एबीएन कैरियर डेस्क। आज दिन 27 जुलाई से नया सत्र की शुरूआत सभी स्नातकोत्तर और स्नातक के विद्यार्थियों का परिचय संस्थान के प्रभारी डॉ विजय कुमार झा और विभिन्न विभागों के शिक्षक सहायक कुलसचिव के द्वारा किया गया इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और निदेशक से सीधा संवाद कर आने वाले शैक्षणिक सत्र में सहयोग और अनुशासन के प्रति सजगता पर बाते कर एक दूसरे की समन्वय स्थापित करने का प्रथम प्रयास किया गया। आज लालपुर का पूरा प्रांगण नव उत्साह और स्नातक की पढ़ाई करने के प्रति उत्सुकता से भरे थे परिचय के बाद छात्र छात्राओं के साथ जलपान कर उनके कॉलेज और उसके अनुशासन के प्रति डर को कम करने का सफल प्रयास किया गया।आज के इस परिचय कार्यक्रम में सहायक कुलसचिव नरेन्द्र कुमार, स्नातकोत्तर विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ अमृता प्रियम, डॉ सोमनाथ मुखर्जी, स्नातक विभाग के डॉ मिलि दत्ता, डॉ पार्थो सारथी विष्णु, डॉ अनीश हैदर, डॉ संजय कुमार, डॉ अभय रंजन श्रीवास्तव, डॉ मयंक, अनुपमा सहाय, डॉ चिन्तापल्ली, डॉ प्रदीप मुंडा, डॉ संदीप शाहदेव, डॉ प्रशांत कुमार सिंह , डॉ सोमित्रो श्री अजय कुमार, राणा मिश्रा, डॉ उमेश प्रशाद डॉ सिबा मित्रा, डॉ श्रावणी, सहित शिक्षकों और पुराने छात्र छात्राओं ने नए छात्र छात्राओं का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
डीएसपीएमयू के छात्र-छात्राओं एवं विभिन्न छात्र संगठनों ने कुलपति को सौंपा संयुक्त मांग पत्र विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार तथा छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने पर बनी सहमति टीम एबीएन, रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची के छात्र-छात्राओं एवं विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने आज कुलपति प्रो. राजीव मनोहर से मुलाकात कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार से संबंधित संयुक्त मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित छात्रहित के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उनके शीघ्र समाधान की मांग की। बैठक में विश्वविद्यालय में चल रहे पेन डाउन आंदोलन का शीघ्र समाधान कर नियमित पठन-पाठन एवं परीक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने, एनईटी, पीएचडी और जेआरएफ से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का समयबद्ध निष्पादन, जिन विभागों में सीटों की कटौती की गयी है।वहां आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदस्थापन, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने, विश्वविद्यालय के नियमों के विरुद्ध अन्य संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने, आॅनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाने तथा सूचना का अधिकार के अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गयी। वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन एवं छात्र संगठनों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक में विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण एवं शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने, छात्रहित एवं विश्वविद्यालय हित से जुड़े विषयों पर नियमित सामंजस्य बैठक आयोजित करने तथा विभिन्न समस्याओं का आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालने पर सहमति बनी। बैठक में यह भी सहमति बनी कि विश्वविद्यालय द्वारा छात्र नेताओं पर दर्ज मामलों के संबंध में नियमानुसार उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जायेगी। इस महत्वपूर्ण वार्ता में आजसू छात्र संघ के प्रदेश प्रभारी हरीश सिंह के नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज सहदेव, विश्वविद्यालय प्रभारी रवि, जेसीएम के छात्र नेता कमलेश महतो, अरविंद बैठा, सचित रंजन, छात्र राजद के बबलू मंडल, एआईएसए के छात्र नेता शालीन गोप सहित विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कुलपति प्रो. राजीव मनोहर, कुलसचिव धनंजय द्विवेदी, प्रोक्टर अजय चौधरी, डीएसडब्ल्यू डॉ. सर्वोत्तम कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में सभी छात्र संगठनों ने संयुक्त समिति बनाकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा तथा विश्वविद्यालय हित एवं छात्रहित से जुड़े सभी विषयों पर भविष्य में भी समन्वय एवं संवाद की प्रक्रिया निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची के आजसू छात्र संघ, एआईएसए, छोटानागपुर छात्र संघ, हिंदू छात्र संघ, छात्र राजद एवं जेसीएम ओम वर्मा ने दी।
झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बहाल करने हेतु उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच की मांग : ऋतुराज शाहदेवटीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि झारखंड में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे विवाद, अनियमितताओं तथा हाल के दिनों में जेपीएससी परीक्षा से जुड़े कथित मेधा घोटाले की सीआईडी जांच एवं गिरफ्तारियों ने राज्य के युवाओं, अभिभावकों और आम जनता के विश्वास को गहरा आघात पहुँचाया है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य गठन के बाद जिन संस्थाओं से निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की अपेक्षा थी, वे समय-समय पर विवादों के घेरे में आती रही हैं।झारखंड राज्य का निर्माण लंबे जनसंघर्ष और बलिदान के बाद इस आशा के साथ हुआ था कि यहाँ के प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी ही धरती पर निष्पक्ष अवसर प्राप्त होंगे। किंतु पिछले वर्षों में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक, कथित सेटिंग, अनियमितताओं, परीक्षा एजेंसियों की भूमिका तथा भ्रष्टाचार के आरोपों ने इस विश्वास को कमजोर किया है।इससे राज्य की छवि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावित हुई है। हालिया घटनाक्रम ने यह प्रश्न भी खड़ा किया है कि जिन निजी एजेंसियों को परीक्षा संचालन का दायित्व सौंपा गया, उनका चयन किन मानकों के आधार पर किया गया? क्या उनकी पूर्व पृष्ठभूमि, कार्यशैली, वित्तीय एवं तकनीकी क्षमता तथा विश्वसनीयता का समुचित सत्यापन किया गया था? यदि किसी एजेंसी के विरुद्ध पहले से प्रतिकूल तथ्य उपलब्ध थे, तो उसे जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि जेपीएससी, जेएसएससी तथा अन्य सभी भर्ती परीक्षाओं में समय-समय पर लगे गंभीर आरोपों की उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।जिन मामलों में जांच चल रही है, उनसे जुड़े व्यक्तियों को जांच पूरी होने तक संवेदनशील एवं उच्च प्रशासनिक दायित्वों से दूर रखा जाए। परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों के चयन, अनुबंध और उनकी भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाओं के लिए पूर्ण पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुरक्षित एवं जवाबदेह व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे युवाओं का विश्वास पुनः स्थापित हो सके।यदि किसी प्रस्तावित परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर और विश्वसनीय संदेह हो, तो सरकार पहले जांच पूरी कराए और उसके बाद ही परीक्षा आयोजित करने पर विचार करे, ताकि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हो सके। झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, अनियमितता या पक्षपात की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। राज्य सरकार का दायित्व है कि वह दोषियों को कानून के दायरे में लाए, निर्दोषों को न्याय दिलाए और ऐसी व्यवस्था स्थापित करे जिसमें योग्यता ही चयन का एकमात्र आधार बने।झारखंड के युवाओं का विश्वास लौटाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था ही विकसित झारखंड की मजबूत नींव है। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने दी।
एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में डीएवी स्पोर्ट्स क्लस्टर लेवल मीट–2026 का भव्य शुभारंभटीम एबीएन, रांची। एस.आर. डीएवी. पब्लिक स्कूल, पुंदाग में डीएवी स्पोर्ट्स क्लस्टर लेवल मीट–2026 का भव्य शुभारंभ उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में डीएवी पब्लिक स्कूल, बरियातू, गोविंदपुर, खूंटी, बचरा, चतरा, टंडवा तथा एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना, दृढ़ संकल्प एवं खेल भावना का विकास करना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिवेन्द्र कुमार सिंह, जिला खेल पदाधिकारी, झारखंड थे।