एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने हाहाकार मचा रखा है। मौसम विभाग के येलो अलर्ट के बीच प्रदेश में भारी बारिश हुई है। सैकड़ों सड़कें ठप हो गई हैं। बादल फटने व जगह-जगह भूस्खलन में दबने से 11 लोगों की मौत हो गई है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आंशका है। प्रदेश के कांगड़ा जिले में भारी बारिश से आई बाढ़ के चलते रेलवे का चक्की पुल शनिवार को बह गया है। कांगड़ा के एडीएम रोहित राठौर ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि पुल में दरारें आने के कारण डेढ़ हफ्ता पहले रेल सेवा बंद कर दी थी। डीहार पंचायत के डोल गदयाडा गां में बैजनाथ-सरकाघाट सड़क भी बह गई है। अलग-अलग घटनाओं में 11 की मौत : आपको बता दें कि चंबा जिले में दंपती और उनके बेटे की मौत हो गई है। कांगड़ा के भनाला की गोरडा (शाहपुर) में एक मकान गिरने से 12 साल के बच्चे की जान चली गई। जबकि मंडी के सराज, गोहर और द्रंग में बादल फटने की घटनाओं सात की मौत हो गई है। जबकि 15 से 20 लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रधान और प्रधान की पत्नी के शव भी बरामद हो गए हैं। तीनों एनएच मंडी पठानकोट, मंडी कुल्लू और मंडी जालंधर वाया धर्मपुर बंद हो गए हैं। इसके अलावा, कांगड़ा जिले में भूस्खलन से बगली स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गया है। कांगड़ा जिले के भनाला की गोरडा (शाहपुर) में एक मकान गिर गया, जिसकी जद में आने से 12 साल के बच्चे की जान चली गई। चंबा में मलबे में दबने से दंपती और बेटे की मौत हो गई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। इसके बाद से सोनिया गांधी पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही हैं। राहुल गांधी फिर से पार्टी अध्यक्ष पद की कुर्सी संभालने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। चुनावी दौर में भी कांग्रेस का अगला प्रमुख कौन होगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं और पार्टी ऊहापोह की स्थिति में है। दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद से सोनिया गांधी पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन अब सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं की राय है कि 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए राहुल गांधी को अध्यक्ष पद संभालना चाहिए, हालांकि राहुल गांधी की तरफ से इस पर का इंतजार है। एनडीटीवी ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि राहुल गांधी को इस बात के लिए काफी प्रेरित किया गया कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद की भूमिका स्वीकार कर लें, लेकिन कोई भी कोशिश सफल नहीं हो सकी। 2019 के आम चुनाव में हार के बाद इस्तीफा देने के बाद से पार्टी सदस्यों की अपील को ठुकराते हुए, राहुल अपनी अनिच्छा पर अडिग रहे हैं। सोनिया गांधी ने भी अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए फिर से पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी संभालने से इनकार कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि सोनियां गांधी के इस फैसले ने सभी का ध्यान अब प्रियंका गांधी वाड्रा पर केंद्रित कर दिया है क्योंकि 136 साल पुराने संगठन के अधिकांश सदस्य अभी भी यही चाहते हैं कि पार्टी की अगुवाई गांधी परिवार का ही कोई सदस्य करे, लेकिन इस साल के उत्तर प्रदेश चुनावों में प्रियंका का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा और यह कई लोगों के दिमाग में है। आम सहमति के अभाव में रविवार (21 अगस्त) से शुरू होने वाले कांग्रेस के अध्यक्ष चुनाव के कार्यक्रम पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अध्यक्ष पद को लेकर बने गतिरोध पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। कांग्रेस के दिग्गज नेता भक्त चरण दास ने एनडीटीवी से कहा, ह्यहां, उन्होंने (राहुल गांधी) कहा है कि उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन हम उन पर काम कर रहे हैं और उनसे पदभार संभालने का अनुरोध कर रहे हैं। उन्हें हमें बताना होगा कि अगर वे पद नहीं संभालेंगे, तो फिर इस कुर्सी पर कौन बैठेगा। हालांकि, राहुल गांधी केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अभियान का नेतृत्व करना जारी रखे हुए हैं। वह सितंबर में एक विशाल रैली को संबोधित करने के लिए तैयार हैं और कन्याकुमारी से ‘भारत जोड़ी यात्रा’ शुरू करेंगे। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, हां, हम एक रैली का आयोजन कर रहे हैं और राहुल गांधी उसका नेतृत्व करेंगे। हम पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर यकीन से कुछ नहीं कह सकते। कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ सालों से नेतृत्व संकट का सामना करती आ रही है और पार्टी की लगातार चुनावी हार के साथ ही हाई-प्रोफाइल नेताओं द्वारा बाहर निकलने के साथ हालात और भी खराब हो गए। मार्च में, सोनिया गांधी ने पार्टी की विधानसभा चुनाव हार पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाई थी, जहां उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के सामने अपने भाषण में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि, उन्हें चुनाव तक बने रहने के लिए राजी कर लिया गया था। इसके बाद मई में उदयपुर में हुई पार्टी की मेगा बैठक (कांग्रेस चिंतन शिविर) में कांग्रेस ने एक नए प्रमुख का चुनाव कराने के लिए एक समय-सीमा तय की और अपने असंतुष्टों के समूह (जी-23) द्वारा एक आमूल-चूल बदलाव के लिए बढ़ती मांगों को सिरे से खारिज कर दिया।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारत में बीते 24 घंटे में 13,272 मरीजों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने से देश में महामारी के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,43,27,890 पर पहुंच गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,01,166 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से 36 और मरीजों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या बढ़कर 5,27,289 हो गई है। इनमें केरल द्वारा पुनर्मिलान किए गए मौत के छह मामले शामिल हैं। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.23 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों की राष्ट्रीय दर 98.58 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 664 की कमी दर्ज की गई है। संक्रमण की दैनिक दर 4.21 प्रतिशत, जबकि साप्ताहिक दर 3.87 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस महामारी से उबरने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 4,36,99,435 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। वहीं, देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक 209.40 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं। गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के मामले चार करोड़ के पार हो गए थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में बीते 24 घंटे में जिन 30 और मरीजों ने जान गंवाई है, उनमें से पांच-पांच मरीजों की मौत महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल, तीन-तीन मरीजों की मौत छत्तीसगढ़, दिल्ली तथा कर्नाटक, दो-दो मरीजों की मौत बिहार, पंजाब और राजस्थान तथा एक-एक मरीज की मौत हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हुई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज अपने पिता राजीव गांधी की 78वीं जयंती के मौके पर उन्हें याद किया। राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी ने वीर भूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर राहुल-प्रियंका के साथ रॉबर्ट वाड्रा, सांसद केसी वेणुगोपाल और एलओपी मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे। राहुल गांधी ने इस मौके पर अपने पिता को याद करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट में राजीव गांधी की एक वीडियो को शेयरकर लिखा, पापा, आप हर पल मेरे साथ, मेरे दिल में हैं। मैं हमेशा प्रयास करूंगा कि देश के लिए जो सपना आपने देखा उसे पूरा कर सकूं। वहीं इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 78वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1984-89 के दौरान पद संभाला था। यह आखिरी बार था जब कांग्रेस को लोकसभा में बहुमत मिला था। 1991 में लिट्टे के आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। मोदी ने ट्वीट किया कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि...।