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लद्दाख में सिमडेगा का लाल शहीद
Published / 2025-03-23 20:59:34
लद्दाख में सिमडेगा का लाल शहीद

पैतृक गांव में नम आंखों से दी गई अंतिम सलामीएबीएन न्यूज नेटवर्क, सिमडेगा। लद्दाख में लैंड स्लाइड की चपेट में आकर सिमडेगा के वीर सपूत हवलदार किशोर बाड़ा शहीद हो गए। आज सेना द्वारा हवलदार किशोर बाड़ा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव ननेसेरा तुरतुरी पानी लाया गया। उनका पार्थिव शरीर पहुंचते ही पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया। सैकड़ों लोग नम आंखों से उन्हें देखने उनके गांव पहुंचे।दरअसल, सिमडेगा के ननेसेरा गांव निवासी किशोर बाड़ा सेना की 699 टाट्रा बटालियन में हवलदार के पद पर लद्दाख में तैनात थे। 20 मार्च को लद्दाख में वाहन से जाते समय किशोर बाड़ा और उनके एक साथी लैंड स्लाइड की चपेट में आ गए। जिससे किशोर और उनके दूसरे साथी की मौत हो गई। रविवार को रांची मिलिट्री स्टेशन की टुकड़ी ने शहीद किशोर बाड़ा को तिरंगे में लपेटकर उनके पैतृक गांव ननेसेरा पहुंचाया।किशोर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही हर तरफ चीख पुकार मच गई। गांव के लाल की एक झलक पाने के लिए सैकड़ों लोग उमड़ पड़े। पैतृक गांव में धार्मिक सामूहिक समारोह के बाद शहीद जवान को रांची मिलिट्री स्टेशन के जवानों ने अंतिम सलामी दी। शहीद किशोर बाड़ा बिना मां के बड़े हुए।किशोर बाड़ा तीन बड़ी और एक छोटी बहनों के बीच इकलौते भाई थे। वर्ष 2000 में किशोर की शादी संहिता मिंज से हुई थी। शहीद जवान किशोर अपने पीछे पत्नी संहिता मिंज और तीन बेटियों अनीशा बाड़ा, एंजल बाड़ा और एंजेलिना बाड़ा को छोड़ गए हैं। अंतिम संस्कार से पहले तीनों बेटियों ने अपने पिता को आखिरी सलामी दी।

अखंड ज्योत, छप्पन भोग व सवामणि भोग के संग श्री हनुमान मंडल ,रांची का 47 वां वार्षिक महोत्सव सम्पन्न
Published / 2025-03-23 20:44:00
अखंड ज्योत, छप्पन भोग व सवामणि भोग के संग श्री हनुमान मंडल ,रांची का 47 वां वार्षिक महोत्सव सम्पन्न

*प्रेस प्रकाशनार्थ*                      23/3/2025=======================प्रातः 7:00 बजे महाराजा अग्रसेन भवन के सभागार में गणेश पूजन के साथ वार्षिक उत्सव प्रारंभभजन सागर पुस्तिका का विमोचन रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के निवर्तमान अध्यक्ष सुरेश चंद अग्रवाल द्वारा किया गया । इस भजन पुस्तिका में भजनों के नए कलेक्शन मौजूद है। भजन पुस्तिका के संपादक रमन बगड़िया है।रांची की धार्मिक संस्था श्री हनुमान मंडल ,रांची द्वारा रविवार को महाराजा अग्रसेन भवन के सभागार में 47 वा वार्षिक महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया ।एक दिवसीय महोत्सव में प्रातः 7:00 बजे नवल टिबड़ेवाल ने सपत्नी गणेश पूजन कर बालाजी की अखण्ड ज्योत जगाई ।महोत्सव स्थल पर प्रातः 8:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक रांची के सुप्रसिद्ध सुंदरकांड वाचक सुरेश बजाज के सानिध्य में 500 से भी अधिक श्रद्धालु महिलाओ सहित पुरषो के द्वारा भक्तों के द्वारा सामूहिक संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन सम्पन्न हुआ।प्रातः 9 बजे से श्री बालाजी महाराज को  छप्पन भोग व सवामणि का भोग श्रद्धालु भक्तों के द्वारा लगाया गया।महोत्सव स्थल पर श्रीबालाजी महाराज का दिब्य व भव्य दरबार  भगवान के सुंदर नयनाभिराम झांकी के दर्शन भक्तगनो ने किया। दोपहर 1:00 बजे से स्थानीय  धार्मिक संस्था  श्री श्याम मंडल ,श्री श्याम परिवार के सदस्यों द्वारा भजनो की अमृत वर्षा की गई।इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन गायिका राउलकेला की स्वर्णरेखा संग जमशेदपुर की प्रीति शर्मा व पाखी शर्मा के द्वारा भजनों की गंगा प्रवाह की गयी । राजस्थान के सूरजगढ़ से हमारे बीच महोत्सव में भजनों के आमंत्रित कलाकार संजय सेन ने अपने भेजनो से महोत्सव स्थल बालाजी मय कर दिया।भेजनो के बोल संजय सेन ने भजनो से सभी को झूमा दियाभजन मुरली वाले आजा तेरी याद सताएतेरा ये भरोसा कही टूट नही जावेजाने वाले तेरी याद सताएसवारियों बैठो है जो लेनो है सो मांग लोरात्रि 9:00 बजे तक भव्य संकीर्तन के द्वारा उत्सव में शामिल श्रद्धालु भक्तगण के बीच  श्री बालाजी महाराज के भजनो की अमृत वर्षा की गयी।दोपहर 1:00 बजे से सवामणि के भोग में हजारों लोगों ने बालाजी का प्रसाद प्राप्त किया।महोत्सव स्थल पर भगवान की नयनाभिराम झांकी के अद्भुत दर्शन संग अखंड ज्योत भी श्रद्धालु भक्तों ने आशीर्वाद के रूप में लिया । रात्रि 9:00 बजे  आरती के साथ लोगों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया। महोत्सव का समापन किया गया।महोत्सव में अध्यक्ष सज्जन पाड़िया ,मंत्री श्रवण अग्रवाल, कोषाध्यक्ष शिव भावसिंहका,महोत्सव संयोजक प्रवीण मोदी, प्रेमचंद श्रीवास्तव ,हनुमान बेड़िया,नरेंद्र डीडवानिया,प्रशांत सरावगी, नारायण अग्रवाल,बाल किशन जी,महेश,विजय खोवाल, प्रकाश ढेलिया, विष्णु सोनी ,रवि जोशी ,विभोर डागा, रमन बगड़िया, अरुण बाजोरिया, प्रशांत सरावगी, नितिन भावसिंहका ,प्रमोद सारस्वत सहित काफी संख्या में लोगो ने सहयोग दिया।

