टीम एबीएन, रांची। पसंद फाउंडेशन के द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बरही, हज़ारीबाग के मदद से अनुसूचित जनजातिय उपयोजना अंतर्गत लारबा गाँव कोलेबिरा प्रखंड के कुल 10 जनजातिय किसानो को चना, मसूर, सरसो तथा सात प्रकार के सब्जी के बीज निःशुल्क दिए गए।संस्था के द्वारा परियोजना अंतर्गत जनजातिय किसानो के बीच दलहन/ तिलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पूसा के उन्नत किस्म के दल्हन, तिलहन के बीज पा कर किसानो मे प्रसन्ता है।पसंद फाउंडेशन के कार्यकारी प्रबंधक कीर्तिमान नाथ ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बरही, हज़ारीबाग की कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिल्पी केरकेट्टा का विशेष सहयोग मिला और किसानो को निःशुल्क बीज के साथ खेती की विधी भी बताई गई जिस्से की किसानो को खेती से अधिकतम लाभ मिल सके।
धनबाद में 9 दिनों से गैस रिसाव जारी, सीएमपीडीआईएल ने शुरू किया ड्रोन सर्वे एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद/ रांची। कोल इंडिया की सहायक कंपनी केंद्रीय खान नियोजन एवं डिजाइन संस्थान (सीएमपीडीआईएल) के विशेषज्ञों की एक टीम ने शुक्रवार को झारखंड में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के कोयला खदान क्षेत्रों में भूमिगत खदानों से गैस उत्सर्जन से प्रभावित इलाकों का ड्रोन सर्वेक्षण शुरू किया। इससे पहले राजपूत बस्ती, मस्जिद मोहल्ला और एरिया नंबर पांच से गैस रिसाव की खबरें आयी थीं जो बीसीसीएल के पुटकी-बलिहारी कोयला खदान क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। गैस रिसाव की खबर के बाद अधिकारियों ने लगभग 1,000 स्थानीय लोगों को स्थानांतरित करने का फैसला किया था। केंदुआडीह बस्ती में इस महीने की शुरूआत में इन खदानों से कार्बन मोनोक्साइड का रिसाव होने से एक महिला की कथित तौर पर मौत हो गई थी, जबकि 12 लोग बीमार पड़ गये थे। टीम का नेतृत्व कर रहे सीएमपीडीआईएल के अधिकारी भुवनेश कुमार गुप्ता ने कहा कि गैस उत्सर्जन के पीछे की वजहों का पता लगाने, रिसाव के स्रोतों की पहचान करने और उन्हें रोकने के उपाय शुरू करने के लिए बीसीसीएल के निर्देश पर ड्रोन सर्वे किया जा रहा है। टीम के सदस्य अशोक कुमार और संदीप हाजरा ने कहा कि प्रभावित स्थलों के 400 मीटर के दायरे में यह ड्रोन सर्वेक्षण कराया जा रहा है। गुप्ता ने कहा, हम डेटा एकत्र कर रहे हैं और इसे रांची स्थित सीएमपीडीआईएल कार्यालय को सौंपेंगे, जहां विशेषज्ञ गैस रिसाव के पीछे के कारणों का विश्लेषण करेंगे और इस रोकने के लिए उपाय तलाशेंगे। उन्होंने कहा कि आंकड़ों का विश्लेषण करने में 15 से 20 दिन लगेंगे। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में मकानों और निवासियों की संख्या की भी पहचान की जाएगी। टीम के सदस्यों ने बताया कि ड्रोन अध्ययन के अलावा प्रभावित क्षेत्रों के तापमान को मापने के लिए थर्मल गन सर्वे भी किया जा रहा है। गुप्ता ने कहा, प्रभावित क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र में सर्दियों के मौसम के लिए सामान्य है। रांची स्थित सीएमपीडीआई कोल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में पहले किए गए सर्वेक्षणों में गैस उत्सर्जन से पिछले 11 दिनों में प्रभावित मकानों और लोगों की संख्या का आकलन नहीं किया गया था।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अखिल भारतीय पिछड़ा संघ के जिलाध्यक्ष रत्नेश कुमार ने धनबाद उपयुक्त को पत्र लिखकर कहा कि राम अवतार आउटसोर्सिंग के द्वारा ओबी डंप के दौरान भरी मात्रा ने उड़ रहे धूल ओर फैल रहे प्रदूषण से लोग बीमार हो रहे हैं। उन्होंने लिखा कि कनकनी कोलियरी में संचालित राम अवतार आउटसोर्सिंग ने लोयाबाद 5 नंबर में ओबी डंप किया जा रहा है, जिससे ओबी डंप के दौरान भरी मात्रा की धूल उड़ रहा है। जिससे खुले हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। खुली हवा ने सांस लेना में भी मुश्किल हो रहा