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव पिछले कई दिनों से जिदंगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे है। हार्ट आटैक के चलते हाल ही में राजू श्रीवास्तव को इलाज दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था जहां दिन-ब-दिन उनकी हालत बिगड़ती गई और अब डाॅक्टरों का कहना है कि उनका ब्रेन डेड हो गया है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस भी उनकी जिंदगी के लिए दुआएं कर रहे है। इस बीच, राजू श्रीवास्तव की निधन की खबरें भी सोशल मीडिया पर खूब छाई हुई हैं जिस पर राजू के छोटे भाई दीपू श्रीवास्तव ने एक वीडियो संदेश जारी कर अफवाह फैलाने वाले यूजर्स को जमकर लताड़ा। उन्होंने राजू का हेल्थ अपडेट देते हुए उनके निधन की खबरों को सिरे से नकारा। दीपू श्रीवास्तव ने वीडियो शेयर कर कहा कि राजू श्रीवास्तव की निधन की खबरें सोशल मीडिया पर फैल रही हैं, जो महज अफवाह भर हैं। उनका बेहतरीन तरीके से इलाज किया जा रहा है, उनके जल्द ही ठीक होने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने राजू श्रीवास्तव के निधन की अफवाह फैलाने वाले लोगों को "बेशर्म" भी कहा। दीपू श्रीवास्तव ने बताया कि राजू ट्रीटमेंट के दौरान हरकत कर रहे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर जल्द ही खुशखबरी मिलेगी। बता दें कि राजू श्रीवास्तव की हालत अभी भी काफी नाजुक बनीं हुई है। उनका इलाज अभी भी एम्स के डॉक्टर्स कर रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में देर रात दर्शनों के दौरान उमड़ी भीड़ में 2 महिलाओं की मौत हो गई वहीं कई घायल हो गए। इस बीच कुछ चश्मदीदों ने पूरी घटना के बारे में बताया। घटना बांके बिहारी में उस वक्त हुई जब वहां कृष्ण जन्मोत्सव का जश्न चल रहा था और जब देर रात 1:55 पर कपाट खुले तो मगंला आरती के लिए लोगों ने भीड़ जुटानी शुरू कर दी जिससे भारी भगदड़ मच गई। मंदिर में घायल फरीदाबाद की एक महिला श्रद्धालु के पति ने बताया कि इन लोगों ने 5 नंबर के गेट से अंदर एंट्री की थी। उन्होंने बताया कि जो भी हादसा हुआ उसकी वजह अव्यवस्था है। उन्होंने बताया कि अगर भीड़ को एक गेट से एंट्री और दूसरे गेट से एग्जिट रखते तो ऐसा हादसा न होता। उन्होंने बताया कि अगर मंदिर परिसर में रेलिंग लगी होती तो यह हादसे की नौबत न आती। उन्होंने बताया कि अंदर किसी तरह से भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम नहीं थे, पुलिस भी मंदिर के मुख्य द्वारों पर ही तैनात थी। बता दें कि ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव का बड़ा आयोजन किया जाता है जहां बड़ी तदाद में भक्त दर्शनों के लिए उमड़ते है। इस बार भी जैसे ही 20 अगस्त को मंदिर के पट 1:45 खुले तो श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा इतना ही नहीं भीड़ इतनी थी कि एग्जिट गेट से भी एंट्री होने लगी, जिसके चलते लोगों को निकलने का रास्ता न मिला और दम घुटने से महिलाओं की मौत हो गई वहीं कई घायल हो गए। मंदिर में जब हादसा हुआ उस समय डीएम, एसएसपी, नगर आयुक्त सहित भारी पुलिस बल मौजूद था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को "जल जीवन मिशन" के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के अभियान को एक बड़ी सफलता करार दिया और कहा कि उनकी सरकार देश बनाने के प्रयासों के तहत वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का लगातार समाधान कर रही है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने वाला गोवा देश का पहला राज्य बना है। मौके पर यहां आयोजित "हर घर जल उत्सव" कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार बनाने के लिए उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती , जितनी कड़ी मेहनत देश बनाने के लिए करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, यह सबके प्रयास से होता है। हम सभी ने देश बनाने का रास्ता चुना है। इसलिए देश की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का हम लगातार समाधान कर रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन्हें देश की परवाह नहीं होती, उन्हें देश के वर्तमान या भविष्य से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा, ऐसे लोग पानी के लिए बड़ी-बड़ी बातें जरूर कर सकते हैं लेकिन कभी पानी के लिए एक बड़े दृष्टिकोण के साथ काम नहीं कर सकते। पीएम मोदी ने कहा, सरकार बनाने के लिए उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती, लेकिन देश बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होती है। हम सभी ने देश बनाने का रास्ता चुना है, इसलिए देश की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का लगातार समाधान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ तीन साल के भीतर जल जीवन मिशन के तहत सात करोड़ ग्रामीण परिवारों को पाइप के पानी की सुविधा से जोड़ा गया है जबकि आजादी के सात दशकों में देश के सिर्फ तीन करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास ही पाइप से पानी की सुविधा