टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए वर्षों से लागू 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त करने के निर्णय पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
यह निर्णय झारखंड के प्रतिभाशाली एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों विद्यार्थियों के हितों के प्रतिकूल है। आजसू का मानना है कि बीआईटी मेसरा झारखंड की धरती पर स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसकी स्थापना और विकास में राज्य की भूमि, संसाधनों एवं जनता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
ऐसे में राज्य के विद्यार्थियों को मिलने वाले अवसरों में कटौती किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि होम स्टेट कोटा के माध्यम से झारखंड के छात्रों, विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता रहा है। इस व्यवस्था को समाप्त करने से राज्य के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा तथा उनके उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित होंगे।
आजसू की बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए पूर्व की भांति 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा तत्काल बहाल किया जाए। राज्य सरकार इस विषय में संस्थान प्रबंधन से अविलंब वार्ता कर झारखंडी छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
राज्य के विद्यार्थियों के लिए आरक्षण एवं विशेष अवसरों की व्यवस्था को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न किया जाए। प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि यदि झारखंड के छात्रों के हित में पूर्ववत व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो आजसू छात्र-युवा हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध आंदोलन चलाने को बाध्य होगी।
आंदोलन के तहत ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन, छात्र सम्मेलन तथा आवश्यकतानुसार व्यापक जनआंदोलन आयोजित किए जाएंगे। झारखंड के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद, पलामू। अपने पूर्व निर्धारित समय को परिवर्तित करते हुए अवधेश कुमार सिंह डिग्री कॉलेज के कर्मियों द्वारा धरना दिया जाएगा।
इस आशय की जानकारी देते हुए कर्मी रमेश सिंह आदि ने प्रेस को विज्ञप्ति देकर जानकारी दिया हैं जिसमें कॉलेज परिसर में 30 मई से अनिश्चित काल शान्ति पूर्ण ढंग तरीके से धरना देने की बात कही है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के इंजीनियरिंग छात्रों के लिए इस बार एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के सबसे चर्चित इंजीनियरिंग संस्थानों में गिने जाने वाले बीआईटी मेसरा ने अब होम स्टेट कोटा खत्म करने का फैसला ले लिया है।
यानी अब झारखंड के छात्रों को पहले की तरह 50 प्रतिशत कोटा नहीं मिलेगा। सत्र 2026-27 से बीआईटी मेसरा की सभी सीटों पर सिर्फ ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर एडमिशन होगा। आसान भाषा में समझें तो अब झारखंड के छात्रों को भी देशभर के लाखों छात्रों के साथ सीधी प्रतियोगिता करनी पड़ेगी।
अब तक बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती थीं। इस व्यवस्था की वजह से राज्य के छात्रों को बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन का अच्छा मौका मिल जाता था।
बीटेक की लगभग 650 सीटों पर झारखंड के छात्रों का नामांकन होता था। इसके अलावा बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के छात्रों के लिए भी अलग आरक्षित सीटें थीं। लेकिन अब यह पूरा सिस्टम खत्म हो जाएगा। अब किसी छात्र को सिर्फ झारखंड का निवासी होने का फायदा नहीं मिलेगा। एडमिशन पूरी तरह रैंक और ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर होगा।
दरअसल, बीआईटी मेसरा और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता यानी एमओयू दो साल पहले ही खत्म हो चुका था। संस्थान की तरफ से कई बार उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो पाया।
बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी लंबे समय से बकाया है। ऐसे में संस्थान ने अब सभी सीटों पर ऑल इंडिया कोटे से एडमिशन लेने का फैसला कर लिया।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर झारखंड के छात्रों पर पड़ने वाला है। पहले जिन छात्रों की रैंक थोड़ी कम भी होती थी, उन्हें होम स्टेट कोटे का फायदा मिल जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
अब छात्रों को जेईई में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करना होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए चुनौती और बढ़ सकती है क्योंकि पहले उन्हें राज्य कोटे का सहारा मिल जाता था। बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के छात्रों को भी अब अलग से सीट आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा।
