याण की विरासत को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के तात्कालिक लक्ष्यों के साथ जोड़ना है। प्राचीन वृक्षायुर्वेद (पादप जीवन के विज्ञान) की अवधारणा पर आधारित यह अभियान देशभर में औषधीय जड़ी-बूटियों एवं वृक्षों के रोपण, संरक्षण, संवर्धन तथा वितरण पर केंद्रित है। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ तापस घोष ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर विद्यालय परिसर में औषधीय पौधे लगाये। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पूरे विश्व को भारत ने आयुर्वेद का उपहार दिया, जिसमें कई असाध्य रोगों का इलाज भी संभव है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। दवाइयां किसी भी बीमारी को जड़ से समाप्त कर देतीं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें अपने घर और आसपास भी ऐसे औषधीय पौधे लगाने चाहिए।

व्यस्त जीवन और अशांत मन : सफलता का मलू मंत्र विषय पर कल रांची में होगा युवा संवाद
Published / 2026-09-22 20:19:06
व्यस्त जीवन और अशांत मन : सफलता का मलू मंत्र विषय पर कल रांची में होगा युवा संवाद

टीम एबीएन, रांची। स्वामी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की रांची शाखा के तत्वावधान में आज दिन  बुधवार को एक युवा संवाद कार्यक्रम किया जा रहा है। कार्यक्रम रांची क्लब के लायंस क्लब हॉल में संध्या 5:30 बजे से 7 बजे तक संपन्न होगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विववेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात विचारक  निवेदिता रधुनाथ भिड़े हैं। वे आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति और संतुलन विषय पर युवाओं और बुद्धिजीवियों से संवाद करेंगी। सभी युवाओंऔर प्रबुद्ध नागरिक से आग्रह है कि इस काययक्रम में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनायें। यह जानकारी नगर संचालक जयंत कुमार झा ने दी। कार्यक्रम की रुपरेखा निम्न प्रकार है :5:45 - दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का प्रारंभ,  स्वागत एवं मंचस्थ 5:50 - शांति पाठ - श्रुति कुमारी, 5:55 - गीत, 6:00- केंद्र परिचय एवं वक्ता परिचय - विकास जी, 6:00 - विवेकवानी - रूपम कुमारी  6:10 - संवाद कार्यक्रम प्रारंभ , 6:50 - आवाहन - श्रेयांश जी  6:55 - धन्यवाद ज्ञापन - जयंत जी, 6:57 - शांति मंत्र एवं वन्दे मातरम

झारखंड : कई देशों के विद्यार्थियों-शोधार्थियों से गवर्नर ने किया संवाद
Published / 2026-09-22 18:12:45
झारखंड : कई देशों के विद्यार्थियों-शोधार्थियों से गवर्नर ने किया संवाद