विशिष्ट अतिथियों में शिवेन्द्र नाथ दुबे, कोषाध्यक्ष, झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन एवं संस्थापक महासचिव, झारखंड वुशु एसोसिएशन; एम. के. सिन्हा, सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी, डीएवी पब्लिक स्कूल्स, झारखंड ज़ोन-बी; बिपिन राय, सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी, डीएवी पब्लिक स्कूल्स, झारखंड ज़ोन-जी सह प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल एवं प्रबंधक, एस.आर. डीएवी. पब्लिक स्कूल, पुंदाग; तथा प्रदीप कुमार झा, प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल, गांधीनगर, आलोक कुमार दुबे, पासवा के अध्यक्ष तथा लाल किशोर नाथ शाहदेव, पासवा के उपाध्यक्ष ने उपस्थित रहकर उद्घाटन समारोह में चार चांद लगाए। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गये। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. तापस घोष ने सभी अतिथियों एवं विभिन्न विद्यालयों से आए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों तथा टीम प्रबंधकों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता का ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भी सशक्त माध्यम है।डीएवी. झारखंड, जोन - ब के सहायक क्षेत्रीय अधिकारी एम के सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि खेल बच्चों के चहुंमुखी विकास के माध्यम हैं। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि पिछले ओलंपिक खेलों में डीएवी के चार खिलाड़ी पदक विजेता रहे थे,जिनमें नीरज चोपड़ा,मनु भाकर के नाम प्रमुख हैं।साथ ही हॉकी की विजेता टीम में भी डीएवी. के कई खिलाड़ी शामिल थे। श्री विपिन राय, एआरओ, जोन - जी, प्राचार्य, डीएवी. हेहल, मैनेजर, एसआर डीएवी पुंदाग ने भी सभा को संबोधित करते हुए खिलाड़ियों को खेल भावना से खेलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि खेलों से विद्यार्थियों का शारीरिक तथा मानसिक विकास तो होता है।खिलाड़ियों ने खेल भावना एवं निष्पक्ष प्रतियोगिता की शपथ ली। डीएवी .स्पोर्ट्स ध्वज फहराए जाने के उपरांत मुख्य अतिथि श्री शिवेन्द्र कुमार सिंह ने प्रतियोगिता के विधिवत शुभारंभ की घोषणा की तथा खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएँ दीं।क्लस्टर लेवल मीट के अंतर्गत जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, वुशु, मुक्केबाज़ी, कुश्ती, भारोत्तोलन एवं हैंडबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागी खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे तथा जोनल स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं को तैयार करने का अवसर प्राप्त करेंगे।तत्पश्चात उनका चयन राष्ट्रीय स्तर के खेलों के लिए किया जाएगा। समारोह में विद्यालय परिवार, विभिन्न डीएवी.विद्यालयों के शिक्षक, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने आयोजन को सफल एवं प्रेरणादायी बना दिया।
जवाहर नवोदय विद्यालय-2 में अभिभावक गोष्ठी, अभिभावकों ने उठाए गंभीर सवालप्राचार्य की लापरवाही खुलकर आई सामने,विद्यालय में अव्यवस्था के जनक हैं प्राचार्य:अभिभावक संघएबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद, पलामू। हुसैनाबाद स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय-2 में आयोजित अभिभावक गोष्ठी के दौरान अभिभावकों ने विद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, अनुशासन, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई गई मारपीट और पेयजल संकट का मुद्दा उठा अभिभावकों ने कुछ दिन पहले 8वीं कक्षा के छात्र के साथ हुई मारपीट की घटना का जिक्र किया, जिसकी खबर मीडिया में भी आई थी। इसके साथ ही विद्यालय में पेयजल संकट और अन्य अव्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। अभिभावकों का आरोप था कि इन घटनाओं के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है। प्रबंधन के जवाब से असंतुष्ट अभिभावक बैठक में अभिभावकों ने आरोप लगाया कि उनके सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अधिकांश प्रश्नों पर गोलमोल जवाब दिए गए। अभिभावकों ने कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में स्थिति और खराब हो सकती है।गुणवत्ता और छात्र सुरक्षा पर दिया जोरअभिभावकों ने मांग की कि विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित शैक्षणिक गतिविधियां, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि नवोदय विद्यालय की पहचान सिर्फ परीक्षा परिणामों से नहीं, बल्कि सुरक्षित परिसर और अनुशासित माहौल से होती है।