एबीएन कैरियर डेस्क (रांची)। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 18 से 22 मई 2026 तक सस्टेनेबल हरित ऊर्जा सिस्टम्स के लिए उभरती नियंत्रण एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां विषय पर एक संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। यह कार्यक्रम तकनीकी व्याख्यानों के साथ सिमुलेशन आधारित एवं अनुप्रयोग-उन्मुख सत्रों का समन्वय है, जिसमें राष्ट्रीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों तथा उद्योग जगत से कुल उन्नीस वक्ता भाग लेंगे।
भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा कार्यक्रम, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट स्थापित क्षमता तथा वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है, ने विद्युत प्रणालियों एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञता रखने वाले संकाय सदस्यों की मांग को बढ़ा दिया है। यह कार्यक्रम चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है- विद्युत वाहन प्रणालियां, स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकी, ऊर्जा प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोत।
सत्रों में कक्षा शिक्षण के साथ व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक घटक भी शामिल होंगे। इस आयोजन को गैस अथॉरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड, झारखंड रिन्यूएबल ऊर्जा विकास अभिकरण, क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम, ओपल रिट तथा क्रिएटिव रोबोटिक्स जैसी संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है, जो उभरती ऊर्जा एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण क्षेत्र में उद्योगों की भागीदारी को दर्शाता है।
कार्यक्रम संस्थान के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु कुमार मिश्रा कार्यरत हैं, जबकि संकाय विकास कार्यक्रम समन्वयक डॉ. गौरी शंकर गुप्ता इसके आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं।
स्टील अथॉरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड, रांची के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर फॉर आयरन एंड स्टील के कार्यकारी निदेशक संदीप कुमार कर उद्घाटन भाषण देंगे, जबकि रांची नगर निगम के आयुक्त आईएएस सुशांत गौरव समापन सत्र को संबोधित करेंगे। दोनों इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
वक्ताओं की सूची इटली, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा भारत के संस्थानों तक फैली हुई है। पोलिटेक्निको दी मिलानो, इटली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जियाम्बत्तिस्ता ग्रुओसो विद्युत वाहन चार्जिंग के विद्युत एवं संचार नेटवर्क के साथ एकीकरण पर व्याख्यान देंगे। साउदर्न यूनिवर्सिटी आॅफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चीन के पीआई लैब्स से जुड़े डॉ. ललितेश कुमार, प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल प्रणालियों के लिए पोर्ट-हैमिल्टोनियन नियंत्रण पर चर्चा करेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट के प्रत्युष आनंद ऊर्जा दक्ष सॉफ्टवेयर एवं फर्मवेयर प्रथाओं पर प्रस्तुति देंगे, जबकि क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम, कानपुर की एप्लिकेशन इंजीनियर एरा बाजपेयी डिजिटल कंट्रोल प्रणालियों के लिए हार्डवेयर-इन-द-लूप सिमुलेशन पर चर्चा करेंगी। इसके अतिरिक्त भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गोवा के प्रोफेसर तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान वारंगल के पूर्व निदेशक प्रो. विद्याधर सुबुद्धि एडेप्टिव कंट्रोल प्रणालियों पर तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम) धनबाद के डॉ. कल्याण चटर्जी ऊर्जा अनुप्रयोगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा विषय पर सत्र आयोजित करेंगे।
इसके अलावा वीएनआईटी नागपुर, एनआईटी रायपुर, एनआईटी राउरकेला, एनआईटी तिरुचिरापल्ली, एनआईटी दुर्गापुर, बिट्स पिलानी, एमएनएनआईटी इलाहाबाद, यशवंतराव चव्हाण अभियांत्रिकी महाविद्यालय तथा पंजाब अभियांत्रिकी महाविद्यालय, चंडीगढ़ के संकाय सदस्य भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के तीन संकाय सदस्य- विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु कुमार मिश्रा, डॉ. टी. घोष तथा डॉ. शिवा एस. सरोद- सोलर पीवी नियंत्रण, ग्रीन हाइड्रोजन तथा स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करेंगे।
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में पहले ही 19 भारतीय राज्यों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों (जिनमें ईटीएच ज्यूरिख, यूनिवर्सिटी आॅफ इलिनोइस, सिंगापुर और इंटेल, कैलिफोर्निया शामिल हैं) से 120 से अधिक प्रतिभागियों का पंजीकरण हो चुका है। यह विषय की प्रासंगिकता तथा अंतरराष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा में संस्थान की प्रतिष्ठा का प्रमाण है।