श्री राधा- कृष्ण सेवा धाम मंदिर में हुआ 199 वाँ अन्नपूर्णा महाप्रसाद का आयोजन
Published / 2025-03-23 19:50:37
श्री राधा- कृष्ण सेवा धाम मंदिर में हुआ 199 वाँ अन्नपूर्णा महाप्रसाद का आयोजन

2500 से भी अधिक श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहणभजन- कीर्तन में खूब झूमे श्रद्धालुटीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में 199 वाँ श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया है। ट्रस्ट ने समाज सेवी वरिष्ठ सदस्य चुक्की देवी गाडोदिया उनके पौत्र राहुल गाडोदिया विभोर गाडोदिया एवं उनके परिवार के सौजन्य से तथा श्री कृष्ण प्रणामी के सदस्यों के द्वारा अन्नपूर्णा ‌महाप्रसाद भंडारे में आज पूड़ी- आलू चना टमाटर मिश्रित सब्जी, केसरिया खीर, वेजिटेबल पुलाव एवं केसरिया जलेबी  का वितरण किया गया। अन्नपूर्णा महाप्रसाद 2500 से भी अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया। अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विधिवत भोग पुजारी अरविंद पांडे द्वारा लगाया गया। तत्पश्चात भव्य भजन संकीर्तन का संजीवनी सखी ग्रुप के द्वारा आयोजन हुआ। भजन गायन में संजीवनी सखी ग्रुप की संस्थापिका  पूनम बाला, रागिनी जयसवाल, शिवानी सिंह ढोलक बजाने मे धर्मेन्द्र  राय एवं निर्मल जालान ने अपने मनमोहक सुमधुर भजनों की अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया। तथा पूरे वातावरण को कृष्णमय एवं भक्तिमय बना दिया। गुरु महाराज की जन सेवा को समर्पित जीवन के स्वर्णिम 53 वर्ष पूरे होने उपलक्ष्य में एवं परमहंस डॉ संत सदानंद महाराज के शिष्यों ने आज ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल उपाध्यक्ष निर्मल जालान एवं राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल की देखरेख में जरूरतमंदों अभावग्रस्त ग्रामीणों एवं मंदिर के आसपास रहने वाले श्रद्धालुओं को अन्नापूर्णा भंडारे का भोजन कराकरनसेवा की गई। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संस्था द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर मे आज 199 वें अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन था।आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। तथा भगवान श्री राधा कृष्ण मंदिर मे लगभग 5 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस अवसर पर- डुंगरमल अग्रवाल, निर्मल जालान, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, आलोक तुलस्यान, सुरेश अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, नन्द किशोर चौधरी, निर्मल छावनिका, शिव भगवान अग्रवाल चिरंजीलाल खण्डेलवाल, महेश पोद्दार, अंजनी अग्रवाल, मधु जाजोदिया, विजय अग्रवाल, विष्णु सोनी,पवन पोद्दार, विधा देवी अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, शोभा जालान, प्रमिला पुरोहित, सरोज पोद्दार, ज्ञान प्रकाश शर्मा, परमेश्वर साहू, धीरज कुमार गुप्ता, महेश वर्मा, चन्द्रदीप साहु, हरीश कुमार, अशोक ठाकुर सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे।

हुटुप गौशाला धाम में श्रीराम कथा सातवें दिन शबरी प्रसंग पर मार्मिक कथा
Published / 2025-03-23 19:44:27
हुटुप गौशाला धाम में श्रीराम कथा सातवें दिन शबरी प्रसंग पर मार्मिक कथा