टीसी लेकर छात्रों के जाने पर जताई चिंता कुछ अभिभावकों ने 10वीं के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के टीसी लेकर जाने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि इसके कारणों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि छात्रों का विद्यालय पर विश्वास बना रहे। उच्चस्तरीय जांच की मांगबैठक के अंत में अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन समिति, नवोदय विद्यालय समिति और विभागीय अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने शिक्षा, सुरक्षा, पेयजल, छात्रावास और अन्य सुविधाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की अपील की। अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं, बल्कि छात्रों के हित में विद्यालय की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
छात्रों के संघर्ष की जीत : आजसू एवं अभ्यर्थी छात्र आंदोलन के दबाव में जेपीएससी ने संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) परीक्षा स्थगित की : ओम वर्माटीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को स्थगित किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह छात्र हित में आजसू द्वारा किए गए लगातार आंदोलन, संघर्ष और दबाव का परिणाम है। श्री ओम वर्मा ने कहा कि आजसू शुरू से ही परीक्षा संचालन में सामने आई अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं को गंभीरता से उठाती रही है। संगठन ने लगातार जेपीएससी अध्यक्ष एवं माननीय मुख्यमंत्री से परीक्षा रद्द करने तथा पूरे प्रकरण की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जिसका परिमाण है कि कल रात्रि में JPSC के अध्यक्ष का इस्तीफा एवं आज आयोग द्वारा परीक्षा स्थगित करने का निर्णय इस बात का प्रमाण है कि छात्रों की आशंकाएं निराधार नहीं थीं और उनकी आवाज़ को अंततः स्वीकार करना पड़ा।उन्होंने कहा कि आजसू का संघर्ष केवल परीक्षा स्थगित कराने तक सीमित नहीं है। संगठन की स्पष्ट मांग है कि जिन परिस्थितियों में यह स्थिति उत्पन्न हुई, उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि जब तक परीक्षा पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप आयोजित नहीं होती तथा पूरे मामले की सीबीआई जांच की घोषणा नहीं की जाती, तब तक आजसू का लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।उन्होंने झारखंड के सभी छात्र-युवाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास, एकजुटता और संघर्ष की बदौलत यह महत्वपूर्ण सफलता मिली है। आजसू आगे भी हर छात्र के अधिकार, सम्मान और न्याय के लिए मजबूती से खड़ी रहेगी। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
श्री डोरंडा बालिका उच्च विद्यालय में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजनटीम एबीएन, रांची। श्री डोरंडा बालिका उच्च विद्यालय में वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शैक्षणिक सत्र 2025-26 की मैट्रिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया। छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती आरती झा के स्वागत भाषण से हुआ। विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के सचिव घेवर चंद नाहटा ने छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समिति द्वारा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को नगद पुरस्कार प्रदान किए गए। श्री सुभाष चंद्र बोथरा द्वारा सभी सफल छात्राओं को स्मृति-चिह्न, मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र तथा पूनम चंद भंसाली द्वारा 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। अंग्रेजी विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्रा को मीनू दास गुप्ता स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत नगद राशि प्रदान की गयी। वहीं मध्य विद्यालय के शिक्षक अविनाश कुमार द्वारा गणित विषय में पूर्णांक (100 अंक) प्राप्त करने वाली दोनों छात्राओं को 2,500-2,500 की नगद पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।