टीम एबीएन, रांची। वन बंधु परिषद रांची चैप्टर ने 27 नवंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कार्यक्रम भारत के रंग- एकल के संग का मंचन संध्या 6 बजे से आर्यभट्ट सभागार में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के लिए भारत के अलग-अलग राज्यों से चयनित आदिवासी वनवासी जनजातीय कलाकारो को गहन प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है। प्रशिक्षित होने के बाद इन कलाकारों ने यूरोप एवं अमेरिका के 60 से अधिक भिन्न-भिन्न स्थानों में अपनी कला के प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। इस कार्यक्रम को देखकर अनेक अप्रवासी भारतीय राष्ट्र निर्माण एवं देश सेवा की भावना से एकल अभियान के साथ जुड़ गये। रांची के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में देश भक्ति के गीत नाट्यों के साथ-साथ भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव, कंस का वध, कृष्ण सुदामा की मित्रता के प्रसंग का भी मंचन किया जायेगा। उक्त जानकारी वनबन्धु परिषद् रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
लोहरदगा में मिली बड़ी सफलता: एक लाख का इनामी नक्सली राजा हेमंत धराया; लंबे समय से क्षेत्र में दहशत फैला रहा था एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। झारखंड में नक्सल विरोधी विशेष अभियान के तहत लोहरदगा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने भाकपा संगठन के रीजनल कमांडर और 15 लाख के इनामी नक्सली रविंद्र गंजू के दस्ता सदस्य और एक लाख के इनामी नक्सली राजा हेमंत असुर उर्फ राजन को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक देसी कट्टा और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसकी टीम के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी रखे हुए है। लोहरदगा के पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि माओवादी संगठन का सक्रिय सदस्य राजा हेमंत असुर इलाके में घूम रहा है। सूचना के आधार पर एसडीपीओ वेदांत शंकर, 32 बटालियन एसएसबी के निरीक्षक मनीष कुमार चौबे, अजीत कुमार और कुरु थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर छापेमारी अभियान चलाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में अपना नाम रंजीत बताया अभियान के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को रोका गया, जिसने प्रारंभिक पूछताछ में अपना नाम रंजीत बताया। तलाशी में उसके पास हथियार और कारतूस मिले। आगे की जांच में उसकी पहचान एक लाख इनामी नक्सली राजा हेमंत असुर उर्फ राजन के रूप में हुई। राजा हेमंत का लंबा आपराधिक इतिहास रहा कुडू थाना में मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार राजा हेमंत का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ 20 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि वह लंबे समय से क्षेत्र में दहशत फैला रहा था।
कोहरे की सफेद चादर में लिपटेंगे ये जिले; 3 डिग्री तक गिरेगा पारा... जानें ताजा अपडेट टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सर्दी ने दस्तक दे दी है और आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने वाली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि राज्य के कई हिस्सों में अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। कोहरे की सफेद चादर में लिपटेंगे ये जिले रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा, चतरा, धनबाद, पलामू, गढ़वा और लातेहार में ठंड का असर सबसे अधिक रहेगा। अगले चार दिनों तक सुबह के समय घना कोहरा या हल्की धुंध छाने के आसार हैं, जिससे दृश्यता में कमी आयेगी। न्यूनतम तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना राजधानी रांची और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, रांची में अधिकतम तापमान 23 से 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। 27 नवंबर को तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे पारा 9 डिग्री तक पहुंच सकता है।इन जिलों में गिरेगा सबसे अधिक पारा, रातें रहेगी अत्यंत ठंडी मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि उत्तरी छोटानागपुर और मध्य झारखंड के जिलों में न्यूनतम तापमान में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिलेगी। चतरा, गढ़वा, पलामू और लातेहार जैसे जिलों में तापमान 8 से 9 डिग्री तक जा सकता है। वहीं, मध्य झारखंड के रांची, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़ और गुमला में भी रातें अत्यंत ठंडी रहेंगी। पूर्वी झारखंड के जिलों में मौसम अपेक्षाकृत गर्म रहेगा। गोड्डा में अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि धनबाद, देवघर और दुमका जैसे जिलों में न्यूनतम तापमान 12 से 14 डिग्री के आसपास बना रहेगा। मौसम विशेषज्ञों ने दी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह और शाम के समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से ठंड से बचाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। साथ ही, नागरिकों को कोहरे के समय वाहन चलाते हुए धीमी गति अपनाने और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह दी गयी है।