संकाय विकास कार्यक्रम समन्वयक डॉ. गौरी शंकर गुप्ता ने कहा, इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी संकाय सदस्य अपने साथ यह ज्ञान कक्षाओं, प्रयोगशालाओं तथा अनुप्रयुक्त शोध वातावरण में लेकर जायेंगे। सत्रों को इस प्रकार संरचित किया गया है कि शिक्षक स्मार्ट ग्रिड, एआई-आधारित ऊर्जा प्रणालियों, विद्युत गतिशीलता तथा रिन्यूएबल ऊर्जा एकीकरण जैसे उभरते क्षेत्रों से सीधे जुड़ सकें।
इस कार्यक्रम के आयोजन स्थल के रूप में रांची का चयन भी विशेष महत्व रखता है। झारखंड, जो लंबे समय से भारत की औद्योगिक एवं खनिज अर्थव्यवस्था से जुड़ा रहा है, अब सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा संबंधित कार्यक्रमों के विस्तार के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में इस कार्यक्रम के आयोजन से पूर्वी भारत के शैक्षणिक तंत्र को देश के व्यापक हरित ऊर्जा परिवर्तन से सीधे जोड़ा जा रहा है।
संकाय विकास कार्यक्रम समन्वयक डॉ. गौरी शंकर गुप्ता ने कहा, भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश पर ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों और शोधकतार्ओं की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा, जो अगली पीढ़ी की विद्युत प्रणालियों का समर्थन कर सकें। इस प्रकार के कार्यक्रम विकसित हो रही औद्योगिक प्रौद्योगिकियों और अभियांत्रिकी शिक्षा के बीच की खाई को पाटने में सहायक होते हैं।
टीम एबीएन, रांची। आज अखिल झारखंड छात्र संघ( आजसू ) की डोरंडा इकाई द्वारा महाविद्यालय परिसर में छात्रा के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी एवं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा गया।
यह ज्ञापन आजसू छात्र संघ डोरंडा इकाई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के नेतृत्व में सौंपा गया, जिसमें कॉलेज प्रशासन से मामले पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की मांग की गई। छात्र नेताओं ने कहा कि कॉलेज परिसर में इस प्रकार की घटनाएं शिक्षा के वातावरण को दूषित करती हैं तथा छात्राओं की गरिमा और सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं।
छात्र संघ ने मांग की कि दोषी व्यक्तियों की अविलंब पहचान कर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। इस दौरान महानगर अध्यक्ष अमन साहू, प्रदेश सचिव राजेश सिंह, डोरंडा अध्यक्ष अभिषेक राज दुबे, अंगद, प्राची प्रिया, शुभम, आशीष, अनुराग सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
एबीएन कैरियर डेस्क। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल पुंदाग, रांची में क्रिकेट, फुटबॉल,बास्केट बॉल, हैंडबॉल, जूडो, कराटे, वूशु, ताइक्वांडो, स्केटिंग आदि खेलों के खिलाड़ियों के प्रशिक्षण हेतु समर कैंप का भव्य उद्घाटन किया गया, जिसमें सभी खिलाड़ियों को उपर्युक्त खेलों से संबंधित नये नियमों एवं बेहतर तकनीक का प्रशिक्षण विद्यालय के खेल शिक्षक राजेश कुमार सिन्हा तथा आशीष कुमार जायसवाल के मार्गदर्शन में दिया जा रहा है। आज से सभी खिलाड़ी एक सप्ताह तक इन खेलों का नियमित रूप से अभ्यास करेंगे।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ तापस घोष ने समर कैंप के उद्घाटन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विविध गतिविधियों में भाग लेना आवश्यक है। इस प्रशिक्षण शिविर में कक्षा द्वितीय से दशम तक के लगभग 200 विद्यार्थी उत्साहपूर्वक भाग लेंगे। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को खेलों में खास दिलचस्पी रहती है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ विविध खेलों एवं अन्य गतिविधियों में भी भाग लेना आवश्यक है,तभी वे जीवन में आगे बढ़ पायेंगे तथा जीवन की चुनौतियों का सामना कर पायेंगे।
एबीएन कैरियर डेस्क। स्वदेशी तकनीकी प्रगति की भावना को मनाने के लिए, इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल, बीआईटी मेसरा ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 26 समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत कैट हॉल में पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और संस्थान की प्रार्थना के साथ हुई। आईआईसी बीआईटी मेसरा के सह-संयोजक डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जिसके बाद डीन आरआईई और आईआईसी के अध्यक्ष प्रो. राजू पोद्दार तथा पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज के डीन प्रो. संदीप सिंह सोलंकी ने अपने विचार प्रस्तुत किये।
मुख्य अतिथि, डीआरडीई के पूर्व निदेशक डॉ. एम. पी. कौशिक ने रक्षा और कृषि क्षेत्र में भारत के तकनीकी मील के पत्थरों पर विचार करते हुए एक प्रभावशाली भाषण दिया। उन्होंने पहले पोखरण परमाणु परीक्षण की सफलता को याद किया, जिसने भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव रखी थी।