सच्ची भक्ति और निष्ठा का कोई मूल्य नहीं, न ही जात-पात का कोई भेद : किशोरी जीटीम एबीएन, रांची। हुटुप गौशाला धाम में चल रही नौ दिवसीय श्री राम कथा के सातवें दिन प्रसिद्ध कथावाचक सुश्री संगीता किशोरी ने शबरी प्रसंग पर एक अत्यंत मार्मिक और सुंदर कथा का वाचन किया। इस प्रसंग ने सभी श्रद्धालुओं के दिलों में श्रीराम के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति का संचार किया। शबरी की कथा, जो भगवान श्रीराम के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, ने सभी को न केवल धार्मिक दृष्टि से प्रेरित किया, बल्कि यह जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य और संस्कारों की भी सीख दी। कथा के दौरान संगीता किशोरी ने शबरी के जीवन के संघर्ष, उनकी साधना और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अपार श्रद्धा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। शबरी, जो एक वनवासी महिला थीं, ने वर्षों तक बिनती की थी कि भगवान श्रीराम उनके घर आएं। उनके जीवन में एक दृढ़ विश्वास था कि जो राम के दरबार में सच दिल से भक्ति करता है, वह अवश्य श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त करता है। अपनी कठोर साधना और भक्ति से शबरी ने भगवान श्रीराम के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को साबित किया। कथा के दौरान यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय रही कि श्रीराम ने शबरी के साथ जो प्रेम और स्नेह व्यक्त किया, वह समाज में व्याप्त जातिवाद और भेदभाव से ऊपर था। भगवान श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर भी आनंदपूर्वक खाए और यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति और निष्ठा का कोई मूल्य नहीं, न ही जात-पात का कोई भेद। शबरी के प्रति श्रीराम का यह आचरण सभी के लिए एक अमूल्य शिक्षा है कि ईश्वर के दरबार में सभी समान हैं। इस सुंदर कथा के साथ ही आज भंडारा महाप्रसाद का आयोजन भी किया गया, जिसमें 2500 से भी अधिक श्रद्धाल शामिल हुए। महाप्रसाद में भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान करते हुए सभी भक्तों के बीच शाम 5 बजे तक प्रसाद वितरित किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देने वाला भी था। कुल मिलाकर इस कथा ने सभी भक्तों को न केवल श्रीराम के जीवन के आदर्शों से परिचित कराया, बल्कि यह भी समझाया कि वास्तविक भक्ति न किसी संपत्ति से जुड़ी होती है, न किसी जाति से। शबरी के जीवन से प्रेरित होकर हमें भी अपनी भक्ति और कर्म में सच्चाई और समर्पण को सर्वोपरि रखना चाहिए। आज कथा में भारी भीड़ उमड़ी।कार्यक्रम की मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक वासुदेव भाला, मुकेश काबरा, पुनीत पोद्दार, अजय मारू, महावीर सोमानी, बिल्लू सोमानी, मुरारी अग्रवाल, नारायण चौधरी, प्रेम प्रकाश अग्रवाल, शत्रुघ्न गुप्ता, प्रेम चौधरी, प्रकाश काबरा, विष्णु जालान, भगवती प्रसाद, सुरेश शारदा, इत्यादि के अलावे हजारों ग्रामीणों ने कथा का श्रवण किया। 24 मार्च को आठवें दिन श्री राम कथा में श्री राम राज्याभिषेक पर प्रसंग होगा।

रांची सिटीजन फोरम की बैठक वार्ड 20 में संपन्न, 10 अप्रैल के बाद होगा सभी 53 वार्ड का दौरा
Published / 2025-03-23 19:38:46
रांची सिटीजन फोरम की बैठक वार्ड 20 में संपन्न, 10 अप्रैल के बाद होगा सभी 53 वार्ड का दौरा

अब तक रांची सिटीजन फोरम से जुड़े 12778 सदस्यरांची सिटीजन फोरम का काम है रांची नगर निगम और इसके कुल 53 वार्ड अंतर्गत व्याप्त विभिन्न समस्याओं पर चर्चासंवाद और जागरूकता का काम करनाटीम एबीएन, रांची। रांची के वार्ड संख्या 20 अंतर्गत लालजी हिरजी रोड़ स्थित मानसरोवर बिल्डिंग में रांची सिटीजन फोरम के वरीय पदाधिकारियों की बैठक अध्यक्ष दीपेश कुमार निराला की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें अब तक फोरम से जुड़े 12778 सदस्यों की पुष्टि हुई।सचिव रेणुका तिवारी ने उपस्थित पदाधिकारी का स्वागत करते हुए बताया कि रांची नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न समस्याएं जैसे जलजमाव की समस्या, स्ट्रीट लाइट की समस्या, टूटे-फूटे सड़क, कूड़े कचरे का नियमित सफाई न होना, गंदी और भरी हुई नालियां, सड़क जाम, जैसे दर्जनों समस्याओं हैं, जिनसे रांचीवासी प्रतिदिन जूझ रहे हैं।उपाध्यक्ष उमाशंकर सिंह ने उक्त समस्याओं के समाधान हेतु हल निकालने पर चर्चा की और इसके मद्देनजर वार्ड का दौरा करने का सुझाव दिया। संयुक्त सचिव हरीश नागपाल ने रांची नगर निगम और नगर विकास विभाग के साथ पत्राचार करने की बात कही। संयुक्त सचिव सुशील शर्मा जी ने लालजी हिरजी रोड की बुरी स्थिति से पदाधिकारियों को अवगत कराया और कहा कि अपर बाजार के कई गलियों की सड़क क्षतिग्रस्त है, जिसका मरम्मत करवाया जाना बहुत जरूरी है। उक्त आलोक में अध्यक्ष दीपेश कुमार निराला ने कहा कि रांची सिटीजन फोरम 10 अप्रैल के बाद सभी वार्ड का दौरा करेगी और वहां के लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं से रू-ब-रू होगी। मृदुला संतोष ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन का मनाया गया 140वीं वर्षगांठ
Published / 2025-03-23 19:35:12
छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन का मनाया गया 140वीं वर्षगांठ

एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमगाईं, रांची। जमगाईं ग्राम में स्थित छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स येo सo के आगमन के स्मरण में संस्थापित तीर्थस्थल पर ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स येo सo के आगमन की 140वीं वर्षगांठ मनाया गया। इस उपलक्ष्य पर रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया।आज रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के हुलहुंडू पल्ली के अंतर्गत जमगाईं में स्थित तीर्थस्थल पर छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन की 140वीं वर्षगांठ मनाई गई। इस अवसर पर हज़ारों विश्वासी तीर्थयात्री के रूप में आए एवं प्रार्थना समारोह में शामिल हुए। तीर्थस्थल पर तीर्थयात्रियों के लिए पापस्वीकार संस्कार का भी आयोजन रहा जिसके माध्यम से उन्होंने आध्यात्मिक लाभ उठाया एवं अपने पापों की क्षमा के लिए प्रार्थना किया।महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने इस अवसर पर समारोही मिस्सा बलिदान की अगुवाई की। उन्होंने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने धर्मोपदेश में कहा कि छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स ने एक मिशनरी बन कर शिक्षा, न्याय एवं विश्वास का आग जलाया और आग जलती रहे का नारा दिया। उसी आग को हमारे जीवन में जलाए रखने की जिम्मेदारी हम प्रत्येक की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके आगमन से ही हमारे आदिवासियों की ज़मीन बची रही, हम शिक्षित हो पाए हैं और हम अपना अस्तित्व संभाल कर रख पाने में सक्षम हुए हैं। दो दिनों से बारिश होने के बावजूद हज़ारों की संख्या में ख्रीस्त विश्वासी इस समारोह में शामिल हुए। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने लोगों के विश्वास एवं उत्साह की सराहना की। जमगाईं एवं हुलहुंडू पल्ली के सभी लोगों को उनके अथक प्रयास एवं कार्य के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन के 140वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित तीर्थयात्रा एवं समारोही  मिस्सा बलिदान में  महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद, रांची येसु धर्मसंघ के प्रोविंशियल फाo अजीत कुमार खेस्स , टीo ओo आरo रांची के प्रोविंशियल फाo मनोज वेंगातनम, हुलहुंडू के पल्ली पुरोहित फाo विंसेंट मिंज, तीर्थस्थल के निर्देशक फ़ाo एडविन मिंज, 55 पुरोहितगण, धर्मबहनें एवं हज़ारों की संख्या में ख्रीस्तीय विश्वासी उपस्थित रहे।छोटानागपुर के प्रेरित ईश-सेवक फा. कोन्सटन्ट लीवन्स की संक्षिप्त जीवनी (1856-1893)यूरोप महादेश के बेल्जियम में पश्चिमी फ्लैंडर्स प्रदेश में मोर्सलेड नामक एक गाँव है। इसी गाँव में जोन लीवन्स और बारबारा डेपूयित नामक एक धर्मी दम्पति रहते थे। यह एक साधारण परिवार था और खेती-बारी द्वारा उनकी जीविका चलती थी। इसी परिवार में सातवीं संतान के रूप में फादर कोन्सटन्ट लीवन्स का जन्म 11 अप्रैल 1856 ई. में हुआ। बाद में इस परिवार में और चार संतान हुए। इस तरह माता-पिता, पाँच पुत्र और छः पुत्रियों से मिलकर 11 सदस्यों का एक बड़ा परिवार बना। इनका परिवार गाँव के अन्य परिवारों के लिए आदर्श था क्योंकि वे बड़ा परिवार होने पर भी बड़े मेल-प्रेम से एक दूसरे की परवाह करते हुए श्रद्धा एवं प्रेम से रहते थे। इनके परिवार में रोज दिन शाम के समय एक-साथ पारिवारिक प्रार्थना होती थी। इसी का फल रहा कि आगे चलकर ईश-सेवक फादर कोन्सटन्ट लीवन्स, महान मिशनरी छोटानागपुर के प्रेरित कहलाए। जब फादर कोन्सटन्ट लीवन्स सात साल के थे उस समय पल्ली के निकट सिस्टरों के विद्यालय से उनकी प्रारंभिक पढ़ाई शुरू हुई। 11 साल की उम्र में अच्छी तैयारी करके इन्होंने पहला परमप्रसाद ग्रहण किया। इसी वर्ष उनकी माँ की तबीयत बिगड़ी और उनका देहांत हो गया। उसकी माँ उसके लिए पूरी दुनिया थी इसलिए उसकी मृत्यु लीवन्स को पूरी तरह से झकझोर दिया। वह माता के वियोग में विद्यालय जाना बन्द कर दिया। वह घर में रहकर घर और खेतों के कामों में मदद करने लगा। पशुओं को चराना, उन्हें दाना पानी देना और गोशालों की साफ-सफाई करना उनकी निदचर्या बन गई। हर काम वह खुशी से करता था। कोई भी काम उसे बोझ या भारी नहीं लगता था। खुले खेतों में काम करने और पेड़ों की छाया में मवेशियों की देख-रेख करते हुए उन्हें