राज्यपाल संतोष गंगवार ने लोकभवन में विभिन्न देशों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ किया संवाद  टीम एबीएन, रांची। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज लोक भवन, रांची में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के अंतर्गत भारत में उच्च शिक्षा एवं शोध करने आये विभिन्न देशों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि भारत को प्राचीन काल से ही ज्ञान एवं शिक्षा की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। तक्षशिला, नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। ज्ञान एवं विचारों के आदान-प्रदान की यह समृद्ध परंपरा आज भी हमें प्रेरित करती है। राज्यपाल ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, इराक एवं अफ्रीकी तथा मध्य-पूर्व के देशों सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थियों का भारत में अध्ययन एवं शोध करना भारत और उनके संबंधित देशों के बीच मजबूत शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत वसुधैव कुटुम्बकम् के शाश्वत सिद्धांत में विश्वास करता है। ज्ञान एवं संवाद देशों के बीच सेतु का निर्माण करते हैं और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। भगवान बुद्ध एवं भगवान महावीर की धरती भारत ने विश्व को शांति, करुणा, अहिंसा एवं सद्भाव का संदेश दिया है। आज की दुनिया में इन मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गयी है। राज्यपाल ने कहा कि आज के समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह वैश्विक समुदाय के साथ भारत की सक्रिय सहभागिता को दर्शाता है। राज्यपाल ने झारखंड की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य अपनी समृद्ध जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, वन, झरनों, पहाड़ियों एवं प्रचुर खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। यह धरती धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा एवं अनेक स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि है, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना अहम एवं उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से झारखंड में अपने प्रवास के दौरान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को समझने एवं अनुभव करने हेतु कहा। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भारत में अपने अध्ययन एवं शोध के साथ-साथ देश के इतिहास, विविध संस्कृति, परंपराओं एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को भी समझने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि ये अनुभव उनकी शैक्षणिक यात्रा को समृद्ध करने के साथ-साथ जीवनभर मूल्यवान स्मृतियों के रूप में उनके साथ रहेंगे। राज्यपाल ने कहा कि भारत में अध्ययन एवं शोध कर रहे ये विद्यार्थी केवल अपने-अपने देशों के विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि भारत और उनके संबंधित देशों के बीच मित्रता एवं आपसी समझ के सेतु भी हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी भारत की सुखद स्मृतियां अपने साथ लेकर अपने देश लौटेंगे तथा अपने परिवार, मित्रों एवं देशवासियों के साथ भारत में अपने अनुभव साझा करेंगे।

अपने ही सवालों के घेरे में फंसता संघ लोक सेवा आयोग
Published / 2026-09-21 21:20:55
अपने ही सवालों के घेरे में फंसता संघ लोक सेवा आयोग