साथ ही, उन्होंने तेजस लड़ाकू विमान और अग्नि मिसाइल श्रृंखला जैसी आधुनिक स्वदेशी उपलब्धियों की सराहना की और भारत के भविष्य के विकास को लेकर अत्यधिक आशावाद व्यक्त किया। कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने भारत की परमाणु, स्पेस और डिफेंस क्षमताओं के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला और बीआईटी मेसरा तथा उसके बाहर निरंतर नवाचार (इनोवेशन) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
उद्घाटन के बाद, इंटर-स्कूल मॉडल प्रदर्शनी के लिए मुख्य आकर्षण आर एंड डी बिल्डिंग की ओर स्थानांतरित हो गया, जहां प्रमुख क्षेत्रीय स्कूलों के छात्रों ने समकालीन चुनौतियों के लिए अभूतपूर्व समाधान प्रस्तुत किए। आचार्यकुलम रांची नामकुम ने मोशन टू पावर, क्लाइमेट रेजिलिएंट क्लीन सिटी और नेक्स्ट-जेन आॅर्गन ट्रांसपोर्टेशन बॉक्स पर मॉडल प्रदर्शित किये।
डीएवी गांधी नगर ने विभिन्न परियोजनाओं को प्रस्तुत किया जिनमें स्मार्ट क्लासरूम एनर्जी सेवर, वायु गुणवत्ता सुधारने वाला मोदी, कोयला खदानों और घरों के लिए एंटी-थेफ्ट (चोरी-रोधी) सिस्टम, और क्लासरूम एनालिसिस एंड विजन इंजन शामिल थे। डीपीएस रांची ने स्मार्ट खेती के लिए एग्रीबॉट और शहरी नेविगेशन के लिए एक आॅटोनॉमस रोबोट अरुण का प्रदर्शन किया। सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल ने फैंटम गार्ड, एस्ट्रोफॉर्म और प्लाज्मा जेन एक्स 100 का प्रदर्शन किया। एस्कॉट इंटरनेशनल स्कूल ने एक स्मार्ट आॅटोनॉमस फायर फाइटर रोबोट, फ्यूचर फ्लो सिस्टम और एक इको-फ्रेंडली थर्मल हाउस का प्रदर्शन किया।
इसके अलावा, होली कॉन्वेंट पब्लिक स्कूल ने एक स्मार्ट हेलमेट, दृष्टिबाधितों के लिए स्मार्ट ग्लास और एक जलविद्युत (हाइड्रो इलेक्ट्रि सिटी) मॉडल प्रस्तुत किया, मनन विद्या ने अंडरवॉटर सर्विलांस ड्रोन और अकॉस्टिक वाटर ट्रीटमेंट का प्रदर्शन किया, और डीएवी हेहल ने एसडीडीआई स्मार्ट ड्रॉट डिटेक्शन मॉडल, एक स्मार्ट किचन और पॉल्यूशन फिल्टर, एक एडवांस्ड पीजो काइनेटिक स्मार्ट मैट, और एक स्मार्ट एग्जामिनेशन मॉनिटरिंग सिस्टम प्रदर्शित किया।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन सोमक दत्ता, डॉ. विशाल एच. शाह, डॉ. विनय कुमार, मृणाल पाठक, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. नरेश कुमार यादव और डॉ. चंचल कुमार मिश्र सहित जजों के एक सम्मानित पैनल द्वारा बहुत ही बारीकी से किया गया। इस शानदार आयोजन के सुचारू संचालन का श्रेय समर्पित इवेंट कोआॅर्डिनेटर्स : आनंद कुमार सिन्हा, डॉ. अनिंदिता बेरा और डॉ. दिलीप कुमार सिंह को दिया गया।
शीर्ष विजेताओं को पुरस्कार और सम्मान प्रदान किये गये: एस्ट्रोफॉर्म मॉडल के लिए सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, डीएवी गांधी नगर ने अपने एआई-पावर्ड केव मॉडल के लिए द्वितीय स्थान प्राप्त किया, और मनन विद्या को उनके अंडरवाटर सर्विलांस मॉडल के लिए तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने क्षेत्र के सबसे होनहार युवा दिमागों की रचनात्मकता और कड़ी मेहनत का जश्न मनाया। कार्यक्रम का समापन आईआईसी की सह-संयोजक डॉ. अनिंदिता बेरा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
टीम एबीएन, रांची। आजसू ने ज्ञापन के माध्यम से कुलपति को कहा कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक: 05/प0-13/2023 - 902, संकल्प पत्रांक : 05/प0-06/2023 - 893 एवं अन्य संकल्प पत्रों के माध्यम से राँची विश्वविद्यालय, इसके अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों एवं झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के रिस्ट्रक्चरिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह प्रस्ताव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अत्यंत चिंताजनक, अव्यावहारिक एवं जनविरोधी प्रतीत होता है। अत: आजसू इस संपूर्ण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए माननीय कुलपति से इसे तत्काल निरस्त करने की मांग करती हैं।
झारखंड सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से अभी भी विकासशील राज्यों की श्रेणी में आता है। राज्य के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे विद्यार्थी सीमित संसाधनों के बीच अपने निकटवर्ती महाविद्यालयों में अध्ययन कर पाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय उपलब्ध रहने से विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता, सहज पहुँच तथा संतुलित शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होता है।
किन्तु प्रस्तावित रिस्ट्रक्चरिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम के अंतर्गत किसी महाविद्यालय को केवल विज्ञान, किसी को केवल कला तथा किसी को केवल वाणिज्य अथवा अन्य विशिष्ट विषयों तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह व्यवस्था पूर्णत: अव्यावहारिक, छात्र-विरोधी एवं शिक्षा-विरोधी है। यदि विद्यार्थियों को अलग-अलग संकायों के लिए विभिन्न महाविद्यालयों में जाना पड़ेगा, तो राज्य की संपूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