उपलब्ध थी। उन्होंने कहा, यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के 10 करोड़ ग्रामीण परिवार पाइप से स्वच्छ पानी की सुविधा से जुड़ चुके हैं। मोदी ने कहा कि जनभागीदारी, हितधारकों की साझेदारी, राजनीतिक इच्छाशक्ति और संसाधनों का पूरा इस्तेमाल "जल जीवन मिशन" की सफलता के चार मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा, यह, हर घर जल पहुंचाने की, सरकार के अभियान की एक बड़ी सफलता है। यह सबका प्रयास का एक बेहतरीन उदाहरण है। जल जीवन मिशन भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसकी घोषणा 15 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से की थी। इसका उद्देश्य 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता के पेयजल की आपूर्ति का प्रावधान करना है। यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में कार्यान्वित किया जाता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वन्दे भारत एक्सप्रेस वर्तमान में भारत की सबसे तेज ट्रेन है और अभी इसे सिर्फ दो रूट पर चलाया जा रहा है। अब रेलवे इसके तीसरे ट्रेन को लाने वाली है जिसकी टेस्टिंग शुरू कर दी गयी है और इसके लिए नई वन्दे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को चंडीगढ़ लाया गया है। इसकी टेस्टिंग 24 अगस्त से शुरू की जा सकती है और 110 किमी/घंटा की स्पीड पर टेस्ट किया जायेगा। वन्दे भारत एक्सप्रेस के इस ट्रेन को चंडीगढ़ नई मोरंडा-सानेवाल रेलवे सेक्शन में 100 किमी तक टेस्ट किया जायेगा। शुरुआत में इसे 15 किमी/घंटा की गति पर टेस्ट किया जायेगा और इसे 45 किमी/घंटा, 60 किमी/घंटा व 80 किमी/घंटा तक पहुंचाया जायेगा और अंततः इसे 110 किमी/घंटा की गति पर टेस्ट किया जायेगा। इसके बाद टेस्टिंग का दूसरा चरण 29 अगस्त को शुरू किया जायेगा। दूसरे चरण के ट्रायल को कोटा व नागदा रेलवे स्टेशन के बीच 225 किमी/घंटा के बीच किया जायेगा और इस दौरान इसकी अधिकतम गति 180 किमी/घंटा पर ट्रायल किया जायेगा। रेलवे के अनुसार, ट्रायल रन के पूरा होने के बाद इसकी रिपोर्ट को रेलवे सेफ्टी कमिश्नर को भेजी जायेगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद इसे नए रूट पर चलाया जायेगा। हालांकि अभी तक कौन से रूट पर चलाया जायेगा इसकी पुष्टि नहीं पायी है। सूत्रों के अनुसार इसे अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलाया जायेगा। इस टेस्टिंग प्रोसेस के दौरान 180 किमी/घंटा की स्पीड तक व कुल 15,000 किमी ट्रैक पर टेस्ट किया जायेगा और इसमें डायनामिक, स्टेटिक, लोड टेस्ट व ओसिलेशन ट्रायल किया जायेगा जो कि अलग-अलग स्थिति पर किया जायेगा इसका निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई में किया जायेगा और इसमें ऑटोमेटिक दरवाजें, आरामदेह स्पेस, रिक्लाइनिंग चेयर, दिव्यांग यात्रियों के अनुसार टायलेट दिया गया है। आने वाले समय में आईसीएफ इस तरह की और भी ट्रेन का निर्माण किया जायेगा। अगले चार वर्षों में ऐसे 475 ट्रेनों का निर्माण किया जाएगा ताकि सभी राज्यों को कवर किया जा सके। आईसीएफ के अलावा वन्दे भारत ट्रेन का निर्माण रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला व मॉडर्न कोच फैक्ट्री, राय बरेली में किया जायेगा। आईसीएफ प्रति महीने 7 वन्दे भारत ट्रेन की क्षमता रखता है। आगामी वर्षों में इस ट्रेन में बेहतर वेंटीलेशन व एयर कंडीशनिंग कंट्रोल दिया जायेगा, यह पहले लाये गये ट्रेन में उपलब्ध नहीं था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारी-भरकम बकाये का भुगतान नहीं करने की वजह से 13 राज्यों में बिजली संकट पैदा हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरशन लिमिटेड (पोसोको) ने तीन बिजली बाजारों इंडियन एनर्जी एक्सचेंज, पावर एक्सचेंज ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज से 13 राज्यों की 27 विद्युत वितरण कंपनियों के बिजली कारोबार को प्रतिबंधित करने को कहा है। इन वितरण कंपनियों पर बिजली उत्पादक कंपनियों का भारी-भरकम बकाया है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। बिजली मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला पोसोको देश में बिजली व्यवस्था के एकीकृत परिचालन का प्रबंधन करता है। उसने तीनों बिजली बाजारों को लिखे पत्र में कहा, 13 राज्यों में 27 वितरण कंपनियों के लिए बिजली बाजार के सभी उत्पादों की खरीद-बिक्री डिलीवरी 19 अगस्त, 2022 से अगली सूचना तक पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी।
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