इस पूरे मामले पर झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की कानूनी समीक्षा कर रही है। मंत्री का कहना है कि अगर किसी संस्थान को झारखंड सरकार से रियायती दर पर जमीन मिली है, तो उसे राज्य के आरक्षण नियमों का पालन करना चाहिए।
एबीएन कैरियर डेस्क। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम का कड़ा विरोध किया है।
आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि यह निर्णय उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला, छात्र-हित एवं शिक्षक-कर्मचारी हित के विरुद्ध तथा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है।
राज्य सरकार बिना व्यापक विमर्श, शिक्षाविदों की राय एवं छात्र संगठनों से संवाद किये इस व्यवस्था को थोपने का प्रयास कर रही है, जिससे विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार अविलंब इस प्रस्ताव को वापस नहीं लेती है, तो आजसू चरणबद्ध आंदोलन चलाने को बाध्य होगी। इसके तहत राज्यभर के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी, धरना-प्रदर्शन एवं छात्र आंदोलन किया जायेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
आजसू ने सरकार से मांग की है कि उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले छात्र संगठनों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं शिक्षाविदों के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाये तथा छात्र-हित को सर्वोपरि रखा जाये।
अंत में ओम वर्मा ने कहा कि आजसू हमेशा गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा के पक्ष में रही है और किसी भी परिस्थिति में विश्वविद्यालयों की गरिमा एवं छात्र अधिकारों से समझौता नहीं किया जायेगा। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
एबीएन कैरियर डेस्क। रांची के युवा मार्शल आर्ट खिलाड़ी अरहान आलम ने महाराष्ट्र के लोनावाला में आयोजित छठी जीत कुने डो राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
इस प्रतियोगिता का आयोजन जीत कुने डो मार्शल आर्ट एसोसिएशन आॅफ इंडिया एवं नेपाल जीत कुने डो मार्शल आर्ट, नेपाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। प्रतियोगिता में देश के 16 राज्यों से आये खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
अपने वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अरहान आलम ने गोल्ड मेडल जीतकर इंडो-नेपाल टूर्नामेंट में अपनी जगह पक्की की। इसके साथ ही उन्होंने इंडो-नेपाल स्ट्रीट डिफेंस फाइट प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर तापस घोष ने अरहान एवं उनके पिता तौहिद आलम को बधाई देते हुए कहा कि अरहान की इस उपलब्धि से न केवल उनके विद्यालय का नाम रोशन हुआ है, बल्कि पूरे झारखंड का गौरव भी बढ़ा है।
महज 13 वर्ष की उम्र में अरहान कई राष्ट्रीय स्तर के मेडल अपने नाम कर चुके हैं। अरहान आलम का सपना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड मेडल जीतना है।
एबीएन कैरियर डेस्क। झारखंड शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (जेसीईआरटी), झारखंड द्वारा आयोजित झारखंड राज्य ओलंपियाड : 2025 का परीक्षाफल जारी कर दिया गया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में राज्यभर से कुल 20,398 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की थी। परीक्षा का आयोजन दो चरणों में किया गया था।
प्रथम पांच छात्रों के सर्वोत्तम अंकों के आधार पर राज्यस्तरीय 15 विद्यार्थियों की मेधा सूची जारी की गयी है। अत्यंत गर्व एवं हर्ष का विषय है कि इस मेधा सूची में नेतरहाट आवासीय विद्यालय के कुल 04 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त कर विद्यालय को गौरवान्वित किया है। राज्य स्तरीय मेधा सूची में चयनित नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्र निम्नलिखित हैं—
इन विद्यार्थियों की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, शिक्षकों एवं अभिभावकों में हर्ष का वातावरण है। विद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासित वातावरण एवं विद्यार्थियों के सतत परिश्रम का परिणाम बताया है। विद्यालय के प्राचार्य संतोष कुमार ने सभी सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। चयनित विद्यार्थियों को शीघ्र ही सम्मानित किया जायेगा।
एबीएन कैरियर डेस्क। राज्य के सरकारी महाविद्यालयों में अब तक नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं होना उच्च शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। इंटरमीडिएट एवं सीबीएसई के परिणाम जारी हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन झारखंड के अधिकांश विश्वविद्यालयों में स्नातक नामांकन की प्रक्रिया अब भी प्रारंभ नहीं हो सकी है। इससे लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य अनिश्चितता के बीच फंसा हुआ है।
राज्य के सभी कुलपतियों की उदासीनता एवं प्रशासनिक कमजोरी के कारण विश्वविद्यालयों में समयबद्ध शैक्षणिक कैलेंडर पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। एक ओर देश के अन्य राज्यों में नए सत्र की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, वहीं झारखंड में विद्यार्थी अब भी नामांकन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर पड़ रहा है, जो समय पर प्रवेश नहीं मिलने के कारण मानसिक तनाव और भविष्य की चिंता से जूझ रहे हैं।
उच्च शिक्षा विभाग एवं राजभवन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए सभी विश्वविद्यालयों को शीघ्र नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्देश देना चाहिए, ताकि छात्रों का शैक्षणिक सत्र समय पर संचालित हो सके। शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही देरी राज्य की शैक्षणिक छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है। राज्य के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर लगातार बढ़ता प्रशासनिक हस्तक्षेप चिंता का विषय बनता जा रहा है।
झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था पहले ही संसाधनों, शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक विलंब से जूझ रही है, वहीं लोकभवन प्रशासन की उदासीनता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति, शिक्षकों के प्रमोशन, वित्तीय स्वीकृति और शैक्षणिक निर्णयों में लगातार हो रही देरी से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। एक साथ सभी कॉलेजों में नामांकन शुरू होना चाहिए ताकि सरकारी कॉलेज में सीट खाली रहने की संभावना कम रहे।
हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कई संशोधन और सरकारी नियंत्रण संबंधी कदमों ने यह आशंका बढ़ा दी है कि राज्य के विश्वविद्यालय अपनी स्वतंत्र अकादमिक पहचान खो सकते हैं। विश्वविद्यालय केवल प्रशासनिक संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध और लोकतांत्रिक विचारों के केंद्र होते हैं। यदि हर निर्णय सरकार और प्रशासनिक तंत्र के नियंत्रण में होगा, तो शैक्षणिक स्वतंत्रता कमजोर पड़ेगी।
उच्च शिक्षा विभाग और लोकभवन प्रशासन को चाहिए कि वे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया और शैक्षणिक निर्णयों का सम्मान करें। अन्यथा इसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य, शोध कार्यों और राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। विश्वविद्यालयों को राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखकर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
अखबारों में जो न्यूज आयी है कि कुलाधिपति महोदय भी इस अधिनियम को पूर्ण रूप से नहीं पढ़ने की बात आयी है। झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक : 05/प0-13/2023 - 902, संकल्प पत्रांक : 05/प0-06/2023 - 893 एवं अन्य संकल्प पत्रों के माध्यम से रांची विश्वविद्यालय, इसके अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों एवं झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह प्रस्ताव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अत्यंत चिंताजनक, अव्यावहारिक एवं जनविरोधी प्रतीत होता है। अत: हम इस संपूर्ण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए लोकभवन एवं राज्य सरकार इसे वापस नही लेती है तो आजसू पूरे झारखंड राज्य में पुरजोर विरोध करेगी। मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से आग्रह है कि इसे तत्काल निरस्त किया जाय। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश प्रभारी हरीश कुमार ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आज आजसू ने रांची विश्विद्यालय गेट से अल्बर्ट एक्का चौक तक विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार को पुतला दहन किया। पुतला दहन के दौरान आजसू छात्र संघ के प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने कहा कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक: 05/प0-13/2023 - 902, संकल्प पत्रांक : 05/प0-06/2023 - 893 एवं अन्य संकल्प पत्रों के माध्यम से रांची विश्वविद्यालय, इसके अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों एवं झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह प्रस्ताव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अत्यंत चिंताजनक, अव्यावहारिक एवं जनविरोधी प्रतीत होता है। अत: आजसू इस संपूर्ण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए माननीय मुख्यमंत्री महोदय से इसे तत्काल निरस्त करने की मांग करती हैं।
झारखंड सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से अभी भी विकासशील राज्यों की श्रेणी में आता है। राज्य के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे विद्यार्थी सीमित संसाधनों के बीच अपने निकटवर्ती महाविद्यालयों में अध्ययन कर पाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय उपलब्ध रहने से विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता, सहज पहुंच तथा संतुलित शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होता है।