प्रकृति से अद्भुत लगाव हो गया था। इसी कारण अकेले रहने पर भी उन्हें अकेलापन का एहसास नहीं होता था। अवसर मिलने पर वह अपने हम उम्र के बच्चों को उदारतापूर्वक धर्म की शिक्षा दिया करता था। कभी-कभी उन्हें घोड़ों की देखभाल करने का मौका मिला। इसका लाभ लेते हुए वह घुड़सवारी सीखने का प्रयास भी करता था। इसी तरह दो तीन साल बीत गये। ईश्वर की योजना विचित्र होती है। उनकी पल्ली में अम्पे नामक एक नया पल्ली पुरोहित का आगमन हुआ और वहाँ के हर विश्वासी को अपने प्रवचनों से बहुत प्रभावित किया। उन्होंने नवयुवकों को पुरोहित बनने के लिए चुनौती दी। उनके प्रवचन से प्रभावित होकर फादर कोन्सटन्ट लीवन्स के मन में पुरोहित बनने की लालसा जगी। जब यह बात उनके पल्ली के अन्य पुरोहितों तक आयी तो वे बहुत खुश हुए और उन्होंने पढ़ाई फिर से जारी करने की सलाह दी। इतना ही नहीं उनकी पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद की व्यवस्था भी कर दी। इस तरह तीन साल बाद फिर से वह अपनी पढ़ाई शुरू किया। प्रारंभ में उन्हें बहुत दिक्कत हुई, पर पुरोहित बनने की ललक, उनको लगातार लगे रहने के लिए प्रेरित करता रहा। साथ ही वह खूब प्रार्थना करता था। धीरे-धीरे उनकी पढ़ाई-लिखाई में सुधार हुई और कुछ वर्षों के अंतराल वह अपने को इस काबिल कर लिया कि उन्हें कई पुरस्कार भी मिले। वह सेमेनरी गया जहाँ उन्होंने अपनी पुरोहित बनने की पढ़ाई प्रारंभ की। वह एक मिशनरी बनना चाहता था।उन्होंने पाया कि धर्मप्रांतीय बनने से मिशनरी बनने की संभावना बहुत कम थी। अतः मिशनरी बनने के लिए धर्मप्रांतीय पुरोहित को पढ़ाई छोड़कर, येस संधी धर्मसमाज में भर्ती हुआ और पूरी उत्सुकता और समर्पित होकर दो साल के नोभिशियेट की पढ़ाई आसानी से खत्म की। लीवन्स ने प्रार्थना और अच्छे आचरण से अधिकारियों का दिल जीता और यह प्रमाणित किया कि वह मिशनरी बनने का दम रखता है। इस तरह प्रथम मन्नत लेने से पहले ही उनकी काबिलयत और मिशनरी बनने की भावना और उत्साह के कारण, उन्हें भारत के बंगाल मिशन के लिए चुन लिया गया। अतः मन्नत लेने के पश्चात् दूसरे ही दिन उसे भारत देश भेज दिया गया। वह पाँच सप्ताह की लम्बी यात्रा तय कर 2 दिसम्बर 1880 को वह कलकत्ता पहुँचा। एक महीने के बाद वे आसनसोल गये और वहाँ से अपने ईश शास्त्र की पढाई जारी रखी। वहीं उन्होंने हिन्दी सहित कई अन्य भाषाओं का भी अध्ययन किया। 14 जनवरी 1883 को कलकत्ता के आर्चबिशप पी. गथौल्स ये.स. के कर कमलों से उसे परोहित अभिषेक दिया गया और जब तक ईश-शास्त्र की पढाई, पूरी नहीं हई तब तक वह कलकत्ता के संत जेवियर कॉलेज में देश दुनिया के तौर-तरीकों का अनुभव करते हुए अपनी सेवाएँ दीं। बाद में उन्हें छोटानागपुर मिशन पर भेजा गया और यहीं से उनकी असली प्रेरिताई कार्य शुरू हुई।वे 8 मार्च 1885 को गिरीडीह होते हुए डोरंडा आये और अगले ही दिन अर्थात 19 मार्च को वे जमगाई पहुँचे और आठ महीने वे यहाँ रहे। इस दरम्यान उन्होंने अलग-अलग जगहों का भ्रमण किया और लोगों से भेंट-मुलाकात की। वे लोगों की भाषा, संस्कृति और परिस्थिति से अवगत हुए। बाद में मिशन कार्य करने के लिए उन्हें तोरपा एक उपयुक्त जगह लगी और वे वहाँ जाकर मुंडा आदिवासियों के बीच करीब ढाई साल रहे। यहीं से उनहोंने खीस्त के प्रेम और उस पर विश्वास करने की आग जलायी जो बाद में धीरे-धीरे पूरे छोटानागपुर में फैल गई। कई लोग उनके पास आये और अपने दुःख, दर्द और समस्याओं को उनके समक्ष रखे। फादर लीवन्स उन्हें बड़े ध्यान से सुना और अपने विश्वास और ज्ञान के आधार पर उनको सलाह और सुझाव दिये। उनकी सरल बातें और उनके साथ एक अनोखी आत्मीयता का भाव, उन लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। फादर कोन्सटन्ट लीवन्स हर तरह से हर संभव उनकी मदद की। यही वजह थी कि कई लोग स्वेच्छा से बपतिस्मा ग्रहण करने के लिए तैयार हुए और ईसाई धर्म को अपनाये। अपने अधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए 1888 को वे राँची आये और मनरेसा हाउस में रहकर अपने मिशन कार्य को जारी रखे। वे लोहरदगा मिशन के निदेशक बनाये गये और पाँच वर्षों तक इस जिम्मेदारी को उन्होंने बड़ी निपुणता के साथ निभाया। वे नियमित रूप से अपने मिशन क्षेत्रों का दौरा करते रहे। वे अपने सरल व्यवहार और मिलनसारी भाव के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हुए। उनकी बारवे यात्रा की शुरूआत बड़ी नाटकीय और दिलचस्प थी। 