अभिषेक शुक्ल एबीएन एडिटोरियल डेस्क। देश की सर्वोच्च भर्ती संस्था- संघ लोक सेवा आयोग आज अपने ही बनाये प्रश्नों के कारण कानूनी और नैतिक कटघरे में खड़ी है। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 में 8 विवादित प्रश्नों को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा जारी नोटिस ने परीक्षा प्रणाली में बढ़ते अकादमिक दुस्साहस को उजागर कर दिया है। उलझे हुए विकल्पों ने जहां ज्ञान के परीक्षण को तुक्केबाजी में बदलकर कोचिंग उद्योग को फलने-फूलने का अवसर दिया है, वहीं लाखों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। यह विवाद अब महज कुछ प्रश्नों की त्रुटि का नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था लागू कर संस्था की गरिमा को पुनर्स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता का प्रतीक बन चुका है। संघ लोक सेवा आयोग को देश की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी के रूप में एक सम्मानित संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। दशकों से यह योग्यता का सर्वोच्च मानदंड रहा है, जिसने भारत की नौकरशाही के मजबूत इस्पाती ढांचे को आकार दिया है।हालांकि, दामिनी राठौर एवं अन्य बनाम संघ लोक सेवा आयोग मामले में हाल ही में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा आयोग को जारी किया गया नोटिस एक गहराते संस्थागत संकट की ओर इशारा करता है। वर्तमान कानूनी विवाद की जड़ परीक्षा की रूपरेखा में ही निहित है। उम्मीदवारों ने सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्न-पत्र में 15 और सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्न-पत्र में 12 प्रश्नों पर कड़ी आपत्ति जताई है। 180 में से 27 प्रश्नों का न्यायालय में विवादित होना यह दशार्ता है कि त्रुटि की गुंजाइश अब खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। विवादित प्रश्नों की यह चौंकाने वाली संख्या आयोग के अकादमिक दुस्साहस के एक चिंताजनक चलन को दशार्ती है। हाल के वर्षों में संघ लोक सेवा आयोग ने अस्पष्ट, पैराग्राफ-आधारित प्रश्नों और जटिल प्रारूपों पर अपनी निर्भरता बढ़ाई है। विकल्पों की बहुलता- जैसे कि केवल दो विकल्प सही हैं, प्रारूप, जो स्पष्ट नहीं करता कि कौन से दो विकल्प सही हैं- ने ज्ञान के परीक्षण को महज एक जुआ के खेल में बदल दिया है। यह प्रारूप परीक्षा भवन में ठोस समझ के बजाय अनुमान लगाने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करता है। एक बुनियादी सवाल यह उठता है, ऐसे प्रश्न क्यों पूछे जाएं, जिन पर आयोग के अपने विषय विशेषज्ञों के बीच ही आम सहमति नहीं है? जब कठिनाई का स्तर विशेषज्ञों के स्थापित ज्ञान की सीमा को पार कर जाता है, तो यह स्वाभाविक रूप से न्यायालय में आयोग के लिए भारी मुश्किलें पैदा करता है। एक सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को विश्वसनीय होना चाहिए, न कि अनावश्यक रूप से जटिल। जैसा कि लियोनार्डो दा विंची ने कहा था, सादगी ही सबसे बड़ी परिष्कृतता है। प्रश्नों की रूपरेखा ऐसी होनी चाहिए कि उनका एक ही, स्पष्ट उत्तर हो, ताकि उस भ्रम से बचा जा सके जो अंतत: लंबी कानूनी लड़ाइयों का कारण बनता है। यूपीएससी का उद्देश्य ज्ञान का परीक्षण करना होना चाहिए। बहुविकल्पीय प्रश्नों की मूल भावना तथ्यों के आधार पर ज्ञान की जांच करने में निहित है। वहीं, व्यक्तिपरक प्रश्नों की सबसे बड़ी खामी यह है कि एक ही उत्तर अलग-अलग लोगों को अलग-अलग स्तर पर सही या गलत लग सकता है। यूपीएससी ने बहुविकल्पीय प्रश्नों के मॉडल में भी व्यक्तिपरकता की इसी खामी को शामिल कर दिया है, क्योंकि इनके प्रश्न और उत्तर अब तथ्य-आधारित होने के बजाय मत-आधारित अधिक हो गये हैं। उदाहरण के तौर पर हम सेट ए के प्रश्न संख्या 12 को देख सकते हैं: 12. प्रारंभिक बौद्ध मूर्तिविद्या में रिक्त आसन क्या दर्शाता है? बुद्ध का ध्यान बुद्ध का प्रथम धर्मोपदेश बुद्ध का महापरिनिब्बान बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण संघ लोक सेवा आयोग की अनंतिम उत्तर कुंजी में इस प्रश्न का उत्तर (ए) बुद्ध का ध्यान दिया गया है, जो कि कक्षा 