समारोह में विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद बोथरा, सचिव घेवर चंद नाहटा, उपाध्यक्ष संपत लाल रामपुरिया, सुनील जी तिवारी, समिति के सदस्य एसी विजय लाल जैन, सुरेशचंद्र बोथरा अमर चंद बेगानी, अजय जैन, प्रकाश चंद नाहाटा विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका उपमा पाल, सुरेश प्रसाद, धनंजय कुमार सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति, पूर्व शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक, शिक्षक-शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन एल्मलेन ज्योति तुटी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मध्य विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पारमिता सामल ने प्रस्तुत किया। उक्त जानकारी सचिव घेवर चंद नाहटा ने दी।
बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी, मेसरा ने मनाया 72वां स्थापना दिवस; एनवीआईडीआईए पावर्ड सेंटर आॅफ एक्सीलेंस की घोषणा की नया सेंटर आॅफ एक्सीलेन्स एडवांस्ड कम्प्यूटिंग, एआई रीसर्च और पूर्वी भारत से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भावी प्रतिभा को बनायेगा मजबूत टीम एबीएन, रांची। बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी, मेसरा ने अपना 72वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर 1955 से चली आ रही अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, इनोवेशन और राष्ट्र-निर्माण की विरासत का जश्न मनाया गया। इस कार्यक्रम में संस्थान के लीडरों, पूर्व छात्रों, फैकल्टी सदस्यों, छात्रों और विशेष अतिथियों ने हिस्सा लिया तथा बीआईटी मेसरा की यात्रा और भारत में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और एप्लाइड साइंसेज की शिक्षा को आकार देने में इसकी भूमिका पर विचार-विमर्श किया। स्थापना दिवस समारोह में झारखंड के माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, उनके साथ आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रो. एस. करमलकर और टेगा इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मदन मोहनका माननीय अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। स्थापना दिवस पर बीआईटी मेसरा ने संस्थान की एडवांस्ड कंप्यूटिंग और रीसर्च क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एनवीआईडीआईए -पावर्ड सेंटर आॅफ एक्सीलेंस की घोषणा की। यह सेंटर हाई-परफॉर्मेंस जीपीयू-बेस्ड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करायेगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, वीएलएसआई, ड्रग डिस्कवरी, प्रेसिजन एग्रीकल्चर, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रशिक्षण और उद्योग जगत के साथ सहयोग को बढ़ावा देगा। यह घोषणा भविष्य की तैयारी को लेकर बीआईटी मेसरा के बड़े एजेंडा को दर्शाती है। इसका उद्देश्य रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत बनाना, अकादमिक एवं उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना तथा छात्रों एवं शोधकर्ताओं को आधुनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में मिलने वाले मौकों के लिए तैयार करना है। सेंटर आॅफ एक्सीलेंस में एनवीआईडीआईए बी200 जीपीयू से पावर्ड आठ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम होंगे। इसे पब्लिक आईपी-बेस्ड एक्सेस के जरिए अधिकृत यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जायेगा, जिससे फैकल्टी, शोधकर्ताओं, छात्रों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के पार्टनर्स की अधिक से अधिक भागीदारी को सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह पहल इंडिया एआई मिशन और नेशनल सेमीकंडक्टर मिशन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है, और बीआईटीमेसरा को उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल करती है जो एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर रेडीनेस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उभरती प्रतिभा के विकास में योगदान दे रहे हैं।