1889 ई. को नवाडीह के निकट बिरीं गाँव के कुछ लोग कोर्ट कचहरी के काम से राँची आये थे। कोर्ट परिसर में उनकी भेंट फादर कोन्सटन्ट लीवन्स से हुई। फादर कोन्सटन्ट लीवन्स अपने स्वभाव के अनुसार आत्मीय भाव से उनसे बातचीत की, उनके मुद्दों को अपने संज्ञान में लिया और उनका उचित मार्गदर्शन भी किया। इसका फल यह हुआ कि जो बहुत कठिन मामला था, वह आसानी से सुलझ गया और उन्हें आसानी से जीत मिली। अतः यह बिरों के लोगों को इतना अधिक प्रभावित किया कि वे उन्हें बारवे आने का निमंत्रण दिया। इस तरह उनका बारवे का दौरा हआ। रांची से वे पाँच बार बारवे का यात्रा की पर इन्हीं यात्राओं से उन्होंने सम्पूर्ण बारवे को खीस्त के चरणों में ला दिया। उन्होंने एक अद्भुत व्यवस्था बनाई जिससे लोग बपतिस्मा लेने के लिए तैयार हुए और हजारों की संख्या में विश्वासी खीस्तीय होते गये। यह मिशन आसान नहीं था, पर लोगों की मासूमियत और उत्सुकता, उसे हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। कई बार उनका घोडा जिसका नाम जेनरल था अपनी बहादुरी से उनके विरोधियों और जंगली जानवरों से बचाया। उन्होंने आदिवासियों में दो बड़ी समस्यायें पाई। एक था अंधविश्वास जो बेवजह उन्हें डराती थी और दूसरा जमीनदारों का जुल्म था। फादर लीवन्स ने येस खीस्त को मुक्तिदाता के रूप में देकर उनके अंधविश्वास को दूर किया कानूनी किताबों का ज्ञान देकर और लोगों के हक और अधिकार से उनको अवगत कराकर जमीनदारों के जुल्म से उन्हें मुक्त कराया। उन्होंने उन्हें आध्यात्मिक और शारीरिक उन्नति करने के उपाय बताये। ये दो मदद उन साधारण लोगों के लिए किसी दैवीय मदद से कम नहीं थी। अतः वे बड़ी तत्परता और उत्सुकता से बडी संख्या में बपतिस्मा ग्रहण किये और खीस्तीय बने। जरूर अन्य पुरोहितों का भी इसमें योगदान था पर जो माहौल फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स ने अपने कठिन परिश्रम और अपने आराम और खुशियों का त्याग कर बनाया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। अत्याधिक यात्रा करने, शारीरिक थकावट और सही खान-पान के अभाव के कारण वे क्षय या टी.बी. रोग के शिकार हुए। इसके बावजूद वह काम करते रहे। उन्हें अपना स्वस्थ्य की परवाह नहीं रही। जब इलाज शुरू 4 हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज के लिए वे अपने देश बेल्जियम लौटे। पर वहाँ का बेहतर इलाज भी उनकी नहीं बचा पाया और 7 नवम्बर 1893 ई. को बेल्जियम के लूभेन में मात्र 37 साल की उम्र में उनका देहान्त हो गया। अपने अल्पकालिक जीवक व्यक्तित्व से मात्र सात-आठ साल में ही फादर लीवन्स ने पूरे छोटानागपुर का कायापलट कर दिया। छोटानागपुर में कई मिशनरी आये पर उनमें अगर कोई अधिक साहसी, उत्साही और प्रतिभावन थे तो वह फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स ही थे। यही वजह है कि आज वे छोटानागपुर के प्रेरित कहलाते हैं। आग जलती रहे फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स का आदर्श वावक्य था। इसमें वे येसु खीस्त के प्रेम और खीस्तीय विश्वास में जलते रहने की बात कहे थे। फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स और हमारे पुरखे जो उनके सहयोगी थे उनमें जो जोश, आपसी प्रेम, एकता और खीस्तयता को स्वीकार करने और जीने की जो जज्बा थी वह आज भी हमारे लिए एक मिसाल है। उन्होंने हमें विश्वास का अमूल्य दान दिया। आप माने या न मानें लेकिन इसी विश्वास के कारण आज हम लोगों के जीवन में, रहन-सहन और कई चीजों में बहुत बड़ा बदलाव आया है और हम एक सम्मानित जीवन जीने लायक बन पाये हैं। फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स हमारे बीच एक सुसंगठित समाज की स्थापना करना चाहते थे जो उनका एक बड़ा सपना था। फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स और अपने सहयोगियों से इसे पूरा करने का वे भरसक प्रयास किये। आज हमारे लिए उसी सपने को पूरा करना और उनके माध्यम से मिली ईश्वरीय महती दया, प्रेम और विश्वास को और अधिक जीवन्त एवं क्रियाशील बनाने की जम्मेदारी है। अगर हम ऐसा कर पाते हैं तो यही हमारे द्वारा फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स के लए सबसे बड़ा सम्मान और श्रद्धांजलि होगी। ऐसा करने में ईश्वर हमारी मदद करे और खीस्त की ज्योति हर घर-घर में जले और फैले और हम हर एक जन एक सम्मानित जीवन जी पायें।