छात्रवृत्ति रोके जाने के विरोध में सौंपेगा राज्यपाल को ज्ञापन टीम एबीएन, रांची। आजसू छात्र संघ गुरुवार को बापू वाटिका, मोराबादी से राजभवन तक शिक्षा के लिए भिक्षा : जनाक्रोश मार्च निकलेगा और लाखों छात्रों की छात्रवृत्ति रोके जाने के खिलाफ प्रदर्शन करेगा। आजसू छात्र संघ राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा और महामहिम राज्यपाल से आग्रह करेगा कि लंबित 2024-25 की छात्रवृत्ति वितरण में तुरंत हस्तक्षेप करें। साथ ही राज्य सरकार को निर्देशित करें कि ई-कल्याण पोर्टल पर सभी लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक रूप से जारी की जाये, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आजसू केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में आजसू छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव एवं युवा आजसू के रांची नगर अध्यक्ष अमित यादव ने बताया कि झारखंड राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लाखों विद्यार्थी सत्र 2024-25 की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के भुगतान के लिए कई महीनों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देरी केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सरकार की गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाती है, जिसके कारण उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। उन्होंने आगे जानकारी दी कि राज्य सरकार के अनुसार 11.34 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलनी थी, लेकिन अब तक केवल 7.45 लाख छात्रों को आंशिक भुगतान किया गया है। 3.5 लाख से अधिक ओबीसी विद्यार्थी आज भी पहली किस्त की प्रतीक्षा में हैं। रांची, लोहरदगा, गुमला, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो सहित विभिन्न जिलों में विद्यार्थी पिछले एक महीने से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, परंतु सरकार मौन है। आजसू छात्र संघ ने राज्य सरकार की असंवेदनशीलता के खिलाफ कल 27 नवम्बर 2025 को एक शांतिपूर्ण जन-जागरण एवं जन-आक्रोश मार्च आयोजित करने की घोषणा की। मार्च का विवरण तिथि: 27 नवम्बर 2025 समय: प्रात: 10:00 बजे स्थान: बापू वाटिका, मोराबादी से राजभवन, रांची उद्देश्य: छात्रवृत्ति भुगतान में हो रही देरी पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और लंबित समस्याओं के समाधान हेतु जन-जागृति लाना। छात्र संघ ने स्पष्ट किया कि यह मार्च पूर्णत: शांतिपूर्ण एवं विधिसम्मत होगा और सभी प्रतिभागियों को प्रशासनिक नियमों के पालन हेतु निर्देशित किया गया है। राज्यपाल से प्रमुख मांगें छात्र संघ के कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने स्पष्ट कहा कि जब तक राज्य की वर्तमान सरकार हर अंतिम छात्र को उसकी पूर्ण छात्रवृत्ति उपलब्ध नहीं कराती, तब तक यह आंदोलन एक क्षण के लिए भी थमेगा नहीं। न एक छात्र छूटेगा और न एक भी मांग अधूरी रहने दी जायेगी। आज की सत्ता यदि विद्यार्थियों के अधिकारों पर चुप्पी साधे रहती है, तो यह संघर्ष और तेज होगा क्योंकि यह लड़ाई केवल छात्रवृत्ति की नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और जवाबदेही की है। प्रदेश उपाध्यक्ष ऋतुराज शहदेव ने सरकार पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा छात्रवृत्ति कोई दया नहीं, यह हमारा अधिकार है। लेकिन सरकार की चुप्पी ने लाखों विद्यार्थियों का अकादमिक वर्ष जोखिम में डाल दिया है। यदि सरकार तुरंत समाधान नहीं देती, तो छात्र अपनी आवाज और बुलंद करेंगे। यह लड़ाई शिक्षा बचाने की है, और इसे पूरे दमखम के साथ लड़ा जायेगा। अंत में ओम वर्मा ने कहा कि यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों का है जो बेहतर शिक्षा, समान अवसर और सम्मानजनक भविष्य की उम्मीद रखते हैं। झारखंड सरकार को समझना होगा कि शिक्षा के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ अमित साहू, रवि रोशन आदि भी उपस्थित थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, युवा आजसू के महानगर अध्यक्ष अमित यादव, डॉ अमित साहू, रवि रोशन, सक्षम झा, अमन साहू उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