यह पहल झारखंड और पूर्वी भारत में टेक्नोलॉजी और रीसर्च इकोसिस्टम को भी मजबूत बनाती है, तथा पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से आगे बढ़कर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है। मौके पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा, बीआईटी मेसरा की अकादमिक उत्कृष्टता और इनोवेशन की विरासत ने भारत की तकनीकी प्रगति में अहम योगदान दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में सेंटर आॅफ एक्सीलेंस की स्थापना से झारखंड और पूरे भारत में छात्रों, शोधकतार्ओं और उद्योग जगत के लिए लर्निंग के नए अवसर उत्पन्न होंगे। यह पहल भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा के विकास में बीआईटी मेसरा की भूमिका को और मजबूत करेगी। बीआई मेसरा के चांसलर सीके बिरला ने कहा, बीआईटी मेसरा की स्थापना ऐसा संस्थान बनाने के उद्देश्य से की गयी थी, जो ज्ञान, अनुशासन और इनोवेशन के जरिए समाज की सेवा करे। पिछले सात दशकों में, संस्थान ने भारत के इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। आज हम अपना 72वां स्थापना दिवस मना रहे हैं, हम संस्थान के विकास के अगले चरण की ओर निरंतर अग्रसर हैं। एनवीआईडीआईए पावर्ड सेंटर आॅफ एक्सीलेंस हमारी रीसर्च क्षमताओं को मजबूत करने तथा हमारे छात्रों व फैकल्टी को इन क्षेत्रों में सार्थक योगदान देने हेतु तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम है, जो उद्योग और समाज के भविष्य को तय करेंगे। बीआईटी मेसरा के वाइस चांसलर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा, एनवीआईडीआईए -पावर्ड सेंटर आॅफ एक्सीलेंस के बनने से एडवांस्ड रीसर्च और ट्रेनिंग के क्षेत्रों में हमारी क्षमता काफी बढ़ जायेगी, जहां हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की जरूरत होती है। यह इंजीनियरिंग, साइंस और एप्लाइड रिसर्च जैसे विषयों में तालमेल बनाएयेगा, साथ ही उद्योग जगत, स्टार्टअप्स एवं राष्ट्रीय मिशनों के साथ सहयोग को भी बढ़ावा देगा। हम ऐसा साझा टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं जिससे छात्रों, फैकल्टी, शोधकर्ताओं और बड़े पैमाने पर इनोवेशन इकोसिस्टम को लाभ हो। स्थापना दिवस के जश्न के तहत बीआईटी मेसरा ने एकेडमिक, रिसर्च, इंडस्ट्री, टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप और समाज में योगदान देने वाले अध्यापकों एवं पूर्व छात्रों को को सम्मानित किया। डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवार्ड्स 2026 मरणोपरांत प्रो. जीबी पंत (स्पेस इंजीनियरिंग और रॉकेट्री विभाग के संस्थापक), प्रो. उत्पल बाउल (मैनेजमेंट विभाग) और प्रो. बी.एन. दास (इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग) को प्रदान किये गये। डिस्टिंग्विश्ड एलुमनाई अवार्ड्स 2026 विभिन्न श्रेणियों में दिये गये। लीडरशिप इन कॉर्पोरेट वर्ल्ड, इंडस्ट्री, एकेडेमिया और रिसर्च इंस्टीट्यूशन्स कैटेगरी में अश्विनी कुमार तिवारी (बीई, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, 1989 बैच), राजेश शर्मा (बीई, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग, 1991 बैच) और विक्रम कुमार (बीई, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग, 1988 बैच) को सम्मानित किया गया। कॉन्ट्रीब्यूशन इन इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप कैटेगरी में डॉ अरूप रॉय चौधरी (बीई, सिविल, 1979 बैच) और हसमुख रंजन (बीई, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, 1990 बैच) को पुरस्कार दिये गये। एक्सीलेन्स इन टीचिंग एंड रीसर्च इन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कैटेगरी में डॉ. चंद्र प्रकाश (बीई इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, 1988 बैच) को पुरस्कृत किया गया। सर्विस टू सोसाइटी इन इंडिया एंड अबरॉड कैटेगरी (जिसमें अपने शिक्षण संस्थान को सहयोग देना भी शामिल है) में, 1996 बैच के इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (बीई) के श्री रवींद्र कुमार जैन को पुरस्कार दिया गया। एक्सीलेन्स इन टीचिंग एंड रीसर्च इन इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कैटेगरी में यंग एल्युमनस अवॉर्ड 2026- डॉ. रोमित मौलिक (बीई मैकेनिकल इंजीनियरिंग, 2012 बैच) और डॉ. अनामित्रा पाल (बीई इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, 2008 बैच) को दिया गया। कॉन्ट्रीब्यूशन टू इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप कैटेगरी में डिस्टिंग्विश्ड एल्युमना अवार्ड 2026- मिस स्मृति देसाई (बीई कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, 1988 बैच) और मिस शशि ओबिलिसेट्टी (बीई इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, 1990 बैच) को दिया गया। 