एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी 23 जनवरी से चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेगी। गृह मंत्री अमित शाह 23 जनवरी को उत्तर प्रदेश में पहली वर्चुअल रैली को संबोधित कर सकते हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि अमित शाह 23 जनवरी से उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे। बता दें कि शनिवार को चुनाव आयोग ने प्रचार प्रतिबंधों को 22 जनवरी तक आगे बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक, राजनीतिक तल जनसभा, साइकिल रैली, बाइक रैली, पदयात्रा नहीं निकाल सकेंगे। इसके अलावा 5 लोगों के साथ घर-घर प्रचार करने की अनुमति है। हालांकि चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैलियां करने की अनुमति दी है।
टीम एबीएन। शराबमुक्त बिहार की घोषणा के वर्षों बाद आज भी दर्जनों गांवों में शराब चुलाने व बेचने का कारोबार निरंतर चल रहा है। मौत (दारू) का यह कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। दर्जनों गांवों में शराब चुलाई जा रही है। कई गांवों में तो शाम ढलते ही शराबियों का जमघट लगने लगता है। इस तरह की मौतों के बाद भी लोग या प्रशासन सबक नहीं ले रहा। बस कुछ दिन हाय तौबा और फिर से वही पुरानी चाल चलन...। नालंदा के हरनौत बाजार के दर्जनों लोगों ने बताया कि शराबबंदी का असर हर लोगों को भाने लगा था। लेकिन, कुछ ही माह बाद प्रशासनिक लापरवाही के कारण बेअसर दिखने लगा। गत माह मुख्यमंत्री के कड़े तेवर देखकर पुलिस महकमा में खलबली मच गई थी। शराब कारोबारी व शराबी को पकड़ने के लिए दिन रात अभियान भी चला। लेकिन, कुछ ही दिनों में फिर से वही रवैया शुरू हो गया। शराब का कारोबार एक बार फिर से पांव (नेटवर्क) पसारने लगा है। कभी हरनौत बाजार में शराबी शराब के नशे में धुत होकर पुलिस वाले का सर फोड़ देते हैं, कभी तेलमर गांव में बिजली गुल कर पुलिस कर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर परेशान करते हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब के धंधेबाजों का विरोध करने पर आम लोगों के साथ क्या सलूक किया जा सकता है। पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम शराब चुलाने व बेचने का कारोबार चल रहा है।
एबीएन डेस्क। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है। आयोग के ताजा आंकड़ों की मानें तो कोरोना महामारी के दौर में एक अप्रैल 2020 के बाद से देश के 1 लाख 47 हजार 492 बच्चों ने अपने माता, पिता या दोनों में से किसी एक को गंवा दिया है। एनसीपीसीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले करीब दो साल में अनाथ हुए बच्चों में से ज्यादातर के माता-पिता की जान कोरोनावायरस या फिर किसी अन्य घटना में गई है। सुप्रीम कोर्ट को एनसीपीसीआर ने यह जानकारी एक स्वतः संज्ञान से जुड़े मामले में दीं। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा था कि उन बच्चों की संख्या क्या है, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपने माता-पिता को गंवा दिया। इसी को लेकर एनसीपीसीआर ने यह आंकड़े कोर्ट को सौंपे। आयोग ने यह भी कहा कि उसके आंकड़े 11 जनवरी 2021 तक के हैं और इन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से बाल स्वराज पोर्टल-कोविड केयर में दिए गए डेटा के आधार पर जुटाया गया है। एनसीपीसीआर के मुताबिक, 11 जनवरी तक जो डेटा अपलोड हुआ है, उससे सामने आता है कि देश में अप्रैल 2020 से लेकर अब तक दोनों माता-पिता को खोने वाले बच्चों की संख्या 10 हजार 94 रही, जबकि माता या पिता में किसी एक को गंवाने वालों की संख्या 1 लाख 36 हजार 910 मिली। इसके अलावा छोड़े गए बच्चों की संख्या 488 रही। इन सभी आंकड़ों को जोड़ा जाए तो देश में माता-पिता को गंवाने वाले बच्चों की संख्या 1 लाख 47 हजार 492 पहुंचती है। किस उम्र के कितने बच्चों ने गंवाए माता-पिता? माता-पिता गंवाने वाले बच्चों में 76 हजार 508 लड़के रहे, जबकि 70 हजार 980 लड़कियां हैं, जबकि चार ट्रांसजेंडर बच्चे भी इसमें शामिल रहे। एफिडेविट के मुताबिक, जिस आयु वर्ग के बच्चे महामारी के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, उनमें आठ से 13 साल के 59,010 बच्चे, 14-15 साल के 22 हजार 763 बच्चे, 16-18 साल के 22,626 बच्चे शामिल रहे। इसके अलावा चार से सात साल के बीच के 26,080 बच्चों के माता या पिता या दोनों की इस दौरान जान गई।
एबीएन डेस्क। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में औट थाना क्षेत्र के तहत बांधी के शाला गांव के समीप एक कार गहरी खाई में गिर गई। हादसे में पति-पत्नी की मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों का इलाज सिविल अस्पताल नगवाईं में चल रहा है। गीता नंद (32) पुत्र गोपाल शाला निवासी और उसकी पत्नी डिंपल कुमारी (30) गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को प्राथमिक उपचार के लिए सिविल अस्पताल नगवाईं लाया गया, जहां दोनों की मौत हो गई। गीता नंद की बेटियां अक्षरा, दीक्षा और बेटा भुवनेश्वर घायल हो गए हैं। घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। एसएचओ औट ललित महंत ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए कुल्लू अस्पताल भेजा गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
एबीएन डेस्क। भले ही जिले को राज्य की उपराजधानी कहा जाता है लेकिन यहां की सड़कों की स्थिति अत्यंत बदहाल है, जिससे लोग काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि एक-दो दशक से सड़कों की यह स्थिति हमने नहीं देखी। आखिरकार इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा। दुमका को देवघर और भागलपुर से जोड़ने वाली मुख्य सड़क की हालत भी काफी खराब है, जबकि यह काफी व्यस्ततम सड़क है। हजारों वाहनों का प्रतिदिन आवागमन होता है। सड़क के जर्जर होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुमका से महारो चौक के बीच स्थित महारो पुल का ऊपरी सतह इस कदर जर्जर हो गया है कि इसमें लगी छड़ें बाहर निकल गई हैं। आवागमन कर रहे लोगों से हमने बात की। उन लोगों का कहना है कि आए दिन यहां दुर्घटना होती रहती है। इस वजह से हमेशा डर लगा रहता है कि पता नहीं कब कोई हादसे का शिकार हो जाये, लेकिन जरूरी काम से आना-जाना ही पड़ता है। वे परेशान हैं और इसे जल्द बनाने की मांग कर रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भुवनेश्वर एम्स में कोरोना विस्फोट की जानकारी सामने आ रही है। 250 से ज्यादा कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली समेत कई राज्यों में हर रोज नए मामले आ रहे हैं और संक्रमण दर में तेजी दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सबसे अधिक 42,462 मामले महाराष्ट्र में फिर कर्नाटक में बीते 24 घंटों में कोरोना के 32,793 नए केस मिले हैं। इसके बाद तमिलनाडु में 23,989 मरीज सामने आए हैं। 22,645 मामलों के साथ बंगाल चौथे स्थान पर बना हुआ है। वहीं 20,718 मरीजों के साथ दिल्ली पांचवें स्थान पर बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में भी 16000 से अधिक केस सामने आए हैं। बिहार में कोरोना के 6,325 मामले सामने आए हैं। भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के दो लाख 71 हजार 202 नए मामले सामने आए और 314 लोगों की मौत हो गई। इस दौरान एक लाख 38 हजार 331 लोग स्वस्थ भी हुए। सबसे चिंता करने वाली बात यह है कि देश में सक्रिय मरीजों की संख्या 15(15,50,377) लाख को पार कर गई है।
एबीएन डेस्क। आजसू पार्टी ओडिशा पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुट गयी है। दलीय आधार पर होने वाले ओडिशा पंचायत चुनाव के लिए आजसू पार्टी व्यापक तैयारी कर रही है। इसी क्रम में आज भारतीय मित्र पार्टी, ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष मिलन चंद्र महतो के नेतृत्व में पूरी ओडिशा इकाई आजसू में मर्ज हो गयी। इसके साथ ही ओडिशा के सुंदरगढ़ जिला के कई दिग्गज नेताओं ने आज वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में आजसू का दामन थामा। आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि सुंदरगढ़ जिला के लहसिनपारा से मिलन चंद्र महतो, बिसरा से ध्रुव चंद्र महतो एवं निशामनी महतो, तोआंगर पाली से मणि दयाल खलखो, लहसिंपारा से निरंजन होरो, ब्रह्मणितरंग राउरकेला से रामाकांत बेहरा, रवि सिंह, क्योंझर से कुशेश्वर महतो सहित सैकड़ों नेताओं एवं भारतीय मित्र पार्टी के सभी पदाधिकारी, नेता और कार्यकर्ता ने आजसू का दामन थामा। आजसू पार्टी में शामिल होते हुए मिलन चंद्र महतो ने कहा कि आजसू पार्टी के नीति-सिद्धांतों तथा केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो के कुशल नेतृत्व तथा कार्यक्षमता से प्रभावित होकर उन्होंने ओडिशा इकाई को मर्ज करने का निर्णय लिया। साथ ही उन्होंने कहा कि आपसी सामंजस्य बनाकर हम ओडिशा में आजसू पार्टी को नए मुकाम पर ले जाने को द्दढसंकल्पित हैं। आजसू पार्टी ही एकमात्र पार्टी है, जिसे जनता की जरुरतों की समझ है, लोगों के दु:ख-दर्द का एहसास है। संघर्ष से उपजी हुई पार्टी ही जनता का असल नेतृत्व कर सकती है। आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने सभी का आजसू पार्टी परिवार में स्वागत करते हुए कहा कि संघर्षशील एवं लोकप्रिय नेताओं एवं उनके हज़ारों समर्थकों के पार्टी में शामिल होने से सामाजिक न्याय आंदोलन को और बल मिलेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आजसू पार्टी ओडिशा पंचायत चुनाव में अपने प्रत्याशी देगी। आजसू पार्टी अपने मुद्दों पर ओडिशा पंचायत चुनाव में जाएगी और उन मुद्दों को लेकर जनता को गोलबंद करेगी। मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़ और जाजपुर जिला में पिछड़ों की आबादी भी बहुत बड़ी है, लेकिन उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। झारखंड आंदोलन में इस क्षेत्र के लोगों की भूमिका अतुल्य रही है। आजसू पार्टी वृहत झारखंड एवं झारखण्डी मानसिकता वाले इन क्षेत्रों की जनता को वैचारिक रुप से एकजुट करते हुए, जनमत संग्रह करेगी। सभी का परिचय, स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन आजसू पार्टी बुद्धिजीवी मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष मुकुंद चंद्र मेहता ने की।
एबीएन डेस्क। आज देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। आज कोरोना वायरस जैसी महामारी के खिलाफ वैक्सीनेशन का साल पूरा हो रहा है। आज के दिन 16 जनवरी 2021 को देश में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाए जाने की शुरूआत हुई थी, उसके बाद से कोरोना टीके दिए जाने का सिलसिला जारी है। अबतक देश में वैक्सीन की 157 करोड़ डोज़ लगाई जा चुकी हैं, लेकिन पूरी आबादी को टीका लगाने का लक्ष्य अब भी दूर है। बता दें, एक साल पहले 138 करोड़ की आबादी को वैक्सीन दिया जाना आसान नहीं था। आज जब कोरोना की तीसरी लहर फैली हुई है, उसमें टीकाकरण गंभीर बीमारी को रोकने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। बड़ी बात यह है कि देश में 8 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसे अब तक एक भी टीका नहीं लगा। वहीं, 31 फीसदी आबादी ऐसी है, जिन्हों अब तक दोनों टीके नहीं लगे। इसी सिलसिले में केंद्र सरकार कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण अभियान के एक साल पूरे होने पर एक डाक टिकट जारी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। देश में रविवार को टीकाकरण अभियान का एक वर्ष पूरा करने जा रहा है। यह पिछले साल 16 जनवरी से शुरू हुआ था। इस अवसर को चिह्नित करने के लिए एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगाभारत रविवार को राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान की पहली वर्षगांठ मनाएगा, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता वैक्सीन की बुस्टर खुराक प्राप्त करने के लिए पहली कतार में होंगे। टीकाकरण अभियान को बाद में वरिष्ठ नागरिकों और कॉमरेडिटी वाले लोगों के लिए विस्तार दिया गया था। इस समय 15 से 18 साल उम्र के बच्चों का भी टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और साठ साल उम्र से अधिक व्यक्तियों को एहतियाती खुराक देने का अभियान 10 जनवरी से शुरू हुआ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया डाक टिकट जारी करेंगे और वर्चुअल तौर पर कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। केंद्रीय संचार राज्यमंत्री देवूसिंह चौहान भी भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ कृष्णा एला के साथ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस बीच, भारत का कोविड-19 टीकाकरण कवरेज 156 करोड़ मील का पत्थर पार कर गया है। शनिवार को शाम 7 बजे तक 57 लाख से ज्यादा वैक्सीन खुराक दी जा चुकी थीं। कोविड टीकाकरण के लिए चिन्हित श्रेणियों के लाभार्थियों को अब तक 42 लाख से अधिक एहतियाती खुराक दी जा चुकी हैं। इस बीच, 3 जनवरी को 15 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत के बाद से उस आयुवर्ग के लगभग 40 प्रतिशत व्यक्तियों को भी टीके की पहली खुराक मिली है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस समूह के कुल 3,36,09,191 किशोरों का टीकाकरण किया जा चुका है।
एबीएन डेस्क। तीन महीने बाद दुनिया के छह देशों में ओमिक्रॉन स्वरूप के संक्रमण में यूटर्न देखने को मिलने लगा है। हालांकि भारत में अभी ऐसी स्थिति दिखाई नहीं दी है। जिन देशों में गिरावट दिख रही है उनमें यूके, कनाडा, इटली,आयरलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड शामिल हैं। इन देशों में संक्रमण प्रसार का ग्राफ अब नीचे की ओर बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी यूटर्न आना बाकी है। चूंकि दूसरे देशों में करीब एक महीने से भी अधिक समय पहले से ओमिक्रॉन के मामले मिलने शुरू हुए थे। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर का पीक भारत में अगले कुछ सप्ताह में ही स्पष्ट हो पाएगा। आंकड़ों के अनुसार देश में अभी कोरोना की तीसरी लहर चल रही है, जिसमें दैनिक संक्रमण दर 16 फीसदी पार चली गई है और साप्ताहिक संक्रमण भी 13 फीसदी पर आई है। बीते तीन दिन से देश में रोजाना दो लाख से अधिक मामले मिल रहे हैं। वहीं सात से 15 जनवरी के बीच देश में 17.50 लाख से भी ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। पांच फीसदी मरीज हो रहे अस्पतालों में भर्ती : प्रो. रिजो बताया कि भारत में अभी पांच फीसदी से भी कम मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ रही है। हालांकि एक आशंका यह भी कि अगले कुछ दिन में यह दर पांच से 10 फीसदी हो सकती है। कोरोना और बढ़ने की आशंका : विशेषज्ञ प्रो. रिजो का मानना है कि जहां ओमिक्रॉन की वजह से संक्रमण की नई लहर बीती लहर से ज्यादा असरदार दिखाई दी है। ऐसे में अगर भारत में दूसरी लहर से तुलना करें तो अभी कोरोना का प्रसार और अधिक होने की आशंका है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन में जब पहली बार ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता चला तब वहां करीब छह फीसदी मरीज भर्ती हो रहे थे। कई गुना बढ़ी सक्रिय मरीजों की संख्या ; स्वास्थ्य मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट के अनुसार बीते 12 जनवरी तक कई राज्यों में पिछले हफ्ते की तुलना में सक्रिय केस की संख्या कई गुना तक बढ़ गई। उत्तर प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मामले 14 गुना 3,173 से बढ़कर 44,466 तक पहुंच गए हैं। जबकि पंजाब में 8.65, मध्य प्रदेश में 10.95 और बिहार में 11.27 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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