आधुनिक भारत के लिए यह दिन आत्म-चिंतन और संकल्प का है प्रतीक : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में हर वर्ष 26 नवंबर को भारतीय संविधान दिवस या संविधान दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमारे लोकतांत्रिक इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जब वर्ष 1949 में भारत की संविधान सभा ने देश के सर्वोच्च दस्तावेज भारतीय संविधान-को आधिकारिक रूप से अपनाया। हालांकि संविधान 26 जनवरी 1950 से पूर्ण रूप से लागू हुआ, इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन 26 नवंबर वह दिन था जब इसकी स्वीकृति दी गई, इसलिए इसे हमारे संविधान निर्माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु विशेष रूप से मनाया जाता है। 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को संविधान की भावना, मूल्यों और अधिकार-कर्तव्यों से परिचित कराना है। यह दिवस हमें स्मरण कराता है कि हमारा संविधान न केवल कानूनों का एक संग्रह है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक आत्मा, नैतिकता, समानता, न्याय और स्वतंत्रता का प्राणस्रोत है।इस दिवस का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि हम उन महान हस्तियों विशेषकर डॉ भीमराव आंबेडकर संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष-को श्रद्धांजलि दें, जिन्होंने वर्षों की मेहनत, चर्चा और अध्ययन के बाद भारत को विश्व का सबसे विस्तृत और समग्र संविधान प्रदान किया। भारतीय संविधान की विशेषताएँ भारतीय संविधान दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधानों में से एक है। यह संघीय ढांचे के साथ एकात्मकता की मजबूत आधारशिला रखता है। इसमें मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों, नीति-निर्देशक सिद्धांतों, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, विधायिका और कार्यपालिका के संतुलन जैसे आधुनिक लोकतंत्र के सभी तत्वों का समावेश है। अधिकारों और कर्तव्यों के माध्यम से यह नागरिकों को स्वतंत्रता देता है, पर साथ ही राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का मार्ग भी दिखाता है।संविधान दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि लोकतंत्र की चेतना को मजबूत करने का अवसर है। इस दिन विद्यालयों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और संस्थाओं में संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया जाता है, जिससे सामूहिक रूप से हम सभी संविधान के मूल सिद्धांतों- समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व-को हृदय में उतारते हैं। आज के समय में जब समाज तेजी से बदल रहा है, संविधान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि बदलावों के बीच भी संविधान वह आधारशिला है जो राष्ट्र को एकसूत्र में बांधे रखती है। यह दिवस नागरिकों को जागरूक, सतर्क और जिम्मेदार बनाता है। आधुनिक भारत के लिए यह दिन आत्मचिंतन और संकल्प का प्रतीक है कि हम अपने संविधान के प्रति निष्ठावान रहकर राष्ट्र की उन्नति में योगदान देंगे।भारतीय संविधान दिवस हमें अपने अतीत की गौरवशाली यात्रा की याद दिलाता है, वर्तमान की संवैधानिक जिम्मेदारियों से परिचित कराता है और भविष्य के भारत के लिए मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रेरणा देता है।यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय पहचान, एकता और लोकतांत्रिक आदर्शों का उत्सव है। 26 नवंबर का दिन हर भारतीय के लिए गर्व करने का अवसर है, क्योंकि यही वह दिन है जिसने हमें एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी राष्ट्र बनने की दिशा में पहला कदम दिया था।