किन्तु प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम के अंतर्गत किसी महाविद्यालय को केवल विज्ञान, किसी को केवल कला तथा किसी को केवल वाणिज्य अथवा अन्य विशिष्ट विषयों तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह व्यवस्था पूर्णत: अव्यावहारिक, छात्र-विरोधी एवं शिक्षा-विरोधी है। यदि विद्यार्थियों को अलग-अलग संकायों के लिए विभिन्न महाविद्यालयों में जाना पड़ेगा, तो राज्य की संपूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
प्रदेश सचिव राजेश सिंह ने कहा कि गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव इस व्यवस्था के कारण गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्हें परिवहन, आवास एवं अन्य खर्च वहन करने पड़ेंगे, जो अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा छोड़ने को विवश होंगे।
झारखंड पहले से ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से पीछे है। ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था विद्यार्थियों को शिक्षा से और दूर कर देगी।
प्रदेश सचिव सक्षम झा ने कहा कि छात्राओं की शिक्षा पर गंभीर असर ग्रामीण एवं पारंपरिक परिवारों की अनेक छात्राएं केवल निकटवर्ती महाविद्यालयों में ही अध्ययन कर पाती हैं।
यदि विषयों के अनुसार उन्हें दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़े, तो उनकी शिक्षा बाधित होगी तथा महिला शिक्षा को गंभीर क्षति पहुंचेग राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत राष्ट्रीय शिक्षा नीति बहुविषयी शिक्षा की अवधारणा को बढ़ावा देती है, जहां विद्यार्थी विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकें। परंतु प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम महाविद्यालयों को संकीर्ण विषय-केन्द्रित संस्थानों में बदलने का प्रयास कर रहा है। वास्तविक बहुविषयी शिक्षा तभी संभव है जब एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य सभी संकाय उपलब्ध हों।
महानगर अध्यक्ष अमन साहू ने कहा कि महाविद्यालयों की ऐतिहासिक पहचान समाप्त होने का खतरा वर्षों से स्थापित महाविद्यालय अपनी समग्र शैक्षणिक संरचना एवं बहुविषयी स्वरूप के कारण प्रसिद्ध हैं। यदि उनमें से विभिन्न संकाय समाप्त या स्थानांतरित कर दिए गए, तो उनकी ऐतिहासिक पहचान, शैक्षणिक गरिमा एवं सामाजिक महत्व प्रभावित होगा।
इस संकल्प में अनेक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों को रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम करने तथा पुनर्गठन के नाम पर समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भारी कमी है। पदों की कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ एवं प्रशासनिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं एवं लोकजीवन के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां की भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी एवं मूलवासी समाज की ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक अस्मिता की आधारशिला हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, मुंडारी, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा एवं कुड़माली जैसी भाषाओं का अध्ययन-अध्यापन होने के कारण नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी हुई है।
किन्तु प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम के अंतर्गत इन विभागों को सीमित अथवा स्थानांतरित किये जाने से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभाग स्वत: कमजोर हो जायेंगे। अधिकांश विद्यार्थी दूरस्थ महाविद्यालयों में जाकर इन भाषाओं का अध्ययन नहीं कर पाएंगे, जिससे नामांकन घटेगा, विभाग निष्क्रिय होंगे तथा धीरे-धीरे ये भाषाएं उच्च शिक्षा व्यवस्था से समाप्त होने लगेंगी। यह केवल शैक्षणिक क्षति नहीं होगी, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान एवं भाषाई विरासत पर भी गंभीर आघात होगा।
झारखंड जैसे राज्य में आवश्यकता उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने की है, न कि उन्हें विभाजित एवं कमजोर करने की। महाविद्यालयों को तोड़ने के बजाय उनमें शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत संरचना, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, डिजिटल सुविधाएं एवं शोध व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो झारखंड उच्च शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति तीनों क्षेत्रों में और अधिक पिछड़ जायेगा। अत: मुख्यमंत्री से विनम्र प्रार्थना है कि
हमें पूर्ण विश्वास है कि मुख्यमंत्री से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं राज्य के शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक भविष्य के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए इस जनविरोधी संकल्प को तत्काल निरस्त करने की कृपा करेंगे। आज के कार्यकम में अमित यादव, प्रताप सिंह, सौरभ यादव, अंकित कुमार, अब्दुल खान, रवि रौशन, अनुका, रिशव, कृष, डॉ सौरभ शर्मा, आदित्य, खुसबू, गौरभ सिंह इत्यादि लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के ऋतुराज शाहदेव ने दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse