लएबीएन डेस्क। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं पद्मश्री से सम्मानित शांति देवी का ओडिशा के रायगढ़ा में निधन हो गया। उनके परिवार के सदस्यों ने सोमवार को यह जानकारी दी। वह 88 वर्ष की थीं। परिवार के सदस्यों के मुताबिक शांति देवी ने रविवार की रात सीने में दर्द की शिकायत की और उसके कुछ ही देर बाद गुनुपुर स्थित अपने आश्रम में अचेत हो गईं। इसके बाद उन्हें रायगढ़ा स्थित जिला अस्पताल ले जा गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उनके निधन पर शोक जताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें गरीबों और वंचितों की आवाज के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, शांति देवी जी को गरीबों और वंचितों की आवाज के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने निस्वार्थ भाव से लोगों का दुख दूर करने और एक स्वस्थ व न्यायसंगत समाज के निर्माण के लिए काम किया। उनके निधन से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। टनायक ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया, सामाजिक कार्यकर्ता और पद्मश्री से सम्मानित शांति देवी के निधन से दुखी हूं। वंचितों के उत्थान के लिए जीवनपर्यंत उन्होंने जो प्रयास किए, वह हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे। समाज सेवा में उनका योगदान अतुलनीय रहा। मैं दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें 25 जनवरी 2021 को पद्मश्री से सम्मानित किया था।
एबीएन डेस्क। प्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज का निधन हो गया। वे 83 साल के थे। उनके परिवार के लोगों ने यह जानकारी दी। बिरजू महाराज का असली नाम बृजमोहन मिश्रा था। उनका जन्म 4 फरवरी 1938 को लखनऊ में हुआ था। जानकारी के मुताबिक मशहूर कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ। बता दें, पद्म विभूषण से सम्मानित 83 साल के बिरजू महाराज ने रविवार और सोमवार की दरमियानी रात अंतिम सांस ली। उनके पोते स्वरांश मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बारे में जानकारी दी। गायक अदनान सामी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। गायक अदनान सामी ने सोशल मीडिया पर लिखा- महान कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज जी के निधन की खबर से बहुत ज्यादा दुखी हूं। आज हमने कला के क्षेत्र का एक अनोखा संस्थान खो दिया। उन्होंने अपनी प्रतिभा से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है।
एबीएन डेस्क। देश में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए सरकार समय-समय पर नई योजनाएं लाती रहती है। इन योजनाओं की मदद से असमर्थ लोग आपनी मूल जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इसी क्रम में सरकार ने एक और योजना लागू की है। इसका नाम प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके द्वारा गरीब और मजदूरी करने वाली महिलाओं को मदद पहुंचाई जाती है। गर्भवती महिलाओं को एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए चिकित्सक के सलाह की जरूरत होती है, लेकिन ये हर महिला के लिए आर्थिक तंगी होने के कारण संभव नहीं हो पाता है। इसलिए सरकार ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक सुविधाएं दे रही है। इस योजना के तहत कोई भी महिला गर्भावस्था के दौरान मुफ्त इलाज करवा सकती हैं। अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। आपको इसके लिए बस अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सबसे पहले आपको जानकारी होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना क्या है? दरअसल, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा चलाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2016 में गई थी। इस योजना के तहत कोई भी गर्भवती महिला अपने पूरे गर्भावस्था के दौरान मुफ्त में जांच करवा सकती है। गर्भवती महिलाएं अपने घर के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में अपनी डिलीवरी तक हर महीने की 9 तारीख तक फ्री में जांच और इलाज करवा सकती हैं। इसके साथ ही इस योजना में डिलीवरी में परेशानी होने पर भी फ्री में इलाज की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMKY) के तहत अभी पांच हजार तक के इलाज को मुक्त किया गया है। इसके साथ ही इन महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा अस्पताल में ही डिलीवरी कराने की सलाह दी जाती है, जिससे इस दौरान कोई भी परेशानी न हो। वहीं इस योजना के तहत डिलीवरी के समय महिला का ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन जांच, यूरिन टेस्ट व अल्ट्रासाउंड भी फ्री में किया जाता है। इसके अलावा डिलीवरी में परेशानी होने पर महिलाओं को उच्च चिकित्सा केन्द्रों में भी रेफर किया जाता है।