है। लोग सांस फेफड़े सहित अन्य कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। लेकिन फिर भी नहीं रूक रहा है आउटसोर्सिंग कंपनी का ओबी डंप। ओबी डंप के दौरान जो गाड़ियां रोड क्रॉसिंग करते हुए ओबी डंप करने लोयाबाद 5 नंबर जाते वो ओबी ओवरलोड गाड़ियां रहते हैं। जिससे कभी भी बड़ा दुर्घटना घट सकता है। कुछ दिन पहले ही ओवरलोड ओबी रहने के कारण ओबी डंप के दौरान भारत बेंज ट्रिपल गाड़ी रेम से पीछे का चक्का नीचे धसने से आधा लटक गया था और जो गाड़ियां ओवरलोड ओबी लेकर ओबी डंप करने जाते हैं वह रोड क्रॉसिंग करके लोयाबाद 5 नंबर डंप करने जाते हैं लेकिन रोड पर किसी भी प्रकार की सुविधाएं नहीं दी गयी है जिससे आने-जाने वाले लोगों को भी काफी खतरा मंडरा रहा है क्योंकि किसी भी प्रकार का सुविधाएं नहीं दिया गया है। राम अवतार आउटसोर्सिंग जहां अपना ओबी को डंप करता है उसकी ऊंचाई बहुत ज्यादा हो चुकी है लेकिन फिर भी ओबी डंप किया जा रहा है। नियमों को ताख पर रख काम किया जा रहा है, जिससे एक बड़ा दुर्घटना को आमंत्रित किया जा रहा है। अगर समय रहते इसपर रोक नहीं लगायी गयी, तो ऐसे ही ओबी डंप होते रहेगा और धूल और प्रदूषण से लोग ग्रसित होते रहेंगे।
जम्मू-कश्मीर में कोडरमा के जवान ने खुद को मारी गोली, क्षेत्र में शोक की लहर एबीएन न्यूज नेटवर्क, कोडरमा। नवलशाही थाना क्षेत्र अंतर्गत देवीपुर गांव के एक सीआरपीएफ के जवान जम्मू कश्मीर मे ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। मृतक की पहचान सुजीत सिंह (27) पिता सिकंदर सिंह के रूप में हुई है। घटना की जानकारी देते हुए मृतक के बड़े भाई विकास सिंह ने बताया कि बीती रात उनके मोबाइल पर कश्मीर के सीआरपीएफ के एरिया कमांडर का फोन आया और सूचना मिली कि उनके भाई की मौत हो गयी है। ये सुनते ही विकास बदहवास हो गया और आगे कुछ भी बात नहीं कर पाया। सुजीत का चयन वर्ष 2023 में सीआरपीएफ में हुआ था और उनका शादी छह माह पूर्व ही गिरिडीह जिले के मिर्जागंज के बदडीहा में हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही उनकी पत्नी सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के भाई भी सीआरपीएफ में तैनात हैं। मौत की असल वजह अबतक पता नहीं चल पाया है। बता दें कि कश्मीर के एक निजी चैनल के अनुसार ड्यूटी के दौरान ही सर्विस राइफल से ही उन्होंने खुद को गोली मार ली है। श्रीनगर के बाहरी इलाके निशात के करपुरा ब्राने में नाका ड्यूटी के दौरान बुधवार देर रात सीआरपीएफ जवान ने अपनी ही सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली है, जिससे उसकी मौत हो गयी है। वह 54वीं बटालियन में पदस्थापित थे और ब्रेइन निशात में तैनात थे। कश्मीर की पुलिस ने बताया कि कार्यवाही शुरू कर दी गयी है और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच चल रही है। हालांकि आत्महत्या की खबर पर अबतक किसी का आधिकारिक बयान नहीं आया है। बता दें कि उनका पार्थिव शरीर गुरुवार देर रात रांची एयरपोर्ट पहुंचेगा। जिसके बाद कोडरमा के मरकच्चो पार्थिव शरीर पहुंचेगा, जहां अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जायेगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, कोडरमा। सतगावां प्रखंड संदेहास्पद स्थिति में एक बिरहोर की मौत का मामला प्रकाश में आया है। मृतक बिरहोर जितेंद्र बिरहोर (32) पिता पुना बिरहोर पंचायत अंबाबाद ग्राम खवासडीह निवासी के रूप में पहचान की गयी है।मौत के मामले को लेकर बीडीओ ओमप्रकाश बड़ाइक ने बताया कि मृतक सुबह उठकर शौच के लिए निकाला था। इसी बीच एकाएक तबीयत खराब होने के बाद उल्टी करना प्रारंभ कर दिया घर आने पर अचानक उसकी मौत हो गयी।बीडीओ ने बताया कि वह सरकार से मिले आवास में रहता था। घर की स्थिति में देखा जाये तो पुराना कंबल उसके पास मौजूद था। अलाव की व्यवस्था घर में थी। जब तक प्रशासन की टीम स्थल पर पहुंची, परिजनों ने उसकस अंतिम संस्कार कर दिया। मृत्यु का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाया है।प्रशासन ने परिजनों की फिलहाल आर्थिक सहायता की है। अनाज की व्यवस्था उपलब्ध करा दी गयी है। साथ ही पारिवारिक लाभ के लिए कागजात तैयार की जा रही है। मृतक अपने पीछे तीन पुत्र व दो पुत्री को छोड़ गया है। फिलहाल मृतक की पत्नी 2 महीने की गोद में रखकर बिलख रही थी। परिजनों ने बताया कि मृतक को कई दिनों से खांसी का शिकायत था और बुखार भी लग रही थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा था। बिरहोर परिवार को सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था मुहैया क्यों नहीं हो सकती। आर्थिक स्थिति दयनीय रहने के कारण समुचित इलाज नहीं करवा पा रहा था।
शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में बढ़ी राजनीतिक हलचल, विपक्षी विधायकों ने सरकार को घेरा टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन गुरुवार को लगातार राजनीतिक हलचल से भरा रहा। सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और अलग-अलग मुद्दों को लेकर सदन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। मांडू के विधायक निर्मल महतो और बड़कागांव के विधायक रौशनलाल चौधरी विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे। मांडू विधायक निर्मल महतो ने एक दैनिक अखबार की प्रति दिखाते हुए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण में कथित रूप से पांच लाख रुपये की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया। महतो का दावा था कि यह मामला कांग्रेस विधायक ममता देवी ने सीएलपी बैठक में उठाया था और इसकी जानकारी मीडिया में भी प्रकाशित हुई है। उन्होंने कहा कि यह राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर करता है। हालांकि, कांग्रेस विधायक ममता देवी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सीएलपी बैठक के विषय गोपनीय होते हैं और उन्हें बाहर गलत तरीके से पेश करना अनुचित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है। इसी दौरान कांग्रेस विधायक अनूप सिंह और श्वेता सिंह ने कहा कि बैठक में विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखते हैं। ममता देवी ने भी निर्माण कार्यों से जुड़े कुछ मुद्दे सामने रखे थे, जिनका समाधान बाद में कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, बड़कागांव विधायक रौशनलाल चौधरी विस्थापितों के मुद्दे पर सरकार को घेरते दिखाई दिये। उन्होंने कहा कि पतरातु में राज्य के सबसे बड़े पावर प्लांट के निर्माण के दौरान 25 गांवों के सैकड़ों लोग विस्थापित हुए थे, लेकिन अब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। चौधरी ने कहा कि विस्थापित परिवार आज भी सरकारी मदद के इंतजार में भटक रहे हैं और सरकार को तुरंत पुनर्वास व मुआवजा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
क्या हुआ तेरा वादा... झारखंड विधानसभा के अंतिम दिन सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीखी नोकझोंक टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सदन के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आये। दोनों ओर से एक-दूसरे को वादाखिलाफी की याद दिलायी गयी और माहौल कुछ देर के लिए गर्म हो गया। वादा तेरा वादा कहां गया वादा? सत्ता पक्ष हो या विपक्ष-सबकी जुबान पर एक ही सवाल था: वादा तेरा वादा कहां गया वादा? सत्ता पक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक जहां सुरेश पासवान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने चुनावों के दौरान कई बड़े-बड़े दावे किये थे, लेकिन उन वादों का क्या हुआ? उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा खातों में पैसा भेजने के ऐलान का उल्लेख करते हुए पूछा कि कहां गया उनका वादा? पासवान ने कहा कि विपक्ष राज्य सरकार पर सवाल उठाने से पहले केंद्र की वादाखिलाफी पर जवाब दे। उधर, विपक्ष की ओर से भाजपा विधायक नीरा यादव भी कम आक्रामक नहीं दिखीं। उन्होंने कहा कि केंद्र पर आरोप लगाने से पहले सत्ता पक्ष को राज्य में किए गए अपने वादों पर ध्यान देना चाहिए। नीरा यादव ने पलटवार किया- अब झारखंड में रहते हैं तो झारखंड की बात करिये। राज्य सरकार ने जो वादे किये थे, उनका क्या हुआ? उन्होंने कहा कि जनता हर मुद्दे पर सरकार से जवाब चाहती है और केंद्र का बहाना बनाकर राज्य की नाकामियों को छिपाया नहीं जा सकता।