12 की एनसीईआरटी के अनुसार सही है। किंतु, टाटा मैकग्रा-हिल द्वारा प्रकाशित कृष्ण रेड्डी की पुस्तक भारतीय इतिहास (द्वितीय संस्करण) के अनुसार इसका सही उत्तर (डी) बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण होना चाहिए। यूपीएससी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक प्रश्न को रद्द कर दिया क्योंकि उसके सभी विकल्प गलत थे। किंतु, यहां सबसे बड़ा प्रश्न पारदर्शिता और जवाबदेही का उठता है। एक आॅनलाइन पोर्टल के माध्यम से छात्रों से आपत्तियां मांगी गयी, किंतु उन आपत्तियों पर क्या निर्णय लिया गया, इसकी कोई सूचना संघ लोक सेवा आयोग ने नहीं दी। अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित किए बिना ही प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया। इससे छात्रों के मन में यह अनिश्चितता बनी हुई है कि उनकी आपत्तियों पर कोई कार्रवाई हुई भी या नहीं। इस अप्रत्याशितता और अनिश्चितता की एक भारी सामाजिक-आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ती है। परीक्षा की पूर्वानुमानित प्रकृति को समाप्त करके, आयोग अनजाने में उम्मीदवारों के बीच एक गहरा भय पैदा कर रहा है। इस भय का सीधा लाभ तेजी से बढ़ता कोचिंग उद्योग उठाता है, जो परीक्षा के नये पैटर्न को डिकोड करने के नाम पर छात्रों की चिंता को भुनाता है। सभी को समान अवसर प्रदान करने के बजाय- जो एक संवैधानिक संस्था का मूल कर्तव्य है- यह अस्पष्ट मूल्यांकन प्रणाली उन लोगों के पक्ष में झुकी हुई है, जो महंगी टेस्ट-सीरीज और कोचिंग इकोसिस्टम का खर्च उठा सकते हैं। जिन उम्मीदवारों के मामले की केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में सुनवाई हो रही है, उनकी मांगें केवल व्यक्तिगत शिकायतों तक सीमित नहीं हैं। वे ऐसे प्रणालीगत सुधारों की मांग कर रहे हैं, जिन्हें संघ लोक सेवा आयोग को अपनी गरिमा बनाये रखने के लिए तत्काल अपनाना चाहिए। सबसे पहली और महत्वपूर्ण मांग है प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने से पहले अंतिम उत्तर-कुंजी का प्रकाशन। वर्तमान व्यवस्था में, उम्मीदवारों को इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि उनके पेपर का मूल्यांकन कैसे किया गया, और यह स्थिति पूरे वर्ष चलने वाले परीक्षा चक्र की समाप्ति तक बनी रहती है। परिणाम से पूर्व उत्तर-कुंजी प्रकाशित करने और उम्मीदवारों को उनके ओ.एम.आर की स्कैन कॉपी आॅनलाइन उपलब्ध कराने से संघ लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे प्रतियोगी छात्रों के प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े सभी संदेह स्वत: समाप्त हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अब समय आ गया है कि आयोग प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाये। प्रश्नों को अंतिम रूप देने से पहले उनके अस्पष्ट शब्दों, संभावित अर्थों और तथ्यात्मक विरोधाभासों की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत भाषा मॉडलों का उपयोग किया जाना चाहिए। अंतत:, न्यायाधिकरण के समक्ष चल रहा यह विवाद संघ लोक सेवा आयोग के लिए मात्र एक कानूनी चुनौती नहीं है, बल्कि आत्ममंथन और व्यवस्था परिवर्तन का एक ऐतिहासिक अवसर है। 21वीं सदी का भारत एक ऐसी पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग करता है, जहां आधुनिक तकनीक का उपयोग अस्पष्टता दूर करने के लिए हो और परिणामों की प्रक्रिया शीशे की तरह साफ हो। भारत की नौकरशाही का भविष्य उन युवाओं के हाथों में सुरक्षित होना चाहिए, जिनका चयन उनकी वास्तविक योग्यता और स्पष्ट वैचारिक समझ के आधार पर हुआ हो, न कि परीक्षा भवन में किए गए किसी अंधे अनुमान या कोचिंग संस्थानों की महंगी रणनीतियों के बल पर। यदि आयोग समय रहते अपने प्रयोगात्मक प्रारूपों को त्यागकर इन ढांचागत सुधारों को अपना लेता है, तो यह न केवल लाखों मेधावी छात्रों का खोया हुआ विश्वास वापस लायेगा, बल्कि अपनी सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा को भी एक नये, अभेद्य शिखर पर स्थापित करेगा। (लेखक, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है। यह उनके निजी विचार हैं।)