लातेहार ने पलामू को 20 रन से हराया
Published / 2025-03-23 18:43:09
लातेहार ने पलामू को 20 रन से हराया

इंटर डिस्ट्रिक्ट सीनियर क्रिकेट टूर्नामेंट प्लेट ग्रुप (रणधीर वर्मा ट्रॉफी)टीम एबीएन, कोडरमा। झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के तत्वावधान में खेले जा रहे हैं इंटर डिस्ट्रिक्ट सीनियर क्रिकेट टूर्नामेंट प्लेट ग्रुप (रणधीर वर्मा ट्रॉफी) के मैच में रविवार को चंदवारा स्थित पुलिस लाइन मैदान में लातेहार और पलामु के बीच मैच खेला गया। लातेहार ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 29 ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर 168 रन बनाए। जिसमें गोल्डी शर्मा ने 46 रन धनंजय कुमार ने 44 रन और श्रवन महली ने 42 रन का योगदान दिया। गेंदबाजी करते हुए पलामू की ओर से अनिकेत में तीन विकेट और सुदीप निखिल विकास और आर्यन ने एक-एक विकेट लिए। बाद में बल्लेबाजी करने उतरी पलामू की टीम 28.01 ओवर में 148 रन ही बना सकी। पलामू की ओर से सौरव कुमार ने 61 रन और स्पर्श राज ने 17 रन का योगदान दिया । गेंदबाजी करते हुए लातेहार की ओर से गोल्डी शर्मा ने 4 विकेट प्रियांशु ने तीन विकेट रामकुमार ने दो विकेट और अमित कुमार ने एक विकेट लिए ।बेहतर खेल के लिए गोल्डी शर्मा को मैन ऑफ द मैच झुमरी तिलैया नगर परिषद के सिटी मैनेजर लेमांशु कुमार के हाथों दिया गया। मौके पर टीआरडीओ विकास कुमार रानू, अंपायर इफ्तिखार आलम, मनोरंजन कांजीलाल स्कोरर गजेंद्र कुमार, शुभम मेहता , अमरजीत सिंह छाबड़ा, दिनेश सिंह , आलोक पांडे ,सुमन कुमार ,सुरेंद्र प्रसाद, सिटी मैनेजर लेमांशु कुमार, दिलीप प्रसाद, क्लोरोफिल स्कूल के डायरेक्टर अजय अग्रवाल, महेश भारती, विशाल कुमार, गांधौरी रजक, अमित जायसवाल ,धर्मेंद्र कौशिक, सोनू खान ,प्रेम यादव ,श्रवण कुमार, नीतीश कुमार सहित अन्य शामिल थे।

शहादत दिवस पर याद किये गये भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव
Published / 2025-03-23 18:40:51
शहादत दिवस पर याद किये गये भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव

टीम एबीएन, कोडरमा। शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 95 वें शहादत दिवस पर डीवाईएफआई, सीटू और किसान सभा के बैनर तले अम्बेडकर पार्क में विचार गोष्ठी आयोजित किया गया। सर्व प्रथम शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया. जहां शहीद भगत सिंह राजगुरु सुखदेव अमर रहे, इन्कलाब जिन्दाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, शहीदों ले लो लाल सलाम आदि जोशीले नारे लगाए जा रहे थे। सीटू के जिला सचिव रमेश प्रजापति की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी को सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान और झारखंड राज्य किसान सभा के संयुक्त सचिव असीम सरकार ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शहादत केवल बलिदान नहीं, विचारों की विरासत होती है।भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का सपना था कि एक ऐसा भारत जहाँ राष्ट्रवाद बाँटने का नहीं, जोड़ने का हो, समाजवाद केवल नारा नहीं, बराबरी की नींव हो, धर्मनिरपेक्षता केवल सहिष्णुता नहीं, सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध हो। आज जिस प्रकार से 300 वर्ष पहले के औरंगजेब के कब्र को उखाड़ने की माहौल पैदा कर सांप्रदायिक जहर बो कर देश में दंगे करवाये जा रहे हैं।यह आम आदमी के मूल मुद्दों से भटकाने की साजिश है। आज देश की सत्ता पर ऐसी सरकार का कब्जा है, जो पूंजीवाद के हित में और सांप्रदायिक और जनविरोधी है। महंगाई की मार से आम जनता कराह रही है, दूसरी तरफ पूंजीपतियों का मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। सरकारी सम्पत्तियों को औने पौने दामों पर चहेते पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है।नई शिक्षा नीति से भारत के बहुसंख्यक गरीब मध्यम वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से दूर हो रहे हैं। नौजवान बेरोजगारी की चक्की में पीसे जा रहे हैं। वक्ताओं ने किसान मजदूरों और छात्र युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि एक नये भारत के निर्माण और शोषण मुक्त समाज की स्थापना के लिए भगत सिंह के रास्ते पर चलते हुए एक नयी क्रांति का आगाज करें। कार्यक्रम में सीटू के महेन्द्र तुरी, फेकुलाल विद्यार्थी, सियाराम, डीवाईएफआई बासुदेव साव, शम्भु कुमार, किसान सभा के बाबूलाल साव, सरयु दास, प्रमोद कुमार, पंकज कुमार, रौशन कुमार, चंदन कुमार, अजय कुमार दास, जितेन्द्र कुमार, पवन कुमार, विक्की कुमार आदि शामिल थे।

पूर्णिमा टॉकीज ग्राउंड में डिजनीलैंड मेला का हुआ शुभारंभ
Published / 2025-03-23 18:38:07
पूर्णिमा टॉकीज ग्राउंड में डिजनीलैंड मेला का हुआ शुभारंभ

हवामहल गेट से डिजनीलैंड मेला का प्रवेशएबीएन न्यूज नेटवर्क, कोडरमा। शहरवासियों को परिवार के साथ मनोरंजन के लिए डिजनीलैंड मेला पूर्णिमा टॉकीज ग्राउंड में लग चुका है। मेला का भव्य शुभारंभ समाजसेवी बीरेंद्र यादव(बीरू) के द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ फीता काट कर किया गया। झुमरी तिलैया वाले को लंबे समय बाद परिवार बच्चों के साथ एंजॉय करने का बेहतर मौका है।शुभारंभ के मौके पर समाजसेवी बीरेंद्र यादव (बीरू) ने कहा कि आज भी भारतीय समाज में मेला मनोरंजन का बड़ा माध्यम है यहां बच्चों के झूलों के साथ घरेलू वस्तुओं की भी खरीदी करने का मौका है। डिजनीलैंड मेला परिवार और आमजन को अपना शुभकामना देते हुए कहा अपना नगर स्वच्छ रखने में लोग सहयोग करें।डिजनीलैंड मेला का मुख्य आकर्षण जो पहली बार चाँद तारा झूला साथ में टोरा टोरा, ब्रेक डांस, टॉय ट्रेन, ड्रैगन, रशियन झूला मिकी माउस, वॉल वंशी किड्स राइट्स है। मेले में गगनचुंबी इमारत ट्रिन टावर, एफिल टावर भी देखने को मिलेगा। मेले में आकर्षक रूप से युवकों के लिए विशेष प्रकार की सेल्फी जोन बनाई गई है। इस मेले में मनोरंजन के साथ-साथ आने वाले त्योहार के लिए जमकर खरीदारी भी दर्शक कर सकेंगे।मेले में मुख्य रूप से राजस्थानी अचार, जयपुरी अचार, चूरनसहारनपुर के फर्नीचर के साथ महिलाओं से संबंधित हर प्रकार के सौंदर्य उपयोगी सामान उपलब्ध है। मौके पर मेला के राजू कुमार ने बताया कि आज के दौर में बच्चों में सामाजिक सांस्कृतिक समझ को विकसित करने के लिए परिवार बच्चों के साथ मेला जरूर देखें जाने चाहिए।डिजनीलैंड मेला के आयोजक महावीर बिजनेस एंड मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक ने यह भी बताया कि हवामहल गेट से प्रवेश करने के साथ ही लोगों में रोमांच भर जायेगा। महिलाओं के लिए ज्वेलरी आइटम, राजस्थानी कंगन मुंबई के फैसी वामल जूते और अन्य जरूरत के समान यहां किफायती दाम पर मिलेंगे। खरीदारी करने के साथ-साथ खानपान की विशेष व्यवस्था की गई है। भारतीय व्यंजन एवं चाइनीज फास्ट फूड के साथ भेलपुरी पाव भाजी, पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, पेस्टीज आदि की बेहतर व्यवस्था की गई है। मेले में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा के साथ-साथ सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की गई है। मेला रोजाना 3 बजे से रात्रि के 10 बजे तक चलेंगे।

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