इस व्यवस्था के कारण गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्हें परिवहन, आवास एवं अन्य खर्च वहन करने पड़ेंगे, जो अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा छोड़ने को विवश होंगे। झारखंड पहले से ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से पीछे है। ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था विद्यार्थियों को शिक्षा से और दूर कर देगी।
ग्रामीण एवं पारंपरिक परिवारों की अनेक छात्राएं केवल निकटवर्ती महाविद्यालयों में ही अध्ययन कर पाती हैं। यदि विषयों के अनुसार उन्हें दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़े, तो उनकी शिक्षा बाधित होगी तथा महिला शिक्षा को गंभीर क्षति पहुंचेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति बहुविषयी शिक्षा की अवधारणा को बढ़ावा देती है, जहाँ विद्यार्थी विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकें। परंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम महाविद्यालयों को संकीर्ण विषय-केन्द्रित संस्थानों में बदलने का प्रयास कर रहा है। वास्तविक बहुविषयी शिक्षा तभी संभव है जब एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य सभी संकाय उपलब्ध हों।
वर्षों से स्थापित महाविद्यालय अपनी समग्र शैक्षणिक संरचना एवं बहुविषयी स्वरूप के कारण प्रसिद्ध हैं। यदि उनमें से विभिन्न संकाय समाप्त या स्थानांतरित कर दिए गए, तो उनकी ऐतिहासिक पहचान, शैक्षणिक गरिमा एवं सामाजिक महत्व प्रभावित होगा।
इस संकल्प में अनेक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों को सरेंडर करने तथा पुनर्गठन के नाम पर समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भारी कमी है। पदों की कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं एवं प्रशासनिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं एवं लोकजीवन के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां की भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी एवं मूलवासी समाज की ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक अस्मिता की आधारशिला हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, मुंडारी, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा एवं कुड़माली जैसी भाषाओं का अध्ययन-अध्यापन होने के कारण नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी हुई है। किंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम के अंतर्गत इन विभागों को सीमित अथवा स्थानांतरित किए जाने से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभाग स्वत: कमजोर हो जायेंगे। अधिकांश विद्यार्थी दूरस्थ महाविद्यालयों में जाकर इन भाषाओं का अध्ययन नहीं कर पायेंगे, जिससे नामांकन घटेगा, विभाग निष्क्रिय होंगे तथा धीरे-धीरे ये भाषाएं उच्च शिक्षा व्यवस्था से समाप्त होने लगेंगी। यह केवल शैक्षणिक क्षति नहीं होगी, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान एवं भाषाई विरासत पर भी गंभीर आघात होगा।
झारखंड जैसे राज्य में आवश्यकता उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने की है, न कि उन्हें विभाजित एवं कमजोर करने की। महाविद्यालयों को तोड़ने के बजाय उनमें शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत संरचना, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, डिजिटल सुविधाएं एवं शोध व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो झारखंड उच्च शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति तीनों क्षेत्रों में और अधिक पिछड़ जायेगा।
हमें पूर्ण विश्वास है कि माननीय कुलपति महोदया से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं राज्य के शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक भविष्य के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए इस जनविरोधी संकल्प को तत्काल निरस्त करने की कृपा करेंगे।
ज्ञापन सौंपने में प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, प्रदेश सचिव राजेश सिंह, रोशन नायक, सक्षम झा, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, निशांत लिंडा, पंकज, पीयूष, मोहन कुमार, अब्दुल खान, यश सोनी, अभिषेक, राज दुबे, रूपम, सुष्मिता कुमारी, खुशी कुमारी, लिजा बेक, प्राची खलखो, फुलमनी कुमारी, नयना कुमारी, सती कुमारी, मनीषा कुमारी, प्रीति कुमारी, रेशमा कुमारी, गीता, सोनी, मनिता, काजल इत्यादि लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रदेश अध्यक्ष अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के ओम वर्मा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। जोहार लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन द्वारा आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा डेटा एनोटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह बुद्धा साइंस एंड टेक्निकल इंस्टिट्यूट, चूना भट्टा, कोकर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि इंटरनेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शशि भूषण पांडे, विशिष्ट अतिथि सौरभ कुमार तथा राय यूनिवर्सिटी के लाइब्रेरियन रविन कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी आवश्यक हो गई है। वहीं विशिष्ट अतिथि ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखें ही नहीं, बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 दिनों तक चला, जिसमें लगभग 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। हालांकि प्रशिक्षण के सभी स्तरों को सफलतापूर्वक केवल 20 विद्यार्थियों ने पूरा किया। इन सफल विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा मेडल एवं सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
संस्था के सीईओ डॉ. भारत भूषण ने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। ऐसे समय में देश के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम को सफल बनाने में सावित्री कुमारी, अंजली कुमारी, संजना कुमारी एवं सुभाष कुमार का विशेष योगदान रहा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा के बीएड कॉलेज में शनिवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था- एनईपी 2020: जलवायु जागरूकता के माध्यम से शिक्षा का रूपांतरण। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संगोष्ठी का उद्देश्य नई शिक्षा नीति 2020 के तहत पर्यावरणीय चेतना को शिक्षा के साथ जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और सम्मान के साथ हुई। बीएड कॉलेज के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र देकर मुख्य अतिथि सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का अभिनंदन किया। कॉलेज परिसर में आयोजित इस संगोष्ठी में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं शिक्षा जगत से जुड़े कई विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
अपने संबोधन में धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 देश के भविष्य को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिसका प्रभाव सीधे तौर पर मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षा के माध्यम से जलवायु जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरणीय शिक्षा को व्यवहारिक रूप से लागू करने की जरूरत है, ताकि छात्र-छात्राएं न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि अपने दैनिक जीवन में भी पर्यावरण संरक्षण के उपायों को अपनाएं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में विशेष प्रयास करें।
संगोष्ठी में विधायक प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल, बीएस कॉलेज के प्रोफेसर शशि गुप्ता सहित कई शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किये। वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति में समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को भी एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षा संस्थानों की भूमिका अहम है।
कार्यक्रम में महिला टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, लोहरदगा के बीएड एवं एमएड के सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी संगोष्ठी में भाग लिया और विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्नों एवं सुझावों के माध्यम से अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। संगोष्ठी के दौरान जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने छात्रों को पेड़-पौधे लगाने, जल संरक्षण करने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस संगोष्ठी ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच को प्रोत्साहित किया, बल्कि जलवायु जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित किया। आयोजकों ने उम्मीद जतायी कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किये जायेंगे, जिससे समाज में जागरूकता का स्तर और अधिक बढ़ सके।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मोहम्मदगंज। प्रखंड मुख्यालय स्थित पीएमश्री स्तरोन्नत प्लस टू उच्च विद्यालय ने इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में एक बार फिर शानदार उपलब्धि हासिल कर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों में विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया अध्याय लिखा है। परिणाम जारी होते ही विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल बन गया।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि विज्ञान संकाय में कुल 320 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें 290 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि 26 छात्र द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुए। केवल एक विद्यार्थी अनुत्तीर्ण रहा तथा दो छात्र अनुपस्थित रहे।
प्रधानाध्यापक राकेश कुमार सिंह ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया।
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