बीआईटी के जानकारों ने दी साइबर सुरक्षा की जानकारी
Published / 2026-09-19 23:48:55
बीआईटी के जानकारों ने दी साइबर सुरक्षा की जानकारी

बीआईटी के जानकारों ने दी साइबर सुरक्षा की जानकारीटीम एबीएन, रांची। साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान (ई टी सी सी) कार्यक्रम की आखरी दिन झालसा की अधिवक्ता स्वाति शालानी ने प्रतिभागियों को साइबर क्राइम और उनके कानून पर अपनी जानकारी रखी। उन्होंने बताया कि आप इस प्रकार के अपराध से खुद को लुटा हुआ न समझें बल्कि कानूनी सलाह लेकर अपनी अधिकार को समझें। पांच दिनों की यह आयोजन में साइबर सुरक्षा से सम्बंधित जानकारों ने अपनी महत्वपूर्ण और जरूरी पहलुओं पर ध्यान दिलाया सत्र के पहले दिन कार्यक्रम सयोजक डॉ विजय कुमार झा ने स्वागत भाषण के कार्यक्रम में आने वाले सभी सम्मानित अतिथियों का परिचय कराया डीन डॉ संदीप सिंह सोलंकी, डॉ अभिजीत मुस्तफी, डॉ शिशिर दत्ता, श्री विक्रम जीत मोइत्रा,, हिमालय, डॉ वंदना भट्टचार्य सहित इस क्षेत्र से जुड़े बुद्धिजीवी और शिक्षकों ने छात्रों के माध्यम से साइबर अपराध से सुरक्षित रखने की जानकारी साझा किया।आज कार्यक्रम को यादगार बनाने और प्रकृति को साक्षी बनाने के उद्देश्य से सस्थान के निदेशक डॉ विजय कुमार झा और सयोजक डॉ श्रीमती अमृता प्रियम ने प्रांगण में रुद्राक्ष का वृक्ष लगा कर कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की। आज के इस समापन समारोह में डॉ महुवा बनर्जी, डॉ संदीप शाहदेव, शुभाशीष रॉय, अंकित, अंजलि, नेहा, तिलक, स्नेहा, अरदीम पाल, डॉ नंदन बनर्जी, अनामिका, राणा मिश्रा, एलिस, डॉ उमेश प्रसाद  उपस्थित थे।

बीआईटी के विशेषज्ञों ने साझा किये साइबर सुरक्षा के उपाय
Published / 2026-09-18 21:39:32
बीआईटी के विशेषज्ञों ने साझा किये साइबर सुरक्षा के उपाय

टीम एबीएन, रांची। बी आई टी मेसरा लालपुर के तत्वाधान में हिंदी पखवाड़ा के तहत आयोजित कार्यक्रम साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान के तहत चौथे दिन के सत्र को बी आई टी की कंप्यूटर साइंस की वरिष्ठ प्रोफेसर वंदना भट्टाचार्य ने छात्रों को साइबर अपराध से बचने के लिए मशीन लर्निंग को समझने की आवश्यकता बतलायी। उन्होंने बताया कि साइबर सिक्योरिटी में मशीन लर्निंग का मतलब है कंप्यूटर को इतना समझदार बनाना कि वह खुद ही हैकिंग, वाइरस और फ्रॉड को पकड़ने में सक्षम हो। पहले एंटी वाइरस सिर्फ लिस्ट देखकर अपना कार्य करता था, पर अब मशीन लर्निंग खुद ही कार्य करता है। आई डी एस आईपीएस पूरे नेटवर्क पर अपनी पैनी नजर रखता है। डॉ वंदना ने उन सभी बारीकियों से छात्रों को अवगत कराया जो साइबर अपराध से हम खुद और अपने सहयोगी को बचा सकते हैं। आज के कार्यक्रम में शामिल कार्यक्रम संयोजक डॉ अमृता प्रियम, डॉ संदीप शाहदेव, डॉ महुवा बनर्जी, डॉ मानसी गुप्ता, राजेश शर्मा, नरेंद्र कुमार, राणा प्रताप, अनामिका कुमारी, डॉ उमेश प्रशाद, डॉ मयंक, शुभाशीष रॉय, बासुदेव सिंह, डॉ अभय रंजन, सहित सभी प्रतिभागी और छात्रों ने हिस्सा लिया।

बीआईटी में जानकारों ने किया अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान पर कार्यक्रम
Published / 2026-09-16 18:31:00
बीआईटी में जानकारों ने किया अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान पर कार्यक्रम

एबीएन कैरियर डेस्क। साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान कार्यक्रम के दूसरे दिन बी आई टी लालपुर के तत्वावधान में साइबर अपराध विषय पर बोलते हुए राज्य के साइबर अपराध शाखा के प्रमुख विक्रमजीत मित्रा ने प्रतिभागियों के बीच साइबर अपराध से जुडी प्रमुख और जरूरी जानकारी पर अपनी बात रखी।जिसमें सोशल मीडिया अपराध और आर्थिक मामलों के अपराध शामिल थे, जिसके तहत मोबाईल हैकिंग एटीएम हैकिंग सहित डिजिटल अरेस्ट जैसे जरूरी विषयों पर बहुत ही आवश्यक और  महत्वपूर्ण जानकारी और उसके लिए जागरूकता पर बातें रखी। सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक असीम दास गुप्ता और ग्रंथ मिढ़ा ने भी इस कार्यक्रम पर अपनी बातों को रखते हुए इनसे जुड़ी महत्पूर्ण और जरूरी जागरूकता और बचने के उपाय पर उद्बोधन दिया। इससे पहले सीएमपीडीआई के डॉ शिशिर दत्ता ने अपनी जानकारी छात्रों को बताया। आज के कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ विजय कुमार झा, संयोजक डॉ अमृता प्रियम, डॉ महुवा बनर्जी, डॉ संदीप शाहदेव, सहायक कुल सचिव नरेंद्र कुमार, डॉ अभय, डॉ मानसी गुप्ता, डॉ उमेश, डॉ सोमित्रो, डॉ ममता पांडे, सिबा मित्रा ज्या पाल, डॉ श्रावनी, प्रदीप मुंडा, अनामिका कुमारी, सोनी कुमारी, राणा मिश्रा, एलिस टोप्पो सहित काफी संख्या में प्रतिभागी और शिक्षक उपस्थित थे।

कोडरमा : ग्रिजली कॉलेज आॅफ एजुकेशन में हुआ पॉडकास्ट कार्यक्रम
Published / 2026-09-16 18:26:28
कोडरमा : ग्रिजली कॉलेज आॅफ एजुकेशन में हुआ पॉडकास्ट कार्यक्रम

ग्रिजली कॉलेज आॅफ एजुकेशन में इंडिया नाउ एंड नेक्स्ट: विकसित भारत 2047@ विषय पर पॉडकास्ट कार्यक्रम का आयोजन एबीएन न्यूज नेटवर्क, कोडरमा। ग्रिजली कॉलेज आॅफ एजुकेशन में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में इंडिया नाउ एंड नेक्स्ट : विकसित भारत 2047 विषय पर पॉडकास्ट कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।  कार्यक्रम का शुभारंभ विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति डॉ. चंद्रभूषण शर्मा, महाविद्यालय के अध्यक्ष मनीष कपसिमे, सचिव अविनाश कुमार सेठ, मुख्य परिचालन पदाधिकारी तनिष्क सेठ, प्राचार्य डॉ. मोहित कुमार तिवारी एवं अन्य सम्मानित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात सभागार में उपस्थित सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गया। तत्पश्चात मुख्य अतिथि कुलपति डॉ चंद्रभूषण शर्मा को महाविद्यालय के मुख्य परिचालन पदाधिकारी तनिष्क सेठ ने पौधा, अध्यक्ष मनीष कपसिमे द्वारा अंगवस्त्र तथा सचिव अविनाश कुमार सेठ ने स्मृति-चिह्न भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अंबरीज सरकार एवं मानसी चक्रवर्ती द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक स्वागत नृत्य ने उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों को मंत्रमुग्ध किया। इसके उपरांत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहित कुमार तिवारी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत कर सभागार में उपस्थित सभी सम्मानित अतिथियों एवं सदस्यों का अभिवादन किया। पॉडकास्ट संवाद में महाविद्यालय के प्रशिक्षु समीना परवीन एवं आयुष कुमार ने माननीय कुलपति डॉ. चंद्रभूषण शर्मा से शिक्षा, समाज, प्रशासन, विधि-व्यवस्था, युवा वर्ग की वर्तमान स्थिति तथा विकसित भारत 2047@ के निर्माण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषयों पर प्रश्न पूछा गया जिसमें कुलपति ने प्रशिक्षुओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सरल, तथ्यपरक एवं समसामयिक संदर्भों से संबद्ध उत्तर प्रस्तुत किया। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की युवा पीढ़ी विकसित भारत 2047 की प्रमुख आधारशिला है। उन्होंने युवाओं को सशक्त, स्वावलंबी एवं उत्तरदायी नागरिक बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित मार्गदर्शन, कौशल विकास तथा सकारात्मक सामाजिक वातावरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों एवं अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि हम समाज से हैं और समाज हमसे है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर समावेशी एवं सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं को ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। पॉडकास्ट सत्र के उपरांत प्रश्नोत्तरी  सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका माननीय कुलपति द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया जिसमें प्रशिक्षुओं को ज्ञानार्जन, कौशल विकास, तार्किक चिंतन एवं समसामयिक विषयों की समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैजनाथ प्रसाद स्नेही कॉलेज आॅफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. भूपेंद्र ठाकुर तथा कैम्ब्रिज शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दीपक कुमार सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के सहायक प्राध्यापक, शिक्षक एवं प्रशिक्षु उपस्थित रहे। महाविद्यालय के बी.एड. सत्र 2025-27 के सभी प्रशिक्षु एवं महाविद्यालय के शैक्षणिक समन्वयक सौरभ शर्मा, आई क्यू ए सी समन्वयक मनीष कुमार सिन्हा, डी एल एड समन्वयक खुशबू कुमारी सिन्हा तथा सभी सहायक प्राध्यापक डॉ. रामकृष्ण प्रसाद, डॉ. इंद्र कुमार जायसवाल, अनिल दास, सीताराम यादव, चुन्नु कुमार, बिनीता कुमारी एवं अन्य सहित सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारी सूचित कुमार, दीपक कुमार पांडेय, आलम मुख्तार, सुधीर साव, विवेक कुमार एवं ओंकार कुमार आदि उक्त अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सहायक प्राध्यापक संजीत कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डी.एल.एड. विभागाध्यक्ष मनीष कुमार सिंह द्वारा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

बीआईटी में साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान ईटीसीसी 2026
Published / 2026-09-15 21:02:04
बीआईटी में साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान ईटीसीसी 2026

एबीएन कैरियर डेस्क, रांची। बीआईटी मेसरा लालपुर यूनिट के तत्वाधान में हिंदी दिवस पखवाड़ा के तहत एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रम साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा के उभरते रुझान ई टी सी सी 2026 का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्घाटन बी आई टी मेसरा के स्नात्तकोत्तर विभाग के डीन डॉ संदीप सिंह सोलंकी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस प्रकार के विषय पर इस प्रकार के कार्यशाला के आयोजन करने पर बधाई दी। डॉ सोलंकी ने अपने उदबोधन में साइबर अपराध के बढ़ते ग्राफ को रोकने के लिए हम सभी छात्रों को इसके लिए जागरूक होने की जरुरत है। कंप्यूटर साइंस अपने पुराने प्रोग्रामिंग से अपने को कुछ हद तक रोके रखा था, पर आज के साइबर अपराधी अपने को आज के कंप्यूटर साइंस से भी ऊपर जाकर इस प्रकार के अपराध कर पूरे सिस्टम को चेलेंज कर रहे हैं। हमें इस प्रकार के अपराध से बचने के लिए और बेहतर करने की जरुरत है और हम इस पर विजय प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक और कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ विजय कुमार झा ने किया। उन्होंने साइबर अपराध और उसकी सुरक्षा के लिए इस आयोजन में शामिल होने वाले सभी वक्ता और विशेषज्ञ को शुभकामनायें देते हुए प्रतिभागियों आयोजन करने वाली पूरी टीम को धन्यवाद दिया। संयोजक डॉ अमृता प्रियम ने सभी अतिथियों को मोमेंटो देकर सम्मानित कर धन्यवाद देते हुए एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रम की सफलता की कामना की। आज के उद्घाटन समारोह में डॉ महुवा बनर्जी, डॉ मानसी गुप्ता, डॉ संदीप शाहदेव, डॉ नंदन, सुश्री अनामिका, राणा प्रताप, सुभाशीष रॉय सहित सैकड़ों की संख्या में शामिल प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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