एबीएन डेस्क। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन आयोजित होने जा रहे पांच दिवसीय दावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के हालात विषय पर विशेष संबोधन देंगे। दावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन का आयोजन लगातार दूसरी साल डिजिटल तरीके से हो रहा है। शिखर सम्मलेन की शुरुआत सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संबोधन के साथ होगी। इसके बाद दो वर्चुअल सत्र होंगे जिनमें पहला कोविड-19 पर और दूसरा चौथी औद्योगिक क्रांति में प्रौद्योगिकी सहयोग पर होगा। पीएम मोदी का विशेष संबोधन सोमवार को रात 8.30 बजे से शुरू होगा। उनके बाद संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इजराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और जापान के प्रधानमंत्री किशिदा फुमियो का संबोधन मंगलवार को होगा। कार्यक्रम की घोषणा करते हुए डब्ल्यूईएफ ने कहा कि दावोस एजेंडा 2022 ऐसा पहला वैश्विक मंच होगा जहां विश्वभर के महत्वपूर्ण नेता 2022 के लिए अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे। इस कार्यक्रम का विषय विश्व के हालात है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की जेलों में कुल 99 कैदी और 88 कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। जेल अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 14 जनवरी तक 99 कैदी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। इनमें से 17 कैदी संक्रमण से उबर चुके हैं और 82 का इलाज चल रहा है। संक्रमित पाए गए 88 कर्मचारियों में से 14 संक्रमण से उबर चुके है और 74 का इलाज चल रहा है। दिल्ली के कारागार विभाग के तहत तीन प्रमुख जेलें तिहाड़, रोहिणी और मंडोली आती हैं। महानिदेशक (दिल्ली कारागार) संदीप गोयल ने कहा, अब तक कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। ज्यादातर रोगियों का इलाज हमारी जेल के चिकित्सक कर रहे हैं।
एबीएन डेस्क। मुंबई में कोरोना ग्राफ धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है। बीते दिनों में यहां कोरोना के केस 20 हजार के ऊपर रिकॉर्ड किए जा रहे थे। वहीं, अब सक्रंमण के मामले 10 हजार के नीचे दर्ज किए गए हैं। मुंबई में आज कोरोना वायरस के 7,895 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान कोरना से यहां 11 लोगों की मौत हुई है। राज्य में इस समय 60,371 लोगों का उपचार किया जा रहा है। मुंबई में कोरोना से अभी तक 16, 457 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। यहां रिकवरी दर 92 फीसदी है। ओवर ऑल ग्राउथ रेट की बात करें तो 9 जनवरी से 15 जनवरी के बीच 1.40 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
एबीएन डेस्क। विश्व बैंक के वैश्विक शिक्षा निदेशक जैमे सावेद्रा के अनुसार महामारी को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का अब कोई औचित्य नहीं है और भले ही नयी लहरें आएं स्कूलों को बंद करना अंतिम उपाय ही होना चाहिए। सावेद्रा की टीम शिक्षा क्षेत्र पर कोविड-19 के प्रभाव पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि स्कूलों को फिर से खोलने से कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि हुई है और स्कूल सुरक्षित स्थान नहीं हैं। सावेद्रा ने कहा कि लोक नीति के नजरिए से बच्चों के टीकाकरण तक इंतजार करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इसके पीछे कोई विज्ञान नहीं है। वाशिंगटन से पीटीआई को दिये गए साक्षात्कार में सावेद्रा ने कहा, स्कूल खोलने और कोरोना वायरस के प्रसार के बीच कोई संबंध नहीं है। दोनों को जोड़ने का कोई सबूत नहीं है और अब स्कूलों को बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है। भले ही कोविड-19 की नयी लहरें आएं, स्कूलों को बंद करना अंतिम उपाय ही होना चाहिए। उन्होंने कहा, रेस्तरां, बार और शॉपिंग मॉल को खुला रखने और स्कूलों को बंद रखने का कोई मतलब नहीं है। कोई बहाना नहीं हो सकता। विश्व बैंक के विभिन्न अध्ययन के अनुसार, अगर स्कूल खोले जाते हैं तो बच्चों के लिए स्वास्थ्य जोखिम कम होता है और बंद होने की लागत बहुत अधिक होती है। उन्होंने कहा, 2020 के दौरान हम नासमझी में कदम उठा रहे थे। हमें अभी भी यह नहीं पता कि महामारी से निपटने का सबसे अच्छा तरीका क्या है और दुनिया के अधिकतर देशों में तत्काल स्कूलों को बंद करने के कदम उठाए गए। तब से काफी समय बीत चुका है और 2020 और 2021 से कई लहरें आ चुकी हैं और ऐसे कई देश हैं, जिन्होंने स्कूल खोले हैं। सावेद्रा ने कहा, हम यह देखने में सक्षम हैं कि क्या स्कूलों के खुलने से वायरस के प्रसार पर प्रभाव पड़ा है और नए डेटा से पता चलता है कि ऐसा नहीं होता है। कई जगहों पर लहरें तब आई हैं, जब स्कूल बंद थे तो जाहिर है कि संक्रमण के मामलों में वृद्धि के पीछे स्कूलों की कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने कहा, भले ही बच्चे संक्रमित हो सकते हैं और ओमीक्रोन से यह और भी अधिक हो रहा है लेकिन बच्चों में मृत्यु और गंभीर बीमारी अत्यंत दुर्लभ है।
एबीएन डेस्क। दिल्ली में आगामी गणतंत्र दिवस परेड से स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर आधारित पश्चिम बंगाल की झांकी को बाहर करने के केंद्र के फैसले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हैरानी जताई है। उन्होंने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि राज्य के लोगों को इस कदम से पीड़ा होगी। बनर्जी ने यह भी कहा कि झांकी को खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया गया। ममता बनर्जी ने मोदी को लिखे दो पन्नों के पत्र में कहा,मैं भारत सरकार के आगामी गणतंत्र दिवस परेड से पश्चिम बंगाल सरकार की प्रस्तावित झांकी को अचानक बाहर करने के निर्णय से स्तब्ध और आहत हूं। यह हमारे लिए और भी चौंकाने वाली बात है कि झांकी को बिना कोई कारण या औचित्य बताए खारिज कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित झांकी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती वर्ष पर उनके और आजाद हिन्द फौज के योगदान की स्मृति में बनाई गई थी। बनर्जी ने पत्र में कहा, मैं आपको सूचित करना चाहती हूं कि पश्चिम बंगाल के लोग केंद्र सरकार के इस रवैये से बहुत आहत हैं। यह जानकर हैरानी होती है कि यहां के बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पर गणतंत्र दिवस समारोह में इस अवसर को मनाने के लिए कोई जगह नहीं मिली है। बनर्जी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, मैं आपसे इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पर गणतंत्र दिवस परेड में पश्चिम बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों की झांकी को शामिल कराने का आग्रह करती हूं।
एबीएन डेस्क। कोरोना टीकाकरण अभियान का एक साल पूरा होने के मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने रविवार को एक विशेष डाक टिकट जारी किया और उन लोगों को निशाने पर लिया जिन्होंने इस अभियान पर संदेह व्यक्त किया था। मंडाविया ने एक ट्वीट में लिखा, आज टीकाकरण अभियान के एक साल पूरा होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए, आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने मिलकर जो स्वदेशी कोवाक्सिन टीका विकसित किया है, उस पर डाक टिकट जारी किया गया है। मैं सभी वैज्ञानिकों को इस अवसर पर हार्दिक बधाई व धन्यवाद देता हूं। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर इस अभियान से जुड़े हर व्यक्ति को धन्यवाद कहा। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, जब यह वैश्विक महामारी पहली बार आई थी, तब वायरस के बारे में ज्यादा नहीं पता था। हालांकि, हमारे वैज्ञानिकों ने टीके विकसित करने के लिए खुद को झोंक दिया। उन्होंने कहा, भारत को इस बात पर गर्व है कि हमारे देश ने टीकों के माध्यम से वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ने में योगदान दिया। मैं टीकाकरण अभियान से जुड़े हर व्यक्ति को सलाम करता हूं। हमारे चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका असाधारण रही है।
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