रांची एयरपोर्ट पर क्रिकेटर्स का स्वागत, 30 नवंबर को जेएससीए में भारत-दक्षिण अफ्रीका का वनडे मैच टीम एबीएन, रांची। दक्षिण अफ्रीका बनाम भारत के बीच 30 नवंबर को होने वाले वनडे मुकाबले से पहले टीम इंडिया के खिलाड़ी रांची पहुंचने लगे हैं। सोमवार को अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा रांची एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। दोनों खिलाड़ी शाम 6:45 बजे फ्लाइट से रांची पहुंचे। एयरपोर्ट पर काफी संख्या में फैंस मौजूद थे, जिन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और तस्वीरें लेने की कोशिश की। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से होटल तक खिलाड़ियों की सुरक्षा और ट्रैवल प्लान को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जेएससीए प्रबंधन लगातार खिलाड़ियों के मूवमेंट पर नजर रख रही है। इसी बीच जेएससीए के उपाध्यक्ष संजय पांडे ने बताया कि खिलाड़ियों का आना शुरू हो गया है और आने वाले 24 घंटों में टीम इंडिया और दक्षिण अफ्रीका दोनों टीमों के कई खिलाड़ी रांची पहुंच जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्रैक्टिस सेशन का पूरा शेड्यूल जल्द जारी किया जायेगा, जिसके लिए जेएससीए ग्राउंड पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंगलवार 26 नवंबर को भारतीय वनडे टीम के धाकड़ बल्लेबाज रोहित शर्मा के शाम 6 बजे, जबकि ऋतुराज गायकवाड़ के 7:45 बजे रांची पहुंचने का कार्यक्रम तय है। इन दोनों खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए भी बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है। इस बीच जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में 30 नवंबर को होने वाले बड़े मुकाबले को लेकर तेजी से तैयारी हो रही है। पिच और आउटफील्ड को मैच के अनुरूप अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्टेडियम की सुरक्षा, पार्किंग, दर्शक सुविधा और टिकटिंग व्यवस्था को लेकर भी समीक्षा की गयी है। जेएससीए के अधिकारियों का कहना है कि मैच के दौरान भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। घरेलू जमीन पर टीम इंडिया जीत का सिलसिला बरकरार रखना चाहती है, वहीं दक्षिण अफ्रीका रांची की पिच पर बेहतर प्रदर्शन के इरादे से उतरने जा रही है। खिलाड़ियों के लगातार आगमन से रांची में क्रिकेट का उत्साह चरम पर है और शहर 30 नवंबर के वनडे मैच के लिए तैयार है।
टिकट काउंटर पर धीमी रफ्तार से लोग परेशान, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल टीम एबीएन, रांची। रांची में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच होने वाले वनडे मैच को लेकर जहां उत्साह चरम पर है, वहीं टिकट बिक्री में अव्यवस्था की वजह से क्रिकेट प्रेमियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।धुर्वा स्थित JSCA स्टेडियम के बाहर सुबह होते-होते दो किलोमीटर से भी लंबी कतारें लग गई। रात से लाइन में खड़े लोग टिकट मिलने की उम्मीद में जमे रहे, लेकिन धीमी रफ्तार से चल रही टिकट बिक्री ने उनका उत्साह कम कर दिया। टिकट खरीदने में लोगों को हो रही परेशानी दर्शकों का कहना है कि टिकट काउंटरों की संख्या बेहद कम है और उपलब्ध काउंटर भी धीमी गति से काम कर रहे हैं। तीन काउंटरों के सहारे हजारों लोगों को टिकट दिया जा रहा है, जिससे भीड़ लगातार बढ़ रही है और कतारें छोटी होने के बजाय और लंबी हो रही हैं। कई युवाओं ने बताया कि वे रात 2 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन सुबह तक भी लाइन मुश्किल से आगे बढ़ पाई। वहीं, कई परिवारों और बुजुर्गों ने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है। ठंड में बच्चों और महिलाओं को घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है। टिकट काउंटर के बाहर सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग तो की गयी है, लेकिन दर्शकों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी मौजूद नहीं हैं। कई स्थानों पर धक्का मुक्की की स्थिति बनी, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है।
30 मार्च 2026 से पहले झारखंड में हो जाएंगे नगर निकाय चुनाव! राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में दिया शपथ पत्र टीम एबीएन, रांची। झारखंड में लंबे समय से लंबित शहरी निकाय चुनाव नहीं होने पर रौशनी खलखो की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंदा सेन की अदालत में सुनवाई हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को बताया है कि विस्तृत तैयारी के लिए 8 सप्ताह की जरुरत पड़ेगी। साथ ही चुनावी प्रक्रिया पूर्ण करने में अतिरिक्त 45 दिन लगेंगे। इस बाबत सीलबंद शपथ पत्र 22 नवंबर को ही दाखिल कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनोद सिंह ने बताया कि सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 30 मार्च तय कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारी के लिए मांगा समय प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने पक्ष रखा। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया ने दलील पेश की। महाधिवक्ता ने बताया कि चुनाव से जुड़े सभी निर्णयों की प्रतियां राज्य निर्वाचन आयोग को दे दी गयी हैं। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि चुनाव कराने को लेकर आयोग गंभीर है। लेकिन इसकी तैयारी के लिए 8 सप्ताह और चुनाव प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए 45 दिन लगेंगे। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल सीलबंद शपथ पत्र का अवलोकन करने के लिए सुनवाई की अगली तारीख 30 मार्च 2026 तय की है। 9 नगर निगम जहां होने हैं चुनाव रांची, हजारीबाग, मेदिनीनगर, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर और मानगो 20 नगर परिषद जहां होने हैं चुनाव गढ़वा, विश्रामपुर, चाईबासा, झुमरी तिलैया, चक्रधरपुर, चतरा, चिरकुंडा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा, गुमला, जुगसलाई, कपाली, लोहरदगा, सिमडेगा, मधुपुर, रामगढ़, साहिबगंज, फुसरो और मिहिजाम। 19 नगर पंचायत जहां होने हैं चुनाव बंशीधर नगर, मझिआंव, हुसैनाबाद, हरिहरगंज, छतरपुर, लातेहार, कोडरमा, डोमचांच, बड़की सरैया, धनवार, महगामा, राजमहल, बरहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, बुंडू, खूंटी, सरायकेला और चाकुलिया। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने चुनाव की संभावित तारीख की मांग करते हुए सुनवाई के लिए 24 नवंबर की तारीख तय की थी। तब महाधिवक्ता राजीव रंजन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि सरकार ने नगर निकाय चुनाव के लिए कराए गए ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दी है। सीटों के आरक्षण, जनसंख्या सूची सहित कुछ बिंदुओं पर आयोग ने अतिरिक्त जानकारी मांगी है, जिसे जल्द मुहैया करा दिया जाएगा। बता दें कि जून 2020 से 12 शहरी निकायों में चुनाव नहीं हुए हैं। इसके अलावा 27 अप्रैल 2023 के बाद से राज्य में कोई शहरी निकाय चुनाव नहीं हुआ है। इसमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर निकायों की कुल संख्या 48 है। हाईकोर्ट ने 4 जनवरी 2024 को आदेश पारित कर तीन सप्ताह के भीतर चुनाव सुनिश्चित कराने को कहा था। इस डेडलाइन के फेल होने पर अवमानना याचिका दायर हुई थी। अब राज्य निर्वाचन आयोग के रुख से स्पष्ट है कि झारखंड में अब 30 मार्च 2026 से पहले निकाय चुनाव का काम पूरा कर लिया जायेगा। उम्मीद जतायी जा रही है कि फरवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच चुनाव का कार्य पूरा करा लिया जायेगा।
बिरसा मुंडा के गांव खूंटी में विकास कार्य ठप; छह महीने से डायवर्जन अधूरा, जनता में आक्रोश टीम एबीएन, रांची। बिरसा मुंडा की जन्मभूमि खूंटी में विकास योजनाओं की रफ्तार इन दिनों काफी सुस्त पड़ गयी है। हालात यह है कि जिला विकास की दौड़ में पीछे छूटता दिख रहा है। बुनियादी ढांचे में हो रही देरी और लंबे समय से जारी पिछड़ेपन की तस्वीर लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। इसका ताजा उदाहरण खूंटी-सिमडेगा मुख्य मार्ग पर पोलो मैदान के पास बना वह पुल है, जो छह महीने पहले लगातार हुई बारिश में टूट गया था। हैरानी की बात यह है कि पुल टूटने के बाद बनाये जा रहे वैकल्पिक डायवर्जन का निर्माण कार्य भी अब तक अधूरा पड़ा है। इसके कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय राम मनोहर महतो और काशीनाथ महतो ने बताया कि यह पुल ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा है। पुल नहीं होने के कारण उन्हें कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक छोटे से डायवर्जन को बनाने में छह महीने लग जाते हैं, तो पूरा पुल बनने में कितने साल लगेंगे? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनकी समस्याओं पर न तो ध्यान दिया जा रहा है और न ही अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की कोई गंभीरता दिख रही है। ग्रामीणों ने विडंबना का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी बड़े नेता का दौरा होता है तो रातों-रात सड़कें बन जाती हैं, पुल तैयार हो जाते हैं और पूरा इलाका चमका दिया जाता है। लेकिन जब गांववालों के लिए पुल बनाने की बात आती है, तो सिस्टम सुस्त पड़ जाता है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर क्यों बिरसा मुंडा जैसी महान विभूति की जन्मभूमि को विकास कार्यों में लगातार उपेक्षित किया जा रहा है। जिस जिले का नाम राज्य की राजनीति में हमेशा आगे रहता है, वहां विकास की यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
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