टीम एबीएन, रांची। रांची जिला बार एसोसिएशन ने अपने इतिहास में पहली बार एक नई पहल करते हुए सदस्यों के बीच डायरी के साथ 12 पृष्ठों वाला आकर्षक कैलेंडर वितरित करना शुरू किया है। इस निर्णय को हाल ही में हुई आरडीबीए की कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से मंजूरी दी गयी थी। इस अनोखी पहल की शुरुआत होने से सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है। आरडीबीए के महासचिव संजय कुमार विद्रोही ने बताया कि डायरी और कैलेंडर का वितरण बुधवार से प्रारंभ कर दिया गया है। पहले दिन लगभग 400 अधिवक्ताओं को दिया गया। 3000 से अधिक अधिवक्ता इसका लाभ उठा सकेंगे। अधिवक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डायरी के साथ विस्तृत कैलेंडर तैयार किया गया है। कैलेंडर में बार की महत्वपूर्ण गतिविधियों, अदालतों के अवकाश, न्यायिक कार्यक्रमों और अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण तिथियों का सुव्यवस्थित संकलन किया गया है, जिससे सदस्यों को अपने पेशेवर कार्यों की योजना बनाने में सहूलियत होगी। डायरी भी आधुनिक प्रारूप में तैयार की गयी है, जिसमें केस नोट्स, दैनिक कार्य विवरण और संपर्क सूचियों के लिए अलग-अलग पृष्ठ उपलब्ध कराये गये हैं। बार सदस्यों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार उपयोगी और व्यावहारिक सामग्री एक साथ उपलब्ध कराना आरडीबीए की सकारात्मक सोच को दर्शाता है। अधिवक्ताओं का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था पेशेवर कार्यों में बेहद सहायक साबित होगी। आरडीबीए ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में भी इस तरह की सुविधाओं को और विस्तृत किया जायेगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। जिले में सोमवार को उपायुक्त समीरा एस की अध्यक्षता में भू-अर्जन और सड़क निर्माण परियोजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गयी। समाहरणालय सभागार में हुई बैठक में एनएच-75, फोरलेन, आरओआर, आरओबी और सरकार की अन्य सड़क निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गयी। भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान की समीक्षा बैठक में डीसी ने एचएआई की विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण, एलपीसी निर्गमन, मुआवजा भुगतान, और लंबित फाइलों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी संबंधित सीओ और भू-अर्जन पदाधिकारी आपस में लगातार संपर्क में रहें और रैयतों की शिकायतों के निराकरण में तत्परता दिखायें। उन्होंने पाया कि कुछ मामले संबंधित एजेंसियों के स्तर पर लंबित हैं। इस पर डीसी ने एजेंसियों को पेपरवर्क मजबूत रखने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोल माइंस प्रतिनिधियों संग बैठक भू-अर्जन बैठक के बाद डीसी ने जिले में संचालित कोल माइंस के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक की। इस दौरान उन्होंने माइंस से संबंधित विभिन्न ग्रिवांसेज की जानकारी ली और मौके पर मौजूद अंचल अधिकारियों से बातचीत कर इनके समाधान का निर्देश दिया। डीसी ने त्रिमूला माइंस के लंबित लैंड शेड्यूल कार्य को 10 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया। इसके लिए संबंधित सीओ को आवश्यक सहयोग देने को कहा गया। बैठक में कई माइंस प्रतिनिधियों ने एक्सप्लोसिव हेतु एनओसी की समस्या भी उठायी, जिस पर डीसी ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया। जीएम जेजेलैंड के एनओसी मुद्दे पर भी चर्चा की गयी।
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