15 जुलाई 1955 में स्थापित, बीआईटी मेसरा इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर, फार्मेसी और एप्लाइड साइंसेज के क्षेत्र में भारत के मुख्य संस्थानों में से एक बन गया है। पिछले वर्षों में, संस्थान ने एक मजबूत एकेडमिक और रिसर्च आधार तैयार किया है, जिसे पूर्व छात्रों के व्यापक नेटवर्क और इनोवेशन व सामाजिक प्रभाव पर लगातार ध्यान देने से मजबूती मिली है। 72वां स्थापना दिवस इस विरासत का जश्न मनाने और भविष्य पर केंद्रित शिक्षा, रीसर्च में उत्कृष्टता और टेक्नोलॉजी-आधारित विकास के प्रति बीआईटी मेसरा की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में नयी क्रांति की शुररुआत : डॉ. इरफान अंसारी टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में एमबीबीएस की सीटों को बढ़ाकर 250 करने के प्रस्ताव को नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही चालू शैक्षणिक सत्र से रिम्स में 250 छात्रों का नामांकन किया जायेगा। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग रिम्स सहित राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस एवं पीजी सीटों में बढ़ोतरी के लिए लगातार प्रयासरत रहा है। विभाग की ओर से केंद्र सरकार एवं एनएमसी को आवश्यक प्रस्ताव, अनुपालन रिपोर्ट तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराये गये थे। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बढ़ी हुई सीटों के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, हॉस्टल, क्लासरूम, प्रयोगशालाओं एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की विस्तृत समीक्षा की गयी थी। इसी क्रम में प्रथम चरण में एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 की गयी तथा दूसरे चरण में रिम्स, रांची में सीटों की संख्या 180 से बढ़ाकर 250 कर दी गयी है। भविष्य में राज्य के अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में भी एमबीबीएस एवं पीजी सीटों में वृद्धि की दिशा में प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह झारखंड के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत है। उन्होंने कहा, हम जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रहे हैं और आज उसका सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। रिम्स सहित पूरे स्वास्थ्य तंत्र में जो भी कमियां थीं, उन्हें दूर करने की दिशा में तेजी से कार्य किया गया है। आज व्यवस्थाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। हमारी पूरी टीम समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और आने वाले समय में रिम्स एक नये स्वरूप में पूरे देश के सामने उभरेगा। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य झारखंड के विद्यार्थियों को राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मेडिकल सीटों में वृद्धि केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है।बल्कि इसके साथ-साथ राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना, फैकल्टी, आधुनिक उपकरण, प्रयोगशालाओं, छात्रावास एवं अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में राज्य के अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में भी सीटों में वृद्धि की जाएगी, जिससे झारखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी। रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ. डी. के. सिन्हा ने एनएमसी की मंजूरी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह रिम्स और पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस सीटों में वृद्धि मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री तथा स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के सतत मार्गदर्शन, सहयोग एवं समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रिम्स प्रशासन एनएमसी के सभी मानकों का पालन करते हुए विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एमजीएम और रिम्स में सीटों की वृद्धि से झारखंड के विद्यार्थियों को राज्य में ही मेडिकल शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही भविष्य में राज्य को अधिक संख्या में प्रशिक्षित चिकित्सक मिलेंगे, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनेंगी।
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